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couple suicide case : साथ जीने-मरने की कसम बनी हकीकत, दूल्हा-दुल्हन सा सजकर की आत्महत्या

   couple suicide case : नई दिल्ली। मुठिया टोला, चांदपुर मुठिया टोला में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दंपती ने साथ जीने-मरने की कसम को सच करते हुए फांसी लगाकर जान दे दी। 1 अप्रैल को दोनों अपने ही घर में फंदे से लटके मिले, जिससे परिवार और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। सुसाइड से पहले की अजीब तैयारी परिजनों के अनुसार, घटना से पहले दोनों ने खुद को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया था। घर में पॉपकॉर्न और शराब भी लाई गई थी। इतना ही नहीं, मोबाइल में “साथ जिएंगे, साथ मरेंगे…” की रिंगटोन भी सेट की गई थी। इन सभी तैयारियों से साफ है कि यह कदम अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के साथ उठाया गया। नई रस्सी से फांसी लगाकर दी जान बताया जा रहा है कि दंपती ने नई रस्सी का इस्तेमाल कर फांसी लगाई। घटना के समय घर में कोई और मौजूद नहीं था। जब परिजनों ने देखा तो दोनों मृत अवस्था में लटके मिले, जिससे घर में कोहराम मच गया। पिता का दर्द: “घर में कोई परेशानी नहीं थी” मृतक युवक के पिता गणेश पटेल ने रोते हुए बताया कि दोनों की शादी परिवार की सहमति से हुई थी। रिश्तेदारी में पहचान होने के बाद दोनों की जिद पर शादी कराई गई थी। उन्होंने कहा, “शादी के ढाई साल तक सबकुछ सामान्य था। घर में कोई परेशानी नहीं थी, फिर भी उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह समझ से परे है।” पुराने रिश्ते को लेकर शक पिता ने आशंका जताई कि शादी से पहले बहू किसी अन्य युवक के संपर्क में थी। उनका कहना है कि संभव है वही व्यक्ति उसे परेशान कर रहा हो। हालांकि यह सिर्फ एक शक है और असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी। अनसुलझे सवालों में उलझी कहानी यह घटना कई सवाल छोड़ गई है- क्या दंपती किसी मानसिक दबाव में थे? क्या किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका थी? या फिर यह दोनों का आपसी फैसला था? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं। पुलिस जांच जारी पुलिस मामले की जांच में जुटी है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। मोबाइल, कॉल रिकॉर्ड और आसपास के लोगों से पूछताछ के जरिए सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है। चांदपुर की यह घटना एक गहरी त्रासदी है, जिसने परिवार को तोड़कर रख दिया है और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Energy Crisis : परमाणु ऊर्जा की नई सुबह: भारत ने ईंधन खत्म होने के डर को दी चुनौती

