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मौसम बदलते ही क्यों रखा जाता है नवरात्रि व्रत जानिए इसके पीछे का आयुर्वेदिक कारण

नई दिल्ली। Navratri में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरा आयुर्वेदिक विज्ञान भी छिपा हुआ है। अक्सर लोग इसे पूजा पाठ और श्रद्धा से जोड़कर देखते हैं लेकिन अगर इसे Ayurveda के नजरिए से समझें तो यह शरीर और मन दोनों के लिए एक प्राकृतिक रीसेट प्रक्रिया की तरह काम करता है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम में बदलाव हो रहा होता है। यह परिवर्तन सीधे हमारे शरीर को प्रभावित करता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में व्रत रखने और हल्का सात्विक भोजन लेने से शरीर को संतुलन में लाने में मदद मिलती है। व्रत के दौरान लोग फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले आहार लेते हैं। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और रोजाना के भारी तले भुने और मसालेदार भोजन से जो दबाव बनता है वह कम हो जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर को खुद को सुधारने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति यानी अग्नि को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि मजबूत होती है तो शरीर स्वस्थ रहता है। व्रत रखने से यह अग्नि पुनः सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस दौरान ध्यान पूजा और संयम का पालन किया जाता है जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यह एक तरह का मानसिक शुद्धिकरण है जो व्यक्ति को भीतर से संतुलित और शांत बनाता है। इसके अलावा नवरात्रि में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ न केवल पचने में आसान होते हैं बल्कि शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं। ये भोजन शरीर को हल्का रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव संभव होता है। इस तरह नवरात्रि का व्रत आस्था और स्वास्थ्य दोनों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत करता है।

नवरात्र विशेष: यह वन तुलसी चढ़ाने से प्रसन्न होती हैं मां दुर्गा, औषधीय गुणों का खजाना

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां भगवती की आराधना में जहां विभिन्न फूल और पत्तियां अर्पित की जाती हैं वहीं एक खास पौधा ऐसा भी है जो देवी को अत्यंत प्रिय माना जाता है। आमतौर पर पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है लेकिन एक विशेष प्रकार की तुलसी जिसे दौना दवना मरुआ या वन तुलसी कहा जाता है मां दुर्गा को बेहद प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान इस वन तुलसी की पत्तियां और फूल अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और घर में सुख समृद्धि व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पौधा आकार में छोटा लगभग 1 से 2 फुट ऊंचा होता है लेकिन इसकी सुगंध अत्यंत तेज और मनमोहक होती है। इसके पत्ते गुलदाउदी की तरह कटावदार होते हैं और इसकी खुशबू इतनी प्रभावशाली मानी जाती है कि महंगे परफ्यूम भी इसके सामने फीके पड़ जाते हैं। धार्मिक परंपराओं में दौना को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का भी प्रिय माना गया है लेकिन विशेष रूप से नवरात्रि में मां दुर्गा को इसे अर्पित करने की परंपरा है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में इस पौधे को लगाने से वातावरण शुद्ध रहता है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है। यह न केवल पूजा को पूर्णता प्रदान करता है बल्कि घर को सुगंधित और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो वन तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद में इसे कफ वात और कृमि रोगों के उपचार में लाभकारी बताया गया है। यह सर्दी खांसी जुकाम बुखार जोड़ों के दर्द सूजन और पेट की समस्याओं में भी कारगर है। इसके पत्ते बीज जड़ और डंठल सभी औषधीय रूप से उपयोगी होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी के गुणों को स्वीकार किया गया है। अमेरिका की राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय में प्रकाशित शोधों के अनुसार तुलसी का सेवन डायबिटीज हृदय रोग तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। खास बात यह है कि इसके सेवन से गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए हैं। वन तुलसी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है और अस्थमा ब्रोंकाइटिस व खांसी जैसी समस्याओं में राहत देती है। साथ ही इसकी सुगंध प्राकृतिक रूप से मच्छरों को दूर रखने और हवा को शुद्ध करने में भी सहायक होती है। इस तरह वन तुलसी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक अमूल्य औषधि है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर इसे अर्पित करना जहां मां भगवती को प्रसन्न करता है वहीं इसका उपयोग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ और संतुलित रखने में मदद करता है

Love Horoscope 19 March: आपके रिश्ते में आज क्या होगा, मीन और अन्य राशियों के लिए विशेष भविष्यवाणी

