नया ग्रामीण रोजगार कानून 2026: गांवों में रोजगार की कानूनी गारंटी और नई व्यवस्था की पूरी डिटेल

नई दिल्ली । ग्रामीण रोजगार और विकास व्यवस्था को नए ढांचे में लाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम की जानकारी साझा की है। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम 2025 के नाम से तैयार यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को अधिक सुरक्षित, संगठित और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 125 दिनों तक अकुशल कार्य का कानूनी अधिकार दिया जाएगा। यह बदलाव ग्रामीण मजदूरों को स्थिर आय और नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही गांवों में सार्वजनिक संपत्तियों के निर्माण को भी इस योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। नई व्यवस्था पूरे देश में एक साथ लागू की जाएगी और सभी राज्यों को इसके अनुसार अपनी कार्ययोजना तैयार करनी होगी। पहले से चल रहे विकास कार्यों को भी इसी ढांचे के तहत जारी रखा जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर काम बाधित न हो। रोजगार मांगने की प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है। ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार की मांग कर सकेंगे और इसके बाद 15 दिनों के भीतर उन्हें काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में रोजगार नहीं मिलता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक सहारा मिल सके। मजदूरी भुगतान को सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। भुगतान में देरी होने पर अतिरिक्त मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें। काम की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधुनिक डिजिटल प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। कृषि कार्यों के व्यस्त समय में राज्यों को अस्थायी रूप से काम रोकने की अनुमति भी दी गई है। इस पूरे सिस्टम में ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है, जिससे योजना का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके। वित्तीय व्यवस्था में भी केंद्र और राज्यों के बीच तय अनुपात के अनुसार फंडिंग की जाएगी। कुल मिलाकर यह नया कानून ग्रामीण रोजगार प्रणाली को अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने और जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
MP: भोपाल के होटल में हिंदू युवती के साथ पकड़ाया मुस्लिम युवक, हिंदू संगठनों ने जमकर पीटा, गोबर पोता

भोपाल। भोपाल (Bhopal) में एक बार फिर हिंदू युवती (Hindu girl) और मुस्लिम युवक (Muslim youth) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मामला गोविंदपुरा थाना क्षेत्र (Govindpura police station area.) के गौतम नगर (Gautam Nagar) स्थित प्राईड इन होटल का है, जहां हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने एक हिंदू युवती और मुस्लिम युवक को होटल के कमरे में पकड़ लिया. इसके बाद मौके पर जमकर हंगामा हुआ और युवक के साथ मारपीट की गई. घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। युवक की पिटाई के बाद लगाया गोबर और पोती स्याहीजानकारी के मुताबिक हिंदू संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि होटल में एक हिंदू युवती और मुस्लिम युवक ठहरे हुए हैं. इसके बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता होटल पहुंच गए. आरोप है कि कार्यकर्ता सीधे युवक-युवती के कमरे तक पहुंचे और दोनों को बाहर निकालकर सड़क पर ले आए. इस दौरान युवक के साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई. इतना ही नहीं, युवक को अर्धनग्न कर उसके चेहरे पर गोबर और स्याही भी पोती गई. मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा. घटना की सूचना मिलते ही गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया. पुलिस युवक और युवती को थाने लेकर पहुंची, जहां दोनों से पूछताछ की गई. हालांकि काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद भी किसी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। एक दूसरे को पहले से जानते थे युवक-युवतीपुलिस के अनुसार युवक की पहचान आरिफ खान के रूप में हुई है. पुलिस का कहना है कि आरिफ के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज रह चुके हैं. उस पर अड़ीबाजी, ब्लैकमेलिंग और मोबाइल चोरी जैसे आरोप लग चुके हैं. वहीं युवती भोपाल के अयोध्या नगर इलाके की रहने वाली बताई जा रही है. पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और पहले भी रिलेशनशिप में रह चुके हैं। मामले को लेकर थाना प्रभारी अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि पुलिस ने सभी पक्षों को समझाइश देकर छोड़ दिया है. किसी भी पक्ष ने कोई मामला दर्ज नहीं कराया है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने सभी लोगों को चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था प्रभावित हो।