– निशान्त Energy Crisis : तमिलनाडु के कल्पक्कम में समुद्र के किनारे खड़ा एक रिएक्टर बाहर से देखने पर किसी और पावर प्लांट जैसा ही लगता है। लेकिन 6 अप्रैल 2026 को यहां कुछ ऐसा हुआ जिसने भारत की ऊर्जा कहानी को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया। Prototype Fast Breeder Reactor ने पहली क्रिटिकलिटी हासिल की। आसान भाषा में कहें तो इसके भीतर पहली बार नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हुई। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है। यह उस सोच की शुरुआत है जिसमें ऊर्जा सिर्फ खपत नहीं होती बनाई भी जाती है। इस कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना पड़ेगा। आज भारत की ऊर्जा व्यवस्था तीन बड़े दबावों के बीच खड़ी है। एक तरफ तेजी से बढ़ती मांग दूसरी तरफ आयातित ईंधन पर निर्भरता और तीसरी तरफ जलवायु परिवर्तन का दबाव। कोयला अभी भी सबसे बड़ा स्रोत है लेकिन उसी कोयले से सबसे ज्यादा एमिशन भी निकलते हैं। सोलर और विंड तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन वे हर वक्त उपलब्ध नहीं रहते। ऐसे में सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा रास्ता है जो लगातार बिजली भी दे एमिशन भी कम करे और ईंधन की चिंता भी कम करे। यहीं से Prototype Fast Breeder Reactor की कहानी शुरू होती है। आम रिएक्टरों में यूरेनियम का इस्तेमाल होता है और समय के साथ वह ईंधन खत्म हो जाता है। लेकिन यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अलग है। यह यूरेनियम और प्लूटोनियम के मिश्रण से चलता है और साथ ही आसपास मौजूद यूरेनियम-238 को बदलकर नया प्लूटोनियम पैदा करता है। यानी यह जितना ईंधन जलाता है उससे ज्यादा बना भी सकता है। ऊर्जा की दुनिया में यह वैसा ही है जैसे कोई इंजन पेट्रोल जलाते हुए खुद पेट्रोल भी बनाना शुरू कर दे। इस तकनीक की जड़ें उस विजन में हैं जिसे Homi J. Bhabha ने दशकों पहले रखा था। भारत के पास यूरेनियम सीमित है लेकिन थोरियम बहुत ज्यादा है। इसलिए एक तीन-चरणीय कार्यक्रम बनाया गया। पहले चरण में यूरेनियम से बिजली और प्लूटोनियम बनता है। दूसरे चरण में जिसमें यह रिएक्टर आता है प्लूटोनियम का इस्तेमाल करके और ज्यादा ईंधन तैयार किया जाता है। और तीसरे चरण में उसी ईंधन की मदद से थोरियम को उपयोग में लाया जाएगा। यानी यह रिएक्टर सिर्फ बिजली नहीं बना रहा यह भविष्य के लिए रास्ता तैयार कर रहा है। Madhya Pradesh Congress : एमपी कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की बड़ी परीक्षा: 15 अप्रैल से परफॉर्मेंस रिव्यू, कमजोर पाए गए तो हो सकती है छुट्टी अब इस पूरे विकास को जलवायु के नजरिए से देखें। दुनिया आज एक अजीब स्थिति में है। एक तरफ हमें फॉसिल फ्यूल से बाहर निकलना है दूसरी तरफ हमें हर वक्त बिजली भी चाहिए। सोलर और विंड इस दिशा में अहम हैं लेकिन वे इंटरमिटेंट हैं। यानी उनकी उपलब्धता मौसम पर निर्भर है। यहां परमाणु ऊर्जा एक बेसलोड विकल्प देती है। 24 घंटे स्थिर और कम एमिशन वाली बिजली। Prototype Fast Breeder Reactor इस मॉडल को और आगे ले जाता है। क्योंकि यह सिर्फ आज की बिजली नहीं आने वाले दशकों की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करता है। अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर कामयाब होती है तो भारत को ईंधन के लिए बार-बार वैश्विक बाजार की तरफ देखने की जरूरत कम हो सकती है। यह बात आज के भू-राजनीतिक माहौल में और अहम हो जाती है। तेल और गैस की कीमतें युद्ध और संकट के साथ ऊपर-नीचे होती रहती हैं। ऐसे में घरेलू दीर्घकालिक और कम-एमिशन वाली ऊर्जा व्यवस्था एक रणनीतिक मजबूती बन जाती है। लेकिन इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है जो उतना ही महत्वपूर्ण है। यह तकनीक आसान नहीं है। यह रिएक्टर पानी की जगह तरल सोडियम का इस्तेमाल करता है जो बहुत उच्च तापमान पर काम करता है। इससे दक्षता बढ़ती है लेकिन जोखिम भी बढ़ते हैं। इसलिए क्रिटिकलिटी हासिल करना सिर्फ शुरुआत है। अब अगले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे पूरी क्षमता तक ले जाया जाएगा। हर चरण में परीक्षण होगा हर सिस्टम को परखा जाएगा। अनुमान है कि 2026 के अंत तक यह 500 मेगावाट की पूरी क्षमता से बिजली देना शुरू कर सकता है। इसके बाद ही यह साफ होगा कि यह तकनीक बड़े पैमाने पर कितनी जल्दी और कितनी सुरक्षित तरीके से फैल सकती है। TI Posting In Aaron : जिले में बड़ा पुलिस फेरबदल, कोतवाली थाने की कमान राजकुमार शर्मा को सौंपी गई भारत की योजना यहीं रुकने की नहीं है। इस अनुभव के आधार पर 600 मेगावाट के और बड़े फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विकसित करने की योजना है ताकि इस तकनीक को प्रोटोटाइप से निकालकर स्टैंडर्ड मॉडल बनाया जा सके। अगर यह सफल होता है तो भारत का परमाणु कार्यक्रम एक नए स्तर पर पहुंच सकता है जहां थोरियम आधारित ऊर्जा व्यवस्था भी हकीकत बन सकती है। लेकिन शायद इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा तकनीक नहीं सोच है। ऊर्जा के बारे में हमारी आम समझ यह रही है कि संसाधन सीमित हैं और एक दिन खत्म हो जाएंगे। लेकिन Prototype Fast Breeder Reactor इस सोच को चुनौती देता है। यह दिखाता है कि अगर तकनीक और नीति साथ आएं तो हम संसाधनों का इस्तेमाल सिर्फ उपभोग के लिए नहीं विस्तार के लिए भी कर सकते हैं। कल्पक्कम का यह रिएक्टर अभी शांत खड़ा है। इसके भीतर प्रतिक्रियाएं शुरू हो चुकी हैं लेकिन इसका असली असर आने वाले वर्षों में दिखेगा। जब भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करेगा जब क्लाइमेट के दबाव और तेज होंगे और जब दुनिया ईंधन की अस्थिरता से जूझेगी तब शायद यह रिएक्टर एक जवाब की तरह सामने आए। एक ऐसा जवाब जो धीरे चलता है जटिल है लेकिन लंबी दूरी तय करने की क्षमता रखता है।

