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शिवपुरी में दो दर्दनाक मौतें: करंट लगने और जहरीला पदार्थ खाने से हड़कंप

नई दिल्ली । शिवपुरी के राजा की मुड़ेरी गांव में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। 65 वर्षीय डोंगर सिंह तोमर अपने घर के बाहर बैठे थे, तभी अचानक बिजली का तार टूटकर उन पर गिर गया। टूटे हुए तार में करंट प्रवाहित हो रहा था, जिससे बुजुर्ग गंभीर रूप से झुलस गए और मौके पर ही बेहोश हो गए। परिजन तुरंत उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद सिरसौद थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बिजली लाइन की स्थिति और रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं। जहरीली दवा खाने से दूसरी मौतइसी दिन दूसरी घटना शिवपुरी के सर्किट हाउस रोड क्षेत्र की है, जहां 50 वर्षीय सरवन पाल ने जहरीली दवा का सेवन कर लिया। परिजन उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सरवन पाल ने यह कदम किन कारणों से उठाया। पुलिस मामले को आत्महत्या के एंगल से भी जांच रही है। कोतवाली थाना पुलिस ने इस संबंध में भी मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच में जुटी, कारणों की तलाश जारीदोनों ही मामलों में पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करवा लिया है और जांच शुरू कर दी है।एक तरफ जहां बिजली हादसे में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जहरीले पदार्थ के सेवन का कारण अभी रहस्य बना हुआ है। शिवपुरी की ये दोनों घटनाएं क्षेत्र में शोक का माहौल छोड़ गई हैं। एक तरफ तकनीकी लापरवाही से हादसा, तो दूसरी तरफ संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

उज्जैन में बड़ा विवाद: यादव समाज से परिवार निष्कासित, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक

नई दिल्ली । उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यह पूरा विवाद एक शादी समारोह से शुरू हुआ। डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित कार्यक्रम में समाज की ओर से चंदा और धर्मशाला किराए को लेकर असहमति सामने आई। समाज द्वारा ₹5100 की बजाय ₹11,000 की राशि तय किए जाने पर वॉट्सऐप ग्रुप में चर्चा शुरू हुई। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने सुझाव दिया कि यदि किसी से गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर राशि वापस कर देनी चाहिए।  टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद, फोन पर गाली-गलौज का आरोपपीड़ित नरेंद्र यादव का आरोप है कि उनकी इस टिप्पणी के बाद कुछ लोगों ने नाराजगी जताई। इसके बाद समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें फोन कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की बात कही। नरेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने यह पूरी बात समाज के ग्रुप में भी साझा की, लेकिन किसी सदस्य ने उनका समर्थन नहीं किया।  सामाजिक बहिष्कार और निष्कासन का संदेशआरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष बैठक और बिना उनका पक्ष सुने ही समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद उनके परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।  प्रशासन तक पहुंचा मामला, पहले भी की गई शिकायतनरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले भी एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।बाद में समाज की बैठक जरूर हुई, लेकिन उसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया। बैठक में केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को समाप्त मान लिया गया। न्याय की मांग और गंभीर आरोपपीड़ित का आरोप है कि धर्मशाला किराए और चंदे में कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।  धर्म परिवर्तन की चेतावनी से बढ़ा मामलानरेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और समाज में उनका सम्मान वापस नहीं किया गया, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने और अदालत जाने पर विचार करेंगे।  प्रशासन की प्रतिक्रियाजिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत को जांच में ले लिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह मामला सामाजिक संगठनों में आंतरिक विवाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते तनाव और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। प्रशासन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

करियर में नहीं होता कोई दबाव: पलक तिवारी बोलीं- मां श्वेता तिवारी हमेशा दिल की सुनने की सलाह देती हैं

