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पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून के आगमन से पहले हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है। नगर निगम और प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धरातल पर कमजोर नजर आए। शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई। बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के व्यस्त मार्गों और प्रमुख चौराहों पर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक का मार्ग महज कुछ मिनटों की बारिश में पानी से भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को रास्ता पहचानने में भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस इलाके में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से एम्स की ओर जाने वाले फ्लाइओवर पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर पानी भरने के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी वाहनों की कतार में फंस गई, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा। शहर के पॉश इलाकों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और सात नंबर क्षेत्र भी जलभराव से अछूते नहीं रहे। इन क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहा। कई जगहों पर जल निकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भोपाल में अधूरी सड़क परियोजनाएं भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। कई इलाकों में सीवेज पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन अब तक उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। रचना नगर समेत कई कॉलोनियों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है। वहीं खुले नाले भी शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग और दस नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में नालों को अब तक ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर मिट जाता है, जिससे लोगों के गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार बच्चे और राहगीर नालों में गिर चुके हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी एक बच्चे की जान नाले में गिरने से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। नगर निगम ने मानसून से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने और जलभराव की समस्या को नियंत्रित करने का दावा किया था। हालांकि पहली ही बारिश ने इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम पर है कि वे मानसून के दौरान जलभराव, खुले नालों और अधूरी सड़कों जैसी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से कर पाते हैं। राजधानी के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बारिश उनके लिए राहत लेकर आए, परेशानी नहीं।

‘बांग्लादेश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं’, भारतीय उच्चायुक्त के बयान के विरोध में नाहिद इस्लाम और जमात का सख्त रुख

नई दिल्ली । भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ने भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की एक टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत और बांग्लादेश की पहचान, संप्रभुता और राष्ट्रीय अस्तित्व अलग-अलग हैं तथा दोनों देशों को इसी आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए। यह विवाद उस समय सामने आया जब हाल ही में ढाका में कार्यभार संभालने वाले भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश एक ही आसमान और हवा साझा करते हैं। उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक निकटता और सहयोग को रेखांकित करना था, लेकिन इस बयान को लेकर बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक दलों ने अलग दृष्टिकोण अपनाया। चट्टोग्राम में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान नाहिद इस्लाम ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांग्लादेश एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी राष्ट्रीय पहचान किसी भी अन्य देश से अलग है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी देशों के साथ सम्मान और समानता के आधार पर संबंध चाहता है, लेकिन किसी भी प्रकार के प्रभाव या वर्चस्व की धारणा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके बयान को वहां मौजूद समर्थकों ने भी समर्थन दिया। नाहिद इस्लाम ने अपने संबोधन में भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े कुछ पुराने मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सीमा सुरक्षा, सीमा पर होने वाली घटनाओं और जल संसाधनों से जुड़े मामलों को दोनों देशों के संबंधों में संवेदनशील विषय बताया। उनका कहना था कि इन मुद्दों का समाधान आपसी विश्वास और संवाद के माध्यम से होना चाहिए ताकि द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक वातावरण बना रहे। इस मुद्दे पर केवल एनसीपी ही नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी नेतृत्व ने भारतीय उच्चायुक्त की टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण की मांग उठाई है। इससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में भारत से जुड़े विषय अभी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों के रूप में मौजूद हैं और विभिन्न दल इन पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत से जुड़े मुद्दों पर बयानबाजी का प्रभाव आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार संवाद जारी है, राजनीतिक बयान संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय साझेदारियों में गिने जाते हैं। दोनों देशों ने पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया है। हालांकि समय-समय पर राजनीतिक बयान और घरेलू मुद्दों से जुड़ी प्रतिक्रियाएं सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करती रही हैं। मौजूदा घटनाक्रम भी इसी क्रम की एक कड़ी माना जा रहा है, जिस पर दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

भोपाल की माही लामा का भारतीय बॉक्सिंग टीम में चयन, वर्ल्ड कप 2026 में करेंगी देश का प्रतिनिधित्व

