बांग्लादेश में राम प्रतिमा परियोजना पर लगी रोक से बढ़ा विवाद, कट्टरपंथी दबाव के आरोपों के बीच हिंदू समुदाय में गहरी नाराजगी

नई दिल्ली । बांग्लादेश में भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण पर लगी रोक ने देश के भीतर धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक सह-अस्तित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है। गाइबंदा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना को प्रशासन द्वारा निलंबित किए जाने के बाद हिंदू समुदाय के बीच असंतोष बढ़ गया है, जबकि कट्टरपंथी संगठनों ने इसे अपनी मांगों की सफलता बताया है। यह परियोजना स्थानीय मंदिर परिसर में भगवान राम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसे क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा था। निजी सहयोग और श्रद्धालुओं के योगदान से शुरू हुए इस निर्माण कार्य को एशिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के रूप में विकसित किए जाने की योजना थी। मंदिर परिसर में पहले से कई देवी-देवताओं की बड़ी प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिसके कारण यह स्थान धार्मिक पर्यटन और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। हालांकि निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ ही कुछ इस्लामिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध करने वाले समूहों ने परियोजना की फंडिंग, उद्देश्य और प्रभाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी धार्मिक संरचना के निर्माण से स्थानीय सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं। कुछ संगठनों ने परियोजना से जुड़े वित्तीय स्रोतों की जांच कराने तथा निर्माण कार्य को पूरी तरह बंद करने की मांग भी की है। प्रशासन द्वारा परियोजना पर रोक लगाए जाने के बाद मंदिर प्रबंधन और स्थानीय हिंदू संगठनों ने इस फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत और समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा था। उनके अनुसार यह केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी पहल थी, जिसे अनावश्यक विवाद का विषय बना दिया गया। कई सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि किसी भी धार्मिक परियोजना का मूल्यांकन कानूनी और प्रशासनिक मानकों के आधार पर होना चाहिए, न कि दबाव समूहों की मांगों के आधार पर। इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति को लेकर चल रही चर्चाओं को भी फिर से केंद्र में ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों, मूर्तियों और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों ने सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता को लेकर चिंता बढ़ाई है। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी समुदायों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने का समान अधिकार मिलना चाहिए। इस मुद्दे पर विभिन्न बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि विभिन्न धर्मों के पूजा स्थल और धार्मिक स्मारक देश के अन्य हिस्सों में स्वतंत्र रूप से स्थापित हो सकते हैं, तो किसी एक समुदाय की धार्मिक परियोजना को लेकर अलग मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। उनका तर्क है कि धार्मिक विविधता किसी भी समाज की सांस्कृतिक शक्ति होती है और उसे संरक्षण मिलना चाहिए। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर परियोजना की स्थिति स्पष्ट नहीं है और आगे की कार्रवाई को लेकर संबंधित पक्षों की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं। इस बीच यह मामला केवल एक धार्मिक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक समावेशन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में सरकार का रुख और जांच प्रक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।
राहुल गांधी के कथित ऑडियो से INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल, पिनाराई विजयन पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस-सीपीएम आमने-सामने

नई दिल्ली । विपक्षी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर INDIA गठबंधन की आंतरिक एकजुटता चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के बीच राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। ऑडियो में राहुल गांधी को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए सुना जा रहा है, जिसके बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर नई बहस शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि यह कथित ऑडियो 8 जून को आयोजित INDIA गठबंधन की एक बैठक से जुड़ा है। इसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह पिनाराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई चल रही है। कथित बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों को नजरअंदाज कर केवल प्रतीकात्मक निकटता दिखाना उनके लिए संभव नहीं है। ऑडियो सार्वजनिक होने के बाद यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। इस घटनाक्रम के बाद वामपंथी दलों के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। सीपीएम के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन सहयोगी दलों के नेताओं के प्रति सार्वजनिक सम्मान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पार्टी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार की व्यक्तिगत निकटता की अपेक्षा नहीं है, लेकिन गठबंधन राजनीति में संवाद और सम्मान का वातावरण आवश्यक माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे केरल की जमीनी राजनीति का लंबा इतिहास भी जुड़ा हुआ है। राज्य में कांग्रेस और सीपीएम दशकों से एक-दूसरे की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं। चुनावी मुकाबलों में दोनों दल लगातार आमने-सामने रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की राजनीति में एक-दूसरे के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता माने जाते हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में भी दोनों दलों के बीच तीखा मुकाबला देखने को मिला था। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे की नीतियों और कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए थे। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एक ही विपक्षी मंच का हिस्सा होने के बावजूद राज्य स्तर की प्रतिस्पर्धा अक्सर दोनों दलों के रिश्तों को प्रभावित करती रही है। वर्तमान विवाद ने INDIA गठबंधन के भीतर मौजूद वैचारिक और राजनीतिक चुनौतियों को भी उजागर किया है। गठबंधन में शामिल कई दल विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि राष्ट्रीय राजनीति में वे साझा रणनीति के तहत साथ काम करते हैं। यही कारण है कि कई बार राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना नेतृत्व के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होता है। हालांकि अब तक कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन के प्रमुख दल इस विवाद को किस तरह संभालते हैं और क्या यह घटनाक्रम विपक्षी एकजुटता पर कोई प्रभाव डालता है। फिलहाल यह मामला केवल एक ऑडियो क्लिप से आगे बढ़कर विपक्षी राजनीति के अंदरूनी समीकरणों और आपसी संबंधों पर केंद्रित बहस का रूप ले चुका है।
‘राहुल को बलि का बकरा बना रही CPI(M)’: गले लगाने वाले बयान पर बढ़ी सियासी तकरार, कांग्रेस ने किया पलटवार

नई दिल्ली । विपक्षी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक कथित वायरल ऑडियो को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस विवाद ने न केवल केरल की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि विपक्षी एकता को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद की शुरुआत उस कथित ऑडियो क्लिप से हुई, जिसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह केरल के वरिष्ठ वामपंथी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी है। ऑडियो सामने आने के बाद इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं, जिसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी राजनीति व्यक्तिगत संबंधों या प्रतीकात्मक प्रदर्शनों पर आधारित नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विमर्श विचारधारा और नीतियों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्षी नेताओं के बीच सम्मानजनक संबंध बनाए रखना लोकतांत्रिक राजनीति की आवश्यक शर्त है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए CPI(M) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि हालिया चुनावी पराजय के बाद वाम दल अपनी राजनीतिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वास्तविक मुद्दों पर आत्ममंथन करने के बजाय राहुल गांधी के बयान को विवाद का रूप दिया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी को अनावश्यक रूप से विवाद के केंद्र में लाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी राजनीति में राहुल गांधी की बढ़ती भूमिका से कुछ राजनीतिक दल असहज महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, व्यक्तिगत हमलों से राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं बदला जा सकता और जनता के बीच स्वीकार्यता ही किसी भी नेता की सबसे बड़ी ताकत होती है। इस पूरे विवाद के दौरान दोनों दलों ने अपने-अपने राजनीतिक तर्कों को सामने रखा है। कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, जबकि CPI(M) नेताओं ने सम्मानजनक राजनीतिक व्यवहार और वैचारिक स्पष्टता पर जोर दिया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी सहयोग और राज्य स्तरीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल जैसे राज्यों में कांग्रेस और CPI(M) सीधे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों पर दोनों दल एक साझा मंच पर दिखाई देते रहे हैं। ऐसे में नेताओं के बयानों को लेकर पैदा होने वाले विवाद अक्सर व्यापक राजनीतिक संदेश भी देते हैं और गठबंधन राजनीति की जटिलताओं को उजागर करते हैं। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी के दौर में बदल चुका है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के रुख और प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर केवल केरल की राजनीति तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यापक विपक्षी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
