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चैत्र नवरात्रि में उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर बनता है आस्था का महापर्व स्थल जहां पूरी होती हैं मन की हर मुराद

मध्य प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक नगर उज्जैन में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास का एक अद्भुत संगम भी माना जाता है चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर जाता है इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसका संबंध सम्राट विक्रमादित्य की आस्था और भक्ति से भी जुड़ा हुआ है हरसिद्धि माता मंदिर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से कुछ ही दूरी पर स्थित है और इसकी ऐतिहासिकता हजारों वर्षों पुरानी बताई जाती है मान्यता है कि माता सती की दाहिनी कोहनी यहां गिरी थी जिसके कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे मंगल चंडी शक्ति स्थल के रूप में जाना जाता है यहां माता को विशेष सिद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन होता है पहले दिन प्रातःकाल मंदिर के पट खोले जाते हैं और विधिवत पूजा की शुरुआत होती है शैलपुत्री माता की आराधना के साथ घट स्थापना की जाती है और इसके बाद नौ दिनों तक क्रमशः सभी नौ देवियों की पूजा की जाती है इस दौरान मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है और दूर दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं हरसिद्धि मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की विशाल दीपमाला है जिसे सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित किया गया माना जाता है इस दीपमाला में लगभग 51 फीट ऊंचे दो दीप स्तंभ हैं जिनमें एक साथ 1011 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं दीपों की यह ज्योति न केवल दृश्य रूप से आकर्षक होती है बल्कि इसे अत्यंत शुभ और पवित्र भी माना जाता है पहले यह दीपमाला केवल नवरात्रि के दौरान ही प्रज्वलित की जाती थी लेकिन अब श्रद्धालुओं की आस्था और बुकिंग के चलते इसे नियमित रूप से जलाया जाने लगा है भक्तों की मान्यता है कि संध्या आरती के समय जब दीपमाला प्रज्वलित होती है और भक्त माता के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं तो वह अवश्य पूर्ण होती है इसी विश्वास के कारण नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भारी भीड़ रहती है और श्रद्धालु विशेष रूप से दीप जलाने के लिए पहुंचते हैं सम्राट विक्रमादित्य को इस मंदिर का प्रमुख भक्त और संरक्षक माना जाता है कहा जाता है कि उन्होंने यहां माता की कठोर तपस्या की और माता ने उन्हें विशेष कृपा प्रदान की जिसके बाद वे महान और न्यायप्रिय शासक बने यह कथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है और उनकी आस्था को और भी मजबूत बनाती है नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर का हर कोना भक्ति के रंग में रंगा रहता है भजन कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण गूंजता रहता है और श्रद्धालु माता की कृपा पाने के लिए पूरे मन से पूजा अर्चना करते हैं हरसिद्धि माता का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है जहां हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है और उसे पूर्ण होने की आशा के साथ लौटता है

मिलावटी डेयरी मामले में जयश्री फूड्स के किशन मोदी की 11 संपत्तियां अटैच, 20 करोड़ की कार्रवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक किशन मोदी की 20.59 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ED ने अटैच कर दी है। ईडी ने “मिल्क मैजिक” ब्रांड से जुड़े मिलावटी डेयरी उत्पाद मामले में कार्रवाई करते हुए उनकी 11 अचल संपत्तियों को अटैच किया। न्यायिक हिरासत में किशन मोदी इस मामले में किशन मोदी मुख्य आरोपी हैं। पहले 13 मार्च 2026 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 18 मार्च तक रिमांड पर रहने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से किशन मोदी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले का विवरण किशन मोदी पर आरोप है कि उन्होंने दूध में पाम ऑयल और हानिकारक रसायनों मिलाकर मिलावटी डेयरी उत्पाद तैयार किए और निर्यात किया। “मिल्क मैजिक” ब्रांड के तहत काम करने वाली इस कंपनी पर फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट का इस्तेमाल कर बहरीन, हांगकांग, सिंगापुर, ओमान, कतर और UAE जैसे देशों में घटिया दूध और डेयरी उत्पाद भेजने का आरोप है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि प्रवर्तन निदेशालय और प्रशासन मिलावट और उपभोक्ता सुरक्षा के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है।

