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GUDI PADWA: आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष

  GUDI PADWA: नई दिल्ली । आज हिंदू धर्म के लिए बेहद खास दिन है क्योंकि तीन महत्वपूर्ण पर्व गुड़ी पड़वा नवरात्रि और उगादी एक साथ मनाए जा रहे हैं। उत्तर भारत में यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जबकि दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश तेलंगाना और कर्नाटक में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह दिन गुड़ी पड़वा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का पर्व है। उगादी का महत्व उगादी का अर्थ है युग की शुरुआत और इसे प्रकृति के श्रृंगार और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और समय की गणना भी इसी दिन से शुरू हुई थी। यह पर्व नए अवसर समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। शुभ मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आज यानी 19 मार्च को सुबह 6:52 से शुरू होकर कल 20 मार्च को शाम 5:52 तक रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 8:08 बजे तक है जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 से 1:11 बजे तक रहेगा। गुड़ी बांधने का समय महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के अवसर पर गुड़ी बांधने और ध्वज फहराने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:15 से 7:57 बजे तक है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं रंगोली बनाते हैं और विशेष पकवान तैयार करते हैं। गुड़ी पड़वा नई शुरुआत समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। आज का दिन तीनों पर्वों के संगम और नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जो पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

INDIAN SWIMMER GOLD MEDAL: पानी से डरने वाली लड़की बनी गोल्ड मेडलिस्ट, Nisha Millet की प्रेरणादायक कहानी

  INDIAN SWIMMER GOLD MEDAL: नई दिल्ली। निशा मिलेट का नाम भारतीय तैराकी इतिहास में एक प्रेरणा के रूप में लिया जाता है। यह कहानी सिर्फ मेडल जीतने की नहीं, बल्कि अपने सबसे बड़े डर को हराकर उसे ताकत में बदलने की है। जिस लड़की को बचपन में पानी से डर लगता था, उसी ने आगे बढ़ते देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल दिलाया। जब पानी से था गहरा डर निशा मिलेट का जन्म 20 मार्च 1982 को बेंगलुरु में हुआ। बचपन में उनका पानी से डर इतना गहरा था कि 5 साल की उम्र में वह डूबते-डूबते नियतं। यह घटना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई। उनके पिता ने फैसला किया कि डर से दौड़ने के बजाय उनका सामना करना चाहिए, और दब से तैराकी की शुरुआत हुई। डर को हराकर जुनून बनाया 1991 में चेन्नई के शेनॉय नगर क्लब में उन्होंने तैराकी सीखनी शुरू की। शुरुआत में यह सिर्फ डर दूर करने का जरिया था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया। कड़ी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें जल्द ही एक उभरती हुई तैराकी बना दिया। छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धियां सिर्फ एक साल के अंदर ही 1992 में निशा ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल में अपना पहला स्टेट मेडल जीता। 1994 में, जब वह सब-जूनियर थीं, तब उन्होंने सीनियर नेशनल में पांचों फ्रीस्टाइल इवेंट में गोल्ड मेडल जीते। इसी साल उन्होंने हांगकांग में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला मेडल हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन निशा मिलेट ने एशियन गेम्स 1998, वर्ल्ड चैंपियनशिप 1999 और 2004 जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने सैफ गेम्स और एफ्रो-एशियन गेम्स में भी कई मेडल जीते। 1999 के नेशनल गेम्स में उन्होंने 14 गोल्ड मेडल जीते। उसी साल काठमांडू में आयोजित दक्षिण एशियाई खेलों में उन्होंने 6 गोल्ड मेडल जीते। ओलंपिक तक का सफर निशा के करियर का सबसे बड़ा पड़ाव सिडनी 2000 ओलंपिक रहा। यहां उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल में हिस्सा लिया और अपनी हीट जीती। उन्होंने ओलंपिक के लिए बी क्वालिफिकेशन टाइम हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला तैराकी बनाई। रिकॉर्ड और उपलब्धियां उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर फ्रीस्टाइल में 15 साल तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम रखा। साथ ही, उन्होंने 100 मीटर फ्रीस्टाइल में एक मिनट का बैरियर तोड़ने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। यह उपलब्धि भारतीय तैराकी में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जाती है। संघर्ष और संन्यास 2002 में पीठ की सर्जरी के बाद उनका करियर प्रभावित हुआ। 2004 ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन करने से मामूली अंतर से चूकने और आर्थिक दिक्कतों के कारण उन्होंने तैराकी से संन्यास ले लिया। हालांकि, खेल से उनकी गतिविधि कभी खत्म नहीं हुई। आज भी दे रही नई पीढ़ी को दिशा संन्यास के बाद निशा मिलेट अपनी स्विमिंग अकादमी के जरिए नई पीढ़ी के तैराकीकों को ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और अनुशासन विकसित करना है।