MP firing incident : प्रॉपर्टी विवाद में खूनी हमला, महिला ने मिर्ची झोंकी, साथी ने मारी गोली!

   MP firing incident : जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां हाई कोर्ट में मुंशी का काम करने वाले व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया गया। हमलावरों ने पहले उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डाला और फिर गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पीड़ित खुद पुलिस चौकी पहुंचा, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला ने रोका, फिर शुरू हुआ हमला घटना पाटन थाना क्षेत्र के बेनीखेड़ा इलाके की है। जानकारी के अनुसार, आगाशोद निवासी 52 वर्षीय ठाकुर दास पटेल बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने चेहरा ढंककर उन्हें रास्ते में रोका और अचानक उनकी आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया। मिर्च लगते ही उनका संतुलन बिगड़ गया और वे बाइक सहित सड़क पर गिर पड़े। घात लगाए बैठे आरोपियों ने घेरकर की मारपीट जैसे ही ठाकुर दास नीचे गिरे, पहले से घात लगाए बैठे 6 अन्य आरोपी वहां पहुंच गए और उन्हें घेरकर मारपीट करने लगे। पीड़ित ने किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने कट्टे से उन पर फायर कर दिया। गोली उनके पेट के किनारे जा फंसी, जबकि छर्रे गले में लगे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। लहूलुहान हालत में खुद पहुंचे पुलिस चौकी हैरानी की बात यह रही कि इतनी गंभीर हालत में भी ठाकुर दास ने हिम्मत नहीं हारी और खुद नुनसर पुलिस चौकी पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तत्काल अस्पताल भिजवाया। जमीन विवाद बना हमले की वजह घायल ने पुलिस को बताया कि यह हमला प्रॉपर्टी विवाद का नतीजा है। उन्होंने ‘सूखा’ क्षेत्र में एक जमीन खरीदने के लिए करीब 22 लाख रुपए दिए थे, लेकिन आरोपी रजिस्ट्री नहीं कर रहे थे। पीड़ित ने दीपक काक्षी, गोपाल काक्षी, वंदना सिंह, बृजलाल पटेल, अर्जुन और सिद्धार्थ दुबे समेत कुल 7 लोगों पर हमले का आरोप लगाया है। हत्या के प्रयास का मामला दर्ज नुनसर पुलिस चौकी प्रभारी विपिन तिवारी के अनुसार, पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है और घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। जबलपुर में हुई यह घटना प्रॉपर्टी विवादों के खतरनाक रूप को उजागर करती है, जहां मामूली विवाद भी जानलेवा हमले में बदल सकता है। पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।

Dipika Kakar : लिवर में दोबारा सिस्ट मिलने से दीपिका कक्कड़ की सेहत को लेकर चिंता..

