International Conspiracy: भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की नाकाम कोशिश: म्यांमार के विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे थे विदेशी नागरिक, दिल्ली से कोलकाता तक NIA की बड़ी कार्रवा

International Conspiracy: नई दिल्ली। भारत की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने एक सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश किया है। एनआईए ने म्यांमार में जातीय विद्रोही समूहों को हथियारों की आपूर्ति, आतंकी सामग्री और सैन्य प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोपों में सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेन के छह नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए तीन यूक्रेनी नागरिकों को देश की राजधानी दिल्ली, तीन को लखनऊ और अमेरिकी नागरिक मैथ्यू को कोलकाता से हिरासत में लिया है। एनआईए द्वारा विशेष अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, ये सभी आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन इनका असली मकसद बेहद खतरनाक था। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचे, जहाँ उन्होंने उन जातीय संघर्ष समूहों से संपर्क साधा जो भारत में सक्रिय प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन की एक बड़ी खेप म्यांमार पहुंचाई और वहां विद्रोहियों को एके-47 राइफलों जैसे घातक हथियारों का प्रशिक्षण दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं है और प्रथम दृष्टया गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा-18 के तहत आतंकी साजिश का मामला बनता है, जिसके बाद सातों आरोपियों को 11 दिन की एनआईए रिमांड पर भेज दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। यूक्रेन सरकार ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारत को आधिकारिक विरोध पत्र (Note Verbale) सौंपा है। भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति मांगी है। वहीं, गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक का प्रोफाइल बेहद संदिग्ध बताया जा रहा है; वह पूर्व में लीबिया, सीरिया और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों में शामिल रह चुका है। एनआईए अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी साजिश के पीछे किन अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हाथ है और भारत की सुरक्षा को इससे कितना बड़ा खतरा हो सकता था।
BSE Sensex today: तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण

BSE Sensex today: नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन रैपिड का स्ट्रिप जारी है, जिससे निवेशक का भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इस दौरान शेयर बाजार में उछाल दिखा रहे हैं। डीजेस के तीन सत्रों में 2,000 अंक के करीब भुगतान किया गया है, जबकि ड्यूस में 700 अंक से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। शनिवार दोपहर 12:47 बजे आटा 636 अंक 0.84% की तेजी के साथ 76,707 पर कारोबार हो रहा था, मलेशिया 191 अंक 0.81% 23,770 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि इस तेजी में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि बात मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर में भी बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं, जो बाजार में व्यापक बाजार का संकेत है। बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में रिटर्न्स की खरीदारी है। निफ्टी आईटी करीब 4 फीसदी की तेजी के साथ टॉप जेनर बन गया है। इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां इनफॉरमेंस शॉपिंग को मिल रही हैं। इसकी एक बड़ी वैश्विक ग्लोबल ब्रोकरेज सीएलएसए की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए इंजीनियरिंग टूल्स से इंडस्ट्री को कोई बड़ा खतरा नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद वोडाफोन की चिंता कम हुई और सेक्टर में तेजी से पैसा लौटा। कच्चे तेल की गिरावट और ज्वालामुखी वोलैटिलिटी ने स्केल फ़्रॉम बाज़ार की सूची में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का भी बहुत बड़ा योगदान है। कच्चे तेल की बिक्री में आई गिरावट से उपज की सेंटि बेहतर हुई है। WTI क्रूड ऑयल में करीब 3.43% की गिरावट दर्ज की गई और 92.91 डॉलर प्रति शेयर के आसपास रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 2.02% बढ़कर 101.3 डॉलर के करीब रहा। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत जैसे औद्योगिक देश के लिए अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होता है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिलता है। इसके अलावा भारत VIX में गिरावट के लिए भी बाजार सकारात्मक संकेत है। इंडिया विक्स 4.30% ग्रुप 18.94 पर आया है, जो बताता है कि बाजार में स्थिरता कम हो रही है और स्थिरता बढ़ रही है। आम तौर पर जब अस्थिरता कम होती है, तो निवेशक अधिकांश स्वामित्व के साथ बाजार में पैसा विकल्प होते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप स्टूडियो में भी मजबूत तेजी से देखने को मिल रही है। मैथ्यू मिडकैप 100 स्टॉल 1.77% और मैडकैप 100 स्टॉल 1.52% तक चढ़े, जिससे यह पता चलता है कि रैली व्यापक है और केवल साइंटिस्ट स्टॉक तक सीमित नहीं है। कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में विश्वास की वापसी, कच्चे तेल के क्षेत्र में गिरावट और कम होने वाली बाजार अस्थिरता ने मिलकर इस तेजी को जगह दी है। अगर यही ट्रेंड जारी हो रहा है, तो आने वाले दिनों में बाजार में नए व्यापारियों को चुना जा सकता है।
SHAHDOL NEWS: शहडोल के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, दो नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल

SHAHDOL NEWS: शहडोल । शहडोल के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निपनिया की स्थिति गंभीर है। चमचमाती नई बिल्डिंग होने के बावजूद यहाँ एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। अस्पताल पूरी तरह से दो नर्सों के भरोसे चल रहा है जबकि नियमों के अनुसार कम से कम पांच डॉक्टर होने चाहिए। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए दूर दराज के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े बड़े दावे करती है लेकिन निपनिया अस्पताल की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। अस्पताल के कर्मचारी भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं और डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है। डॉ राजेश मिश्रा ने बताया कि डॉक्टरों का बॉन्ड पीरियड खत्म होने के कारण अस्पताल में खालीपन है। इसके अलावा जिले में पीजी के लिए लगभग 10 डॉक्टर अन्य कार्यों में गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए शासन से मांग की गई है और जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी। यह मामला शहडोल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाता है और दिखाता है कि चमचमाती बिल्डिंगों के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी अव्यवस्थित रह सकती है।
PSL 2026 : PSL 11 पर मंडराया युद्ध का साया? अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक के बाद विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा पर PCB ने तोड़ी चुप्पी

PSL 2026 : नई दिल्ली। पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के 11वें सीजन के आगाज से ठीक पहले पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव ने टूर्नामेंट के आयोजन पर संशय के बादल मंडरा दिए हैं। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में की गई एयरस्ट्राइक, जिसमें भारी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट गलियारों में विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड और वहां की सरकार द्वारा अपने खिलाड़ियों को पेशावर जैसे सीमावर्ती शहरों की यात्रा न करने की सलाह देने की खबरों ने पीसीबी (PCB) की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। हालाँकि, इन तमाम आशंकाओं के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पीसीबी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र और पड़ोसी देशों के साथ चल रहे संघर्ष के बावजूद, पीएसएल के आगामी सीजन में विदेशी खिलाड़ियों की संख्या में कोई कमी नहीं आएगी। बोर्ड ने दावा किया है कि इस बार ऑस्ट्रेलिया से रिकॉर्ड संख्या में खिलाड़ी पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। पीसीबी के एक सूत्र ने पीटीआई (PTI) को बताया कि यात्रा के सभी इंतजाम और सुरक्षा प्लान तैयार हैं और खिलाड़ी अगले हफ्ते से पाकिस्तान आना शुरू कर देंगे। विवाद की मुख्य जड़ पेशावर में होने वाला मैच है, जो अफगानिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सुरक्षा कारणों से अपने खिलाड़ियों को इस क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी है। लेकिन पीसीबी का कहना है कि बोर्ड स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और अतीत में भी ऐसी चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक किया गया है। गौरतलब है कि 26 मार्च से शुरू होने वाले पीएसएल के इस सीजन में स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर, एडम जैम्पा, मार्नस लाबुशेन और जैक फ्रेजर मैकगर्क जैसे बड़े ऑस्ट्रेलियाई सितारे शामिल होने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ये खिलाड़ी वर्तमान तनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान की धरती पर कदम रखते हैं या सुरक्षा चिंताओं के चलते अपना नाम वापस लेते हैं। फिलहाल, पीसीबी इस टूर्नामेंट को ऐतिहासिक बनाने के अपने दावे पर अडिग है।