नई दिल्ली। 19 मार्च का दिन प्रेम जीवन में महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है आज अमावस्या तिथि है जो सुबह 06:53 बजे तक रहेगी और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र तथा शुभ योग शुक्ल के साथ किस्तुघ्न और बव करण का संयोग भी बन रहा है इन ज्योतिषीय परिस्थितियों के चलते यह दिन कई राशियों के प्रेम जीवन में उतार-चढ़ाव और नई संभावनाओं को लेकर आएगा मेष राशि के लिए यह दिन दोस्तों के साथ समय बिताने और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का है जिससे जीवन में ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ेगा हालांकि जीवनसाथी कभी-कभी आपको संदिग्ध या दूर लग सकते हैं ऐसे में धैर्य और समझदारी बनाए रखना जरूरी है वृष राशि वालों को प्रेम संबंधों में संतुलन बनाए रखना होगा अपनी समझदारी और ताकत से दिन के अवसरों का लाभ उठाएं उत्सव और उत्साह से भरे इस दिन को अपने साथी के साथ साझा करना लाभकारी रहेगा मिथुन राशि के लोग आज अपने सच्चे भावनाओं को आसानी से व्यक्त कर पाएंगे यह समय अपने प्रेमी के साथ समय बिताने और संबंध को मजबूत करने का है कर्क राशि वालों के लिए यह दिन व्यापार और प्रेम मामलों में सफलता और कौशल लाएगा आप परिवार और धर्म की ओर झुकाव महसूस करेंगे और रोमांचक अनुभवों का आनंद ले सकेंगे सिंह राशि वालों को किसी गुरु या मार्गदर्शक से मदद मिलने का अवसर मिलेगा अपने प्रेमी को खुश रखने पर ध्यान दें जिससे आप भी संतुष्ट और प्रसन्न रहेंगे कन्या राशि के लिए आज परिवार और करीबी लोगों पर ध्यान अधिक रहेगा दिन खुशियों और मौज-मस्ती से भरा रहेगा प्रेम में पैसा प्राथमिकता न पाएं और भावनाओं को महत्व दें तुला राशि वालों को अपनी बुद्धिमत्ता और गुणों का उपयोग कर अपने प्रेम जीवन में रोमांच बनाए रखना होगा अलग-अलग तरीकों से अपने प्रेम को व्यक्त करें और संबंध में नवीनता बनाए रखें वृश्चिक राशि वालों को यात्रा करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना होगा बच्चों और बीमार लोगों की देखभाल में समय व्यतीत होगा आपकी रचनात्मक सोच और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता आसपास सकारात्मक प्रभाव डालेगी धनु राशि वाले प्रेम जीवन में किसी खास सरप्राइज को याद रखें इससे आपका दिन आनंदमय होगा अपने अनुभवों और योजनाओं का उपयोग कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं आज प्रेम जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता हो सकती है मकर राशि के लोग यदि अपने साथी के बारे में निश्चित नहीं हैं तो निर्णय लेने से पहले विचार करें बड़ों की सलाह महत्वपूर्ण होगी सही समय पर सही निर्णय लेना लाभकारी रहेगा कुंभ राशि वालों के लिए आज किसी खास मित्र के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करना रोमांचक रहेगा आपसी सहमति और विश्वास बनाए रखें ताकि कठिन परिस्थितियों में भी रिश्ता मजबूत बना रहे मीन राशि के लिए आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है आपके प्रेम जीवन में कुछ समस्याएं और बाधाएं चिंता का कारण बन सकती हैं साथी के साथ पूरी ईमानदारी से पेश आएँ किसी भी बात को छिपाने से बचें इससे आपसी विश्वास और मजबूत होगा प्रेम जीवन में पारदर्शिता और भावनाओं की स्पष्टता महत्वपूर्ण रहेगी इस प्रकार 19 मार्च का दिन विभिन्न राशियों के प्रेम जीवन में अपने अनुभव और समझदारी के अनुसार उतार-चढ़ाव लाएगा और मीन राशि के लोगों को अपने संबंधों में विशेष सतर्कता और विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता है

चैत्र नवरात्रि: मां हिंगुला के चमत्कार से जलती है जगन्नाथ मंदिर की रसोई, निकलती है हिंगुला यात्रा

