भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था से बढ़ रहे रोजगार के अवसर, रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ोतरी का असर अब रोजगार के आंकड़ों में भी साफ दिखने लगा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में देश की बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत रह गई है, जो इस बात का संकेत है कि नौकरी के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि अब रोजगार सिर्फ बड़े शहरों या चुनिंदा सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी हो रहा है। भारत में यह बदलाव बताता है कि आर्थिक सुधार अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंस्ट्रक्शन, कंस्ट्रक्शन, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और कृषि जैसे प्रमुख सेक्टर में रोजगार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च और उद्योगों में बढ़ता विश्वास अब वास्तविक नौकरियों में बदल रहा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं ने कंस्ट्रक्शन सेक्टर को नई गति दी है। इसके साथ ही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के अवसरों का दायरा और विस्तृत हुआ है। टेक्नोलॉजी, प्रदूषण और ग्रामीण भारत में नई बढ़ोतरीदेश में डिजिटल क्रांति और टेक्नोलॉजी सेक्टर के विस्तार ने युवाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं। सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से नौकरियां बढ़ रही हैं। इसके साथ ही भारत का उभरता प्रदूषण इकोसिस्टम-खासतौर पर फिनटेक, ई-कॉमर्स और ग्रीन एनर्जी-युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी योजनाएं युवाओं को नई कौशल देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते रोजगार से यह संकेत मिलता है कि विकास का लाभ अब देश के हर हिस्से तक पहुंच रहा है। इससे लोगों की आय में स्थिरता आ रही है और बाजार में मांग भी बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था को और मजबूत करती है। साथ ही, महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में भी सुधार देखा जा रहा है। अब अधिक महिलाएं हेल्थकेयर, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और डिजिटल सेवाओं में सक्रिय हो रही हैं, जिससे रोजगार का ढांचा अधिक समावेशी बन रहा है। डिजिटल क्रांति के विस्तार ने वर्क फ्रॉम होम, फ्रीलांसिंग और पार्ट-टाइम जॉब जैसे नए विकल्प भी सामने लाए हैं, जिससे पहले बाहर रह गए निकायों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था न केवल तेजी से बढ़ रही है, बल्कि अधिक समावेशी और टिकाऊ भी बन रही है।
रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ी, चीन जा रहे टैंकर अब भारत की ओर मुड़े

नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ऐसे टैंकर जो पहले चीन के बंदरगाहों की ओर जा रहे थे, उन्होंने अचानक अपना रुख बदलकर भारत की ओर कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय पर सामने आया है जब संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने तेजी से खरीद बढ़ाई है और महज एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद लिया है, जो भारत की खुफिया तैयारी को कामयाब है। रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रामैक्स टैंकर एक्वा टाइटन, जो बाल्टिक सागर से यूराल्स कच्चा तेल लेकर निकला था, पहले चीन के रिझाओ पोर्ट की ओर जा रहा था, लेकिन मार्च के मध्य में उसने अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया। अब यह टैंकर न्यू मैंगलोर पोर्ट पर 21 मार्च के आसपास पहुंचने वाला है। इसी तरह स्वेजमैक्स टैंकर जूजू एन, जो कजाकिस्तान का सीपीसी ब्लेंड क्रूड लेकर चला था, वह भी चीन की जगह भारत के सिक्का पोर्ट की ओर बढ़ रहा है और 25 मार्च तक पहुंचने की संभावना है। यह जहाज रूस के काला सागर क्षेत्र के नोवोरोस्सियस्क बंदरगाह से रवाना हुआ था, लेकिन उसने भी रास्ते में बदलाव कर लिया। ऊर्जा कूटनीति में बदलाव, भारत फिर बना रूस का प्रमुख खरीदारएनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में कम से कम सात रूसी तेल टैंकरों ने चीन से भारत की ओर अपना रुख किया है। इससे संकेत मिलता है कि