ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन के साथ CM डॉ. मोहन यादव ने फूंका ज्ञान क्रांति का शंखनाद, मध्य प्रदेश बनेगा देश का एजुकेशन हब!

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी ग्वालियर अब ज्ञान और कौशल के नए वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर की इस पावन धरा पर ‘ऋषि गालव विश्वविद्यालय’ का विधि-विधान से भूमिपूजन कर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्वालियर की वीरता, विद्वता और कला की त्रिवेणी का स्मरण करते हुए कहा कि एक विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला केंद्र नहीं होता, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होता है। ऋषि गालव के नाम पर स्थापित होने वाला यह संस्थान हमारी भावी पीढ़ियों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों से भी जोड़ेगा, ताकि वे राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत बन सकें। मुख्यमंत्री ने मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के महान योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पराधीनता के कठिन समय में वर्ष 1941 में जो दीया एक छोटे से स्कूल के रूप में जलाया गया था, वह आज चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित कर रही यह संस्था अब विश्वविद्यालय के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम का केंद्र बनेगी। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हों, बल्कि चरित्रवान, नवाचारी और समाज के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी भी हों। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों का यह अनूठा उदाहरण प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। शिक्षा प्रणाली में बदलाव की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी को आधार मानकर प्रदेश में कई क्रांतिकारी नवाचार किए गए हैं। अब दीक्षांत समारोहों में औपनिवेशिक काल के काले कोट के स्थान पर भारतीय वेशभूषा और साफे की परंपरा को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ का गौरवपूर्ण संबोधन दिया गया है, जो हमारी गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा में अमीर-गरीब का भेद समाप्त होना चाहिए और सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए निरंतर कार्यरत है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में ‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गुमनाम नायकों और महान क्रांतिकारियों के सम्मान में तात्या टोपे विश्वविद्यालय, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की स्थापना की है, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरित हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर का यह नया विश्वविद्यालय अगले वर्ष गुरु पूर्णिमा तक अपना कार्य प्रारंभ कर देगा और ग्वालियर न केवल मध्य भारत, बल्कि पूरे देश में शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र (एजुकेशन हब) के रूप में नई चमक बिखेरेगा। यह संस्थान राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत होकर छात्रों के भीतर योग्यता और दक्षता का नया संचार करेगा।
तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट की तेल राजनीति में तनाव खुलकर सामने आ गया है। Iran ने United Arab Emirates (UAE) के OPEC से बाहर निकलने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “नकारात्मक और बदले की भावना से लिया गया कदम” बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ कहा कि इस तरह का फैसला संगठन की एकजुटता को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान OPEC के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को निभाता रहेगा और वैश्विक तेल संतुलन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका जारी रखेगा। तनाव यहीं नहीं रुका। ईरान ने UAE पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान उसने अमेरिका और इजराइल का साथ देकर “गलत रवैया” अपनाया, जिससे भरोसे पर असर पड़ा है। वहीं दूसरी तरफ UAE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। Sultan Al Jaber ने कहा कि OPEC और OPEC+ से अलग होने का फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ OPEC तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मिडिल ईस्ट की बदलती राजनीतिक समीकरण और वैश्विक ऊर्जा बाजार की प्रतिस्पर्धा भी अहम वजह हैं। कुल मिलाकर, UAE के इस कदम और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में तेल बाजार के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
महिला क्रिकेट में मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा, अनुष्का शर्मा को भारत ए टीम की कप्तानी, इंग्लैंड दौरे पर बड़ी जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश: के ग्वालियर की रहने वाली युवा क्रिकेटर अनुष्का शर्मा ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्हें भारत ए महिला T-20 टीम का कप्तान नियुक्त किया गया है। यह जिम्मेदारी उनके करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब वह इंग्लैंड दौरे पर टीम की कमान संभालेंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करेंगी। अनुष्का शर्मा की कप्तानी में भारत ए महिला टीम इंग्लैंड ए के खिलाफ तीन मैचों की T-20 सीरीज खेलेगी। यह सीरीज युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर मानी जा रही है, जहां हर खिलाड़ी पर प्रदर्शन का दबाव और अवसर दोनों रहेगा। इस दौरे का पहला मुकाबला 20 जून को नॉर्थम्पटन में खेला जाएगा, दूसरा मैच 23 जून को उसी मैदान पर होगा, जबकि तीसरा और अंतिम मुकाबला 25 जून को चेल्सफोर्ड में आयोजित किया जाएगा। यह श्रृंखला खिलाड़ियों की तकनीक, मानसिक मजबूती और मैच परिस्थितियों को संभालने की क्षमता की सख्त परीक्षा मानी जा रही है। अनुष्का शर्मा का क्रिकेट सफर लगातार मेहनत और प्रदर्शन से