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मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों पर्यटकों ने फिलहाल अपने प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने यात्रा टाल दी है। हजारों बुकिंग प्रभावित, कई यात्रियों ने नए प्लान ही नहीं बनाएट्रैवल कंपनियों के मुताबिक करीब 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले ही फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जिन पर सीधे असर पड़ा है। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने हालात को देखते हुए नई बुकिंग ही नहीं कराई या अपनी यात्रा संबंधी पूछताछ वापस ले ली। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ट्रैवल इंडस्ट्री में साफ तौर पर मंदी का संकेत दिखाई देने लगा है। करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावितमिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का होता है। अगर औसत 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड, क्रेडिट शेल या रीबुकिंग का विकल्प दे रही हैं, जिससे पूरा नुकसान नहीं माना जा रहा। भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा असरट्रैवल एजेंसियों के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से बुकिंग कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी प्रभाव है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह रुकी नहीं हैं बल्कि धीमी पड़ी हैं। क्रूज ट्रैवल में भी आई गिरावटवैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री क्रूज ट्रिप रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं। घरेलू पर्यटन की ओर बढ़ा रुझानअंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अब कई यात्री घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में हिमाचल, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थलों के लिए पूछताछ बढ़ी है। जो परिवार पहले दुबई या यूरोप की योजना बना रहे थे, वे अब भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाने के विकल्प तलाश रहे हैं। साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्पमिडिल ईस्ट के विकल्प के रूप में अब यात्रियों का रुझान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर भी बढ़ रहा है। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए इंक्वायरी बढ़ने लगी है। आसान वीजा प्रक्रिया और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल के कारण पर्यटक इन्हें बेहतर विकल्प मान रहे हैं। अगर तनाव लंबा चला तो और बढ़ सकता है असरट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर और बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों का भरोसा लौटेगा और पर्यटन बाजार फिर तेजी से उभर सकता है।

शेयर बाजार में शानदार रैली! सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली। मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई। सुबह करीब 11:45 बजे BSE Sensex 668 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,224 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 भी 198 अंक या 0.85 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,225 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह तेजी कई घरेलू और वैश्विक कारणों के चलते देखने को मिल रही है, जिनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों का सकारात्मक रुख प्रमुख हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजीलार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Midcap 100 Index 721 अंक यानी 1.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 56,892 पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 274 अंक या 1.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,406 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी हो रही है और निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहाराभारतीय बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है। Brent Crude की कीमत करीब 6 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में आई तेज गिरावट से ऊर्जा लागत कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिला है। ट्रंप के बयान से कम हुआ भू-राजनीतिक तनावकच्चे तेल में आई गिरावट के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का बयान भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि Iran के साथ चल रहा युद्ध समाप्त होने के करीब है। इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद बनी, जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई और इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ा। रुपये की मजबूती से बढ़ा निवेशकों का भरोसाशेयर बाजार में तेजी का एक कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा की मजबूती भी है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत दिखाई दिया। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये का उच्चतम स्तर 91.72 और न्यूनतम स्तर 92.33 रहा। मजबूत रुपये से आयात लागत कम होने की उम्मीद रहती है, जिससे बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनता है। इंडिया विक्स में गिरावट से घटा बाजार का डरबाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला India VIX भी मंगलवार को तेजी से नीचे आया। खबर लिखे जाने तक यह करीब 15.37 प्रतिशत गिरकर 19.77 पर पहुंच गया था। इंडिया विक्स में गिरावट का मतलब है कि बाजार में डर कम हो रहा है और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है, जो शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। वैश्विक बाजारों से भी मिला समर्थनवैश्विक बाजारों में तेजी का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। एशिया के प्रमुख बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite Index और Hang Seng Index बढ़त के साथ खुले। इसके अलावा सोल, बैंकॉक और जकार्ता के बाजारों में भी मजबूती देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और भारतीय शेयर बाजार को भी सहारा मिला।

इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

भोपाल । भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है जहां कथित फर्जी सेल डीड के आधार पर मसूद और अमन एजुकेशन सोसाइटी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी। हाईकोर्ट ने पहले पुलिस कमिश्नर को मसूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर शामिल थे ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार का जवाब आए बिना ऐसा अंतरिम आदेश देना उचित नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए सख्त निर्देश पहली नजर में उचित नहीं लगते। आरिफ मसूद की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने की। तंखा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने ही एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए सभी पक्ष जल्द अपनी दलीलें प्रस्तुत करें। इसके बाद ही हाईकोर्ट मामले में मेरिट के आधार पर निर्णय लेगा। मामला इस प्रकार शुरू हुआ कि मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने 9 जून 2025 को इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी। कॉलेज का संचालन अमन एजुकेशन सोसाइटी करती है और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस सोसाइटी के सचिव हैं। मसूद ने मान्यता रद्द होने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच के दौरान आयुक्त उच्च शिक्षा ने पाया कि अमन एजुकेशन सोसाइटी ने कॉलेज के संचालन के लिए फर्जी दस्तावेजों पर एनओसी और मान्यता ली थी। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सेल डीड तैयार करवाई गई और इसे पंजीयन कार्यालय में फर्जी तरीके से दर्ज किया गया। इस मामले से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई थी क्योंकि मसूद कांग्रेस विधायक हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूद को फिलहाल कानूनी राहत मिल गई है लेकिन हाईकोर्ट में मामला अब भी लंबित है और वहीं अंतिम निर्णय होगा। राजनीतिक और शिक्षा जगत दोनों में इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बिना पक्षकार की सुनवाई के सख्त आदेश देना न्यायसंगत नहीं होता जिससे राज्य के प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। अब हाईकोर्ट मामले में दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर निर्णय करेगा।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा, एप्पल ने भारत में 53% बढ़ाया उत्पादन; हर चौथा iPhone यहीं बन रहा

नई दिल्ली। अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज Apple ने भारत में अपने उत्पादन को तेजी से बढ़ाते हुए 2025 में आईफोन निर्माण में बड़ा विस्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने इस दौरान भारत में करीब 5.5 करोड़ आईफोन यूनिट्स की असेंबली की, जो पिछले वर्ष के 3.6 करोड़ यूनिट्स के मुकाबले लगभग 53 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि एप्पल अब वैश्विक सप्लाई चेन में भारत को एक अहम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित कर रहा है। टैरिफ से बचने के लिए भारत बना प्रमुख विकल्पएक रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल अमेरिका में चीनी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए अपने फ्लैगशिप उत्पादों का बड़ा हिस्सा भारत में तैयार कर रहा है। दुनिया भर में कंपनी हर साल लगभग 22 से 23 करोड़ iPhone का उत्पादन करती है। इनमें से अब करीब एक चौथाई हिस्सा भारत में बनने लगा है, जो वैश्विक उत्पादन में भारत की तेजी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। पीएलआई योजना से मिला बड़ा प्रोत्साहनभारत में उत्पादन बढ़ाने के पीछे सरकार की Production Linked Incentive Scheme (PLI) योजना की अहम भूमिका रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीएलआई योजना ने चीन की तुलना में भारत में मौजूद कुछ चुनौतियों जैसे आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत को कम करने में मदद की है। इससे वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला है। फॉक्सकॉन, टाटा और पेगाट्रॉन बना रहे आईफोनएप्पल भारत में अपने कई प्रमुख सप्लायरों के साथ मिलकर आईफोन का निर्माण कर रहा है। इनमें Foxconn, Tata Electronics और Pegatron शामिल हैं। इन कंपनियों के प्लांट्स में अब नई iPhone 17 सीरीज के सभी मॉडल, जिनमें प्रो और प्रो मैक्स वेरिएंट भी शामिल हैं, बनाए जा रहे हैं। वहीं iPhone 15 और iPhone 16 जैसे पुराने मॉडल घरेलू बाजार और निर्यात के लिए भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं। भारत में एप्पल का रिटेल नेटवर्क भी बढ़ाभारत में आईफोन की बढ़ती मांग को देखते हुए एप्पल अपने रिटेल नेटवर्क का भी विस्तार कर रहा है। देश में कंपनी की बिक्री 9 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही कंपनी के अब भारत में कुल छह रिटेल स्टोर हो चुके हैं और आने वाले समय में इनके और बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा एप्पल इस साल के अंत तक भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सेवा Apple Pay लॉन्च करने की तैयारी भी कर रहा है। भारत से रिकॉर्ड आईफोन निर्यातइंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत से निर्यात होने वाली सबसे मूल्यवान वस्तु आईफोन बन गया है। देश के विभिन्न प्लांट्स से एप्पल ने करीब 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए, जिनमें से अधिकांश अमेरिका भेजे गए। जनवरी से दिसंबर के दौरान भारत से कुल 30.13 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन निर्यात हुए। पहली बार स्मार्टफोन भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बनकर उभरे। कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की बड़ी हिस्सेदारीआंकड़ों के मुताबिक भारत के कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए भारत तेजी से एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एप्पल भारत में और निवेश कर सकता है, जिससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और मजबूती मिलेगी