देशभर में फिलहाल बंद हुई मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट सेवा, तकनीकी समीक्षा के बाद ही दोबारा शुरू होगा सिस्टम

नई दिल्ली । देशभर के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं को आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों की सूचना देने के लिए शुरू की गई सेल ब्रॉडकास्ट सेवा को फिलहाल अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब इस प्रणाली को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था और इसे देश के आपदा प्रबंधन ढांचे में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल माना जा रहा था। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संबंधित राज्यों और एजेंसियों को इस सेवा के उपयोग पर फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस निर्णय के पीछे का विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन संकेत मिले हैं कि सेवा की तकनीकी और परिचालन संबंधी समीक्षा जारी है। समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है। यह तकनीक किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल उपभोक्ताओं तक एक साथ चेतावनी संदेश पहुंचाने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर नहीं रहती और नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकती है। जब भी किसी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा, गंभीर मौसम चेतावनी, बाढ़, भूकंप, चक्रवात या अन्य आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है, तब यह प्रणाली मोबाइल स्क्रीन पर तत्काल संदेश भेजती है। कई स्मार्टफोनों में यह संदेश तेज ध्वनि और कंपन के साथ दिखाई देता है, जिससे उपयोगकर्ता का ध्यान तुरंत उस चेतावनी की ओर आकर्षित होता है। कुछ उपकरणों में यह अलर्ट ध्वनि के माध्यम से पढ़कर भी सुनाया जाता है। इस प्रणाली को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था। इसे भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की स्वदेशी तकनीकी क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना गया। आपदा प्रबंधन और संचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इसे आम नागरिकों तक त्वरित सूचना पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया था। इसका उद्देश्य संभावित खतरों के बारे में लोगों को समय रहते सचेत करना और जनहानि को कम करना था। हालांकि सेवा के अस्थायी निलंबन ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी व्यापक प्रणाली के संचालन के दौरान तकनीकी परीक्षण, नेटवर्क अनुकूलन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा आवश्यक होती है। इसी कारण संबंधित संस्थाएं इसकी कार्यप्रणाली का पुनर्मूल्यांकन कर रही हो सकती हैं ताकि भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। दूरसंचार और आपदा प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय चेतावनी प्रणाली की सफलता उसके सटीक संचालन और विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि समीक्षा के दौरान किसी तकनीकी या परिचालन चुनौती की पहचान हुई है तो उसे दूर करना दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। फिलहाल सेवा की बहाली को लेकर कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। अधिकारियों ने केवल इतना स्पष्ट किया है कि यह रोक अस्थायी है और समीक्षा पूरी होने के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। ऐसे में आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण चेतावनी प्रणाली को और अधिक सक्षम और प्रभावी स्वरूप में दोबारा शुरू किए जाने की संभावना बनी हुई है।
देवास में अवैध शराब पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान हंगामा: शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में दो गिरफ्तार

मध्यप्रदेश । देवास जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि अवैध शराब बिक्री की सूचना पर जांच के लिए पहुंची टीम के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, गाली-गलौज की गई और शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया। मामले में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, जिले में अवैध शराब कारोबार और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक Punit Gehlod के निर्देशन, नगर पुलिस अधीक्षक Sumit Agrawal के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी निरीक्षक Shashikant Chaurasiya के नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम क्षेत्र भ्रमण और सूचना संकलन के दौरान गांगरदी चौराहा क्षेत्र में पहुंची थी। यहां एक महिला संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। पुलिस के अनुसार, तलाशी लेने पर महिला के कब्जे से देशी शराब बरामद हुई। इसके बाद संबंधित महिला के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र में एक अन्य महिला द्वारा भी कथित रूप से अवैध शराब का विक्रय किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस दल मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि टीम को देखकर कुछ लोग वहां से भागने लगे। इसी बीच संबंधित महिला और उसके परिजनों ने कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस के अनुसार, विरोध के दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, धक्का-मुक्की की तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करण सिसोदिया उर्फ संतोष शर्मा (25 वर्ष) और संतोष शर्मा (56 वर्ष), निवासी ग्राम भाड़ा पिपल्या, जिला देवास को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा है कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और शासकीय कार्य में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
