महाकाल की शरण में पहुंचे नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद महेश केवट, बोले- जीत बाबा के आशीर्वाद और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम

मध्यप्रदेश । नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद Mahesh Kevat सोमवार को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में बाबा महाकाल के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद पहली बार महाकाल मंदिर पहुंचे केवट ने इसे अपने लिए आध्यात्मिक और भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर पहुंचने पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित संगठन के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दर्शन के दौरान महेश केवट ने नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया और परंपरा के अनुसार नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की। दर्शन-पूजन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए महेश केवट ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा की सफलता को बाबा महाकाल का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के तीनों प्रत्याशियों की जीत संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा के साथ संगठन को मजबूत बनाने का कार्य किया है, जिसका सकारात्मक परिणाम चुनावों में देखने को मिला। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। केवट ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होना भाजपा की किसी रणनीति का परिणाम नहीं था, बल्कि कांग्रेस की अपनी प्रक्रियागत कमियों और लापरवाही का नतीजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार भ्रम और झूठ की राजनीति कर रही है तथा जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। महेश केवट ने कहा कि न्यायिक और संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपनी आंतरिक कमजोरियों पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है, बजाय इसके कि वह हर मुद्दे पर दूसरे दलों को जिम्मेदार ठहराए। लोकसभा चुनावों को लेकर भी उन्होंने भाजपा की जीत का भरोसा जताया। केवट ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा को जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है और आने वाले चुनावों में भी पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी। उन्होंने दावा किया कि जनता विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व के पक्ष में खड़ी है। राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए महेश केवट ने कहा कि वे प्रदेश के विकास, गरीबों, किसानों, युवाओं और समाज के सभी वर्गों के हितों से जुड़े मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और मध्य प्रदेश के विकास को नई गति देने के लिए वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे। महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने देशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि बाबा महाकाल का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और प्रदेश निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे।
महाकाल मंदिर में भस्म आरती पासों की कथित दलाली पर बवाल, युवा कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

मध्यप्रदेश । उज्जैन स्थित Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में भस्म आरती के वीआईपी और प्रोटोकॉल पासों की कथित दलाली को लेकर सोमवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए भस्म आरती की प्रोटोकॉल अनुमति व्यवस्था पर सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को मिलने वाले प्रवेश पासों की कथित रूप से खरीद-फरोख्त की जा रही है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शन का नेतृत्व महिदपुर विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह डोडिया ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भस्म आरती के प्रवेश पास 2 से 3 हजार रुपए या उससे अधिक राशि में बेचे जा रहे हैं। उनका दावा है कि जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले प्रोटोकॉल पासों का दुरुपयोग कर उन्हें अन्य लोगों को बेचा जा रहा है। डोडिया ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक राशि लेकर अनुमति दिलाने का लालच दिया जाता है, जिससे धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। युवा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के अलावा प्रतिदिन बड़ी संख्या में प्रोटोकॉल पास जारी किए जाते हैं और इसी व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने मांग की कि पूरे सिस्टम की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने डिप्टी कलेक्टर सरिता लाल को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में मीडिया में सामने आई खबरों और शिकायतों के आधार पर जांच की मांग की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ज्ञापन संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। युवा कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें वीआईपी और प्रोटोकॉल कोटे की संपूर्ण जांच, पासों की कथित खरीद-फरोख्त में शामिल एजेंटों और बिचौलियों की पहचान, दोषियों के खिलाफ एफआईआर, तथा पास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है। संगठन ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में जारी विशेष श्रेणी के सभी पासों का ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र और शिकायत हेल्पलाइन शुरू करने की भी मांग की गई है। युवा कांग्रेस ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो महाकाल मंदिर के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। गौरतलब है कि हाल के महीनों में भस्म आरती की अनुमति दिलाने के नाम पर कथित ठगी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुछ मामलों में श्रद्धालुओं से पैसे लेने के आरोप में व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों से आए श्रद्धालुओं द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। पुलिस ने उन मामलों में शिकायत के आधार पर जांच और कार्रवाई की थी। हालांकि प्रोटोकॉल पास व्यवस्था में किसी व्यापक अनियमितता के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और संबंधित मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है।
उज्जैन में आवारा कुत्ते का खौफनाक हमला, 3 साल की मासूम का चेहरा बुरी तरह नोचा; 55 टांके लगे

मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के देलवाड़ी गांव में आवारा कुत्ते के हमले ने एक परिवार की खुशियां पलभर में चिंता में बदल दीं। घर के बाहर खेल रही तीन वर्षीय मासूम बच्ची पर अचानक एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। हमले में बच्ची के चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए इंदौर के एमवाय अस्पताल रेफर किया गया है। परिजनों के अनुसार, माही (3) पिता कालू सिंह शनिवार सुबह घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान गांव में घूम रहे एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि कुत्ते ने बच्ची के चेहरे को निशाना बनाते हुए आंख के नीचे, नाक, गाल, होंठ और मुंह के आसपास कई जगह काट लिया। हमले के दौरान बच्ची की चीख-पुकार सुनकर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। हमले के बाद बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची के चेहरे की त्वचा कई जगह से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी और लगातार खून बह रहा था। घाव इतने गहरे थे कि उपचार के दौरान डॉक्टरों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार चेहरे, आंख, नाक, होंठ और कान के आसपास गंभीर जख्म पाए गए। प्राथमिक उपचार के दौरान एंटी रेबीज वैक्सीन भी लगाई गई। डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए उसे उच्च स्तरीय उपचार के लिए इंदौर रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि हमले में बच्ची की आंख के पास भी गंभीर चोट आई है। इसी कारण नेत्र रोग विशेषज्ञ को बुलाकर विशेष जांच कराई गई। चिकित्सकों के अनुसार आंख के आसपास गहरा घाव होने के कारण दृष्टि प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि डॉक्टरों ने सर्जरी कर आंख को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक निश्चेतना विशेषज्ञ और नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर बच्ची का उपचार किया। चेहरे पर आए गहरे घावों को भरने और अत्यधिक रक्तस्राव रोकने के लिए करीब 55 टांके लगाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जितना उपचार संभव था, वह कर दिया गया है। अब आगे की सर्जरी और विशेषज्ञ इलाज इंदौर में किया जाएगा। इस घटना के बाद गांव में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है और कई बार लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल बच्ची का इलाज इंदौर में जारी है और परिजन उसकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। डॉक्टर लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रेम विवाह की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, घंटों तक चला तनावपूर्ण घटनाक्रम, प्रशासन की समझाइश के बाद उतरा नीचे

नई दिल्ली । झारखंड के गढ़वा जिले में रविवार को एक असामान्य घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी। प्रेम विवाह की मांग को लेकर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया और घंटों तक नीचे उतरने से इनकार करता रहा। घटना के कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को विशेष प्रयास करने पड़े। जानकारी के अनुसार, गढ़वा जिले के खरौंधी थाना क्षेत्र स्थित बाजार इलाके में रहने वाला एक युवक अचानक एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद उसने नीचे उतरने से साफ इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक लगातार अपनी कथित प्रेमिका को मौके पर बुलाने और उससे विवाह कराने की मांग कर रहा था। उसकी इस हरकत से बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां जुटने लगे। स्थानीय लोगों ने प्रारंभिक स्तर पर युवक को समझाने का प्रयास किया। लोगों ने उसे सुरक्षित नीचे उतरने और बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखने की सलाह दी। हालांकि युवक अपनी मांगों पर अड़ा रहा। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उसने कथित तौर पर टावर से कूदकर जान देने की चेतावनी दी। इसके बाद मामले की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने युवक से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने संयम बरतते हुए उसे लगातार समझाया कि किसी भी प्रकार का आत्मघाती कदम समस्या का समाधान नहीं हो सकता। प्रशासन की प्राथमिकता युवक की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उसे बिना किसी नुकसान के नीचे उतारना थी। घटना के दौरान बाजार क्षेत्र में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए बचाव प्रक्रिया को प्रभावित न होने देने की कोशिश की। कई घंटों तक चली बातचीत और समझाइश के बावजूद युवक तुरंत नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुआ। बताया गया कि युवक अपनी कथित प्रेमिका की उपस्थिति की मांग कर रहा था। बाद में प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से युवती को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद युवक के साथ दोबारा बातचीत की गई और उसे शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए राजी किया गया। लंबे प्रयासों के बाद युवक सुरक्षित रूप से टावर से नीचे उतर आया, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। घटना के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक क्षति या अप्रिय हादसे की सूचना सामने नहीं आई। पुलिस ने युवक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर आवश्यक पूछताछ की और पूरे मामले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और धैर्य के साथ कार्रवाई करना आवश्यक होता है, ताकि किसी भी व्यक्ति की जान को खतरा न पहुंचे। यह घटना एक बार फिर सामाजिक और व्यक्तिगत विवादों के सार्वजनिक रूप लेने की प्रवृत्ति को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भावनात्मक परिस्थितियों में लोगों को संयम बनाए रखने और कानूनी व सामाजिक माध्यमों से समाधान तलाशने की आवश्यकता होती है। समय रहते पुलिस, प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की सक्रियता ने इस मामले में संभावित दुर्घटना को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ट्रम्प टैरिफ का असर भी नहीं रोक पाया मप्र का निर्यात, नए बाजारों के दम पर 4% की बढ़ोतरी