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं वहीं पूजा में चढ़ाए जाने वाले फलों का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनार जिसे संस्कृत में दादिमा कहा जाता है माता भगवती को अत्यंत प्रिय फल माना गया है। लाल-लाल दानों से भरा यह फल न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। धर्म शास्त्रों में अनार को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि सभी फलों में यह देवी को सबसे अधिक प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख-समृद्धि संतान सुख आरोग्य और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि में अनार चढ़ाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। अनार की गहरी लाल रंगत शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है। यह रंग मां दुर्गा के शक्तिशाली और रौद्र स्वरूप से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि भक्त नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से अनार अर्पित करते हैं ताकि उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसे चढ़ाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। अनार को अखंड फल भी माना जाता है ठीक वैसे ही जैसे नारियल नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर में देवी मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इस दौरान मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, लेकिन ओडिशा में मां के एक अद्भुत और रहस्यमयी रूप की आराधना की जाती है अग्नि स्वरूप। यह परंपरा जुड़ी है मां हिंगुला मंदिर से, जिसे सिद्धपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में मां हिंगुला की सोने से सजी प्रतिमा विराजमान है, जिनके चारों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां का विशेष श्रृंगार किया जाता है और भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। खास बात यह है कि यहां मां को अग्नि की देवी के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु दर्शन के बाद मंदिर परिसर में बने अग्निकुंड में भोग अर्पित करते हैं, जो इस परंपरा को और भी विशेष बनाता है। मां हिंगुला का संबंध विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से भी जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पुरी के राजा को भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में आदेश दिया था कि वे मां हिंगुला की पूजा करें, जिससे मंदिर की विशाल रसोई सुचारू रूप से संचालित हो सके। माना जाता है कि मां हिंगुला ही पवित्र अग्नि के रूप में प्रकट होकर जगन्नाथ मंदिर की रसोई में ऊर्जा प्रदान करती हैं। यही कारण है कि यह रसोई आज भी अनूठे ढंग से संचालित होती है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में गिना जाता है। चैत्र माह में यहां विशेष रूप से हिंगुला यात्रा निकाली जाती है, जो आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ओडिशा की समृद्ध लोक संस्कृति का भी प्रतीक है। इस दौरान मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। भक्तों का मानना है कि मां हिंगुला के अग्नि स्वरूप के दर्शन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि कई परिवार अपने नवजात बच्चों को पहली बार मां के दर्शन कराने यहां लाते हैं। कुछ श्रद्धालु यहां मुंडन संस्कार भी कराते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां हिंगुला का यह पावन धाम आस्था, चमत्कार और संस्कृति का जीवंत केंद्र बन जाता है। यहां देवी की अग्नि स्वरूप में पूजा और उससे जुड़ी मान्यताएं न केवल भक्तों की श्रद्धा को मजबूत करती हैं, बल्कि भारतीय परंपराओं की विविधता और गहराई को भी दर्शाती हैं। श्रीफल का धार्मिक महत्व है। कई भक्त इसे विशेष रूप से कर्ज से मुक्ति और परिवार की खुशहाली के लिए माता को अर्पित करते हैं। पूजा-पाठ के साथ-साथ यह फल परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो अनार औषधीय गुणों से भरपूर होता है। प्राचीन ग्रंथों विशेषकर 12वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ मानसोल्लास में इसे पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है। यह फल रक्त शुद्ध करने एनीमिया यानी खून की कमी दूर करने पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और हृदय रोगों से बचाव में सहायक माना जाता है। अनार में भरपूर मात्रा में विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम पाए जाते हैं जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है। अनार का जूस पीने से शरीर में नई ऊर्जा आती है और थकान दूर होती है। इस तरह अनार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर इसे अर्पित करना जहां आध्यात्मिक लाभ देता है वहीं इसका सेवन शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है।