भरा रहा है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश सीनियर महिला टीम के लिए खेलते हुए उपकप्तान की जिम्मेदारी भी निभाई है। उनके नेतृत्व में टीम ने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके अलावा वह अंडर-19 चैलेंजर ट्रॉफी में इंडिया बी टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं, जहां उनके रणनीतिक फैसलों की काफी सराहना हुई थी। मध्यप्रदेश अंडर-19 टीम को राष्ट्रीय उपविजेता बनाने में भी उनका अहम योगदान रहा है। उनकी प्रतिभा सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उन्होंने महिला प्रीमियर लीग में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। वहां उन्होंने गुजरात जायंट्स जैसी टीम का हिस्सा बनकर उच्च स्तर का अनुभव हासिल किया। इसके साथ ही बुंदेलखंड बुल्स की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को मजबूती दी और कई मैचों में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके लगातार प्रदर्शन ने उन्हें एक भरोसेमंद और आक्रामक सोच वाली खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। अनुष्का को उनके बेहतरीन खेल और नेतृत्व के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं। उनके नाम चंद्रा नायडू अवॉर्ड जैसी प्रतिष्ठित उपलब्धियां दर्ज हैं। हाल ही में सीनियर वनडे ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन ने मध्यप्रदेश को खिताब दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ जैसे सम्मान से नवाजा गया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इंग्लैंड जैसे मजबूत क्रिकेटिंग देश में कप्तानी करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में अनुष्का शर्मा के पास खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका है। उनकी कप्तानी में भारत ए टीम का प्रदर्शन आने वाले समय में उनके करियर की दिशा तय कर सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वह इस जिम्मेदारी को किस तरह निभाती हैं और टीम को कितनी मजबूती से आगे ले जाती हैं।
ड्रोन और AI बदल रहे जंग का खेल, राजनाथ सिंह की चेतावनी, भारत को रहना होगा हर हाल में तैयार

नई दिल्ली। देश के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दुनिया में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है और भारत को इसके लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जंग सिर्फ टैंक और मिसाइल से नहीं, बल्कि ड्रोन, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लड़ी जाएगी। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि महज कुछ वर्षों में ही युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। अब छोटे-छोटे ड्रोन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी बड़े हथियारों पर भारी पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, आम इस्तेमाल की चीजें भी अब हथियार बनती जा रही हैं, जैसा कि मध्य पूर्व में हालिया हमलों में देखने को मिला। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भविष्य की जंग का फैसला मैदान में नहीं, बल्कि लैब और रिसर्च सेंटर में होगा। जो देश तकनीक में आगे रहेगा, वही युद्ध में बढ़त हासिल करेगा। सरकार के आत्मनिर्भर भारत मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देश का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर है। यह दिखाता है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह संस्था अकेले नहीं, बल्कि निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम कर रही है। DRDO ने अपने पेटेंट उद्योगों के लिए मुफ्त में खोल दिए हैं और टेस्टिंग सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे देश की टेक्नोलॉजी क्षमता और मजबूत होगी। राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत से अपील की कि वे हाइपरसोनिक हथियार, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, AI और मशीन लर्निंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेजी से काम करें। कुल मिलाकर, उनका संदेश साफ है भविष्य की जंग पारंपरिक नहीं होगी और भारत को अभी से टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर खुद को मजबूत करना होगा, तभी सुरक्षा और शक्ति दोनों कायम रह पाएंगे।
बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में शानदार बढ़त के बाद बीजेपी अब सिर्फ जश्न के मूड में नहीं है, बल्कि अगले मिशन की तैयारी में भी जुट गई है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि अब उसका अगला बड़ा राजनीतिक टारगेट पंजाब होगा। बंगाल में मिल रही बढ़त को बीजेपी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश मान रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि देशभर में बदलते सियासी समीकरणों की शुरुआत है। बीजेपी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब की बारी है, AAP सरकार अपना बोरिया-बिस्तर बांध ले।” इस बयान ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब पंजाब की राजनीति में आक्रामक रुख अपनाने वाली है। दिल्ली समेत देशभर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। पार्टी मुख्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का उत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और इस जीत को जनता के भरोसे का नतीजा बताएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बंगाल में बीजेपी का प्रदर्शन पार्टी को नई ऊर्जा देने वाला है। यह जीत आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी, खासकर उन राज्यों में जहां बीजेपी अभी सत्ता से दूर है। कुल मिलाकर, बंगाल की जीत ने बीजेपी के हौसले बुलंद कर दिए हैं और अब पार्टी इस लहर को पंजाब तक ले जाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में देश की राजनीति और भी ज्यादा गरमाने वाली है।
पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव, प्रतीकों की लड़ाई में भाजपा की बढ़त..