मध्यप्रदेश । अमेरिकी व्यापार नीतियों और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मध्य प्रदेश ने निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। अमेरिका में लागू किए गए ट्रम्प टैरिफ और उससे पैदा हुई व्यापारिक चुनौतियों का असर प्रदेश के निर्यात पर जरूर पड़ा, लेकिन निर्यातकों ने नए बाजारों में अवसर तलाशकर इस प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया। यही वजह रही कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश का कुल निर्यात 4 प्रतिशत बढ़कर 68,837 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 66,218 करोड़ रुपए था। निर्यात क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अमेरिका अब भी मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई है। एक वर्ष पहले प्रदेश के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20.4 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 19.4 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आयात शुल्क और व्यापारिक नीतियों में बदलाव के कारण कई भारतीय निर्यातकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रदेश के उद्योगों और निर्यातकों ने परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदली। उन्होंने चीन, जर्मनी, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में नए अवसर तलाशे और वहां बढ़ती मांग का लाभ उठाया। इन बाजारों में निर्यात बढ़ने से अमेरिका में आई गिरावट की भरपाई हो गई और कुल निर्यात वृद्धि का रास्ता खुला। Federation of Indian Export Organisations (फीयो) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के निर्यात में इंदौर संभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। कुल निर्यात में 50.5 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले इंदौर संभाग की रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इंदौर से 34,654 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 32,580 करोड़ रुपए था। इस प्रकार इंदौर ने लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। प्रदेश में निर्यात के मामले में भोपाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां से 13,807 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। वहीं उज्जैन संभाग 9,204 करोड़ रुपए के निर्यात के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक केंद्र वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य प्रदेश ने अपनी स्थिति बनाए रखी है। देश के कुल वस्तु निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही और राज्य लगातार दूसरे वर्ष भी देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों की सूची में 13वें स्थान पर बना रहा। फीयो के अतिरिक्त महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों और अमेरिकी टैरिफ के बावजूद मध्य प्रदेश का निर्यात बढ़ना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और कृषि आधारित उत्पादों की मांग में वृद्धि तथा नए बाजारों में प्रवेश से प्रदेश को बड़ा लाभ मिला है। उद्योगवार आंकड़ों पर नजर डालें तो फार्मा सेक्टर प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बनकर उभरा है। कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत रही। दवाइयों और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने का सीधा फायदा प्रदेश के फार्मा उद्योग को मिला। इसके बाद कॉटन यार्न और गारमेंट क्षेत्र का योगदान 10 प्रतिशत रहा, जबकि मशीनरी उत्पाद 6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा ऑयल मील, बासमती चावल, सामान्य चावल और एल्युमिनियम उत्पादों की भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए बाजारों में विस्तार की यह रणनीति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।
‘वंदे मातरम’ और सरकारी योजनाओं पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, लाभार्थियों की पात्रता पर उठाए सवाल

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में आयोजित एक जनकल्याण कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रभक्ति, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता, सीमा सुरक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाओं में कथित अनियमितताओं तथा सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कुछ लोगों को ‘वंदे मातरम’ बोलने या राष्ट्रगान के प्रति सम्मान व्यक्त करने में आपत्ति है, तो सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर भी चर्चा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार लाभार्थियों की पात्रता और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेजी व्यवस्थाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सीमा सुरक्षा और जनसंख्या संबंधी विषयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। उनके अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र नागरिकों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रूप से आने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है। अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती प्रशासन पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां वास्तविक पात्रता की जांच किए बिना लाभ वितरित किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार कुछ क्षेत्रों में ऐसे लाभार्थियों की पहचान हुई है, जिन्हें नियमों के अनुरूप सहायता नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों की समीक्षा कर रही है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति वितरण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कथित फर्जी खातों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री का कहना था कि लाभार्थी डेटा के सत्यापन के दौरान कई संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आई हैं, जिनकी जांच जारी है। उनका दावा है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सीमित रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। रोजगार और ग्रामीण विकास के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार नए विकल्पों पर काम कर रही है और कार्यदिवसों को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए बजटीय प्रावधान भी सुनिश्चित किए गए हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जा सके। सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नई व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अभ्यर्थियों को परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों तक अधिक पहुंच दी जाएगी। उनका मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास बढ़ेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका कम होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य केवल व्यवस्था को पारदर्शी बनाना ही नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास को मजबूत करना भी है। मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला सकते हैं।
