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कर्नाटक कांग्रेस में 30 विधायकों का दिल्ली दौरा, कैबिनेट फेरबदल की मांग तेज…

नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है, जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर पार्टी के भीतर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक कांग्रेस के लगभग 30 वरिष्ठ विधायकों का एक समूह दिल्ली पहुंच चुका है, जहां वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की तैयारी में हैं। इन विधायकों का उद्देश्य राज्य मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की मांग को मजबूती से रखना है। उनका कहना है कि सरकार को बने ढाई से तीन वर्ष हो चुके हैं और अब प्रशासन में नए चेहरों को अवसर देना आवश्यक है, ताकि सरकार में नई ऊर्जा और गति लाई जा सके। जानकारी के मुताबिक, यह असंतोष अचानक नहीं उभरा है, बल्कि लंबे समय से पार्टी के भीतर चल रही बैठकों और असंतोषपूर्ण चर्चाओं का परिणाम है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और उपचुनावों के बाद विधायकों के एक वर्ग में यह धारणा मजबूत हुई है कि संगठन और सरकार में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए हैं। विधायकों का कहना है कि कुछ मंत्री लंबे समय से अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन और कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उनका तर्क है कि अनुभवी और नए चेहरों को शामिल करने से सरकार की कार्यप्रणाली और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता और मजबूत होगी। इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट फेरबदल की प्रक्रिया पहले से चल रही है और इसमें देरी का कारण विभिन्न राज्यों में चुनावी व्यस्तता और बजट सत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री पद की इच्छा रखने वाले विधायकों का दिल्ली जाना स्वाभाविक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर सभी विषयों पर चर्चा जारी है और समय आने पर उचित निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस आगामी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करेगी। इस घटनाक्रम के बीच अब सभी की नजरें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या शीर्ष नेतृत्व विधायकों की मांग के अनुरूप कैबिनेट में बड़ा फेरबदल करता है या मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का निर्णय लिया जाता है। कर्नाटक कांग्रेस में यह स्थिति एक बार फिर आंतरिक असंतुलन और नेतृत्व की चुनौती को उजागर कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक हलचल की संभावना बनी हुई है।

ब्रेकफास्ट में आप भी कर रहे हैं ये आम गलतियां? अभी सुधारें वरना सेहत हो सकती है खराब

नई दिल्ली। सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पूरे दिन की एक्टिविटी, फोकस और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह का संतुलित नाश्ता शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल और फाइबर देता है, जिससे थकान कम होती है और एनर्जी बनी रहती है। गलत नाश्ता बन सकता है सेहत के लिए खतराविशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग सुबह जल्दबाजी में गलत खानपान कर लेते हैं, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है। अधिक चीनी, नमक और फैट वाला नाश्ता धीरे-धीरे कई बीमारियों को जन्म दे सकता है। मुख्य गलतियां- चाय में ज्यादा चीनी या सिर्फ चाय-कॉफी लेकर नाश्ता छोड़ देनाबिस्किट, केक और मिठाई का सेवनसमोसा, कचौड़ी, पकौड़े जैसे तले-भुने खाद्य पदार्थचिप्स, नमकीन और अचार जैसे ज्यादा नमक वाले स्नैक्सये आदतें आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। क्या होना चाहिए सही नाश्ता?नेशनल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह का नाश्ता हल्का लेकिन पौष्टिक होना चाहिए, जिसमें संतुलित पोषण हो। अच्छे विकल्पदलिया, ओट्स और सूजी का हल्का हलवाफल जैसे सेब, केला, पपीता, संतरा और मौसमी फलअंकुरित अनाज (मूंग, चना, मेथी स्प्राउट्स)दही या फ्रूट योगर्टपोहा, कम तेल वाली सब्जी के साथ रोटीड्राई फ्रूट्स (सीमित मात्रा में) विशेषज्ञों की सलाहडॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सुबह जल्दी उठकर घर का बना ताजा नाश्ता करना सबसे बेहतर है। पैकेट फूड और जंक फूड से जितना बचा जाए उतना अच्छा है। सही नाश्ता न केवल शरीर को फिट रखता है, बल्कि मानसिक सक्रियता भी बढ़ाता है।

