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UK claims Russia : रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप

   UK claims Russia : नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे ब्रिटिश और नॉर्वेजियन सेनाओं ने संयुक्त अभियान के जरिए विफल कर दिया। रूस की कथित गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने दावा किया कि रूस की यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें युद्धपोत सैन्य विमान और कई पनडुब्बियां शामिल थीं। उनके अनुसार यह अभियान करीब दो महीने तक चला जिसे निगरानी और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई के जरिए रोका गया। समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान ब्रिटिश रॉयल नेवी ने नॉर्वे के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसमें रूसी अटैक और जासूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। ब्रिटेन का कहना है कि जैसे ही उनकी निगरानी बढ़ाई गई रूसी इकाइयां पीछे हट गईं और मिशन छोड़ दिया। Datia Farmers Distress : दतिया में ओलावृष्टि का कहर, 42 गांवों में जलभराव से गेहूं की फसल सड़कर नष्ट कठोर परिणाम की चेतावनी ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने रूस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में रूस की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। रणनीतिक महत्व की केबल्स और पाइपलाइन ब्रिटेन के अनुसार जिन समुद्री केबल्स और पाइपलाइनों की सुरक्षा की जा रही है वे वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दावा किया गया है कि दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है जिससे इनकी सुरक्षा रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाती है। रूस-नाटो तनाव के बीच बढ़ती टकराहट यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका में राजनीतिक हलकों में भी नाटो की भूमिका और यूरोपीय देशों की सुरक्षा जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता दिख रहा है।

Shivpuri tractor accident : शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर, पेड़ से टकराकर रुका-बड़ा हादसा टला!

  Shivpuri tractor accident :शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जगतपुर तिराहा पर खड़ा एक ट्रैक्टर अचानक बिना ड्राइवर के ही दौड़ पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, कुमरौआ गांव के किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा किया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान खोंकर गांव के उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी। गियर में खड़ा था ट्रैक्टर, अचानक हो गया स्टार्ट बताया जा रहा है कि खड़ा ट्रैक्टर गियर में था। जैसे ही पीछे से टक्कर लगी, ट्रैक्टर स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया और बिना ड्राइवर के ही अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा। पेड़ से टकराकर थमा रफ्तार का कहर बेकाबू ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकरा गया। इसी के साथ उसकी रफ्तार थम गई और एक बड़ा हादसा टल गया। बड़ा हादसा टलने से लोगों ने ली राहत की सांस घटना के समय आसपास कोई राहगीर या अन्य वाहन मौजूद नहीं था। अगर ट्रैक्टर किसी की चपेट में आ जाता, तो गंभीर हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने इसे बड़ी राहत बताया। लापरवाही बन सकती थी जानलेवा यह घटना एक बार फिर सड़क पर वाहन खड़ा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को दर्शाती है। गाड़ी को गियर में छोड़ना या सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज करना कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है। कोलारस के जगतपुर तिराहा पर हुई यह घटना भले ही बिना किसी नुकसान के खत्म हो गई, लेकिन यह एक गंभीर चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

MP MSME policy : आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम मध्यप्रदेश में 48% स्टार्टअप महिलाओं के नाम

 MP MSME policy : भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए एमएसएमई विकास नीति 2025 और स्टार्टअप नीति 2025 के जरिए बड़ा कदम उठाया है। इन नीतियों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में मजबूत आधार प्रदान करना है। राज्य सरकार का दावा है कि इन पहलों ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं और “वोकल फॉर लोकल” के विजन को भी मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 24.34 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में से लगभग 4.11 लाख इकाइयों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो करीब 17 प्रतिशत हिस्सेदारी को दर्शाता है। स्टार्टअप क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कुल 7264 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 3476 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो लगभग 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा देश में महिला उद्यमिता की मजबूत स्थिति को दर्शाता है और प्रदेश को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है। एमएसएमई विकास नीति 2025 के तहत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिन महिला उद्यमियों द्वारा संयंत्र और मशीनरी में निवेश किया जाता है, उन्हें ₹10 करोड़ तक के निवेश पर अधिकतम 48 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए यह सहायता बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह 40 प्रतिशत निर्धारित है। यह प्रावधान महिलाओं को बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 में भी महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों को 18 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें प्रति ट्रॉंच ₹18 लाख तक और कुल मिलाकर ₹72 लाख तक की सहायता शामिल है। वहीं अन्य स्टार्टअप्स के लिए यह सीमा 15 प्रतिशत या ₹15 लाख तक सीमित है। इन नीतियों के चलते मध्यप्रदेश में महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और राज्य सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और भी मजबूत होगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग

– प्रो. एस. के. सिंहवर्तमान में अविश्वास की परतों से घिरी हुई विश्व व्यवस्था अनेक प्रकार के संघर्षों एवं अस्थिरताओं से जूझ रही है। ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल युद्ध, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई असंगत कार्यवाही, लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध, पर्यावरण संकट, मानसिक तनाव एवं बढ़ती असहिष्णुता इस बात का प्रमाण है कि आज विश्व गहरे संकट से गुजर रहा है। वस्‍तुत: पिछले कुछ समय की सैन्य गतिविधियों को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि विश्व-व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है एवं धीरे-धीरे दुनिया ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही है। टैरिफ को लेकर ट्रंप के अपरिपक्व एवं गैर-जिम्मेदार रवैये तथा पल-पल बदलते उनके बचकाने बयानों ने भूमंडलीकरण के मूल उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। जिस भूमंडलीकरण को परस्पर निर्भरता, वैश्विक सहयोग एवं साझा प्रगति का आधार माना गया था, आज वह कमजोर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इन विषम परिस्थितियों में भारतीय दर्शन, भारत की संस्कृति अर्थात् ‘भारतीयता’ एक ऐसा विकल्प है जो विश्व में स्थायी शांति, संतुलन, समन्वय एवं सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। हजारों सालों से पूरी पृथ्वी को एक मानने एवं मानवता के समग्र कल्याण पर आधारित ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसे भारतीय सिद्धांतों में विकास और प्रगति का अर्थ किसी एक व्यक्ति या किसी एक राष्ट्र का हित नहीं बल्कि समग्र रूप में पूरी मानवता का कल्याण करना है, अर्थात् ‘स्व’ से ‘सर्व’ की यात्रा ही भारतीयता है। भारतीयता के इस मूल भाव को भारतीय जीवन दृष्टि के विभिन्न पहलुओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। भारतीयता का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रकृति के साथ निकटता, सामंजस्य एवं संतुलन रखना है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में वृक्षों, नदियों, पर्वतों एवं धरती को पूजनीय माना गया है, जिसमें यह मान्यता है कि प्रकृति के साथ समन्वय रखकर ही पृथ्वी को बचाकर जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। सत्य, परोपकार, त्याग, दया, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता, नैतिकता, भक्ति, समर्पण, संयम और राष्ट्रप्रेम जैसे भारतीय जीवन मूल्य, मूल्य-आधारित भारतीयता की आत्मा हैं। कई तरह की विविधताओं के बावजूद ‘अनेकता में एकता’ भी भारतीयता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ‘साईं इतना दीजिए जामें कुटुम्ब समाय’ अर्थात् हमें उतना ही संचय करना चाहिए, जितना आवश्यक है। भारतीय मूल्यों की यह गहन अभिव्यक्ति भारतीयता के उस पहलू को उजागर करती है जहां व्यक्तिगत और सामूहिक हित साथ-साथ चलते हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य चिंतन के मूल में व्यक्ति, भौतिकता, बाहरी दुनिया एवं बाहरी उपलब्धियां हैं। इसलिए पश्चिम का मूल स्वभाव स्वार्थ है न कि सद्भाव। जिसके कारण कभी-कभी किसी एक व्यक्ति की अनैतिक एवं अनुचित महत्वाकांक्षाओं का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है। ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध के चलते पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अनगिनत लाभ होने के बावजूद अनियंत्रित लालच तथा विज्ञान एवं तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमारे विनाश का कारण भी बन सकती है। भारत का स्पष्ट मानना है कि विज्ञान का उपयोग मानवता एवं मानव कल्याण के लिए होना चाहिए न कि व्यक्तिगत लाभ तथा भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ एवं प्रभुत्व स्थापित करने के लिए। यही कारण है कि 16 से 20 फरवरी, 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी गई थी। इसके पूर्व नई दिल्ली में ही आयोजित जी-20 के शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ थी, जिसमें वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर का नारा दिया गया था। स्पष्ट है कि भारत को जब भी दुनिया का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, भारत ने सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। चूंकि विस्तारवादी सोच की शुरुआत हमेशा लालच से होती है, इसलिए भारतीय चिंतन में इस सोच को कभी भी प्रश्रय नहीं दिया गया। आध्यात्मिकता भारतीय चिंतन की मूल विशेषता है, इसलिए भारतीयता के हर पहलू में हमें इसकी झलक दिखाई देती है। सदियों से भारत में शिक्षा को विद्या, छात्र को विद्यार्थी एवं शिक्षक को गुरु कहा जाता था। शिक्षा हमें बाहरी ज्ञान एवं जीवनयापन सिखाती है, जबकि विद्या एक आंतरिक गुण है जो कि हमारे विवेक, संस्कारों एवं आचरण से जुड़ी होती है तथा हमें सही एवं गलत में भेद करना सिखाती है। शिक्षा सिर्फ सफलता तक सीमित रहती है जबकि विद्या हमें सार्थकता तक ले जाती है। श्री विष्णु पुराण में उल्लेख है कि ‘तत्कर्म यन्न बन्धाय, सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात् कर्म वही है जो बंधन में न बांधे और विद्या वही है जो मुक्त करे। यही कारण है कि भारतीयता में आत्म-बोध अर्थात् आत्म-साक्षात्कार पर विशेष बल दिया गया है। शिक्षा वह है जिसे प्राप्त करने के बाद विनम्रता आए एवं व्यक्ति, व्यक्तिगत लाभ की जगह सामूहिक हित को प्राथमिकता दे, इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में कहा गया है कि ‘विद्या ददाति विनयं’ अर्थात् सच्ची विद्या से व्यक्ति में विनम्रता आती है। भारतीय ज्ञान परंपरा त्याग, परोपकार एवं आत्मबोध पर आधारित होने के कारण संयम, उत्तरदायित्व एवं कर्तव्यबोध की भावना उत्पन्न करती है, जबकि पाश्चात्य ज्ञान परंपरा तर्क, विज्ञान एवं भौतिकता पर आधारित होने के कारण प्रतिस्पर्धा, अहंकार, श्रेष्ठता-बोध एवं आत्मकेन्द्रित बनाती है। यहां स्पष्ट है कि दुनिया में यदि स्थायी शांति एवं सद्भाव स्थापित करना है तो हमें भारतीयता के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना होगा। यहां पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अतीत की ओर लौटना ही भारतीयता नहीं है, बल्कि ‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ की सोच के साथ भविष्य के लिए एक संतुलित एवं मानवीय मार्ग का निर्माण करना भारतीयता का एक प्रमुख गुण है। यह केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। पर्यावरणीय असंतुलन, नैतिक पतन एवं सामाजिक विघटन के इस दौर में भारतीयता के मूल तत्वों से प्रेरित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं, क्योंकि भारतीयता का मूल आधार भौगोलिक सीमाएं नहीं बल्कि समस्त जड़-चेतन एवं मानवता है। संघ के पंच परिवर्तन का किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध न किया जाना इसकी व्यापक स्वीकार्यता एवं सहमति का सबसे बड़ा प्रमाण है। भारतीयता एवं संवैधानिक आदर्शों से प्रेरित सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी चेतना एवं नागरिक कर्तव्य ऐसे आधारभूत मूल्य हैं जो न केवल भारत के उत्थान तक सीमित

