करण कुंद्रा और तेजस्वी? शूटिंग सेट से लीक हुए बैनर ने किया बड़ा खुलासा।

नई दिल्ली । टेलीविजन और फिल्मी गलियारों में इस समय अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। सबसे बड़ी चर्चा लोकप्रिय जोड़ी करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश को लेकर हो रही है। एक कुकिंग रियलिटी शो के सेट से छनकर आई खबरों ने प्रशंसकों के बीच खलबली मचा दी है। सेट पर मौजूद टीम के सदस्यों द्वारा एक भव्य बैनर लहराया गया, जिस पर इस प्रेमी जोड़े को उनके जीवन के नए सफर की शुभकामनाएं दी गई थीं। हालांकि इस जोड़े ने हमेशा अपनी शादी की योजना को निजी रखने की कोशिश की है, लेकिन कैमरे के पीछे की इन गतिविधियों ने यह इशारा कर दिया है कि शायद जल्द ही शहनाइयां बजने वाली हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कोई विशेष एपिसोड का हिस्सा है या फिर वास्तव में यह शादी का आधिकारिक एलान है। सिनेमाघरों की बात करें तो अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी ‘भूत बंगला’ ने दर्शकों को बांधे रखा है। फिल्म अपनी रिलीज के दूसरे हफ्ते में भी मजबूती से डटी हुई है और अब यह वैश्विक स्तर पर 200 करोड़ रुपये के मील के पत्थर को छूने के करीब है। यह फिल्म न केवल घरेलू बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर रही है। वहीं दूसरी ओर, ‘धुरंधर 2’ ने कमाई के मामले में एक ऐसी ऊंचाई हासिल कर ली है, जहां तक पहुंचना कई बड़ी फिल्मों का सपना होता है। करीब सवा महीने से सिनेमाघरों में टिकी इस फिल्म ने हजार करोड़ से कहीं अधिक का व्यवसाय कर भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। इसके भारी-भरकम बजट और असली धमाकों के साथ शूट किए गए एक्शन दृश्यों का जादू अब भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास पर आधारित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर भी एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में सलमान खान का शामिल होना सबसे बड़ी खबर बनकर उभरी है। बताया जा रहा है कि अभिनेता ने खुद इस फिल्म का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उनके लिए एक विशेष और प्रभावशाली भूमिका तैयार की गई। इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार यश ने अपनी महाकाव्य फिल्म ‘रामायण’ के बारे में बताते हुए कहा कि फिल्म में तकनीक और भावना का अद्भुत मेल होगा। विशेष रूप से रावण और जटायु के बीच होने वाले युद्ध को आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के जरिए जिस तरह पर्दे पर उतारा गया है, वह भारतीय सिनेमा के लिए एक नया अनुभव साबित होगा। भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर नजर डालें तो विक्की कौशल अपनी आगामी पौराणिक फिल्म ‘महावतार’ के लिए एक लंबी तपस्या शुरू करने जा रहे हैं। वे अगले छह महीनों तक विशेष प्रशिक्षण लेंगे ताकि फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले वे अपने किरदार में पूरी तरह ढल सकें। इसी तरह, अपराध और थ्रिलर पर आधारित फिल्म ‘डकैत’ की डिजिटल रिलीज को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जो जल्द ही घर-बैठे दर्शकों का मनोरंजन करेगी। अंत में, नाना पाटेकर की फिटनेस ने सोशल मीडिया पर सबको हैरान कर दिया है। 76 वर्ष की आयु में उनके कठिन व्यायाम के वीडियो ने यह साबित कर दिया है कि उम्र महज एक आंकड़ा है। फिल्मी दुनिया की ये तमाम घटनाएं दर्शाती हैं कि आने वाला समय दर्शकों के लिए रोमांच और भावनाओं से भरपूर होने वाला है।
सीमा विवाद पर फिर बवाल: नेपाल एयरलाइंस की पोस्ट से भड़का भारत, तुरंत हटानी पड़ी

नई दिल्ली । नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी नेपाल एयरलाइंस एक गंभीर चूक के चलते विवादों में घिर गई है। कंपनी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए एक ग्राफिक में भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर को गलत तरीके से पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दिया। जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, भारत में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। यह मामला तब सामने आया जब एयरलाइंस ने अपने किसी प्रमोशनल या नेटवर्क मैप से जुड़ा एक पोस्ट साझा किया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का गलत चित्रण किया गया था। सबसे गंभीर बात यह रही कि इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को भारत से अलग दिखाया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच यह क्षेत्र लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा इस तरह की गलती को बेहद संवेदनशील माना जाता है। सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने इस गलती पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा प्रहार बताया। यूजर्स ने भारत सरकार के संबंधित विभागों को टैग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। बढ़ते विवाद को देखते हुए नेपाल एयरलाइंस ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करते हुए विवादित पोस्ट को हटा दिया। इसके बाद एयरलाइंस ने X पर एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी। कंपनी ने कहा कि साझा किए गए नेटवर्क मैप में नक्शानवीसी से जुड़ी कई त्रुटियां थीं, जो उनके आधिकारिक रुख को नहीं दर्शातीं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए आंतरिक समीक्षा की जा रही है। भारत का इस मुद्दे पर रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, देश की सीमाओं का गलत चित्रण करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाता है। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कंपनियों को ऐसी गलतियों के लिए भारत की आपत्ति का सामना करना पड़ा है। नेपाल एयरलाइंस की इस चूक ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को संवेदनशील मुद्दों पर सामग्री साझा करते समय अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। डिजिटल दौर में एक छोटी सी गलती भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है और देशों के बीच रिश्तों पर असर डाल सकती है।
तेल संकट और कर्ज का दबाव: युद्ध की आंच में झुलसा पाकिस्तान, PM शरीफ का बड़ा बयान

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी साफ नजर आने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद स्वीकार किया है कि मौजूदा हालात ने देश की आर्थिक प्रगति को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहबाज शरीफ ने एक बयान में कहा कि पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान ने जो आर्थिक सुधार हासिल किए थे, वे इस क्षेत्रीय संकट के चलते कमजोर पड़ गए हैं। खासतौर पर तेल की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी ने देश की कमर तोड़ दी है। उनके मुताबिक, जहां पहले पाकिस्तान हर सप्ताह तेल आयात पर लगभग 30 करोड़ डॉलर खर्च करता था, वहीं अब यह खर्च बढ़कर करीब 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और बजट संतुलन पर भारी दबाव पड़ा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि देश में ऊर्जा संकट के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार बेहद सीमित रह गया है और यह सिर्फ कुछ दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। हालात को संभालने के लिए सरकार को असाधारण कदम उठाने पड़े हैं, जिनमें ईंधन की खपत कम करने के उपाय, सरकारी खर्चों में कटौती और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन चुनौतियों के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। वह लगातार ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू कराने का प्रयास कर रहा है, ताकि क्षेत्र में तनाव कम हो सके। हालांकि अब तक इन प्रयासों को सफलता नहीं मिली है। खुद शहबाज शरीफ ने भी माना है कि यह काम किसी एक देश के बस की बात नहीं है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। दूसरी ओर, आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे देश को अब बाहरी सहायता पर और अधिक निर्भर होना पड़ रहा है। खाड़ी देशों के साथ संबंधों में आई खटास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में पाकिस्तान को नए कर्ज लेकर पुराने कर्ज चुकाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जो लंबे समय में अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। कुल मिलाकर, क्षेत्रीय संघर्ष का असर अब केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आर्थिक स्थिरता और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान के लिए यह समय आर्थिक प्रबंधन, कूटनीति और आंतरिक सुधारों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी परीक्षा बन गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी साफ नजर आने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद स्वीकार किया है कि मौजूदा हालात ने देश की आर्थिक प्रगति को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहबाज शरीफ ने एक बयान में कहा कि पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान ने जो आर्थिक सुधार हासिल किए थे, वे इस क्षेत्रीय संकट के चलते कमजोर