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नासा ने रच दिया इतिहास, चांद से धरती पर आर्टेमिस-2 की 'फायरिंग' लैंडिंग

वाशिंगटन। अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने तुरंत कैप्सूल को सुरक्षित घेरे में ले लिया। यान से बाहर निकलते समय चारों अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरों पर जीत की मुस्कान थी, जो 10 दिनों की इस उच्च-जोखिम वाली यात्रा की सफलता की कहानी बयां कर रही थी। करीब 50 से अधिक वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इंसान एक बार फिर चंद्रमा के करीब जाकर सुरक्षित वापस लौट आया है। नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन पृथ्वी से 4,06,778 किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी तय कर वापस लौटे हैं। यह अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा है। ओरियन अंतरिक्ष यान की वापसी बेहद रोमांचक और दिल दहला देने वाली थी। जब यह कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ, तो इसकी गति 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक थी। वायुमंडल के घर्षण के कारण यान के चारों ओर आग का गोला बन गया और तापमान चरम पर पहुंच गया। भीषण गर्मी और दबाव को सहते हुए ओरियन के हीट शील्ड ने अपना काम किया। कुछ ही देर में प्रशांत महासागर के ऊपर विशाल पैराशूट खुले और यान ने पानी में सुरक्षित गोता लगाया। अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने तुरंत कैप्सूल को सुरक्षित घेरे में ले लिया। यान से बाहर निकलते समय चारों अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरों पर जीत की मुस्कान थी, जो 10 दिनों की इस उच्च-जोखिम वाली यात्रा की सफलता की कहानी बयां कर रही थी। क्या खास था इस मिशन में? आर्टेमिस II नासा के चंद्रमा पर फिर से पैर जमाने के महात्वाकांक्षी कार्यक्रम का दूसरा चरण है। इससे पहले आर्टेमिस I बिना किसी क्रू के गया था, लेकिन इस बार इंसानों ने चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाया। मिशन का मुख्य उद्देश्य गहरे अंतरिक्ष में लाइफ-सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और संचार प्रणालियों की क्षमता को जांचना था। अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह और क्षितिज से ऊपर उठती ‘अर्थराइज’ की अद्भुत तस्वीरें लीं, जो भविष्य के शोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस मिशन की सफलता ने आर्टेमिस III के लिए रास्ता साफ कर दिया है, जिसका लक्ष्य पांच दशकों के बाद पहली बार इंसानों को वास्तव में चंद्रमा की सतह पर उतारना है। भारत के लिए भी यह पल खास है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग लगातार बढ़ रहा है। आर्टेमिस II की सफलता भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी नए रास्ते खोल सकती है, क्योंकि भारत पहले ही आर्टेमिस समझौते का हिस्सा बन चुका है। मानवता के लिए एक नई सुबह नासा के अधिकारियों ने इसे मानवता के लिए एक विशाल छलांग बताया है। इस मिशन ने साबित कर दिया है कि ओरियन कैप्सूल और इसके सुरक्षा उपकरण गहरे अंतरिक्ष की चुनौतियों को झेलने में सक्षम हैं। अब दुनिया की निगाहें उस दिन पर टिकी हैं जब आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत पहली महिला और पहला अश्वेत व्यक्ति चंद्रमा की धूल पर अपने पदचिह्न छोड़ेगा। यह मिशन केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है; यह उस ‘डीप स्पेस’ आर्किटेक्चर की नींव है जो भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह (Mars) तक ले जाने का माद्दा रखती है।

सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी

लखनऊ। संदिग्ध आतंकी कनेक्शन की जांच में घिरे आकिब के खिलाफ अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। एटीएस की पड़ताल में सामने आया है कि वह चार बार सऊदी अरब जा चुका है और अगस्त 2025 में चौथी बार विदेश जाने के बाद से अब तक भारत नहीं लौटा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है, वहीं पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आई ट्रैवल हिस्ट्री के मुताबिक, आकिब का पासपोर्ट 9 अप्रैल 2018 को बना था। वह पहली बार 4 अगस्त 2019 को सऊदी अरब गया और 8 फरवरी 2022 को भारत लौटा। इसके बाद 8 अप्रैल 2022 को दोबारा सऊदी गया और 11 अप्रैल 2023 को वापस आया। तीसरी बार वह 20 जून 2023 को गया और 22 जुलाई 2025 को भारत लौटा। हालांकि, महज 10 दिन बाद ही 1 अगस्त 2025 को वह फिर सऊदी चला गया और तब से वहीं पर है। एटीएस ने उसकी पूरी यात्रा का ब्योरा खंगाल लिया है और अब उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आकिब के हिरासत में आने के बाद आतंकी मॉड्यूल और संभावित साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। वीडियो जारी कर दी सफाई, कहा—अगर गलत हूं तो गोली मार देना इधर, मामले में तीन दिन पहले मॉड्यूल से जुड़े उवैद और जलाल हैदर की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण और चर्चा में आया। इसी बीच आकिब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। वीडियो में उसने पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा करने वालों की इज्जत करता है। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने साथी को पुलिस के सामने सरेंडर कर सच्चाई बताने की सलाह दी थी। आकिब ने अपने ऊपर लगे आतंकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की, केवल गुस्से में अपशब्द कहे थे। वीडियो के अंत में उसने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपने ऊपर आतंकवादी का ठप्पा नहीं लगने दूंगा। अगर मैं गलत हूं, तो मेरे माथे पर गोली मार देना।” फिलहाल, एजेंसियां उसके ठिकाने और नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं।

आर्थिक स्थिरता और सामाजिक मान सम्मान की दृष्टि से गुरु का यह गोचर होगा अत्यंत प्रभावशाली।

नई दिल्ली:ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के सेनापति और ज्ञान के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है जिसका प्रभाव समस्त चर अचर जगत पर पड़ता है। जून 2026 में गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं जो ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली स्थिति मानी जाती है। कर्क राशि चंद्रमा की राशि है और यहाँ गुरु का आगमन होने से एक विशेष प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा जो समाज और व्यक्तिगत जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से प्रभावित करेगा। इस गोचर के प्रभाव से कई राशियों के जीवन में प्रेम धन और सम्मान के नए द्वार खुलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है क्योंकि कर्क राशि में गुरु अपनी पूर्ण शक्ति के साथ कार्य करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह परिवर्तन सुख और सुविधाओं में वृद्धि लाने वाला सिद्ध होगा। उनके पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा और लंबे समय से अटके हुए संपत्ति से जुड़े मामले सुलझ सकते हैं। इसके साथ ही कार्यक्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक दृष्टिकोण से यह समय उनके लिए संचय करने और नए निवेश करने के लिए अत्यंत अनुकूल रहने वाला है। सामाजिक रूप से भी उनकी सक्रियता बढ़ेगी जिससे उनके मान सम्मान में चार चांद लगेंगे और वे समाज में एक नई पहचान स्थापित करने में सफल रहेंगे। वृषभ राशि के लिए गुरु का यह गोचर उनके पराक्रम और संवाद कौशल में जबरदस्त सुधार लेकर आएगा। जो लोग लेखन शिक्षा या कला के क्षेत्र से जुड़े हैं उनके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं होगा क्योंकि उनकी रचनात्मकता अपने चरम पर होगी। आर्थिक लाभ के नए स्रोत विकसित होंगे और भाई बहनों के साथ संबंधों में मधुरता आएगी। प्रेम संबंधों के मामले में भी यह अवधि उत्साहजनक रहेगी और अविवाहित लोगों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। व्यावसायिक यात्राएं सुखद और लाभप्रद रहेंगी जिससे उनके करियर को एक नई दिशा प्राप्त होगी और वे अपनी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सक्षम होंगे। कर्क राशि के जातकों के लिए तो यह समय स्वयं को पुनः परिभाषित करने जैसा होगा क्योंकि गुरु उनकी अपनी ही राशि में गोचर करेंगे। स्वास्थ्य में सुधार के साथ साथ उनकी निर्णय लेने की क्षमता में अद्भुत स्पष्टता आएगी। उनके व्यक्तित्व में एक नया आकर्षण पैदा होगा जो लोगों को उनकी ओर आकर्षित करेगा। आर्थिक रूप से यह कालखंड उनके लिए अत्यंत समृद्ध रहने वाला है और उन्हें अचानक धन लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। शिक्षा और करियर में वे अपनी मेहनत के दम पर उच्च पदों को प्राप्त करेंगे और समाज में उनकी प्रतिष्ठा एक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित होगी। मकर राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर सातवें भाव को प्रभावित करेगा जिससे उनके वैवाहिक जीवन और व्यापारिक साझेदारी में स्थिरता आएगी। जो लोग साझेदारी में व्यवसाय कर रहे हैं उन्हें बड़े मुनाफे की उम्मीद रखनी चाहिए। समाज के प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेंगे जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होंगे। कानूनी विवादों में राहत मिलने की संभावना है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। यह गोचर उन्हें एक संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देगा जिससे वे अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के बीच सही तालमेल बिठा पाएंगे। कुल मिलाकर जून 2026 का यह ग्रह परिवर्तन ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक ऐसा संगम लेकर आ रहा है जो मानवता के लिए सकारात्मक और विकासोन्मुखी सिद्ध होगा।