प्यार और बदले की गहरी कहानी में भावनात्मक परतों का मजबूत चित्रण….

नई दिल्ली। निर्देशक शेनिल देव की फिल्म ‘डकैत: ए लव स्टोरी’ एक साधारण प्रेम कहानी की सीमाओं से बाहर निकलकर टूटे रिश्तों, बदले की आग और इंसानी भावनाओं की जटिल परतों को सामने लाती है। करीब 2 घंटे 35 मिनट की यह फिल्म एक ऐसी दुनिया रचती है जहां प्यार केवल सुकून नहीं देता, बल्कि दर्द, गुस्सा और हिंसा की एक लंबी यात्रा की शुरुआत बन जाता है। फिल्म का मूल स्वर गंभीर और भावनात्मक है, जिसमें किरदारों के फैसले कहानी को लगातार मोड़ते रहते हैं। आदिवी शेष का संयमित और प्रभावशाली अभिनयफिल्म का सबसे मजबूत पक्ष आदिवी शेष का अभिनय है, जिन्होंने अपने किरदार को बेहद संतुलित और गहराई से निभाया है। टूटे हुए दिल और भीतर से उबलते गुस्से को उन्होंने बिना किसी अतिशयोक्ति के दर्शाया है। उनका अभिनय अधिकतर सूक्ष्म भावों और शांत दृश्यों के जरिए सामने आता है, जो दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है। कई जगह उनकी आंखों और चेहरे के भाव ही कहानी का बोझ संभालते नजर आते हैं, जिससे किरदार और अधिक विश्वसनीय बन जाता है। मृणाल ठाकुर की मजबूत मौजूदगीमृणाल ठाकुर ने भी अपने किरदार को मजबूती और संवेदनशीलता के साथ निभाया है। उनका चरित्र केवल कहानी को आगे बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि अपनी अलग पहचान और परतों के साथ खड़ा होता है। उनके भीतर छिपा रहस्य और भावनात्मक द्वंद्व फिल्म में एक अलग तनाव पैदा करता है। आदिवी शेष के साथ उनकी केमिस्ट्री कहानी को और अधिक जटिल और दिलचस्प बनाती है।तकनीकी पक्ष और सिनेमैटिक टोनफिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है, जो धूल भरे और सुनसान वातावरण को बेहद प्रभावी ढंग से दर्शाती है। दृश्य संयोजन और रंगों का उपयोग कहानी के उदास और गंभीर मूड को और गहराई देता है। कैमरा कई दृश्यों को लंबे समय तक पकड़कर रखता है, जिससे भावनाओं को खुलकर सामने आने का अवसर मिलता है। हालांकि, यही शैली कई बार फिल्म की गति को धीमा भी कर देती है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी के भावनात्मक और तनावपूर्ण क्षणों को प्रभावी रूप से उभारता है, बिना दृश्य पर हावी हुए। कमजोर पड़ती पटकथा और धीमी शुरुआतफिल्म की कहानी का आधार मजबूत होने के बावजूद पटकथा में कुछ कमजोरियां नजर आती हैं। कई घटनाक्रम अनुमानित प्रतीत होते हैं, जिससे कुछ हिस्सों में रोमांच कम हो जाता है। पहले हिस्से में कहानी और किरदारों की स्थापना पर अधिक समय दिया गया है, जिससे गति धीमी महसूस होती है। हालांकि दूसरा भाग अधिक प्रभावशाली और भावनात्मक रूप से सशक्त है, जो पहले हिस्से की कमी को काफी हद तक पूरा कर देता है।किरदारों की जटिल दुनियाफिल्म की सबसे खास बात इसका यह दृष्टिकोण है कि इसमें किसी भी किरदार को पूरी तरह सही या गलत के रूप में नहीं दिखाया गया है। हर पात्र अपनी कमजोरियों और गलतियों के साथ सामने आता है। यही ग्रे शेड्स फिल्म को यथार्थ के करीब लाते हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं। यह कहानी आसान जवाब नहीं देती, बल्कि परिस्थितियों और भावनाओं की जटिलता को उजागर करती है।एक गंभीर और भावनात्मक सिनेमाई अनुभवडकैत: ए लव स्टोरी’ उन दर्शकों के लिए बनाई गई फिल्म है जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहराई और भावनात्मक जुड़ाव की तलाश में होते हैं। यह फिल्म प्यार को एक सरल भावना के बजाय एक जटिल अनुभव के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें दर्द और बदलाव भी शामिल हैं।

स्पेस मिशन में तकनीकी चुनौती, यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल!