भोपाल निगम में इंजीनियरों के कार्य विभाजन में बड़ा फेरबदल: उदित गर्ग और आरआर जारोलिया के जिम्मे हटाए गए विभाग

भोपाल। भोपाल नगर निगम में इंजीनियरों के बीच लंबे समय से चल रही कार्य विभाजन की कवायद को निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने अंतिम रूप दे दिया है। नए आदेश के तहत निगम में प्रमुख इंजीनियरों के जिम्मे कई विभागों में बदलाव किए गए हैं। उदित गर्ग और जारोलिया के विभागों में बदलावउदित गर्ग, जो कि चार विभागों के प्रभारी थे, उनसे स्वच्छ भारत मिशन और हाउसिंग फॉर ऑल शाखा का प्रभार छीन लिया गया। निगम सूत्रों के मुताबिक, गर्ग मूल रूप से पीएचई विभाग के इंजीनियर हैं और उन्होंने विभाग में वापसी के लिए आवेदन भी दिया है। वहीं आरआर जारोलिया, जो सिविल शाखा के प्रभारी थे, उनसे सिविल शाखा का काम भी हटा दिया गया। नए आदेश के अनुसार अब विधानसभा में पदस्थ कार्यपालन यंत्रियों की फाइलें सीधे अपर आयुक्त को भेजी जाएंगी। बिल्डिंग परमिशन और नगर निवेशकों में फेरबदलनिगमायुक्त ने बिल्डिंग परमिशन शाखा में भी बदलाव किया है। अब यहां चार नगर निवेशक पदस्थ किए गए हैं, जिनमें नीरज आनंद लिखार को मुख्य नगर निवेशक का प्रभार सौंपा गया है। टीएंडसीपी से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ ज्वाइंट डायरेक्टर लिखार को चीफ सिटी प्लानर (सीसीपी) का प्रभार मिला है। 8 कार्यपालन यंत्रियों में से सबसे वरिष्ठ जारोलिया को अधीक्षण यंत्री का प्रभार दिया गया। प्रमुख इंजीनियरों को सौंपी गई जिम्मेदारियांआरआर जारोलिया: प्रभारी एसई, यांत्रिकी योजना प्रकोष्ठ एवं विद्युत शाखा (जोन 01 से 21) आरके गोयल: ईई एवं विभागाध्यक्ष, हाउसिंग फॉर ऑल (एचएफए) अनिल तटवाड़े: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), उत्तर व मध्य विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा) ए के साहनी: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), नरेला विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा), प्रभारी प्रोजेक्ट एमआईएस व अतिक्रमण सेल प्रमोद मालवीय: ईई एवं विभागाध्यक्ष – प्रोजेक्ट, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, स्वच्छ भारत मिशन एसके राजेश: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), हुजूर विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा शाखा) ए के डेहरिया: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), दक्षिण-पश्चिम विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा शाखा), दक्षिण-पश्चिम और गोविंदपुरा विधानसभा