होर्मुज के बाद लाल सागर में बढ़ा खतरा: हथियारबंद हमलावरों ने घेरा जहाज, टली बड़ी वारदात

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब समुद्री मार्गों पर भी गंभीर असर डालता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव की स्थिति के बीच अब लाल सागर में भी जहाजों पर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। हथियारबंद समूह ने जहाज को घेरा यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक, यमन के अल-हुदैदा तट से करीब 54 नॉटिकल मील दूर एक जहाज को 10-12 हथियारबंद लोगों ने घेर लिया। इनमें 4-5 हमलावर ऑटोमैटिक हथियारों से लैस थे। हमलावरों ने जहाज को रोकने का आदेश दिया, लेकिन कप्तान ने इंकार कर दिया। इसके बाद हमलावर जहाज के करीब आकर उस पर चढ़ने की कोशिश करने लगे। कप्तान की सूझबूझ से टला खतरा स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन जहाज के कप्तान ने तुरंत फ्लेयर दागकर खतरे का संकेत दिया। इसके बाद हमलावर पीछे हट गए और दक्षिण-पूर्व दिशा में भाग निकले। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन खतरे की गंभीरता साफ झलकती है। हूती विद्रोहियों पर शक इस हमले के पीछे हूती विद्रोही का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। अक्टूबर 2023 से ये विद्रोही लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग और व्यापार प्रभावित हुआ है। इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेज रही हैं, जिससे यात्रा 10-14 दिन लंबी हो रही है और लागत भी बढ़ रही है। होर्मुज में भी जारी तनातनी उधर ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स के जरिए चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी ‘गलत हरकत’ का कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान का दावा है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर उसकी पूरी निगरानी और नियंत्रण है। बढ़ता समुद्री संकट विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ता खतरा वैश्विक तेल सप्लाई और व्यापारिक मार्गों के लिए बड़ा संकट बन सकता है। यदि हालात नहीं संभले, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।

रजत पाटीदार और फिल साल्ट की आक्रामक पारियों ने मुंबई के गेंदबाजी आक्रमण को किया ध्वस्त।