   Dipika Kakar : नई दिल्ली।टेलीविजन जगत की लोकप्रिय अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ एक बार फिर अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा में हैं। पहले गंभीर लिवर सर्जरी और कैंसर जैसे सिस्ट के इलाज से गुजर चुकीं दीपिका के शरीर में दोबारा सिस्ट पाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद उनका मानसिक तनाव और चिंता बढ़ गई है। परिवार और फैंस दोनों इस खबर से चिंतित हैं, जबकि डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पहले भी झेल चुकी हैं बड़ी सर्जरी दीपिका कक्कड़ को कुछ समय पहले लिवर के पास टेनिस बॉल के आकार का एक कैंसरयुक्त सिस्ट पाया गया था, जिसके बाद उन्हें बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा था। इस ऑपरेशन में उनके लिवर का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा निकालना पड़ा था। उस समय की स्थिति काफी गंभीर थी, लेकिन इलाज के बाद वे धीरे धीरे रिकवर कर रही थीं और सामान्य जीवन की ओर लौट रही थीं। फिर सामने आई नई मेडिकल समस्या हाल ही में नियमित जांच के दौरान उनके लिवर के पास फिर से 1.3 सेंटीमीटर का सिस्ट पाया गया। इस नए सिस्ट के सामने आने के बाद उन्हें दोबारा सर्जरी करानी पड़ी और अब डॉक्टर आगे के इलाज और जांच को लेकर लगातार निगरानी कर रहे हैं। इस स्थिति ने उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया है क्योंकि बीमारी के दोबारा लौटने की आशंका उन्हें परेशान कर रही है। मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष दीपिका ने अपनी स्थिति को लेकर खुलकर बात करते हुए बताया कि इस बीमारी ने उन्हें अंदर से हिला दिया है। लगातार स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनके जीवन में चिंता और बेचैनी बढ़ गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब उन्हें भविष्य को लेकर डर महसूस होने लगा है और वे अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क हो गई हैं। बेटे से दूरी का दर्द इस कठिन समय में दीपिका कक्कड़ अपने छोटे बेटे रुहान से पर्याप्त समय नहीं बिता पाने को लेकर भावुक भी हैं। उन्होंने बताया कि कमजोरी और अस्पताल में भर्ती रहने के कारण वे अपने बेटे के साथ पहले की तरह समय नहीं बिता पा रही हैं। कई बार थकान इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें आराम करना पड़ता है, जिससे पारिवारिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। परिवार का साथ और जिम्मेदारियां इस मुश्किल समय में उनके पति शोएब इब्राहिम लगातार उनके साथ खड़े हैं और घर की जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं। परिवार पूरी कोशिश कर रहा है कि दीपिका को मानसिक और भावनात्मक सहारा मिल सके। हालांकि घर के बाहर सब सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर से सभी लोग इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। सकारात्मक सोच के साथ आगे की लड़ाई दीपिका ने कहा है कि इस कठिन समय में सकारात्मक रहना सबसे जरूरी है और वे पूरी तरह ठीक होने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव शुरू कर दिए हैं। डॉक्टरों के संपर्क में रहते हुए वे आगे के इलाज को लेकर हर जरूरी कदम उठा रही हैं और उम्मीद कर रही हैं कि जल्द ही उनकी सेहत में सुधार आएगा।

ITI Shivpuri alcohol shop : आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान पर एक्शन, 10 दिन में हटाने के निर्देश!