पड़ गए हैं। खासतौर पर तेल की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी ने देश की कमर तोड़ दी है। उनके मुताबिक, जहां पहले पाकिस्तान हर सप्ताह तेल आयात पर लगभग 30 करोड़ डॉलर खर्च करता था, वहीं अब यह खर्च बढ़कर करीब 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और बजट संतुलन पर भारी दबाव पड़ा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि देश में ऊर्जा संकट के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार बेहद सीमित रह गया है और यह सिर्फ कुछ दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। हालात को संभालने के लिए सरकार को असाधारण कदम उठाने पड़े हैं, जिनमें ईंधन की खपत कम करने के उपाय, सरकारी खर्चों में कटौती और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन चुनौतियों के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। वह लगातार ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू कराने का प्रयास कर रहा है, ताकि क्षेत्र में तनाव कम हो सके। हालांकि अब तक इन प्रयासों को सफलता नहीं मिली है। खुद शहबाज शरीफ ने भी माना है कि यह काम किसी एक देश के बस की बात नहीं है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। दूसरी ओर, आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे देश को अब बाहरी सहायता पर और अधिक निर्भर होना पड़ रहा है। खाड़ी देशों के साथ संबंधों में आई खटास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में पाकिस्तान को नए कर्ज लेकर पुराने कर्ज चुकाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जो लंबे समय में अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। कुल मिलाकर, क्षेत्रीय संघर्ष का असर अब केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आर्थिक स्थिरता और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान के लिए यह समय आर्थिक प्रबंधन, कूटनीति और आंतरिक सुधारों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी परीक्षा बन गया है।
समानता और सेवा के संदेश के साथ मनाया गया गुरु अमरदास जी का प्रकाश पर्व, नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली । सिख धर्म के तीसरे गुरु श्री गुरु अमरदास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस पावन अवसर पर कई प्रमुख नेताओं ने गुरु साहिब को नमन करते हुए उनके आदर्शों और शिक्षाओं को याद किया। पूरे देश में यह दिन सेवा, समानता और विनम्रता के संदेश के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरु अमरदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके जीवन से हमें निस्वार्थ सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने समाज में समानता और मानवता के कल्याण के लिए जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरु साहिब को नमन करते हुए उनके जीवन को समर्पण, सेवा और विनम्रता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु अमरदास जी ने समाज में महिलाओं को सम्मान और समान अधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया, जो आज भी प्रेरणादायक है। इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी इस अवसर पर अपने संदेश साझा किए और गुरु अमरदास जी के जीवन मूल्यों को याद किया। कई संदेशों में ‘पंगत और संगत’ की परंपरा का उल्लेख किया गया, जिसे सामाजिक एकता और समानता का मजबूत आधार माना जाता है। गुरु अमरदास जी की शिक्षाओं में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने, समानता स्थापित करने और मानवता को सर्वोपरि रखने का संदेश शामिल है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं और लोगों को एकता के सूत्र में बांधते हैं। इस प्रकाश पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु साहिब की शिक्षाएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने वाली हैं, जो हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
हेड-क्लासेन का कहर, मुंबई पस्त: IPL इतिहास का चौथा सबसे बड़ा रनचेज

