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बारातियों से भरा मैजिक वाहन पलटा, एक ही परिवार के 15 लोग घायल, बस की लापरवाही से हुआ हादसा

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के सौसर थाना क्षेत्र में सोमवार रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। काजलवाणी और कुड़म गांव के बीच बारातियों से भरा एक मैजिक वाहन अचानक सड़क किनारे पलट गया। इस हादसे में एक ही परिवार के 15 सदस्य घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें छिंदवाड़ा जिला अस्पताल रेफर किया गया है। यह सभी लोग सौसर के वार्ड क्रमांक 1 से भीमालगोंडी गांव में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। यात्रा के दौरान जैसे ही वाहन काजलवाणी और कुड़म के बीच पहुंचा, सामने से आ रही एक बस ने अचानक कट मार दिया। इसी दौरान मैजिक चालक ने वाहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन संतुलन बिगड़ गया और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस की लापरवाही से हुआ हादसा, चालक ने खोया नियंत्रप्रत्यक्षदर्शियों और मैजिक चालक भरत चवारे के अनुसार, बस ने अचानक दिशा बदलते हुए कट मारा, जिससे स्थिति असंतुलित हो गई। चालक ने वाहन को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन भारी संख्या में बैठे यात्रियों के कारण मैजिक का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क से नीचे पलट गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मदद के लिए पहुंचे। सभी घायलों को वाहन से बाहर निकाला गया और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। घायलों को अस्पताल में भर्ती, दो की हालत गंभीसूचना मिलते ही सौसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को सौसर सिविल अस्पताल भेजा गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने दो गंभीर घायलों सूरज और सुरेश को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर कर दिया। अन्य 13 घायलों का इलाज सौसर सिविल अस्पताल में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, कई लोगों को हल्की से मध्यम चोटें आई हैं, लेकिन सभी को निगरानी में रखा गया है। पुलिस ने शुरू की जांच, यातायात हुआ प्रभावियह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की गंभीर अनदेखी की ओर इशारा करता है। एक छोटी सी लापरवाही ने खुशियों से भरे सफर को दर्दनाक हादसे में बदल दिया।

ईरान का कड़ा रुख: नाकेबंदी खत्म करो, फ्रीज संपत्तियां लौटाओ, वरना बढ़ेगा तनाव

नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही चर्चाओं और तनावों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय के अनुसार तेहरान की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव में कई ऐसे मुद्दों को शामिल किया गया है जो सीधे क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इस प्रस्ताव में सबसे प्रमुख मांग यह रखी गई है कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत समाप्त किया जाए। ईरान का कहना है कि यह नाकेबंदी न केवल उसके आर्थिक हितों को प्रभावित कर रही है बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी नकारात्मक असर डाल रही है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी मांग की है कि पूरे क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों पर रोक लगाई जाए। खासतौर पर उन गतिविधियों का उल्लेख किया गया है जिनमें लेबनान में सक्रिय हिजबुल्ला को निशाना बनाते हुए इजरायली हमले शामिल हैं। ईरान का तर्क है कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयां तनाव को और बढ़ाती हैं और क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेलती हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए। इसके अलावा ईरान ने उन सभी संपत्तियों को वापस जारी करने की भी मांग की है जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण विदेशों में फ्रीज कर दी गई हैं। ईरान का कहना है कि ये संपत्तियां उसके वैध आर्थिक संसाधन हैं और इन पर लगाए गए प्रतिबंध अनुचित हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन संपत्तियों को रोककर रखना न केवल आर्थिक अन्याय है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भावना के भी खिलाफ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने इस पूरे मुद्दे पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान ने किसी भी प्रकार की रियायत या विशेष सुविधा की मांग नहीं की है। उनके अनुसार ईरान केवल अपने उन अधिकारों की मांग कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैध माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के पक्ष में रहा है, लेकिन उसके मूल अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव की स्थिति चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय राजनीति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन यदि गतिरोध बना रहता है तो तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कृतिका नक्षत्र में प्लूटो के प्रवेश से बदलेंगे इन राशियों के भाग्‍य, धन और सफलता के खुलेंगे नए रास्ते