   ITI Shivpuri alcohol shop : शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर के महल सराय इलाके में एक शराब दुकान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने निर्धारित स्थान के बजाय आईटीआई परिसर के सामने ही दुकान खोल दी, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। नियमों की अनदेखी पर आबकारी विभाग सख्त मामले की शिकायत मिलने के बाद आबकारी विभाग ने जांच की और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 10 दिनों के भीतर दुकान को हटाया जाए, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वृत्त प्रभारी तीर्थराज भारद्वाज ने बताया कि निरीक्षण के दौरान दुकान का स्थान नियमों के विपरीत पाया गया। शैक्षणिक संस्थानों के पास होने से बढ़ा विरोध इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह दुकान का लोकेशन है। शराब दुकान के पास ही आईटीआई, बीटीआई और एसबीआई ट्रेनिंग सेंटर जैसे शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं। इन संस्थानों में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते-जाते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों ने इसे अनुचित बताते हुए पहले भी विरोध जताया था। स्थानीय लोगों ने की थी शिकायत क्षेत्र के निवासियों ने आबकारी विभाग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि दुकान को तय स्थान से हटाकर गलत जगह संचालित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह नियमों का उल्लंघन है और इससे सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो सकता है। कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकती है सख्ती आबकारी विभाग ने साफ किया है कि यदि 10 दिन के भीतर दुकान नहीं हटाई जाती, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि ठेकेदार विभाग के निर्देशों का पालन करता है या नहीं। शिवपुरी में आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान का मामला नियमों की अनदेखी और स्थानीय विरोध के कारण तूल पकड़ चुका है। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए नोटिस जारी किया है, जिससे जल्द समाधान की उम्मीद है।

Randeep Hooda BABY : 49 साल की उम्र में पिता बने रणदीप हुड्डा के जीवन में नया अध्याय शुरू..

   Randeep Hooda BABY : नई दिल्ली:बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता रणदीप हुड्डा ने अपने निजी जीवन से जुड़ी एक बड़ी और भावनात्मक खुशी फैंस के साथ साझा की है। 49 वर्ष की उम्र में पिता बने रणदीप हुड्डा ने अपनी पत्नी लिन लैशराम के साथ मिलकर अपनी नवजात बेटी का नाम और पहली झलक सामने लाई है, जिसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। परिवार ने इस खास मौके को बेहद सादगी और भावनात्मक अंदाज में मनाया। बेटी के नाम की पहली झलक ने बढ़ाया उत्साह रणदीप हुड्डा और लिन लैशराम ने अपनी बेटी का नाम ‘न्योमिका’ रखा है। इस नाम के सामने आते ही फैंस में उत्सुकता और खुशी दोनों देखने को मिली। कपल ने बताया कि यह नाम उन्हें पहली बार सुनते ही बेहद खास और सही महसूस हुआ। बेटी के एक महीने पूरे होने के अवसर पर इस नाम की घोषणा ने इस पल को और भी यादगार बना दिया। नाम का अर्थ और पारिवारिक जुड़ाव न्योमिका नाम का अर्थ ईश्वरीय कृपा, स्वतंत्रता और असीम आकाश जैसी विशालता से जुड़ा हुआ बताया गया है। यह नाम केवल सुंदर अर्थ ही नहीं रखता बल्कि इसके पीछे एक भावनात्मक पारिवारिक जुड़ाव भी है। बताया गया है कि यह नाम रणदीप हुड्डा की बहन ने चुना है, जिससे इस निर्णय में परिवार की भूमिका और भी खास बन गई है। माता पिता बनने का अनुभव रणदीप और लिन ने इस अनुभव को जीवन का सबसे भावनात्मक और परिवर्तनकारी समय बताया है। दोनों ने कहा कि बेटी के जन्म के बाद उनकी जिंदगी में एक नई खुशी और जिम्मेदारी जुड़ गई है। यह एक महीना उनके लिए बेहद खास रहा है, जिसमें उन्होंने हर पल को पूरी तरह जीने की कोशिश की है। फिल्मी करियर और निजी जीवन का संतुलन रणदीप हुड्डा अपने दमदार अभिनय और अलग तरह के किरदारों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हाईवे, सरबजीत, जिस्म 2, किक और लाल रंग जैसी फिल्मों में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनय के साथ उन्होंने फिल्म निर्माण में भी कदम रखा है और इंडस्ट्री में एक गंभीर और समर्पित कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं। 2023 में हुई थी शादी रणदीप हुड्डा ने 2023 में मॉडल और अभिनेत्री लिन लैशराम के साथ विवाह किया था। दोनों की जोड़ी को फिल्म इंडस्ट्री में एक संतुलित और समझदार रिश्ते के रूप में देखा जाता है। शादी के बाद अब बेटी के आगमन ने उनके जीवन को और भी पूर्णता प्रदान की है। फैंस की प्रतिक्रिया और बढ़ती लोकप्रियता बेटी के नाम और पहली झलक सामने आने के बाद फैंस ने सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बौछार कर दी है। लोगों ने इस नए अध्याय के लिए कपल को ढेरों बधाइयां दी हैं और इस पल को बेहद प्यारा बताया है। यह खबर लगातार चर्चा में बनी हुई है और मनोरंजन जगत में भी इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