नई दिल्ली । सनराइजर्स हैदराबाद ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए हाई-स्कोरिंग मुकाबले में शानदार जीत दर्ज करते हुए आईपीएल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया। 244 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए हैदराबाद ने महज 18.4 ओवर में चार विकेट खोकर 249 रन बनाते हुए मुकाबला छह विकेट से अपने नाम कर लिया। यह आईपीएल इतिहास का चौथा सबसे बड़ा सफल रनचेज बन गया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई इंडियंस ने विस्फोटक अंदाज में रन बटोरे। टीम की ओर से रेयान रिकेल्टन ने शानदार शतक जड़ा और 55 गेंदों में 123 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी इस पारी में चौकों-छक्कों की झड़ी देखने को मिली। शुरुआत में विल जैक्स ने भी 46 रन की तेज पारी खेली, जिससे टीम ने 20 ओवर में 243 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान हार्दिक पांड्या ने भी 31 रन का योगदान दिया। हालांकि इतना बड़ा स्कोर भी मुंबई के लिए नाकाफी साबित हुआ। जवाब में हैदराबाद की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही। ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा ने पहले विकेट के लिए तेजी से रन जोड़े। हेड ने सिर्फ 30 गेंदों में 76 रन की विस्फोटक पारी खेली, जबकि अभिषेक ने 45 रन बनाए। मध्यक्रम में हेनरिक क्लासेन ने जिम्मेदारी संभाली और 30 गेंदों में नाबाद 65 रन बनाकर टीम को जीत की ओर ले गए। उनके साथ नीतीश रेड्डी और सलिल अरोड़ा ने अहम साझेदारियां निभाईं, जिससे टीम ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ हैदराबाद ने लगातार पांचवीं जीत दर्ज की और अंक तालिका में 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गई। वहीं मुंबई इंडियंस की यह आठ मैचों में छठी हार रही, जिससे टीम नौवें स्थान पर खिसक गई है और प्लेऑफ की राह अब मुश्किल नजर आ रही है। यह मुकाबला आईपीएल के इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में से एक बन गया, जहां बल्लेबाजों का दबदबा पूरी तरह देखने को मिला। इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि टी20 क्रिकेट में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता, अगर बल्लेबाजी में दम और रणनीति में सटीकता हो।
तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं। सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है। नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
कर्ज, टूटन और मौत के बीच लिखा गया अमर गीत, बेटे ने पूरा किया पिता का सपना

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत बने हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि इंसानी भावनाओं की गहराई को भी छूते हैं। ऐसा ही एक गीत है जीना यहां मरना यहां जो मेरा नाम जोकर का हिस्सा है। यह गीत आज भी लोगों के दिलों में बसता है और हर बार सुनने पर आंखें नम कर देता है। लेकिन इस गीत के पीछे की कहानी जितनी भावुक है उतनी ही दर्दनाक भी है। इस अमर गीत को आवाज दी थी मुकेश ने और इसके संगीतकार थे शंकर जयकिशन। लेकिन इस गीत की आत्मा थे इसके गीतकार शैलेंद्र जिन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में इसे लिखा। कहा जाता है कि यह गीत उनके निजी दर्द और संघर्ष का आईना है। दरअसल शैलेंद्र ने अपने करियर में एक फिल्म तीसरी कसम बनाई थी जिसे लेकर उन्हें काफी उम्मीदें थीं। लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस असफलता ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। कर्ज का बोझ बढ़ता गया और मानसिक तनाव ने उन्हें घेर लिया। इसी दौर में उनके करीबी दोस्त राज कपूर ने उनसे अपनी फिल्म के लिए गीत लिखने का आग्रह किया। जब शैलेंद्र राज कपूर से मिलने पहुंचे तो वे बेहद शांत और टूटे हुए नजर आए। राज कपूर ने फिल्म की कहानी और भावनाएं साझा कीं। उसी समय शैलेंद्र ने कागज पर गीत की शुरुआती पंक्तियां लिखीं। यह वही पंक्तियां थीं जो आगे चलकर इतिहास बन गईं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। गीत पूरा होने से पहले ही शैलेंद्र की तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया। उनके जाने से न केवल फिल्म जगत बल्कि राज कपूर भी गहरे सदमे में आ गए। राज कपूर इस गीत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने शैलेंद्र के बेटे शैली शैलेंद्र को यह जिम्मेदारी सौंपी। बेटे ने पिता के अधूरे शब्दों को पूरा किया और इस गीत को एक मुकाम तक पहुंचाया। यह सिर्फ एक गीत नहीं रहा बल्कि पिता-पुत्र के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। फिल्म खुद भी संघर्ष की कहानी रही। राज कपूर ने इसे बनाने में अपनी पूरी पूंजी लगा दी यहां तक कि अपना घर भी गिरवी रख दिया। फिल्म बनने में करीब छह साल लगे लेकिन रिलीज के बाद यह बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई। हालांकि समय के साथ यह फिल्म और इसका संगीत क्लासिक बन गया। आज जीना यहां मरना यहां सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई और संघर्ष की कहानी बन चुका है। यह हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे खूबसूरत कला सबसे गहरे दर्द से जन्म लेती है।