‘मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप’-Keki Mistry ने संभाली HDFC Bank की कमान, RBI की मंजूरी

नई दिल्ली।  देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank में अहम बदलाव देखने को मिला है। अनुभवी बैंकर केकी मिस्त्री को बैंक का अंतरिम अंतरिम डिपॉजिटरी नियुक्त किया गया है। Reserve Bank of India (RBI) ने उनकी नियुक्ति को 19 मार्च से तीन महीने की अवधि के लिए मंजूरी दे दी है। यह फैसला पूर्व डिपॉजिटरी अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद तेजी से लिया गया। ‘मूल्यों से समझौता नहीं’, मिस्त्री का स्पष्ट संदेशअपनी नियुक्ति के बाद केकी मिस्त्री ने कहा कि वे यह जिम्मेदारी केवल इसलिए स्वीकार करते हैं क्योंकि यह उनके व्यक्तिगत मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने साफ कहा कि यदि यह भूमिका उनके सिद्धांतों के खिलाफ होती, तो वह इसे कभी स्वीकार नहीं करते। 71 वर्षीय मिस्त्री का यह बयान बैंकिंग जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। तेजी से हुए फैसले, RBI का भरोसा निरंतरमिस्त्री ने बताया कि अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद घटना काफी तेजी से आगे बढ़ी। बोर्ड की तत्काल बैठक हुई और निदेशकों ने Reserve Bank of India से बैठक की। RBI द्वारा इतनी जल्दी मंज़ूरी मिलने की बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक को एचडीएफसी बैंक की फ़ाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्थिति पर पूरा भरोसा है। RBI ने भी साफ़ किया है कि बैंक के ऑपरेशन या गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है। बैंक की कैपिटल स्थिति मज़बूत है और मैनेजमेंट करने में सक्षम तरीकों से काम कर रहा है। बाज़ार में असर: नतीजों में गिरावटहालांकि इस वजह से बदलाव का असर शेयर बाज़ार पर देखने को मिला। HDFC Bank शेयर में गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखने जाने तक NSE पर शेयर करीब 3.77% घटकर 811.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि इंटर-डे में यह 8.40% से ज़्यादा गिरकर 770 रुपये तक पहुँच गया था। त्याग के पीछे ‘नैतिक मतभेद’अतनु चक्रवर्ती ने अपने त्याग में ‘व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मतभेदों’ को वजह बताया था। बैंक ने भी साफ़ किया कि उनके त्याग के पीछे कोई और वजह नहीं है। बोर्ड ने उनके योगदान की तारीफ़ करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। आगे की राह: स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौतीअब केकी मिस्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक की स्थिरता बनाए रखना और बैंकों का भरोसा कायम रखना होगा। तीन महीने के इस इंतज़ाम कार्यकाल में बैंक के गवर्नेंस और संचालन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

पावर सेक्टर में बड़ी उपलब्धि, भारत की क्षमता 520 GW पार; बिजली संकट हुआ कम

नई दिल्ली। भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता को जनवरी 2026 तक 520.51 गीगावाट तक पहुंचा दिया है। यह न सिर्फ देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूत करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां वित्त वर्ष 2014 में बिजली की कमी 4.2 प्रतिशत थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर महज 0.03 प्रतिशत रह गई है-जो ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार का संकेत है। रिकॉर्ड बढ़ोतरी: एक साल में 52 गीगावाट से ज्यादा की छलांगवित्त वर्ष 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान देश की ऊर्जा क्षमता में 52.53 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जो अब तक किसी एक वर्ष में सबसे ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल बढ़ोतरी में 39.65 गीगावाट हिस्सा रिन्यूएबल सेक्टर से आया, जिसमें सोलर ऊर्जा ने 34.95 गीगावाट और पवन ऊर्जा ने 4.61 गीगावाट का योगदान दिया। इससे पहले 2024-25 में 34.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई थी, यानी इस साल की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही। यह साफ दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल मंच पर भारत: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026ऊर्जा क्षेत्र में इन उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए Bharat Electricity Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली के Yashobhoomi Convention Centre में 19 से 22 मार्च के बीच किया जा रहा है। यह सम्मेलन पावर और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है। सिर्फ उत्पादन नहीं, ट्रांसमिशन नेटवर्क भी हुआ मजबूतसरकार ने केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। नए सबस्टेशन, अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर और हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए गए हैं, जिससे बिजली को उत्पादन केंद्र से उपभोक्ताओं तक तेजी और दक्षता से पहुंचाया जा सके। भारत का नेशनल पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर (CKM) से ज्यादा का हो चुका है, जबकि ट्रांसफॉरमेशन क्षमता 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) तक पहुंच गई है। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ी है और अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का बेहतर एकीकरण संभव हुआ है। भविष्य के लिए मजबूत नींवऊर्जा क्षेत्र में यह प्रगति सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर की गई है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, उद्योगों के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते चलन को देखते हुए यह क्षमता देश को लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी।

मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से

मैहर। मध्यप्रदेश के मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आस्था का रंग देखने लायक था। लगभग 600 फीट ऊंचे त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा और हर ओर “जय माता दी” के जयकारे गूंज रहे थे। श्रद्धालु 1060 सीढ़ियों और रोपवे से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और भक्ति व उत्साह का माहौल पूरे धाम में छाया रहा। मंदिर का पौराणिक महत्व माना जाता है कि मां शारदा देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सती का हार तांडव के दौरान यहीं गिरा था इसी कारण इस स्थान का नाम मैहर पड़ा। मंदिर के प्रधान पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा “मैं” को हरने वाली हैं अर्थात् हमारे अंदर जो अहंकार और अज्ञान होता है उसे हरने वाली माता हैं। आल्हा की परंपरा और पूजा विधि लोककथाओं के अनुसार वीर योद्धा आल्हा आज भी ब्रह्ममुहूर्त में माता की प्रथम पूजा करते हैं। कई बार ऐसे प्रमाण मिले हैं जब सुबह मंदिर के पट खोलने पर बत्ती जलती पाई गई या आसपास कभी दिखाई न देने वाले फूल मंदिर में पाए गए। पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा को नौ दिनों में अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है। जो भक्त मंदिर दर्शन के लिए नहीं आ पाते वे मां शारदा के नाम का जप करें और व्रत रखें मां की कृपा बनी रहेगी। सुरक्षा और सुविधाएं नवरात्रि मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। 600 से ज्यादा जवान जिनमें 40 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं 24 घंटे तैयार रहेंगे। इसके अलावा बम स्कॉट की टीमें सिविल ड्रेस में भी लगातार गश्त कर रही हैं। प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी रखी है जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल स्वास्थ्य और भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस प्रकार मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने माता शारदा देवी के दर्शन कर आस्था और भक्ति के साथ नव संवत्सर का स्वागत किया।

