MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास अवैध कत्लखाने का खुलासा…दो आरोपी गिरफ्तार

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन शहर (Ujjain city.) में प्रतिबंध के बावजूद प्रतिबंध क्षेत्र में चोरी छिपे कत्लखाना (Slaughterhouse) चल रहा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए दो आरोपी को गिरफ्तार किया है और साथ ही मौके से भारी मात्रा में मांस, धारदार हथियार,जिन्दा गाय के बछड़े सहित तोलने का सामान जब्त किया है। पुलिस को देखते ही दोनों आरोपी भागने का प्रयास कर रहे थे, हालांकि पुलिस टीम ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) के पास किसी भी तरह के मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगा हुआ है। पुलिस ने अवैध रूप से गोवंश (पाडे) काटने और मांस बेचने के संबंध में पशु क्रूरता अधिनियम 11(1)(घ) और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आरोपी हाजी मुस्तकीम (निवासी: बम्बईया गली, कोट मोहल्ला) वसीम बम्बईया (निवासी: बम्बईया गली, कोट मोहल्ला) गिरिफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि घटना 12 अप्रेल की है और पुलिस इसमें गोपनीय तरीके से जांच पड़ताल कर रही थी। चोरी-छिपे पशु काटने का अवैध कत्लखानाउज्जैन शहर के महाकाल थाना क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिल रही थी कि एक संदिग्ध मकान में चोरी-छिपे पशु काटने का अवैध कत्लखाना चल रहा है, इस पर पुलिस ने अपने खुफिया तंत्र को इस काम पर लगाया और 12 अप्रैल को सूचना मिलते ही महाकाल पुलिस ने दबिश देकर जिंदा गाय के बछड़े सहित मौके से भारी मात्रा में मांस, धारदार हथियार और एक इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा बरामद किया है। आरोपी पाड़ों का मांस बेचने की तैयारी में थे। बता दें कि धार्मिक नगरी होने के कारण उज्जैन में बूचड़खाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। पशु अधिनियम क्रूरता में मामला दर्जपुलिस ने इस मामले में हाजी मुस्तकीम और वसीम बम्बईया नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह दोनों कोट मोहल्ला महाकाल क्षेत्र के निवासी हैं। उनके खिलाफ मध्य प्रदेश कृषि पशु परिरक्षण एवं पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 (घ) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह अवैध कारोबार किस नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा था और काटे गए मांस की आपूर्ति कहां की जानी थी। दबिश में पुलिस को मिला भारी मात्रा में मांसपुलिस को मौके से एक पाडे के कटे हुए चार पैर। 2 जीवित पाडे और 1 पाडी, जिन्हें क्रूरतापूर्वक रस्सियों से बांधकर रखा गया था। मांस तोलने के उपकरण, एक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कांटा, लोहे की तराजू और विभिन्न बाट। एक धारदार बक्का और एक धारदार लोहे की छुरी और मांस काटने का लकड़ी का ठिया। महाकाल थाना पुलिस ने बताया कि शासन द्वारा मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, आरोपी हाजी मुस्तकीम और उसका भाई वसीम अपने घर के नीचे बने एक कमरे में अवैध रूप से पाडे (मवेशी) काटकर उनका मांस बेच रहे हैं। जब पुलिस ने गवाहों के साथ वहां दबिश दी, तो दोनों आरोपी अपने हथियार (छुरे) मौके पर छोड़कर पीछे के रास्ते से भाग निकलने का प्रयास कर रहे थे, इस दौरान पुलिस ने मौके की वीडियोग्राफी करवाई और वहां से साक्ष्य बरामद किए।
कम सामग्री में बनने वाली तीखी डिश, जानिए तड़का मिर्ची की आसान विधि..