नई दिल्ली। आईपीएल के रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुंबई इंडियंस को एकतरफा अंदाज में पराजित कर दिया। इस मुकाबले में बेंगलुरु के बल्लेबाजों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए शुरुआत से ही मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। राजत पाटीदार और फिल सॉल्ट की विस्फोटक बल्लेबाजी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और मुंबई के गेंदबाजों को पूरी तरह दबाव में ला दिया। दोनों बल्लेबाजों ने न केवल तेजी से रन बनाए बल्कि साझेदारी के जरिए टीम को एक मजबूत स्थिति में पहुंचाया, जिससे विपक्षी टीम के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल हो गया। मैच की शुरुआत में मुंबई इंडियंस ने गेंदबाजी का चयन किया, लेकिन उनका यह फैसला जल्द ही गलत साबित होने लगा। बेंगलुरु के बल्लेबाजों ने शुरुआती ओवरों से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और हर गेंदबाज पर दबाव बनाया। फिल सॉल्ट ने अपनी स्वाभाविक शैली में तेज रन बनाते हुए मैदान के चारों ओर शॉट्स खेले, जबकि राजत पाटीदार ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। दोनों के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने टीम को एक विशाल स्कोर की दिशा में अग्रसर किया। मुंबई की ओर से गेंदबाजी में लय की कमी साफ नजर आई। प्रमुख गेंदबाज विकेट लेने में असफल रहे और रन रोकने में भी नाकाम साबित हुए। फील्डिंग में भी कुछ गलतियां देखने को मिलीं, जिसने स्थिति को और कठिन बना दिया। बेंगलुरु के बल्लेबाजों ने इन कमजोरियों का पूरा फायदा उठाया और लगातार रन गति को ऊंचा बनाए रखा। पारी के अंत तक टीम ने एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा कर दिया, जो मुंबई के लिए पीछा करना आसान नहीं था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से टीम दबाव में आ गई और बल्लेबाजों को रन बनाने में संघर्ष करना पड़ा। मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने पारी को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन रन रेट लगातार बढ़ता गया और आवश्यक गति हासिल करना मुश्किल हो गया। बेंगलुरु के गेंदबाजों ने अनुशासित गेंदबाजी करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और नियमित अंतराल पर विकेट लेते रहे। मैच के दौरान बेंगलुरु की रणनीति और निष्पादन दोनों ही स्तर पर बेहतर नजर आए। बल्लेबाजी में आक्रामकता और गेंदबाजी में संयम ने टीम को एक संतुलित प्रदर्शन दिया। वहीं मुंबई इंडियंस की टीम इस मुकाबले में हर विभाग में पिछड़ती नजर आई। यह जीत बेंगलुरु के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हुई, जबकि मुंबई को अपनी कमजोरियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत महसूस होगी।

शिवपुरी के नरवर किले में खजाने की खोज का खेल, पुलिस को मिले औजार और कंबल

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला के ऐतिहासिक नरवर किला में एक बार फिर दफीनाखोरों की सक्रियता ने प्रशासन को चौंका दिया है। किले में स्थित मां पसर देवी मंदिर के पीछे खजाने की तलाश में करीब 20 फीट गहरी सुरंग खोदे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खास बात यह है कि सुरंग को बड़ी चालाकी से झाड़ियों से ढककर छिपाने की कोशिश की गई थी, ताकि किसी को इसकी भनक न लगे। सूचना मिलते ही नरवर पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। यहां से खुदाई में इस्तेमाल किए गए औजार, एरोसोल स्प्रे कैन और कंबल बरामद हुए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि दफीनाखोर कई दिनों से सुनियोजित तरीके से इस काम को अंजाम दे रहे थे। आस्था और अफवाहों के बीच पनपी खजाने की लालसास्थानीय लोगों के मुताबिक, मां पसर देवी मंदिर की एक विशेष मान्यता है कि यहां माता की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में विराजमान है और उसके नीचे प्राचीन खजाना छिपा हुआ है। इसी आस्था और अफवाह ने दफीनाखोरों को लालच में डाल दिया। माना जा रहा है कि खजाने तक पहुंचने के लिए ही मंदिर के पीछे सुरंग खोदी जा रही थी। दफीनाखोर रात के अंधेरे में खुदाई करते और सुबह होने से पहले सुरंग को झाड़ियों से ढक देते थे, जिससे लंबे समय तक यह गतिविधि छिपी रही। मौके से मिले कंबल और अन्य सामान इस बात के संकेत देते हैं कि आरोपी रातभर वहीं रुककर काम करते थे। यह पूरा घटनाक्रम न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं, पुलिस ने तेज की जांचगौरतलब है कि नरवर किला में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी खजाने की तलाश में अवैध खुदाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। हर बार प्रशासन कार्रवाई करता है, लेकिन फिर भी दफीनाखोर नई चाल के साथ सक्रिय हो जाते हैं। इस बार मिली सुरंग और बरामद सामग्री को पुलिस ने जब्त कर लिया है और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की जा रही है और संदिग्धों की पहचान के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रशासन ने किले की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक 8 पोषक खाद्य पदार्थ, गाजर के अलावा भी मिलते हैं कई प्राकृतिक विकल्प