स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक ‘ब्रेड और नमक’ से स्वागत, सांस्कृतिक सम्मान की अनोखी परंपरा बनी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे ने भारत और यूरोप के बीच कूटनीतिक संबंधों को नई चर्चा दी है। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का जिस पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, उसने न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्लोवाक परंपरा के अनुसार उन्हें ‘ब्रेड और नमक’ भेंट कर सम्मानित किया गया, जिसे वहां अतिथि सत्कार, मित्रता और सद्भावना का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा मानी जा रही है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के आगमन पर स्लोवाकिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप सम्मान प्रदान किया। ब्रातिस्लावा पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक स्वागत किया। बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय मूल के लोगों ने उनका अभिनंदन किया और भारत तथा स्लोवाकिया के बीच बढ़ती मित्रता पर खुशी व्यक्त की। इस दौरान दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की झलक भी देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने स्वागत को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि ‘ब्रेड और नमक’ की यह परंपरा स्लोवाकिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सुंदर प्रतीक है। उन्होंने इसे मित्रता, सम्मान और सद्भावना के उन मूल्यों का प्रतिनिधि बताया जिन्हें दोनों देश महत्व देते हैं। उनके अनुसार ऐसी परंपराएं देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पूर्वी और मध्य यूरोप के कई देशों में ‘ब्रेड और नमक’ से स्वागत करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ब्रेड समृद्धि, जीवन और खुशहाली का प्रतीक है, जबकि नमक सम्मान, सुरक्षा और स्थायी संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। किसी विशिष्ट अतिथि को इन दोनों वस्तुओं का उपहार देना अत्यंत सम्मानजनक माना जाता है। स्लोवाकिया के अलावा रूस, पोलैंड, यूक्रेन, सर्बिया और अन्य कई स्लाव देशों में भी यह परंपरा आज तक जीवित है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नेताओं, राजनयिकों और विशिष्ट मेहमानों के स्वागत में इस रीति का उपयोग किया जाता है। इसे केवल औपचारिक स्वागत नहीं बल्कि विश्वास और मित्रता का प्रतीकात्मक संदेश माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक यात्राओं में सांस्कृतिक प्रतीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे अवसर देशों के बीच केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और आपसी सम्मान को भी सामने लाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में अपनाई गई यह परंपरा भी इसी व्यापक सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा मानी जा रही है। भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। स्वागत समारोह में दिखाई गई सांस्कृतिक आत्मीयता ने इस यात्रा को और अधिक विशेष बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सांस्कृतिक परंपराएं देशों के बीच विश्वास और सौहार्द का वातावरण तैयार करती हैं। ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री मोदी का ‘ब्रेड और नमक’ से हुआ स्वागत इसी संदेश को मजबूत करता है कि कूटनीति केवल समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह सांस्कृतिक सम्मान और मानवीय जुड़ाव से भी संचालित होती है।
तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले केश दान ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी इस प्रथा ने न केवल श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी दर्ज की है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी साबित हुई है। मई 2026 के दौरान रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा केश दान किए जाने के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को मानव बालों की नीलामी से अब तक की सबसे अधिक आय मिलने की संभावना जताई जा रही है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मई माह के पहले 27 दिनों में 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना मुंडन कराया। यह संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि मंदिर में केश दान की धार्मिक परंपरा के प्रति लोगों की आस्था पहले की तुलना में और मजबूत हुई है। इस रिकॉर्ड केश दान का सीधा प्रभाव मंदिर की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने चालू वित्त वर्ष में मानव बालों की ई-नीलामी से लगभग 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार संचित मानव बालों का भंडार अब कई लाख किलोग्राम तक पहुंच चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मांग बनी हुई है। मानव बालों की ई-नीलामी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। तिरुमला मंदिर में प्राप्त बालों को गुणवत्ता और लंबाई के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। लंबे और उच्च गुणवत्ता वाले बालों की बाजार में विशेष मांग होती है, जिनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और विभिन्न सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। यही कारण है कि मंदिर को इस माध्यम से हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय प्राप्त होती है। धार्मिक दृष्टि से केश दान को समर्पण, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में बाल अर्पित करने से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसी विश्वास के कारण देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेते हैं। पौराणिक कथाओं में भी इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी एक प्राचीन कथा के कारण भक्त अपने बाल अर्पित करते हैं। समय के साथ यह धार्मिक परंपरा मंदिर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई और आज यह श्रद्धा तथा आर्थिक प्रबंधन दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखती है। पिछले कुछ वर्षों में मंदिर को मानव बालों की बिक्री से होने वाली आय में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक मानव बालों की बढ़ती मांग और उच्च गुणवत्ता के कारण तिरुमला मंदिर की नीलामी को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इससे मंदिर प्रशासन को अपनी धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होते हैं। केश दान की यह परंपरा आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गई है, बल्कि आस्था और आर्थिक प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और वैश्विक बाजार में मानव बालों की मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में भी इस आय स्रोत के और मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