नई दिल्ली। NASA ने हाल ही में एक एक्सप्लेनर वीडियो जारी कर Artemis II मिशन के दौरान सामने आई एक अहम तकनीकी समस्या के बारे में जानकारी दी है। यह दिक्कत Orion spacecraft में लगे स्पेस टॉयलेट यानी ‘यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (UWMS) में आई थी। यह सिस्टम अंतरिक्ष में मानव अपशिष्ट (वेस्ट) को संभालने के लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें यूरिन को एक टैंक में इकट्ठा किया जाता है और फिर उसे वैक्यूम के जरिए बाहर निकाला जाता है। चूंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, इसलिए यह पूरा सिस्टम हवा के तेज बहाव (एयर फ्लो) पर काम करता है। क्या आई थी समस्या?मिशन के दौरान अचानक इस सिस्टम में फ्लो बंद हो गया, जिससे एस्ट्रोनॉट्स टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। वीडियो में एस्ट्रोनॉट्स ने बताया कि “जब फ्लो ही नहीं था, तो सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इस स्थिति में क्रू को अस्थायी तौर पर ‘कॉन्टिगेंसी कलेक्शन यूनिट्स’ (CCUS) का उपयोग करने की सलाह दी गई, जो आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला बैकअप सिस्टम होता है। तकनीकी चुनौती क्यों है यह?NASA के अनुसार, असली समस्या यूरिन को वैक्यूम में डिस्पोज करने के दौरान आई। शुद्ध पानी को वैक्यूम में भेजना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन यूरिन जैसे जटिल तरल पदार्थ में कई अतिरिक्त चुनौतियां सामने आती हैं। इस प्रक्रिया में तरल के अचानक उथल-पुथल करने और जमने (फ्रीजिंग) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। एस्ट्रोनॉट्स ने इसे मजाकिया अंदाज में “बर्फ का तूफान” बताया। कैसे हुआ समाधान?इस तकनीकी खराबी को महिला एस्ट्रोनॉट Christina Hammock Koch ने ठीक किया। शुरुआत में लगा कि मोटर में कुछ फंस गया है, लेकिन बाद में यह ‘प्राइमिंग’ से जुड़ी छोटी तकनीकी गड़बड़ी निकली। क्रिस्टीना ने इसे ठीक कर दिया और मिशन को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। उन्होंने मजाक में खुद को “स्पेस प्लंबर” भी बताया। क्यों है यह इतना अहम?स्पेस मिशनों में टॉयलेट जैसी बुनियादी चीजें भी बेहद अहम होती हैं। छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ी चुनौती बन सकती है। यही वजह है कि NASA ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया, ताकि भविष्य के मिशनों में सुधार किया जा सके। आर्टेमिस III से पहले मिला बड़ा सबकArtemis II में आई यह समस्या Artemis III मिशन से पहले एक अहम सीख मानी जा रही है। नासा की योजना है कि आर्टेमिस III के जरिए इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजा जाए। ऐसे में इस तरह की तकनीकी खामियों को समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है। स्पेस मिशन में हर छोटी तकनीक बड़ी भूमिका निभाती है। आर्टेमिस II में आई टॉयलेट की समस्या ने यह साबित कर दिया कि अंतरिक्ष में जीवन को सुचारू बनाए रखने के लिए हर सिस्टम का सही तरीके से काम करना कितना जरूरी है।

CAPF सामान्य प्रशासन अधिनियम 2026 से अर्धसैनिक बलों की एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था लागू

नई दिल्ली:केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सामान्य प्रशासन अधिनियम 2026 को लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून आधिकारिक रूप से प्रभाव में आ गया है, जिसके तहत देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों को एकीकृत ढांचे में लाया जाएगा। इस फैसले को सुरक्षा बलों की संरचना और नेतृत्व व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। एकीकृत प्रशासनिक ढांचे की शुरुआतनए कानून के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल सहित सभी प्रमुख CAPF इकाइयों के लिए एक समान प्रशासनिक प्रणाली लागू की जाएगी। अब तक ये सभी बल अलग अलग अधिनियमों के तहत कार्य करते थे, जिससे सेवा शर्तों और पदोन्नति प्रक्रिया में असमानता की स्थिति बनी रहती थी। नए ढांचे का उद्देश्य इन सभी विसंगतियों को समाप्त कर एक समान व्यवस्था स्थापित करना है। प्रतिनियुक्ति प्रणाली में बड़ा बदलावनए कानून के तहत वरिष्ठ स्तर पर प्रतिनियुक्ति प्रणाली को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। निरीक्षक सामान्य स्तर पर आधे पदों पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति जारी रहेगी, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर भी बड़ी संख्या में पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे। विशेष महानिदेशक और महानिदेशक स्तर के पदों को पूरी तरह प्रतिनियुक्ति आधारित रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नेतृत्व में अनुभव और प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखना बताया जा रहा है।न्यायिक निर्देशों के बाद आया विधायी परिवर्तनयह कानून सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद लाया गया है, जिसमें CAPF में वरिष्ठ स्तर पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने सरकार से कैडर समीक्षा और संरचनात्मक सुधार पर भी जोर दिया था। इसी दिशा में यह नया अधिनियम तैयार किया गया है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट और स्थायी ढांचे में बदला जा सके।प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिशपिछले कुछ वर्षों में CAPF व्यवस्था में सेवा शर्तों, पदोन्नति और अधिकार क्षेत्र को लेकर कई विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आई थीं। अलग अलग नियमों के कारण प्रशासनिक असंतुलन की स्थिति बन रही थी। नए कानून के माध्यम से सरकार का उद्देश्य इन सभी समस्याओं को दूर कर एक मजबूत और एकीकृत प्रणाली विकसित करना है, जिससे संचालन क्षमता और अनुशासन दोनों को बेहतर बनाया जा सके। सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता पर संभावित प्रभावविशेषज्ञों का मानना है कि यह नया ढांचा CAPF के नेतृत्व और प्रबंधन प्रणाली को अधिक संगठित बना सकता है। हालांकि प्रतिनियुक्ति और आंतरिक पदोन्नति संतुलन को लेकर भविष्य में भी बहस जारी रह सकती है। फिर भी सरकार का मानना है कि यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। संस्थागत ढांचे और मनोबल पर ध्यानपूर्व अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी संरचनात्मक बदलाव का प्रभाव बलों के मनोबल और कार्य संस्कृति पर पड़ता है। इसलिए इस नए अधिनियम को लागू करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि नेतृत्व अवसरों और सेवा शर्तों में संतुलन बना रहे, ताकि सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता प्रभावित न हो।