नवरात्र विशेष: मां भगवती को प्रिय अनार, आस्था के साथ सेहत का भी खजाना

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं वहीं पूजा में चढ़ाए जाने वाले फलों का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनार जिसे संस्कृत में दादिमा कहा जाता है माता भगवती को अत्यंत प्रिय फल माना गया है। लाल-लाल दानों से भरा यह फल न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। धर्म शास्त्रों में अनार को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि सभी फलों में यह देवी को सबसे अधिक प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख-समृद्धि संतान सुख आरोग्य और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि में अनार चढ़ाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। अनार की गहरी लाल रंगत शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है। यह रंग मां दुर्गा के शक्तिशाली और रौद्र स्वरूप से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि भक्त नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से अनार अर्पित करते हैं ताकि उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसे चढ़ाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। अनार को अखंड फल भी माना जाता है ठीक वैसे ही जैसे नारियल या श्रीफल का धार्मिक महत्व है। कई भक्त इसे विशेष रूप से कर्ज से मुक्ति और परिवार की खुशहाली के लिए माता को अर्पित करते हैं। पूजा-पाठ के साथ-साथ यह फल परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो अनार औषधीय गुणों से भरपूर होता है। प्राचीन ग्रंथों विशेषकर 12वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ मानसोल्लास में इसे पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है। यह फल रक्त शुद्ध करने एनीमिया यानी खून की कमी दूर करने पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और हृदय रोगों से बचाव में सहायक माना जाता है। अनार में भरपूर मात्रा में विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम पाए जाते हैं जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है। अनार का जूस पीने से शरीर में नई ऊर्जा आती है और थकान दूर होती है। इस तरह अनार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर इसे अर्पित करना जहां आध्यात्मिक लाभ देता है वहीं इसका सेवन शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है।

गुरुवार का राशिफल

युगाब्ध-5126, विक्रम संवत 2082, राष्ट्रीय शक संवत-1947, सूर्योदय 06.14, सूर्यास्त 06.20, ऋतु – ग्रीष्मचैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या/चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, गुरुवार, 19 मार्च 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।मेष राशि :- मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक-3-6-9वृष राशि :- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। स्वविवेक से कार्य करें। समय का लाभ लें। शुभांक-4-7-9मिथुन राशि :- हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-4-6-8कर्क राशि :- कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। शुभकार्यों में अड़चनें व परिवार के बुुजुर्ग-जनों से मतभेद रहेगा। शुभांक-1-5-7सिंह राशि :- मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश सफल होगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नवीन जिम्मेदारी बढ़ने के आसार रहेंगे। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम को प्राथमिकता से करें। शुभांक-1-3-5कन्या राशि :- अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। कारोबारी काम में बाधा उभरने से मानसिक अशांति बनी रहेगी। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। शुभांक-4-6-8तुला राशि :- अपने काम पर नजर रखिए। स्वास्थ्य लाभ में समय और धन व्यय होगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। शुभांक-2-4-6वृश्चिक राशि :- पर-प्रपंच में ना पड़कर अपनेे काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आलस्य का त्याग करें। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। शुभांक-4-6-8धनु राशि :- कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। यात्रा से लाभ। शुभांक-3-5-6मकर राशि :- आत्मविश्वास बढ़ेगा। पारिवारिक विवाद टालें। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। संतान-स्त्री पक्ष से लाभ होगा। शुभांक-3-4-6कुंभ राशि :- खान-पान में सावधानी रखें। व्यापार में प्रगति होगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। आय के योग बनेंगे। यात्रा का योग है। शुभांक-3-5-6मीन राशि :- जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। आलस्य का त्याग करें। पुरुषार्थ का सहारा लें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। शुभांक-3-5-6

राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को दी गई विदाई

नई दिल्ली। राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को बुधवार को विदाई दी गई। विदाई समारोह में 20 राज्यों के 59 सदस्य, जिनमें 9 महिलाएं भी शामिल हैं, ने सदन को अलविदा कहा। इस मौके पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि पहले लोग खुद नियम फॉलो करते थे, अब हमें कंट्रोल करके कराना पड़ते हैं।उन्होंने नीतीश कुमार, अमित शाह, वेंकैया नायडू और सभी दलों के सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और उपसभापति के रूप में अपने कार्यकाल को “जीवन का सुनहरा अवसर” बताया। सांसद संजय सिंह ने कहा कि किसी को विदा करना पीड़ादायक व भावनात्मक पल होता है। हम जब कमेटी में काम करते तो दलों की दूरी कम रहती है, ज्यादा मिलना होता है। कई लोगों से रिश्ते बनते हैं। उन्होंने मांग की कि पहले सांसदों को सेवानिवृत्ति के बाद भी परिसर में दरवाजे तक आने की व्यवस्था थी, तो ऐसा ही फिर किया जाए। केरल से सांसद जॉन ब्रिटास ने विदाई सम्बोधन के बीच सांसद जयराम रमेश को कहा कि हमने सहयोग करके आपको मंत्री बनाया, आपको सत्ता के समय सहयोग किया, लेकिन आप भूल गए। जयराम ने इस पर जवाब दिया, तो ब्रिटास ने कहा कि आप मुझे उकसाईयें मत। राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यदि मोह व आसक्ति हमें अपने गंतव्य तक जाने से रोके हैं। यदि भगवान राम वन नहीं जाते तो रावण का नाश कैसे होता। बहता पानी निर्मल होता है और रूका हुआ गंदा होता है। इसलिए हम हमारे साध्य और साधनों में पवित्रता रखते हुए आगे बढ़े। गुजरात के सांसद शक्ति सिंह ने कहा कि सदन में टोका-टोकी भी हुई, तारीफ भी मिली, लेकिन जनता और विचारधारा के लिए लड़ता रहा हूं और लड़ता रहूंगा। सामने विपक्ष वाले भी जनता से चुनकर आते हैं, उनको सुनने की परंपरा रही है, लेकिन गुजरात में यह परंपरा टूटी, इस पाप का हिस्सा कही मैं भी हूं, लेकिन मुझे खुशी है कि राज्यसभा में कुछ किस्सों को छोड़ दे तो आज भी सामने वालों को सुनने की वो परंपरा जीवित है। कांग्रेस सांसद दिग्विजय ने कहा कि छात्र जीवन में कभी राजनीति से कोई सम्पर्क नहीं था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनी कि 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष बन गया। फिर 30 साल में विधायक, 33 साल में मंत्री-सांसद और 40 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बन गया, लेकिन मैंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। मेरे मतभेद रहे हैं और आगे भी रहेंगे, लेकिन राजनीतिक जीवन में किसी से कटुता नहीं पाली। विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में मेरे संंबंध उनसे भी अच्छे जिनकी विचारधारा से मैं सहमत नहीं। मैं सदन में व्यवधान के पक्ष में नहीं। सत्ता पक्ष पर समस्या का हल निकालने की जिम्मेदारी ज्यादा रहती, और रास्ता निकलता है। जिस प्रकार से साम्प्रदायिक कटुता बढ़ रही, वो देश के लिए उचित नहीं है। अटलजी की लाइनें याद आती है कि मैं टायर्ड हूं न रिटायर्ड हूं, आगे चलकर हम और काम करेंगे। दिग्विजय ने कबीर की लाइनों को भी दोहराया कि ना काहूं से दोस्ती और ना काहू से बैर। सभापति ने सभा को संबोधित करते हुए सदस्यों के द्विवार्षिक परिवर्तन की अनूठी संसदीय परंपरा पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि यह निरंतरता और बदलाव दोनों को दर्शाती है—जहाँ अनुभव नए दृष्टिकोण के लिए मार्ग बनाता है और सदन की स्थायी भावना बनी रहती है। उन्होंने सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों के अमूल्य योगदान की सराहना की और कहा कि उनके ज्ञान, बहस और जन सेवा के प्रति प्रतिबद्धता ने सदन के कामकाज को समृद्ध किया और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि उनका अनुभव आगे भी जन जीवन में मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करेगा। राज्य सभा सचिवालय के अनुसार 2025 में कुल 26 सदस्य सेवानिवृत्त हुए, जबकि 2026 में 73 सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं या होने वाले हैं, जिनमें उपसभापति, हरिवंश भी शामिल हैं। समारोह में, संसद कार्य मंत्री, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और विदाई आयोजन समिति के संयोजक किरेन रिजिजू ने राज्य सभा के सभापति, सी. पी. राधाकृष्णन, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।