नई दिल्ली:अगर आपको खाने में हल्का सा तीखा और चटपटा स्वाद पसंद है, तो तड़का मिर्ची एक ऐसी आसान रेसिपी है जो आपकी रोजमर्रा की थाली का स्वाद पूरी तरह बदल सकती है। इसे दाल-चावल, खिचड़ी, रोटी या पराठे के साथ परोसा जाए तो साधारण खाना भी खास बन जाता है। यह रेसिपी कम समय में तैयार हो जाती है और स्वाद में बेहद असरदार होती है। तड़का मिर्ची बनाने के लिए मुख्य सामग्री में लंबी हरी मिर्च, तेल, जीरा, राई, हल्दी, नमक, हींग और अमचूर पाउडर या नींबू का रस शामिल होता है। इसके अलावा स्वाद और सजावट के लिए धनिया पत्ती का उपयोग किया जाता है। इन साधारण सामग्रियों से तैयार होने वाली यह डिश खाने के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसे बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छे से धोकर हल्का चीरा लगाया जाता है ताकि मसाले अंदर तक जा सकें। इसके बाद एक कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है और उसमें जीरा तथा राई डाली जाती है। जब ये चटकने लगते हैं तो उसमें हींग मिलाई जाती है, जिससे स्वाद और भी बढ़ जाता है। इसके बाद हरी मिर्च को कड़ाही में डालकर हल्का सा भून लिया जाता है ताकि उसका कच्चापन खत्म हो जाए। फिर इसमें हल्दी और नमक मिलाकर अच्छे से चलाया जाता है। धीमी आंच पर कुछ मिनट तक पकाने से मिर्च नरम हो जाती है और मसाले अच्छे से उसमें समा जाते हैं। अंत में अमचूर पाउडर या नींबू का रस डालकर हल्का मिलाया जाता है, जिससे इसमें खट्टा और तीखा स्वाद आ जाता है। गैस बंद करने के बाद ऊपर से धनिया पत्ती डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। तड़का मिर्ची को गरम दाल-चावल के साथ, खिचड़ी के साथ या फिर साधारण रोटी के साथ खाया जा सकता है। यह एक ऐसा साइड डिश है जो कम भूख में भी खाने का मन बढ़ा देता है और पूरी थाली का स्वाद बदल देता है।
MP: श्योपुर में प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर की आत्महत्या… अगरा के जंगल में पेड़ पर लटके मिले शव

श्योपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के श्योपुर जिले (Sheopur district) में नाबालिग प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दोनों के शव अगरा जंगल (Agara forest) में एक पेड़ से लटके मिले। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों के बीच 2 साल से अफेयर चल रहा था, लेकिन उनके घरवाले उनकी शादी के लिए तैयार नहीं थे, जिससे दुखी होकर उन्होंने यह कदम उठा लिया। यह घटना बरगवां थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान विशन भिलाला निवासी वालीहारा और सामबाई निवासी कुड़ारदा के रूप में की गई है। दोनों की उम्र करीब 17 साल थी और दोनों 15 अप्रैल को अपने-अपने घरों से बिना बताए निकल गए थे। जिसके बाद परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जंगल में एक ही पेड़ पर लटके मिले शवपुलिस ने बताया शिकायत दर्ज होने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। तकनीकी टीम की मदद से मोबाइल लोकेशन और अन्य पहलुओं पर भी जांच की गई। गुरुवार को सर्च के दौरान जंगल के अंदर एक पेड़ पर दोनों के शव फंदे से लटके हुए मिले। पुलिस का कहना है कि नाबालिग लड़की के घर से 8-10 किमी दूर जंगल में दोनों के शव पेड़ पर लटके मिले। नाबालिग होने की वजह से नहीं कर पा रहे थे कोर्ट मैरिजग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को नीचे उतरवाया। मौके पर पंचनामा कार्रवाई की गई और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन उनके परिजन दोनों की शादी के लिए राजी नहीं थे, वहीं नाबालिग होने की वजह से दोनों कोर्ट मैरिज भी नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने सुसाइड कर लिया। हालांकि पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। एक ही गोत्र की वजह से घरवाले