घड़े का पानी देता है नेचुरल ठंडक, खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान!

नई दिल्ली। गर्मियों में फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी भले ही तुरंत राहत दे, लेकिन यह शरीर के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होता। बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को अचानक तापमान का झटका लगता है, जिससे गले की नसें सिकुड़ सकती हैं और पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। कई बार इससे खांसी, गले में खराश और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, मिट्टी के घड़े का पानी शरीर को प्राकृतिक और संतुलित तरीके से ठंडक देता है, जो सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। कैसे ठंडा होता है घड़े का पानी?घड़े में पानी ठंडा होने के पीछे एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जिसे वाष्पीकरण (Evaporation) कहते हैं। घड़े की मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों से पानी की थोड़ी मात्रा बाहर आकर हवा के संपर्क में वाष्पित होती है, जिससे अंदर का पानी धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है। यह ठंडक शरीर के तापमान के अनुकूल होती है, जिससे शरीर को कोई झटका नहीं लगता। आयुर्वेद भी मानता है फायदेमंदAyurveda के अनुसार, बहुत ठंडा पानी पाचन अग्नि को कमजोर करता है, जिससे खाना सही तरीके से नहीं पचता। वहीं घड़े का पानी पाचन को बेहतर बनाता है और पेट को ठंडा रखता है। माना जाता है कि मिट्टी में ऐसे प्राकृतिक गुण होते हैं जो पानी के pH स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम होती हैं। शरीर को करता है हाइड्रेट और डिटॉक्सघड़े का पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। यह शरीर से अनचाहे तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।संतुलित ठंडक के कारण ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है और त्वचा पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलता है। घड़ा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान- 1. शुद्ध मिट्टी का बना होघड़ा खरीदते समय यह जरूर देखें कि वह पूरी तरह प्राकृतिक मिट्टी से बना हो। उसमें किसी तरह का केमिकल या आर्टिफिशियल रंग नहीं मिला होना चाहिए। 2. गंध और रंग की जांच करेंअगर घड़े से अजीब गंध आती है या उसका रंग हाथ में लगने लगे, तो उसे न खरीदें। अच्छी क्वालिटी का घड़ा हल्की मिट्टी की खुशबू देता है। 3. अंदरूनी सतह पर ध्यान देंघड़े का अंदरूनी हिस्सा थोड़ा खुरदुरा होना चाहिए। इससे पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। 4. मोटाई हो सहीमोटा घड़ा पानी को ज्यादा देर तक ठंडा रखता है और जल्दी टूटता भी नहीं। पतले घड़े जल्दी खराब हो सकते हैं। 5. रिसाव जरूर जांचेंखरीदने से पहले उसमें पानी भरकर देख लें कि कहीं से लीकेज तो नहीं हो रहा। 6. सही साइज चुनेंअपने परिवार की जरूरत और घर की जगह के हिसाब से घड़े का साइज चुनें, ताकि उसका इस्तेमाल आसान रहे। घड़े का पानी न सिर्फ शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। सही घड़ा चुनकर आप गर्मियों में एक हेल्दी और देसी विकल्प अपना सकते हैं।

जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज

उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम झालरिया में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां 3 साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं। जानकारी के अनुसार बच्चा भागीरथ अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के लिए क्षेत्र में आया था। खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया जहां पहले ढक्कन लगा हुआ था लेकिन बताया जा रहा है कि जानवरों के चरने के दौरान वह ढक्कन हट गया और इसी कारण यह हादसा हो गया। हादसा गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच हुआ जिसके बाद तुरंत प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। घटना के बाद से रातभर लगातार राहत और बचाव कार्य चलता रहा और मशीनों की मदद से ऑपरेशन को तेज किया गया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चे को करीब 75 फीट की गहराई पर लोकेट कर लिया गया है। बोरवेल के अंदर कैमरे और विशेष उपकरण डालकर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि हर पल की जानकारी मिल सके और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए मौके पर 5 पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही बोरवेल के पास समानांतर गड्ढा खोदकर टनल बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि वैकल्पिक रास्ते से बच्चे तक पहुंचा जा सके। प्रशासन ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर दिया है और किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौके पर न जुटें और राहत कार्य में सहयोग करें। मासूम भागीरथ, जो राजस्थान के पाली जिले के निवासी बताए जा रहे हैं, अपने परिवार के साथ कुछ दिनों से इस क्षेत्र में रुके हुए थे। फिलहाल पूरे प्रशासन का ध्यान केवल एक ही लक्ष्य पर है किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना। यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत टीमों का ऑपरेशन लगातार जारी है और सभी की नजर अब सिर्फ इस बात पर है कि मासूम को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते सहयोग के बीच महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम….

नई दिल्ली:भारत ने अपनी विदेश नीति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वरिष्ठ राजनयिक प्रणय वर्मा को बेल्जियम में देश का अगला राजदूत नियुक्त किया है। इसके साथ ही उन्हें यूरोपीय यूनियन में भी भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग लगातार विस्तार ले रहा है।अनुभवी राजनयिक को मिली अहम जिम्मेदारीविदेश सेवा के 1994 बैच के अधिकारी प्रणय वर्मा वर्तमान में बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं। अपने लंबे कूटनीतिक करियर में उन्होंने विभिन्न देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। अब उन्हें यूरोप जैसे रणनीतिक क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक जिम्मेदारी दी गई है, जिसे एक महत्वपूर्ण पदोन्नति के रूप में देखा जा रहा है।यूरोपीय संघ के साथ बढ़ते संबंधों के बीच नियुक्तियह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों में नई गति आई है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर प्रगति हुई है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापारिक संबंधों में बड़े विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। इस समझौते के बाद भारत के निर्यात को नई मजबूती मिलने और यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने की संभावना है।ब्रसेल्स में रणनीतिक भूमिका का विस्तारब्रसेल्स में स्थित भारतीय दूतावास को यूरोपीय यूनियन के साथ संबंधों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां नियुक्त होने वाले राजदूत की भूमिका न केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित रहती है, बल्कि पूरे यूरोपीय ढांचे के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी प्रभावित करती है। प्रणय वर्मा की नियुक्ति से भारत की इस क्षेत्र में कूटनीतिक सक्रियता और मजबूत होने की उम्मीद है। लंबा कूटनीतिक अनुभव बना ताकतप्रणय वर्मा का कूटनीतिक अनुभव तीन दशकों से अधिक का रहा है। उन्होंने विभिन्न देशों में भारत की विदेश नीति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वियतनाम में राजदूत के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी थी। पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में उनकी विशेषज्ञता को भी भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बांग्लादेश में वर्तमान भूमिका और अनुभववर्तमान में वे बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाने में भूमिका निभाई है। हाल के समय में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने में उनकी सक्रियता महत्वपूर्ण रही है। अब उनके यूरोप में स्थानांतरण के साथ भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में नया संतुलन देखने को मिलेगा। भारत-यूरोप संबंधों में नई दिशा की उम्मीदविशेषज्ञ मानते हैं कि इस नियुक्ति से भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई ऊर्जा मिलेगी। व्यापार, तकनीक, निवेश और वैश्विक नीति मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने में यह कदम अहम भूमिका निभा सकता है। आने वाले समय में यह नियुक्ति भारत की वैश्विक रणनीति को और अधिक मजबूत आधार देने वाली साबित हो सकती है।