टेक्नोलॉजी की मार! HSBC में हजारों कर्मचारियों पर संकट, AI से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। दुनिया के बड़े बैंकों में शामिल HSBC अब अपने काम को तेज, सटीक और कम खर्चीला बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (उपयोग) का सहारा लेने जा रहा है। इसी रणनीति के तहत बैंक आने वाले सालों में कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कटौती पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से करीब 20,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो बैंक के कुल वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। हालांकि, अगर इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और चर्चा शुरुआती स्तर पर है। कौन सी नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं?जनक के अनुसार, दिशानिर्देशों का सबसे ज्यादा असर उन पदों पर पड़ेगा जो सीधे ग्राहकों से जुड़े नहीं हैं। यानी मिडिल और बैक-ऑफिस से जुड़े कार्य जैसे डेटा प्रोसेसिंग, रिपोर्टिंग और ऑपरेशनल सपोर्ट अब धीरे-धीरे मशीनों और ऑटोमेशन से बदले जा सकते हैं। बैंक यह भी विचार कर रहा है कि जिन पदों पर कर्मचारी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं, क्या उन्हें दोबारा भरा जाए या नहीं। CEO की रणनीति: कम लागत, ज़्यादा दक्षताजॉर्जेस एल्हेडरी के नेतृत्व में बैंक ने 2024 से ही बड़े लक्ष्यों की शुरुआत कर दी है। इसमें पहले ही हज़ारों कर्मचारियों की तैनाती, कुछ बिज़नेस यूनिट्स का विलय या बंद करना और लागत कम करने के उपाय शामिल हैं। 2025 के अंत तक बैंक में करीब 2.10 लाख कर्मचारी थे, लेकिन अब टेक्नोलॉजी के सहारे इस संख्या को कम करने की रणनीति बनाई जा रही है। ग्लोबल ट्रेंड: सिर्फ़ HSBC ही नहीं, पूरी इंडस्ट्री प्रभावितयह बदलाव सिर्फ़ एक बैंक तक सीमित नहीं है। पूरी ग्लोबल बैंकिंग इंडस्ट्री में आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन तेज़ी से जगह बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 3 से 5 सालों में वैश्विक के बैंक मिलकर करीब 2 लाख नौकरियां खत्म कर सकते हैं। तकनीकी क्षमताओं का बढ़ना है कि कुल वर्कफोर्स में औसत 3 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इस कड़ी में बड़ी टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म भी लागत नियंत्रण और आधुनिकीकरण इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर उन्नयन की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों में 20 प्रतिशत तक कटौती कर सकती है। कर्मचारियों के लिए चेतावनी या अवसर?दिशानिर्देशों के इस बढ़ते प्रभाव को केवल खतरे के रूप में नहीं देखा जा सकता। दिशानिर्देशों का असर है कि जहां कुछ पारंपरिक नौकरियां खत्म होंगी, वहीं नई तकनीकी और दिशानिर्देशों आधारित भूमिकाएं भी तेजी से पैदा होंगी। ऐसे में कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी स्किल्स को बढ़ाएं और क्रमिक टेक्नोलॉजी के साथ खुद को ढालें।

मध्यप्रदेश में नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित, प्रदेश की खुशहाली की कामना

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा की बधाई दी तथा प्रदेशवासियों के संकल्पों की सिद्धि हर आंगन में खुशहाली और प्रदेश की उन्नति की कामना की। सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 एवं गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर नमन किया और दिनचर्या की शुरुआत की। इस नए वर्ष में हम सभी के संकल्पों की सिद्धि हो हर आंगन में खुशहाली आए और प्रदेश उन्नति के नए सोपान गढ़े यही मंगलकामना है। अपने X अकाउंट पर उन्होंने नव संवत्सर पर यह भी लिखा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू नव वर्ष की आप सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं! नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 आपके जीवन में नव चेतना नव ऊर्जा और असीम समृद्धि लाए। इस पुण्यभूमि पर प्रगति परिश्रम व परोपकार की त्रिवेणी सदा बहती रहे और पूरा विश्व इससे अभिसिंचित होता रहे यही कामना है। जयतु भारतम्! सीएम ने चैत्र नवरात्रि की भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि पहले दिन यानी शैलपुत्री मां के दिन उनकी आशीर्वाद से सभी भक्तों के कष्ट दूर हों हर घर में सुख-शांति संपन्नता और आनंद का वास हो। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥ देवी मां दुर्गा जी की आराधना के महापर्व चैत्र नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं।  इस प्रकार मुख्यमंत्री ने नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के लिए खुशहाली समृद्धि और उन्नति की प्रार्थना की और सामाजिक-सांस्कृतिक आस्था को मजबूती दी।

ग्लोबल तनाव का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स लुढ़का और निवेशकों को बड़ा झटका

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई देने लगा है। लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे भारतीयों को तगड़ा झटका लगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने घरेलू बाजार की धार कमजोर कर दी। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत नीतियों में कोई बदलाव न करने से भी भारतीयों की धारणा प्रभावित हुई। सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, भारतीयों के डूबे लाखों करोड़कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 3.26 प्रतिशत यानी 2,496.89 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,207.24 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया। दिन के दौरान बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 73,950 के निचले स्तर तक फिसल गया। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर इक्विटी की कैपिटल पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहा। 438 लाख करोड़ से गिरकर लगभग 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट इक्विटी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई। हर सेक्टर लाल निशान में, ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावितगुरुवार का कारोबार लगभग सभी सेक्टर के लिए नुकसानदायक रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा 4.25% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, आईटी और मेटल सेक्टर में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहा। निफ्टी 50 के लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सिर्फ ONGC ने 1.55% की बढ़त के साथ बाजार में बढ़त दिखाई, जिसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा। क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? समझिए कारणबाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक अनिश्चितता कच्चे तेल की हालत में तेज उछाल फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती की धमकी विदेशी इंजीनियरों की बिकवाली विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आगे क्या? इंजीनियरों के लिए संकेतविशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में सावधानी गन्ने की जरूरत है। लंबी अवधि के इंजीनियरों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की हालत और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा

यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस, Ashwini Vaishnaw ने बताया QR कोड से रोकी जाएंगी अनधिकृत सेवाएं

नई दिल्ली।  ट्रेन यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित निर्देशिका सुविधा देने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि अनधिकृत वेंडिंग सेवाओं पर रोक लगाने के लिए अब QR कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू की जा रही है। इससे यात्रियों तक केवल सत्यापित (वेरिफाइड) विक्रेताओं की सेवाएं ही पहुंच पाएंगी। QR कोड ID से होगी विक्रेताओं की पहचानरेलवे ने ट्रेनों में काम करने वाले हर अधिकृत विक्रेता, सहायक और कर्मचारियों के लिए QR कोड वाले ID कार्ड अनिवार्य कर दिए हैं। इससे यात्रियों और अधिकारियों को तुरंत यह पता चल जाएगा कि कौन विक्रेता अधिकृत है और कौन नहीं। यह कदम सामानों पर फर्जी विक्रेताओं की समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है। डिजिटल ट्रैकिंग से सुधरेगी खाने की क्वालिटीअब रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले फूड पैकेट्स को भी डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाना कहां तैयार हुआ, कैसे पहुंचाया और उसकी क्वालिटी कैसी है। इससे विक्रेताओं और यात्रियों को सुरक्षित भोजन मिलेगा। बेस किचन में आधुनिक सुविधाएं और निगरानीखाने की क्वालिटी सुधारने के लिए रेलवे ने कई अहम कदम उठाए हैं आधुनिक बेस किचन की स्थापना CCTV कैमरों के ज़रिए निगरानी ब्रांडेड और पिज्जा कच्चे माल का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की सेवाएं इन उपायों से खाना बनाने की पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखी जा रही है। FSSAI सर्टिफिकेशन और सख्त जांचरेलवे ने सभी कैटरिंग यूनिट्स के लिए Food Safety and Standards Authority of India का प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही नियमित रूप से फूड सैंपल की जांच की जाती है, ताकि क्वालिटी और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। थर्ड-पार्टी ऑडिट और सर्वे से निगरानीपेंट्री कार और बेस किचन की सफाई और क्वालिटी जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा यात्रियों से फायदा लेने के लिए ग्राहक संतुष्टि सर्वे भी किए जा रहे हैं, जिससे सेवाओं में लगातार सुधार किया जा सके। कर्मचारियों को मिल रहा ट्रेनिंगबेहतर ग्राहक सेवा सुनिश्चित करने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन द्वारा निर्देशिका कर्मचारियों को नियमित ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे उनके कौशल में सुधार हो रहा है और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल रहा है। यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?इन सभी पैदल चलने वालों के बाद ट्रेन में मिलने वाला खाना अब ज्यादा सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद होगा। साथ ही फर्जी वेंडर्स की समस्या भी काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक स्टे

भोपाल। मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई तक स्टे रोक प्रदान किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश मल्होत्रा की पैरवी वरिष्ठ वकील एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने की। इससे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया था। हाईकोर्ट ने उन्हें 15 दिन का समय दिया था, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। बीते 9 मार्च को हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में क्रिमिनल केस छुपाने के आरोपों के चलते यह आदेश दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद, मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं कर पाएंगे, उन्हें मानदेय भी नहीं मिलेगा। हालांकि, वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। याचिका जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में सुनी गई। इस निर्णय से यह मामला फिलहाल स्थगित हुआ है और 23 जुलाई की अगली सुनवाई तक मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगी रहेगी।