PM मोदी ने की गुजरातियों की तारीफ, वडोदरा में बोले- यहां समाज समय की दिशा को जल्दी पहचानता है

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) सोमवार को गुजरात (Gujarat) के वडोदरा शहर में थे, जहां उन्होंने पटेल समुदाय द्वारा निर्मित ‘सरदार धाम हॉस्टल’ (Sardar Dham Hostel) का उद्घाटन किया और इसके बाद एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) के कारण उपजे वैश्विक तेल संकट के बीच एकबार फिर लोगों से ईंधन और खाने के तेल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने और सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की। साथ ही उन्होंने एक बार फिर लोगों से आग्रह किया कि जहां संभव हो वहां घर से काम करने की कोविड-कालीन व्यवस्था को अपनाएं और विदेश यात्रा को भी सीमित करें। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने गुजरात की धरती और यहां के लोगों की जमकर तारीफ की और इसे भविष्य को पहचानने वाली धरती बताया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि ‘गुजरात की एक बहुत बड़ी विशेषता रही है, कि यहां समाज हमेशा समय की दिशा को जल्दी पहचानता है। परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरू करना ये गुजरात की कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज जब दुनिया फ्यूचर टेक्नोलॉजीज की ओर बढ़ रही है, तब गुजरात भी नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, एडवांस इंजीनियरिंग, ग्रीन एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेस हर क्षेत्र में गुजरात अपनी नई पहचान बना रहा है।’ ‘ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश’आगे उन्होंने कहा, ‘साणंद में मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर्स बन रहे हैं, केयर्न सेमीकंडक्टर प्लांट में भी प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, धोलेरा और सूरत में भी नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ रहे हैं। हमारा भारत और हमारा गुजरात ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बने, हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।’ पीएम ने बताया वडोदरा में हो रहे कितने कामआगे उन्होंने वडोदरा का जिक्र करते हुए कहा, ‘आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज यहां बने मेट्रो कोचेज दूसरे देशों तक निर्यात हो रहे हैं। सांवली में आधुनिक रेल सिस्टम कोचेज का निर्माण हो रहा है। इंजीनियरिंग, हैवी मशीनरी, कैमिकल्स और फार्मा, पावर इक्विपमेंट्स और MSME, ऐसे कई सेक्टर्स में आज वडोदरा मैन्यूफेक्चरिंग का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां की गतिशक्ति यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक की फील्ड में प्रोफेशनल्स तैयार कर रही है, अब एयरोस्पेस सेक्टर में भी वडोदरा नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एयरक्राफ्ट मैन्यूफेक्चरिंग प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘भारत भी दुनिया पर पड़ रहे असर से अछूता नहीं’इसके बाद उन्होंने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा, ‘साथियों गुजरात और देश में विकास के प्रयासों के बीच एक और विषय संवेदनशील होता जा रहा है, पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। जब हमने मिलकर कोरोना के संकट का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।’ वेकेशन और वेडिंग के लिए विदेश जाने से बचने को कहाआगे उन्होंने उच्च व उच्च मध्यमवर्गीय लोगों की छुट्टियां मनाने व डेस्टिनेशन वेडिंग (यानी शादी के लिए किसी खास जगह पर जाने) के लिए विदेश जाने की आदत का जिक्र करते हुए कहा कि, ‘जैसे ही छुट्टियां शुरू होती हैं, बच्चों के हाथों में विदेश जाने के टिकट थमा दिए जाते हैं। आजकल विदेश यात्रा का चलन है। अक्सर ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का चलन भी बढ़ रहा है। यहां ऐसे कई लोग हैं जो अब मुझे निमंत्रण नहीं भेजते, पहले वे ऐसा करते थे क्योंकि वे अपनी शादियां विदेश में करते थे, लेकिन अब उन्होंने यह सिलसिला बंद कर दिया है। आगे पीएम ने कहा, ‘विदेश में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का यह चलन तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि, इस बात पर भी गौर करें कि इसमें काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। खुद से यह सवाल पूछें, क्या भारत के भीतर ऐसी कोई जगह नहीं है जहां हम अपनी छुट्टियां बिता सकें, जहां हम अपने बच्चों को अपने इतिहास के बारे में पढ़ाएं, जहां हम अपने स्थानों पर गर्व महसूस कर सकें? यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी छुट्टियां यहीं भारत में ही मनाएं और तो और जहां तक शादियों की बात है, मैं नहीं मानता हूं कि हमारे लिए अपने भारत से ज्यादा सुंदर या पवित्र जगह कोई और हो सकती है। जब हम यहां पर शादी करते हैं तो पूर्वजों की मिट्टी भी हमें आशीर्वाद देती है। वेडिंग के लिए भी भारत में अनेक स्थान हैं, उन्हें हम चुनें।’ ‘पाटीदार भाइयों को शादी के लिए खास सलाह’आगे प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं तो आप सब पाटीदार भाइयों को तो कहूंगा आपको तो अब शादी ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर जाकर करना चाहिए। आपकी हर शादी में सरदार साहब खुद आशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे। वहीं पर आपने, जैसे हरिद्वार व ऋषिकेश में आप शांति के लिए जगह बना रहे हैं ना, वैसे ही आप ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ में शादी के लिए जगह बना दीजिए। जैसे हाल के वर्षों में सरदार साहब के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और हमारा एकता नगर पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र बनकर उभरा है कि हम यह तय कर सकते हैं कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वहां लेकर जाएं।’
साबुन छोड़िए, अपनाइए देसी पेस्ट: 10 मिनट में टैनिंग कम, स्किन बने मुलायम और चमकदार

नई दिल्ली। नहाने में साबुन की जगह नारियल तेल, बेसन, नींबू, दूध और ईनो से बना देसी पेस्ट स्किन की टैनिंग कम करने, डेड स्किन हटाने और ड्राइनेस दूर करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसे सावधानी से इस्तेमाल करना जरूरी है। देसी नहाने वाले पेस्ट का ट्रेंड क्या है?आजकल सोशल मीडिया पर एक देसी स्किन केयर नुस्खा काफी चर्चा में है जिसमें साबुन की जगह प्राकृतिक और किचन में मिलने वाली चीजों से बना पेस्ट इस्तेमाल किया जाता है। दावा किया जाता है कि यह पेस्ट 10 मिनट में स्किन को साफ, चमकदार और टैनिंग-फ्री बनाने में मदद कर सकता है। पेस्ट में क्या-क्या चीजें मिलती हैं?इस घरेलू मिश्रण में आमतौर पर ये सामग्री शामिल होती है: बेसननारियल तेलदूधनींबूईनोइन सभी चीजों को मिलाकर एक हल्का गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है जिसे नहाने से पहले शरीर पर लगाया जाता है। कैसे काम करता है यह पेस्ट?नारियल तेल स्किन को नमी देता है और रूखापन कम करता है। बेसन हल्के स्क्रब की तरह डेड स्किन हटाने में मदद करता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी टैनिंग और दाग-धब्बों को हल्का करने में सहायक माना जाता है। दूध स्किन को सॉफ्ट और मॉइश्चराइज रखने में मदद करता है। यह सभी मिलकर त्वचा को साफ और फ्रेश लुक देने का दावा करते हैं। इस्तेमाल करने का तरीकापेस्ट को तैयार करके हल्के हाथों से पूरे शरीर पर लगाया जाता है और लगभग 10 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। इसके बाद हल्के पानी से धो दिया जाता है। इसे हफ्ते में 1 से 2 बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। सावधानियां जरूर रखेंयह जरूरी है कि इसे पूरे शरीर पर लगाने से पहले पैच टेस्ट किया जाए। कुछ लोगों को नींबू या ईनो से जलन या एलर्जी हो सकती है। बहुत सेंसिटिव स्किन, बच्चों या जिनकी त्वचा पर घाव या रैशेज हों उन्हें इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर जलन महसूस हो तो तुरंत धो लेना चाहिए। यह देसी नहाने वाला पेस्ट स्किन को प्राकृतिक तरीके से साफ और सॉफ्ट बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। सही मात्रा, सावधानी और स्किन टाइप के अनुसार इस्तेमाल करने पर ही इससे फायदा मिल सकता है।
2026–2027 का सूर्य ग्रहण: 2027 क्यों कहलाएगा ‘सदी का सबसे खास नजारा’? जानें पूरी सच्चाई

नई दिल्ली। खगोल विज्ञान के अनुसार 2026 और 2027 के बीच दो महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिलेंगे, लेकिन इनमें 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसका कारण इसकी असाधारण लंबी अवधि और बड़े भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई देना है, जो इसे बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना बनाता है। 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहणयह पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन जैसे क्षेत्रों से दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को कुछ मिनटों के लिए ढक लेगा और आकाश में शाम जैसा नजारा बन सकता है। इसकी कुल अवधि लगभग 2 मिनट से कुछ ज्यादा होगी, इसलिए यह एक सामान्य लेकिन आकर्षक पूर्ण ग्रहण माना जा रहा है। 