सीमा विवाद के बीच अवैध घुसपैठ पर सख्ती तेज, 57 बांग्लादेशी गिरफ्तार; रानीनगर सेक्टर में बढ़ी कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौती

नई दिल्ली । भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर सुरक्षा और नागरिकता से जुड़ा विवाद चर्चा के केंद्र में आ गया है। पश्चिम बंगाल के रानीनगर सीमा क्षेत्र में 12 लोगों की नागरिकता को लेकर भारत की सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच मतभेद गहरा गया है। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के सीमा प्रबंधन और अवैध प्रवासन से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है। मामला उस समय गंभीर हो गया जब बांग्लादेश की ओर से आरोप लगाया गया कि भारतीय सुरक्षा बलों ने कुछ लोगों को सीमा पार भेजने का प्रयास किया। दूसरी ओर भारतीय पक्ष ने ऐसे किसी भी आरोप से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि संबंधित क्षेत्र से किसी व्यक्ति को सीमा पार नहीं भेजा गया और लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। विवाद के केंद्र में मौजूद 12 लोगों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। इनकी नागरिकता को लेकर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक पक्ष इन्हें बांग्लादेशी नागरिक बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इनकी पहचान को लेकर अलग रुख अपना रहा है। इसी कारण मामला केवल सीमा सुरक्षा का नहीं बल्कि मानवीय और प्रशासनिक चुनौती का रूप भी ले चुका है। स्थिति को सुलझाने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई हैं। हालांकि अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। बातचीत के बावजूद नागरिकता निर्धारण और जिम्मेदारी तय करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इससे सीमा क्षेत्र में संवेदनशीलता और सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन पुश बैक भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजना है। सुरक्षा एजेंसियां इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन की दृष्टि से आवश्यक मानती हैं। इसी बीच नदिया जिले में अवैध रूप से निवास करने के आरोप में 57 बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। विभिन्न पुलिस इकाइयों द्वारा की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। प्रशासन अब उनकी पहचान और कानूनी स्थिति की जांच कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी और संवेदनशील सीमा होने के कारण अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और दस्तावेज संबंधी विवाद समय-समय पर सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय और तथ्यों का सत्यापन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वर्तमान विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ताओं पर सभी की नजर रहेगी। उम्मीद की जा रही है कि बातचीत और प्रशासनिक सहयोग के माध्यम से इस विवाद का समाधान निकाला जाएगा तथा सीमा क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होगी।
2027 नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू, महापौर-अध्यक्ष पदों के आरक्षण के लिए आयुक्त को मिली जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले होने वाले नगर निगम और नगरपालिका चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनके परिणाम प्रदेश की राजनीतिक दिशा और जनता के मूड का संकेत देने वाले माने जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण निर्धारण की पूरी प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश नगरपालिका (महापौर तथा अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम, 1999 के प्रावधानों के तहत संचालित की जाएगी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब State Election Commission Madhya Pradesh ने भी आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची को अद्यतन करने का कार्य शुरू कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत एवं स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा अन्य सुधार संबंधी प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनावों के नतीजे अक्सर विधानसभा चुनावों से पहले जनता के रुझान का संकेत देते हैं। यही कारण है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों इन चुनावों को बेहद गंभीरता से लेते हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले निकाय चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए सरकार इस बार किसी भी प्रकार की देरी या कानूनी विवाद से बचना चाहती है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण चुनावी गतिविधियां प्रभावित हुईं और चुनाव लगभग दो वर्षों तक टल गए। अंततः मई 2022 में नगरीय निकाय चुनाव संपन्न कराए गए थे। सरकार अब पिछली परिस्थितियों से सबक लेते हुए चुनाव से काफी पहले आरक्षण, मतदाता सूची और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहती है, ताकि किसी प्रकार की न्यायिक या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो। आरक्षण व्यवस्था की बात करें तो प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कुल पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित रहेगा। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित निकाय क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। आरक्षण की प्रक्रिया रोटेशन प्रणाली के आधार पर की जाएगी। इसके तहत पिछली बार आरक्षित रहे निकायों को छोड़कर नए निकायों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में महापौर पदों की आरक्षण श्रेणी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से तय की जाएगी। इन श्रेणियों में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षित वर्ग शामिल होंगे। सरकार की इस शुरुआती तैयारी को आगामी चुनावी रणनीति और प्रशासनिक सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की संभावना है।