मुंबई इंडियंस के लिए बड़ा झटका? रोहित शर्मा की चोट पर टिकी टीम की निगाहें

नई दिल्ली। मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल 2026 का सफर पहले ही मुश्किलों भरा रहा है, और अब टीम के लिए एक और बड़ा झटका सामने आ सकता है। टीम के अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा की हैमस्ट्रिंग इंजरी ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी चोट की गंभीरता जानने के लिए स्कैन कराया जाएगा, जिसके बाद ही यह तय होगा कि वह अगले मैच में खेल पाएंगे या नहीं। RCB के खिलाफ बीच में छोड़नी पड़ी पारीरविवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में रोहित शर्मा ने 13 गेंदों पर 19 रन बनाए थे, जिसमें 2 चौके और 1 छक्का शामिल था। लेकिन पारी के दौरान पावरप्ले में उन्हें हैमस्ट्रिंग में खिंचाव महसूस हुआ। फिजियो के इलाज के बाद भी वे पूरी तरह फिट नहीं हो पाए और अंततः रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। स्कैन के बाद तय होगा आगे का फैसलामैच के बाद टीम के स्टाफ ने बताया कि रोहित की चोट को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है। स्कैन रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि वह 16 अप्रैल को होने वाले अगले मैच में खेल पाएंगे या नहीं। फिलहाल टीम मैनेजमेंट सतर्क है और किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। इस सीजन में रोहित का प्रदर्शनआईपीएल 2026 में रोहित शर्मा ने अब तक 4 मैचों में 137 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल है। आरसीबी के खिलाफ मैच में उन्होंने अपने आईपीएल करियर में मुंबई इंडियंस के लिए 6000 रन भी पूरे किए। मुंबई के लिए क्यों अहम हैं रोहित?रोहित शर्मा पिछले 15 सालों से मुंबई इंडियंस का हिस्सा हैं और उनकी कप्तानी में टीम ने 5 आईपीएल खिताब जीते हैं। ऐसे में उनकी फिटनेस टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। टीम पर असरपहले से ही लगातार तीन हार झेल रही मुंबई इंडियंस के लिए यह चोट बड़ा झटका साबित हो सकती है। अगर रोहित अगले मैच से बाहर रहते हैं तो टीम की बल्लेबाजी और अनुभव दोनों पर असर पड़ेगा।

पंजाब विधानसभा में बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पारित, सख्त सजा का प्रावधान लागू

नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा में बेअदबी पर सख्त कानून पारित, दोषियों के लिए आजीवन कारावास तक की कठोर सजा का प्रावधान लागू पंजाब में धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा और बेअदबी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा के विशेष सत्र में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन बिल 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस कानून के लागू होने के बाद अब बेअदबी जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम समाज में शांति, आस्था और धार्मिक सम्मान की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक था। इस बिल को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में पेश किया और इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में लंबे समय से बेअदबी की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं और अब इस नए कानून के माध्यम से ऐसी घटनाओं पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय को लक्षित करना नहीं बल्कि सभी नागरिकों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना है। नए प्रावधानों के अनुसार अब बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर कठोर सजा के साथ साथ आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा गया है। इसमें अधिकतम पच्चीस लाख रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा शामिल है। इसके अलावा जांच प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है ताकि मामलों की तेजी से जांच हो सके और न्याय में देरी न हो। पहले इन मामलों की जांच सामान्य स्तर के अधिकारियों द्वारा की जाती थी लेकिन अब इसे उच्च स्तर की निगरानी में लाने का निर्णय लिया गया है ताकि जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से न केवल दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में धार्मिक ग्रंथों और आस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इस कानून का उद्देश्य इसी भावना को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि ऐसी घटनाओं को रोका जाए और जरूरत पड़ने पर कानूनी ढांचे को और मजबूत किया जाएगा। विधानसभा सत्र में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने इसे समय की आवश्यकता बताया और कहा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में कठोर कानून होना जरूरी है। सरकार का कहना है कि इस नए कानून के बाद न केवल कानूनी कार्रवाई तेज होगी बल्कि लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी और समाज में जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी। इस निर्णय के साथ पंजाब सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि धार्मिक स्थलों और पवित्र ग्रंथों के प्रति किसी भी प्रकार की अनादरपूर्ण गतिविधि को अब किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कानून राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