ISHAN KISHAN JOURNEY: मेहनत का फल मिला: Ishan Kishan बने प्रेरणा, बदलते वक्त की मिसाल

  ISHAN KISHAN JOURNEY: नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने उतार-चढ़ाव का सामना किया, लेकिन जो खिलाड़ी मुश्किल वक्त में खुद को साबित कर देता है, वही असली चैंपियन बनता है। ईशान किशन आज इसी का जीता-जागता उदाहरण बनकर उभरे हैं। एक समय ऐसा था जब उनकी टीम इंडिया में वापसी करना मुश्किल लग रहा था, लेकिन वे हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। टीम से बाहर, लेकिन हिम्मत नहीं हारी टी20 विश्व कप 2026 से पहले तक ईशान किशन भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे। चयन पत्नियों की नजरों से दूर होने के बावजूद उन्होंने अपने खेल पर ध्यान देना नहीं छोड़ा। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन किया और खुद को बेहतर बना रहे। यही वह दौर था जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी। घरेलू क्रिकेट में किया दमदार प्रदर्शन ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट में अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों से कमाल दिखाया। झारखंड की कप्तानी करते हुए उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टीम को चैंपियन बनाया। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 517 रन बनाए और फाइनल में हरियाणा के खिलाफ तूफानी शतक जड़कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। टीम इंडिया में धमाकेदार वापसी उनकी मेहनत रंग लाई और चयनकर्ताओं ने उन्हें दोबारा भारतीय टीम में मौका दिया। ईशान ने इस मौके को दोनों हाथों से भुनाया। टी20 विश्व कप 2026 में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 317 रन बनाए और टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। इस प्रदर्शन के बाद टी20 टीम में उनकी जगह लगभग पक्की हो गई है। आईपीएल में मिली बड़ी जिम्मेदारी इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में ईशान किशन के करियर को नई उड़ान मिली। सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें टीम की कप्तानी सौंपी, क्योंकि रेगुलर कप्तान पैट कमिंस चोटिल हैं। यह उनके लिए बड़ा मौका भी है और चुनौती भी। कप्तानी के जरिए खुद को साबित करने का मौका ईशान किशन के पास अब खुद को एक लीडर के रूप में स्थापित करने का सुनहरा मौका है। अगर वह कप्तानी में सफल रहते हैं, तो भविष्य में उन्हें परमानेंट कप्तान बनाया जा सकता है। उनकी कप्तानी की पहली परीक्षा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मुकाबले में होगी, जहां सभी की नजरें उन पर टिकी रहेंगी। संघर्ष से सीखें, सफलता से निखरे ईशान किशन की कहानी यह सिखाती है कि करियर में कठिन समय आना स्वभाव है, लेकिन उससे हार मान लेना सही नहीं है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान लगातार मेहनत करता रहे, तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है। युवाओं के लिए प्रेरणा बने किशन आज ईशान किशन सिर्फ एक सफल खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका सफर बताता है कि चाहें कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।