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लड़ाई सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और जनभावनाओं के गहरे स्तर तक पहुंच गई। चुनावी रुझानों और माहौल से यह साफ संकेत मिला कि मतदाताओं ने केवल विकास या योजनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और प्रतीकों की ताकत को भी महत्व दिया। चुनाव प्रचार के दौरान एक ओर जहां भाजपा ने अपने अभियान में पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक भावनाओं को केंद्र में रखा, वहीं दूसरी ओर टीएमसी ने अपने सामाजिक कल्याण और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े संदेशों को आगे बढ़ाया। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा, बहस का केंद्र मुद्दों से हटकर प्रतीकों और नैरेटिव की दिशा में शिफ्ट होता चला गया। भाजपा ने ‘जय मां काली’ जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों को अपने प्रचार का हिस्सा बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि बंगाल की जड़ें उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं। पार्टी का फोकस इस बात पर रहा कि जनता अपने पारंपरिक मूल्यों के साथ जुड़ाव महसूस करे और उसी आधार पर राजनीतिक निर्णय ले। दूसरी ओर टीएमसी ने अपने प्रचार में विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रीय अस्मिता को प्रमुखता दी। लेकिन चुनावी माहौल में सांस्कृतिक प्रतीकों की चर्चा इतनी हावी हो गई कि अन्य मुद्दे पीछे छूटते नजर आए। इस बदलाव ने चुनावी समीकरणों को काफी हद तक प्रभावित किया। महिला मतदाताओं को साधने के लिए भी दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीति अपनाई। विभिन्न योजनाओं, आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े वादों के जरिए महिलाओं को केंद्र में रखा गया। इससे चुनावी प्रतिस्पर्धा और भी तेज हो गई और हर वर्ग के मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही राज्य में मतदाता सूची, प्रशासनिक प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था को लेकर भी बहस देखने को मिली। इन सभी कारकों ने मिलकर चुनावी माहौल को बेहद जटिल और बहुस्तरीय बना दिया, जहां हर चरण में नई राजनीतिक रणनीतियां उभरती रहीं। जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों ने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर फोकस ने चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल का यह चुनाव एक साधारण राजनीतिक मुकाबला नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा चुनाव बन गया जिसमें संस्कृति, परंपरा और विचारधारा की गहरी टक्कर देखने को मिली। रुझानों से यह संकेत मिलता है कि इस बार मतदाताओं ने उन संदेशों को अधिक महत्व दिया जो उनकी सांस्कृतिक पहचान से सीधे जुड़े हुए थे, जिससे पूरे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य एक नए मोड़ पर पहुंच गया।
होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक युद्धपोत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल हमला किया है। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जास्क के नजदीक अमेरिकी जहाज पर दो मिसाइलें दागी गईं, क्योंकि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरानी युद्धपोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं। यह कथित हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” मिशन शुरू करने का ऐलान किया है। CENTCOM के मुताबिक इस ऑपरेशन में 15,000 सैनिक, 100 से ज्यादा एयर और सी प्लेटफॉर्म, युद्धपोत और ड्रोन शामिल हैं, जिनका मकसद होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है। अमेरिका ने समुद्री मार्गों के पास एक “उन्नत सुरक्षा क्षेत्र” भी बनाया है और जहाजों को ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय करने की सलाह दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि सामान्य रूट के आसपास से गुजरना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वहां बारूदी सुरंगों की आशंका है। वहीं यूरोप ने इस मिशन से दूरी बना ली है। इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस “प्रोजेक्ट फ्रीडम” में शामिल नहीं होगा और वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने इसे अस्पष्ट योजना बताते हुए यूरोप के अलग सुरक्षा समाधान पर जोर दिया। कुल मिलाकर, होर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

भोपाल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक रुझानों ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी उत्सव का माहौल पैदा कर दिया है। जैसे ही बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जीत की ओर बढ़ी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास पर ‘महाविजय’ का जश्न शुरू हो गया। इस खास मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बंगाल के प्रसिद्ध व्यंजन ‘झालमुड़ी’ का आनंद लिया और जीत की खुशी साझा की। ‘मामा’ के घर पर आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ेसोमवार को जैसे-जैसे मतगणना के रुझान स्पष्ट हुए, शिवराज सिंह चौहान के आवास पर कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे परिसर में ढोल-नगाड़ों की थाप और आतिशबाजी के बीच “जय श्री राम” और “मोदी-मोदी” के नारे गूंजते रहे। जीत के जश्न को