52 साल बाद जापान पहुंचे ताइवान के पीएम, क्यों तिलमिलाया ड्रैगन?

वीजिंग। ताइवान के प्रधानमंत्री चो जुंग-ताई के जापान (Japan) दौरे को लेकर एशियाई राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। ताइवान के प्रधानमंत्री के इस दौरे पर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसके पीछे “नापाक मंशा” होने का आरोप लगाया है। बीजिंग का कहना है कि निजी यात्रा की आड़ में ताइवान की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान के प्रधानमंत्री सप्ताहांत में Japan पहुंचे थे, जहां उन्होंने World Baseball Classic में ताइवान की टीम का समर्थन किया। हालांकि ताइवान सरकार ने साफ किया कि यह पूरी तरह निजी दौरा था और इसका किसी आधिकारिक कूटनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। 1972 के बाद पहली ऐसी यात्रा ताइवानी मीडिया के अनुसार, 1972 में टोक्यो और ताइपे के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध टूटने के बाद यह पहला मौका है जब किसी मौजूदा ताइवानी प्रधानमंत्री ने जापान का दौरा किया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने आरोप लगाया कि चो जुंग-ताई “चुपके और गुप्त तरीके से” स्वतंत्रता समर्थक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जापान को ऐसे “उकसावे” की कीमत चुकानी पड़ सकती है। जापान ने बताया निजी दौरा जापान ने इस पूरे मामले के राजनीतिक महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश की है। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव Minoru Kihara ने कहा कि टोक्यो इस यात्रा को निजी मानता है और इस दौरान ताइवानी प्रधानमंत्री तथा जापानी सरकारी अधिकारियों के बीच कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई। हालांकि जापान और Taiwan के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, लेकिन दोनों के बीच मजबूत आर्थिक, सांस्कृतिक और अनौपचारिक राजनीतिक रिश्ते मौजूद हैं। ताइवान का चीन को जवाब ताइवान ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि उसके नेताओं को अन्य देशों की यात्रा करने और उनसे संवाद करने का पूरा अधिकार है। ताइपे का कहना है कि चीन का ताइवान पर संप्रभुता का दावा निराधार है और द्वीप का भविष्य वहां की जनता तय करेगी। जापान से लौटने के बाद चो जुंग-ताई ने भी कहा कि उनकी यात्रा पूरी तरह निजी थी और इसका उद्देश्य ताइवान की राष्ट्रीय बेसबॉल टीम का समर्थन करना था। ऐतिहासिक रूप से जटिल रिश्ते ताइवान और जापान के रिश्ते इतिहास में काफी जटिल रहे हैं। Japan ने 1895 से लेकर 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने तक ताइवान पर उपनिवेश के रूप में शासन किया था। औपचारिक कूटनीतिक संबंध न होने के बावजूद दोनों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जारी है। 2022 में Lai Ching-te, जो उस समय ताइवान के उपराष्ट्रपति थे, Shinzo Abe की हत्या के बाद श्रद्धांजलि देने टोक्यो भी गए थे। क्यों नाराज रहता है चीन बीजिंग लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसकी किसी भी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का विरोध करता रहा है। चीन का कहना है कि ताइवान के नेताओं और विदेशी सरकारों के बीच अनौपचारिक या प्रतीकात्मक संपर्क भी उसके “एक चीन” सिद्धांत को कमजोर कर सकता है। यही वजह है कि ताइवान के नेताओं के विदेश दौरों पर चीन अक्सर कड़ी प्रतिक्रिया देता रहा है और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला।
शिवराज सिंह चौहान का तीखा हमला: ममता बनर्जी पर निशाना, कहा– ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से रोकी केंद्र की योजनाएं, हम बदलेंगे किसानों का भाग्य

नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखे तेवर अपनाए। प्रश्नकाल के दौरान शिवराज ने कहा कि बंगाल की सरकार को जनहित से ज्यादा राजनीति प्यारी है। उन्होंने कहा, “विपक्ष तख्तियां लेकर हाय-हाय करता रहे, लेकिन दुनिया भारत की कृषि नीतियों की तारीफ कर रही है। जलने वाले जला करें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे।” नाम की राजनीति: ‘प्रधानमंत्री’ शब्द पर आपत्तिशिवराज सिंह ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री कृषि धन धान्य योजना और अन्य महत्वपूर्ण केंद्र योजनाएं केवल इसलिए लागू नहीं की गईं क्योंकि इनके नाम में ‘प्रधानमंत्री’ जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे किसानों के साथ “खुला अन्याय और पाप” करार दिया। उनका कहना था कि यह नीतियों को रोककर आम जनता और किसानों के हक पर हमला है। वोट बैंक बनाम किसानों की भलाईकेंद्रीय मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि टीएमसी सरकार को मिट्टी की उर्वरता, किसानों की आय और