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MP के 5 दिन के दौरे पर आ रही हैं राष्ट्रपति मुर्मू, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनो का करेंगी भ्रमण

भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) आगामी 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे (Madhya Pradesh, five-day visit) पर आ रही हैं। वे यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनों नेशनल पार्क के भ्रमण करने के साथ बैतूल और जबलपुर में भी विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। इसे लेकर प्रदेश के प्रशासनिक और सुरक्षा अमले ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। श्योपुर जिले में तय दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार, 21 जून दोपहर 3 बजे राष्ट्रपति वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर पहुंचेंगी. वहां से वे सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे कूनो नेशनल पार्क आएंगी. 21 जून की पूरी रात कूनो नेशनल पार्क में ही बिताएंगी. उनके विश्राम के लिए कूनो में विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. वहीं, 22 जून सुबह 10 बजे कूनो नेशनल पार्क में सुबह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति अगले गंतव्य के लिए प्रस्थान कर जाएंगी। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने परखी सुरक्षाराष्ट्रपति के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं. बुधवार को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रोटोकॉल की बारीकी से समीक्षा की. मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा, आवागमन, संचार, स्वास्थ्य सेवाओं और वीवीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े सभी इंतजाम समय सीमा के भीतर अचूक तरीके से पूरे किए जाएं। माना जा रहा है कि बोत्सवाना से भारत लाए गए शेष चीतों को राष्ट्रपति के हाथों ही कूनो के खुले जंगल में आजाद किया जा सकता है. दरअसल, जब बोत्सवाना सरकार ने भारत के लिए इन खास चीतों का चयन किया था, तब प्रतीकात्मक रूप से इन्हें खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही सौंपा गया था. यही वजह है कि कूनो प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञ इस पल को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इंदौर, ओंकारेश्वर और जबलपुर भी जाएंगी राष्ट्रपतिअपने पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी रुख करेंगी. वे श्योपुर और ग्वालियर के अलावा इंदौर, बैतूल में स्थित प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और जबलपुर का भी भ्रमण करेंगी, जिसे लेकर इन सभी जिलों में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

MP के इस अनोखी किस्म के आम का आकार पपीता जैसा… वजन 5 kg…. दाम सुनकर रह जाएंगे दंग

अलीराजपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अलीराजपुर जिले (Alirajpur district) का ‘नूरजहां’ आम (‘Noorjahan’ mango) अपने असाधारण बड़े आकार और दुर्लभता के कारण अलग पहचान रखता है। यह साइज में पपीते से भी बड़ा हो सकता है। ‘नूरजहां’ आम की अनोखी किस्म (Unique variety) को 50 साल पहले ‘जहांगीर’ और ‘राजापुरी’ आमों की ग्राफ्टिंग से तैयार किया गया था। नूरजहां आम के बाग के मालिक शिवराज सिंह जाधव बताते हैं कि 50 साल पहले उनके पिता ने दो तरह के आमों- ‘जहांगीर’ और गुजरात के ‘राजापुरी’, की कलम (ग्राफ्टिंग) करके यह किस्म विकसित की थी और इसका नाम अभिनेत्री ‘नूरजहा’ के नाम पर रखा था। इस आम की लोकप्रियता इतनी है कि सीजन में दूर-दूर से पर्यटक और आम के शौकीन इसे देखने काठीवाड़ा आते हैं। अलीराजपुर में ही पाया जाता है यह आमबाग के मालिक शिवराज सिंह जाधव ने दावा किया कि यह अनोखा आम सिर्फ अलीराजपुर जिले के कट्टीवाड़ा गांव में उनके बाग में ही पाया जाता है। 5 किलोग्राम तक हो सकता है वजनएक ‘नूरजहां’ आम का वजन तीन से 5 किलोग्राम तक हो सकता है और इसकी कीमत 15 सौ से तीन हजार रुपये प्रति फल तक पहुंच जाती है। 3000 रुपये प्रति पीस होती है कीमतविशिष्ट स्वाद और दुर्लभता के कारण इसके एक फल की कीमत 1500 से 3000 रुपये तक होती है। आम के शौकीनों को अक्सर इसके लिए पहले से बुकिंग करवानी पड़ती है। यही नहीं महीनों इंतजार करना पड़ता है। चूंकि इसका उत्पादन केवल 3 पेड़ों तक ही सीमित है इसलिए कई लोग अक्सर निराश रह जाते हैं। कैसे तैयार हुई थी यह खास किस्म?शिवराज सिंह जाधव के बाग में ही पाए जाने वाले इस आम के नाम के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। जाधव ने बताया कि 50 साल पहले उनके पिता ने जहांगीर और गुजरात के राजापुरी आम की किस्मों की ग्राफ्टिंग (कलम) करके यह किस्म विकसित की थी। इसका नाम अभिनेत्री नूरजहां के नाम पर रखा था। पूरे देश में नूरजहां किस्म के केवल 3 पेड़ हैं। ये तीनों शिवराज सिंह के बाग में ही हैं। जाधव ने इसे और बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं लेकिन पेड़ों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीतेशिवराज सिंह जाधव ने बताया कि यह स्वाद में भी बेजोड़ है। इस आम ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने नूरजहां का स्वाद चखा है। देशभर में सिर्फ तीन पेड़शिवराज सिंह जाधव ने दावा किया कि देशभर में ‘नूरजहा’ किस्म के सिर्फ तीन पेड़ हैं और ये तीनों केवल उनके बाग में ही हैं। हालांकि, बागवानी विभाग और खुद शिवराज जाधव ने इसे और बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं, लेकिन पेड़ों की संख्या अभी तक बढ़ नहीं पाई है। इस आम की लोकप्रियता इतनी है कि जैसे ही आम का मौसम आता है, दूर-दूर से पर्यटक और आम के शौकीन इसे देखने के लिए कट्टीवाड़ा आते हैं। इतना ही नहीं आम के शौकीनों को अक्सर इसके एक फल को पाने के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है और महीनों इंतजार करना पड़ता है।

पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे सस्ते…. ! ट्रंप का दावा- US-ईरान के बीच हुई डील, होर्मुज खोलने पर बनी सहमति

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच एलपीजी (LPG), पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) को लेकर राहत भरी खबर है। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) और एलपीजी के दाम (LPG Price) में कटौती देखने को मिल सकती है। बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shehbaz Sharif) ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से आवाजाही के लिए खोलने और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है। भारत के लिए क्यों है अहम यह शांति समझौता?भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज स्ट्रेट से भारत के लिए बड़ी मात्रा में तेल और LPG की सप्लाई होती है। अगर यह समझौता सफल रहता है तो पेट्रोल-डीजल पर दबाव कम हो सकता है। LPG कीमतों में राहत की उम्मीद बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। ऑयल मार्केट में बड़ी गिरावटशांति समझौते की खबर आते ही ब्रेंट क्रूड 3% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी 3.4% गिरकर 81.99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज खुलने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई सामान्य हो सकती है, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव कम होगा। शेयर बाजार में लौटी रौनकइस खबर के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार तेजी आई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। S&P 500 फ्यूचर्स में 0.8% की तेजी आई और बिटकॉइन 2.1% उछलकर 65,341 डॉलर पर पहुंच गया जबकि, एथेरियम 3.1% बढ़कर 1,721 डॉलर पर। निवेशक अब मान रहे हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को राहत मिलेगी। – रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे।– होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी खत्म होगी।– ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत शुरू होगी।– ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है।– लेबनान में सैन्य गतिविधियां रोकने पर भी सहमति बनी है।– समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना बताई गई है। बता दें दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹102 प्रति लीटर और डीजल ₹95 प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। जबकि, यहां आज भी 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 और 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत ₹3,113.50 है। ईरान युद्ध के दौरान घरेलू एलपीजी सिलेंडर 89 रुपये महंगा हुआ है और कमर्शियल 1373 रुपये। पेट्रोल और डीजल चार बार में 7.50-7.50 रुपये महंगे हुए।

