प्रियंक मिश्रा ने संभाली भोपाल की कमान विकास और बेहतर प्रशासन का दिया भरोसा

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को नया प्रशासनिक नेतृत्व मिल गया है जहां प्रियंक मिश्रा ने 35वें कलेक्टर के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने राजधानी को देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी बनाने का संकल्प व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि उनका पूरा फोकस विकास, बेहतर प्रशासन और जनसेवा पर रहेगा। कार्यभार संभालने के बाद प्रियंक मिश्रा ने अपने पहले बयान में ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। उन्होंने कहा कि भोपाल केवल मध्यप्रदेश की राजधानी ही नहीं बल्कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। ऐसे में राजधानी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है और इसी दृष्टिकोण के साथ वे काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका है और उस लक्ष्य को हासिल करने में भोपाल की भागीदारी निर्णायक होगी। प्रियंक मिश्रा ने अपने संबोधन में यह स्वीकार किया कि भोपाल में पहले भी अच्छा काम हुआ है और प्रशासन ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाए और जो काम पहले से हो रहे हैं उन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जाए। साथ ही जहां सुधार की जरूरत है वहां नई रणनीति और नवाचार के जरिए बदलाव लाया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि शहर के बुनियादी ढांचे, यातायात व्यवस्था, साफ सफाई और नागरिक सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राजधानी होने के कारण भोपाल की छवि पूरे प्रदेश और देश के सामने एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत होती है इसलिए इसे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बनाना उनकी प्राथमिकता रहेगी। नए कलेक्टर के इस विजन से प्रशासनिक अमले में भी नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों से समन्वय बनाकर काम करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि टीमवर्क के जरिए ही बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी व्यवस्था पर भी उन्होंने जोर दिया। भोपाल के नागरिकों के लिए भी यह एक उम्मीद भरा संदेश है कि शहर को नई दिशा देने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। अब देखना होगा कि प्रियंक मिश्रा अपने इस विजन को जमीन पर किस तरह उतारते हैं और भोपाल को वास्तव में देश की सबसे बेहतर राजधानी बनाने की दिशा में कितनी तेजी से कदम बढ़ाते हैं।
एम्स दिल्ली में फैकल्टी भर्ती 2026: 26 पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू, मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा अवसर

नई दिल्ली:देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एक अग्रणी मेडिकल संस्थान में फैकल्टी स्तर पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 26 पदों को भरा जाएगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और विशेषज्ञ उपचार सेवाओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह अवसर उन योग्य चिकित्सकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो उच्च स्तरीय शिक्षण और मेडिकल रिसर्च में करियर बनाना चाहते हैं। इस भर्ती में विभिन्न प्रमुख विभाग शामिल किए गए हैं, जिनमें नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सामुदायिक चिकित्सा, पल्मोनरी मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, पैथोलॉजी, साइटोपैथोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थेसियोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही कुछ विशेष पद ऑन्को एनेस्थेसियोलॉजी और संबंधित इकाइयों के लिए भी निर्धारित किए गए हैं, जो कैंसर उपचार और उससे जुड़े चिकित्सा कार्यों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएगी और निर्धारित तिथि से आवेदन शुरू होकर तय अंतिम तिथि तक स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास भारतीय चिकित्सा परिषद के मानकों के अनुसार मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री के साथ संबंधित विषय में स्नातकोत्तर योग्यता जैसे एमडी, एमएस, डीएम या एमसीएच होना आवश्यक है। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में शिक्षण या अनुसंधान अनुभव भी अनिवार्य शर्तों में शामिल है, जिससे चयन प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। इस भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना अंतिम आवेदन तिथि के आधार पर की जाएगी। हालांकि आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी, जिसमें प्रारंभिक पात्रता जांच, स्क्रीनिंग, शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन शामिल हैं। अंतिम चयन के बाद उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो उच्च स्तरीय मेडिकल फैकल्टी पदों के अनुरूप होगा। आवेदन शुल्क श्रेणी के अनुसार निर्धारित किया गया है, जिसमें सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग शुल्क और आरक्षित वर्ग के लिए रियायती शुल्क रखा गया है। दिव्यांग उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में पूर्ण छूट दी गई है, जिससे यह भर्ती प्रक्रिया अधिक समावेशी और समान अवसर आधारित बन सके। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सावधानीपूर्वक अपलोड करें और अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। चयनित उम्मीदवार संस्थान में चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और देश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने में योगदान देंगे।
मुरैना में 80 सीटों वाला सैनिक स्कूल शुरू, रक्षा मंत्रालय के सहयोग से होगी पढ़ाई

मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में अब सैनिक स्कूल की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होगी। रक्षा मंत्रालय भारत सरकार और टीएसएस स्कूल प्रबंधन के बीच PPP (Public-Private Partnership) मोड पर हुए करार के बाद 80 सीटों वाला नया सैनिक स्कूल शुरू कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू हुआ संचालनइस योजना के तहत सैनिक स्कूल का संचालन रक्षा मंत्रालय और टीएसएस स्कूल प्रबंधन मिलकर करेंगे। 2026 सत्र से इसकी औपचारिक शुरुआत की जा रही है। रक्षा मंत्रालय की टीम पहले ही स्कूल परिसर में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर चुकी है। 80 सीटों पर प्रवेश, सभी सीटें भरीस्कूल प्रबंधन के अनुसार इस सत्र में 80 सीटें निर्धारित की गई हैं, जिन पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। देशभर से छात्र इस स्कूल में दाखिला लेने के लिए पहुंचे हैं। स्कूल परिसर में नई बिल्डिंग और हॉस्टल की व्यवस्था भी पूरी कर ली गई है। सैन्य अनुशासन के साथ चलेगा स्कूलसैनिक स्कूल का संचालन पूरी तरह सैन्य अनुशासन और प्रशिक्षण आधारित होगा। केंद्र से आई टीम ने स्कूल का कार्यभार संभाल लिया है। नायक अकबर खान को इस सैनिक स्कूल का इंचार्ज नियुक्त किया गया है। उनके अनुसार जरूरत के अनुसार शिक्षकों और प्रशिक्षण स्टाफ की तैनाती की जाएगी। चयन और प्रवेश प्रक्रियास्कूल प्रबंधन के मुताबिक, छात्रों का चयन पहले ही कर लिया गया है और ऑनलाइन परिणाम के आधार पर विद्यार्थियों ने अपनी पसंद से इस स्कूल को चुना है। क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धिइस सैनिक स्कूल की शुरुआत को मुरैना और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे अब स्थानीय छात्रों को रक्षा सेवाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
फिल्म ‘गाइड’ की शूटिंग के दौरान सांप वाले सीन की मांग पर उठे सवाल और अभिनेत्री का स्पष्ट इनकार

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने अपने लंबे और सफल करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है, लेकिन फिल्म ‘गाइड’ से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज भी सबसे ज्यादा चर्चित घटनाओं में शामिल माना जाता है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है, जिसमें उनके अभिनय और डांस परफॉर्मेंस ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा था। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान सामने आया एक प्रसंग आज भी फिल्म जगत में दिलचस्प उदाहरण के रूप में देखा जाता है। बताया जाता है कि फिल्म के अंग्रेजी संस्करण की शूटिंग के दौरान एक दृश्य को लेकर निर्देशक की ओर से एक असामान्य मांग सामने रखी गई थी। इस दृश्य में अभिनेत्री से अपेक्षा की गई थी कि डांस करते समय वह एक सांप के साथ ऐसा सीन करें जिसमें उसे चूमने जैसा भाव दिखाया जाए। यह सुझाव उस समय के हिसाब से काफी अप्रत्याशित और असहज करने वाला माना गया, जिससे सेट पर एक अलग तरह की स्थिति बन गई थी। वहीदा रहमान ने इस प्रस्ताव पर तुरंत अपनी असहमति व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह उनके लिए सहज नहीं है और वह इस तरह का दृश्य करने में असमर्थ हैं। उनका मानना था कि केवल प्रभाव पैदा करने के लिए इस तरह की मांग उचित नहीं है और कलाकार की अपनी सीमाएं और सम्मान भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस सीन को करने से साफ इनकार कर दिया था। इस घटना के बावजूद फिल्म की शूटिंग जारी रही और ‘गाइड’ को बाद में भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में स्थान मिला। फिल्म में वहीदा रहमान के अभिनय और नृत्य को बेहद सराहा गया और यह फिल्म उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। दर्शकों ने उनके प्रदर्शन को काफी पसंद किया और यह फिल्म आज भी एक क्लासिक मानी जाती है। यह पूरा प्रसंग इस बात को दर्शाता है कि सिनेमा में रचनात्मकता के साथ कलाकार की सहमति और सहजता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। वहीदा रहमान का यह निर्णय यह साबित करता है कि एक कलाकार अपने सिद्धांतों पर कायम रहते हुए भी महान प्रदर्शन कर सकता है और अपने करियर में ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
भिंड में भीषण गर्मी का कहर, दिन के साथ रात में भी बढ़ा तापमान