नई दिल्ली । बॉलीवुड और डिजिटल एंटरटेनमेंट की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बना रहीं पलक तिवारी इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उनकी चर्चा केवल प्रोफेशनल लाइफ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और खासकर अपनी मां श्वेता तिवारी के साथ रिश्ते को लेकर भी खुलकर बात की है। पलक ने बताया कि उनकी मां ने कभी भी उनके करियर को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आजादी दी है। उनके अनुसार, एक कलाकार का सफर व्यक्तिगत होता है और हर इंसान अपनी सोच और अनुभवों के आधार पर अपने लिए रास्ता चुनता है। उन्होंने कहा कि उनकी और उनकी मां की पीढ़ी और अनुभव पूरी तरह अलग हैं। जिस दौर में उनकी मां ने इंडस्ट्री में काम किया, वह आज के समय से काफी अलग था। इसलिए दोनों की सोच और काम को देखने का नजरिया भी अलग है। इसके बावजूद दोनों के बीच आपसी समझ और सम्मान हमेशा बना रहता है। पलक के मुताबिक, उनकी मां केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। वह उन्हें सुझाव जरूर देती हैं, लेकिन कभी किसी फैसले के लिए मजबूर नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी नए प्रोजेक्ट पर विचार करती हैं, तो उनकी मां केवल इतना पूछती हैं कि क्या वह काम उन्हें अंदर से सही महसूस हो रहा है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां का मानना है कि अभिनय केवल पेशा नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। अगर कलाकार किसी किरदार या कहानी से खुद को जोड़ नहीं पाता, तो उसका प्रदर्शन भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। यही वजह है कि उन्हें हमेशा अपने दिल की सुनने की सलाह दी जाती है। पलक ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में कदम रखना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि लोगों की उम्मीदें पहले से ही काफी ज्यादा थीं। लेकिन उन्होंने खुद की पहचान अलग तरीके से बनाने की कोशिश की और हर फैसले को अपनी समझ से लिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच बेहद जरूरी होती है। जब इंसान अपने फैसले खुद लेता है, तो वह अपनी सफलता और असफलता दोनों को बेहतर तरीके से समझ पाता है। यही सोच उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती है। मां-बेटी के इस रिश्ते की सबसे खास बात यही है कि इसमें भरोसा और स्वतंत्रता दोनों मौजूद हैं। पलक मानती हैं कि परिवार का समर्थन किसी भी कलाकार के लिए बहुत जरूरी होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपनी पहचान खुद बनाना। आज पलक तिवारी धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं और उनके विचार यह दिखाते हैं कि वह केवल स्टार किड की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम हासिल करना चाहती हैं।

छात्रा और अस्पताल अटेंडर ने की आत्महत्या, कारणों की तलाश में जुटी पुलिस

नई दिल्ली । अशोका गार्डन थाना क्षेत्र की ग्रीन पार्क कॉलोनी में 19 वर्षीय ख्याति जैन, जो बीए की छात्रा थी, ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि जब उसकी मां किसी काम से बाहर गई हुई थी, उसी दौरान उसने यह कदम उठाया। ब्लेड से काटी नसछात्रा ने ब्लेड से अपने हाथ की नस काट ली, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस जांच शुरूसूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। कमरे की तलाशी में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पुलिस ने मोबाइल जब्त कर जांच शुरू कर दी है। खजूरी सड़क में अस्पताल अटेंडर ने लगाई फांसी23 वर्षीय युवक ने दी जानखजूरी सड़क थाना क्षेत्र के भैंसाखेड़ी में 23 वर्षीय राकेश मेहरा, जो एक अस्पताल में अटेंडर के रूप में कार्यरत था, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घर में मिला शवपुलिस के अनुसार, राकेश ने सोमवार सुबह अपने घर में फांसी लगाई। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कारण अज्ञातमौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस की जांच जारी, कारणों की तलाशदोनों ही मामलों में पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। परिजनों के बयान और मोबाइल डेटा की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। भोपाल में सामने आई ये दोनों घटनाएं मानसिक तनाव और सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे।

भोपाल में दिल दहला देने वाली वारदात, बाइक विवाद में बीच-बचाव करने वाले युवक पर चाकू से हमला