नई दिल्ली:आज की जीवनशैली में आंखों पर पड़ने वाला दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के अधिक उपयोग के कारण आंखों में थकान, सूखापन, जलन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में आंखों की सेहत को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। आमतौर पर यह धारणा रही है कि आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए गाजर सबसे प्रभावी विकल्प है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि कई अन्य खाद्य पदार्थ भी आंखों को मजबूत बनाने और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शकरकंद को आंखों के लिए एक बेहद उपयोगी खाद्य पदार्थ माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन ए की प्रचुर मात्रा होती है। यह तत्व आंखों की सतह यानी कॉर्निया को स्वस्थ रखने में मदद करता है और दृष्टि क्षमता को बेहतर बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से आंखों की कार्यक्षमता लंबे समय तक संतुलित रह सकती है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियां आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। इनमें मौजूद ल्यूटिन और ज़ीएक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व रेटिना की सुरक्षा करते हैं और तेज रोशनी या स्क्रीन के हानिकारक प्रभाव से आंखों को बचाते हैं। ये तत्व उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दृष्टि संबंधी समस्याओं को भी कम करने में सहायक होते हैं। अंडे आंखों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माने जाते हैं। इनमें मौजूद तत्व आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और दृष्टि को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में अंडे का सेवन आंखों की सेहत को सपोर्ट कर सकता है। जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दालें, बीन्स और नट्स आंखों की कोशिकाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पोषक तत्व आंखों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने और उन्हें आंतरिक रूप से मजबूत करने में मदद करता है। इसी तरह बादाम भी विटामिन ई का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो आंखों को ऑक्सीडेटिव तनाव और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर मछली आंखों के सूखेपन को कम करने में सहायक होती है और उन्हें प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करती है। यह आंखों की सतह को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली समस्याओं को कम कर सकती है। पपीता विटामिन सी का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो आंखों के ऊतकों को मजबूती प्रदान करता है और उम्र के प्रभाव को धीमा करने में मदद करता है। इसके अलावा बीन्स और साबुत अनाज भी आंखों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। ये शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आंखों की समग्र सेहत को समर्थन देते हैं। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली आंखों की रोशनी को लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्याप्त नींद, स्क्रीन टाइम में नियंत्रण और नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना भी आंखों की सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है।

आशा भोसले के निधन और अंतिम संस्कार की खबर अफवाह, आधिकारिक पुष्टि नहीं

नई दिल्ली। भारतीय संगीत की दिग्गज गायिका Asha Bhosle को आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद देशभर में शोक की लहर है। अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कारAsha Bhosle के पार्थिव शरीर को मुंबई स्थित उनके आवास पर रखा गया है, जहां दोपहर 3 बजे तक अंतिम दर्शन किए जा रहे हैं।इसके बाद शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार Shivaji Park श्मशान भूमि में किया जाएगा। 🇮🇳 राजकीय सम्मान के साथ विदाई महान गायिका को तिरंगे में लपेटकर राजकीय सम्मान दिया गया। यह सम्मान भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए है। हस्तियों ने दी श्रद्धांजलिRiteish Deshmukh ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कीSachin Tendulkar भावुक नजर आएTabu ने उनकी पोती को गले लगाकर सांत्वना दीA. R. Rahman ने भी अंतिम दर्शन किएपरिवार का हाल उनकी पोती जिनाई भोसले का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और करीबी लोग उन्हें संभालते नजर आए। खास श्रद्धांजलि सैंड आर्टिस्ट Manas Sahoo ने उनके सम्मान में एक विशेष सैंड एनीमेशन बनाकर श्रद्धांजलि दी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम अत्यधिक भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक की खास व्यवस्था की है, ताकि अंतिम विदाई सम्मानजनक तरीके से हो सके। “एक युग का अंत” गायिका Maithili Thakur ने कहा— “हम सभी उनके गाने सुनते हुए बड़े हुए हैं, यह एक युग का अंत है।” Asha Bhosle की आवाज भले ही अब खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी धुनें और विरासत हमेशा पीढ़ियों तक गूंजती रहेंगी।ओम शांति