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की युवा मुक्केबाज Mahi Lama ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बॉक्सिंग वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। माही अब चीन में आयोजित होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनके चयन से न केवल भोपाल बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में खुशी का माहौल है। 15 से 20 जून तक चीन में आयोजित होने वाले बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में माही 60 किलोग्राम भार वर्ग में रिंग में उतरेंगी। भारतीय टीम शनिवार रात प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चीन रवाना हो गई। माही का चयन उनके लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन और राष्ट्रीय स्तर पर हासिल उपलब्धियों के आधार पर हुआ है। माही वर्तमान में भोपाल स्थित राज्य बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने कम समय में अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बॉक्सिंग जगत में विशेष पहचान बनाई है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी क्षमता का परिचय दिया है। इसी निरंतर प्रदर्शन का परिणाम है कि उन्हें भारतीय टीम में शामिल होने का मौका मिला है। चीन रवाना होने से पहले माही ने कहा कि उनका पूरा ध्यान वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है और वह इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए देश के लिए पदक जीतने का प्रयास करेंगी। माही ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सम्मान की बात है और वह अपनी तैयारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि माही का चयन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनका मानना है कि प्रतिभा, अनुशासन और लगातार मेहनत किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकती है। माही लामा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित प्रशिक्षण और समर्पण के साथ बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। माही की इस उपलब्धि पर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री Vishvas Kailash Sarang ने भी उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। मंत्री ने विश्वास जताया कि माही वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करेंगी और भारत के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगी। मध्यप्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की विभिन्न खेल अकादमियों से निकलने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। माही लामा का भारतीय टीम में चयन इसी दिशा में प्रदेश की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें चीन में होने वाले बॉक्सिंग वर्ल्ड कप पर टिकी हैं, जहां माही लामा अपने दमदार मुक्कों से भारत को गौरवान्वित करने की कोशिश करेंगी।

होर्मुज संकट के बीच मानवीय त्रासदी: ओमान के पास खड़े जहाज पर भारतीय नाविक की मौत, पार्थिव शरीर को लेकर इंतजार जारी

नई दिल्ली । ओमान के डुक्म पोर्ट के निकट खड़े एक व्यापारी जहाज पर तैनात भारतीय अधिकारी की मृत्यु के बाद समुद्री क्षेत्र में उत्पन्न मानवीय चुनौतियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। जहाज पर मौजूद भारतीय सेकंड ऑफिसर निशांत उर्थनाथन की बीमारी के कारण मौत हो गई, जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने और स्वदेश वापस भेजने को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। करीब 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन तमिलनाडु के निवासी थे और एमटी सेलेस्टियल नामक जहाज पर सेकंड ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार 11 जून को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध न होने और परिस्थितियों के प्रतिकूल होने के बीच उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद से उनका शव जहाज पर ही रखा गया है, जबकि जहाज अभी भी ओमान के तट के पास खड़ा हुआ है। स्थिति को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि जहाज पर शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कोल्ड स्टोरेज या विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में क्रू सदस्यों ने उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। बताया जा रहा है कि ठंडे पानी की बोतलों और अस्थायी उपायों के जरिए शव को संरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक कारगर नहीं रह सकती। जहाज के कप्तान ने एक वीडियो संदेश जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों से तत्काल सहायता की मांग की है। उन्होंने बताया कि जहाज पर मौजूद कर्मचारी बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और पार्थिव शरीर को सम्मानजनक ढंग से सुरक्षित रखने के लिए तत्काल मदद की आवश्यकता है। कप्तान ने यह भी कहा कि समय बीतने के साथ स्थिति और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। इस बीच भारतीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम शुरू कर दिए हैं। संबंधित एजेंसियां जहाज के प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया पर काम कर रही हैं। परिवार तक भी स्थिति की जानकारी पहुंचाई गई है और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्रों में तनाव और अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है। क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अनेक समुद्री कर्मियों को लंबे समय तक समुद्र में ही रहना पड़ रहा है। कई जहाज निर्धारित समय से अधिक अवधि तक विभिन्न बंदरगाहों और समुद्री मार्गों में फंसे हुए हैं, जिससे कर्मचारियों के सामने मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ने वाले प्रभावों के साथ-साथ ऐसे घटनाक्रम मानवीय दृष्टिकोण से भी गंभीर चिंता का विषय हैं। समुद्र में फंसे कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सहायता व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता बन गया है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता निशांत उर्थनाथन के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक स्वदेश पहुंचाना और उनके परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही यह घटना समुद्री क्षेत्र में कार्यरत हजारों कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े व्यापक प्रश्न भी सामने ला रही है।

हजार साल पुराना ऐसा मंदिर, जिसका शिखर आज भी इंजीनियरों को करता है हैरान, जानिए क्यों जमीन पर नहीं पड़ती इसकी परछाई