AMERCIA IRAN CONFLICT : ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण 39 ट्रिलियन डॉलर पार, आम नागरिकों पर बढ़ सकता है दबाव

  AMERCIA IRAN CONFLICT : नई दिल्ली । ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका पर दोहरे आर्थिक दबाव की चिंता बढ़ गई है। एक तरफ युद्ध पर लगातार बढ़ता खर्च है तो दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रीय ऋण रिकॉर्ड स्तर 39 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका इस्राइल और ईरान के बीच टकराव जारी है। सरकारी जवाबदेही कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ता ऋण सीधे अमेरिकी नागरिकों पर असर डाल सकता है। इसका मतलब है घर कार और अन्य जरूरतों के लिए लोन महंगे हो सकते हैं निजी व्यवसायों के पास निवेश की रकम घट सकती है जिससे मजदूरी में कमी आए और वस्तुएं व सेवाएं महंगी हो सकती हैं। संतुलित बजट के समर्थक चेतावनी देते हैं कि उच्च उधारी और बढ़ते ब्याज भुगतान की प्रवृत्ति भविष्य में आम अमेरिकियों को कठिन वित्तीय निर्णय लेने पर मजबूर करेगी। पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के अध्यक्ष माइकल पीटरसन ने कहा कि इस तरह की ऋण वृद्धि से अगली पीढ़ी पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। उनके अनुसार अगर यही रफ्तार जारी रही तो इस शरद ऋतु के चुनावों से पहले राष्ट्रीय ऋण 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट के मुताबिक ईरान युद्ध पर अब तक लगभग 12 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं और यह स्पष्ट नहीं कि संघर्ष कब समाप्त होगा। ऋण में तेजी केवल वर्तमान प्रशासन तक सीमित नहीं है। संघीय ऋण रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों के कार्यकाल में बढ़ा है और हाल के वर्षों में युद्ध महामारी राहत पैकेज और कर कटौती ने इसे और बढ़ावा दिया है। पांच महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रीय ऋण 38 ट्रिलियन और दो महीने पहले 37 ट्रिलियन डॉलर था जिससे पता चलता है कि यह तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के साथ साथ बढ़ते राष्ट्रीय ऋण ने अमेरिका की आर्थिक स्थिरता पर गंभीर दबाव डाल दिया है। आने वाले समय में सरकार को यह संतुलन बनाना होगा कि सुरक्षा खर्च और आर्थिक स्थिरता के बीच कैसे फैसले लिए जाएं ताकि आम नागरिकों पर असर कम से कम पड़े।