नई दिल्ली । भोपाल के छोला मंदिर क्षेत्र में एक मामूली सड़क हादसा बड़ी हिंसक घटना में बदल गया। रविवार शाम करीब 7:30 बजे नितिन लोधी की बाइक एक नाबालिग से टकरा गई। इसी बात को लेकर मौके पर कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। नाबालिग के साथ आए दीपक ठाकुर और उसके साथियों ने नितिन से बहस शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख चचेरे भाई अजय लोधी मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराने की कोशिश की। बीच-बचाव करने पर दी धमकीअजय लोधी ने झगड़े को खत्म कराने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि इसी दौरान दीपक ठाकुर ने उसे धमकी दे दी। उस समय तो मामला शांत हो गया, लेकिन तनाव बना रहा। रात में फिर भड़का विवाद, मारपीट में बदला मामलाकुछ घंटों बाद दोनों पक्ष रासलाखेड़ी इलाके में फिर आमने-सामने आ गए। इस बार विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान दीपक ठाकुर और उसके साथियों ने मिलकर अजय लोधी पर हमला कर दिया।  चाकू से हमला, पेट में गंभीर चोटहमले के दौरान अजय के पेट में चाकू घोंप दिया गया। चोट इतनी गंभीर थी कि उसकी आंतें बाहर आ गईं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान मौत, परिवार में मातमअजय लोधी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने लगातार इलाज किया। हालांकि, मंगलवार तड़के उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार और इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है। पुलिस कार्रवाई: हत्या का केस दर्ज, दो गिरफ्तारशुरुआत में पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था, लेकिन मौत के बाद इसे हत्या में बदल दिया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी दीपक ठाकुर और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और पूछताछ की जा रही है। ग्वालियर की घटना ने भी बढ़ाई चिंताइसी तरह की एक और घटना में ग्वालियर में पुरानी रंजिश के चलते एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गई। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हमलावरों द्वारा लगातार लाठियां बरसाई जा रही हैं। भोपाल की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि छोटे विवाद कैसे जानलेवा रूप ले सकते हैं। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

समुद्री कारोबार में अदाणी ग्रुप की बड़ी तैयारी, अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ समझौते से बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली । Adani Ports and Special Economic Zone ने अपने समुद्री कारोबार को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की समुद्री क्षेत्र से जुड़ी सब्सिडियरी ने अमेरिका की एक प्रमुख इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अल्ट्रा-डीपवॉटर और सबसी ऑपरेशंस में विस्तार करना है, जिससे कंपनी की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी और तकनीकी क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी। इस साझेदारी के जरिए जटिल समुद्री परियोजनाओं में नई संभावनाएं तलाशने की तैयारी की जा रही है। इसमें अंडरवॉटर कंस्ट्रक्शन, पाइपलाइन इंस्टॉलेशन, निरीक्षण, रखरखाव और गहरे समुद्री क्षेत्रों में तकनीकी संचालन जैसी सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता कंपनी को यूरोप समेत कई नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद कर सकता है। कंपनी लंबे समय से अपने समुद्री और लॉजिस्टिक्स कारोबार को एक बड़े वैश्विक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी योजना के तहत आधुनिक तकनीक और हाई-स्पेसिफिकेशन जहाजों को अपने बेड़े में शामिल किया जा रहा है। हाल ही में कंपनी ने अपना पहला अल्ट्रा-डीपवॉटर जहाज भी शामिल किया है, जिसे अत्याधुनिक समुद्री तकनीकों से लैस बताया जा रहा है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह साझेदारी केवल एक कारोबारी विस्तार नहीं, बल्कि भविष्य की समुद्री जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। आधुनिक जहाजों और डीपवॉटर इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के मेल से कंपनी अब अधिक जटिल और बड़े ऑफशोर प्रोजेक्ट्स को संभालने की क्षमता विकसित कर रही है। बताया गया है कि नया जहाज गहरे समुद्री क्षेत्रों में काम करने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक सबसी सिस्टम लगाए गए हैं। इसके जरिए कंपनी कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी तकनीकी संचालन को बेहतर तरीके से अंजाम दे सकेगी। जहाज में भारी क्षमता वाली क्रेन, विशेष सपोर्ट सिस्टम और कर्मचारियों के लिए आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे लंबे समय तक समुद्र में संचालन आसान हो सकेगा। विशेषज्ञ इस साझेदारी को भारत के समुद्री और ऑफशोर सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर डीपवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय कंपनियों का इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार करना देश की समुद्री क्षमता को नई पहचान दिला सकता है। कंपनी ने आने वाले वर्षों के लिए बड़े लक्ष्य भी तय किए हैं। इसके तहत जहाजों के बेड़े का विस्तार, समुद्री कारोबार से राजस्व बढ़ाना और बड़े स्तर पर पूंजी निवेश शामिल है। माना जा रहा है कि यह रणनीति कंपनी को केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उसे वैश्विक समुद्री कारोबार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।

फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया “सोना न खरीदने” जैसी अपील के बाद सोशल मीडिया पर एक पुराना राजनीतिक दावा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक कथित 1967 की अखबार कटिंग शेयर की जा रही है। इस दावे के जरिए कहा जा रहा है कि इंदिरा गांधी ने भी आर्थिक संकट के दौरान लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी, लेकिन जांच में यह दावा फर्जी पाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कथित “द हिंदू” अखबार की कटिंग 6 जून 1967 की बताई जा रही है, जिसमें इंदिरा गांधी के नाम से “सोना न खरीदने” की अपील का दावा किया गया है। लेकिन खुद अखबार “द हिंदू” ने इस कटिंग को पूरी तरह फर्जी और डिजिटल रूप से एडिटेड बताया है और स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई पेज उनके आर्काइव में मौजूद नहीं है। अखबार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। तथ्य यह है कि 1960 के दशक में भारत विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक दबाव से गुजर रहा था, लेकिन उस समय सोना खरीदने पर ऐसी कोई राष्ट्रीय स्तर की औपचारिक रोक या सार्वजनिक अपील नहीं की गई थी। इस विवाद के बीच बीजेपी नेताओं द्वारा भी इस कथित कटिंग को शेयर किए जाने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस दावे का हवाला देते हुए पीएम मोदी की अपील का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि आज की आर्थिक अपील को ऐतिहासिक रूप से गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि अतीत में भी आर्थिक अनुशासन की बातें होती रही हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैक्ट-चेक और राजनीतिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

The Gold Story: सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल

  The Gold Story:नई दिल्ली । देश में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संसाधनों के सीमित उपयोग और सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर की गई अपील के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बयान के बाद जहां विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक स्थिति और नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी इसे लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है। प्रधानमंत्री द्वारा लगातार दो दिनों तक पेट्रोल-डीजल के सीमित इस्तेमाल और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील को कई लोग एहतियाती कदम मान रहे हैं, लेकिन व्यापारिक वर्ग का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक अपीलों का सीधा असर बाजार की गतिविधियों और लोगों की खरीदारी की मानसिकता पर पड़ता है। खासकर ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि सोना-चांदी की खरीद को लेकर पैदा हुई आशंका बाजार में मंदी ला सकती है। राजनीतिक मोर्चे पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही हो, तो सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच अचानक इस तरह की अपीलें आने से असमंजस की स्थिति पैदा होती है और इसका असर आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों पर भी पड़ता है। STOCK MARKET TODAY: शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा वहीं, सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के रुख पर नाराज़गी जाहिर की है। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि देशभर में लाखों परिवार इस उद्योग पर निर्भर हैं और यदि बाजार में खरीदारी कम होती है, तो इसका असर सीधे रोजगार और छोटे कारोबारियों की आय पर पड़ेगा। उनका मानना है कि किसी भी बड़े फैसले या सार्वजनिक संदेश से पहले उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी। व्यापारियों का यह भी कहना है कि ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों में सोना-चांदी की खरीदारी लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रही है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता बाजार की गति को प्रभावित कर सकती है। इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि यदि जनता से बार-बार त्याग और खर्च कम करने की अपील की जा रही है, तो यह देश की आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है। विपक्ष ने इसे आम लोगों पर मानसिक दबाव बनाने वाला कदम बताया है। Pakistan Russia Relations: रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते हालांकि, सरकार की ओर से इन तमाम आशंकाओं को खारिज किया गया है। केंद्रीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि नागरिकों से केवल संसाधनों के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की गई है, ताकि ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके। फिलहाल, इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारिक जगत में भी नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर आगे क्या रुख अपनाती है और बाजार में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

मंगलवार व्रत के नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा हनुमान जी का आशीर्वाद