Electronics export growth India : मेक इन इंडिया को बड़ी सफलता: इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट में 32% से ज्यादा वृद्धि

Electronics export growth India : नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर सेक्टर तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2024-25 में आधार पर 32.47 प्रतिशत बढ़कर 38.58 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईएससी) की रिपोर्ट में सामने आई है। इससे पहले 2023-24 में यह आंकड़ा 29.12 अरब डॉलर था, जो इस क्षेत्र में तेजी से विकास को दर्शाता है। विश्लेषकों का रुझान है कि यह उछाल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा योगदान स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का रहा है। अकेले स्मार्टफोन एक्सपोर्ट 2023-24 के 15.57 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 24.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे यह पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। यूनाइटेड स्टेट्स भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा बाजार बना अकेला, जहां कुल एक्सपोर्ट का 44 प्रतिशत गया। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और इटली जैसे देशों में भी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती पकड़, नए क्षेत्रों में विस्तार रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी अमेरिका 14.70 अरब डॉलर के साथ भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना, जबकि यूरोप 11.45 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ईएससी के डायरेक्टर वीर सागर ने बताया कि ‘इंडिया टेक’ पहल के तहत भारतीय कंपनियां अब अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, सीआईएस, आसियान और सार्क जैसे उभरे हुए बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही हैं, साथ ही विकसित बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। वहीं, कार्यकारी निदेशक गुरमीत सिंह के अनुसार, टेलीकॉम उपकरण-खासतौर पर स्मार्टफोन-इस विकास के प्रमुख चालक बने हुए हैं। क्षेत्रीय स्तर पर भी भारत का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। रूस और सीआईएस देशों को निर्यात तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 1.10 अरब डॉलर हो गया, जबकि मध्य पूर्व का योगदान 5.20 अरब डॉलर रहा। वहीं, जापान और दक्षिण कोरिया को निर्यात में 48.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 1.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया। राज्यों की भूमिका बढ़ेगी, निर्माण का फैलाव राज्यवार आंकड़ों में तमिलनाडु 15 अरब डॉलर के निर्यात के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली का स्थान रहा। यह खुलता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब पारंपरिक केंद्रों से आगे बढ़कर देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रही है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत न सिर्फ उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक उपलब्धता चेन में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज करा रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास का बड़ा इंजन बन सकता है।
CRUDE OIL : भारत-यूएई ऊर्जा कनेक्शन मजबूत: ‘जग लाडकी’ टैंकर ने मुंद्रा पोर्ट पर किया प्रवेश

CRUDE OIL : नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बढ़ाने देने वाली एक बड़ी घटना बुधवार को देश पहुंची। भारतीय ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर जग लड़की से लंबी समुद्री यात्रा तय कर मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित रूप से डॉक कर गया। यह पोर्ट अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन द्वारा संचालित है और देश के सबसे व्यस्त व आधुनिक बंदरगाहों में जाता है। इस टैंकर में लगभग 80,886 पिस्टन टन कच्चा तेल लादा हुआ है, जिसे फुजैराह पोर्ट से लोड किया गया था। 