DHURANDHAR 2 : रणवीर सिंह का जलवा बरकरार, लेकिन पहले पार्ट की तरह धमाका नहीं

  DHURANDHAR 2 : नई दिल्ली । रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज रिलीज हो चुकी है और पहले पार्ट की सफलता के बाद इस फिल्म को लेकर हाइप तो जबरदस्त था। दर्शकों ने एडवांस बुकिंग कर अपनी वफादारी दिखाई लेकिन कुछ शहरों में प्रीव्यू शोज़ कैंसल होने से निराशा भी हुई। जो लोग फिल्म देखने पहुंचे उनके लिए अनुभव मिला लेकिन पूरी तरह संतोषजनक नहीं। कहानी फिल्म की कहानी छह चैप्टर में बंटी है। शुरुआत में जसकीरत सिंह रांगी रणवीर सिंह और उसके परिवार की पृष्ठभूमि दिखाई जाती है। पिता भी फौजी थे और जसकीरत भी फौज में भर्ती होने वाला था लेकिन परिवार की रक्षा के लिए उसे बंदूक उठानी पड़ती है। अपनी खुद की जंग लड़ते हुए जसकीरत देश के लिए एजेंट बनता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी के रूप में काम करता है। GUDI PADWA: आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष पहले पार्ट की कहानी रहमान डकैत अक्षय खन्ना की मौत पर खत्म हुई थी। इस पार्ट में जसकीरत हमजा उसका भाई उजैर दानिश पंडोर को सत्ता में बैठाकर अपने मिशन में आगे बढ़ता है। मेजर इकबाल अर्जुन रामपाल उसे उसके बड़े साहब से मिलवाते हैं जिससे कहानी आगे बढ़ती है। अभिनय रणवीर सिंह पूरे चार घंटे स्क्रीन पर छाए रहते हैं। उनके एक्शन इमोशन और गुस्से के सीन परफेक्ट हैं। अर्जुन रामपाल को अधिक स्क्रीन स्पेस मिला है लेकिन उनके किरदार में उतनी गहराई नहीं। संजय दत्त और सारा अर्जुन के सीन सीमित हैं जबकि माधवन और राकेश बेदी बीच-बीच में फिल्म में जान डालते हैं।निर्देशन आदित्य धर का रिसर्च और डिटेल्ड वर्क काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने नोटबंदी अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम का कनेक्शन कहानी में जोड़ा है। लेकिन पहले पार्ट के मुकाबले इस बार कहानी में सरप्राइज एलिमेंट कम हैं और कई सीन लंबी खींची गई लगती हैं। शुरुआत और क्लाइमैक्स दमदार हैं लेकिन बीच का हिस्सा थोड़ा धीमा और अनुमानित लगता है। संगीत संगीत इस बार पहले पार्ट जितना प्रभावशाली नहीं। एक-दो गाने छोड़कर बाकी यादगार नहीं हैं और रोमांटिक सॉन्ग थोड़े जबरन ठूंसे हुए लगते हैं। देखें या नहीं अगर आपने पहला पार्ट देखा है तो यह जरूर देखें। हाइप या सेलेब्स के रिव्यू से प्रभावित न हों। फिल्म ठीक-ठाक एंटरटेनमेंट देती है लेकिन पहले पार्ट जैसी रोमांचक सरप्राइज और दमदार कहानी की उम्मीदें कम रखें।

अमिताभ बच्चन के लिए गाने से मना कर दिया था किशोर कुमार ने, कहा क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?

नई दिल्ली । बॉलीवुड के अमिताभ बच्चन को लेकर कई किस्से मशहूर हैं लेकिन उनमें से एक बेहद मज़ेदार और कम जानी-पहचानी कहानी है। यह कहानी जुड़ी है उनकी फिल्म ‘नमक हलाल से जिसमें किशोर कुमार ने एक गाने के लिए शुरू में मना कर दिया था। कहानी यह है कि फिल्म के गाने कि पग घुंघरू बांध मीरा नाची थीं को कंपोज़ किया था बप्पी लहरी ने। बप्पी लहरी चाहते थे कि यह गाना उनके मामा किशोर कुमार गाएं। जब उन्होंने किशोर कुमार को यह गाना पहली बार सुनाया तो किशोर कुमार ने बेहद मज़ाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी यह गाना है या कहानी? मैं यह नहीं गाऊंगा। क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?” किशोर कुमार के अनुसार यह गाना इतना लंबा और जटिल था कि उन्होंने शुरू में इसे गाने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि लोग इतनी बड़ी-बड़ी रचनाएँ लेकर आते हैं और इसे गाना आसान नहीं है। लेकिन बप्पी लहरी की लगातार समझाइश और मनाने के बाद किशोर कुमार आखिरकार राज़ी हो गए और उन्होंने यह गाना गाया। फिल्म के निर्देशक थे प्रकाश मेहरा और इस फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपये था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की और कुल ग्रॉस कलेक्शन करीब 12 करोड़ 64 लाख रुपये रहा। इस गाने ने दर्शकों के बीच खासा लोकप्रियता हासिल की और किशोर कुमार की आवाज़ को अमिताभ बच्चन की अदाकारी के साथ जोड़कर यादगार बना दिया। यह किस्सा यह दिखाता है कि भले ही किशोर कुमार जैसी महान आवाज़ वाले कलाकार के लिए भी कभी-कभी किसी गाने की शुरुआत चुनौतीपूर्ण होती थी लेकिन आखिरकार उनकी प्रतिभा और समझाइश ने हर बाधा पार कर दी। गाने और कहानी के बीच का यह मज़ेदार संवाद आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के बीच चर्चित है।