नई दिल्ली । तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित Brihadeeswarar Temple भारतीय वास्तुकला, इंजीनियरिंग और शिल्पकला का ऐसा अद्भुत नमूना है, जो एक हजार साल बाद भी लोगों को आश्चर्यचकित करता है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर 11वीं शताब्दी में चोल साम्राज्य के महान शासक Rajaraja Chola I द्वारा बनवाया गया था। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की सर्वोच्च उपलब्धियों में गिना जाता है। इतिहासकार K. A. Nilakanta Sastri की प्रसिद्ध पुस्तक The Cholas में इस मंदिर के निर्माण और चोल राजाओं की इंजीनियरिंग क्षमता का विस्तृत वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण में उस समय की उपलब्ध तकनीकों का ऐसा उपयोग किया गया, जिसे आज भी इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जाता है। मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित बात इसकी मजबूत संरचना है। आम धारणा यह है कि यह मंदिर बिना पारंपरिक गहरी नींव के खड़ा है। निर्माण के दौरान विशाल पत्थरों को इस तरह तराशकर एक-दूसरे में फंसाया गया कि उन्हें जोड़ने के लिए आधुनिक सीमेंट या गारे की आवश्यकता नहीं पड़ी। पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक ने पूरी संरचना को असाधारण मजबूती प्रदान की। यही कारण है कि सदियों के दौरान आए कई प्राकृतिक बदलावों और भूकंपीय गतिविधियों के बावजूद यह मंदिर मजबूती से खड़ा हुआ है। मंदिर का एक और रोचक पहलू इसका विशाल शिखर है। लगभग 216 फीट ऊंचे इस शिखर के शीर्ष पर रखा गया ग्रेनाइट का विशाल पत्थर लोगों के लिए आज भी कौतूहल का विषय बना हुआ है। माना जाता है कि इस पत्थर का वजन लगभग 80 टन है। उस दौर में न तो आधुनिक क्रेन थीं और न ही भारी मशीनें, फिर भी इस विशाल पत्थर को इतनी ऊंचाई तक पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। इतिहासकारों के अनुसार, इसके लिए कई किलोमीटर लंबा ढलानदार मार्ग बनाया गया था, जिसके सहारे हाथियों और मजदूरों की मदद से पत्थर को ऊपर तक पहुंचाया गया। बृहदेश्वर मंदिर से जुड़ा सबसे लोकप्रिय रहस्य इसकी परछाई को लेकर है। अक्सर कहा जाता है कि मंदिर के शिखर की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि वास्तुकला और ज्यामिति का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर की ऊंचाई, शिखर की बनावट और सूर्य के कोण को ध्यान में रखकर इसका डिजाइन तैयार किया गया था। परिणामस्वरूप दिन के विशेष समय में शिखर की छाया मंदिर के आधार या चबूतरे के भीतर ही सीमित दिखाई देती है, जिससे लोगों को लगता है कि उसकी परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। मंदिर के निर्माण में लगभग 1.30 लाख टन ग्रेनाइट पत्थरों के उपयोग का उल्लेख भी मिलता है। दिलचस्प बात यह है कि तंजावुर के आसपास बड़ी मात्रा में ग्रेनाइट उपलब्ध नहीं था। ऐसे में इन पत्थरों को दूर-दराज के क्षेत्रों से लाकर इस भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यह तथ्य चोल साम्राज्य की संगठन क्षमता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। आज भी बृहदेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक सोच, वास्तुकला और इंजीनियरिंग कौशल का जीवंत प्रमाण माना जाता है। हजार वर्षों बाद भी इसकी भव्यता और रहस्य दुनिया भर के पर्यटकों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

धर्मशाला वनडे: शुभमन गिल संग तालमेल में भारी चूक, रन आउट होकर गुस्से में पवेलियन लौटे रोहित शर्मा, तोड़ा 37 साल पुराना रिकॉर्ड

नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच धर्मशाला के सुरम्य मैदान पर खेले गए पहले वनडे मुकाबले में एक ऐसा नाटकीय मोड़ देखने को मिला, जिसने मैदान पर मौजूद दर्शकों के साथ-साथ करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया। शानदार बल्लेबाजी कर रहे अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा अपने जोड़ीदार और कप्तान शुभमन गिल के साथ रन लेने के दौरान हुई एक बड़ी गलतफहमी का शिकार हो गए। इस तालमेल की कमी के कारण ‘हिटमैन’ को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट होकर क्रीज छोड़नी पड़ी, जिसके बाद वे मैदान से बाहर जाते समय अपने गुस्से और निराशा को छुपा नहीं सके। बारिश के खलल के कारण इस मुकाबले को अंपायरों द्वारा 25-25 ओवर का कर दिया गया था, जहां भारतीय टीम को जीत के लिए 195 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य मिला था। इस कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय सलामी जोड़ी ने टीम को एक बेहद सधी हुई और आक्रामक शुरुआत दिलाई। रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने अफगानी गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बनाते हुए पहले विकेट के लिए महज 46 रन जोड़ दिए थे। दोनों ही खिलाड़ी बिना किसी जोखिम के आसानी से रन चुरा रहे थे और बाउंड्री बटोर रहे थे, जिससे भारतीय पारी बेहद मजबूत स्थिति की तरफ बढ़ रही थी। यह पूरा वाकया भारतीय पारी के छठे ओवर के दौरान घटित हुआ, जब अफगानिस्तान के युवा मिस्ट्री स्पिनर अल्लाह गजनफर गेंदबाजी मोर्चे पर तैनात थे। रोहित शर्मा ने उनकी एक गेंद को हल्के हाथों से मिडविकेट की दिशा में ढकेला और एक त्वरित सिंगल चुराने के लिए तेजी से दौड़ पड़े। उनके जोड़ीदार शुभमन गिल ने भी शुरुआत में इस रन के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अपने कदम आगे बढ़ाए, लेकिन फील्डर की फुर्ती को देखते हुए गिल ने अचानक अपना मन बदल लिया और बीच रास्ते से ही रोहित को वापस लौटने की ‘ना’ कह दी। शुभमन गिल का यह फैसला रोहित के लिए काफी देर से आया क्योंकि तब तक वे क्रीज से बहुत आगे निकल चुके थे और उनके लिए वापस मुड़ना लगभग असंभव था। इसके बावजूद रोहित शर्मा ने डाइव लगाकर क्रीज में सुरक्षित लौटने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान ने बिना कोई गलती किए बेहद फुर्ती से गेंद को विकेटकीपर की तरफ थ्रो किया, जिन्होंने तुरंत गिल्लियां बिखेर दीं। यह रन आउट इतना साफ था कि थर्ड अंपायर द्वारा रिप्ले देखे जाने की औपचारिकता पूरी होने से पहले ही रोहित शर्मा बेहद गुस्से और झुंझलाहट में पवेलियन की तरफ चल दिए। रोहित शर्मा भले ही केवल 16 रन बनाकर आउट हो गए और एक बड़ी पारी खेलने से चूक गए, लेकिन इस संक्षिप्त उपस्थिति के दौरान भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया। 39 साल और 44 दिन की उम्र में इस मुकाबले में उतरते ही वे भारत के लिए वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने साल 1983 की विश्व विजेता टीम के महान सदस्य मोहिंदर अमरनाथ का करीब 37 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया, जिन्होंने 1989 में 39 साल और 36 दिन की उम्र में अपना आखिरी वनडे खेला था। इसके अतिरिक्त रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बतौर ओपनर खेलते हुए अपने 16000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले वे देश के पहले सलामी बल्लेबाज बन गए हैं। हालांकि भारतीय टीम ने कप्तान शुभमन गिल की शानदार कप्तानी पारी की बदौलत इस मुकाबले को सात विकेट से अपने नाम कर लिया और सीरीज में बढ़त बना ली, लेकिन रोहित का यह रन आउट क्रिकेट पंडितों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बना रहा। अब भारतीय टीम के पूर्व कप्तान लखनऊ में होने वाले अगले वनडे मुकाबले में अपनी इस निराशा को भुलाकर एक धाकड़ पारी खेलने के इरादे से मैदान पर उतरेंगे।

दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कौन सा है? जानिए अरबों के खजाने और रहस्यमयी तहखानों की पूरी कहानी