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 मई 2026 का दिन खास माना जा रहा है। आज सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर अरुण ग्रह यानी प्लूटो ने कृतिका नक्षत्र में प्रवेश किया है। प्लूटो बेहद धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, इसलिए इसका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह नक्षत्र परिवर्तन कई लोगों के जीवन में बड़े बदलाव, नए अवसर और अचानक मिलने वाली सफलताओं के संकेत दे सकता है। प्लूटो के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभावज्योतिष में प्लूटो को गहराई, परिवर्तन और छिपी शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। कृतिका नक्षत्र में इसका प्रवेश पुराने कार्यों के परिणाम सामने लाने और नई शुरुआत के अवसर पैदा करने वाला माना जा रहा है। खासकर उन लोगों को लाभ मिल सकता है जो लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। पुराने निवेश से फायदा मिलने और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। करियर में नई दिशा मिलने की संभावना भी है। सिंह राशिसिंह राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने और रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है। तुला राशितुला राशि के लोगों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नए अवसर मिलने और निवेश से लाभ होने की संभावना जताई जा रही है। विदेश या नई जगह से जुड़े कामों में भी सफलता मिल सकती है। कुंभ राशिकुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर करियर में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। अचानक सफलता, आर्थिक मजबूती और नई योजनाओं में अच्छे परिणाम मिलने के संकेत हैं। इस दौरान क्या करेंज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस समय अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। अधूरे काम पूरे करने की कोशिश करें और अचानक मिलने वाले अवसरों को नजरअंदाज न करें। सकारात्मक सोच बनाए रखना भी लाभकारी रहेगा।

एमपी में उज्जैन समेत 6 जिलों में लू का अलर्ट, रतलाम में लगातार दूसरे दिन 45 डिग्री पहुंचा

भोपाल । मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर थमते ही गर्मी ने फिर से तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में अब हीट वेव यानी लू का असर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग ने मंगलवार को उज्जैन, धार, आलीराजपुर, बड़वानी, रतलाम और झाबुआ जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भीषण गर्मी बनी रह सकती है। इस दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। कई शहरों में बढ़ेगा तापमानमौसम विभाग का कहना है कि मंगलवार को भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत प्रदेश के 49 जिलों में तेज गर्मी का असर रहेगा। कई शहरों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है। उज्जैन संभाग के रतलाम, नीमच और मंदसौर सबसे ज्यादा गर्म रहने की संभावना जताई गई है। रतलाम लगातार सबसे गर्मसोमवार को रतलाम में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लगातार दूसरे दिन यहां पारा 45 डिग्री के आसपास बना रहा। इंदौर में इस सीजन का सबसे अधिक तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है। बीते वर्ष 1 मई को यहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री था। उज्जैन में 43 डिग्री, भोपाल में 41.2 डिग्री, जबलपुर में 40.8 डिग्री और ग्वालियर में 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा शाजापुर में 44.2 डिग्री, धार में 44 डिग्री, खरगोन में 42.6 डिग्री, खंडवा में 42.5 डिग्री और गुना में 41.5 डिग्री तापमान रहा। रायसेन, सागर, नर्मदापुरम और श्योपुर में भी पारा 41 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया। मई की शुरुआत में लगातार बारिशप्रदेश में 30 अप्रैल से 10 मई तक लगातार आंधी और बारिश का दौर चला था। इस दौरान कभी पश्चिमी विक्षोभ तो कभी चक्रवाती सिस्टम और टर्फ का असर देखने को मिला। इसी वजह से मई के पहले सप्ताह में मौसम बदला हुआ रहा। मौसम विभाग की सलाहगर्मी बढ़ने के साथ मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने और दोपहर की तेज धूप से बचने की अपील की गई है। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

आज ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगल, जानिए हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