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में गर्मी अब विकराल रूप ले चुकी है। दिन में तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को झुलसा रही हैं, जबकि रात का तापमान भी लगातार बढ़ने से राहत लगभग खत्म हो गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दो दिनों में लू चलने की संभावना जताई है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं। तापमान 41 डिग्री पार, रातें भी गर्मगुरुवार को जिले में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप के साथ चल रही गर्म हवाओं ने जनजीवन पर सीधा असर डाला है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आता है और लोग केवल जरूरी कामों के लिए ही बाहर निकल रहे हैं। रात के तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे लोगों को नींद में परेशानी हो रही है और कूलर-पंखे भी पर्याप्त राहत नहीं दे पा रहे हैं। लू के संकेत, प्रशासन सतर्कमौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए आने वाले दिनों में लू चलने की आशंका जताई जा रही है। तापमान में और वृद्धि होने पर दोपहर के समय स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्टजिला स्वास्थ्य विभाग ने लू और हीट स्ट्रोक को लेकर अलर्ट जारी किया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएस यादव ने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर के समय घर के अंदर रहें, पर्याप्त पानी पिएं और ठंडे स्थानों पर ही रहें। अस्पतालों में बढ़ रहे मरीजगर्मी बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। वायरल बुखार और डिहाइड्रेशन के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार अचानक बढ़ी गर्मी के कारण लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। बचाव के लिए जरूरी सावधानियांविशेषज्ञों का कहना है कि लोग दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ जैसे नींबू पानी, छाछ, लस्सी और नारियल पानी का सेवन करें।
वरदराज पेरुमल मंदिर की अनोखी जलवास परंपरा, कांचीपुरम में आस्था और इतिहास का संगम..

नई दिल्ली: तमिलनाडु का प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर कांचीपुरम सदियों से धार्मिक आस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसी पवित्र नगर में स्थित वरदराज पेरुमल मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर माना जाता है। द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला से सुसज्जित यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए बल्कि अपनी अनूठी परंपराओं के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह मंदिर भगवान विष्णु के वरदराज पेरुमल स्वरूप की आराधना का केंद्र है, जहां वे अपनी दिव्य शक्ति और कृपा के प्रतीक के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में विशाल गोपुरम, विस्तृत प्रांगण और बारीक नक्काशी इसकी प्राचीन कला और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। माना जाता है कि यह स्थान सदियों से भक्तों की आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे अत्यंत पवित्र मानते हैं। इस मंदिर की सबसे विशिष्ट परंपराओं में से एक भगवान विष्णु की प्रतिमा से जुड़ी जलवास की प्रथा है। मान्यता के अनुसार प्रतिमा को एक पवित्र जल कुंड में लंबे समय तक रखा जाता है और विशेष अवसरों पर ही भक्तों को इसके दर्शन प्राप्त होते हैं। इस परंपरा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है और इसे दिव्य संरक्षण और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि प्रतिमा वर्षों तक जल में रहने के बावजूद अपनी संरचना में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं दिखाती, जिससे इसकी पवित्रता और भी विशेष मानी जाती है। मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध मान्यता गर्भगृह में स्थित दो छिपकलियों से संबंधित है, जिन्हें लेकर श्रद्धालुओं में विशेष विश्वास देखा जाता है। परंपरा के अनुसार इन छिपकलियों के दर्शन को शुभ माना जाता है और इसे जीवन में समृद्धि और बाधाओं के निवारण से जोड़कर देखा जाता है। यह मान्यता मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। जलवास परंपरा के कारण भगवान विष्णु की प्रतिमा को लंबे अंतराल के बाद ही बाहर निकाला जाता है और इसी कारण भक्तों को इसके दर्शन का अवसर भी विशेष समय पर ही प्राप्त होता है। वर्तमान परंपरा के अनुसार अगली बार प्रतिमा के दर्शन कई वर्षों बाद होने की संभावना बताई जाती है, जिससे यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रतीक्षित और दुर्लभ माना जाता है। वरदराज पेरुमल मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है, जहां हर परंपरा और विश्वास गहरी आध्यात्मिक भावना से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।
एमपी में सरकारी कर्मचारियों को राहत, DA बढ़कर 257% हुआ, एरियर भी मिलेगा किस्तों में