US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज

न्यूयॉर्क । अमेरिका (America) में मैक्सिको (Mexico) के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर ड्रग तस्करी (Drug smuggling) के गंभीर आरोप लगे हैं। न्यूयॉर्क की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र में इन अधिकारियों पर अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेजने और हथियारों से जुड़े अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मैक्सिको के सीनालोआ राज्य (Sinaloa State.) के गवर्नर रुबेन रोचा मोया (Governor Ruben Rocha Moya) और नौ अन्य मौजूदा व पूर्व सरकारी अधिकारी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों का केस दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ड्रग कार्टेल से गहरे संबंध का आरोपआरोपपत्र में कहा गया है कि ये अधिकारी कुख्यात सिनालोआ कार्टेल के साथ मिलकर काम कर रहे थे। यह कार्टेल लंबे समय से अमेरिका में फेंटेनिल, हेरोइन, कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी करता रहा है। बताया गया है कि कुछ आरोपी इस कार्टेल की हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। ‘एल चापो’ के बेटों से जुड़ा नेटवर्कजांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उस गुट से जुड़े थे, जिसे कुख्यात ड्रग माफिया जोकिन ‘एल चापो’ गुजमैन के बेटे चलाते हैं। ‘एल चापो’ पहले ही अमेरिका की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अमेरिका का बड़ा बयानअमेरिका के अटॉर्नी जे क्लेटन ने सीनालोआ कार्टेल को ‘बेहद खतरनाक आपराधिक संगठन’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्टेल दशकों से अमेरिका में ड्रग्स फैलाता रहा है और भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं होता। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से कुछ मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की पार्टी ‘मोरेना’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अन्य कई आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। मैक्सिको की सरकार ने आरोपों को नकारामैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इन आरोपों को लेकर कहा कि उनकी सरकार को अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में किसी मैक्सिकन नागरिक के खिलाफ जांच होती है, तो उसके सबूत मैक्सिको की अटॉर्नी जनरल ऑफिस के साथ साझा किए जाने चाहिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाईइस मामले से पहले अमेरिका के मैक्सिको में राजदूत रॉन जॉनसन ने संकेत दिया था कि अमेरिका मैक्सिको के उन अधिकारियों के खिलाफ अभियान चलाएगा, जिनके संबंध संगठित अपराध से हैं।
अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल

तेहरान। ईरान (Iran) अपने तेल (Oil) को इकट्ठा करने के लिए नए तरीके खोजने में जुटा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (American naval blockade) ने उसके निर्यात (Export) को लगभग रोक दिया है। ईरान पूरी तरह उत्पादन बंद करना नहीं चाहता। ऐसे में वह पुराने और कबाड़ टैंकों में बिना बिके तेल को भरने में जुटा है। ईरान के भीतर तेल का भंडार बढ़ने के साथ ही वह अब जंक स्टोरेज (कबाड़ भंडारण) के रूप में जाने जाने वाले पुराने स्थलों को फिर से चालू कर रहा है। वह कामचलाऊ कंटेनरों का उपयोग कर रहा है। इसके साथ ही रेल के जरिये चीन को कच्चा तेल भेजने की कोशिश भी कर रहा है। वह किसी टैंक, जहाज, कामचलाऊ जगह या फिर उसे जमीन के नीचे ही छोड़ने पर काम कर रहा है। ये असामान्य कदम बुनियादी ढांचे के संकट को टालने और हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध में वाशिंगटन के दबाव को कम करने के लिए उठाए जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध अब इस बात की होड़ बन गया कि पहले कौन झुकता है। रेल से भेजने की कोशिश काफी महंगीईरान के तेल-निर्यातक संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी के अनुसार, ईरान अब रेल के जरिये चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है। रेल मार्ग तेहरान को चीन के यीवू और शीआन शहरों से जोड़ता है। हालांकि, यह समुद्री मार्ग की तुलना में बहुत महंगा है। तेल न बिक पाना और उसे इकट्ठा करना देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालता है। इससे वह देश बातचीत की मेज पर आने या युद्ध की स्थिति में झुकने को मजबूर हो सकता है। तेल रखने की जगह जल्द खत्म होगीरिपोर्ट के अनुसार, यदि नाकाबंदी जारी रही तो मई के मध्य तक ईरान का उत्पादन मौजूदा स्तर से आधे से भी कम (12 से 13 लाख बैरल रोज) गिर सकता है। ईरान के पास तेल रखने की जगह दो हफ्ते से भी कम समय में खत्म हो सकती है। ईरान के पास जमीन पर मौजूद तेल का भंडार नाकाबंदी के दौरान 46 लाख बैरल बढ़कर अब लगभग 4.9 करोड़ बैरल हो गया। 