Middle East war : ईरान और सऊदी टकराव से बढ़ेगा परमाणु युद्ध का खतरा! पाकिस्तान की हो सकती है एंट्री

   Middle East war : रियाद। मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक हमला पूरे क्षेत्र को ज्वालामुखी की तरह हिला सकता है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और UAE के प्रमुख तेल-गैस ठिकानों को खाली करने की चेतावनी दी है। इससे स्पष्ट है कि यह केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे का चेन रिएक्शन पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। ईरान का खतरनाक कदम इजरायल ने हाल ही में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस फील्ड को निशाना बनाया। UAE की एक गैस फील्ड को मलबा गिरने के कारण खाली करना पड़ा। सऊदी अरब ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया है। इस जंग का सबसे बड़ा डर अब केवल हमला नहीं, बल्कि इसके बाद होने वाले प्रभाव और देशों की संभावित भागीदारी को लेकर है। सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता और न्यूक्लियर छतरी सऊदी और पाकिस्तान के बीच साल 2022 में द्विपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी विश्लेषक सलमान अल-अंसारी का कहना है कि अगर सऊदी पूरी ताकत के साथ जंग में उतरता है, तो पाकिस्तान को अपने द्विपक्षीय समझौते के तहत मदद करनी होगी। इसमें सैन्य सहायता के साथ ‘न्यूक्लियर छतरी’ यानी परमाणु सुरक्षा का भी जिक्र किया गया है। इसे NATO के आर्टिकल-5 से जोड़कर देखा जा रहा है, यानी सऊदी पर हमला पाकिस्तान को भी सक्रिय करने का दबाव पैदा कर सकता है। ईरान की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान की दुविधा हाल के हफ्तों में सऊदी अरब ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना किया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल सऊदी या उसके सहयोगियों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान इस समय सऊदी का करीबी सहयोगी है, लेकिन खाड़ी देशों से उसकी तेल और गैस पर निर्भरता भी काफी अधिक है। साथ ही, पाकिस्तान ईरान के साथ पाइपलाइन प्रोजेक्ट में भी शामिल है, जो अमेरिका के दबाव के कारण पूरी नहीं हो पाई। हाल ही में पाकिस्तान का ‘द कराची’ जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला, जिसे ईरान के साथ समझौते के तहत माना जा रहा है। अगर सऊदी अरब सीधे जंग में उतरता है, तो पाकिस्तान के जहाजों और संसाधनों पर हमले का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं पाकिस्तान अफगानिस्तान में भी फंसा हुआ है, जिससे उसकी भूमिका और जटिल बन रही है। संभावित वैश्विक खतरा विश्लेषकों का कहना है कि अगर सऊदी अरब सीधे इस संघर्ष में शामिल होता है और पाकिस्तान भी इसमें एंट्री करता है, तो यह संघर्ष केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्रीय टकराव बड़े पैमाने पर फैल सकता है और इससे वर्ल्ड वार 3 जैसी वैश्विक स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही है।

Barcelona vs Newcastle: चैंपियंस लीग में बार्सिलोना का जलवा, न्यूकैसल को हराकर क्वार्टरफाइनल में बनाई जगह