नहीं हुए तैयारबरगवां थाना प्रभारी श्यामवीर सिंह तोमर ने बताया कि दोनों के बीच करीब दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था, दोनों एक ही समाज के भी थे लेकिन दोनों का गोत्र एक होने की वजह से, उनके परिजन दोनों की सगाई कराने को राजी नहीं थे। इसको लेकर नाबालिग प्रेमी जोड़ा घर से भाग गया। जब दोनों के परिजनों को उनके भागने की जानकारी मिली तो उन्होंने इसकी सूचना बरगवां थाने आकर दी। इस सूचना पर पुलिस ने दोनों नाबालिग की तलाश शुरू की। लड़की ने दुपट्टे तो लड़के ने तौलिये से लगाई फांसीथाना प्रभारी ने बताया कि, ‘लड़की ने दुपट्टे से और लड़के ने तौलिये से फांसी लगाई। मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और हर एंगल से जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ सकेगी। आसपास के लोगों और परिजनों से भी पूछताछ जारी है।’ तोमर ने आगे बताया कि, नाबालिग प्रेमी जोड़े को तलाशने के लिए टेक्निकल टीम की मदद ली गई और सर्चिंग की गई तो लड़के के मोबाइल नंबर की लोकेशन एक ही स्थान की मिल रही थी, जिसके आधार पर पुलिस ने तलाशी की तो बरगवां थाना क्षेत्र के जंगल में एक पेड़ पर दोनों नाबालिग प्रेमी लटके मिले।
बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट रहें पेट दर्द और पाचन समस्या के संकेतों को समझें समय रहते इलाज करें

नई दिल्ली । बच्चों की सेहत और उनका सही विकास पूरी तरह उनके पोषण और पाचन तंत्र की स्थिति पर निर्भर करता है। आज की व्यस्त जीवनशैली में माता-पिता अक्सर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं, लेकिन शुरुआती लक्षणों को समझकर समय पर इलाज किया जाए तो बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है। बच्चों में कब्ज, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कब्ज एक आम समस्या है जिसमें बच्चा कठोर मल त्याग करता है या शौच के समय रोने लगता है। कई बार बच्चा शौच करने से डरने लगता है, जो आगे चलकर आदत बन सकती है। वहीं दस्त की स्थिति में बच्चे को बार बार पतला मल आता है जिससे शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है और बच्चा सुस्त और कमजोर दिखाई देने लगता है। इसके अलावा पेट में जलन और एसिडिटी भी बच्चों में पाचन समस्या का बड़ा संकेत है। इस स्थिति में बच्चा पेट में जलन की शिकायत करता है, खट्टी डकारें आती हैं और कभी कभी उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है। भोजन असहजता या फूड इनटॉलरेंस भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसमें दूध, गेहूं या कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से पेट फूलना, दर्द या एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कृमि संक्रमण भी बच्चों में एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो साफ सफाई की कमी के कारण होती है। इसमें बच्चा बार बार पेट दर्द की शिकायत करता है, भूख कम हो जाती है, वजन नहीं बढ़ता और कई बार नींद में दांत पीसने की आदत भी देखी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता पिता को बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य में होने वाले छोटे बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा लगातार पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। घरेलू उपायों से आराम न मिलने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। साथ ही बच्चों को स्वच्छता की आदतें सिखाना, उबला या साफ पानी देना और संतुलित आहार उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। नियमित रूप से हाथ धोने की आदत भी उन्हें कई संक्रमणों से बचा सकती है। समय पर ध्यान और सही देखभाल से बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सकता है।
गोंद कतीरा का गलत सेवन पाचन तंत्र पर डाल सकता है नकारात्मक असर..