Aaj Ka Rashifal 15 June 2026: तुला राशि वालों को होगा आर्थिक लाभ, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली । 15 जून 2026, सोमवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आया है। कुछ जातकों को करियर और कारोबार में सफलता मिलेगी तो कुछ को आर्थिक मामलों में लाभ होने की संभावना है। वहीं कुछ राशियों को धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साहवर्धक रहेगा। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और भाई-बंधुओं का सहयोग प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र में सक्रियता बढ़ेगी तथा नए संपर्क भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं। आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।शुभ रंग: लालशुभ अंक: 2, 3, 6, 9 वृष राशपारिवारिक सुख और सम्मान में वृद्धि होगी। परिवार के सदस्यों का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ाएगा। धन संचय और बचत के प्रयास सफल रहेंगे। घर में मेहमानों का आगमन प्रसन्नता का कारण बन सकता है।शुभ रंग: सिल्वरशुभ अंक: 1, 5, 7, 8 मिथुन राशिरचनात्मक और सृजनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। कला, लेखन, शिक्षा और नवाचार से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं।शुभ रंग: आसमानीशुभ अंक: 2, 4, 5, 6 कर्क राशिलेन-देन और निवेश से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। कुछ कार्यों में अपेक्षित देरी हो सकती है। धैर्य और समझदारी से लिए गए निर्णय भविष्य में लाभ देंगे।शुभ रंग: हल्का गुलाबीशुभ अंक: 2, 4, 6 सिंह राशिकरियर और व्यवसाय में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। प्रभावशाली लोगों से मुलाकात होगी और महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी। आत्मविश्वास मजबूत रहेगा।शुभ रंग: गहरा गुलाबीशुभ अंक: 1, 4, 7 कन्या राशिव्यापार और प्रशासनिक मामलों में प्रगति के योग हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और महत्वपूर्ण लोगों का सहयोग मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी समय अनुकूल है।शुभ रंग: समुद्रीशुभ अंक: 2, 4, 5, 6 तुला राशितुला राशि वालों के लिए दिन अत्यंत शुभ रहने वाला है। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा, यात्रा और करियर से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। आर्थिक लाभ के मजबूत संकेत हैं।शुभ रंग: क्रीमशुभ अंक: 2, 4, 6 वृश्चिक राशि दिन सामान्य रह सकता है। कुछ महत्वपूर्ण मामलों में देरी हो सकती है। पारिवारिक विषयों पर विशेष ध्यान देना होगा। जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से बचें। शुभ रंग: चेरी रेडशुभ अंक: 3, 6, 9 धनु राशिसाझेदारी और सहयोग से जुड़े कार्यों में लाभ मिलेगा। व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।शुभ रंग: स्वर्णिमशुभ अंक: 3, 6, 9 मकर राशिनियमितता और अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता है। कार्यक्षेत्र में सामान्य प्रगति होगी। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा, लेकिन अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेने से बचना बेहतर रहेगा।शुभ रंग: गहरा भूराशुभ अंक: 2, 4, 6, 8 कुंभ राशिशिक्षा, प्रशिक्षण और रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। मित्रों और परिवार के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा। नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं।शुभ रंग: मूनलाइटशुभ अंक: 2, 4, 6, 8 मीन राशिआर्थिक मामलों में शुभ संकेत मिल रहे हैं। सरकारी और पेशेवर कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। परिवार के साथ सुखद समय बीतेगा और महत्वपूर्ण कार्यों में प्रगति होगी।शुभ रंग: भगवाशुभ अंक: 2, 3, 6, 9 आज का विशेष उपायसोमवार के दिन भगवान Shiva की पूजा-अर्चना करें और “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और कार्यों में सफलता प्राप्त होने की मान्यता है।

हर मौसम में खिलेंगे रंग-बिरंगे गुलाब, जानिए पौधा लगाने से लेकर देखभाल तक के जरूरी मंत्र