प्राकृतिक खेती से धरती मां की सेहत और किसान की आमदनी दोनों सुरक्षितः शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय पर हुई Shivraj Singh Chouhan विस्तृत चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेन्द्र मोदी की सरकार सिर्फ शासन नहीं चलाती, समाज बदलती है, जीवन बदलती है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चिंता है कि अत्यधिक केमिकल फर्टिलाइज़र से धरती मां की सेहत बिगड़ रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि उत्पादन से इनकार कर सकती है। उसी भाव से प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 1 करोड़ किसानों को जागरूक, 18 लाख किसानों को प्रशिक्षित करने और 75 लाख हेक्टेयर में चरणबद्ध रूप से प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अभी लाखों किसान और लाखों हेक्टेयर भूमि जुड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रूप से ये सिद्ध है कि सही ढंग से प्राकृतिक खेती करने पर कई मामलों में उत्पादन घटता नहीं बल्कि बढ़ सकता है और लागत में भारी कमी आती है, इसीलिए मोदी सरकार इसे “भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की अमानत” मानकर आगे बढ़ा रही है। किसानों के हितों, कृषि सुधारों, आधुनिक तकनीक, सिंचाई, बीमा, प्राकृतिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर की चर्चा करते हुए उन्होंने विपक्ष के प्रश्नों के जवाब दिए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के नाम पर सिर्फ सियासी नारे और अर्द्धसत्यों से काम नहीं चलेगा। खेत-खलिहान की हकीकत पर बात करनी होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सवाल ये होना चाहिए कि किसान के लिए ज़मीन पर क्या काम हुआ, कितना पैसा सीधे उसके खाते में पहुंचा और कौन सी व्यवस्था बदली। चौहान ने याद दिलाया कि पिछली सरकार के समय 140 सिंचाई परियोजनाओं में से 99 परियोजनाएं दशकों से लटकी पड़ी थीं, जिनपर कोई काम आगे नहीं बढ़ रहा था। मोदी सरकार ने इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्राथमिकता दी और लगभग 27 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचित क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में तेज़ी से काम बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का “नदी जोड़ो” (रिवर लिंकिंग) ड्रीम प्रोजेक्ट भी वास्तव में मोदी सरकार के दौरान आगे बढ़ा, जहां कैन–बेतवा जैसी परियोजनाएं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ते हुए बाढ़-सूखे की समस्या का दीर्घकालिक समाधान देने के लिए शुरू की गईं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सिर्फ 500 या 1000 रुपये की घोषणा से किसानों का भला नहीं होगा, असली सवाल है कि बीज, खाद और कीटनाशक की गुणवत्ता क्या है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार नया पेस्टिसाइड एक्ट और बीज एक्ट लाने जा रही है, जिसमें किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, मानक खाद, और सुरक्षित एवं प्रभावी कीटनाशक सुनिश्चित किए जाएंगे। चौहान ने बताया कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अबतक लगभग 9 करोड़ किसानों के पहचान तैयार की जा चुकी हैं। किसान के पास किसान–आईडी होने पर बैंक में लोन स्वीकृत होने में “एक मिनट” से ज़्यादा नहीं लगना चाहिए क्योंकि उसकी पूरी प्रोफाइल, जमीन, फसल और लेनदेन का डेटा डिजिटल रूप से उपलब्ध होगा। पहले किसान को बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, फाइलों–कागज़ों में पैसा और समय दोनों खर्च होते थे; अब यह बाधा डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्री–स्टैक डेटा के उपयोग से पीएम-किसान से लेकर एमएसपी खरीद तक हर योजना में किसानों को लक्षित और पारदर्शी लाभ मिलेगा। वित्त मंत्री की घोषणा का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नामक एआई प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है। किसान खेत से फसल की तस्वीर भेजकर या फोन करके पूछ सकेंगे कि “फसल में क्या बीमारी है, क्या दवा डालूं, मेरी मिट्टी के मुताबिक कौन सी फसल बोऊँ?” उसे उसकी अपनी भाषा में त्वरित सलाह मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने इसे किसान के हाथ में विशेषज्ञ-सलाह और तकनीक का नया हथियार बताया जो मोदी सरकार के “टेक–ड्रिवन किसान कल्याण” मॉडल का प्रतीक है।

