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ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर RC तक सब कुछ मोबाइल में, DigiLocker के बढ़ते इस्तेमाल ने बदली दस्तावेज संभालने की तस्वीर

नई दिल्ली । डिजिटल इंडिया अभियान के विस्तार के साथ सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक आसान और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इन्हीं प्रयासों में से एक DigiLocker है, जिसने दस्तावेजों को संभालने और प्रस्तुत करने की पारंपरिक व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया है। आज यह प्लेटफॉर्म करोड़ों भारतीयों के लिए एक भरोसेमंद डिजिटल दस्तावेज भंडार के रूप में उभर चुका है, जहां ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखे जा सकते हैं। तेजी से डिजिटल होती जीवनशैली के बीच लोगों को अक्सर जरूरी दस्तावेज साथ रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्रा के दौरान या वाहन जांच के समय दस्तावेज भूल जाने से परेशानी और जुर्माने की स्थिति पैदा हो जाती है। DigiLocker इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। मोबाइल फोन में उपलब्ध इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से नागरिक अपने प्रमाणित दस्तावेज किसी भी समय और किसी भी स्थान पर प्रस्तुत कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि DigiLocker केवल दस्तावेजों को स्टोर करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सरकारी विभागों और नागरिकों के बीच डिजिटल विश्वास का एक मजबूत तंत्र भी है। प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध दस्तावेज सीधे अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं, जिससे उनकी प्रमाणिकता को लेकर किसी प्रकार की शंका नहीं रहती। यही कारण है कि कई सरकारी प्रक्रियाओं में इन दस्तावेजों को मूल दस्तावेजों के समान वैध माना जाता है। वाहन चालकों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। सड़क पर पुलिस जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दिखाए जा सकते हैं। इससे कागजी दस्तावेजों के खोने, खराब होने या साथ न होने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाती है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए भी यह प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपनी शैक्षणिक मार्कशीट और प्रमाणपत्र सुरक्षित रूप से डिजिटल रूप में संग्रहीत कर सकते हैं। डिजिटल दस्तावेजों की बढ़ती स्वीकार्यता ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी और सरल बनाया है। नागरिकों को बार-बार फोटोकॉपी जमा करने या मूल दस्तावेज लेकर चलने की आवश्यकता कम हो रही है। इससे समय की बचत के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है, जो पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी सकारात्मक कदम माना जाता है। हालांकि डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपयोगकर्ता अपने मोबाइल उपकरणों को सुरक्षित रखें, नियमित रूप से ऐप अपडेट करें और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ अपनी लॉगिन जानकारी साझा न करें। इससे डिजिटल दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सकती है। वर्तमान समय में DigiLocker केवल एक मोबाइल एप्लिकेशन नहीं बल्कि डिजिटल प्रशासन की नई पहचान बन चुका है। सरकार की डिजिटल सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। दस्तावेजों को सुरक्षित, सुलभ और प्रमाणित रूप में उपलब्ध कराने वाली यह व्यवस्था आने वाले वर्षों में डिजिटल शासन व्यवस्था का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना पर असर, Vivo और iQOO के कई डिवाइस हुए महंगे; मेमोरी चिप संकट को माना जा रहा कारण