नई दिल्ली । घर के बगीचे में खिले रंग-बिरंगे गुलाब न केवल वातावरण को आकर्षक बनाते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति लगाव को भी बढ़ाते हैं। अपनी मनमोहक खुशबू और सुंदरता के कारण गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है। हालांकि कई लोगों की शिकायत रहती है कि गुलाब के पौधों में अपेक्षित संख्या में फूल नहीं आते या पौधे कुछ समय बाद कमजोर पड़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से पौधारोपण और नियमित देखभाल अपनाई जाए तो गुलाब का पौधा लंबे समय तक स्वस्थ रहकर भरपूर फूल दे सकता है। गुलाब की अच्छी वृद्धि के लिए सबसे पहले उपयुक्त स्थान का चयन करना आवश्यक है। यह पौधा भरपूर धूप पसंद करता है और प्रतिदिन कम से कम पांच से छह घंटे सीधी सूर्य किरणों की आवश्यकता होती है। पर्याप्त धूप मिलने से पौधा मजबूत बनता है और फूलों की संख्या भी बढ़ती है। छायादार स्थान पर लगाए गए पौधों में अक्सर फूल कम आते हैं और उनकी वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है। मिट्टी की गुणवत्ता भी गुलाब की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बागवानी विशेषज्ञ दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी को गुलाब के लिए सबसे उपयुक्त मानते हैं। पौधा लगाने से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या जैविक कंपोस्ट मिलाने से जड़ों को आवश्यक पोषण मिलता है। इससे पौधे की विकास गति बेहतर होती है और नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। सिंचाई के मामले में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अत्यधिक पानी पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि पानी की कमी भी वृद्धि को प्रभावित करती है। गर्म मौसम में नियमित और हल्की सिंचाई पौधे को स्वस्थ बनाए रखती है। वहीं ठंड के मौसम में पानी की मात्रा कम रखनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि गमले या क्यारी में पानी जमा न हो, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। पौधे को नियमित पोषण देना भी आवश्यक है। हर पंद्रह से बीस दिनों के अंतराल पर जैविक खाद या वर्मी कंपोस्ट डालने से पौधे को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं। इससे नई कलियां बनने की प्रक्रिया तेज होती है और फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। नीम खली जैसी प्राकृतिक खाद पौधे को पोषण देने के साथ कई प्रकार के कीटों से भी बचाने में मदद करती है। गुलाब के पौधों में समय-समय पर छंटाई करना भी जरूरी माना जाता है। सूखी, कमजोर या पुरानी टहनियों को हटाने से पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं और कलियों के विकास में लगती है। नियमित प्रूनिंग से पौधा अधिक घना दिखाई देता है और फूलों का उत्पादन भी बढ़ता है। बागवानी विशेषज्ञ इसे गुलाब की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। कीट और रोगों से सुरक्षा भी गुलाब की अच्छी ग्रोथ के लिए आवश्यक है। कई बार पौधों पर छोटे कीट हमला कर देते हैं, जिससे पत्तियां और कलियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में नीम तेल का छिड़काव या हल्के साबुन वाले घोल का प्रयोग प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। इससे पौधा सुरक्षित रहता है और रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी कम पड़ती है। यदि बगीचे को और अधिक आकर्षक बनाना हो तो विभिन्न रंगों के गुलाबों का संयोजन लगाया जा सकता है। लाल, गुलाबी, पीले और सफेद गुलाब एक साथ खिलने पर बगीचे को जीवंत और बेहद सुंदर स्वरूप प्रदान करते हैं। सही देखभाल और थोड़ी सी मेहनत से घर की बगिया पूरे वर्ष रंगों और खुशबू से महक सकती है।

वजन घटाने से लेकर दिल को मजबूत बनाने तक, ओट्स बना रहा हेल्दी लाइफस्टाइल का सबसे भरोसेमंद सुपरफूड

नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश कर रहे हैं जो पौष्टिक होने के साथ-साथ आसानी से तैयार भी हो जाएं। इसी कारण ओट्स आज हेल्दी ब्रेकफास्ट की सूची में सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हो चुका है। पोषण विशेषज्ञ भी इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर ओट्स शरीर को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ओट्स का नियमित सेवन वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए इसे आदर्श खाद्य पदार्थ माना जाता है। ओवरईटिंग की आदत पर नियंत्रण रखने में भी ओट्स मददगार साबित हो सकता है। दिल की सेहत के लिए भी ओट्स को बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा-ग्लूकन नामक विशेष फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। नियमित रूप से ओट्स का सेवन करने से हृदय संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता बेहतर बनी रह सकती है। इसी वजह से इसे हार्ट-फ्रेंडली फूड की श्रेणी में रखा जाता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में भी ओट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्याप्त मात्रा में फाइबर होने के कारण यह आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है। इससे भोजन का पाचन सुचारु रूप से होता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। स्वस्थ पाचन तंत्र शरीर की समग्र कार्यक्षमता को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ओट्स को ऊर्जा का अच्छा स्रोत भी माना जाता है। इसमें मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे शरीर को लंबे समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहती है। सुबह के नाश्ते में ओट्स शामिल करने से दिनभर सक्रियता बनी रह सकती है और थकान अपेक्षाकृत कम महसूस होती है। यही वजह है कि खिलाड़ी और फिटनेस के प्रति जागरूक लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं। ब्लड शुगर नियंत्रण के लिहाज से भी ओट्स उपयोगी माना जाता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर अचानक नहीं बढ़ता। यही कारण है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी इसे संतुलित मात्रा में लाभकारी विकल्प माना जाता है। हालांकि किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है। त्वचा की सेहत के लिए भी ओट्स फायदे पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायता मिल सकती है और ड्रायनेस या हल्की जलन जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली के साथ ओट्स का नियमित सेवन समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है। हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ को चमत्कारी समाधान मानने के बजाय संतुलित और विविध आहार को प्राथमिकता देना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है।

शिवसेना (यूबीटी) में सब कुछ ठीक है या नहीं? सांसदों की अहम बैठक में अनुपस्थित नेताओं ने बढ़ाया सस्पेंस, उद्धव ने दिखाई एकजुटता की कोशिश

नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के संभावित दल-बदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। मुंबई स्थित मातोश्री में आयोजित इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसी अटकलें सामने आ रही थीं कि पार्टी के कई सांसद दूसरे खेमे के संपर्क में हैं और राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। बैठक ऐसे समय आयोजित की गई जब राज्य की राजनीति में तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं। इन अटकलों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद सांसदों को एक मंच पर लाने की पहल की गई। मातोश्री में आयोजित बैठक में पार्टी के अधिकांश सांसद शामिल हुए और नेतृत्व के प्रति समर्थन का संकेत दिया। मुंबई दक्षिण से सांसद अरविंद सावंत, मुंबई दक्षिण मध्य से अनिल देसाई, नासिक से राजाभाऊ वाजे तथा मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल ने बैठक में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया। पार्टी नेतृत्व ने इस बैठक के माध्यम से संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया। बैठक में कुछ सांसद ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े। यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख और हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने डिजिटल माध्यम के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों सांसदों ने बैठक में भाग लेकर नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की। हालांकि राजनीतिक चर्चा का केंद्र उन सांसदों की अनुपस्थिति रही जो बैठक में शामिल नहीं हो सके। परभणी से सांसद संजय जाधव और शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे बैठक में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर भी बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार निंबालकर ने पहले ही अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दे दी थी, क्योंकि उनके पुत्र का इलाज अस्पताल में चल रहा है। इन अनुपस्थितियों ने राजनीतिक अटकलों को नया बल दे दिया है। पिछले कुछ समय से यह चर्चा लगातार जारी है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद दूसरे राजनीतिक खेमों के संपर्क में हैं। विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में संभावित शामिल होने को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी भी सांसद की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी संभावना की पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठक का उद्देश्य केवल सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर विश्वास और संवाद को मजबूत करना भी था। लोकसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों और राज्य में गठबंधन राजनीति की नई संभावनाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है। फिलहाल बैठक में शामिल और अनुपस्थित सांसदों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। आने वाले दिनों में इन अटकलों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। हालांकि उद्धव ठाकरे की यह पहल इस बात का संकेत जरूर देती है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी संभावित राजनीतिक चुनौती से निपटने के लिए सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है।