नई दिल्ली।  मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है। इस दिन भक्त व्रत रखकर बजरंगबली की पूजा करते हैं और जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में शक्ति, साहस और सफलता लाता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि व्रत में नियमों का पालन न किया जाए तो उसका पूरा फल नष्ट भी हो सकता है।  व्रत की सही विधि क्या है?व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान से होती है। इसके बाद साफ लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। फिर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाया जाता है। उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और पान के पत्तों की माला अर्पित की जाती है। भोग के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी चढ़ाना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जप और मंगलवार व्रत कथा का पाठ करना जरूरी होता है।  मंगलवार व्रत में जरूर बचें इन गलतियों सेधार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ नियमों का पालन न करने से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है:– व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया हैप्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिएमानसिक और शारीरिक पवित्रता बनाए रखना जरूरी हैव्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया हैदिनभर निराहार रहकर संयम रखना चाहिए शाम की पूजा के बाद ही गेहूं और गुड़ से बना सादा भोजन करना उचित माना जाता है, उसमें भी नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। आस्था और संयम का प्रतीक है मंगलवार व्रतमंगलवार व्रत केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त पूरी निष्ठा और नियमों के साथ हनुमान जी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से भय, संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।

Celina Jaitly Divorce Case: सेलिना जेटली की दर्दभरी कहानी: बेटे की मौत, रिश्तों में तनाव और अब बच्चों के लिए कानूनी लड़ाई

 Celina Jaitly Divorce Case: नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Celina Jaitly एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। फिल्मों से लंबे समय से दूर रहने वाली सेलिना इन दिनों अपने वैवाहिक विवाद, बच्चों की कस्टडी और निजी संघर्षों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में उन्होंने अपने पति पीटर हाग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और कानूनी लड़ाई शुरू की है। सेलिना ने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि बीते कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार कई निजी दुख झेले हैं। उन्होंने अपने बेटे शमशेर को जन्म के कुछ समय बाद ही खो दिया था। बच्चे को एक दुर्लभ हृदय संबंधी बीमारी थी, जिसके इलाज के लिए उन्होंने कई विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ली, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वह अपने बेटे को बचा नहीं सकीं। इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। बेटे की मौत के कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया था। लगातार हुए इन पारिवारिक हादसों ने उनके जीवन को गहरे दुख में डाल दिया। इसके बाद उनकी मां का निधन भी हो गया, जिससे सेलिना पूरी तरह अकेली और भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करने लगीं। TAMIL NEW MOVIE: साउथ सिनेमा में बढ़ा उत्साह, दशकों बाद साथ दिखेंगे रजनीकांत-कमल हासन, तृषा भी बन सकती हैं हिस्सा इसी बीच उनके वैवाहिक रिश्ते में भी तनाव बढ़ता गया। सेलिना ने आरोप लगाया कि शादी के दौरान उन्हें मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर उन्हें अपमानित किया गया और रिश्ते में लगातार तनाव बना रहा। उनके अनुसार, हालात इतने खराब हो गए थे कि उन्हें अपना घर छोड़कर भारत लौटना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं, जहां उन्हें अपने बच्चों से दूर रहना पड़ा। अब वह अपने बच्चों की कस्टडी और उनसे मिलने के अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। सेलिना का कहना है कि एक मां के लिए अपने बच्चों से दूर रहना सबसे बड़ा दर्द होता है और यही संघर्ष इस समय उनकी जिंदगी का सबसे कठिन हिस्सा है। हाल ही में साझा किए गए एक भावुक वीडियो में सेलिना अपने दिवंगत बेटे शमशेर की कब्र के पास नजर आईं। वीडियो में वह बेटे की कब्र को साफ करते हुए भावुक दिखाई दीं। इस दृश्य ने उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया। कई लोगों ने उनके साहस और संघर्ष की सराहना की है। सेलिना ने यह भी कहा कि वह अब अपने अधिकारों और बच्चों के भविष्य के लिए मजबूती से खड़ी हैं। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने अपने जीवन में आए इस कठिन दौर को बेहद दर्दनाक बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह अपने बच्चों के लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया में है और इसकी जांच जारी है। वहीं, सेलिना जेटली की यह कहानी केवल एक अभिनेत्री के संघर्ष की नहीं, बल्कि एक मां के दर्द, टूटते रिश्तों और अपने बच्चों के लिए लड़ने के साहस की कहानी बन गई है।