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भोपाल में जलसा-ए-शहादत: अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे, ट्रंप के पोस्टर कुचले गए; मौलाना ने आपत्तिजनक टिप्पणी की

भोपाल। भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र की बिस्मिल्लाह कॉलोनी स्थित गरीब नवाज मस्जिद में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई की याद में जलसा-ए-शहादत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारी भीड़ मौजूद रही और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात था। पोस्टर कुचले गए, नारेबाजी तेजकार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जमीन पर रखकर पैरों से कुचल दिए। साथ ही “इजराइल मुर्दाबाद” और “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे भी लगाए गए। मौलाना रजी-उल-हसन हैदरी का भाषणमौलाना हैदरी ने कहा, “दुनिया में जालिम ताकतें मजलूमों का खून बहा रही हैं। चाहे इजराइल हो या अमेरिका, उनके हाथ मासूमों के खून से रंगे हुए हैं।” उन्होंने ट्रंप पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की और समाज में मुसलमानों को शिक्षा में आगे बढ़ने की सलाह दी। शिक्षा और एकता पर जोरमौलाना ने कहा, “कुछ लोग कहते हैं भूखे रहेंगे लेकिन तालीम जरूर हासिल करेंगे। इसी तालीम से दुनिया की सियासत और टेक्नोलॉजी में असर दिखता है।”सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने कहा, “मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है, इसका कारण हमारी बेइत्तहादी है। हमें आपस में लड़ने के बजाय एकजुट होना चाहिए।” खामनेई की मिसाल और उम्मत के लिए पैगामरिजवी ने आगे कहा कि सैयद अली खामनेई ने हमेशा जालिम ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई। एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने खामनेई को उम्मत को एकता का पैगाम देने वाला नेता बताया।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

घरेलू गैस सिलेंडर महंगे, ईरान-इजराइल जंग के चलते सप्लाई संकट का खतरा; सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने का इमरजेंसी आदेश दिया

नई दिल्ली। देश में घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। 14.2 किग्रा वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपए हो गई है, जो पहले 853 रुपए में मिलती थी। वहीं, 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1883 रुपए हो गए हैं, यानी 115 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी 7 मार्च से लागू हो गई है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असरसरकार ने गैस के दामों में इजाफा ऐसे वक्त में किया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और देश में रसोई गैस की किल्लत की आशंका जताई जा रही है। एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेशइस खतरे को देखते हुए 5 मार्च को सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया। अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को सप्लाई सरकारी तेल कंपनियोंIOC, HPCL और BPCLको करनी होगी। इसका मकसद आम जनता को बिना रुकावट सिलेंडर उपलब्ध कराना है। सप्लाई संकट की दो बड़ी वजहेंस्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होनाभारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% LNG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आयात करता है। यह 167 किमी लंबा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के चलते यह रूट अब सुरक्षित नहीं है, जिससे तेल टैंकर नहीं गुजर रहे। कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद प्रोडक्शन रुकाअमेरिका-इजराइल के स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इसके बाद कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया। भारत अपनी सालाना LNG जरूरत का लगभग 40% हिस्सा कतर से ही मंगाता है।सरकार अब इस संकट को देखते हुए एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित बनाने में जुट गई है।