भारत एक बार फिर रूस के लिए बड़े खरीदार के रूप में उभर रहा है। सभी प्रमुख भारतीय रिफाइनर कंपनियां रूसी कच्चे तेल की खरीद में सक्रिय हो गई हैं, जिससे देश की ऊर्जा इकाइयों को स्थिर रखने में मदद मिल रही है। यह रणनीति वस्तुओं पर तब अहम हो जाती है जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। इस बीच, वैश्विक स्तर पर भी रुझान बदल नजर आ रहे हैं। गश्त में कुछ ढील मिलने के बाद जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने भी रूसी तेल की खरीद दोबारा शुरू कर दी है। एथलीटों का रुख है कि कई देशों द्वारा अचानक बढ़ी इस मांग से आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, यह घटना न सिर्फ ऊर्जा बाजार की दिशा बदल रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीति और आर्थिक समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है।
‘KISS ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड 2025’ से सम्मानित नीता अंबानी, महिला सशक्तिकरण में योगदान को मिली पहचान

नई दिल्ली। रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर और चेयरपर्सन नीता अंबानी को सामाजिक सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘KISS Humanitarian Award 2025’ से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान भुवनेश्वर में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया, जहां हजारों लोगों की मौजूदगी में इस खास पल का साक्षी बना पूरा परिसर। यह आयोजन कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KEISS) में हुआ, जो जनजातीय शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है। इस अवसर पर करीब 40,000 जनजातीय छात्रों ने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नीता अंबानी का भव्य स्वागत किया। उन्हें यह सम्मान नोबेल पुरस्कार विजेता मोहन मुनासिंघे और केआईआईटी, केआईएसएस और केआईएमएस के संस्थापक अच्युत सामंत द्वारा प्रदान किया गया। अपने संबोधन में नीता अंबानी ने इस सम्मान को पूरी रिलायंस फाउंडेशन टीम को समर्पित करते हुए कहा कि यह सफल सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। सामाजिक सेवा के साथ प्रेरणा का संदेश, छात्रों में भरा आत्मविश्वासअपने भाषण में नीता अंबानी ने अच्युत सामंत की प्रशंसा करते हुए कहा कि केआईआईटी और केआईएसएस जैसे संस्थान भारत के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने ओडिशा की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से जुड़े जीवन की भी प्रशंसा की। छात्रों के स्नेह से स्वीकार्य हुए उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक रहेगा। छात्रों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि लड़के और लड़कियों में कोई फर्क नहीं होता और दोनों के पास समान क्षमताएं होती हैं। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, मेहनत करने और ईमानदारी के रास्ते पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उनके शब्दों ने वहां मौजूद हजारों छात्रों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। उन्होंने यह भी कहा कि केआईएसएस के छात्रों को देखकर उन्हें भारत के उज्ज्वल भविष्य पर पूरा भरोसा होता है। है कि ‘केआईएसएस ह्यूमैनिटेरियन प्रेरित’ की स्थापना वर्ष 2008 में की गई थी और यह संस्थान का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार दुनिया भर में उन व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने मानवता की सेवा, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस सम्मान के तहत प्रशस्ति पत्र और सोने की परत चढ़ाई ट्रॉफी प्रदान की जाती है, जो दया, उम्मीद और सेवा की भावना का प्रतीक है।
मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से महंगी होगी बिजली, 10% से ज्यादा बढ़ सकता है टैरिफ