बांग्लादेश में राम प्रतिमा परियोजना पर लगी रोक से बढ़ा विवाद, कट्टरपंथी दबाव के आरोपों के बीच हिंदू समुदाय में गहरी नाराजगी

नई दिल्ली । बांग्लादेश में भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण पर लगी रोक ने देश के भीतर धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक सह-अस्तित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है। गाइबंदा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना को प्रशासन द्वारा निलंबित किए जाने के बाद हिंदू समुदाय के बीच असंतोष बढ़ गया है, जबकि कट्टरपंथी संगठनों ने इसे अपनी मांगों की सफलता बताया है। यह परियोजना स्थानीय मंदिर परिसर में भगवान राम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसे क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा था। निजी सहयोग और श्रद्धालुओं के योगदान से शुरू हुए इस निर्माण कार्य को एशिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के रूप में विकसित किए जाने की योजना थी। मंदिर परिसर में पहले से कई देवी-देवताओं की बड़ी प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिसके कारण यह स्थान धार्मिक पर्यटन और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। हालांकि निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ ही कुछ इस्लामिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध करने वाले समूहों ने परियोजना की फंडिंग, उद्देश्य और प्रभाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी धार्मिक संरचना के निर्माण से स्थानीय सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं। कुछ संगठनों ने परियोजना से जुड़े वित्तीय स्रोतों की जांच कराने तथा निर्माण कार्य को पूरी तरह बंद करने की मांग भी की है। प्रशासन द्वारा परियोजना पर रोक लगाए जाने के बाद मंदिर प्रबंधन और स्थानीय हिंदू संगठनों ने इस फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत और समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा था। उनके अनुसार यह केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी पहल थी, जिसे अनावश्यक विवाद का विषय बना दिया गया। कई सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि किसी भी धार्मिक परियोजना का मूल्यांकन कानूनी और प्रशासनिक मानकों के आधार पर होना चाहिए, न कि दबाव समूहों की मांगों के आधार पर। इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति को लेकर चल रही चर्चाओं को भी फिर से केंद्र में ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों, मूर्तियों और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों ने सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता को लेकर चिंता बढ़ाई है। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी समुदायों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने का समान अधिकार मिलना चाहिए। इस मुद्दे पर विभिन्न बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि विभिन्न धर्मों के पूजा स्थल और धार्मिक स्मारक देश के अन्य हिस्सों में स्वतंत्र रूप से स्थापित हो सकते हैं, तो किसी एक समुदाय की धार्मिक परियोजना को लेकर अलग मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। उनका तर्क है कि धार्मिक विविधता किसी भी समाज की सांस्कृतिक शक्ति होती है और उसे संरक्षण मिलना चाहिए। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर परियोजना की स्थिति स्पष्ट नहीं है और आगे की कार्रवाई को लेकर संबंधित पक्षों की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं। इस बीच यह मामला केवल एक धार्मिक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक समावेशन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में सरकार का रुख और जांच प्रक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

राहुल गांधी के कथित ऑडियो से INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल, पिनाराई विजयन पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस-सीपीएम आमने-सामने