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण क्यों खास है?2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहणों में से एक होगा। मिस्र के लक्सर जैसे स्थानों पर यह लगभग 6 मिनट से अधिक समय तक चलेगा। इतनी लंबी अवधि में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा और दिन में कुछ समय के लिए गहरा अंधेरा छा जाएगा। खगोलविदों के अनुसार ऐसा लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण बहुत दुर्लभ होता है और इसके बाद इतना लंबा ग्रहण 2114 तक देखने को नहीं मिलेगा। यही वजह है कि इसे “Eclipse of the Century” यानी सदी का सबसे खास खगोलीय नजारा कहा जा रहा है। देखने में क्या होगा अंतर?2026 ग्रहण: छोटा, लेकिन सुंदर सूर्यास्त के समय यूरोप में दिखाई देगा 2027 ग्रहण: लंबा, गहरा और अफ्रीका–मध्य पूर्व में व्यापक रूप से दिखेगा वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना (बाहरी चमकदार आवरण) साफ दिखाई देता है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है। दोनों ग्रहण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 2027 का सूर्य ग्रहण अपनी लंबी अवधि और व्यापक दृश्यता के कारण बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जा रहा है। यही कारण है कि खगोल प्रेमियों के लिए यह घटना किसी “सदी के शो” से कम नहीं होगी।
गर्मियों में हेल्दी रहने के लिए बदलें खानपान, हाई-प्रोटीन फूड देगा एनर्जी और फिटनेस

नई दिल्ली । गर्मी का मौसम शुरू होते ही शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। तेज धूप, पसीना और लगातार थकान के कारण शरीर जल्दी कमजोर महसूस करने लगता है। ऐसे समय में केवल व्यायाम या जिम पर ध्यान देना काफी नहीं होता, बल्कि सही डाइट सबसे अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर खानपान संतुलित और पौष्टिक रखा जाए, तो गर्मियों में भी शरीर को एक्टिव, हल्का और फिट बनाए रखना आसान हो सकता है। दिन की शुरुआत हमेशा ऐसे भोजन से करनी चाहिए जो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा दे और लंबे समय तक भूख महसूस न होने दे। सुबह के समय प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर चीजों का सेवन शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। बादाम, अंडे और हल्के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ पूरे दिन एनर्जी बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा भी कम होती है। दोपहर के भोजन में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लेना बेहतर माना जाता है। गर्मियों में ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन शरीर को सुस्त बना सकता है। इसलिए हरी सब्जियां, सलाद और प्रोटीन से भरपूर भोजन को अधिक फायदेमंद माना जाता है। खीरा, टमाटर और पत्तेदार सब्जियां शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं, जबकि प्रोटीन शरीर की ताकत बनाए रखने का काम करता है। ऐसा भोजन दिनभर शरीर को फ्रेश और हल्का महसूस कराने में मदद करता है। शाम के समय अक्सर शरीर में थकान महसूस होने लगती है और ऊर्जा कम होने लगती है। ऐसे समय में हेल्दी स्नैक्स लेना जरूरी माना जाता है। दही, योगर्ट, चिया सीड्स या हल्के पौष्टिक विकल्प शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ पेट को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं। गर्मियों में ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं और लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखते हैं। रात के भोजन को हमेशा हल्का लेकिन पोषण से भरपूर रखना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक रात में ऐसा खाना लेना चाहिए जो जल्दी पच जाए और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिल सकें। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर डिनर वजन नियंत्रण में मदद करता है और शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसके अलावा यह शरीर की थकान कम करने और अगले दिन के लिए ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। फिटनेस बनाए रखने के लिए खानपान के साथ-साथ पर्याप्त पानी पीना भी बेहद जरूरी है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है, इसलिए नियमित रूप से पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। हल्की एक्सरसाइज, योग और रोजाना वॉक जैसी आदतें भी शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग अपने डेली रूटीन में छोटे-छोटे हेल्दी बदलाव करें, तो गर्मियों में भी आसानी से फिट और ऊर्जावान बना रह सकते हैं।
बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व