होली पर मुरैना में जमीनी विवाद में चली गोलियां, पुलिस आरक्षक ने की फायरिंग

मुरैना। पोरसा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कॉन्थर कलां के मजरा मड़ोखर में होली के अवसर पर छुट्टी आए एक पुलिस आरक्षक और ग्रामीणों के बीच पुराने जमीनी विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। गुरुवार दोपहर जैसे ही आरक्षक मलखान सिंह अपने चाचा धनवीर सिंह के साथ गांव पहुंचे पुराने विवाद की बातें फिर से तूल पकड़ गईं। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों ने बंदूक निकाल ली और फायरिंग शुरू हो गई। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के अनुसार आरक्षक मलखान सिंह और उनके चाचा धनवीर सिंह ने पहले फायरिंग शुरू की इसके जवाब में बंटू तोमर और अंकित तोमर ने भी अपनी बंदूक से गोलियां चलाई। हालांकि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। फायरिंग के दौरान गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया और ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। यह विवाद मूल रूप से एक ही परिवार के बीच चल रहा है। कॉन्थर कलां ग्राम के मजरा मड़ोखर के बंटू अंकित और मोनू तोमर और आरक्षक मलखान सिंह व उनके चाचा धनवीर सिंह के बीच वर्षों से जमीन का मामला अनसुलझा पड़ा था। पहले भी जमीनी विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हुआ था लेकिन गुरुवार को होली के मौके पर पुराना विवाद फिर उभर आया और बहस के बाद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी की नौबत आ गई।घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें फायरिंग और विवाद की पूरी स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। वीडियो के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की है और मामले की जांच में जुट गई है।पोरसा थाना प्रभारी दिनेश कुशवाह ने बताया कि झगड़े की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले में शामिल कुछ लोगों को थाने बुलाया। उन्होंने कहा कि एक पक्ष की ओर से बंटू और अंकित तोमर पर केस दर्ज किया गया है जबकि दूसरे पक्ष की जांच जारी है। अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि होली के दिन इस तरह की हिंसक घटना से गांव में डर और दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने सभी पक्षों को शांत रहने और मामले में सहयोग करने के लिए निर्देशित किया है। स्थानीय लोग और प्रशासन अब इस विवाद पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुराने जमीनी मामलों में समय पर समाधान न होने से विवाद कभी भी हिंसक रूप ले सकता है। इस घटना ने मुरैना जिले में सुरक्षा और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को भी सामने रखा है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया है कि न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

यूपी डिप्टी CM केशव मौर्य के हेलिकॉप्टर में हड़कंप: 2000 फीट की ऊंचाई पर डिस्प्ले बंद, अंदर धुआं भरते ही की इमरजेंसी लैंडिंग

नई दिल्ली। लखनऊ से कौशांबी के लिए उड़ान भर रहे यूपी के डिप्टी CM केशव मौर्य का हेलिकॉप्टर शनिवार सुबह संकट में फंस गया। उड़ान शुरू होने के 15 मिनट बाद ही हेलिकॉप्टर का डिस्प्ले अचानक बंद हो गया और अंदर धुआं भरने लगा। पायलट ने तुरंत लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को सूचित किया और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। हेलिकॉप्टर उस समय 50 किलोमीटर दूर बछरावां तक पहुंच चुका था। अनुमति मिलते ही पायलट ने विमान को वापस लखनऊ की ओर मोड़ा। सुरक्षित लैंडिंग के लिए फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस तैनातसुबह 11.15 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पर हेलिकॉप्टर को सुरक्षित उतारा गया। हेलिकॉप्टर में केशव मौर्य समेत कुल 6 लोग सवार थे—दो पायलट, एक एडवाइजर, एक क्लास फोर स्टाफ और सुरक्षा गार्ड। 2000 फीट की ऊंचाई पर तकनीकी खराबीलखनऊ के ला मार्टिनियर स्कूल ग्राउंड से उड़ान भरते ही हेलिकॉप्टर ने 2000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा। तभी पायलट को तकनीकी खराबी का पता चला। एयरपोर्ट से अनुमति लेकर हेलिकॉप्टर को लौटाया गया। केशव मौर्य अब दूसरे हेलिकॉप्टर से कौशांबी रवाना हुए, जहां वे दो दिवसीय सरस महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। यूपी सरकार का हेलिकॉप्टर, नागरिक उड्डयन विभाग जिम्मेदारहेलिकॉप्टर यूपी सरकार का है और इसकी जिम्मेदारी नागरिक उड्डयन विभाग के पास है। इस विभाग के निदेशक ईशान प्रताप सिंह हैं, जो सीएम के विशेष सचिव भी हैं। पहले भी हो चुकी हैं इमरजेंसी लैंडिंगकेशव मौर्य के हेलिकॉप्टर में पहले भी तीन बार तकनीकी खराबी आ चुकी है: 28 फरवरी 2022: कुशीनगर में ईंधन की कमी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग।14 फरवरी 2019: आजमगढ़ दौरे पर उड़ान भरते ही खराबी, सुरक्षित लखनऊ लैंडिंग।30 मार्च 2018: आजमगढ़ से लखनऊ लौटते समय फुरसतगंज में इमरजेंसी लैंडिंग।इस घटना ने एक बार फिर सरकारी उड़ानों और तकनीकी जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंचम दा का म्यूजिक मैजिक: कैसे साधारण कंघी ने ‘पड़ोसन’ के गाने को बनाया सुपरहिट