सोना-चांदी में फिर आई चमक! गोल्ड 1.62 लाख पार, चांदी 2.76 लाख के ऊपर

नई दिल्ली। मंगलवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों की बढ़ती खरीदारी के चलते दोनों कीमती धातुएं मजबूत स्तर पर पहुंच गईं। सुबह करीब 10:22 बजे Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने का 2 अप्रैल वाला वायदा कॉन्ट्रैक्ट 1.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी का 5 मई का कॉन्ट्रैक्ट 3.46 प्रतिशत उछलकर 2,76,411 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग बढ़ने से कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ी चमककेवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूत दिखाई दिए। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोने की कीमत 1.40 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,175 डॉलर प्रति औंस हो गई। वहीं चांदी की कीमत में और ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह 5.42 प्रतिशत बढ़कर 89.105 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने इन धातुओं को मजबूती दी है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से मिला सहारासोने और चांदी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी मुद्रा में आई कमजोरी को माना जा रहा है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला US Dollar Index गिरकर 98.85 पर आ गया है, जबकि सोमवार को यह 99 के ऊपर था। डॉलर कमजोर होने पर आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिलता है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं में इन धातुओं को खरीदना सस्ता हो जाता है और मांग बढ़ जाती है। वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांगइसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक इंटरव्यू में कहा कि Iran के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जीत का मतलब तब माना जाएगा जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। ईरान की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितताट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सरकारी मीडिया के जरिए कहा कि संघर्ष कब खत्म होगा, यह वाशिंगटन नहीं बल्कि तेहरान तय करेगा। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूर होकर सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि इन धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। आगे भी बनी रह सकती है तेजीविशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है और डॉलर में कमजोरी जारी रहती है तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा हालात में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं का रुख फिलहाल मजबूत बना हुआ है।

विजयपुर चुनाव फैसले पर सियासी घमासान: पटवारी-सिंघार ने BJP पर साधा निशाना

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में विजयपुर को लेकर नया विवाद उभर कर सामने आया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ कहा कि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित करने के फैसले पर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। पटवारी ने न्यायपालिका का सम्मान करते हुए यह भी भरोसा जताया कि अदालत में पार्टी को न्याय मिलेगा। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसे यह स्वीकार नहीं हो रहा कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया। पटवारी ने भाजपा पर तंज कसते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का जिक्र किया और कहा कि अगर हिम्मत है तो उस मामले में भी निर्णय करवा कर दिखाएं। उनका कहना था कि भाजपा दबाव बनाकर फैसले करवाने की कोशिश कर रही है और यह पूरी तरह से राजनीतिक रोटेशन का हिस्सा लगता है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी राज्य सूचना आयोग में लंबित पदों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से नहीं हो पाई है और सरकार इसमें बेहद धीमी गति से काम कर रही है। सिंघार ने कहा कि सरकार सांप की तरह धीरे-धीरे रेंगती है जबकि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तुरंत होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत भी की है और दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करनी तय की गई है। सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले की भी याद दिलाई। उनका कहना था कि भाजपा दबाव बनाकर फैसले करवाने की कोशिश करती है और यह संभव है कि कांग्रेस की राज्यसभा सीट प्रभावित करने के लिए ऐसा किया जा रहा हो। वहीं गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई पर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि सरकार हर मामले में देर से निर्णय लेती है कोविड काल में भी देरी हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को टैक्स में कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए लेकिन वह केवल अपना खजाना भरने में लगी है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस पर पलटवार किया। इंदौर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और न्यायालय के फैसले पर अनावश्यक टिप्पणी करने से उनकी अज्ञानता उजागर होती है। उन्होंने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बयानों को तूल देने से भी बचने की सलाह दी। राजनीतिक गलियारों में यह विवाद लगातार गर्माता जा रहा है। विजयपुर विधानसभा सीट और संबंधित मामलों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच सियासी टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है जबकि बीजेपी अपने पक्ष को मजबूत रखने के लिए लगातार बयानबाजी कर रही है।

मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में Iran के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस नरमी के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक West Texas Intermediate (WTI) कच्चे तेल की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। ट्रंप के बयान के बाद बाजार में आई नरमीतेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि इस अभियान की सफलता का मतलब यह होगा कि तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। उनके इस बयान से वैश्विक बाजारों को संकेत मिला कि क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घट सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनीट्रंप ने ईरान को Strait of Hormuz के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना के कई जहाज तैनात हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। इजरायल के साथ संयुक्त अभियान का असरइस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने Iran की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से Israel के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन घटनाओं के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई थी और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना है। सोमवार को कई साल के उच्च स्तर पर पहुंचा था तेलगौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। उस समय Brent Crude की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल और West Texas Intermediate की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसके बाद मंगलवार को बाजार में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से कीमतों में तेज गिरावट आ गई। भारत में महंगाई पर असर सीमित रहने की उम्मीदइस बीच भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि का भारत की मुद्रास्फीति दर पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि देश में महंगाई दर अभी “निम्नतम सीमा” के करीब बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले तक भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक साल से लगातार गिर रही थीं।

म्यूचुअल फंड में बढ़ा निवेश का जोश, फरवरी में इक्विटी इनफ्लो 25,977 करोड़ पार; AUM 82 लाख करोड़ से ऊपर

नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में फरवरी के दौरान इक्विटी निवेश में मजबूती देखने को मिली। Association of Mutual Funds in India (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में नेट इक्विटी इनफ्लो बढ़कर 25,977.91 करोड़ रुपये हो गया। यह जनवरी के 24,028.59 करोड़ रुपये से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा इक्विटी म्यूचुअल फंड में बना हुआ है। लंबी अवधि के निवेश के लिए निवेशक लगातार इस विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके कारण इक्विटी फंड में निवेश की गति बनी हुई है। इक्विटी AUM में भी हुआ इजाफाफरवरी के अंत तक म्यूचुअल फंड उद्योग का इक्विटी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 35,39,475.91 करोड़ रुपये हो गया। जनवरी में यह आंकड़ा 34,86,777.63 करोड़ रुपये था। अगर डेट और अन्य फंड कैटेगरी को भी शामिल किया जाए तो पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल AUM फरवरी के अंत तक 82,02,956.35 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। वहीं पूरे फरवरी महीने में औसत AUM 83,42,616.57 करोड़ रुपये रहा। इसके मुकाबले जनवरी के अंत में कुल AUM 81,01,305.58 करोड़ रुपये था और पूरे महीने का औसत AUM 82,01,174.62 करोड़ रुपये रहा था। फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे ज्यादा निवेशफरवरी में सबसे ज्यादा निवेश Flexi Cap Funds में दर्ज किया गया। इस श्रेणी में 6,924.65 करोड़ रुपये का नेट इक्विटी इनफ्लो आया। इसके अलावा Multi Cap Funds में 1,933.53 करोड़ रुपये और Large Cap Funds में 2,111.68 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। वहीं Large and Mid Cap Funds में 3,137.73 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में निवेश जारीफरवरी में Mid Cap Funds में 4,002.99 करोड़ रुपये और Small Cap Funds में 3,881.06 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। इसके अलावा Sectoral and Thematic Funds में भी 2,987.29 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो देखने को मिला। इससे साफ है कि निवेशक अलग-अलग कैटेगरी के फंड में संतुलित निवेश कर रहे हैं। हाइब्रिड और डेट स्कीम में भी निवेशफरवरी में Hybrid Mutual Fund Schemes में कुल 11,983.37 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया, हालांकि यह जनवरी के 17,356.02 करोड़ रुपये से कम रहा। वहीं Debt Mutual Fund Schemes में फरवरी के दौरान 94,530 करोड़ रुपये का कुल इनफ्लो दर्ज किया गया, जो जनवरी में आए 1,56,458.63 करोड़ रुपये से कम है। गोल्ड ETF और इंडेक्स फंड में भी निवेशफरवरी में निवेशकों ने अन्य निवेश विकल्पों में भी रुचि दिखाई। Gold ETFs में 5,254.95 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा Index Funds में 3,233.44 करोड़ रुपये और अन्य Exchange Traded Funds में 4,487.15 करोड़ रुपये का निवेश आया। फरवरी में लॉन्च हुए 21 नए फंडफरवरी के दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग में कई नए निवेश विकल्प भी सामने आए। इस महीने कुल 21 नए फंड लॉन्च किए गए। इनमें 8 इक्विटी फंड, 1 डेट स्कीम, 1 हाइब्रिड स्कीम, 4 इंडेक्स फंड और 7 ETF शामिल हैं।