जनता के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने बंगाल में प्राकृतिक खेती मिशन के ठंडे बस्ते में डालने को इसका प्रमाण बताया। शिवराज ने कहा कि ममता सरकार केवल अपने वोट बैंक को साधने में लगी है और किसानों के हित की परवाह नहीं करती। चीन को पीछे छोड़ भारत का रिकॉर्डशिवराज सिंह चौहान ने गर्व से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पछाड़ दिया है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “एक समय था जब हम अनाज मांगते थे, आज हमारी फसलें इतनी हैं कि भंडार भर गए हैं। यह भाजपा सरकार की कृषि नीतियों की सफलता है।” शिवराज का यह बयान राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। विपक्ष ने केंद्र की योजनाओं को रोकने का आरोप ममता बनर्जी पर लगाया है, जबकि भाजपा इसे किसानों की भलाई और विकास की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
जबलपुर हाईकोर्ट में पिता भ्रूण लेकर पहुंचा, बोला न्याय नहीं मिला तो इच्छा मृत्यु की इजाजत दें, पूरे परिवार की जान खतरे में

जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट में एक संवेदनशील और हैरतअंगेज मामला सामने आया है। रीवा जिले के निवासी दयाशंकर पांडे जो वर्ष 2024 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भी भाग ले चुके हैं न्याय की मांग लेकर कोर्ट पहुंचे और हाथ में भ्रूण लेकर कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो उन्हें इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए। पांडे ने कोर्ट में यह भी दावा किया कि उनके पूरे परिवार की जान खतरे में है। पांडे ने कोर्ट में आरोप लगाया कि एक कारोबारी ने उन पर जानलेवा हमला किया जिसके कारण उनकी पत्नी का गर्भपात हो गया। उन्होंने बताया कि मिसकैरेज के बाद वे भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। फरियादी ने यह भी दलील दी कि चुनाव लड़ने और सच बोलने के कारण उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और स्थानीय पुलिस ने शिकायत के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन पर हमला हुआ है। चुनावी रंजिश और राजनीतिक मतभेदों के चलते वर्ष 2024 से लेकर अब तक कई बार उन पर हमला हो चुका है। पांडे का कहना है कि अब वे अपने परिवार की सुरक्षा के लिए और न्याय पाने के लिए न्यायालय के पास पहुंचे हैं। कोर्ट में पेश की गई दलीलों में यह सामने आया कि पांडे लगातार धमकियों और हमलों का सामना कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि पुलिस और प्रशासन पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे इच्छा मृत्यु का विकल्प चुनने के लिए बाध्य होंगे। वकीलों और कोर्ट अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्री ने मामले की सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। कोर्ट ने फिलहाल सुरक्षा और मामले की त्वरित जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है। यह मामला राज्य में राजनीतिक रंजिश चुनावी हिंसा और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। न्यायिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा संवेदनशीलता और कानूनी सहायता बेहद जरूरी होती है। हाईकोर्ट अब इस मामले में सुरक्षा उपायों आरोपों की जांच और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहा है। पांडे की यह अपील न केवल व्यक्तिगत न्याय की मांग है बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था की भी परीक्षा है कि वे संवेदनशील मामलों में कितनी तत्परता और जवाबदेही दिखा पाते हैं। अब राज्य प्रशासन और हाईकोर्ट की निगाह इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई पर है ताकि पीड़ित और उनके परिवार को सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाधान मिल सके।
STSF की बड़ी कार्रवाई: 9 साल से फरार तारकनाथ घोष यूपी से गिरफ्तार, वन्यजीव तस्करी गिरोह को बड़ा झटका

भोपाल । मध्यप्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष निर्देशों के बाद सक्रिय फोर्स ने अंतरराष्ट्रीय कुख्यात तस्कर तारकनाथ घोष को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी एक ऐसे आरोपी की थी जो पिछले 9 वर्षों से फरार चल रहा था और जिसके खिलाफ राज्य में कछुओं और घड़ियालों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े तीन गंभीर मामले दर्ज थे। जानकारी के अनुसार तारकनाथ घोष के खिलाफ ये मामले 5 मई 2017 को CBI को सुपुर्द किए गए थे। तस्करी का यह जाल केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं था बल्कि यह भारत के कई राज्यों और बांग्लादेश व थाईलैंड तक फैला हुआ था। STSF ने लंबे समय से इस पर नजर रखी थी और आरोपी को पकड़ने के लिए 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। गिरफ्तारी