नई दिल्ली:गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा रखने और लू से बचाव के लिए लोग अक्सर प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। इनमें गोंद कतीरा को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका गलत तरीके से सेवन करने पर यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डाल सकता है। जानकारों के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह होती है कि कई लोग गोंद कतीरा को पूरी तरह से भिगोए बिना या कम समय के लिए भिगोकर ही सेवन कर लेते हैं। यह तरीका शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि अधपका या सूखा गोंद कतीरा पेट में जाकर फूल सकता है, जिससे पेट में भारीपन, गैस, ऐंठन और अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सही तरीका यह बताया जाता है कि गोंद कतीरा को हमेशा पर्याप्त समय देकर पानी में भिगोना चाहिए। आमतौर पर एक से दो चम्मच मात्रा को रातभर लगभग आठ से दस घंटे तक पानी में रखने पर यह पूरी तरह फूलकर जेली जैसी बनावट में बदल जाता है। इसके बाद ही इसका सेवन करना सुरक्षित माना जाता है। भीगे हुए गोंद कतीरा को ठंडाई, शरबत, दूध या अन्य पारंपरिक पेय में मिलाकर लिया जा सकता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ साथ गर्मी से राहत पहुंचाने में भी मदद करता है। गर्म मौसम में इसका संतुलित सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अत्यधिक सेवन करने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है और अन्य शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सामान्य रूप से सीमित मात्रा में ही इसका उपयोग करना सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा सही तरीके से उपयोग करने पर गोंद कतीरा शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है और कुछ हद तक जोड़ों तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही विधि और संतुलित मात्रा में लिया जाए। गर्मियों में प्राकृतिक उपाय अपनाते समय सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी या गलत तरीका किसी भी फायदेमंद चीज को नुकसानदायक बना सकता है।
17 अप्रैल का राशिफल: जानें कैसा रहेगा आज आपका दिन, किसे मिलेगा लाभ-किसे रहना होगा सावधान

नई दिल्ली । आज 17 अप्रैल है और दिन शुक्रवार है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र है, जिसे धन, वाहन, वैवाहिक सुख और स्त्री तत्व से जुड़ा माना जाता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर राशिफल का आकलन किया जाता है। इसी क्रम में 17 अप्रैल 2026 का दिन कुछ राशियों के लिए शुभ तो कुछ के लिए सामान्य या सावधानी भरा रह सकता है। आइए जानें मेष से मीन तक सभी राशियों का हाल- मेष राशि मेष राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। आपका मिलनसार स्वभाव लोगों को प्रभावित करेगा और अचानक धन लाभ के योग बन सकते हैं। घर से जुड़े कार्यों में रुचि बढ़ेगी, हालांकि परिवार में हल्की नोकझोंक संभव है। सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ेगी और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। व्यक्तित्व प्रभावशाली रहेगा, लेकिन कार्यस्थल पर सावधानी जरूरी है। पुराने उधार चुकाने और घरेलू काम पूरे करने के लिए दिन अनुकूल है। आर्थिक रूप से अच्छी खबर मिल सकती है और स्वास्थ्य के लिए नई शुरुआत लाभकारी होगी। मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए दिन मिला-जुला रहेगा। काम का दबाव थकान दे सकता है, लेकिन आय में वृद्धि के संकेत हैं। संतान से जुड़ी शुभ सूचना मिल सकती है। पुराने मित्रों से मुलाकात खुशी देगी, हालांकि अपेक्षाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। प्रेम जीवन अच्छा रहेगा। कर्क राशि कर्क राशि के लिए दिन सामान्य से बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और ध्यान-योग से लाभ मिलेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ेगी और परिवार में सुखद माहौल रहेगा। सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए दिन संतुलित और आरामदायक रहेगा। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा और भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। किसी सामाजिक आयोजन में शामिल हो सकते हैं। नए कार्य की शुरुआत के लिए दिन अनुकूल है। कन्या राशि कन्या राशि वालों को आज सावधानी रखनी होगी। व्यवहार में संयम जरूरी है, नहीं तो रिश्तों में तनाव आ सकता है। आर्थिक लेन-देन में सतर्क रहें। स्वास्थ्य और विवादों से दूरी बनाए रखना लाभकारी रहेगा। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए दिन लाभदायक रहेगा। निवेश से फायदा मिल सकता है और व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। नए आइडिया सफल होंगे और प्रॉपर्टी से जुड़े कार्य आगे बढ़ सकते हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा।वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के लिए दिन अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा और रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। परिवार के साथ समय बितेगा और नई योजनाएं बन सकती हैं।धनु राशि धनु राशि वालों के लिए दिन प्रगति देने वाला रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, लेकिन सेहत का ध्यान रखें। मकर राशि मकर राशि वालों के लिए दिन मेहनत का फल देने वाला रहेगा। नौकरी और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होगा, जबकि प्रेम जीवन सुखद रहेगा। कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। दोस्तों के साथ समय बिताकर मन प्रसन्न रहेगा। करियर में मित्रों का सहयोग मिलेगा, हालांकि परिवार में हल्की चिंता रह सकती है। मीन राशि मीन राशि वालों को आज सावधानी रखनी होगी। कार्यस्थल पर सतर्क रहें और अनावश्यक विवादों से बचें। खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताकर मानसिक सुकून मिलेगा। प्रेम जीवन में उतार-चढ़ाव संभव है।
बांसुरी स्वराज ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण और प्रतिनिधित्व पर दिया जोर..

नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस बहस में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और विपक्ष पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति अब पहले से अधिक जागरूक और सक्षम है तथा उसे निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलना चाहिए। अपने संबोधन में बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक नीति नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संतुलन की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका केवल मतदाता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी समान अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार जब महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं तो राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है। बांसुरी स्वराज ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर जो आपत्तियां सामने आ रही हैं, वे उचित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस दिशा में पहले सहमति बन चुकी थी तो अब इसके क्रियान्वयन में देरी क्यों की जा रही है। उनके अनुसार यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक कदम है, जिससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बेहतर बनाया जा सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनसंख्या संरचना में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है और ऐसे में संसदीय व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। बांसुरी स्वराज ने यह भी कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर किसी प्रकार का भ्रम फैलाना उचित नहीं है और इस दिशा में उठाए गए कदमों को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
धार्मिक आस्था का पावन पर्व अक्षय तृतीया पर मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब और विशेष परंपराएं

नई दिल्ली । सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत पवित्र और शुभ तिथि माना जाता है जिसे अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाले पुण्य का प्रतीक कहा गया है। यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, पुण्य और शुभ कार्यों का फल अक्षय रूप से प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस दिन पूरे 24 घंटे को शुभ मुहूर्त माना जाता है और किसी विशेष समय की आवश्यकता नहीं पड़ती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन नए कार्यों की शुरुआत, विवाह, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन से कई महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं और परंपराओं की शुरुआत भी होती है, जिनमें चार धाम यात्रा का शुभारंभ प्रमुख है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं, जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम भी इसी शुभ अवसर पर भक्तों के लिए दर्शन हेतु खुलते हैं। पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारियों की शुरुआत भी अक्षय तृतीया से ही मानी जाती है। इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथों का निर्माण कार्य विधिवत रूप से प्रारंभ होता है। मंदिर के पुजारी भगवान को माला अर्पित कर रथ निर्माण की परंपरा का शुभारंभ करते हैं, जो आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का स्वरूप लेती है। वृंदावन में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व देखने को मिलता है। यहां बांके बिहारी मंदिर में भगवान के चरण कमलों के दर्शन वर्ष में केवल इसी दिन भक्तों को होते हैं। इसके अलावा मंदिरों में फूलों और चंदन से विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और उल्लास का माहौल बन जाता है। दक्षिण भारत में भी इस पर्व की अनूठी परंपराएं देखने को मिलती हैं। आंध्र प्रदेश के सिंहाचलम मंदिर में इस दिन भगवान वराह नरसिंह पर लगी चंदन की परत हटाकर उनके वास्तविक स्वरूप के दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं। वहीं तमिलनाडु के कई विष्णु मंदिरों में गरुड़ वाहन पर भव्य शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। ओडिशा के रेमुना मंदिर में भगवान क्षीरचोरा गोपीनाथ को चंदन का लेप लगाकर गर्मी से राहत देने की परंपरा निभाई जाती है। यह आयोजन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया का संबंध कई पौराणिक घटनाओं से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था, गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, महाभारत की रचना शुरू हुई थी और भगवान परशुराम का अवतार भी इसी दिन माना जाता है। साथ ही माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य और कुबेर को धन के देवता का स्थान भी इसी तिथि से जुड़ा हुआ बताया जाता है। इस दिन सोना, हल्दी, पीली सरसों, रूई और कौड़ी जैसी वस्तुओं की खरीद को शुभ माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, दान और सत्कर्म कर जीवन में सुख, समृद्धि और अक्षय पुण्य की कामना करते हैं। अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और शुभता का अद्भुत संगम माना जाता है जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