कवि सम्मेलन हमारी समृद्ध काव्य परम्पराओं के हैं सजीव संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की मिट्टी कवियों की उर्वर भूमि है। काव्य परम्पराओं से हमारी साहित्यिक विरासत हमेशा से ही समृद्ध रही है। कवि सम्मेलन हमारी इन्हीं समृद्ध काव्य परम्पराओं के सजीव संवाहक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की रात भोपाल के अटल पथ पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देना हमारा ध्येय है। श्रीराम की नगरी को राजधानी से सीधे जोड़ने के लिए हम बहुत जल्द भोपाल से ओरछा तक धार्मिक पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने जा रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में आए सभी कवियों और विभिन्न सामाजिक सेवा समितियों का उनके सेवा प्रकल्पों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सभी को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में 7 हजार भाषाएं-बोलियां बोली जाती हैं। सबका समृद्ध साहित्य है। इतनी बड़ी भाषाई विविधता और समृद्धि किसी और देश में देखने को नहीं मिलती। मध्यप्रदेश की धरती पर बाणभट्ट, कालिदास, राजशेखर, पतंजलि, भर्तहरि, अनंगहर्ष, वत्सराज, केशवदास, पद्माकर, बिहारी जैसे रत्न हुए। आज जिस नगरी भोपाल पधारे हैं, वहां के शासक स्वयं सरस्वती पुत्र राजा भोज रहे। राजा भोज स्वयं एक कालजयी कवि, प्रकांड दार्शनिक और अद्वितीय विचारक थे। उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का निरंतर अभिषेक होता था। राजा भोज के बारे में एक ऐतिहासिक किंवदंति बहुत प्रसिद्ध है कि उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का इतना सम्मान था कि बुनकर भी संस्कृत कविताएं रचते थे। आज फिर से भोज नगरी में सरस्वती पुत्रों का समागम हुआ है, यहाँ सबका स्वागत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कवियों की वाणी ने ही युवाओं में साहित्य के प्रति प्रेम बचाए रखा है। उन्होंने इस आयोजन के सूत्रधार विधायक श्री रामेश्वर शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि कर्मश्री संस्था द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आज अपनी रजत जयंती मना रहा है। विगत 25 वर्षों से कवि सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा, उगादि, चैती चांद, नवरेह के मौके पर होने वाला यह आयोजन अनेकता में एकता और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सजीव उदाहरण है। भले ही हम ये सभी त्योहार विभिन्न नामों से मनाते हैं, लेकिन ये हमारे विविधता संपन्न राष्ट्र के अलग-अलग कोनों में पारंपरिक रूप से नए साल के शुभारंभ के प्रतीक हैं। ये हमें एकता, प्रेम, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलकामना करते हुए कहा कि नव संवत्सर सभी के लिए मंगलमय हो। कार्यक्रम को विधायक रामेश्वर शर्मा, प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, कवि दिनेश बावरा, सुदीप भोला, अजय अंजान, कुशल कुशलेन्द्र, सान्या राय सहित रविन्द्र यति, तीरथ सिंह मीणा, राहुल कोठारी, सुमित पचौरी सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में सियासी तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि पहले रामकाल था, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि एक वोट खरीदकर भी सरकार बनती हो, तो ऐसी सरकार को मैं चिमटे से छूना भी पसंद नहीं करूंगा। वह रामकाल था, लेकिन अब मोहन काल और कृष्ण काल है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि थोड़ी देर के लिए कांग्रेस की सरकार आई थी। कमलनाथ जी बड़े भले आदमी हैं। जैसे-तैसे इस उम्र में उनकी बारात निकली थी। आगे-आगे दिग्विजय सिंह चल रहे थे, लेकिन पीछे के बारातियों को भाजपा वाले अपने साथ ले गए। जब पीछे मुड़कर देखा, तो बारात में गिने-चुने लोग ही बचे थे। हास्य कवि और व्यंग्यकार कुशल कौशलेंद्र ने कवि सम्मेलन के दौरान एक कवि ने कविता पाठ करते-करते समसामयिक मुद्दों पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने मोदी-ट्रंप फोन कॉल का जिक्र करते हुए चुटकी ली। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने ट्रंप से शायद यही कहा होगा कि अगली बार उज्जैन में कुंभ लगने जा रहा है, जितना पाप करना है कर लो, यहां आकर दो डुबकी में सब धुल जाएंगे।” इस तंज पर श्रोताओं के बीच हंसी और तालियों का माहौल बन गया। कवि कुशल कुशलेंद्र ने भोपाल में काव्य पाठ के दौरान अपने व्यंग्य और सियासी तंज से माहौल को जीवंत कर दिया। “तालियों की ताल दीजिए” जैसी पंक्तियों के बीच उन्होंने केंद्र की नीतियों पर चुटकी लेते हुए कहा, “हमसे लोग पूछते हैं मोदी जी ने क्या किया, हम कहते हैं रुपयों का बैग छीनकर बोरा थमा दिया, बोरी की डोर तोड़कर डोरी थमा दिया।” उनकी इस टिप्पणी पर श्रोताओं के बीच ठहाके और तालियों की गूंज सुनाई दी। इसके बाद उन्होंने सिंधिया पर कटाक्ष करते हुए कविता सुनाई— “सच को दिखा सकूं मीडिया ही बना दो, रंग ऐसे भरो मुझको इंडिया बना दो, मैं जिस जगह रहूं उस जगह मौज में रहूं, भगवान मुझको आप सिंधिया ही बना दो।” उनकी प्रस्तुति में व्यंग्य, हास्य और राजनीति का मिश्रण नजर आया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। मुंबई से आए कवि दिनेश बावरा ने भोपाल में काव्य पाठ के दौरान अपने खास अंदाज में हास्य और व्यंग्य का तड़का लगाया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “घर वालों ने कहा था कि जब तक कुछ बन ना जाना, घर मत लौटना… मैं बेशर्म बन गया।” उनकी इस पंक्ति पर श्रोताओं के बीच ठहाके गूंज उठे और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। इसके बाद उन्होंने समकालीन जीवन पर तंज कसते हुए कहा कि आज दुनिया को सबसे बड़ा खतरा किसी देश से नहीं, बल्कि मोबाइल से है। उन्होंने कहा, “इस दुनिया को खतरा न चीन, न अमेरिका, न पाकिस्तान और इजराइल से है… आज की तारीख में सबसे ज्यादा खतरा आपकी जेब में रखे मोबाइल से है।” उनकी इस टिप्पणी ने श्रोताओं को सोचने पर भी मजबूर कर दिया। उत्तर प्रदेश के औरैया से आए कवि अजय अंजाम ने मंच से देशभक्ति काव्य पाठ कर श्रोताओं में जोश भर दिया। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों में कहा, “कश्मीर का दर्रा-दर्रा वंदे मातरम बोलेगा, कारतूस का छर्रा-छर्रा वंदे मातरम बोलेगा। जिस दिन भोपाल के बेटे, जिस दिन भारत मां के बेटे अपनी पर आ जाएंगे, इस धरती का जर्रा-जर्रा वंदे मातरम बोलेगा।” उनकी इस प्रस्तुति