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में ग्राहकों को एक और झटका लगा है। प्रमुख स्मार्टफोन ब्रांड Vivo और iQOO ने अपने कई लोकप्रिय मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म पर लागू हो चुकी हैं, जिससे नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सबसे अधिक प्रभाव Vivo T5 Pro सीरीज पर देखने को मिला है। इस सीरीज के विभिन्न वेरिएंट्स की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ मॉडल्स पर तीन हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट के ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उन उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है जो बजट और फीचर्स के बीच संतुलन बनाकर खरीदारी का निर्णय लेते हैं। वहीं iQOO ने भी अपने फ्लैगशिप और प्रीमियम श्रेणी के स्मार्टफोन्स की कीमतों में संशोधन किया है। कंपनी के प्रमुख मॉडल iQOO 15 के विभिन्न वेरिएंट अब पहले से अधिक कीमत पर उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त iQOO 15R और iQOO Neo 10 जैसे डिवाइस भी महंगे हो गए हैं। इन मॉडलों की लोकप्रियता को देखते हुए कीमतों में यह बदलाव बाजार में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक स्तर पर मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। पिछले कुछ महीनों से सेमीकंडक्टर उद्योग में लागत बढ़ने और सप्लाई चेन पर दबाव के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण खर्च में इजाफा हुआ है। स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां इसी बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर रही हैं। तकनीकी बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि रैम और स्टोरेज मॉड्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल Vivo और iQOO तक सीमित नहीं रह सकता। यदि वैश्विक आपूर्ति स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता है तो आने वाले महीनों में अन्य ब्रांड भी अपने स्मार्टफोन्स की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है। हालांकि मूल्य वृद्धि की राशि बहुत अधिक नहीं दिखाई देती, लेकिन प्रतिस्पर्धी बाजार में एक से तीन हजार रुपये का अंतर भी ग्राहकों के खरीदारी निर्णय को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट में उपभोक्ता अक्सर विभिन्न ब्रांडों और मॉडलों के बीच कीमत और फीचर्स की तुलना कर निर्णय लेते हैं। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी बिक्री रणनीतियों और उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर भी असर डाल सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आगामी त्योहारी सीजन और नए लॉन्च के दौरान कंपनियां विशेष ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और बैंक छूट के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती हैं। इससे बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हद तक प्रभाव कम किया जा सकता है। फिलहाल स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह समय बाजार की कीमतों पर नजर रखने का है। यदि वैश्विक चिप आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में अन्य मॉडलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

शेयर बाजार की तेजी से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ी, ICICI बैंक बना सबसे बड़ा लाभार्थी

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह दर्ज की गई मजबूत तेजी का सीधा फायदा देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों को मिला। बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, वैश्विक माहौल में सुधार और वित्तीय क्षेत्र में मजबूत खरीदारी के चलते देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 8 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी का नेतृत्व किया, जबकि कुछ चुनिंदा कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली। सप्ताह के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,284.61 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी मजबूती दिखाते हुए 256.2 अंक ऊपर चढ़ा। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की और बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद की। सबसे अधिक लाभ ICICI बैंक को हुआ, जिसका बाजार पूंजीकरण 56,223 करोड़ रुपये बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत निवेश और वित्तीय शेयरों में बढ़ती मांग के कारण कंपनी का मूल्यांकन तेजी से बढ़ा। इसके अलावा HDFC बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने मार्केट कैप में 38,571 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की। बैंक का कुल मूल्यांकन बढ़कर लगभग 11.89 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक SBI ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 36,137 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और इसका कुल मूल्यांकन 9.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का लाभ इन प्रमुख बैंकिंग संस्थानों को सबसे अधिक मिला। वित्तीय सेवाओं की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में भी 18,366 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने मूल्यांकन में 14,380 करोड़ रुपये का इजाफा किया। वहीं इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो तथा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की अग्रणी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में भी वृद्धि हुई। हालांकि अन्य कंपनियों की तुलना में यह बढ़त सीमित रही, फिर भी कंपनी 17.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मूल्यांकन के साथ देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। दूसरी ओर, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को इस सप्ताह नुकसान का सामना करना पड़ा। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 13,296 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसी तरह भारतीय जीवन बीमा निगम के मूल्यांकन में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। इन दोनों कंपनियों को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कंपनियों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि और वित्तीय स्थिरता से जुड़े कदमों ने भारतीय बाजारों को मजबूती प्रदान की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। यदि यह सकारात्मक माहौल आगे भी बना रहता है तो आने वाले सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार और प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में नई बढ़त देखने को मिल सकती है।

राऊ में युवती के साथ रह रहे युवक को लेकर हंगामा, हिंदू संगठनों की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच

मध्यप्रदेश । इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र में शनिवार रात उस समय हलचल मच गई जब एक युवक और युवती के साथ रहने की सूचना पर कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों को राऊ थाने लाया गया, जहां पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार मामला कमला नगर क्षेत्र का है। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि एक युवक, जिसकी पहचान सूफियान उर्फ सैफी अली निवासी सदर बाजार के रूप में बताई जा रही है, एक युवती के साथ किराए के मकान में रह रहा है। सूचना मिलने के बाद कुछ संगठन पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तथा दोनों को अपने साथ राऊ थाने ले गए। बताया गया है कि संबंधित मकान इकबाल खान का है, जहां युवक और युवती रह रहे थे। संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने युवक को पूछताछ के लिए थाने में बैठा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक पहले बाणगंगा क्षेत्र में सैलून संचालित करता था। वहीं उसकी युवती से पहचान हुई थी। बाद में वह राऊ क्षेत्र के श्रमिक इलाके में सैलून का काम करने लगा और किराए के मकान में रहने लगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मकान मालिक द्वारा किरायेदारों की जानकारी पुलिस को नहीं दी गई थी। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ संगठन कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि युवक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी जुड़ा हुआ था, लेकिन उसकी पहचान और भूमिका को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। राऊ थाना प्रभारी राजपाल सिंह राठौर के अनुसार मामले में प्राप्त शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पक्षों से जानकारी जुटा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। युवती और युवक दोनों के बयान लिए जा रहे हैं तथा उनके रहने की परिस्थितियों और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है, वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।

वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के बीच FPI की बड़ी बिकवाली, भारतीय बाजार से रिकॉर्ड पूंजी निकासी जारी

नई दिल्ली । वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव से गुजर रहा है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर असमंजस और रुपये में जारी कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून के मध्य तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जो पिछले पूरे वर्ष के मुकाबले भी काफी अधिक है। साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। जनवरी में उल्लेखनीय बिकवाली दर्ज की गई, जबकि फरवरी ऐसा एकमात्र महीना रहा जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध निवेश किया। इसके बाद मार्च में निकासी का आंकड़ा तेजी से बढ़ा और अप्रैल तथा मई में भी यह क्रम जारी रहा। जून के शुरुआती दिनों में भी विदेशी निवेशकों ने बाजार से बड़ी रकम निकाली, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेशों के प्रति सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक विकास दर को लेकर चिंताएं और अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर रही है। ऐसे माहौल में कई वैश्विक फंड प्रबंधक अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों और विकसित बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारतीय बाजार के मूल्यांकन को लेकर भी विदेशी निवेशकों में सतर्कता देखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का मूल्यांकन अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में कई निवेशक बेहतर जोखिम-प्रतिफल अनुपात वाले विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा रुपये में लगातार कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के वास्तविक रिटर्न को प्रभावित कर रही है, जिससे इक्विटी बाजार में निवेश का आकर्षण कम हुआ है। हालांकि शेयर बाजार से निकासी के बीच एक अलग रुझान भी सामने आया है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में रुचि बनाए रखी है। जून के पहले पखवाड़े में बॉन्ड प्रतिभूतियों में उल्लेखनीय निवेश दर्ज किया गया। वर्ष 2026 के दौरान भी निश्चित आय वाले निवेश साधनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहा है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि अपेक्षाकृत स्थिर और कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की रणनीति कई वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अमेरिका की मौद्रिक नीति, प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसले, वैश्विक मुद्रास्फीति की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाएं निवेश प्रवाह की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि दर बनाए रखती है, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हो सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार सहभागियों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफपीआई की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेंगी। मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों के लिए सतर्कता, विविधीकरण और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इंदौर में बदला मौसम का मिजाज, प्री-मानसून ने दी दस्तक; बारिश और तेज हवाओं से तापमान 7 डिग्री गिरा

मध्यप्रदेश । इंदौर में लंबे समय से बनी हुई उमस और गर्मी के बीच रविवार को प्री-मानसून गतिविधियों ने राहत पहुंचाई। अलसुबह शहर के कई हिस्सों में बारिश हुई, तेज हवाएं चलीं और बिजली कड़कने के साथ कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में शहर में 29.1 मिमी यानी एक इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद कुछ समय के लिए मौसम सुहावना रहा, हालांकि दिन चढ़ने के साथ उमस फिर महसूस होने लगी। बारिश और तेज हवाओं का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। शनिवार रात न्यूनतम तापमान में करीब 7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और यह 19.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह सामान्य तापमान से लगभग 5 डिग्री कम रहा। पिछले चार दिनों से रात का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ था, लेकिन मौसम में आए अचानक बदलाव ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी। शनिवार को दिनभर शहर में उमस का असर बना रहा और लगातार चौथे दिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि रात में मौसम का मिजाज बदलने के बाद वातावरण में ठंडक महसूस की गई। रविवार सुबह हुई बारिश के बाद आसमान साफ हो गया और धूप निकल आई, लेकिन हवा में नमी बढ़ने के कारण उमस बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय टर्फ लाइन और प्री-मानसून सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। इंदौर सहित उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, हरदा, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में आंधी और बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में तेज गर्मी और उमस का असर भी देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय पूरे मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं। कहीं तेज हवाएं चल रही हैं तो कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी घटनाएं सामने आई हैं। मानसून की रफ्तार फिलहाल सामान्य से थोड़ी धीमी है और यह लगभग तीन से चार दिन देरी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदेश में मानसून के 18 जून तक प्रवेश करने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर में जून माह के दौरान अब तक 55.2 मिमी यानी दो इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। महीने का आधा समय अभी बाकी है, ऐसे में बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। सामान्य तौर पर जून महीने में शहर में मानसून पूर्व अच्छी बारिश देखने को मिलती है और इस बार भी यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। इंदौर के मौसम इतिहास की बात करें तो वर्ष 1980 में जून महीने में 17 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में पांच इंच बारिश हुई थी। तापमान के रिकॉर्ड में 3 जून 1991 को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों को बदलते मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने और गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