भारत-ऑस्ट्रिया के बीच बड़ी साझेदारी खाद्य सुरक्षा से लेकर रक्षा तक कई अहम समझौते पर मुहर

नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी है। राजधानी नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस बैठक के दौरान कई डील्स पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारत और ऑस्ट्रिया के रिश्तों में नई मजबूती देखने को मिली है। बैठक के दौरान सबसे अहम समझौता ऑडियो विजुअल को प्रोडक्शन से जुड़ा रहा, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की फिल्म इंडस्ट्री के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते से संयुक्त फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, सांस्कृतिक और क्रिएटिव एक्सचेंज को मजबूती मिलेगी और भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे भारतीय सिनेमा और देश की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को भी वैश्विक स्तर पर विस्तार मिलेगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों को आने वाली अड़चनों की पहचान कर उनका समाधान करना है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे। यह कदम निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करेगा और बाजार पहुंच को भी आसान बनाएगा। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके तहत एक संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा, जो डिफेंस इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को मजबूत करेगा। साथ ही रक्षा नीति पर संवाद, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा, जिससे भारत के रक्षा क्षेत्र को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी। आतंकवाद विरोधी सहयोग को लेकर भी एक संयुक्त कार्य समूह के गठन पर सहमति बनी है। यह समूह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और अधिक प्रभावी होगा। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत के एफएसएसएआई और ऑस्ट्रिया के संबंधित संस्थान एजीईएस के बीच सहयोग स्थापित किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य खाद्य मानकों में सुधार, वैज्ञानिक आदान प्रदान, जोखिम मूल्यांकन और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है। इससे कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर यह बैठक भारत और ऑस्ट्रिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान सऊदी अरब ने दी बड़ी राहत, विदेशी कर्ज पर फिर बढ़ा फोकस

नई दिल्ली । पाकिस्तान एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी कर्ज के दबाव में फंसता नजर आ रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विदेश दौरे के दौरान सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देकर बड़ी राहत दी है। यह मदद ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पर संयुक्त अरब अमीरात का भारी कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक यूएई को करीब 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस करना है, जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है। इसी दबाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब सहित अन्य मित्र देशों से सहायता की गुहार लगाई थी। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई है। बताया जा रहा है कि यह राशि 15 अप्रैल 2026 की वैल्यू डेट पर जमा की गई है, जो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को अस्थायी मजबूती देती है। इसके अलावा सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर जमा देने का भी आश्वासन दिया है और अपनी मौजूदा 5 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को तीन साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इससे पाकिस्तान को अल्पकालिक आर्थिक दबाव से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत स्थायी समाधान नहीं है क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही उच्च महंगाई, सीमित विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते बाहरी कर्ज के बोझ से जूझ रही है। मार्च के अंत तक पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 16.4 अरब डॉलर बताए गए हैं, जो मुश्किल से तीन महीने के आयात को कवर कर सकते हैं। इससे पहले पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात के साथ 3.5 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को आगे बढ़ाने में भी असफल रहा था, जिसे पिछले कई वर्षों में पहली बड़ी नाकामी माना जा रहा है। इसी कारण देश की शॉर्ट टर्म फंडिंग जरूरतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय बाजार की सख्ती ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वहीं आईएमएफ समर्थित सुधार कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को लगातार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दबाव भी झेलना पड़ रहा है। फिलहाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बाहरी फंडिंग पर काफी हद तक निर्भर दिखाई दे रही है और ऐसे में मित्र देशों से मिलने वाली मदद ही उसकी अल्पकालिक स्थिरता का आधार बनी हुई है।