एक संयुक्त अभियान का हिस्सा थी जिसमें वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो रेलवे पुलिस और अन्य स्थानीय इकाइयों ने सहयोग किया। इस संयुक्त अभियान में STSF ने बड़े पैमाने पर खुफिया जानकारी और जमीन पर निगरानी का इस्तेमाल किया। कानपुर में किए गए ऑपरेशन के दौरान तारकनाथ घोष को घेराबंदी कर पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपी को विशेष न्यायालय शिवपुरी में पेश किया गया जहां से उसे रिमांड पर लिया गया है। STSF की टीम फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि उसके पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाया जा सके और अन्य शामिल व्यक्तियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोहों के लिए बड़ा झटका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सफलता पर STSF और अन्य सहयोगी टीमों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है और अवैध तस्करी पर किसी प्रकार की सहनशीलता नहीं दिखाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां न केवल तस्करों के लिए चेतावनी हैं बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। वन्यजीव अधिकारियों ने बताया कि इस गिरफ्तारी से प्रदेश में कछुओं घड़ियालों और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों की तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आरोपी के पूछताछ के आधार पर पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण में ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इस अभियान से यह भी स्पष्ट हो गया है कि मध्यप्रदेश सरकार और STSF वन्यजीव तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार सक्रिय हैं। अब अधिकारियों की नजर इस नेटवर्क के अन्य सक्रिय सदस्य और अंतरराष्ट्रीय लिंक पर है ताकि भविष्य में इस तरह की तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
चंडीगढ़ ब्रांच फ्रॉड केस में बड़ा कदम, IDFC First Bank ने चुकाए 645 करोड़ रुपये के दावे
नई दिल्ली। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक IDFC First Bank ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में सामने आए धोखाधड़ी मामले से जुड़े सभी दावों का निपटारा कर दिया है। बैंक ने प्रभावित खातों से जुड़े कुल 645 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। यह राशि बैंक के शुरुआती अनुमान से करीब 55 करोड़ रुपये अधिक है। बैंक ने यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी और स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। बैंक के मुताबिक सभी दावे उसी घटना और उसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं और फिलहाल किसी नए मामले की पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती अनुमान से बढ़ी भुगतान राशिबैंक के अनुसार शुरुआत में धोखाधड़ी की राशि करीब 590 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि बाद में जांच और खातों के मिलान के दौरान कुछ अतिरिक्त दावे सामने आए, जिसके बाद कुल भुगतान बढ़कर 645 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बैंक ने कहा कि उसने सभी प्रभावित ग्राहकों के दावों का निपटारा अपने निर्धारित सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि 25 फरवरी 2026 के बाद देश भर में इस घटना से संबंधित कोई नया दावा सामने नहीं आया है। ग्राहकों के खातों का पूरा मिलानआईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस मामले से जुड़े सभी खातों का मिलान पूरा कर लिया गया है। बैंक ने कहा कि यह घटना केवल चंडीगढ़ की एक शाखा तक सीमित थी और पूरे बैंकिंग सिस्टम पर इसका कोई व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा है। बैंक ने अपने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह भी कहा कि वह इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा और धोखाधड़ी से हुई राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी रखेगा। बैंक के डिपॉजिट बेस पर नहीं पड़ा असरबैंक के मुताबिक इस घटना के बावजूद उसके डिपॉजिट बेस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। 