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के डेढ़ करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को अप्रैल 2026 से महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। राज्य की मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 10.20% वृद्धि का प्रस्ताव सौंपा है। यदि यह मंजूर होता है तो 1 अप्रैल से नई दरें लागू हो जाएंगी। कंपनियों का दावा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें 6 044 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जिसे रिकवर करने के लिए यह बढ़ोतरी आवश्यक है। पिछली साल केवल 3.46% वृद्धि की गई थी जबकि कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी। इस बार प्रस्तावित 10.20% की बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकती है। औसत घरेलू उपभोक्ता जिनकी मासिक खपत 150-300 यूनिट है के बिल में 150-300 रुपये प्रति माह और सालाना लगभग 3 600 रुपये अतिरिक्त जुड़ सकते हैं। वहीं उच्च खपत वाले परिवार 400 यूनिट+ के लिए बिल 400-600 रुपये तक बढ़ सकता है। जनसुनवाई में जनता ने इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। उपभोक्ताओं और संगठनों ने सवाल उठाया कि कंपनियां अपना घाटा क्यों उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं जबकि पहले से ही मध्य प्रदेश की बिजली दरें पड़ोसी राज्यों से महंगी हैं। विद्युत नियामक आयोग अब सभी आपत्तियों और दावों की समीक्षा करने के बाद अगले सप्ताह मार्च के अंत तक अंतिम टैरिफ ऑर्डर जारी करेगा।
नर्मदापुरम में रेलवे ट्रैक पर मिली लहूलुहान बच्ची, हालत नाजुक; हादसा या साजिश की आशंका

नर्मदापुरम । नर्मदापुरम में मंगलवार देर रात एक हृदयविदारक घटना हुई। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर 8 वर्षीय मासूम युविका राजपूत को लहूलुहान हालत में रेलवे ट्रैक पर पाया गया। घटना उस समय हुई जब तमिलनाडु एक्सप्रेस नर्मदापुरम स्टेशन से रवाना हो रही थी। पीड़िता को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉ. संदीप साहू, एमडी स्पेशलिस्ट ने बताया कि युविका ट्रेन से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हुई है। उसके सिर और कमर में गहरी चोटें हैं और काफी खून बह चुका है। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उसकी जान बचाने के लिए कोशिश कर रही है। जीआरपी नर्मदापुरम के टीआई संजय चौकसे ने बताया कि बच्ची अपनी मां अंजू सिंह राजपूत के साथ थी। पुलिस घटना की गंभीरता को देखते हुए यह पता लगाने में लगी है कि यह सिर्फ एक हादसा था या इसके पीछे कोई जानबूझकर की गई साजिश थी। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने आशंका जताई है कि युविका को ट्रेन के आगे धकेला गया हो। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और चश्मदीदों के बयान दर्ज कर रही है। जांच के हर पहलू को गंभीरता से लिया जा रहा है ताकि वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके। पुलिस ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह दुर्घटना थी या कोई सोचीसमझी साजिश। घटना की जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। .
क्रिकेट में मचा बवाल: बांग्लादेश सरकार ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के फैसले पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) का टी20 विश्व कप 2026 से बाहर रहने का फैसला अब एक बड़े राजनीतिक और खेल विवाद में बदल जा रहा है। नई सरकार ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने का ऐलान किया है, जिससे बोर्ड की जांच और फैसला लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। युवा एवं खेल राज्य मंत्री अमीनुल इस्लाम ने साफ किया है कि ईद के बाद एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी, जो यह पता लगाएगी कि आखिर किन परिस्थितियों में बांग्लादेश को ICC पुरुष टी20 विश्व कप 2026 से बाहर रहना पड़ा। सरकार इस बात की तह तक जाना चाहती है कि क्या यह फैसला वास्तव में सुरक्षा कारणों से लिया गया था या फिर यह खेल कूटनीतिक (स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी) की विफलता का परिणाम था। मंत्री अमीनुल इस्लाम ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ एक टूर्नामेंट से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय खेल संबंधों की स्थिति भी उजागर होती है। उन्होंने कहा कि सरकार यह समझना चाहती है कि क्या इस स्थिति से बचा जा सकता था और कहां चूक हुई। जांच का दायरा केवल विश्व कप से हटने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीसीबी के हालिया चुनावों में कथित अनियमितताओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कई क्लबों और जिला स्तर के एथलीटों ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर फाइनल दर्ज कराया है, जिसके बाद जांच पहले से जारी है। ऐसे में यह पूरा मामला अब प्रशासनिक कामकाज और जवाबदेही से भी जुड़ गया है। सरकार बनाम बोर्ड टकराव, फैसले पर गहराया विवादबीसीबी और सरकार के बीच बढ़ता टकराव भी इस मामले को और गंभीर बना रहा है। हाल ही में बोर्ड ने मंत्रालय से पिछली जांच को बंद करने की अपील की थी, लेकिन इसके तुरंत बाद नई जांच की घोषणा ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास को उजागर कर दिया। इस विवाद की जड़ उस फैसले में है, जब बीसीबी ने भारत और श्रीलंका में आयोजित इस बड़े टूर्नामेंट में सुरक्षा कारणों का हल देते हुए हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद बोर्ड अपने रुख पर कायम रहा, जिसके बाद बांग्लादेश को आधिकारिक रूप से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को मौका दिया गया। अब इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत की भी नजरें टिकी हुई हैं। विश्लेषणात्मक का आकलन है कि इस जांच के निष्कर्ष न केवल बीसीबी के प्रशासनिक ढांचे पर असर डालेंगे, बल्कि वैश्विक क्रिकेट में बांग्लादेश की साख को भी प्रभावित कर सकते हैं। यदि जांच में निर्णय प्रक्रिया में खामियां या असर सामने आती है, तो भविष्य में ऐसे बड़े टूर्नामेंट में भागीदारी को लेकर भी कार्यप्रणाली मानदंड लागू किए जा सकते हैं। साफ है कि यह मामला अब सिर्फ एक खेल निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मुद्दा बन चुका है।
CSK को मिलेगा फायदा, संजू सैमसन बढ़ाएंगे फैन बेस और टीम बैलेंस: अनिल कुंबले

नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज Sanju Samson अब इंडियन प्रीमियर लीग में नए रंग में नजर आएंगे। लंबे समय तक Rajasthan Royals की पहचान बने सैमसन इस सीजन Chennai Super Kings की पीली जर्सी में मैदान पर उतरेंगे। यह बदलाव सिर्फ टीम का नहीं, बल्कि उनके करियर का भी एक अहम मोड़ माना जा रहा है। राजस्थान के साथ खिलाड़ी और कप्तान दोनों भूमिकाओं में शानदार समय बिताने के बाद अब सैमसन एक नई जिम्मेदारी और नई सोच के साथ सीएसके कैंप में शामिल हुए हैं। चेन्नई की टीम में शामिल होना उनके लिए चुनौती के साथ-साथ बड़ा अवसर भी है, जहां उनसे सिर्फ रन बनाने की नहीं, बल्कि टीम को संतुलन देने की भी उम्मीद रहेगी। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर Anil Kumble ने इस फैसले को ‘पीढ़ीगत बदलाव’ करार दिया है। कुंबले के मुताबिक, सैमसन का मौजूदा फॉर्म, आत्मविश्वास और आक्रामक बल्लेबाजी सीएसके के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सैमसन सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि टीम के सांस्कृतिक जुड़ाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। केरल में जन्मे सैमसन का तमिल संस्कृति से भी जुड़ाव है, जो चेन्नई के फैन बेस को और मजबूत कर सकता है। यही कारण है कि सीएसके मैनेजमेंट उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि टीम के भविष्य के चेहरे के रूप में देख रहा है। नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम, सीएसके में बड़ी भूमिका तय सीएसके में सैमसन की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। टीम के मौजूदा कप्तान Ruturaj Gaikwad की गैरमौजूदगी में सैमसन को उपकप्तान या स्टैंड-इन कप्तान की जिम्मेदारी दी जा सकती है। विकेटकीपिंग के साथ-साथ वह मिडिल ऑर्डर में टीम की बल्लेबाजी को मजबूती देंगे। उनके पास कप्तानी का लंबा अनुभव है, जिसका फायदा सीएसके को सीजन के अहम मौकों पर मिल सकता है। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में सैमसन टीम की कप्तानी के बड़े दावेदार बन सकते हैं। सैमसन का आईपीएल सफर 2013 से 2015 और फिर 2018 से 2025 तक राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़ा रहा, जहां 2021 में उन्हें कप्तान बनाया गया। उनकी कप्तानी में टीम ने 2022 में फाइनल तक का सफर तय किया था, जिसने उनके नेतृत्व कौशल को साबित किया। अब सीएसके जैसे अनुभवी और संतुलित फ्रेंचाइजी के साथ जुड़कर सैमसन एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां उनसे प्रदर्शन के साथ-साथ टीम को दिशा देने की भी उम्मीद होगी। चेपॉक का दबाव, जबरदस्त फैन बेस और टीम का मजबूत ढांचा ये सभी उनके लिए चुनौती भी हैं और खुद को साबित करने का सुनहरा मौका भी।