नई दिल्ली।भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में अगर किसी संगीतकार को सबसे ज्यादा प्रयोगधर्मी और क्रिएटिव कहा जाता है तो वह हैं Rahul Dev Burman जिन्हें दुनिया प्यार से पंचम दा के नाम से जानती है। आरडी बर्मन को लोग यूं ही मैड जीनियस नहीं कहते थे। उनके संगीत में ऐसी अनोखी कल्पनाशीलता थी जिसे आज भी दोहराना आसान नहीं है। पंचम दा जब भी किसी गाने की रिकॉर्डिंग करते थे तो सिर्फ पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर निर्भर नहीं रहते थे बल्कि रोजमर्रा की चीजों से भी ऐसी आवाजें निकाल लेते थे जो गाने में नई जान भर देती थीं। उनकी इसी क्रिएटिव सोच का एक दिलचस्प उदाहरण 1968 में आई फिल्म Padosan के सुपरहिट गाने Mere Samne Wali Khidki Mein में देखने को मिलता है। यह गाना उस दौर में जितना लोकप्रिय था उतना ही आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। अक्सर लोग इस गाने को गुनगुनाते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने में एक खास साउंड किसी म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट से नहीं बल्कि एक साधारण कंघी से निकाला गया था। दरअसल फिल्म में Sunil Dutt एक शरारती पड़ोसी की भूमिका निभाते हैं जो सामने वाली खिड़की में रहने वाली लड़की को अपने अंदाज में रिझाने की कोशिश करता है। गाने का माहौल भी हल्का फुल्का और शरारत से भरा हुआ है। जब इस गाने की रिकॉर्डिंग की तैयारी चल रही थी तब पंचम दा को लग रहा था कि गाने में कुछ ऐसा होना चाहिए जो उसकी मस्ती और शरारत को और ज्यादा उभार सके। स्टूडियो में उस समय बड़े बड़े संगीतकार मौजूद थे। वायलिन, गिटार और कई अन्य वाद्ययंत्र तैयार थे लेकिन पंचम दा को कुछ अलग चाहिए था। बताया जाता है कि काफी देर सोचने के बाद अचानक पंचम दा ने अपनी जेब में हाथ डाला और एक साधारण प्लास्टिक की कंघी निकाल ली। इसके बाद उन्होंने उस कंघी को एक खुरदुरी सतह पर रगड़ना शुरू किया। जैसे ही उससे कर्र कर्र जैसी आवाज निकली पंचम दा के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्हें लगा कि यही वह साउंड है जो गाने के शरारती मूड को और दिलचस्प बना सकता है। स्टूडियो में मौजूद लोग पहले तो यह देखकर हैरान रह गए कि एक मशहूर संगीतकार रिकॉर्डिंग के दौरान कंघी से आवाज निकालने की कोशिश कर रहा है। खासतौर पर गायक Kishore Kumar को यह दृश्य काफी मजेदार लगा। उन्होंने पंचम दा को देखकर मजाक किया और सिर पकड़ लिया। लेकिन जब रिकॉर्डिंग पूरी हुई और गाना तैयार हुआ तो हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो गया। गाने की शुरुआत और बैकग्राउंड में जो हल्की क्रिक क्रिक जैसी आवाज सुनाई देती है वह असल में उसी कंघी से पैदा की गई थी। यह छोटी सी ध्वनि गाने में एक अलग तरह की मस्ती और चुलबुलापन जोड़ देती है। यही वजह है कि आज भी यह गाना सुनते समय श्रोताओं को अलग आनंद मिलता है भले ही वे उस साउंड के पीछे की कहानी से अनजान हों। आरडी बर्मन की खासियत यही थी कि वे संगीत को सिर्फ सुर और ताल तक सीमित नहीं रखते थे बल्कि रोजमर्रा की चीजों को भी संगीत का हिस्सा बना देते थे। कभी पानी की छपाक, कभी कांच की बोतल की टनकार और कभी चम्मच और ग्लास की आवाजें उनके गानों में सुनाई देती थीं। उनकी यही प्रयोगधर्मिता उन्हें बाकी संगीतकारों से अलग बनाती है। आज जब लोग इस गाने को ध्यान से सुनते हैं और कंघी से निकली उस आवाज़ को पहचानने की कोशिश करते हैं तो उन्हें एहसास होता है कि पंचम दा की क्रिएटिविटी कितनी अनोखी थी। यही कारण है कि दशकों बाद भी आरडी बर्मन का संगीत उतना ही ताजा और दिलचस्प लगता है जितना अपने दौर में था।