नई दिल्ली । आज 12 मई को ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी। इसलिए ज्येष्ठ के मंगलवार को विशेष रूप से बजरंगबली की पूजा का महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा-पाठ करने, दान देने और भंडारा करवाने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि इस बार बड़ा मंगल पंचक काल में पड़ रहा है, जिसके चलते कई लोग पूजा के शुभ समय और पंचक के प्रभाव को लेकर सवाल कर रहे हैं। पूजा का शुभ मुहूर्तदूसरे बड़े मंगल पर पूजा का शुभ समय सुबह 8:55 बजे से दोपहर 1:59 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शाम को भी पूजा की जा सकती है। संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:03 बजे से रात 8:06 बजे तक बताया गया है। इस दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। पंचक में भी कर सकते हैं पूजाइस बार बड़ा मंगल रोग पंचक में पड़ रहा है। सामान्य तौर पर पंचक में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा पंचक में भी की जा सकती है। कहा जाता है कि पंचमुखी हनुमान की आराधना करने से भय, तनाव और शत्रु बाधाएं दूर होती हैं। इस दौरान भंडारा करवाना भी शुभ माना गया है। हालांकि नए मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है। ऐसे करें हनुमान जी की पूजाबड़ा मंगल पर हनुमान जी को सिंदूर, लाल चंदन और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही चमेली के तेल का दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। भक्त इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:- “ॐ नमो भगवते पंचवदनाय, पूर्वकपि मुखाय, सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा।”इस दिन हनुमान चालीसा, हनुमान बीसा और सुंदरकांड का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। हालांकि पंचक के दौरान हवन और यज्ञ करने से बचने की सलाह दी गई है। इन बातों का रखें ध्यान– पूजा के दौरान काले और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, पीले और सफेद रंग को शुभ माना गया है।– व्रत रखने वाले लोगों को गुस्सा और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।– पूरे दिन सात्विक भोजन करें और मांसाहार व शराब से परहेज रखें।– ब्रह्मचर्य का पालन करना भी शुभ माना गया है।

1991 का आर्थिक संकट: जब भारत ने सोना गिरवी रखकर बदली अपनी किस्मत

नई दिल्ली। भारत के आर्थिक इतिहास में 1991 का साल एक निर्णायक मोड़ माना जाता है। उस समय देश गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से गुजर रहा था और स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए सोने का सहारा लेना पड़ा। कैसे पैदा हुआ आर्थिक संकट?1991 के दौरान भारत कई आर्थिक चुनौतियों से घिरा हुआ थाविदेशी मुद्रा भंडार बहुत तेजी से घट गया थादेश के पास कुछ ही दिनों के आयात के लिए पैसा बचा थाखाड़ी युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई थींनिर्यात में गिरावट और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा थाइन परिस्थितियों ने देश को डिफॉल्ट की कगार पर पहुंचा दिया था। क्यों गिरवी रखना पड़ा सोना?संकट इतना गहरा था कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को तत्काल कदम उठाना पड़ा। विदेशी कर्ज चुकाने के लिए फंड की जरूरत थीअंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा बनाए रखना जरूरी थाभुगतान संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका थाऐसे में भारत ने अपने स्वर्ण भंडार को गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा सहायता जुटाई। कितना सोना इस्तेमाल हुआ?रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय लगभग 47 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान को भेजा गया।करीब 20 टन सोना स्विट्जरलैंड के बैंक के पास गिरवी रखा गया यह सोना देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत राहत देने के लिए इस्तेमाल किया गया। किसने संभाली जिम्मेदारी?इस कठिन फैसले के पीछे देश की आर्थिक टीम शामिल थीतत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखरअर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंहवित्त मंत्री यशवंत सिन्हाRBI के वरिष्ठ अधिकार यह निर्णय बेहद गोपनीय तरीके से लिया गया था ताकि बाजार में घबराहट न फैले। कैसे भेजा गया सोना?मुंबई एयरपोर्ट से विशेष सुरक्षा में सोना विदेश भेजा गया इसे अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बैंकों में गिरवी रखा गया इसके बदले भारत को तत्काल विदेशी मुद्रा सहायता मिली क्या मिला फायदा?इस कदम के बादभारत को तत्काल आर्थिक राहत मिलीदेश डिफॉल्ट होने से बच गयाबाद में 1991 के आर्थिक सुधारों का रास्ता खुला।  यही सुधार आगे चलकर भारत की उदारीकरण नीति की नींव बने।1991 का सोना गिरवी संकट भारत के लिए एक चेतावनी था कि आर्थिक अनुशासन कितना जरूरी है।उस समय लिए गए कठिन फैसलों ने देश को दिवालिया होने से बचाया और एक नई आर्थिक दिशा दी।