बंगाली टच देने के लिए खास तौर पर झालमुड़ी बनवाई गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने खुद कार्यकर्ताओं को बांटकर बधाई दी। शिवराज सिंह ने कहा कि यह ‘असाधारण और अद्भुत’ है, उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताया। “श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी”मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मुझे उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास था कि बंगाल में इस बार महाविजय होगी। आज एक बड़ा संकल्प पूरा हुआ है और एक सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी।” उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि “जनता ने घटिया वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति को सिरे से नकार दिया है। घुसपैठ को बढ़ावा देने वाली ताकतों को करारा जवाब मिला है। अब हारने वाले ईवीएम (EVM) का बहाना ढूंढेंगे, लेकिन सच तो यह है कि जनता ने मोदी जी के पीछे खड़े होकर ऐतिहासिक जनादेश दिया है।” असम से तमिलनाडु तक ‘भगवा’ लहरशिवराज सिंह ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के रुझानों पर भी संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा का प्रदर्शन असाधारण है और पुडुचेरी में एक बार फिर एनडीए (NDA) की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए गृह मंत्री अमित शाह की ‘अचूक रणनीति’ और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मेहनत को इस सफलता का श्रेय दिया। शिवराज ने कहा कि पूरा देश मानता है “मोदी है तो मुमकिन है।” उन्होंने बंगाल, असम और पुडुचेरी की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब हार सामने दिखती है, तो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचने लगती है, विपक्ष भी अब हार के बहाने तलाशेगा।
बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय? 191 सीटों पर BJP आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु आमने-सामने

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच सियासी तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है। 293 सीटों पर जारी काउंटिंग के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त बना ली है और 191 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 88 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। अब तक BJP 7 सीटें जीत चुकी है, जबकि TMC के खाते में 1 सीट आई है। सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 7 हजार वोटों से आगे चल रही हैं, जबकि उनके सामने सुवेंदु अधिकारी चुनौती बने हुए हैं। दोनों नेता काउंटिंग सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भारी पुलिस बल तैनात है। काउंटिंग के दौरान कुछ देर के लिए भवानीपुर के सखावत मेमोरियल सेंटर पर गिनती करीब 45 मिनट तक रुकी रही, हालांकि बाद में प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई। इस बीच कई सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज कर ली है, जिनमें मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मोंटेश्वर और आसनसोल दक्षिण जैसी अहम सीटें शामिल हैं। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित BJP दफ्तर में जश्न का माहौल है और कार्यकर्ता जीत का जश्न मना रहे हैं। दूसरी तरफ, चुनावी माहौल में तनाव भी देखने को मिल रहा है। आसनसोल के चुरुलिया इलाके में TMC कार्यालय में आगजनी की घटना सामने आई है, जिसका आरोप बीजेपी पर लगाया गया है। वहीं TMC उम्मीदवारों ने कुछ बूथों पर EVM गड़बड़ी के आरोप भी लगाए हैं। नंदीग्राम सीट पर भी सुवेंदु अधिकारी मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं और हजारों वोटों से आगे चल रहे हैं। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो करीब 15 साल बाद पश्चिम बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह न सिर्फ राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय सियासत पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
फिल्म ‘भूत बंगला’ के विवादित दृश्य को लेकर समाजसेवी रीतेश दुबे ने उठाई आपत्ति, सेंसर बोर्ड व केंद्र सरकार को भेजा आवेदन

भोपाल। फिल्म ‘भूत बंगला’ में ज्योतिष विद्या के कथित अपमानजनक चित्रण को लेकर भोपाल निवासी समाजसेवी एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के आजीवन सदस्य रीतेश दुबे ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस संबंध में एक औपचारिक आवेदन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के अध्यक्ष, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा संबंधित सचिव को अग्रेषित किया है। अपने आवेदन में रीतेश दुबे ने उल्लेख किया है कि फिल्म के अंतिम दृश्य में ज्योतिषी पात्र के साथ अभद्र व्यवहार एवं आपत्तिजनक संवाद दर्शाए गए हैं, जो भारतीय ज्ञान परंपरा और ज्योतिष शास्त्र के प्रति असम्मानजनक हैं। उन्होंने इसे समाज में गलत संदेश देने वाला बताते हुए ऐसे दृश्यों को हटाने या संशोधित करने की मांग की है। दुबे ने कहा कि जब केंद्र सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है, तब इस प्रकार की प्रस्तुतियां सांस्कृतिक मूल्यों को आहत करती हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस विषय में गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।