जब शेषनाग के सेट पर भड़क गई थीं सरोज खान, रिहर्सल को लेकर रेखा से कह दी कड़वी बात

नई दिल्ली । बॉलीवुड की चमकदार दुनिया के पीछे कई ऐसे किस्से छिपे होते हैं जो समय के साथ चर्चित कहानियों में बदल जाते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प और भावुक किस्सा 1990 में रिलीज हुई फिल्म शेषनाग के सेट से जुड़ा हुआ है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मशहूर एक्ट्रेस रेखा और दिग्गज कोरियोग्राफर सरोज खान के बीच हुई एक घटना ने पूरे सेट का माहौल बदल दिया था। रिहर्सल को लेकर हुई इस बातचीत के बाद रेखा की आंखों में आंसू आ गए थे। दरअसल फिल्म में रेखा पर एक बेहद मुश्किल डांस नंबर फिल्माया जाना था। इस गाने की कोरियोग्राफी की जिम्मेदारी सरोज खान के पास थी जो उस दौर की सबसे मशहूर और सख्त अनुशासन वाली कोरियोग्राफर मानी जाती थीं। गाने की तैयारी के लिए सरोज खान को सिर्फ तीन दिन का समय मिला था। ऐसे में उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर से कहकर रेखा को रिहर्सल के लिए सेट पर बुलाने का अनुरोध किया ताकि गाने की शूटिंग से पहले डांस को पूरी तरह तैयार किया जा सके। हालांकि उस समय रेखा ने अपनी तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए रिहर्सल में आने से मना कर दिया। बताया जाता है कि वह तीनों दिन रिहर्सल के लिए नहीं पहुंचीं। तीन दिन बाद जब गाने की शूटिंग का दिन आया तब रेखा सेट पर पहुंचीं। सरोज खान ने उन्हें फिर से रिहर्सल के लिए बुलाया लेकिन उस दिन भी रेखा ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और आज की शूटिंग को कैंसिल कर देना चाहिए। यह बात सुनकर सरोज खान काफी नाराज हो गईं। वह सीधे रेखा के पास गईं और उनसे साफ-साफ सवाल किया कि आखिर वह रिहर्सल के लिए क्यों नहीं आ रही हैं। अपने एक पुराने इंटरव्यू में सरोज खान ने बताया था कि उन्होंने रेखा से कहा रेखा जी ऐसा लगता है कि आपको मुझसे कोई एलर्जी है। मैं आपको रिहर्सल के लिए बुलाती हूं तो आप नहीं आतीं और शूटिंग वाले दिन आती हैं तो कहती हैं कि तबीयत ठीक नहीं है। अगर आपको मेरे साथ काम नहीं करना है तो आप प्रोड्यूसर से कह सकती हैं कि डांस मास्टर बदल दिया जाए क्योंकि कुछ तो गड़बड़ जरूर है। सरोज खान की यह बात सुनकर माहौल अचानक गंभीर हो गया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने रेखा की तरफ देखा तो उनकी आंखों में आंसू थे। रेखा यह सुनकर काफी भावुक हो गई थीं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे। हालांकि सरोज खान ने उन्हें समझाते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने कुछ गलत कहा है लेकिन आज शूटिंग जरूर होनी चाहिए। इसके बाद रेखा ने खुद को संभाला और शांत स्वर में कहा मैं शूट करूंगी। इतना कहकर वह वहां से चली गईं। कुछ देर बाद रेखा की सेक्रेटरी सरोज खान के पास आईं और उनसे पूछा कि उन्होंने रेखा से आखिर क्या कह दिया है क्योंकि वह सेट पर रो रही हैं। यह घटना आज भी बॉलीवुड के उन चर्चित किस्सों में गिनी जाती है जो यह दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में काम के प्रति अनुशासन और दबाव कभी कभी बड़े कलाकारों के बीच भी भावनात्मक पल पैदा कर देते हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच महंगाई का नया झटका: घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में ₹115 की बढ़ोतरी