खून फैक्ट्री में नहीं बनता, इंसान ही बचाता है इंसान की जिंदगी: थैलेसीमिया पीड़ित वैभव बने रक्तदान जागरूकता की मिसाल

मध्यप्रदेश । विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर इंदौर के 29 वर्षीय वैभव सोनी की कहानी मानवता, संघर्ष और सेवा का ऐसा उदाहरण पेश करती है, जो हर किसी को प्रेरित कर सकती है। महज दो वर्ष की उम्र में उन्हें पता चला कि वे Thalassemia से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि उनकी जिंदगी नियमित रूप से खून चढ़ाने पर निर्भर रहेगी। तब से लेकर आज तक वैभव का जीवन रक्तदाताओं की संवेदनशीलता और समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में वैभव को हर आठ से दस दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। बचपन में यह अंतराल लगभग एक महीने का था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ खून की आवश्यकता भी बढ़ती गई। अब तक उन्हें 400 से अधिक यूनिट रक्त चढ़ाया जा चुका है। लगातार रक्त चढ़ने के कारण शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हृदय, लिवर और अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए उन्हें नियमित दवाइयों और इंजेक्शनों का सहारा लेना पड़ता है। उनके उपचार पर हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। हालांकि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैभव ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की और अपनी बीमारी को समाजसेवा का माध्यम बना लिया। बचपन में अपने माता-पिता को रक्त की व्यवस्था के लिए संघर्ष करते देखकर उनके मन में यह संकल्प पैदा हुआ कि वे अन्य मरीजों को इस परेशानी से बचाने के लिए काम करेंगे। यही सोच उन्हें रक्तदान जागरूकता अभियान से जोड़कर ले गई। पिछले कई वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर रहे हैं और लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे ‘मानवता की पहचान’ संस्था के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। हाल ही में इंदौर के प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple परिसर में आयोजित दो दिवसीय महारक्तदान शिविर में उनकी टीम ने 821 यूनिट रक्त संग्रहित कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। संस्था द्वारा अब तक हजारों यूनिट रक्त संग्रह किया जा चुका है। वर्ष 2022 में एक ही स्थान पर 12 घंटे के भीतर 951 यूनिट रक्त एकत्र कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया गया था। इस उपलब्धि को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया। इसके अलावा संस्था को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में भी स्थान मिल चुका है। वैभव इन अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। समाजसेवा और थैलेसीमिया मरीजों की मदद के लिए उन्हें ‘रियल लाइफ हीरो’ सहित कई सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। वैभव कहते हैं कि विज्ञान ने भले ही बड़ी प्रगति कर ली हो, लेकिन आज भी खून किसी फैक्ट्री में नहीं बनता। एक इंसान ही दूसरे इंसान की जिंदगी बचा सकता है। वे बताते हैं कि एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है, क्योंकि ब्लड बैंक में इसे विभिन्न घटकों में विभाजित कर जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है। वे युवाओं से नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हैं। साथ ही थैलेसीमिया जैसी बीमारी को रोकने के लिए विवाह से पहले जांच कराने पर भी जोर देते हैं। उनका मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस पर वैभव की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि संकल्प मजबूत हो तो व्यक्ति न केवल अपनी जिंदगी संवार सकता है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन में भी उम्मीद की रोशनी जगा सकता है।