28 फरवरी 2026 तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपये रहा, जबकि दिसंबर 2025 के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपये था। इससे साफ संकेत मिलता है कि ग्राहकों का भरोसा बैंक पर बना हुआ है और जमा राशि में स्थिरता बनी हुई है। बैंक ने यह भी बताया कि उसका लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) मौजूदा तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है, जो बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूत दर्शाता है। हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ा था मामलाइससे पहले सामने आई जानकारी के अनुसार यह मामला Haryana सरकार के कुछ खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित था। इस मामले में बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने अंतरराष्ट्रीय ऑडिट फर्म KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट का जिम्मा सौंपा है। उम्मीद है कि इस ऑडिट की अंतिम रिपोर्ट अगले चार से पांच सप्ताह के भीतर सामने आ जाएगी, जिससे पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। जांच पूरी होने तक चार अधिकारी निलंबितबैंक ने इस घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। बैंक का कहना है कि जांच पूरी होने तक ये अधिकारी अपने पद पर नहीं रहेंगे। इस बीच घटना के बाद Government of Haryana ने एहतियाती कदम उठाते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ-साथ AU Small Finance Bank को भी सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। बैंक ने कहा कि जांच पूरी होने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल वह ग्राहकों के हितों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।
मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन शून्य घोषित होने के फैसले को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए विश्वास जताया कि वहां न्याय मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले में दबाव बनाकर निर्णय करवाना चाहती है, क्योंकि उन्हें यह स्वीकार नहीं है कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया। पटवारी ने भाजपा को चुनौती देते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है तो इस मामले में भी निर्णय कराए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य में सूचना आयोग के खाली पदों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है और सरकार इस मामले में बेहद धीमी गति से काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत कर दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग भी की। सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले और गैस सिलेंडर की कमी एवं महंगाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि भाजपा हर मामले में देर से निर्णय लेती है और जनता को राहत देने के बजाय केवल खजाना भरने में लगी है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और अनावश्यक टिप्पणियों से उनकी अज्ञानता उजागर होती है। यह राजनीतिक वार्ता मध्य प्रदेश में आगामी चुनाव और राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ते तनाव की झलक देती है। विपक्ष और सरकार के बीच जारी इस बहस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं। Keywords: विजयपुर फैसला, मध्य प्रदेश राजनीति, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, भाजपा, सुप्रीम कोर्ट, निर्मला सप्रे, सूचना आयोग, नरोत्तम मिश्रा, गैस सिलेंडर, महंगाई, आदिवासी विधायक
मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव का ऐलान: 12 मई को मतदान, 93 हजार अधिवक्ता चुनेंगे 26 सदस्य

भोपाल । मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है जिसके तहत 12 मई 2026 को मतदान कराया जाएगा जबकि मतगणना की प्रक्रिया 16 जून से शुरू होगी। इस चुनाव में प्रदेशभर के करीब 93 हजार अधिवक्ता भाग लेंगे और वे 26 सदस्यों के चयन के लिए मतदान करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एस. के. पालो को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है। जारी किए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले 16 मार्च को प्रोविजनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद अधिवक्ताओं को 24 मार्च तक मतदाता सूची में अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद 1 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलेगी जिसमें इच्छुक अधिवक्ता अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इस दौरान चुनाव अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज और पात्रता नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके बाद जिन उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ना होगा वे 20 से 22 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद 22 अप्रैल को शाम 5 बजे तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। इसी सूची के आधार पर 12 मई को प्रदेशभर में मतदान कराया जाएगा। इस चुनाव की खास बात यह है कि इसमें महिला अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल में कुल 25 सदस्यों का चुनाव होता है जबकि एक सदस्य नामित किया जाता है जिससे कुल संख्या 26 हो जाती है। इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। हालांकि इनमें से पांच पदों के लिए ही चुनाव कराया जाएगा जबकि शेष दो पदों पर मनोनयन के माध्यम से महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था और तब से परिषद एक्सटेंशन पर काम कर रही है। इस मामले को लेकर अदालत में सुनवाई भी हुई थी। 