मैनचेस्टर सिटी बाहर, रियल मैड्रिड का दमदार प्रदर्शन; आर्सेनल और पेरिस सेंट-जर्मेन क्वार्टर फाइनल में

नई दिल्ली। यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित क्लब टूर्नामेंट UEFA चैंपियंस लीग में मंगलवार की रात रोमांच, दबदबा और बड़े उलटफेर देखने को मिले। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब रियल मैड्रिड ने मौजूदा चैंपियन मैनचेस्टर सिटी को 2-1 से हराकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस जीत के हीरो रहे विनीसियस जूनियर, जिन्होंने दो शानदार गोल कर मैच का रुख तय कर दिया। विनीसियस ने शुरुआती मिनटों में बढ़त हासिल की और फिर इंजरी टाइम (93वें मिनट) में ठोस गोल ठोककर सिटी की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। सिटी की ओर से एकमात्र गोल एर्लिंग हालैंड ने 41वें मिनट में किया, लेकिन वह टीम को हार से नहीं बचा सके। हार के साथ ही कोच पेप गार्डियोला की टीम लगातार तीसरे सीजन में मैड्रिड के खिलाफ नॉकआउट चरण में बाहर हो गई, जो उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मैच के दौरान एक विवादित पल भी आया जब बर्नार्डो सिल्वा पर अपने ही बॉक्स में हैंडबॉल का आरोप लगा, जिसके बाद सिटी को भारी नुकसान उठाना पड़ा और टीम का संतुलन बिगड़ गया। इसका फायदा उठाते हुए मैड्रिड ने आक्रामक खेल दिखाया। मैच के बाद विनीसियस ने जोशीले अंदाज में कहा कि पिछली बार सिटी के फैंस ने उनका मजाक उड़ाया था और यह परफॉर्मेंस उनके लिए जवाब देने जैसा था। उन्होंने अपने जश्न से भी यह साफ कर दिया कि यह उनके लिए सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की लड़ाई थी। आर्सेनल और पीएसजी का दबदबा, एकतरफा अंदाज में बनाई जगहदूसरे मुकाबले में आर्सेनल एफसी ने बायर लेवरकुसेन को 2-0 से हराकर कुल 3-1 के एग्रीगेट स्कोर के साथ क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। आर्सेनल के लिए एबेरेची एज़े ने शानदार लॉन्ग डिस्टेंस का गोल कर बढ़त दिलाई, जबकि डेक्लान राइस ने दूसरा गोल कर पक्की की जीत हासिल की। कोच मिकेल आर्टेटा की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया, हालांकि लेवरकुसेन के गोलकीपर जेनिस ब्लासविच ने कई बेहतरीन डिफेंस कर टीम को मैच में बनाए रखा। लेकिन 37वें मिनट में एजे के गोल ने मुकाबले का रुख बदल दिया और आर्सेनल ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वहीं, डिफेंडिंग चैंपियन पेरिस सेंट-जर्मेन ने चेल्सी एफसी को 3-0 से हराकर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। दो लेग मिलाकर 8-2 के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर पीएसजी ने क्वार्टर फाइनल में एंट्री की। इस मैच में ब्रैडली बारकोला और सेनी मायुलु ने अहम गोल दागे, जिससे टीम को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। पीएसजी ने पूरे मैच में गेंद पर कंट्रोल बनाए रखा और चेल्सी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इन मैचों के साथ चैंपियंस लीग का रोमांच और बढ़ गया है। बड़े क्लबों की टक्कर अब क्वार्टर फाइनल में और भी कड़ी होने वाली है, जहां हर टीम खिताब की ओर मजबूत कदम बढ़ाने के इरादे से उतरेगी।
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में गैस कीमतें बढ़ीं, ट्रंप के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती

नई दिल्ली । अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घरेलू राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित करने लगा है। युद्ध के तीसरे सप्ताह में ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं और औसत कीमत एक महीने में 2.94 डॉलर से बढ़कर 3.72 डॉलर प्रति गैलन हो गई। महंगाई और जीवनयापन की लागत पहले से ही अमेरिकी मतदाताओं की चिंता का बड़ा कारण हैं। बढ़ती गैस कीमतें ट्रंप प्रशासन के अफोर्डेबिलिटी एजेंडा पर भी दबाव डाल रही हैं। विशेषज्ञ क्लिफर्ड यंग के अनुसार यह स्थिति राष्ट्रपति की घरेलू रणनीति को प्रभावित कर सकती है और उनकी लोकप्रियता पर असर डाल सकती है। सैन्य मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन ने जापान से लगभग 5 000 सैनिकों और नाविकों वाली मरीन उभयचर इकाई को मध्य पूर्व भेजने का आदेश दिया है। यह कदम अमेरिका को सैन्य विकल्प खुले रखने की दिशा में देखा जा रहा है लेकिन इससे क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर जोखिम भी बढ़ सकता है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की अपील की। उन्होंने चीन फ्रांस जापान दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया। हालांकि कई यूरोपीय देश और ऑस्ट्रेलिया इस पहल में शामिल होने से इन्कार कर चुके हैं। व्यक्तिगत और राजनीतिक मोर्चे पर ट्रंप ने अप्रैल में प्रस्तावित चीन यात्रा को युद्ध के कारण एक महीने के लिए टाल दिया। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव ने बताया कि कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति की सर्वोच्च जिम्मेदारी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता सुनिश्चित करना है। इस बीच ट्रंप युद्ध को लेकर सार्वजनिक रूप से दबाव में नहीं दिखते। सोमवार रात उन्होंने एक घंटे से अधिक लंबे संबोधन में युद्ध के अलावा केनेडी सेंटर के नवीनीकरण व्हाइट हाउस बॉलरूम निर्माण वर्ल्ड कप और अन्य घरेलू मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में यह स्थिति ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। युद्ध लंबा खिंचता है और ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो यह उनके कार्यकाल और आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं।
गावस्कर की टिप्पणी पर पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी की प्रतिक्रिया, अबरार अहमद पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली। इंग्लैंड में खेले जाने वाले The Hundred को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। Sunrisers Leeds द्वारा पाकिस्तानी स्पिनर Abrar Ahmed को खरीदे जाने के बाद बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। गावस्कर की टिप्पणी से बढ़ा विवादभारतीय क्रिकेट दिग्गज Sunil Gavaskar ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दिया गया पैसा टैक्स के जरिए पाकिस्तान सरकार तक पहुंच सकता है, जिसका इस्तेमाल गलत उद्देश्यों में हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या एक टूर्नामेंट जीतना भारतीयों की सुरक्षा से ज्यादा अहम है। अजीम रफीक का तीखा जवाबगावस्कर के इस बयान पर पाकिस्तानी मूल के क्रिकेटर Azeem Rafiq ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे “मजाकिया और घटिया” बताते हुए सवाल किया कि क्या ऐसे ही मानदंड अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी लागू किए जाते हैं। रफीक ने यह भी कहा कि मैदान पर हासिल उपलब्धियां इस तरह के बयानों को सही नहीं ठहरा सकतीं। डील की कीमत और विरोधSunrisers Leeds ने Abrar Ahmed को लगभग 1.9 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपये) में साइन किया है।इस फैसले के बाद खासकर भारत में सोशल मीडिया पर विरोध देखने को मिला और फ्रेंचाइजी को आलोचना झेलनी पड़ी। ECB के नियम और टीमों का रुखEngland and Wales Cricket Board ने पहले ही सभी फ्रेंचाइजियों को एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों का पालन करने की हिदायत दी थी, जिसमें राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव न करने की बात कही गई थी।इसके बावजूद भारतीय स्वामित्व वाली अन्य टीमों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नहीं खरीदा, जबकि सनराइजर्स लीड्स ने अलग रुख अपनाया। IPL तक पहुंचा असरइस विवाद का असर Indian Premier League 2026 तक भी देखने को मिला। कुछ फैंस ने Sunrisers Hyderabad के बहिष्कार तक की बात कही। कोच पर भी उठे सवालगावस्कर ने टीम के हेड कोच Daniel Vettori का भी जिक्र करते हुए कहा कि शायद वे इस मुद्दे की संवेदनशीलता को पूरी तरह नहीं समझते, लेकिन असली जिम्मेदारी फ्रेंचाइजी मालिकों की है।