इस सप्ताह शेयर बाजार के लिए अहम होंगे WPI आंकड़े और फेड का फैसला, विदेशी निवेशकों की चाल पर भी रहेगी नजर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए नया कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों के बीच शुरू होने जा रहा है। निवेशकों की नजर इस बार केवल कंपनियों के प्रदर्शन या आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर संबंधी फैसले, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान रहेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन कारकों का संयुक्त प्रभाव निवेशकों की रणनीति और बाजार की दिशा तय कर सकता है। घरेलू स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में मई महीने के थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई के आंकड़े शामिल हैं। ये आंकड़े यह संकेत देंगे कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी लागतों में किस प्रकार का बदलाव देखने को मिल रहा है। महंगाई की स्थिति का असर उद्योगों की लागत, कंपनियों की लाभप्रदता और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है, इसलिए निवेशक इन आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक इस सप्ताह का सबसे बड़ा घटनाक्रम मानी जा रही है। निवेशकों की नजर केवल ब्याज दरों पर नहीं होगी, बल्कि फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति, महंगाई को लेकर उसके दृष्टिकोण और आर्थिक वृद्धि के अनुमान पर भी रहेगी। यदि केंद्रीय बैंक आगामी महीनों में ब्याज दरों में बदलाव के संकेत देता है तो इसका प्रभाव वैश्विक पूंजी प्रवाह और उभरते बाजारों की निवेश धारणा पर पड़ सकता है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्सुकता बनी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और क्षेत्र में स्थिरता बढ़ती है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई के दबाव में कमी आ सकती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी देखी गई है। बड़ी मात्रा में पूंजी निकासी का असर बाजार की तरलता और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि वैश्विक परिस्थितियों और फेडरल रिजर्व के निर्णय के बाद विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है या नहीं। मॉनसून की प्रगति भी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। सामान्य और संतुलित वर्षा कृषि उत्पादन को समर्थन देती है, जिससे ग्रामीण मांग मजबूत होती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इसी कारण कृषि, उपभोक्ता और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था और प्रमुख सूचकांकों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई थी। बाजार को समर्थन देने वाले प्रमुख कारणों में वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी शामिल रही। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी सप्ताह में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है क्योंकि निवेशक विभिन्न आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाओं के आधार पर अपने निवेश निर्णयों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे। कुल मिलाकर, यह सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू आर्थिक आंकड़े, वैश्विक मौद्रिक नीति, तेल बाजार की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां मिलकर बाजार की आगामी चाल को निर्धारित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए हर प्रमुख घटनाक्रम पर सतर्क नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।

MPL 2026 में फीके पड़े IPL सितारे, 15 लाख के आशुतोष 95 रन पर सिमटे; माधव तिवारी और अक्षत रघुवंशी बने नई सनसनी