नया फ्री-फ्लो टोल सिस्टम शुरू, बिना रुके कटेगा टोल-ईंधन और समय दोनों की होगी बचत

नई दिल्ली ।देश में हाईवे यात्रा को और अधिक आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसमें टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-लेस बनाने की पहल शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक तरीके से पूरा हो जाएगा। इस नई तकनीक में वाहन जैसे ही टोल प्लाजा से गुजरेंगे, कैमरे उनके नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और जुड़े हुए फास्टैग अकाउंट से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। यह सिस्टम खास तौर पर उन हाईवे सेक्शंस के लिए तैयार किया गया है जहां अक्सर लंबी कतारें और देरी देखने को मिलती है। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रा का समय कम होगा और वाहन लगातार गति में रहेंगे। इससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। लगातार रुकने और चलने की स्थिति खत्म होने से वाहनों का माइलेज बेहतर होगा और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। सरकारी अनुमान के अनुसार इस तकनीक के लागू होने से हर साल बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत संभव होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा मिलेगा क्योंकि माल ढुलाई तेज और अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन सिस्टम में भी सुधार देखने को मिलेगा। इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से देश के अलग-अलग हिस्सों में लागू किया जा रहा है। शुरुआत कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा से की गई है और धीरे-धीरे इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में टोल प्लाजा इस डिजिटल सिस्टम से जुड़ जाएंगे। हालांकि इस नई व्यवस्था में फास्टैग बैलेंस को लेकर यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। यदि खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता है तो ई-नोटिस जारी किया जा सकता है और तय समय सीमा में भुगतान न करने पर अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।

ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत

नई दिल्ली ।शेयर बाजार में इस कारोबारी सत्र की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई, जहां निवेशकों के रुझान में साफ तौर पर घबराहट दिखाई दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स गैपडाउन ओपन हुए और शुरुआती मिनटों से ही दबाव में कारोबार करते नजर आए। बाजार की चाल पूरी तरह से बिकवाली की तरफ झुकी हुई दिखी, जिससे पूरे ट्रेडिंग सेशन में कमजोरी बनी रही। निफ्टी ने 23800 का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिया, जो पिछले कई सत्रों से एक मजबूत आधार के रूप में काम कर रहा था। इस लेवल के टूटते ही बाजार में सेलिंग प्रेशर और तेज हो गया और इंडेक्स 23700 के नीचे तक फिसल गया। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी प्रमुख सपोर्ट लेवल का ब्रेकडाउन होता है, तो बाजार में तेजी से गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है और इसी तरह की स्थिति फिलहाल देखने को मिल रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, जो लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। क्रूड ऑयल की यह ऊंची कीमतें महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ रहा है। बाजार में सेक्टोरल प्रदर्शन भी काफी असमान रहा। आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जहां बड़े स्टॉक्स में लगभग तीन प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों पर बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे पूरा आईटी इंडेक्स कमजोर दिखाई दिया। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार की समग्र कमजोरी को संभालने में नाकाफी रही। ऑयल और गैस सेक्टर में कुछ स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। वहीं, ऑटो और टेलीकॉम सेक्टर के कुछ शेयरों में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि यह तेजी सीमित दायरे में रही और पूरे बाजार की दिशा को बदल नहीं सकी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार ‘सेल ऑन राइज’ पैटर्न में काम कर रहा है, जहां हर छोटी तेजी पर बिकवाली देखने को मिल रही है। इसके अलावा, वीकली एक्सपायरी के कारण भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है। इंडिया विक्स का 18 के ऊपर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल दबाव में है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। निफ्टी का अहम सपोर्ट टूटने के बाद आगे की दिशा अब नए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर निर्भर करती नजर आ रही है।

पूजा में किन चीजों का दोबारा उपयोग करें और किनका नहीं? जानिए धार्मिक नियम और मान्यताएं