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये का इजाफा किया गया है। नए रेट 7 मार्च से पूरे देश में लागू कर दिए गए हैं और तेल कंपनियों की वेबसाइट पर भी इन्हें अपडेट कर दिया गया है। नई कीमतों के लागू होने के बाद दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर अब 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये का हो गया है। इसी तरह कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये हो गई है। चेन्नई में पहले जहां यह सिलेंडर 868.50 रुपये में मिल रहा था वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है। मुंबई में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 912.50 रुपये तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देशभर में करोड़ों परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। खास बात यह है कि अप्रैल 2025 के बाद पहली बार घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। करीब एक साल तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था लेकिन अब अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पहले से ही महंगाई के दबाव से जूझ रहे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। घरेलू सिलेंडर के साथ साथ कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये की वृद्धि की गई है। नई कीमतों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब 1883 रुपये में मिलेगा जबकि मुंबई में इसकी कीमत 1835 रुपये हो गई है। कोलकाता में इसका रेट बढ़कर 1990 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2043.50 रुपये हो गई है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर पड़ सकता है क्योंकि इन जगहों पर बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है जिसका असर आगे चलकर खाने पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही कहा था कि भारत के पास ऊर्जा आपूर्ति के कई स्रोत मौजूद हैं और देश में पेट्रोल डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर फैल रही उन खबरों को खारिज किया है जिनमें देश में ईंधन की कमी की बात कही जा रही थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संभावित जोखिमों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आयात के कई विकल्प तैयार कर रखे हैं जिससे सप्लाई सामान्य बनी हुई है। हालांकि एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है और आने वाले समय में महंगाई को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।

उज्जैन में बनेगा देश का दूसरा ‘वनतारा’: 300 करोड़ की लागत से आधुनिक जू और टाइगर सफारी, सिंहस्थ-2028 से पहले पहला फेज पूरा करने की तैयारी

उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन जल्द ही एक और बड़े पर्यटन प्रोजेक्ट का केंद्र बनने जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार यहां देश का दूसरा वनतारा विकसित करने की तैयारी कर रही है। यह परियोजना मुख्यमंत्रीमोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल है और इसे गुजरात के जामनगर में बने प्रसिद्ध वंतारा पशु बचाव और संरक्षण केंद्र की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इस आधुनिक वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट DPR तैयार की जा रही है। जानकारी के अनुसार वनतारा की विशेषज्ञ टीम पहले ही उज्जैन का दौरा कर प्रारंभिक सर्वे कर चुकी है। अब परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर काम किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट शहर के मक्सी रोड क्षेत्र के नौलखी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जहां इसके लिए 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित की गई है। प्रस्तावित वनतारा प्रोजेक्ट में केवल एक सामान्य चिड़ियाघर ही नहीं बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण, उपचार और पुनर्वास के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। यहां घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों का इलाज और देखभाल की जाएगी। साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों से रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को यहां सुरक्षित रखा जा सकेगा। परियोजना को पर्यटन के लिहाज से भी बेहद आकर्षक बनाया जाएगा। यहां टाइगर सफारी, जंगल सफारी, नाइट कैंपिंग और प्रकृति से जुड़े कई एडवेंचर एक्टिविटी विकसित की जाएंगी। पर्यटक दिन और रात दोनों समय जंगल सफारी का अनुभव ले सकेंगे, जो इस परियोजना की खास विशेषता होगी। इससे उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलेगा। सरकार की योजना है कि इस प्रोजेक्ट के पहले चरण को सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 से पहले पूरा कर लिया जाए, ताकि उस समय उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस नए पर्यटन स्थल का लाभ उठा सकें। शुरुआती चरण में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को विकसित किया जाएगा। इसमें 300 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से उज्जैन की पहचान केवल धार्मिक नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक प्रमुख पर्यटन और वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन उद्योग को भी नया बढ़ावा मिलेगा। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध उज्जैन में इस तरह की आधुनिक पर्यटन परियोजना विकसित होने से शहर के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

गोल्ड मार्केट में उतार चढ़ाव होली के बाद सोना फिसला 24 कैरेट ₹1.62 लाख के करीब..