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने छठवें वेतनमान के तहत वेतन पाने वाले शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते DA में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इस निर्णय से कर्मचारियों की आय में इजाफा होगा और उन्हें लंबित एरियर का लाभ भी मिलेगा। वित्त विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। जनसंपर्क अधिकारी संतोष मिश्रा के अनुसार महंगाई भत्ता अब 252 प्रतिशत से बढ़ाकर 257 प्रतिशत कर दिया गया है। यह नई दर 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएगी जबकि इसका वास्तविक भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर मई 2026 के वेतन के साथ किया जाएगा। इसके साथ ही 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि का एरियर कर्मचारियों को एकमुश्त नहीं बल्कि 6 समान किस्तों में मई से अक्टूबर 2026 के बीच दिया जाएगा जिससे उन्हें चरणबद्ध आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अवधि में सेवानिवृत्त या दिवंगत कर्मचारियों अथवा उनके नामांकित परिजनों को एरियर की राशि एक साथ प्रदान की जाएगी। महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक की राशि को अगले पूर्ण रुपये में जोड़ा जाएगा जबकि इससे कम राशि को नजरअंदाज किया जाएगा। साथ ही इसे अन्य किसी उद्देश्य के लिए वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा। प्रतिनियुक्ति कर्मचारियों को भी फायदा सरकार ने उपक्रमों निगमों मंडलों और अनुदान प्राप्त संस्थाओं से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों को भी इस बढ़ोतरी का लाभ देने का निर्णय लिया है। नई दरों के तहत पांचवें वेतनमान के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 323 प्रतिशत और चौथे वेतनमान के कर्मचारियों का 1465 प्रतिशत हो जाएगा। इन कर्मचारियों के लिए भी बढ़े हुए महंगाई भत्ते का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से मई 2026 वेतन के साथ शुरू होगा। वहीं 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक का एरियर 6 समान किस्तों में मई से अक्टूबर 2026 के बीच दिया जाएगा। विशेष प्रावधान के तहत सेवानिवृत्त या दिवंगत कर्मचारियों के मामलों में एरियर की पूरी राशि एकमुश्त दी जाएगी ताकि उनके परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल सके।
पंडोखर धाम में Happu Singh की हास्य प्रस्तुति, ठहाकों से गूंजा परिसर

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के पंडोखर धाम में बुधवार रात भक्ति और मनोरंजन का अनोखा संगम देखने को मिला। टीवी के लोकप्रिय हास्य कलाकार योगेश त्रिपाठी उर्फ ‘हप्पू सिंह’ के आगमन से पूरा धाम परिसर उत्साह और उमंग से भर गया। श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की भारी भीड़ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। गुरुशरण महाराज से लिया आशीर्वादधाम पहुंचने के बाद हप्पू सिंह ने पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने आध्यात्मिक चर्चा में भी हिस्सा लिया और पंडोखर धाम की परंपराओं व धार्मिक माहौल की सराहना की। मंच पर आते ही गूंजे ठहाकेजैसे ही योगेश त्रिपाठी मंच पर पहुंचे, पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। अपने खास अंदाज और चुटीले संवादों से उन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि पूरा परिसर ठहाकों से गूंजता रहा और लोग हंसी के इस माहौल में डूब गए। मेले जैसा नजर आया माहौलकार्यक्रम के दौरान धाम परिसर में मेले जैसा दृश्य देखने को मिला। दूर-दूर से आए श्रद्धालु और दर्शक इस खास पल का आनंद लेते नजर आए। कई लोग अपने पसंदीदा कलाकार के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाकर इन यादगार पलों को संजोते दिखे। देर रात तक चला कार्यक्रमहंसी और भक्ति से सराबोर यह आयोजन देर रात तक चलता रहा। उपस्थित लोगों ने न सिर्फ मनोरंजन का आनंद लिया, बल्कि आध्यात्मिक वातावरण का भी अनुभव किया।
गुना में छात्रा ने खाया जहर, 12वीं में फेल होने से थी तनाव में खौफनाक कदम, हालत स्थिर