महिला क्रिकेट में ऐतिहासिक कदम: टी20 वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा प्राइज पूल घोषित

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने आगामी ICC विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए प्राइज मनी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस बार टूर्नामेंट में कुल इनाम राशि 87.64 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 730 करोड़ रुपये से अधिक) रखी गई है, जो पिछले संस्करण की तुलना में करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है। ICC का यह कदम महिला क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। विजेता को मिलेगा रिकॉर्ड 2.34 मिलियन डॉलरटूर्नामेंट की सबसे बड़ी इनामी राशि इस बार विजेता टीम को दी जाएगी। चैंपियन बनने वाली टीम को 2.34 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 19.5 करोड़ रुपये) मिलेंगे। वहीं- उपविजेता को: 1.17 मिलियन डॉलरसेमीफाइनल हारने वाली टीमों को: 6.75 लाख डॉलरहर ग्रुप मैच जीतने पर: 31,154 डॉलरइसके अलावा सभी 12 टीमों को कम से कम 2,47,500 डॉलर की गारंटीड राशि मिलेगी। पहली बार 12 टीमों का बड़ा टूर्नामेंटइस बार टूर्नामेंट का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इसे पहली बार 10 से बढ़ाकर 12 टीमों का किया गया है। इससे प्रतियोगिता और भी रोमांचक और प्रतिस्पर्धी हो जाएगी। भाग लेने वाली टीमें होंगी-भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, आयरलैंड, नीदरलैंड्स और स्कॉटलैंड। महिला क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ी इनामी राशिICC के मुताबिक यह अब तक की सबसे बड़ी महिला टी20 प्रतियोगिता प्राइज मनी है। इससे पहले यूएई में हुए पिछले संस्करण में कुल इनाम राशि लगभग 79.58 लाख डॉलर थी। इस बार की बढ़ोतरी से साफ है कि महिला क्रिकेट को भी अब पुरुष क्रिकेट के बराबर लेवल पर लाने की कोशिश तेज हो गई है। इंग्लैंड में होगा आयोजन, 7 वेन्यू पर मुकाबलेICC विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन 12 जून 2026 से इंग्लैंड में शुरू होगा। टूर्नामेंट 24 दिनों तक चलेगा और कुल 33 मैच खेले जाएंगे। मैच 7 अलग-अलग वेन्यू पर होंगे, जबकि उद्घाटन मुकाबला इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच एजबेस्टन (बर्मिंघम) में खेला जाएगा। ICC का बयान: महिला क्रिकेट में तेज़ी से बढ़ रहा निवेशICC के CEO ने कहा कि महिला क्रिकेट लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह बढ़ी हुई प्राइज मनी उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि अब महिला खिलाड़ियों को बड़े मंच और बेहतर अवसर मिल रहे हैं। टूर्नामेंट डायरेक्टर ने भी इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह महिला क्रिकेट के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय इवेंट साबित हो सकता है। ICC का यह फैसला महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है। बढ़ती प्राइज मनी और टीमों की संख्या से न सिर्फ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि महिला क्रिकेट की ग्लोबल पहचान भी और मजबूत होगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच कूटनीतिक खामोशी: ऑस्ट्रेलिया ने कहा, अमेरिका से नहीं हुई कोई बातचीत

नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका की कथित नाकाबंदी योजना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी पोर्ट्स से जुड़े समुद्री मार्गों को ब्लॉक करने की घोषणा के बाद यह मुद्दा वैश्विक चर्चा में आ गया है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने साफ कहा है कि उन्हें इस योजना में किसी भी तरह की भागीदारी या सहायता के लिए अमेरिका की ओर से कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला है। ऑस्ट्रेलिया का स्पष्ट रुखप्रधानमंत्री अल्बनीज ने चैनल नाइन से बातचीत में कहा कि अमेरिका ने यह कार्रवाई एकतरफा रूप से की है और ऑस्ट्रेलिया से इसमें शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कोई आधिकारिक अपील नहीं आती, तब तक ऑस्ट्रेलिया इस तरह की किसी भी सैन्य या रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा। अमेरिका का दावा और कार्रवाई की घोषणाअमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना सोमवार से होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी पोर्ट्स से जुड़े जहाजों को रोकने की कार्रवाई शुरू करेगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की जा रही है और इसमें सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से नजर रखी जाएगी, हालांकि गैर-ईरानी पोर्ट्स के जहाजों को रोका नहीं जाएगा। वैश्विक व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्गहोर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की नाकाबंदी से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ाईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही परमाणु वार्ता पहले ही कई बार असफल हो चुकी है। हालिया घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका भी तेज हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका की कथित नाकाबंदी योजना और ऑस्ट्रेलिया की दूरी ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में ठगी के दो अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर साइबर फ्रॉड और अंधविश्वास से जुड़ी धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर किया है। एक ओर जहां ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर एक कॉलेज छात्रा से एक लाख रुपये की ठगी की गई, वहीं दूसरी ओर साधु के भेष में आए दो ठगों ने 5 करोड़ रुपये दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 28 हजार रुपये ऐंठ लिए। पहले मामले में घमापुर क्षेत्र की एक कॉलेज छात्रा को टेलीग्राम पर संपर्क कर ऑनलाइन जॉब और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर फंसाया गया। उसे शुरुआत में छोटे-छोटे काम देकर भरोसा दिलाया गया और बाद में निवेश तथा प्रोसेसिंग के नाम पर अलग-अलग चरणों में पैसे जमा करने के लिए कहा गया। झांसे में आकर छात्रा ने धीरे-धीरे करीब एक लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब न तो उसे कोई नौकरी मिली और न ही कोई कमाई वापस मिली, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। दूसरे मामले में बरगी थाना क्षेत्र में दो लोगों ने साधु का भेष धारण कर एक युवक को अपने जाल में फंसा लिया। पहले तो उन्होंने मदद के नाम पर पैसे मांगे, फिर हाथ देखकर भविष्य में 5 करोड़ रुपये मिलने का लालच दिया। इसके बाद पूजा-पाठ और कथित चमत्कार के नाम पर युवक को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग तरीकों से युवक से कुल 28 हजार रुपये वसूल लिए। कुछ देर बाद जब युवक को शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को भ्रमित करने के लिए अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाते थे और लालच व अंधविश्वास का सहारा लेकर ठगी करते थे। दोनों मामलों में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

भारत-यूएई संबंधों में नई मजबूती: जयशंकर के दौरे में व्यापक साझेदारी पर रहा जोर

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दो दिवसीय आधिकारिक दौरा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस दौरे के दौरान उन्होंने यूएई के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं और दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। दौरे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह यात्रा भारत-यूएई संबंधों को नई दिशा देने वाली रही। उच्च स्तरीय नेतृत्व से अहम मुलाकातेंअबू धाबी में विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश भी दिया। इस बैठक में ऊर्जा सहयोग, व्यापार विस्तार और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा बैठक में दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी उपस्थित रहे, जिससे यह मुलाकात और अधिक महत्वपूर्ण बन गई। विदेश मंत्री स्तर की अलग वार्ताडॉ. जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ भी अलग से बैठक की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, क्षेत्रीय स्थिरता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और संकट के समय भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। भारतीय समुदाय से संवादयूएई पहुंचने पर विदेश मंत्री ने वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात की। उन्होंने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच उनकी सुरक्षा और भलाई से जुड़े मुद्दों को सुना और सरकार द्वारा उनके समर्थन के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। भारतीय समुदाय ने भी भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की और दोनों देशों के मजबूत संबंधों पर भरोसा जताया। ऊर्जा और व्यापार सहयोग पर फोकसयह दौरा भारत की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना और व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यूएई भारत के प्रमुख व्यापारिक और ऊर्जा साझेदारों में से एक है, और इस दौरे से दोनों देशों के संबंधों में और गहराई आने की उम्मीद है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह यूएई दौरा भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ है। ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हुई चर्चाओं ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाने की दिशा तय की है।