नई दिल्ली। होली के बाद सर्राफा बाजार से निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर सामने आई है। घरेलू बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक उतार चढ़ाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत में करीब 4,923 रुपये की कमी आई है। इसके साथ ही सोना घटकर लगभग 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार इससे पहले सोने का भाव करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। बाजार में गिरावट के बाद अब यह 1.62 लाख रुपये के करीब कारोबार कर रहा है। देश के अलग अलग शहरों में भी सोने के दामों में इसी तरह का रुख देखने को मिला। दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब 1,64,650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना लगभग 1,50,940 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। मुंबई चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा जबकि 22 कैरेट सोना करीब 1,50,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। अहमदाबाद और भोपाल में 24 कैरेट सोने का रेट करीब 1,64,550 रुपये और 22 कैरेट सोना लगभग 1,50,840 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं जयपुर लखनऊ और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोना 1,64,650 रुपये और 22 कैरेट सोना करीब 1,50,940 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। इसके अलावा 18 कैरेट सोने की कीमत भी लगभग 1,23,300 से 1,23,470 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रही। सोने के साथ साथ चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी का भाव करीब 18,501 रुपये गिरकर लगभग 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली की वजह से आई है। त्योहार के दौरान कीमतों में तेजी आने के बाद निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर दी जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक बाजार में सोने का हाजिर भाव करीब 0.8 प्रतिशत बढ़कर 5,176.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है। वहीं यूएस गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 5,186.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इस तेजी की एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोने और चांदी के दाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें कॉमा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कॉमा आयात शुल्क कॉमा जीएसटी और घरेलू मांग व आपूर्ति जैसे कारक शामिल होते हैं। इसके अलावा लंदन बुलियन मार्केट और कॉमेक्स के रुझान भी भारतीय बाजार को प्रभावित करते हैं।

उज्जैन रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा टला: चलती ट्रेन में चढ़ते वक्त फिसला यात्री, आरपीएफ जवान ने खींचकर बचाई जान

उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा एक यात्री अचानक फिसल गया और ट्रेन के साथ घिसटने लगा। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात Railway Protection Force आरपीएफ के जवान की सतर्कता और बहादुरी से उसकी जान बच गई। जवान ने तुरंत दौड़कर यात्री को पकड़ लिया और पूरी ताकत से खींचकर प्लेटफॉर्म की ओर सुरक्षित निकाल लिया। यह पूरी घटना स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यात्री जाहिद उत्तर प्रदेश के Varanasi का निवासी है। वह उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करने आया था और दर्शन के बाद वापस अपने घर लौट रहा था। बताया जा रहा है कि वह Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में दर्शन करने के बाद ट्रेन से वापसी कर रहा था। जिस ट्रेन से वह सफर कर रहा था, वह Ahmedabad–Gorakhpur Express बताई जा रही है। घटना के दौरान जाहिद कुछ खाने पीने का सामान लेने के लिए प्लेटफॉर्म पर उतर गया था। इसी बीच ट्रेन ने धीरे धीरे चलना शुरू कर दिया। ट्रेन को चलते देख वह घबराहट में जल्दी जल्दी डिब्बे में चढ़ने की कोशिश करने लगा। उसने ट्रेन का हैंडल पकड़कर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन जल्दबाजी में उसका पैर फिसल गया और वह ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसकर घिसटने लगा। कुछ ही सेकंड में यह स्थिति बेहद खतरनाक हो गई थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी कर रहे आरपीएफ कॉन्स्टेबल शिवराम मीणा की नजर इस घटना पर पड़ गई। उन्होंने बिना समय गंवाए तुरंत दौड़ लगाई और घिसट रहे यात्री को पकड़ लिया। पूरी ताकत लगाकर उन्होंने उसे ट्रेन से दूर खींच लिया और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित कर दिया। यदि कुछ सेकंड की भी देरी हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद यात्रियों और रेलवे स्टाफ ने आरपीएफ जवान की बहादुरी की जमकर सराहना की। रेलवे अधिकारियों के अनुसार आरपीएफ का Operation Jeevan Raksha अभियान इसी तरह यात्रियों की सुरक्षा के लिए चलाया जा रहा है, जिसके तहत जवान प्लेटफॉर्म और ट्रेनों के आसपास लगातार सतर्क रहते हैं। हादसे में यात्री को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन वह पूरी तरह सुरक्षित है। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि चलती ट्रेन में चढ़ना बेहद खतरनाक होता है और यात्रियों को हमेशा सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। वहीं आरपीएफ जवान की तत्परता और साहस से एक बड़ी दुर्घटना टल गई।