ईरान युद्ध : ऑस्ट्रेलिया ने महिला फुटबॉल टीम की 5 खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण दी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असरखेल जगत तक पहुँच गया है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण दे दी है। ये खिलाड़ी एशियाई टूर्नामेंट खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया आई थीं। युद्ध के बीच ईरान लौटने पर उन्हें सत्ता और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का डर था। ऑस्ट्रेलियाई गृह मामलों के मंत्री Tony Burke ने बताया कि मंगलवार तड़के ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने खिलाड़ियों को गोल्ड कोस्ट स्थित होटल से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहां उनकी मुलाकात की गई और मानवीय वीजा की प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार का कहना है कि यह फैसला मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया, क्योंकि ईरान इस समय युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। खिलाड़ियों को शरण क्यों दी गई? ईरान की महिला फुटबॉल टीम पिछले महीने महिला एशियन कप खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची थी। टूर्नामेंट खत्म होने के बाद टीम को ईरान लौटना था, लेकिन इस दौरान अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध तेज हो गया। लगातार हमलों और असुरक्षा के माहौल ने खिलाड़ियों के भविष्य को संकट में डाल दिया। इसी कारण ऑस्ट्रेलिया ने पांच खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। अमेरिकी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को ईरान वापस भेजना मानवीय गलती होगी। ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया से अपील की कि उन्हें शरण दी जाए, और यदि ऐसा नहीं होता तो अमेरिका उन्हें अपने देश में आश्रय देने को तैयार है। परिवारों की सुरक्षा भी चिंता का विषय कुछ खिलाड़ी अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर वापस ईरान लौटने की इच्छा भी जताना चाहती थीं। ट्रंप ने कहा कि कई खिलाड़ियों को डर था कि अगर वे वापस नहीं लौटतीं तो उनके परिवारों को नुकसान पहुंच सकता है। टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों का रवैया महिला एशियन कप के दौरान ईरानी खिलाड़ियों की स्थिति भी चर्चा में रही। दक्षिण कोरिया के खिलाफ पहले मैच में राष्ट्रीय गान के दौरान टीम ने शुरुआत में चुप्पी साधी। इसे विरोध या शोक की अभिव्यक्ति के रूप में देखा गया। बाद के मैचों में खिलाड़ियों ने गान गाया और सलामी दी। टीम की फॉरवर्ड Sara Didar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने देश और परिवार के लिए अपनी चिंता जाहिर की। इस कदम से साफ है कि युद्ध का असर खेल जगत पर भी गहरा पड़ रहा है, और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवीय कदम उठाए जा रहे हैं।