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग (MPL) 2026 में जहां IPL में चमक बिखेर चुके खिलाड़ियों पर क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें टिकी हुई थीं, वहीं लीग के शुरुआती चरण में कई बड़े नाम अपेक्षित प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं। दूसरी ओर कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है और खुद को भविष्य के सितारों के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा मालवा स्टैलियन्स के कप्तान आशुतोष शर्मा की हो रही है। MPL 2026 की नीलामी में उन्हें सबसे ऊंची बोली लगाकर 15 लाख रुपए में खरीदा गया था। लीग के सबसे महंगे खिलाड़ी होने के कारण उनसे बड़े और मैच जिताऊ प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अब तक छह पारियों में वह केवल 95 रन ही बना सके हैं। उनका खराब फॉर्म टीम और प्रशंसकों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं IPL में लगातार दूसरी बार Royal Challengers Bengaluru को खिताब दिलाने वाले रजत पाटीदार भी शुरुआती मैचों में संघर्ष करते नजर आए। हालांकि मालवा स्टैलियन्स के खिलाफ उन्होंने 30 गेंदों में नाबाद 65 रन की शानदार पारी खेलकर वापसी के संकेत जरूर दिए, लेकिन कुल मिलाकर तीन मैचों में उनके 105 रन उम्मीदों के अनुरूप नहीं माने जा रहे हैं। इंदौर पिंक पैंथर्स के कप्तान वेंकटेश अय्यर भी अब तक अपने पुराने रंग में दिखाई नहीं दिए हैं। तीन मुकाबलों में उन्होंने 88 रन बनाए हैं और सिर्फ एक विकेट हासिल किया है। हालांकि मालवा स्टैलियन्स के खिलाफ 22 गेंदों में 54 रन की विस्फोटक पारी खेलकर उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय दिया, लेकिन निरंतरता की कमी साफ नजर आई। गेंदबाजी में भी कुछ बड़े नाम अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए। कुलदीप सेन, जो IPL में अपनी तेज गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं, MPL में अब तक प्रभाव छोड़ने में असफल रहे हैं। एक मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 47 रन खर्च किए और कोई विकेट हासिल नहीं कर सके। युवा खिलाड़ियों ने मचाया धमाल जहां IPL सितारे संघर्ष कर रहे हैं, वहीं उज्जैन फाल्कन्स के ऑलराउंडर माधव तिवारी लीग के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने पांच मैचों में 286 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 182.19 का रहा है। इसके अलावा गेंदबाजी में भी सात विकेट लेकर उन्होंने अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है। रीवा जगुआर्स के युवा बल्लेबाज अक्षत रघुवंशी ने भी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया है। दो मैचों में उन्होंने 127 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 276.09 का रहा है। 32 गेंदों में खेली गई 85 रन की पारी लीग की सबसे चर्चित पारियों में शामिल हो चुकी है। गेंदबाजों में चमके आवेश खान चंबल घड़ियाल के तेज गेंदबाज आवेश खान ने अपने IPL अनुभव का शानदार उपयोग करते हुए तीन मैचों में छह विकेट झटके हैं। उनकी 6.83 की इकॉनमी दर्शाती है कि उन्होंने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। उधर, भोपाल लेपर्ड्स के आधिकारिक कप्तान अरशद खान अभी तक मैदान पर नहीं उतरे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में अनिकेत वर्मा ने टीम की कमान संभाली और चार मैचों में 137 रन बनाकर जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। इसके अलावा शिवांग कुमार, कुमार कार्तिकेय, शिवम शुक्ला और मंगेश यादव जैसे खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। विशेष रूप से शिवम शुक्ला का एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा MPL 2026 के अब तक के सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिना जा रहा है। लीग के शुरुआती चरण ने यह साफ कर दिया है कि MPL केवल बड़े नामों की प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह युवा प्रतिभाओं को खुद को साबित करने का बेहतरीन मंच भी बनता जा रहा है।

यूपीआई बना वैश्विक मिसाल, दक्षिण अफ्रीका ने भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को बताया भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार

नई दिल्ली । भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में चल रही तैयारियों के बीच भारतीय यूपीआई मॉडल को एक प्रभावी और सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने भी सार्वजनिक रूप से भारत की इस प्रणाली की सराहना करते हुए इसे आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मॉडल बताया है। दक्षिण अफ्रीका वर्तमान समय में नकदी आधारित लेनदेन को कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस दिशा में वहां की सरकार और वित्तीय संस्थान एक ऐसे राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क के विकास की योजना बना रहे हैं जो लोगों को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा सके। इसी संदर्भ में भारत के यूपीआई मॉडल को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जिसने कुछ ही वर्षों में करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और पहुंच है। मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड और बैंक खातों के एकीकरण के माध्यम से यह प्रणाली भुगतान प्रक्रिया को बेहद आसान बना देती है। इसके लिए महंगे उपकरणों या जटिल तकनीकी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी इसका उपयोग सुविधाजनक हो जाता है। दक्षिण अफ्रीका की सरकार भी ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रही है, जो नागरिकों को बिना अतिरिक्त शुल्क के रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान कर सके। इसका उद्देश्य नकदी पर निर्भरता को कम करना, वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विस्तार से आर्थिक लेनदेन की गति बढ़ेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक प्रभावी होंगी। हालांकि, इस दिशा में दक्षिण अफ्रीका के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। देश की बड़ी आबादी अब भी औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है और मोबाइल डेटा की लागत भी अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं डिजिटल बुनियादी ढांचे की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। इन कारणों से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना आसान नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से विस्तार की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। वित्तीय तकनीक, डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड भुगतान साधनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया तो दक्षिण अफ्रीका आने वाले वर्षों में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। भारत का यूपीआई पहले ही कई देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और इसे दुनिया के सबसे सफल रियल-टाइम भुगतान प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। इसकी सफलता ने विकासशील देशों को यह दिखाया है कि सीमित लागत में भी व्यापक डिजिटल भुगतान नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका द्वारा इस मॉडल में दिखाई जा रही रुचि भारत की डिजिटल क्षमता और वित्तीय नवाचार की वैश्विक स्वीकार्यता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।