274 मीटर से अधिक लंबा और 50 मीटर तक फैला यह विशाल पोत भारत की ऊर्जा इकाइयों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। फुजैराह पोर्ट की खासियत यह है कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है—वही संरा समुद्री मार्ग जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में फुजैराह से आपूर्ति भारत के लिए गेमप्ले रूप से अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। इस पृष्ठभूमि में ‘जग लड़की’ की डिलीवरी न सिर्फ एक नियमित आपूर्ति है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम भी है। एलपीजी शिपमेंट भी पहुंचे, गुजरात बना ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र मुंद्रा पोर्ट पर इस टैंकर का आगमन यह भी खुलता है कि भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात को संभालने में सक्षम हो रहा है। यह खेप एक प्रमुख रिफाइनरी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो क्षेत्र में आपूर्ति बाधाओं के बीच अपने संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए ऐसे शिपमेंट पर निर्भर करती है। बंदरगाह प्रबंधन ने टैंकर को सुरक्षित रूप से लंगर डालने और समुद्री समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पहले भी ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के लिए एलपीजी से लदे जहाज शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंच चुके हैं। ‘शिवालिक’ ने मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया था, जबकि ‘नंदा देवी’ वडिनार पोर्ट पर पहुंचा, जो दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (पूर्व कांडला पोर्ट) का हिस्सा है। इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर करीब 92,700 टन एलपीजी थी, जिससे देश की गैस आपूर्ति को भी बढ़ोतरी मिली है। कुल मिलाकर, गुजरात के बंदरगाह-खासतौर पर मुंद्रा और वडीनार—भारत के ऊर्जा आयात के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इस तरह के ग्लेशियर देश की ऊर्जा इकाइयों को सुरक्षित रखने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम साबित हो रहे हैं।
स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का फॉर्मूला: SIP से कैसे करें आसान और सुरक्षित निवेश

नई दिल्ली। आज के दौर में समझदारी से निवेश करना बहुत जरूरी हो गया है और ऐसे में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आम युवाओं के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनता है। SIP के जरिए आप म्यूचुअल फंड में एक तय रकम रेगुलर अंतराल-जैसे हर महीने-निवेश कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप सिर्फ 500 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं और समय के साथ ‘कंपाउंडिंग’ यानी चक्रवृद्धि का फायदा बढ़कर बड़ा फंड बना सकते हैं। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो एकमुश्त बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, लेकिन धीरे-धीरे संपत्ति बनाना चाहते हैं। कैसे काम करता है SIP: छोटे निवेश से बड़ा फायदाSIP की ताकत ‘रुपये कॉस्ट एवरेजिंग’ में छिपी है। जब बाजार गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार ऊपर होता है तो कम यूनिट्स—इससे आपकी औसत लागत संतुलित रहती है। साथ ही, इसमें प्रोफेशनल फंड मैनेजर आपके पैसे को रिसर्च और मार्केट एनालिसिस के आधार पर निवेश करते हैं, जिससे रिस्क कंट्रोल्ड रहता है। SIP निवेश में अनुशासन भी लाता है, क्योंकि इसमें तय समय पर निवेश करना होता है, जिससे ‘मार्केट टाइमिंग’ का दबाव कम हो जाता है। SIP की खासियतें: फीस और कंट्रोल दोनोंSIP का एक बड़ा फायदा इसका लचीला होना है। आप फीस तो निवेश राशि बढ़ा सकते हैं, घटा सकते हैं या कुछ समय के लिए रोक भी सकते हैं। इसमें कोई ऊपरी सीमा नहीं होती, यानी आपकी आय बढ़ाना, निवेश भी उतना बढ़ाया जा सकता है। यही कारण है कि यह नौकरीपेशा और छोटे निवेशक दोनों के लिए उपयुक्त माना जाता है। जल्दी शुरू करने का फायदा: कंपाउंडिंग का जादूSIP में सबसे बड़ा फायदा समय का होता है। छोड़कर जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र से हर महीने 10,000 रुपये निवेश करता है, तो 60 साल तक वह करीब 3 करोड़ रुपये का फंड बना सकता है। वहीं, अगर वही निवेश 40 साल की उम्र से शुरू किया जाए, तो यह रकम लगभग 90 लाख रुपये ही रह जाती है। यानी देरी करना आपके रिटर्न को काफी कम कर सकता है। SIP के प्रकार: ज़रूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनेंSIP के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें आप अपनी ज़रूरत के अनुसार चुन सकते हैं- फिक्स्ड SIP: हर महीने तय राशि का निवेश फ्लेक्सिबल SIP: आय के अनुसार राशि बदलने की सुविधा स्टेप-अप SIP: हर साल निवेश बढ़ाने का विकल्प परपेचुअल