नई दिल्ली। बड़ा मंगल हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय पर्व है। यह विशेष रूप से ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को मनाया जाता है। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व को बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है। बड़ा मंगल क्यों मनाया जाता है?बड़ा मंगल मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान Hanuman जी की आराधना करना और उनके आशीर्वाद से जीवन में शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति प्राप्त करना है। मान्यता है कि हनुमान जी संकटमोचक हैं और उनकी पूजा करने से: जीवन के कष्ट दूर होते हैं भय और नकारात्मकता समाप्त होती है आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है मंगल ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है बड़ा मंगल की शुरुआत और इतिहासबड़ा मंगल की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है, हालांकि इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक प्रमाणित आरंभ नहीं मिलता। यह परंपरा मुख्य रूप से अवध क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि, यह परंपरा कई सौ वर्ष पुरानी हैमुगल काल और अवध के नवाबों के समय में यह परंपरा और अधिक लोकप्रिय हुईलखनऊ में हनुमान मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे उत्तर भारत में फैल गई। समय के साथ यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक बन गया। बड़ा मंगल की परंपराएं और आयोजनबड़ा मंगल के दिन देशभर में विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजन किए जाते हैं: 1. विशेष पूजा और आरतीहनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और आरती का पाठ किया जाता है। 2. भंडारे और लंगरइस दिन सबसे खास परंपरा भंडारे की होती है, जिसमें हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। यह सेवा भावना का प्रतीक है। 3. सेवा कार्यभक्त गरीबों, जरूरतमंदों और राहगीरों की सेवा करते हैं, जो इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषता है। 4. भक्ति और जुलूसकई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। बड़ा मंगल का सामाजिक महत्वबड़ा मंगल केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी प्रतीक है। यह दिन लोगों को जोड़ने का कार्य करता है और समाज में दया, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।इस दिन अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है और सभी लोग एक साथ सेवा और भक्ति में शामिल होते हैं। बड़ा मंगल का आधुनिक महत्वआज के समय में भी बड़ा मंगल की परंपरा उतनी ही मजबूत है। बदलते समय के साथ डिजिटल माध्यमों से भी भक्ति कार्यक्रम साझा किए जाते हैंबड़े स्तर पर भंडारों का आयोजन होता हैयुवा पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ रही हैयह पर्व आधुनिक समाज में भी आस्था और सेवा का संतुलन बनाए हुए है।बड़ा मंगल हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता में निहित है। हनुमान जी की आराधना हमें जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मकता प्रदान करती है।यह पर्व हर साल भक्तों को यह याद दिलाता है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा है।
फ्लोरेंस नाइटिंगेल: आधुनिक नर्सिंग की जननी और मानवता की प्रेरणा

जब भी हम आधुनिक नर्सिंग की बात करते हैं, सबसे पहले जिस नाम का स्मरण होता है, वह है फ्लोरेंस नाइटिंगेल। उन्हें केवल एक नर्स ही नहीं, बल्कि एक महान समाजसेविका, सुधारक और मानवता की सच्ची सेविका के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 12 मई 1820 को हुआ था, और यही तारीख आगे चलकर पूरी दुनिया में नर्सिंग के सम्मान के प्रतीक के रूप में स्थापित हो गई। प्रारंभिक जीवन और सोचफ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म एक समृद्ध और शिक्षित परिवार में हुआ था। उस समय महिलाओं के लिए नर्सिंग को सम्मानजनक पेशा नहीं माना जाता था, लेकिन फ्लोरेंस ने सामाजिक बंधनों को तोड़कर मानव सेवा का मार्ग चुना।उनका मानना था कि सेवा केवल भावना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए। क्राइमियन युद्ध और परिवर्तन की शुरुआत1850 के दशक में क्राइमियन युद्ध के दौरान फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने घायल सैनिकों की सेवा का बीड़ा उठाया। जब वे युद्ध क्षेत्र में पहुंचीं, तो वहां की स्थिति अत्यंत खराब थी—अस्वच्छता, संक्रमण और अव्यवस्था के कारण सैनिक बड़ी संख्या में मर रहे थे। फ्लोरेंस ने वहां स्वच्छता व्यवस्था को सुधारा मरीजों की देखभाल के नियम बनाए नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया रात-दिन मरीजों की सेवा की उनकी मेहनत से मृत्यु दर में भारी कमी आई, और वे “द लेडी विद द लैंप” के नाम से प्रसिद्ध हुईं। आधुनिक नर्सिंग की नींवफ्लोरेंस नाइटिंगेल ने यह साबित किया कि नर्सिंग केवल सेवा नहीं, बल्कि एक पेशेवर और वैज्ञानिक कार्य है। उन्होंने 1860 में लंदन में पहला नर्सिंग स्कूल स्थापित किया, जहाँ से आधुनिक नर्सिंग शिक्षा की शुरुआत हुई।