UK claims Russia : रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप

   UK claims Russia : नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे ब्रिटिश और नॉर्वेजियन सेनाओं ने संयुक्त अभियान के जरिए विफल कर दिया। रूस की कथित गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने दावा किया कि रूस की यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें युद्धपोत सैन्य विमान और कई पनडुब्बियां शामिल थीं। उनके अनुसार यह अभियान करीब दो महीने तक चला जिसे निगरानी और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई के जरिए रोका गया। समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान ब्रिटिश रॉयल नेवी ने नॉर्वे के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसमें रूसी अटैक और जासूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। ब्रिटेन का कहना है कि जैसे ही उनकी निगरानी बढ़ाई गई रूसी इकाइयां पीछे हट गईं और मिशन छोड़ दिया। Datia Farmers Distress : दतिया में ओलावृष्टि का कहर, 42 गांवों में जलभराव से गेहूं की फसल सड़कर नष्ट कठोर परिणाम की चेतावनी ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने रूस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में रूस की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। रणनीतिक महत्व की केबल्स और पाइपलाइन ब्रिटेन के अनुसार जिन समुद्री केबल्स और पाइपलाइनों की सुरक्षा की जा रही है वे वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दावा किया गया है कि दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है जिससे इनकी सुरक्षा रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाती है। रूस-नाटो तनाव के बीच बढ़ती टकराहट यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका में राजनीतिक हलकों में भी नाटो की भूमिका और यूरोपीय देशों की सुरक्षा जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता दिख रहा है।

Shivpuri tractor accident : शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर, पेड़ से टकराकर रुका-बड़ा हादसा टला!

  Shivpuri tractor accident :शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जगतपुर तिराहा पर खड़ा एक ट्रैक्टर अचानक बिना ड्राइवर के ही दौड़ पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, कुमरौआ गांव के किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा किया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान खोंकर गांव के उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी। गियर में खड़ा था ट्रैक्टर, अचानक हो गया स्टार्ट बताया जा रहा है कि खड़ा ट्रैक्टर गियर में था। जैसे ही पीछे से टक्कर लगी, ट्रैक्टर स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया और बिना ड्राइवर के ही अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा। पेड़ से टकराकर थमा रफ्तार का कहर बेकाबू ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकरा गया। इसी के साथ उसकी रफ्तार थम गई और एक बड़ा हादसा टल गया। बड़ा हादसा टलने से लोगों ने ली राहत की सांस घटना के समय आसपास कोई राहगीर या अन्य वाहन मौजूद नहीं था। अगर ट्रैक्टर किसी की चपेट में आ जाता, तो गंभीर हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने इसे बड़ी राहत बताया। लापरवाही बन सकती थी जानलेवा यह घटना एक बार फिर सड़क पर वाहन खड़ा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को दर्शाती है। गाड़ी को गियर में छोड़ना या सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज करना कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है। कोलारस के जगतपुर तिराहा पर हुई यह घटना भले ही बिना किसी नुकसान के खत्म हो गई, लेकिन यह एक गंभीर चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

MP MSME policy : आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम मध्यप्रदेश में 48% स्टार्टअप महिलाओं के नाम