US URAN WAR : भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा ईरान युद्ध का असर… महंगे तेल ने बिगाड़ी हालत

US URAN WAR : नई दिल्ली। ग्लोबल स्तर (Global Level) पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में तेज उछाल अब भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर भी असर दिखाने लगा है। हाल ही में आई मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) की रिपोर्ट में भी इसका संकेत साफ दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे तेल की वजह से भारत की आर्थिक ग्रोथ पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि FY2027 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.2% कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारत पर कैसा पड़ेगा? आपको बता दें कि जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। इससे ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि लोगों की जेब पर दबाव बढ़ता है और खर्च कम हो जाता है, जिससे डिमांड भी कमजोर पड़ने लगती है। 95 डॉलर प्रति बैरल होंगी तेल की कीमतें रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तो उद्योगों की लागत बढ़ेगी, कंपनियों का मुनाफा घटेगा और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जो बढ़कर करीब 5.1% तक पहुंचने का अनुमान है। 85% कच्चा तेल आयात भारत की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि वह अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ जाता है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़कर 2.5% तक जा सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव बन सकता है। किस-किस पर होगा असर? इसका असर आम लोगों से लेकर कंपनियों और सरकार तक सभी पर पड़ता है, जहां आम आदमी की खरीदारी घटती है, वहीं कंपनियों के खर्च बढ़ जाते हैं और सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है। हालांकि, RBI (Reserve Bank of India) फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए स्थिति संभालने की कोशिश कर सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो ग्रोथ 5.7% तक गिर सकती है और महंगाई 6% के पार जा सकती है। फिर भी मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में सक्षम मानी जा रही है।

health insurance system : हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की तैयारी…

health insurance system : नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) ने हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) के पूरे ढांचे की गहराई से जांच करेगी और ऐसे सुझाव देगी, जिससे सिस्टम ज्यादा सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके। इसका मकसद बीमा लेने वाले लोगों की परेशानियों को कम करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही समस्याएं भी बढ़ी हैं। लोग लगातार बढ़ते प्रीमियम, अस्पतालों की मनमानी बिलिंग, क्लेम में देरी और पॉलिसी की जटिल शर्तों से परेशान हैं। कम हुआ आम लोगों का भरोसा कई बार बीमा होने के बावजूद मरीज को बड़ी रकम अपनी जेब से खर्च करनी पड़ती है। यही वजह है कि आम लोगों का भरोसा इंश्योरेंस सिस्टम पर कुछ हद तक कम हुआ है। इन समस्याओं को देखते हुए बीमा ढांचे में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। अस्पतालों की मनमानी बिलिंग सबसे बड़ी समस्या अस्पतालों की मनमानी बिलिंग सबसे बड़ी समस्या है। एक ही बीमारी के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग खर्च लिया जाता है। इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए अस्पतालों की फीस और टैरिफ सिस्टम की समीक्षा की जाएगी, ताकि इलाज की कीमतों में पारदर्शिता लाई जा सके। क्या करेगी समिति हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े हर पहलू की समीक्षा करेगी। समिति यह भी देखेगी कि हेल्थ इंश्योरेंस कितने लोगों तक पहुंच रहा है, दावा निपटान की प्रक्रिया कैसी है, नए बीमा प्लान कैसे बनाए जाएं, लोगों की शिकायतों का समाधान कैसे तेज किया जाए। इसके अलावा फर्जी दावे, गलत बिलिंग और प्रशासनिक कमियों को दूर करने के उपाय भी सुझाएगी। इसके लिए बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी। समिति यह भी देखेगी कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और निजी बीमा के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। इससे लोगों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और बीमा का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगा। साथ ही पॉलिसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ले जाना भी आसान हो सकता है।