SIP: बिना समय सीमा के निवेश ट्रिगर SIP: बाजार के स्तर के अनुसार निवेश वैल्यू एवरेजिंग प्लान (VIP): लक्ष्य आधारित निवेश रणनीति निवेश से पहले क्या ध्यान रखेंSIP शुरू करने से पहले अपना फाइनेंशियल लक्ष्य तय करना जरूरी है-जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट। साथ ही अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझें और उसी के अनुसार फंड चुनें। निवेश की अवधि लंबी रखें, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो और कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिले। SIP शुरू करना भी बहुत आसान है-सही म्यूचुअल फंड चुनें, KYC पूरा करें, निवेश राशि और अवधि तय करें, और आप ऑनलाइन या ऑफलाइन आसानी से शुरुआत कर सकते हैं।
फरवरी में कमोडिटी फंड्स में बड़ी गिरावट, निवेश घटकर ₹45,708 करोड़

नई दिल्ली। फरवरी 2026 में सेंसेक्स का रुझान कमोडिटी फंड से अचानक घटता नजर आया, जिससे इस एसेट क्लास में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैल्यूमेट्रिक्स कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कुल सेंसेक्स निवेश 45,708 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद इस सेक्टर ने इंडेक्स आधार पर 80.3 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है, जो इसकी स्थिर क्षमता को बरकरार रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में तेजी का धीमा पड़ना रही। सोना और चांदी दोनों में फरवरी के दौरान कमजोरी देखी गई, जिसके चलते सेंसेक्स ने इस गिरावट से दूरी बना ली। जनवरी में जहां सेंसेक्स सेक्टर में 51,483 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, वहीं फरवरी में यह सिर्फ 5,774 करोड़ रुपये रह गया-यानी करीब 89 प्रतिशत की गिरावट। यह बदलाव दिखाता है कि निवेशक तेजी से के बाद मुनाफेवसूली की रणनीति अपना रहे हैं। इक्विटी में स्थिरता, मिड-स्मॉल कैप में ‘डिप बाइंग’ का ट्रेंडकुल नेट एसेट फ्लो में भी बड़ी गिरावट आई है। जनवरी के 1,64,277 करोड़ रुपये के मुकाबले फरवरी में यह 73,842 करोड़ रुपये रह गया। मनी मार्केट में भी ठंडापन देखने को मिला, जहां निवेश 45 प्रतिशत गिरकर 42,970 करोड़ रुपये पर आ गया। वहीं, फिक्स्ड इनकम से लगातार पैसा निकल रहा, हालांकि आउटफ्लो में हल्की कमी आई और यह 16,919 करोड़ रुपये रहा। इक्विटी उगाने में गिरावट लेटेस्ट लिमिटेड रही। निवेश 52,110 करोड़ रुपये से बढ़कर 42,017 करोड़ रुपये रहा, लेकिन बाजार में स्थिरता बनी रही। बदले पर मिड कैप और स्मॉल कैप रिकवरी में निवेश बढ़ाया है, जो यह संकेत देता है कि निवेशक गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं। मिड कैप निवेश 3,297 करोड़ से बढ़कर 3,739 करोड़ रुपये और स्मॉल कैप 2,536 करोड़ से बढ़कर 3,055 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, लार्ज कैप में थोड़ी गिरावट के बावजूद यह निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। इसके अलावा, फैक्टर फंड में भी दिलचस्प तेजी से देखने को मिली। निवेश 3,116 करोड़ से बढ़कर 4,495 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें ‘क्वालिटी’ कैटेगरी ने सबसे ज्यादा आकर्षण हासिल किया। विश्लेषकों के अनुसार, एक नए एनएफओ (न्यू फंड ऑफर) लॉन्च ने इस ऊंचाई में निवेश को बढ़ावा दिया है। कुल मिलाकर, फरवरी का महीना निवेश के लास से संतुलन का रहा, जहां जनवरी की असामान्य तेजी के बाद बाजार सामान्य होता दिखा। कमोडिटी में गिरावट, इक्विटी में स्थिरता और मिड-स्मॉल कैप में बढ़ती ब्याज यह संकेत देती है कि निवेशक अब ज्यादा सोच-समझकर और इक्विटी तरीकों से निवेश कर रहे हैं।
बड़े पर्दे की चमक के बजाय ओटीटी की गहराई को चुना इन 6 स्टार किड्स ने, किसी को मिली सराहना तो कोई निशाने पर रहा

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के गलियारों में एक समय था जब किसी भी ‘स्टार किड’ का डेब्यू किसी बड़े बैनर की भव्य फिल्म और थिएटर की तालियों की गड़गड़ाहट के साथ होता था। लेकिन वक्त के साथ मनोरंजन की दुनिया के समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। अब नामी कलाकारों के बच्चे सिल्वर स्क्रीन की चमक-धमक का इंतजार करने के बजाय सीधे ओटीटी OTTप्लेटफॉर्म्स, विशेषकर ‘नेटफ्लिक्स’Netflixके जरिए अपने करियर की शुरुआत करने से नहीं कतरा रहे हैं। डिजिटल डेब्यू का यह नया चलन न केवल दर्शकों के लिए नया अनुभव है, बल्कि इन युवा कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा साबित करने का एक चुनौतीपूर्ण मंच भी बन गया है। इस सूची में सबसे चर्चित नाम शाहरुख खान की लाड़ली सुहाना खान का है। सुहाना ने जोया अख्तर की फिल्म ‘द आर्चीज’ से नेटफ्लिक्स