   Barcelona vs Newcastle: नई दिल्ली।  यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित क्लब टूर्नामेंट UEFA चैंपियंस लीग में FC बार्सिलोना ने अपनी पुरानी चमक दिखाते हुए न्यूकैसल यूनाइटेड को 7-2 से करारी शिकस्त दी और कुल स्कोर 8-3 के साथ क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की कर ली। पहले लेग में 1-1 की बराबरी के बाद कैंप नोउ में खेले गए इस फाइट में बार्सिलोना ने दूसरे हाफ में ऐसा तूफान खड़ा किया कि न्यूकैसल पूरी तरह बिखर गया। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक रुख अपनाया, जिससे पहले हाफ में ही गोलों की बरसात हो गई। छठे मिनट में राफिन्हा ने शानदार गोल कर बार्सिलोना को बढ़त दिलाई, लेकिन एंथनी एलंगा ने तुरंत जवाब देकर स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद फर्मिन लोपेज़ और मार्क बर्नाल के गोलों से बार्सिलोना ने फिर बढ़त बनाई, हालांकि एलंगा ने एक और गोल कर फाइट को रोमांचक बनाए रखा। पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में युवा स्टार लैमिन यमल ने पेनल्टी पर गोल दागकर टीम को 3-2 की बढ़त दिलाई और दब से मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। दूसरे हाफ में बार्सिलोना का एकतरफा शो, लेवांडोव्स्की का कमाल दूसरे हाफ में FC बार्सिलोना ने पूरी तरह दबदबा बनाया और न्यूकैसल यूनाइटेड की टीम बेबस नजर आई। अनुभवी स्ट्राइकर रॉबर्ट लेवांडोव्स्की ने अपनी क्लास दिखाते हुए दो शानदार गोल किए, जबकि फर्मिन लोपेज ने भी एक और गोल करके बढ़त को और मजबूत कर दिया। न्यूकैसल के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब सैंड्रो टोनाली चोटिल होकर मैदान से बाहर हो गए, जिससे टीम की लय पूरी तरह टूट गई। मैच के आखिरी पलों में राफिन्हा ने अपना दूसरा गोल कर स्कोर 7-2 कर दिया और बार्सिलोना की बड़ी जीत पर मुहर लगा दी। इस शानदार प्रदर्शन के बाद कोच हंसी फ्लिक भी काफी पॉजिटिव नजर आए और उन्होंने अंत में अपने प्रमुख खिलाड़ियों को आराम देने का मौका दिया। इस जीत से बार्सिलोना का आत्मविश्वास चरम पर पहुंच गया है और टीम अब क्वार्टरफाइनल में भी इसी आक्रामक अंदाज को जारी रखने के इरादे से उतरेगी।

Bayern Munich vs Atalanta: चैंपियंस लीग में बायर्न का जलवा, अटलांटा को हराकर क्वार्टरफाइनल में एंट्री, रियल मैड्रिड से टक्कर तय

   Bayern Munich vs Atalanta: नई दिल्ली। यूरोप के सबसे बड़े क्लब टूर्नामेंट UEFA चैंपियंस लीग में बायर्न म्यूनिख ने शानदार खेल दिखाया, अटलांटा BC को 4-1 से हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की कर ली। दो लेग के इस मुकाबले में बायर्न ने कुल 10-2 के भारी अंतर से जीत दर्ज कर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। अब उसका अगला मुकाबला दिग्गज क्लब रियल मैड्रिड से होगा, जो टूर्नामेंट का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। हैरी केन का जलवा, 50 गोल का आंकड़ा पार बायर्न की जीत के हीरो रहे हैरी केन, जिन्होंने मैच में दो शानदार गोल दागे। इसके साथ ही केन ने अपने चैंपियंस लीग करियर के 50 गोल पूरे कर लिए—और यह मुकाम उन्होंने सिर्फ 66 मैचों में हासिल किया। 25वें मिनट में पेनल्टी के जरिए पहला गोल करने के बाद, केन ने 54वें मिनट में दूसरा गोल कर टीम की बढ़त डबल कर दी और मैच को लगभग एकतरफा बना दिया। शुरुआत से अंत तक बायर्न का दबदबा एलियांज एरीना में खेले गए इस मुकाबले में बायर्न ने शुरुआत से ही अटलांटा पर दबाव बनाए रखा। 25वां मिनट: केन का पेनल्टी गोल (1-0) 54वां मिनट: केन का दूसरा गोल (2-0) इसके बाद लेनार्ट कार्ल और लुइस डियाज ने गोल कर स्कोर 4-0 कर दिया अटलांटा की ओर से 85वें मिनट में लाजर समरडज़िक ने हेडर के ज़रिए एक गोल ज़रूर किया, लेकिन तब तक मैच बायर्न के कब्ज़े में जा चुका था। युवा खिलाड़ियों को मिला मौका मैच के आखिरी पलों में बायर्न ने अपने युवा खिलाड़ियों को मौका दिया, जिससे टीम की गहराई और संतुलन भी साफ नज़र आया। यह दिखाता है कि टीम सिर्फ स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि बेंच स्ट्रेंथ भी मजबूत है। अब होगा रियल मैड्रिड से महामुकाबला क्वार्टरफाइनल में बायर्न का सामना रियल मैड्रिड से होगा। यह मुकाबला यूरोपियन फुटबॉल के दो दिग्गज क्लबों के बीच होने जा रहा है, जिसे लेकर फैंस में अभी से उत्साह है। मैच के बाद हैरी केन ने कहा, “रियल मैड्रिड के खिलाफ खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन हम तैयार हैं और किसी से गुस्से में नहीं हैं।”  