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और शुद्धता से जुड़ी एक गहन प्रक्रिया मानी जाती है। हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार किया जाता है ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें शुद्ध मानकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कुछ एक बार उपयोग के बाद अपवित्र मानी जाती हैं। किन चीजों का किया जा सकता है दोबारा उपयोग?पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई धातु की वस्तुएं और पवित्र सामग्री ऐसी होती हैं जिन्हें साफ-सफाई के बाद दोबारा प्रयोग किया जा सकता है।  धातु के पात्चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन पूजा में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें एक बार उपयोग करने के बाद अच्छी तरह साफ करके फिर से पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।  पूजा सामग्रीभगवान की मूर्ति, शंख, घंटी, पूजा की माला और आसन भी बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें केवल स्वच्छता के साथ सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।  तुलसीतुलसी को माता तुलसी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि तुलसी कभी अपवित्र नहीं होती। यदि नई तुलसी उपलब्ध न हो, तो पहले से चढ़ाई गई तुलसी को भी दोबारा पूजा में उपयोग किया जा सकता है।  बेलपत्भगवान शिव को अर्पित किया गया बेलपत्र भी कई मान्यताओं के अनुसार 6 महीने तक उपयोग योग्य माना जाता है, बशर्ते वह फटा या खराब न हो।  किन चीजों का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिएकुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है। भोग और प्रसाभगवान को चढ़ाया गया भोग और प्रसाद दोबारा उपयोग नहीं किया जाता। इसे ग्रहण या वितरण के बाद समाप्त मानना चाहिए।  जल और फूलपूजा में चढ़ाया गया जल और फूल एक बार उपयोग के बाद अपवित्र माने जाते हैं, इसलिए इन्हें दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए। चंदन, कुमकुम और अक्षभगवान को अर्पित चंदन, कुमकुम और चावल (अक्षत) का दोबारा उपयोग वर्जित है। दीपक का तेल या घीपूजा में जलाए गए दीपक में बचा हुआ तेल या घी भी दोबारा प्रयोग नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता और महत्शास्त्रों के अनुसार पूजा में शुद्धता और एकाग्रता का विशेष महत्व है। माना जाता है कि अपवित्र या उपयोग हो चुकी वस्तुओं का पुनः प्रयोग करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार करना आवश्यक बताया गया है। पूजा-पाठ में उपयोग होने वाली वस्तुओं का सही ज्ञान होना जरूरी है। जहां एक ओर कुछ चीजें शुद्ध मानी जाती हैं और बार-बार उपयोग की जा सकती हैं, वहीं कुछ वस्तुएं केवल एक बार के उपयोग के लिए होती हैं। इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि पूजा की पवित्रता भी बनी रहती है।

Gold नहीं तो क्या? 1 साल में रकम दोगुनी करने के लिए बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस

नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बचाने की अपीलों के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है अगर सोना न खरीदें तो पैसा कहां लगाएं? सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इसकी रिटर्न ग्रोथ सीमित और अस्थिर भी रहती है। इसी वजह से अब लोग ऐसे विकल्प खोज रहे हैं जो बेहतर ग्रोथ और रिटर्न दे सकें। 1. शेयर बाजार – हाई रिस्क, हाई रिटर्न का खेलभारतीय शेयर बाजार लंबे समय में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों में माना जाता है।सही स्टॉक्स चुनने पर एक साल में अच्छा मुनाफा संभव है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा होता है। फायदा: हाई ग्रोथ पोटेंशियल जोखिम: मार्केट वोलैटिलिटी 2. म्यूचुअल फंड – संतुलित और प्रोफेशनल निवेशम्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो डायरेक्ट शेयर मार्केट का जोखिम नहीं लेना चाहते। SIP के जरिए छोटे निवेश से शुरुआत लंबे समय में स्थिर रिटर्न की संभावना एक्सपर्ट मैनेजमेंट का फायदा 3. रियल एस्टेट और REITs – स्थिर आय का जरियाREIT (Real Estate Investment Trust) उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो प्रॉपर्टी में सीधे निवेश नहीं कर सकते। कम पैसे में रियल एस्टेट एक्सपोजर किराये जैसी नियमित आय लंबी अवधि में वैल्यू ग्रोथ 4. गोल्ड ETF – सोने का डिजिटल विकल्पगोल्ड ETF उन निवेशकों के लिए सही है जो सोना छोड़ना नहीं चाहते लेकिन फिजिकल गोल्ड से बचना चाहते हैं। स्टोरेज की झंझट नहीं बाजार से जुड़े रिटर्न आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है  क्या सच में 1 साल में पैसा डबल हो सकता है?यह समझना जरूरी है कि कोई भी निवेश चाहे शेयर बाजार हो या म्यूचुअल फंड गारंटीड डबल रिटर्न नहीं देता।उच्च रिटर्न के साथ हमेशा जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए निवेश सोच-समझकर और विविधता के साथ करना चाहिए। अगर आप सोने में निवेश कम करके अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, REIT (Real Estate Investment Trust) और गोल्ड ETF जैसे विकल्प बेहतर हो सकते हैं लेकिन समझदारी और रिस्क मैनेजमेंट सबसे जरूरी है।