गुना। मध्यप्रदेश के गुना में परीक्षा परिणाम के बाद मानसिक तनाव का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। कैंट थाना क्षेत्र की आजाद कॉलोनी में रहने वाली 20 वर्षीय छात्रा ने 12वीं बोर्ड में फेल होने के बाद चूहामार दवा खाकर आत्महत्या की कोशिश की। फिलहाल जिला अस्पताल में उसका इलाज जारी है और डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत अब स्थिर है। रिजल्ट के 6 घंटे बाद उठाया खतरनाक कदमजानकारी के अनुसार, छात्रा मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं कक्षा की छात्रा थी और शहर के महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में पढ़ती थी। बुधवार को घोषित हुए बोर्ड परीक्षा परिणाम में वह अनुत्तीर्ण हो गई। परिजनों ने बताया कि रिजल्ट आने के करीब 6 घंटे बाद वह गहरे तनाव में चली गई और शाम करीब 5 बजे घर में रखी चूहामार दवा खा ली। समय पर अस्पताल पहुंचने से बची जानजहर खाने के बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ने लगी, तब परिजनों को इसकी जानकारी हुई। तुरंत उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई और अब उसकी हालत खतरे से बाहर है। ‘बहुत मेहनत की थी, लेकिन रिजल्ट उम्मीद जैसा नहीं आया’उपचार के दौरान छात्रा ने बताया कि यह उसका 12वीं का पहला प्रयास था और उसने काफी मेहनत की थी। अच्छे परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन असफलता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया, जिसके कारण उसने यह कदम उठा लिया। प्रशासन और पुलिस की अपीलप्रशासन और पुलिस ने छात्रों से अपील की है कि परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता। असफलता के बाद भी आगे कई मौके मिलते हैं। शिक्षा विभाग ने भी फेल छात्रों को दोबारा अवसर देने की बात कही है, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। बढ़ती मानसिक दबाव की समस्यायह घटना दिखाती है कि परीक्षा परिणाम के समय छात्रों पर मानसिक दबाव कितना अधिक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में परिवार और समाज को बच्चों का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
400 से अधिक बार महादेव का किरदार निभाकर तरुण खन्ना ने साझा किया अनुभव…

नई दिल्ली: भारतीय टेलीविजन और थिएटर जगत के चर्चित अभिनेता तरुण खन्ना ने अपने करियर और विशेष रूप से भगवान शिव के किरदार को लेकर एक गहरा और भावनात्मक अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अब तक 400 से अधिक बार महादेव का किरदार निभाया है और यह भूमिका उनके लिए केवल अभिनय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उनके व्यक्तित्व और जीवन दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। तरुण खन्ना के अनुसार इस किरदार को बार बार निभाने से उनके स्वभाव में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति रहती थी, वहीं अब उनके भीतर धैर्य और संतुलन की भावना काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस भूमिका ने उनके अंदर कहीं दबी हुई विनम्रता को फिर से जीवित कर दिया है, जो समय और अनुभव के साथ कहीं पीछे छूट गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि हर बार मंच पर या स्क्रीन पर इस किरदार को निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है क्योंकि यह केवल अभिनय नहीं बल्कि भावनाओं और आस्था से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि हर प्रस्तुति से पहले उन्हें हल्की घबराहट महसूस होती है, ताकि किरदार की गरिमा और प्रभाव में किसी तरह की कमी न रह जाए। तरुण खन्ना ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें यह समझाया है कि अभिनय केवल संवाद बोलने का नाम नहीं है, बल्कि उसमें भावनाओं की गहराई और जिम्मेदारी भी शामिल होती है। उन्होंने बताया कि मंच पर लाइव परफॉर्मेंस की चुनौती अलग होती है, जहां एक ही मौके में पूरी ऊर्जा के साथ प्रदर्शन करना पड़ता है, जबकि टेलीविजन पर बार बार रीटेक का अवसर मिलता है। उनका कहना है कि थिएटर का अनुभव उनके लिए अधिक संतोषजनक है क्योंकि वहां दर्शकों की प्रतिक्रिया तुरंत मिलती है और कलाकार को अपने प्रदर्शन की वास्तविक अनुभूति होती है। इसी वजह से वे मंचीय प्रस्तुति को अधिक चुनौतीपूर्ण और प्रभावशाली मानते हैं। तरुण खन्ना ने यह भी कहा कि कलाकारों की सार्वजनिक छवि बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि दर्शक उन्हें उनके किरदारों के साथ साथ वास्तविक जीवन में भी देखते हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि उनका व्यवहार और सोच समाज पर सकारात्मक प्रभाव छोड़े। उनके अनुसार महादेव का किरदार उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है, जिसने उन्हें न केवल एक बेहतर अभिनेता बनाया बल्कि एक अधिक शांत और संतुलित इंसान भी बनाया है।