52 साल के साथ और 41 साल के वैवाहिक रिश्ते को किया सलाम, किरण खेर के जन्मदिन पर अनुपम खेर का भावुक संदेश चर्चा में

नई दिल्ली । बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री और सांसद किरण खेर के जन्मदिन के अवसर पर अभिनेता अनुपम खेर ने एक भावुक संदेश साझा कर उन्हें विशेष अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर साझा किया गया उनका यह पोस्ट तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और प्रशंसकों के साथ-साथ फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। अनुपम खेर ने अपनी पत्नी किरण खेर के साथ एक खूबसूरत तस्वीर साझा करते हुए उनके लिए प्यार, सम्मान और आभार से भरा संदेश लिखा। उन्होंने अपने लंबे साथ को याद करते हुए कहा कि वह किरण को पांच दशक से अधिक समय से जानते हैं और इस दौरान उन्होंने उनसे जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। अभिनेता ने अपने संदेश में उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और लंबी उम्र की कामना भी की। अपने भावनात्मक संदेश में अनुपम खेर ने कहा कि जीवन में कई सीखें ऐसी होती हैं जो समय के साथ धीरे-धीरे समझ में आती हैं। उन्होंने लिखा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने किरण से केवल शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि उनके जीवन जीने के तरीके से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने किरण की हिम्मत, ईमानदारी, मित्रता और व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके जीवन में होने के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर साझा किया गया यह संदेश लोगों को काफी पसंद आ रहा है। प्रशंसकों ने इसे एक सच्चे और मजबूत रिश्ते की मिसाल बताया है। कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए दोनों की जोड़ी की प्रशंसा की और किरण खेर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देकर उन्हें बधाई संदेश भेजे। अनुपम और किरण खेर की प्रेम कहानी लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों की पहली मुलाकात थिएटर के दिनों में हुई थी, जब वे अभिनय की दुनिया में अपने शुरुआती कदम रख रहे थे। समय के साथ दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई और बाद में यह रिश्ता जीवनसाथी के रूप में आगे बढ़ा। वर्ष 1985 में दोनों ने विवाह किया और तब से वे भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे चर्चित और सम्मानित दंपतियों में गिने जाते हैं। किरण खेर ने फिल्मों, टेलीविजन और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वहीं अनुपम खेर भारतीय सिनेमा के सबसे अनुभवी और बहुमुखी कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने देश और विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जन्मदिन के अवसर पर साझा किया गया यह संदेश केवल शुभकामना भर नहीं, बल्कि एक लंबे और मजबूत रिश्ते की झलक भी प्रस्तुत करता है। वर्षों के साथ, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित इस संबंध ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण हैं कि दर्शक आज भी इस जोड़ी को उतना ही पसंद करते हैं जितना पहले करते थे। किरण खेर के जन्मदिन पर मिला यह विशेष संदेश उनके प्रशंसकों के लिए भी यादगार बन गया है। अभिनेता के शब्दों में झलकता स्नेह, सम्मान और अपनापन इस अवसर को और अधिक खास बना रहा है।
उज्जैन में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला साइंस सेंटर: एक महीने तक फ्री एंट्री, विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू हो रहे बच्चे

मध्यप्रदेश । धार्मिक और खगोलीय नगरी के रूप में पहचान रखने वाले उज्जैन को अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी एक नई पहचान मिली है। शहर में मध्यप्रदेश का पहला अत्याधुनिक साइंस सेंटर शुरू हो गया है, जो बच्चों, युवाओं, शोधार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का अनूठा केंद्र बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अप्रैल माह में इस साइंस सेंटर का लोकार्पण किया था। अब इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है और विशेष बात यह है कि पहले एक महीने तक यहां प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। उज्जैन की समृद्ध खगोलीय परंपरा को ध्यान में रखते हुए साइंस सेंटर में एक अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की गई है। इस गैलरी में ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं, ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारियों को आधुनिक डिजिटल तकनीक और आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यहां आने वाले लोग न केवल अंतरिक्ष के रहस्यों को समझ रहे हैं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक विरासत और तकनीकी उपलब्धियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। साइंस सेंटर की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसकी साइंस फन गैलरी है। यहां लगाए गए इंटरएक्टिव मॉडल बच्चों को खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझने का अवसर देते हैं। गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा, गति, प्रकाश, ध्वनि और संतुलन जैसे विषयों को प्रयोगात्मक तरीके से समझाया गया है। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और रुचि बढ़ रही है। सेंटर परिसर में विकसित साइंस पार्क भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। खुले वातावरण में स्थापित वैज्ञानिक उपकरण और मॉडल बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर देते हैं। यहां छात्र किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक रूप में देखकर समझ सकते हैं, जिससे उनकी अवधारणाएं और अधिक मजबूत होती हैं। साइंस सेंटर का आधुनिक प्लेनेटेरियम भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अत्याधुनिक 3D-4K तकनीक से लैस यह प्लेनेटेरियम दर्शकों को अंतरिक्ष की रोमांचक यात्रा पर ले जाता है। यहां प्रदर्शित होने वाली फिल्में जैसे Voyager: The Never Ending Journey और Dawn of the Space Age अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रहों की दुनिया और मानव अंतरिक्ष अभियानों की रोचक जानकारी प्रदान करती हैं। साइंस सेंटर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। एक महीने की निशुल्क अवधि के बाद भी यहां आने वाले लोगों के लिए प्रवेश शुल्क किफायती रखा गया है। प्लेनेटेरियम शो के लिए सामान्य नागरिकों से 50 रुपए शुल्क लिया जाएगा, जबकि विद्यार्थियों को रियायती दरों पर सुविधा उपलब्ध होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साइंस सेंटर प्रदेश में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले समय में यह केंद्र विज्ञान शिक्षा, शोध और जागरूकता का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
बिजली के तार हटाने को लेकर पड़ोसियों में विवाद: महिला से मारपीट का आरोप, सीसीटीवी वीडियो आया सामने

मध्यप्रदेश । शिवपुरी शहर की मदकपुरा कॉलोनी में शनिवार दोपहर पड़ोसियों के बीच चल रहा विवाद उस समय हिंसक रूप ले बैठा, जब बिजली के तार हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी मारपीट तक पहुंच गई। घटना में एक महिला के घायल होने की जानकारी सामने आई है। महिला ने पड़ोसी परिवार पर बाल पकड़कर घसीटने और सड़क पर गिराकर मारपीट करने का आरोप लगाया है। वहीं, घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, मदकपुरा कॉलोनी निवासी शिवानी कुशवाह और उनके पड़ोसी मिथलेश लोधी के परिवार के बीच पहले से कुछ विवाद चल रहा था। शनिवार को बिजली के तार हटाने के मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआती बहस देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई और फिर दोनों पक्षों के बीच मारपीट की स्थिति बन गई। शिवानी कुशवाह ने शिकायत में आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान मिथलेश लोधी, उनके पति अमर लोधी और बेटे हजरत लोधी ने उनके साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, उन्हें बाल पकड़कर सड़क पर गिराया गया और घसीटते हुए पीटा गया। इस घटना में घायल होने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी दोनों पक्षों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की पूरी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के समय आसपास के लोग भी मौजूद थे, लेकिन विवाद बढ़ने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। देहात थाना पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिवानी कुशवाह की रिपोर्ट पर मिथलेश लोधी, अमर लोधी और हजरत लोधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर, मिथलेश लोधी की शिकायत के आधार पर शिवानी कुशवाह और उनके पति के खिलाफ भी क्रॉस केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। इस ताजा घटना के बाद कॉलोनी में चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने दोनों पक्षों को कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने की हिदायत दी है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई कर रही है।
पूरनखेड़ी के पास बड़ा सड़क हादसा टला: कैंटर की टक्कर से ट्रैक्टर तीन हिस्सों में टूटा, चालक फरार

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले में रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। लुकवासा चौकी क्षेत्र के अंतर्गत पूरनखेड़ी के पास बांस से भरे एक ट्रैक्टर और मिर्च से लदी आयशर कैंटर के बीच हुई जोरदार टक्कर में ट्रैक्टर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर तीन हिस्सों में बंट गया और उस पर लदा बांस सड़क पर दूर-दूर तक फैल गया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि या गंभीर चोट की सूचना नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रैक्टर अशोकनगर से बांस लेकर बीरखेड़ी की ओर जा रहा था। इसी दौरान शिवपुरी की दिशा से आ रही मिर्च लदी आयशर कैंटर ने ट्रैक्टर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर का प्रभाव इतना अधिक था कि ट्रैक्टर का अगला और पिछला हिस्सा अलग हो गया तथा वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ट्रैक्टर में लदा बांस राजमार्ग पर बिखर गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। कई वाहन सड़क के दोनों ओर रुक गए और जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई। सूचना मिलने पर स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे तथा सड़क पर फैले बांस को हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद यातायात को सामान्य किया जा सका। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद आयशर कैंटर का चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर चालक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरनखेड़ी क्षेत्र में इन दिनों नव निर्मित पुल के निर्माण कार्य के चलते यातायात एकांकी मार्ग यानी सिंगल लेन से संचालित किया जा रहा है। सड़क का यह हिस्सा अपेक्षाकृत संकरा है, जिसके कारण भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य के कारण पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन नहीं होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों और वाहन चालकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्रबंधन से मांग की है कि निर्माणाधीन हिस्से में जल्द से जल्द आवश्यक सुधार किए जाएं और यातायात के लिए पर्याप्त चौड़ाई उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि मानसून की शुरुआत होने वाली है और यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और फरार कैंटर चालक की तलाश की जा रही है। वहीं, इस हादसे ने एक बार फिर निर्माणाधीन सड़क मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
61 दिन बाद खुलेगा समुद्र का खजाना, तमिलनाडु में फिर रफ्तार पकड़ेगा ₹7000 करोड़ का मत्स्य कारोबार और निर्यात

नई दिल्ली । समुद्री मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लागू की गई 61 दिनों की वार्षिक बंदी समाप्त होने के साथ ही तमिलनाडु में मत्स्य उद्योग एक बार फिर पूरी क्षमता के साथ शुरू होने जा रहा है। इस निर्णय से राज्य के लाखों मछुआरों, समुद्री उत्पाद कारोबारियों और निर्यात क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही राज्य सरकार के राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है। हर वर्ष अप्रैल से जून के बीच समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और मछलियों के प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यांत्रिक नौकाओं द्वारा मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है। इस अवधि के दौरान समुद्री गतिविधियां सीमित रहती हैं, जिससे मछुआरा समुदाय की आय प्रभावित होती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध दीर्घकालिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक है। बंदी अवधि समाप्त होने के बाद तमिलनाडु के तटीय इलाकों में फिर से गतिविधियां तेज हो गई हैं। मछुआरे अपनी नौकाओं की मरम्मत, इंजन परीक्षण, जालों की तैयारी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर समुद्र में वापसी को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद अब हजारों नौकाएं दोबारा समुद्र में उतरने की तैयारी कर रही हैं। तमिलनाडु देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन राज्यों में शामिल है। राज्य की लंबी समुद्री तटरेखा और विकसित मत्स्य अवसंरचना इसे इस क्षेत्र में विशेष पहचान प्रदान करती है। समुद्री उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री मछली पकड़ने की गतिविधियां शुरू होते ही घरेलू बाजारों में आपूर्ति बढ़ेगी और निर्यात क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी। समुद्री खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी हुई है, विशेष रूप से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में। ऐसे में उत्पादन और निर्यात में वृद्धि से विदेशी मुद्रा अर्जन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी मजबूती मिलने की संभावना है। मत्स्य उद्योग से जुड़े व्यापारियों, कोल्ड स्टोरेज संचालकों, परिवहन कंपनियों और प्रोसेसिंग इकाइयों को भी इस पुनः शुरुआत से लाभ मिलने की उम्मीद है। पिछले दो महीनों के दौरान गतिविधियां सीमित रहने से कई व्यवसायों की आय प्रभावित हुई थी। अब कारोबार सामान्य होने के साथ रोजगार और आय के अवसरों में भी वृद्धि देखी जा सकती है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि समुद्री उत्पादों का व्यापार दोबारा गति पकड़ने पर राज्य को हजारों करोड़ रुपये के आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब सरकार विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की तलाश में है। मत्स्य क्षेत्र की यह वापसी केवल एक उद्योग के पुनः संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तटीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, निर्यात और ग्रामीण आजीविका से जुड़े व्यापक आर्थिक तंत्र को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी। आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के प्रदर्शन पर राज्य की आर्थिक गतिविधियों की दिशा काफी हद तक निर्भर रहने की संभावना है।