4 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बार काउंसिल के चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएं। अदालत के निर्देश के बाद अब चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। बार काउंसिल के इस चुनाव को प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिषद अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक पेशेवर और अनुशासनात्मक मामलों में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की नजर अब आगामी चुनाव प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
नवजातों के लिए पहला टीका बनेगा मां का दूध सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नई दिल्ली। नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती। ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है।ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधाराजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा।अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा। भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंकराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी। इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी। सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजनादरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है। ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंकह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके। किन बच्चों को दिया जाता है यह दूधह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है। मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है।हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंकहमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहाराह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है।
ग्लोबल संकेतों से बाजार में जोश, हरे निशान में खुला शेयर मार्केट; कंज्यूमर स्टॉक्स में जोरदार खरीदारी

नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को जोरदार शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। BSE Sensex 809 अंक यानी करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ 78,375.73 के स्तर पर खुला। वहीं Nifty 50 भी 252 अंक या लगभग एक प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,280.80 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल और घरेलू स्तर पर निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते शुरुआती सत्र में बाजार में उत्साह दिखाई दिया। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारीमंगलवार के शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी का नेतृत्व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने किया। Nifty Consumer Durables Index दो प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ टॉप गेनर बनकर उभरा। इसके अलावा ऑटो, पीएसयू बैंक, रियल्टी, मैन्युफैक्चरिंग, मेटल, फार्मा, डिफेंस, हेल्थकेयर, मीडिया, कमोडिटी और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जिसके चलते ये सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजीलार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी तेजी का रुख देखने को मिला। Nifty Midcap 100 Index 618 अंक यानी 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 56,884 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 224 अंक या 1.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,357 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। इससे साफ संकेत मिला कि बाजार में केवल बड़ी कंपनियों ही नहीं, बल्कि मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में रही बढ़तसेंसेक्स पैक में कई दिग्गज कंपनियों के शेयर तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इनमें InterGlobe Aviation, UltraTech Cement, Asian Paints, Mahindra & Mahindra, Adani Ports, Titan Company, Tata Steel, Larsen & Toubro, ICICI Bank, State Bank of India, Maruti Suzuki, Bajaj Finserv, HDFC Bank, Hindustan Unilever, Trent Limited, Kotak Mahindra Bank, Bharat Electronics Limited और Sun Pharmaceutical शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCLTech, Power Grid