भोपालः हिंदू नववर्ष के स्वागत में प्रभात चौराहे पर लहराया विशाल भगवा झंडा, हुई भव्य आतिशबाजी

भोपाल। मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या पर भोपाल के नरेला विधानसभा के प्रभात चौराहे पर आयोजित भव्य आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विशाल भगवा झंडा लहराया और नागरिकों को हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं दी। मंत्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू नववर्ष केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवचेतना का प्रतीक है। यह दिन हमें हमारी सनातन परंपराओं, ऋषि-मुनियों के ज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चैत्र मास से प्रारंभ होने वाला यह नववर्ष सृष्टि के नवसृजन का प्रतीक है, जब प्रकृति स्वयं नवीन रूप में सजती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। सारंग ने कहा कि भारतीय पंचांग पर आधारित यह नववर्ष वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन, कृषि चक्र और जीवन के संतुलन से जुड़ा हुआ है। यह पर्व हमें अपने संस्कारों, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक प्रबल करने का अवसर प्रदान करता है। राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ मनाएं नववर्षमंत्री सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि यह नववर्ष केवल उत्सव का अवसर न होकर, एक नई शुरुआत का प्रतीक बने। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस पावन अवसर पर सामाजिक समरसता, स्वच्छता, सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। मंत्री सारंग ने आग्रह किया कि हर नागरिक अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने, समाज में भाईचारे और एकता को मजबूत करने तथा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने का संकल्प ले। छोटे-छोटे प्रयास ही मिलकर बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं और यही प्रयास हमारे राष्ट्र को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भव्य आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों के साथ हिंदू नववर्ष का स्वागतनववर्ष की पूर्व संध्या पर प्रभात चौराहे पर आकर्षक आतिशबाजी के साथ देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति से संपूर्ण वातावरण देशभक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठा। रंग-बिरंगी रोशनी से सजा आकाश और देशभक्ति के जोश से भरे गीतों ने हर हृदय में गर्व, उत्साह और नई उमंग का संचार किया। कार्यक्रम में पार्षद सूर्यकांत गुप्ता, अशोक वाणी, राकेश यादव बाबा, विमलेश ठाकुर, प्रदीप शेखावत, मण्डल अध्यक्ष विक्की ठाकुर, नितिन पाठक, संदीप चौकसे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में युवा साथी उपस्थित रहे।