नई दिल्ली । विपक्षी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर INDIA गठबंधन की आंतरिक एकजुटता चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के बीच राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। ऑडियो में राहुल गांधी को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए सुना जा रहा है, जिसके बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर नई बहस शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि यह कथित ऑडियो 8 जून को आयोजित INDIA गठबंधन की एक बैठक से जुड़ा है। इसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह पिनाराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई चल रही है। कथित बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों को नजरअंदाज कर केवल प्रतीकात्मक निकटता दिखाना उनके लिए संभव नहीं है। ऑडियो सार्वजनिक होने के बाद यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। इस घटनाक्रम के बाद वामपंथी दलों के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। सीपीएम के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन सहयोगी दलों के नेताओं के प्रति सार्वजनिक सम्मान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पार्टी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार की व्यक्तिगत निकटता की अपेक्षा नहीं है, लेकिन गठबंधन राजनीति में संवाद और सम्मान का वातावरण आवश्यक माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे केरल की जमीनी राजनीति का लंबा इतिहास भी जुड़ा हुआ है। राज्य में कांग्रेस और सीपीएम दशकों से एक-दूसरे की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं। चुनावी मुकाबलों में दोनों दल लगातार आमने-सामने रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की राजनीति में एक-दूसरे के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता माने जाते हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में भी दोनों दलों के बीच तीखा मुकाबला देखने को मिला था। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे की नीतियों और कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए थे। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एक ही विपक्षी मंच का हिस्सा होने के बावजूद राज्य स्तर की प्रतिस्पर्धा अक्सर दोनों दलों के रिश्तों को प्रभावित करती रही है। वर्तमान विवाद ने INDIA गठबंधन के भीतर मौजूद वैचारिक और राजनीतिक चुनौतियों को भी उजागर किया है। गठबंधन में शामिल कई दल विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि राष्ट्रीय राजनीति में वे साझा रणनीति के तहत साथ काम करते हैं। यही कारण है कि कई बार राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना नेतृत्व के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होता है। हालांकि अब तक कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन के प्रमुख दल इस विवाद को किस तरह संभालते हैं और क्या यह घटनाक्रम विपक्षी एकजुटता पर कोई प्रभाव डालता है। फिलहाल यह मामला केवल एक ऑडियो क्लिप से आगे बढ़कर विपक्षी राजनीति के अंदरूनी समीकरणों और आपसी संबंधों पर केंद्रित बहस का रूप ले चुका है।

‘राहुल को बलि का बकरा बना रही CPI(M)’: गले लगाने वाले बयान पर बढ़ी सियासी तकरार, कांग्रेस ने किया पलटवार

नई दिल्ली । विपक्षी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक कथित वायरल ऑडियो को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस विवाद ने न केवल केरल की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि विपक्षी एकता को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद की शुरुआत उस कथित ऑडियो क्लिप से हुई, जिसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह केरल के वरिष्ठ वामपंथी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी है। ऑडियो सामने आने के बाद इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं, जिसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी राजनीति व्यक्तिगत संबंधों या प्रतीकात्मक प्रदर्शनों पर आधारित नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विमर्श विचारधारा और नीतियों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्षी नेताओं के बीच सम्मानजनक संबंध बनाए रखना लोकतांत्रिक राजनीति की आवश्यक शर्त है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए CPI(M) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि हालिया चुनावी पराजय के बाद वाम दल अपनी राजनीतिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वास्तविक मुद्दों पर आत्ममंथन करने के बजाय राहुल गांधी के बयान को विवाद का रूप दिया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी को अनावश्यक रूप से विवाद के केंद्र में लाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी राजनीति में राहुल गांधी की बढ़ती भूमिका से कुछ राजनीतिक दल असहज महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, व्यक्तिगत हमलों से राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं बदला जा सकता और जनता के बीच स्वीकार्यता ही किसी भी नेता की सबसे बड़ी ताकत होती है। इस पूरे विवाद के दौरान दोनों दलों ने अपने-अपने राजनीतिक तर्कों को सामने रखा है। कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, जबकि CPI(M) नेताओं ने सम्मानजनक राजनीतिक व्यवहार और वैचारिक स्पष्टता पर जोर दिया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी सहयोग और राज्य स्तरीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल जैसे राज्यों में कांग्रेस और CPI(M) सीधे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों पर दोनों दल एक साझा मंच पर दिखाई देते रहे हैं। ऐसे में नेताओं के बयानों को लेकर पैदा होने वाले विवाद अक्सर व्यापक राजनीतिक संदेश भी देते हैं और गठबंधन राजनीति की जटिलताओं को उजागर करते हैं। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी के दौर में बदल चुका है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के रुख और प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर केवल केरल की राजनीति तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यापक विपक्षी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।