Corporation of India, Bharti Airtel, ITC Limited और Axis Bank के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला सपोर्टवैश्विक बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। एशिया के प्रमुख बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite Index और Hang Seng Index बढ़त के साथ खुले। इसके अलावा बैंकॉक, जकार्ता और सोल के बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार भी सोमवार के कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। Dow Jones Industrial Average में करीब 0.50 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी आधारित Nasdaq Composite में 1.38 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। एफआईआई ने बेचे शेयर, डीआईआई ने किया निवेशनिवेश के मोर्चे पर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख अलग-अलग रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी Foreign Institutional Investors ने सोमवार को 6,345.57 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी Domestic Institutional Investors ने 9,013.80 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा दिया। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमीअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी के बाद अब कुछ नरमी देखने को मिल रही है। खबर लिखे जाने तक WTI Crude Oil 6.30 प्रतिशत गिरकर 88.80 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं Brent Crude 6.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक संकेतों की मजबूती और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से फिलहाल बाजार में सकारात्मक रुख बना हुआ है, हालांकि आगे के सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
भोपाल: 'ईरानी डेरे' से 'सेक्स रैकेट' तक अमरीन-आफरीन की खौफनाक दास्तां; स्पा सेंटर की आड़ में चल रहा था धर्मांतरण और ड्रग्स का खेल
भोपाल। राजधानी पुलिस की गिरफ्त में आई शातिर बहनें अमरीन और आफरीन के अतीत ने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया है। पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि 20 साल पहले लखनऊ के एक ‘ईरानी कबीले’ से भोपाल आया यह परिवार, पिता की मौत के बाद अपराध की दुनिया में उतर गया। कभी अभावों में जीने वाली इन बहनों ने स्पा सेंटरों के जरिए हाई-प्रोफाइल नेटवर्क बनाया और फिर शुरू हुआ मासूम लड़कियों को नर्क में धकेलने का सिलसिला। मोड्स ऑपरेंडी: बच्चा संभालने की नौकरी और फिर ‘हवस’ का जालइन बहनों का गिरोह लड़कियों को फंसाने के लिए एक तय ‘पैटर्न’ पर काम करता था: पहले लड़कियों को बच्चा संभालने के नाम पर घर में नौकरी देतीं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह रखतीं।लड़कियों को शराब और MD ड्रग्स की लत लगाई जाती। फिर मौका पाकर इनके साथी चंदन, बिलाल और चानू लड़कियों के साथ रेप करते। ब्लैकमेलिंग और सौदा: बदनामी का डर दिखाकर इन लड़कियों को अहमदाबाद के यासिर के पास भेज दिया जाता, जहाँ उनसे जबरन देह व्यापार कराया जाता। धर्मांतरण का दबाव: ‘इस्लाम की अच्छाइयां’ और शादी का झांसापीड़िताओं ने खुलासा किया है कि ये बहनें गिरोह में शामिल चंदन यादव (जो अब प्रिंस बन चुका है) की तरह ही अन्य लड़कियों का भी धर्म परिवर्तन कराना चाहती थीं। वे लगातार इस्लाम की पांच अच्छाइयां बताकर लड़कियों को कन्वर्ट होने और किसी अमीर जगह निकाह कराने का प्रलोभन देती थीं। पुलिस जांच: मोबाइल चैट और संदिग्ध वॉट्सएप ग्रुपगिरफ्तार आरोपी अमरीन और चंदन के मोबाइल पुलिस के लिए सबूतों का खजाना साबित हो रहे हैंअमरीन के मोबाइल में कई ऐसे वॉट्सएप ग्रुप मिले हैं जिनमें दर्जनों लड़कियों के फोटो और सौदेबाजी की बातें हैं।पुलिस की दो टीमें अब बिलाल (मौसेरा भाई), चानू उर्फ हाशिम और अहमदाबाद के यासिर की तलाश में मुंबई और गुजरात में दबिश दे रही हैं।छोटी बहन आफरीन ने अब तक अपना मोबाइल पुलिस को नहीं सौंपा है और वह लगातार जांच टीम को गुमराह कर रही है। ड्रग्स और तस्करी का कनेक्शनपीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि यह गिरोह केवल देह व्यापार ही नहीं, बल्कि एमडी (MD) ड्रग्स की तस्करी में भी शामिल है। भोपाल और छत्तीसगढ़ की दो युवतियों की इंस्टाग्राम पर हुई पहचान ने इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने में बड़ी भूमिका निभाई। अमरीन और आफरीन की यह कहानी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की साजिश है जो धर्म और नशे का सहारा लेकर जिंदगियां तबाह कर रहा था। पुलिस की मुस्तैदी ने इस ‘ईरानी कनेक्शन’ वाले रैकेट को तोड़ तो दिया है, लेकिन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी इस केस की अंतिम कड़ी होगी