1. सबसे पहले तेल को बड़े-बड़े जमीनी टैंकों में भरा जाता है। जब ये टैंक भर जाते हैं, तो वे पुराने या कबाड़ टैंकों का भी इस्तेमाल करते हैं। 2. जब जमीन पर जगह खत्म हो जाती है, तो तेल को समुद्री जहाजों में भरकर समुद्र में ही खड़ा कर दिया जाता है। इसे फ्लोटिंग स्टोरेज कहते हैं। 3. अधिक तेल को निकालने के लिए देश भारी छूट पर तेल बेचने लगते हैं ताकि खरीदार आकर्षित हों। 4. अगर भंडारण की जगह बिल्कुल खत्म होने वाली हो, तो तेल के कुओं को बंद करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सबसे आखिरी और जोखिम भरा रास्ता है। क्योंकि, कुओंको दोबारा शुरू करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा होता है।
होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार

तेहरान। ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ सख्त रुख और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval blockade) के चलते कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Price) लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को कीमतों में और इजाफा देखने को मिला, जबकि एक दिन पहले ही इनमें करीब 7 प्रतिशत की उछाल आई थी। ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के पारब्लूमबर्ग के मुताबिक इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 120.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.74 प्रतिशत अधिक है। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (Nymex) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का जून कॉन्ट्रैक्ट 0.55 प्रतिशत चढ़कर 107.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ट्रंप का बयान: ‘सूअर की तरह घुट रहे हैं ईरान’अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जब तक ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी। उन्होंने कहा, “यह नाकाबंदी बमबारी से कहीं ज्यादा कारगर है। वे (ईरान) सूअर की तरह घुट रहे हैं। उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।” ईरान का प्रस्ताव भी खारिजइससे पहले ईरान ने परमाणु वार्ता को टालते हुए होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन ट्रंप इससे खुश नहीं थे क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं उठाया गया था। शांति वार्ता ठप होने और नाकाबंदी जारी रहने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चरमरा गई है। ध्यान रहे कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार की आवाजाही होती है। भारत पर क्या असर पड़ रहा है?भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इस नाकाबंदी ने देश के लिए एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई बुरी तरह बाधित की है। महंगे कच्चे तेल का सीधा असर आम नागरिक की जेब पर भी पड़ने के आसार प्रबल होते जा रहे हैं, हालांकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम अभी स्थिर हैं। इक्रा की चेतावनी: इन सेक्टरों पर दबावरेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कच्चे माल की कीमतों में दबाव और सप्लाई कमी के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs, फर्टीलाइजर सेक्टर, केमिकल इंडस्ट्री, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा। OMCs का मुनाफा क्यों घट रहा है?इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बावजूद पंप पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे तेल कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हुई है। हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी यह स्थिति बनी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना हो रहा नुकसानउनके अनुसार, अगर क्रूड 120-125 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है और लॉन्ग-टर्म औसत क्रैक स्प्रेड बना रहता है, तो पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन लगभग माइनस 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर माइनस 18 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है। क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिका-ईरान वार्ता में सफलता नहीं मिलती, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।