IRAN ATTACK: ईरान ने कतर की गैस फैसिलिटी पर किया मिसाइल हमला, भारत में LPG महंगा होने का खतरा

  IRAN ATTACK: नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष अब सीधे ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते हमलों की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में ईरान ने कतर की अहम गैस फैसिलिटी रास लाफान पर मिसाइल हमला किया, जिससे आग लगी और ढांचागत नुकसान हुआ। इस हमले के बाद वैश्विक गैस और तेल बाजार में हलचल मच गई है। ईरान का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला ईरान ने इस कदम के जरिए इजरायल पर साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमले का बदला लेना शुरू किया। मिसाइल हमले से कतर की प्रमुख LNG लिक्विफाइड नेचुरल गैस उत्पादन सुविधाएं प्रभावित हुईं और रास लाफान कॉम्प्लेक्स ने तुरंत अपना उत्पादन रोक दिया। इसके अलावा ईरान ने सऊदी अरब और यूएई में तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है। कतर के गैस हब पर आग और नुकसान रास लाफान कॉम्प्लेक्स, कतर की सबसे महत्वपूर्ण गैस सुविधाओं में से एक है। इस हमले से वैश्विक ऊर्जा मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बन गया है। भारत पर असर क्यों होगा भारत अपनी गैस जरूरतों का करीब 47% हिस्सा कतर से आयात करता है। सालाना 27 मिलियन टन LNG में से लगभग 12-13 मिलियन टन कतर से आती है। रास लाफान पर हमले के कारण भारत को गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा होर्मुज जलसंधि में बढ़ता तनाव पहले से ही भारत के गैस टैंकरों की आवाजाही में बाधा डाल रहा है। एलपीजी और घरेलू गैस की कीमतें बढ़ने का खतरा भारत में घरेलू एलपीजी रसोई गैस का बड़ा हिस्सा LNG पर आधारित है। अगर कतर की गैस फैसिलिटी लंबे समय तक ठप रही, तो भारत को दूसरी जगह से महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है। इसका असर सीधे सिलेंडर की कीमतों पर और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। अनिश्चित भविष्य और बढ़ता जोखिम विश्लेषकों के मुताबिक, यदि ईरान के हमले जारी रहे और रास लाफान पूरी तरह बंद हो जाए, तो गैस और तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर और बढ़ सकती हैं। भारत की मिडिल ईस्ट पर निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बढ़ता जोखिम बनती जा रही है। आम जनता पर इसका असर आने वाले महीनों में घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल के महंगे होने के रूप में दिख सकता है।