उनके प्रयासों ने नर्सिंग को एक सम्मानजनक और संगठित पेशे के रूप में दुनिया के सामने स्थापित किया। सामाजिक सुधार और योगदानफ्लोरेंस नाइटिंगेल केवल नर्स ही नहीं थीं, बल्कि एक महान सुधारक भी थीं। उन्होंने: अस्पतालों में स्वच्छता नियम लागू किए स्वास्थ्य आंकड़ों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार किया महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी उनका कार्य आज भी आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली की नींव माना जाता है। 12 मई का महत्वफ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन 12 मई को ही हर वर्ष International Nurses Day के रूप में मनाया जाता है। यह दिन नर्सों के योगदान को सम्मान देने और उनके कार्य को सराहने के लिए समर्पित है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची सेवा वही है जो बिना स्वार्थ के दूसरों के जीवन को बेहतर बनाए। उन्होंने नर्सिंग को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का महान मार्ग बना दिया।आज भी उनका जीवन दुनिया भर की नर्सों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। –अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस विशेष
सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम: शेयर बाजार की बड़ी गिरावट से निवेशकों में घबराहट

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन बाजार खुलते ही निवेशकों में हड़कंप मच गया। बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में तेज बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़े नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स सैकड़ों अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी अहम स्तर के नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। मिडिल ईस्ट तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया। बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कई दिग्गज बैंकिंग स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार करते रहे। आईटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे टेक इंडेक्स पर असर पड़ा। मेटल और ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि कुछ एफएमसीजी शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बाजार की चाल पर नजर बनाए रखनी चाहिए। इस गिरावट के चलते निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए। छोटे निवेशकों में सबसे ज्यादा बेचैनी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी बाजार की गिरावट को लेकर चर्चा तेज रही। कई निवेशकों ने इसे हाल के महीनों की बड़ी गिरावटों में से एक बताया।
जिम सप्लीमेंट लेने वाले हो जाएं सावधान! लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये आदतें

नई दिल्ली। आजकल फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। जिम जाने वाले कई लोग जल्दी रिजल्ट पाने के लिए प्रोटीन पाउडर, फैट बर्नर और दूसरे फिटनेस सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि गलत तरीके से लिए गए फिटनेस सप्लीमेंट्स लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना हो सकता है खतरनाकविशेषज्ञों के मुताबिक कई फिटनेस सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट्स का सेवन करता है, तो इससे लिवर डैमेज का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर परस्टेरॉयड बेस्ड सप्लीमेंट्सबिना लाइसेंस वाले प्रोडक्टअनजान ब्रांड्स के सप्लीमेंट्सऑनलाइन बिकने वाले नकली प्रोडक्टसेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक माने जाते हैं। शरीर में दिख सकते हैं ये खतरनाक संकेपेट दर्दउल्टी या मितलीलगातार थकानभूख कम लगनाआंखों या त्वचा का पीला पड़नालिवर इंफेक्शनअगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना जाता है। इन गलतियों से बचने की सलाह डॉक्टरों और फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।इसके अलावा इन बातों का भी ध्यान रखना जरूरी है:जरूरत से ज्यादा डोज न लेंकई सप्लीमेंट्स एक साथ न लेंपर्याप्त पानी पिएंजरूरत से ज्यादा वर्कआउट से बचेंकेवल भरोसेमंद ब्रांड का इस्तेमाल करें फिट रहने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अच्छी फिटनेस के लिए सिर्फ सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और सही लाइफस्टाइल ही शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। सावधानी जरूरीफिटनेस सप्लीमेंट्स सही मात्रा और सही सलाह के साथ लिए जाएं तो मददगार हो सकते हैं, लेकिन लापरवाही और गलत इस्तेमाल से यही सप्लीमेंट्स शरीर के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसलिए फिटनेस के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।