विशेषज्ञों का कहना, RBI के फैसले से गृह ऋण लेने वालों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से होम लोन (मॉर्गेज) की ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलेगी। रियल एस्टेट मार्केट में अब खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही अपने वित्तीय निर्णयों को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे। विशेषज्ञों ने दी प्रतिक्रियाश्रीनिवास राव, वेस्टियन के सीईओ (FRICS) ने कहा कि रेपो रेट स्थिर रहने से निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद होम लोन दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी, जो घर खरीदने वालों के लिए राहत है। उन्होंने बताया कि यह कदम बढ़ती लागत के असर को कम करने में मदद करेगा और बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार रणनीति बनाने का समय देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह आखिरी बार हो सकता है जब रेपो रेट स्थिर रहे; भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है। शिशिर बैजल, नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि आरबीआई का ‘न्यूट्रल’ रुख अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएगा। उन्होंने बताया कि स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदने वालों के लिए सामर्थ्य बनी रहती है और डेवलपर्स को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक संकेतों से बाजार प्रभावित होता है, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का न होना सकारात्मक संकेत है। विमल नादर, कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड ने कहा कि मौजूदा संकट की तीव्रता और अवधि का असर खपत पर पड़ सकता है, खासकर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और हाउसिंग सेक्टर में। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से सस्ते और मिड-इनकम सेगमेंट के खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू रियल एस्टेट सेक्टर को मध्यम अवधि में मजबूती देंगे। आर्थिक संकेतक: महंगाई और जीडीपीआरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए बैंक ने ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई है। इससे अर्थव्यवस्था पर अप्रत्याशित झटकों का असर कम होगा और मौद्रिक स्थिरता बनी रहेगी। रियल एस्टेट और होम लोन पर असरस्थिर रेपो रेट से होम लोन दरें स्थिर रहेंगी, जिससे घर खरीदने वालों के लिए वित्तीय योजना आसान होगी। डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की योजना और लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से निजी निवेश और मांग को बनाए रखने में सहारा मिलेगा, जबकि सप्लाई चेन बाधाओं और बढ़ती निर्माण लागत जैसी चुनौतियों का असर सीमित रहेगा। आरबीआई का यह निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर और होम लोन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। स्थिर ब्याज दरों से खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही लाभान्वित होंगे, जबकि अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू भविष्य में स्थिर विकास सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, वैश्विक और स्थानीय जोखिमों पर नजर रखना आवश्यक रहेगा।
पद अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव आवश्यक, चयन शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली ट्रस्ट (एनपीएस) में नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह अवसर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट ने सीनियर एग्जीक्यूटिव और अन्य विभिन्न 15 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 8 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 29 अप्रैल निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले अपना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 15 पद शामिल हैं। इन पदों में सीनियर एग्जीक्यूटिव (मार्केटिंग एवं संचार, आईटी एवं संचालन, नेटवर्क एवं संचालन, मानव संसाधन एवं प्रशासन, लीगल), सीनियर एनालिस्ट (पेंशन निधि अनुपालन और प्रदर्शन निगरानी, ट्रस्टी बैंक अनुपालन और योजना लेखापरीक्षा), एनालिस्ट (पेंशन निधि प्रदर्शन और अनुपालन), एग्जीक्यूटिव (निकास एवं निकासी, सोशल मीडिया एवं समन्वय, शिकायतें) आदि शामिल हैं। इन पदों के लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पद अनुसार ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन, सीए (इंटर), एमबीए, पीजीडीएम, एमकॉम, लॉ, बीटेक, एमसीए, सीएफए या एफआरएम में होनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में अनुभव होना अनिवार्य है। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु पद अनुसार 23 से 25 वर्ष और अधिकतम आयु 35 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चयन प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल है। चयनित उम्मीदवारों को पद अनुसार मासिक वेतन 70,000 से 1,50,000 रुपए तक प्रदान किया जाएगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एनपीएस ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और संबंधित पद के लिए जारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकालें। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को सही ढंग से भरें और संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ इसे आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेज दें। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया

नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) का नया अनुमान बुधवार को जारी किया। वित्त वर्ष 2026वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6%, जो पहले 7.4% थी।बढ़ती वृद्धि के कारण: मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार, और घरेलू मांग में मजबूती। दिसंबर तिमाही 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7.8%, जबकि पिछली तिमाही में 8.4% थी। वित्त वर्ष 2027जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9%, जो बाहरी जोखिम और लागत दबाव के कारण थोड़ी नरमी दर्शाता है।पहली तिमाही: 6.8% (पहले 6.9%)दूसरी तिमाही: 6.7% (पहले 7%)मुख्य कारण: ईरान युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव।महंगाई का अनुमानवित्त वर्ष 2027 के लिए CPI मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान।पहली तिमाही: 4%दूसरी तिमाही: 4.4%तीसरी तिमाही: 5.2%चौथी तिमाही: 4.7% आरबीआई के अन्य संकेतबैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी।निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर।विदेशी निवेश आकर्षक बना हुआ है; 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर। नेट FDI में सुधार और ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने चेताया कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी महंगाई का खतरा बढ़ा सकती है और वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है। वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जबकि 2027 में वैश्विक और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वृद्धि में थोड़ा नरमी आने का अनुमान है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने की संभावना है और निजी निवेश आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।
कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर

नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के समग्र और दूरदर्शी विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉस्पेरिटी तक ले जाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे लाभप्रद, टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संचालित करना आवश्यक है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश राज्य किसानों के हित और समग्र कृषि विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभव, सफल प्रयोग और नवाचार साझा किए जाएंगे। यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन योजना तैयार करने का माध्यम होना चाहिए, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने राज्य के कृषि आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है, फिर भी राज्य कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान देता है। योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना उल्लेखनीय उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक शक्ति का आधार कृषि बताया और कहा कि एक समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसमें सशक्त कृषि तंत्र का योगदान महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहले किसान सिर्फ उत्पादक नहीं था, बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बन गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ। उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं। एआई के माध्यम से फसलों का वास्तविक समय विश्लेषण, रोग पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव है। ड्रोन द्वारा उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव तथा सैटेलाइट के माध्यम से मौसम और भूमि की निगरानी कृषि को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना रही है। बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग बदलते मौसम के अनुकूल बीज विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि यह लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखती है। डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म, वन नेशन-वन मंडी प्रणाली, मंडी शुल्क में कमी और डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को सीधे बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल की जगह ‘लैंड इज लैब’ पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। मुख्यमंत्री ने गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अधिकांश मिलें 6-7 दिनों में भुगतान करती हैं। प्रदेश गन्ना उत्पादन में 55 प्रतिशत का योगदान देता है और एथेनॉल उत्पादन में देश में नंबर वन है। सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।
भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

भिण्ड । भिण्ड जिले में मौसम का अचानक बदलता मिजाज किसानों की चिंता का कारण बन गया है। पिछले एक सप्ताह से सुबह तेज धूप और शाम को बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस बदलते मौसम से खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार गेहूँ की फसल पर नकारात्मक असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि यह अचानक बदलते मौसम ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों को प्रभावित किया है। कल देर शाम तेज हवाओं के साथ बादल घिर आए और रात में बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिले के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई। हालांकि देर रात मौसम साफ होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन खेतों में फसल पर इसका असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई जगह गेहूँ के बाल कमजोर हुए और जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उनका नुकसान होने की संभावना है। किसानों का कहना है कि गेहूँ की कटाई का समय करीब है और ऐसी बारिश फसल के बर्बाद होने का जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे मौसम के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं और किसानों को समय पर जानकारी प्रदान करें ताकि वे अपनी फसल की रक्षा कर सकें। इसके अलावा किसानों ने सुझाव दिया है कि मौसम के अनुकूल तकनीकी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिससे कटाई के दौरान नुकसान को कम किया जा सके। मौसम विभाग ने भी भिण्ड जिले में अगले कुछ दिनों के लिए बारिश की संभावना जताई है। किसानों को सतर्क रहने और खेतों में सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के चलते फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। भिण्ड जिले में गेहूँ किसानों की मुख्य फसल है और यह क्षेत्रिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता से किसान परेशान हैं और वे अपने फसल के सही मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। किसान संगठन और स्थानीय प्रशासन भी इस स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसानों को सलाह और मदद प्रदान करने में जुटे हैं। कुल मिलाकर भिण्ड जिले में बदलते मौसम और लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूँ की फसल पर पड़ने वाले असर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मदद और समय पर जानकारी की मांग की है। विशेषज्ञ भी सुझाव दे रहे हैं कि किसानों को अपने खेतों में आवश्यक सुरक्षा उपाय करना चाहिए ताकि फसल की बर्बादी कम से कम हो। ऐसे में आगामी दिनों में मौसम की स्थिति और प्रशासन की मदद दोनों ही किसानों की चिंता को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी

नई दिल्ली।अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के लिए युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बावजूद, सुरक्षित निवेश की मांग के कारण बुधवार को कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला। सोना और चांदी में रिकॉर्ड उछालएमसीएक्स पर सोने का वायदा (5 जून) 3,688 रुपए यानी 2.7% की तेजी के साथ 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया।चांदी का वायदा (5 मई) 6% से अधिक बढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर था। खबर लिखे जाने तक, 5 जून कॉन्ट्रैक्ट सोना 1,54,471 रुपए (+2.8%) और 5 मई कॉन्ट्रैक्ट चांदी 2,45,678 रुपए (+6.19%) पर था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में यह तेजी सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और निचले स्तर पर खरीदारी की वजह से आई है। करंसी और शेयर बाजार में मजबूतीभारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत होकर 92.61 पर पहुंच गया।शेयर बाजार में भी सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4% तक उछल गए। इसका कारण आरबीआई द्वारा रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखना और सीजफायर की घोषणा रही। तेल की कीमतों में भारी गिरावटब्रेंट क्रूड 16% यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल।यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 20% यानी 21.90 डॉलर गिरकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल।बाजार पर प्रभाव विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का सीजफायर ऐलान भू-राजनीतिक तनाव को कुछ हद तक कम कर रहा है। इसके बावजूद अस्थिर वैश्विक हालात और निवेशकों की सतर्कता सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और चांदी की मांग को बढ़ा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश दिए हैं, जो कुछ घंटे पहले दिए गए कड़े बयानों के बाद एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सीजफायर की घोषणा के बावजूद निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित हुए, जिससे सोना और चांदी में तेजी आई, रुपये की मजबूती और शेयर बाजार में उछाल देखा गया।
मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन गाइडेड प्रक्षेपास्त्र युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इस दौरान भारत ने केन्याई रक्षा बलों को 100 इंसास राइफल और करीब 50,000 गोलियां सौंपे। इसके अतिरिक्त, भारत ने केन्या को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। युद्धपोत ‘त्रिकंद’ दक्षिण-पश्चिम हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी ऑपरेशनल तैनाती के तहत मोम्बासा पहुंचा है। इस दौरे के दौरान भारतीय उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन केन्या में मौजूद हैं। पोत के मोम्बासा प्रवास के दौरान कई पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही भारतीय दल केन्या रक्षा बलों को आवश्यक सामग्रियां भी सौंप रहा है। इस यात्रा के दौरान भारत और केन्या के बीच उच्चस्तरीय रक्षा संवाद भी हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने केन्या के रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और सैन्य नेतृत्व के नियमित उच्चस्तरीय दौरों, संस्थागत बैठकों और बढ़ते रक्षा सहयोग की सराहना की। इसी क्रम में केन्या रक्षा बलों को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन प्रदान करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। मोम्बासा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन ने केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओटिएनो को 100 राइफल और 50,000 गोलियां सौंपकर दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भरोसे को मजबूत किया। मोम्बासा से प्रस्थान के बाद युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या नौसेना के जहाजों के साथ समुद्री अभ्यास करेगा। इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की नौसेनाएं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करेंगी और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप हिन्द महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस यात्रा के माध्यम से भारत और केन्या दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सहयोग और मानव सुरक्षा में सहयोग को और प्रगाढ़ किया जा रहा है।
मजबूत रबी फसल के बीच RBI का अनुमान, FY 2026-27 में महंगाई 4.6% रहेगी

नई दिल्ली।देश में महंगाई को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। Reserve Bank of India (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत रबी फसल के चलते खाद्य आपूर्ति बेहतर रहेगी, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी। तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमानआरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है। पहली तिमाही: 4.0%दूसरी तिमाही: 4.4%तीसरी तिमाही: 5.2%चौथी तिमाही: 4.7%यह संकेत देता है कि साल के बीच में महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर यह नियंत्रित दायरे में रहेगी। रबी फसल से मिलेगी राहतअच्छे रबी उत्पादन के कारण बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खाद्य कीमतों पर दबाव कम होगा। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। ऊर्जा कीमतें बनीं चिंता का कारणSanjay Malhotra ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्रीमियम पेट्रोल, एलपीजी और डीजल पर दिख रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव इस स्थिति को और जटिल बना सकता है। कोर महंगाई भी नियंत्रण मेंआरबीआई के अनुसार, कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) 2026-27 में करीब 4.4% रहने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि घरेलू मांग से जुड़ा महंगाई दबाव फिलहाल ज्यादा नहीं है। मौसम और वैश्विक हालात से जोखिममहंगाई के अनुमान के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं- पश्चिम एशिया में जारी संघर्षऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरीसंभावित एल नीनो जैसी मौसम स्थितियांसप्लाई चेन में बाधाएंये सभी कारक भविष्य में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। अर्थव्यवस्था में बनी हुई है मजबूतीफरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। निजी खपत और निवेश मांग आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आगे देखने को मिल सकता है। “वेट एंड वॉच” की रणनीतिआरबीआई ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। Reserve Bank of India का कहना है कि मौजूदा स्थिति एक “सप्लाई शॉक” जैसी है, इसलिए बदलते हालात को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति सही रहेगी। संतुलन बनाए रखने की चुनौतीमौद्रिक नीति समिति (MPC) का मानना है कि महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत है और बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।
कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर उठे सवालों के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने बड़ा बयान दिया है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बुधवार को साफ कहा कि बैंक के कामकाज में किसी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई है और बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह स्थिर है। इस्तीफे के बाद उठे थे सवालहाल ही में बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष Atanu Chakraborty के अचानक इस्तीफे ने हलचल पैदा कर दी थी। उन्होंने कुछ नीतियों और कार्यशैली से असहमति जताते हुए पद छोड़ा था, जिसके बाद बैंक की गवर्नेंस पर सवाल उठने लगे थे। आरबीआई की निगरानी में सब ठीकमौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में Sanjay Malhotra ने कहा कि नियामक निगरानी के दौरान बैंक के संचालन में कोई खामी नहीं पाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा बैंकिंग कानून पर्याप्त और प्रभावी हैं, और फिलहाल उनमें बदलाव की जरूरत नहीं है। “व्यक्तिगत घटनाओं से सिस्टम पर असर नहीं”आरबीआई गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी एक बैंक में हुई व्यक्तिगत घटना पूरे सेक्टर की स्थिरता को प्रभावित नहीं करती।उन्होंने यह भी जोड़ा कि HDFC Bank की वित्तीय स्थिति और मुनाफे को लेकर कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं है। बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश जल्दआरबीआई ने संकेत दिए हैं कि वह बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश लाने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बोर्ड सदस्य रोजमर्रा के कामकाज में उलझने के बजाय नीतिगत और रणनीतिक फैसलों पर ज्यादा ध्यान दें। प्रबंधन और बोर्ड की भूमिकाएं होंगी स्पष्टप्रस्तावित बदलावों के तहत बैंकों के प्रबंधन को दैनिक संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि बोर्ड बड़े फैसलों और दीर्घकालिक रणनीति पर फोकस करेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी होने की उम्मीद है। बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता का संदेशReserve Bank of India के इस बयान से निवेशकों और ग्राहकों को राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में फैली अनिश्चितता कम होगी और बैंकिंग सेक्टर में विश्वास मजबूत बना रहेगा।
किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में 9 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूँ खरीदी को लेकर सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज और सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से वर्चुअल संवाद भी किया और उन्हें प्रदेश की गेहूँ खरीदी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन इसे 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ दिलाना और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है। उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसानों को तुरंत सहायता मिल सके। इसके साथ ही जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, और मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण प्रक्रिया पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से किसानों को खरीदी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने सामाजिक और सेवाभावी संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन उपार्जन केंद्रों पर आकर व्यवस्था में मदद कर सकते हैं, किसानों को मार्गदर्शन दे सकते हैं और प्रशासन के साथ मिलकर कार्य कर सकते हैं। इस वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, और इस दौरान किसानों को उनकी फसल, आय और कल्याण से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जाएगी। डॉ. यादव ने बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता और खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रही है कि उपार्जन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो। किसानों के कल्याण के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें सही मूल्य, उचित सुविधाएं और सरल प्रक्रिया के माध्यम से गेहूँ बेचने का अवसर मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण और कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण के लिए इस प्रक्रिया में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग अनिवार्य है। कंट्रोल रूम से निरंतर निगरानी, हेल्प डेस्क पर सहायता, पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना तथा किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देना इस प्रक्रिया की सफलता की कुंजी होगी। इस प्रकार प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया किसानों के हित और सुविधा के अनुरूप पूरी तरह व्यवस्थित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से किसान कल्याण वर्ष 2026 में उपार्जन केंद्रों पर किसानों की संतुष्टि और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से यह प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और सहज होगी।