 MP MSME policy : भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए एमएसएमई विकास नीति 2025 और स्टार्टअप नीति 2025 के जरिए बड़ा कदम उठाया है। इन नीतियों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में मजबूत आधार प्रदान करना है। राज्य सरकार का दावा है कि इन पहलों ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं और “वोकल फॉर लोकल” के विजन को भी मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 24.34 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में से लगभग 4.11 लाख इकाइयों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो करीब 17 प्रतिशत हिस्सेदारी को दर्शाता है। स्टार्टअप क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कुल 7264 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 3476 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो लगभग 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा देश में महिला उद्यमिता की मजबूत स्थिति को दर्शाता है और प्रदेश को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है। एमएसएमई विकास नीति 2025 के तहत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिन महिला उद्यमियों द्वारा संयंत्र और मशीनरी में निवेश किया जाता है, उन्हें ₹10 करोड़ तक के निवेश पर अधिकतम 48 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए यह सहायता बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह 40 प्रतिशत निर्धारित है। यह प्रावधान महिलाओं को बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 में भी महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों को 18 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें प्रति ट्रॉंच ₹18 लाख तक और कुल मिलाकर ₹72 लाख तक की सहायता शामिल है। वहीं अन्य स्टार्टअप्स के लिए यह सीमा 15 प्रतिशत या ₹15 लाख तक सीमित है। इन नीतियों के चलते मध्यप्रदेश में महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और राज्य सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और भी मजबूत होगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग

– प्रो. एस. के. सिंहवर्तमान में अविश्वास की परतों से घिरी हुई विश्व व्यवस्था अनेक प्रकार के संघर्षों एवं अस्थिरताओं से जूझ रही है। ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल युद्ध, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई असंगत कार्यवाही, लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध, पर्यावरण संकट, मानसिक तनाव एवं बढ़ती असहिष्णुता इस बात का प्रमाण है कि आज विश्व गहरे संकट से गुजर रहा है। वस्‍तुत: पिछले कुछ समय की सैन्य गतिविधियों को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि विश्व-व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है एवं धीरे-धीरे दुनिया ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही है। टैरिफ को लेकर ट्रंप के अपरिपक्व एवं गैर-जिम्मेदार रवैये तथा पल-पल बदलते उनके बचकाने बयानों ने भूमंडलीकरण के मूल उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। जिस भूमंडलीकरण को परस्पर निर्भरता, वैश्विक सहयोग एवं साझा प्रगति का आधार माना गया था, आज वह कमजोर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इन विषम परिस्थितियों में भारतीय दर्शन, भारत की संस्कृति अर्थात् ‘भारतीयता’ एक ऐसा विकल्प है जो विश्व में स्थायी शांति, संतुलन, समन्वय एवं सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। हजारों सालों से पूरी पृथ्वी को एक मानने एवं मानवता के समग्र कल्याण पर आधारित ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसे भारतीय सिद्धांतों में विकास और प्रगति का अर्थ किसी एक व्यक्ति या किसी एक राष्ट्र का हित नहीं बल्कि समग्र रूप में पूरी मानवता का कल्याण करना है, अर्थात् ‘स्व’ से ‘सर्व’ की यात्रा ही भारतीयता है। भारतीयता के इस मूल भाव को भारतीय जीवन दृष्टि के विभिन्न पहलुओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। भारतीयता का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रकृति के साथ निकटता, सामंजस्य एवं संतुलन रखना है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में वृक्षों, नदियों, पर्वतों एवं धरती को पूजनीय माना गया है, जिसमें यह मान्यता है कि प्रकृति के साथ समन्वय रखकर ही पृथ्वी को बचाकर जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। सत्य, परोपकार, त्याग, दया, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता, नैतिकता, भक्ति, समर्पण, संयम और राष्ट्रप्रेम जैसे भारतीय जीवन मूल्य, मूल्य-आधारित भारतीयता की आत्मा हैं। कई तरह की विविधताओं के बावजूद ‘अनेकता में एकता’ भी भारतीयता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ‘साईं इतना दीजिए जामें कुटुम्ब समाय’ अर्थात् हमें उतना ही संचय करना चाहिए, जितना आवश्यक है। भारतीय मूल्यों की यह गहन अभिव्यक्ति भारतीयता के उस पहलू को उजागर करती है जहां व्यक्तिगत और सामूहिक हित साथ-साथ चलते हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य चिंतन के मूल में व्यक्ति, भौतिकता, बाहरी दुनिया एवं बाहरी उपलब्धियां हैं। इसलिए पश्चिम का मूल स्वभाव स्वार्थ है न कि सद्भाव। जिसके कारण कभी-कभी किसी एक व्यक्ति की अनैतिक एवं अनुचित महत्वाकांक्षाओं का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है। ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध के चलते पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अनगिनत लाभ होने के बावजूद अनियंत्रित लालच तथा विज्ञान एवं तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमारे विनाश का कारण भी बन सकती है। भारत का स्पष्ट मानना है कि विज्ञान का उपयोग मानवता एवं मानव कल्याण के लिए होना चाहिए न कि व्यक्तिगत लाभ तथा भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ एवं प्रभुत्व स्थापित करने के लिए। यही कारण है कि 16 से 20 फरवरी, 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी गई थी। इसके पूर्व नई दिल्ली में ही आयोजित जी-20 के शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ थी, जिसमें वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर का नारा दिया गया था। स्पष्ट है कि भारत को जब भी दुनिया का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, भारत ने सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। चूंकि विस्तारवादी सोच की शुरुआत हमेशा लालच से होती है, इसलिए भारतीय चिंतन में इस सोच को कभी भी प्रश्रय नहीं दिया गया। आध्यात्मिकता भारतीय चिंतन की मूल विशेषता है, इसलिए भारतीयता के हर पहलू में हमें इसकी झलक दिखाई देती है। सदियों से भारत में शिक्षा को विद्या, छात्र को विद्यार्थी एवं शिक्षक को गुरु कहा जाता था। शिक्षा हमें बाहरी ज्ञान एवं जीवनयापन सिखाती है, जबकि विद्या एक आंतरिक गुण है जो कि हमारे विवेक, संस्कारों एवं आचरण से जुड़ी होती है तथा हमें सही एवं गलत में भेद करना सिखाती है। शिक्षा सिर्फ सफलता तक सीमित रहती है जबकि विद्या हमें सार्थकता तक ले जाती है। श्री विष्णु पुराण में उल्लेख है कि ‘तत्कर्म यन्न बन्धाय, सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात् कर्म वही है जो बंधन में न बांधे और विद्या वही है जो मुक्त करे। यही कारण है कि भारतीयता में आत्म-बोध अर्थात् आत्म-साक्षात्कार पर विशेष बल दिया गया है। शिक्षा वह है जिसे प्राप्त करने के बाद विनम्रता आए एवं व्यक्ति, व्यक्तिगत लाभ की जगह सामूहिक हित को प्राथमिकता दे, इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में कहा गया है कि ‘विद्या ददाति विनयं’ अर्थात् सच्ची विद्या से व्यक्ति में विनम्रता आती है। भारतीय ज्ञान परंपरा त्याग, परोपकार एवं आत्मबोध पर आधारित होने के कारण संयम, उत्तरदायित्व एवं कर्तव्यबोध की भावना उत्पन्न करती है, जबकि पाश्चात्य ज्ञान परंपरा तर्क, विज्ञान एवं भौतिकता पर आधारित होने के कारण प्रतिस्पर्धा, अहंकार, श्रेष्ठता-बोध एवं आत्मकेन्द्रित बनाती है। यहां स्पष्ट है कि दुनिया में यदि स्थायी शांति एवं सद्भाव स्थापित करना है तो हमें भारतीयता के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना होगा। यहां पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अतीत की ओर लौटना ही भारतीयता नहीं है, बल्कि ‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ की सोच के साथ भविष्य के लिए एक संतुलित एवं मानवीय मार्ग का निर्माण करना भारतीयता का एक प्रमुख गुण है। यह केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। पर्यावरणीय असंतुलन, नैतिक पतन एवं सामाजिक विघटन के इस दौर में भारतीयता के मूल तत्वों से प्रेरित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं, क्योंकि भारतीयता का मूल आधार भौगोलिक सीमाएं नहीं बल्कि समस्त जड़-चेतन एवं मानवता है। संघ के पंच परिवर्तन का किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध न किया जाना इसकी व्यापक स्वीकार्यता एवं सहमति का सबसे बड़ा प्रमाण है। भारतीयता एवं संवैधानिक आदर्शों से प्रेरित सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी चेतना एवं नागरिक कर्तव्य ऐसे आधारभूत मूल्य हैं जो न केवल भारत के उत्थान तक सीमित