पर अपना धमाकेदार डेब्यू किया। हालांकि इस फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, लेकिन सुहाना की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। अब वह जल्द ही बड़े पर्दे पर फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं। इसी फिल्मद आर्चीजसे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा और श्रीदेवी की छोटी बेटी खुशी कपूर ने भी कदम रखा। अगस्त्य को उनके सहज अभिनय के लिए काफी पसंद किया गया, जिसके बाद उन्होंने फिल्म ‘इक्का’ से अपना थिएटर डेब्यू भी तय कर लिया। वहीं खुशी कपूर को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला, जिसके बाद उनकी पहली थिएटर फिल्म ‘लवयापा’ चर्चा में आई। पटौदी खानदान के चश्म-ओ-चिराग इब्राहिम अली खान ने भी पारंपरिक रास्तों को छोड़कर नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘नादानियां’ को अपने डेब्यू के लिए चुना। इस फिल्म में वे खुशी कपूर के साथ मुख्य भूमिका में नजर आए। दूसरी ओर, आमिर खान के बेटे जुनैद खान ने फिल्म ‘महाराज’ के जरिए यह साबित कर दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं। सीधे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई इस फिल्म में जुनैद के संजीदा अभिनय की काफी प्रशंसा हुई। अब जुनैद अपनी अगली फिल्म ‘एक दिन’ में साई पल्लवी के साथ नजर आएंगे, जिसे खुद आमिर खान प्रोड्यूस कर रहे हैं। इन सब के बीच आर्यन खान ने एक अलग रास्ता चुना। स्टार किड होने के नाते जहां लोग उनके एक्टिंग डेब्यू का इंतजार कर रहे थे, वहीं आर्यन ने कैमरे के पीछे रहकर ‘द बैट्स ऑफ बॉलीवुड’ के जरिए बतौर डायरेक्टर अपनी पारी शुरू की। कुल मिलाकर, ओटीटी अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बॉलीवुड की नई पीढ़ी के लिए एक ऐसा प्रवेश द्वार बन गया है जहां सफलता और विफलता का फैसला चंद घंटों में हो जाता है। इन सितारों ने डिजिटल दुनिया को चुनकर यह साफ कर दिया है कि उनके लिए माध्यम से ज्यादा महत्वपूर्ण ‘कंटेंट’ है।
भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था से बढ़ रहे रोजगार के अवसर, रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ोतरी का असर अब रोजगार के आंकड़ों में भी साफ दिखने लगा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में देश की बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत रह गई है, जो इस बात का संकेत है कि नौकरी के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि अब रोजगार सिर्फ बड़े शहरों या चुनिंदा सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी हो रहा है। भारत में यह बदलाव बताता है कि आर्थिक सुधार अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंस्ट्रक्शन, कंस्ट्रक्शन, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और कृषि जैसे प्रमुख सेक्टर में रोजगार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च और उद्योगों में बढ़ता विश्वास अब वास्तविक नौकरियों में बदल रहा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं ने कंस्ट्रक्शन सेक्टर को नई गति दी है। इसके साथ ही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के अवसरों का दायरा और विस्तृत हुआ है। टेक्नोलॉजी, प्रदूषण और ग्रामीण भारत में नई बढ़ोतरीदेश में डिजिटल क्रांति और टेक्नोलॉजी सेक्टर के विस्तार ने युवाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं। सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से नौकरियां बढ़ रही हैं। इसके साथ ही भारत का उभरता प्रदूषण इकोसिस्टम-खासतौर पर फिनटेक, ई-कॉमर्स और ग्रीन एनर्जी-युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी योजनाएं युवाओं को नई कौशल देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते रोजगार से यह संकेत मिलता है कि विकास का लाभ अब देश के हर हिस्से तक पहुंच रहा है। इससे लोगों की आय में स्थिरता आ रही है और बाजार में मांग भी बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था को और मजबूत करती है। साथ ही, महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में भी सुधार देखा जा रहा है। अब अधिक महिलाएं हेल्थकेयर, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और डिजिटल सेवाओं में सक्रिय हो रही हैं, जिससे रोजगार का ढांचा अधिक समावेशी बन रहा है। डिजिटल क्रांति के विस्तार ने वर्क फ्रॉम होम, फ्रीलांसिंग और पार्ट-टाइम जॉब जैसे नए विकल्प भी सामने लाए हैं, जिससे पहले बाहर रह गए निकायों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था न केवल तेजी से बढ़ रही है, बल्कि अधिक समावेशी और टिकाऊ भी बन रही है।