केवल तुलसी ही नहीं, उसकी मंजरी भी है अमृत समान, जानिए इसके जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ

नई दिल्ली। घर के आंगन में आसानी से मिलने वाली तुलसी सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अक्सर लोग इसकी पत्तियों का उपयोग करते हैं, लेकिन तुलसी की मंजरी (फूलों का छोटा गुच्छा) भी उतनी ही शक्तिशाली और लाभकारी होती है। आयुर्वेद के अनुसार, इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई तरह के संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं। इम्युनिटी बढ़ाने में बेहद असरदारतुलसी की मंजरी का नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल इंफेक्शन से बचाव में मदद करती है। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से शरीर को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। सर्दी-खांसी और सांस की समस्याओं में राहततुलसी मंजरी गले की खराश, बलगम और पुरानी खांसी में बेहद लाभकारी मानी जाती है। अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि यह श्वसन तंत्र को साफ और मजबूत बनाती है। पाचन तंत्र को रखे मजबूतयह गैस, अपच, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देती है। तुलसी मंजरी शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारती है और पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करती है। तनाव कम करने और नींद सुधारने में सहायकतुलसी की खुशबू और इसके प्राकृतिक गुण मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। यह दिमाग को शांत करती है और अच्छी नींद लाने में भी सहायक मानी जाती है। त्वचा और डिटॉक्स के लिए फायदेमंदतुलसी मंजरी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे खून साफ होता है। इसके सेवन से चेहरे पर निखार आता है और मुंहासे जैसी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। तुलसी मंजरी का सेवन कैसे करें?इसे कई आसान तरीकों से उपयोग किया जा सकता है- सुबह खाली पेट 4–5 मंजरियां चबाएंतुलसी पत्तियों के साथ इसकी चाय बनाकर पिएंशहद के साथ इसका रस लेंअदरक, काली मिर्च और लौंग के साथ काढ़ा बनाकर पिएंनिष्कर्ष तुलसी की मंजरी एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली घरेलू औषधि है, जो इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर तनाव कम करने और पाचन सुधारने तक कई लाभ देती है। सही तरीके से इसका सेवन करने पर यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक वरदान साबित हो सकती है।

पवन खेड़ा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट पहुंची असम सरकार, राजनीतिक विवाद ने लिया बड़ा रूप..

नई दिल्ली:   कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े एक कानूनी मामले को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। असम सरकार द्वारा उनकी अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस और सत्ताधारी पक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। मामले में असम सरकार का कहना है कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए हैदराबाद का रुख किया था, जबकि उनके पास ऐसा कोई स्पष्ट कारण नहीं था कि वे असम जाकर संबंधित अदालत में आवेदन नहीं कर सकते थे। इसी आधार पर राज्य सरकार ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें खेड़ा को राहत दी गई थी। सरकार का तर्क है कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है और मामले की सुनवाई उचित क्षेत्राधिकार में होनी चाहिए। इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री देश के सबसे भ्रष्ट नेताओं में से एक हैं और वे कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए राज्य की सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का शासन सबसे महत्वपूर्ण है और इन मूल्यों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पवन खेड़ा के साथ खड़ी है और किसी भी प्रकार के दबाव या भय से पीछे हटने वाली नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और अधिक तीव्र हो गई है। वहीं असम सरकार की याचिका में यह भी कहा गया है कि अग्रिम जमानत की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों की कानूनी जांच जरूरी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के मामलों में सही न्यायिक क्षेत्राधिकार का पालन होना चाहिए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। इस मामले में पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को सीमित अवधि की ट्रांजिट अग्रिम जमानत प्रदान की थी, जिसके बाद उन्हें अस्थायी राहत मिली थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सक्षम अदालत तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने सीमित अवधि के लिए जमानत मंजूर की थी। हालांकि अब असम सरकार ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर मामले को एक नई कानूनी दिशा दे दी है। यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बन गया है, जिसमें एक ओर संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या हो रही है तो दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।