नई दिल्ली । भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक विरासत की भूमि कहा जाता है। देश में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं जो अपनी भव्य वास्तुकला, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन जब बात दुनिया के सबसे अमीर मंदिर की आती है, तो सबसे पहले नाम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित Sree Padmanabhaswamy Temple का लिया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ अपार संपत्ति और रहस्यमयी खजाने के लिए भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर सदियों पुराना है और इसकी देखरेख परंपरागत रूप से Travancore Royal Family द्वारा की जाती रही है। द्रविड़ शैली में निर्मित इस मंदिर की भव्यता और कलात्मकता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके भूमिगत तहखानों में छिपे खजाने को लेकर है। साल 2011 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मंदिर के कुछ गुप्त तहखानों का निरीक्षण किया गया। इन तहखानों को वॉल्ट या नेत्रकल कहा जाता है। जब इनमें से कुछ कक्ष खोले गए तो वहां से सोने की मूर्तियां, स्वर्ण आभूषण, दुर्लभ हीरे-जवाहरात, प्राचीन सिक्के, स्वर्ण मुकुट और अनेक ऐतिहासिक कलाकृतियां बरामद हुईं। इन वस्तुओं की अनुमानित कीमत उस समय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी। विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि यह केवल आर्थिक मूल्यांकन है। वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इस खजाने की कीमत का सही अनुमान लगाना लगभग असंभव है। कई वस्तुएं सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं और उनका ऐतिहासिक महत्व उन्हें अनमोल बनाता है। मंदिर में कुल छह प्रमुख तहखाने बताए जाते हैं, जिन्हें ए, बी, सी, डी, ई और एफ नाम दिया गया है। इनमें सबसे अधिक चर्चा वॉल्ट बी को लेकर होती है। यह तहखाना आज भी पूरी तरह नहीं खोला गया है। इसके बारे में कई तरह की लोककथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इस कक्ष को विशेष धार्मिक विधियों के माध्यम से सील किया गया था और इसे खोलना शुभ नहीं माना जाता। हालांकि इन दावों की कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वॉल्ट बी को लेकर फैली रहस्यमयी कहानियों ने मंदिर को और अधिक चर्चित बना दिया है। यही वजह है कि दुनियाभर के इतिहासकार, शोधकर्ता और पर्यटक इस मंदिर के बारे में जानने में विशेष रुचि रखते हैं। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इसकी सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। यहां चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाती है। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केवल धन-संपत्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर में सुरक्षित खजाना भारतीय इतिहास के अनेक अध्यायों को अपने भीतर समेटे हुए है। यही कारण है कि यह मंदिर आज भी श्रद्धा, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम बना हुआ है।

'भारत विरोधी' आफरीदी संग नजर आए मुनव्वर फारूकी, दुबई मुलाकात का वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर कॉमेडियन की जमकर ट्रोलिंग

नई दिल्ली। मनोरंजन जगत के मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन और रियलिटी शो विजेता मुनव्वर फारूकी इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। इंटरनेट पर उनका एक ताजा वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वे पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और आक्रामक ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी के साथ नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग कॉमेडियन को उनके इस कदम के लिए बुरी तरह से आड़े हाथों ले रहे हैं। यह पूरी घटना संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बताई जा रही है, जहां दोनों की अचानक मुलाकात हुई थी। वायरल हो रहे वीडियो के दृश्यों में देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी अपने मोबाइल फोन पर किसी अन्य व्यक्ति से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर रहे हैं। इसी दौरान उनके ठीक पीछे मुनव्वर फारूकी खड़े हुए दिखाई देते हैं, जो काफी सहज और मुस्कुराते हुए फ्रेम में नजर आ रहे हैं। इस संक्षिप्त मुलाकात के फुटेज जैसे ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुए, वैसे ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। भारतीय खेल प्रशंसकों और आम नागरिकों के बीच शाहिद आफरीदी की छवि लगातार विवादों से घिरी रही है। आफरीदी अक्सर विभिन्न वैश्विक मंचों और सार्वजनिक बयानों में भारत, भारतीय नीतियों और देश के अंदरूनी मामलों के खिलाफ जहर उगलते हुए नजर आते हैं। उनके कई पुराने और नए बयान भारतीय नागरिकों को आहत करने वाले रहे हैं, जिसके कारण भारत में उन्हें लेकर भारी नाराजगी और विरोध की भावना रहती है। ऐसे में एक लोकप्रिय भारतीय हस्ती का उनके साथ इस तरह दोस्ताना अंदाज में दिखना कई लोगों को रास नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर मुनव्वर फारूकी को ट्रोल करने वाले यूजर्स लगातार उनके इस रवैए पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति लगातार भारत के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करता है, उसके साथ भारतीय कलाकारों का इस तरह का जुड़ाव देश की भावनाओं का अपमान है। एक्स और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों पर नेटिजंस मुनव्वर को देशभक्ति और अपनी प्राथमिकताओं को लेकर नसीहत दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करार दिया है, तो कुछ इसे केवल पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं। मुनव्वर फारूकी के करियर और विवादों का पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार का विवाद सीधे तौर पर राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा होने के कारण अधिक तूल पकड़ता जा रहा है। खेल और मनोरंजन के वैश्विक गढ़ दुबई में हुई इस मुलाकात ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच के संवेदनशील सांस्कृतिक और राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। आलोचकों का मानना है कि भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय दौरों पर ऐसी हस्तियों के साथ दिखने से बचना चाहिए जिनकी पहचान भारत विरोधी बयानों से जुड़ी हो। फिलहाल इस पूरे मामले पर और सोशल मीडिया पर हो रही चौतरफा फजीहत को लेकर मुनव्वर फारूकी या उनकी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इंटरनेट पर इस वीडियो को लेकर शुरू हुआ विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है और नेटिजंस लगातार उनके इस वीडियो को शेयर कर अपनी नाराजगी दर्ज करा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस भारी विरोध का मुनव्वर के आगामी शोज और उनकी फैन फॉलोइंग पर क्या असर पड़ता है।

वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल के वनडे और सीमित ओवरों के करियर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी भविष्यवाणी की है। वर्तमान में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे श्रृंखला के दौरान टीम संयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सहवाग का यह बयान सामने आया है। आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के हैमस्ट्रिंग की चोट का शिकार होने के बाद यशस्वी जायसवाल को बैकअप के रूप में भारतीय टीम में शामिल किया गया है। मुख्य रूप से शीर्ष क्रम और ओपनिंग स्लॉट में बल्लेबाजी करने वाले यशस्वी जायसवाल के लिए इस समय भारतीय वनडे टीम के अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें बेंच पर बैठना पड़ रहा है। इस स्थिति पर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच लगातार बहस चल रही है कि क्या इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतिम एकादश से बाहर रखना सही है। इसी विषय पर अपनी बेबाक राय रखते हुए पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने जायसवाल के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और दूरदर्शी खाका खींचा है। वीरेंद्र सहवाग ने स्पष्ट रूप से माना कि इस समय भारतीय वनडे टीम के शीर्ष क्रम में जगह बनाना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने मौजूदा टीम समीकरण का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में शुभमन गिल टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं और रोहित शर्मा जैसा अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी भी बतौर ओपनर टीम की पहली पसंद बना हुआ है। ऐसी मजबूत और स्थापित ओपनिंग जोड़ी के रहते यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए आसान नहीं है, क्योंकि वे मध्यक्रम के बल्लेबाज नहीं हैं और शीर्ष क्रम में कोई जगह खाली नहीं है। पूर्व सलामी बल्लेबाज ने जायसवाल के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी को निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका समय जल्द ही आने वाला है। सहवाग के अनुसार, जैसे ही सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे और अपने संन्यास की घोषणा करेंगे, वैसे ही यशस्वी जायसवाल के लिए भारतीय वनडे और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाएंगे। रोहित के हटने के बाद जायसवाल को राष्ट्रीय टीम में लगातार और नियमित रूप से खेलने के मौके मिलने शुरू हो जाएंगे, जो उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। इस आगामी रेस में चुनौतियों का जिक्र करते हुए सहवाग ने यह भी जोड़ा कि यशस्वी जायसवाल को टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए ऋतुराज गायकवाड़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। गायकवाड़ भी लगातार घरेलू क्रिकेट और मिले हुए मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, सहवाग का मानना है कि यदि भारतीय चयनकर्ता और टीम प्रबंधन भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए अपनी टीम में तीन मुख्य ओपनर बल्लेबाजों का चयन करते हैं, तो यशस्वी जायसवाल निश्चित रूप से उन शीर्ष विकल्पों में शामिल होंगे। वर्तमान समय में यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से गहरी छाप छोड़ी है। सहवाग जैसे महान खिलाड़ी की इस भविष्यवाणी से साफ है कि भविष्य की भारतीय वनडे टीम के निर्माण में जायसवाल को एक मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। भले ही अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला में वे अंतिम एकादश का हिस्सा न बन पा रहे हों, लेकिन रोहित शर्मा के युग के बाद भारतीय क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल की जोड़ी को भविष्य की सलामी जोड़ी के रूप में तैयार किया जा रहा है।

‘तड़प-तड़प’ सुनकर फूट-फूटकर रो पड़े थे सलमान खान! इस्माइल दरबार ने सुनाया भावुक किस्सा

नई दिल्ली । बॉलीवुड की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों और यादगार फिल्मों में शामिल Hum Dil De Chuke Sanam आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती है। फिल्म की कहानी, किरदारों और संगीत ने इसे एक क्लासिक फिल्म का दर्जा दिलाया। खासकर इसका दर्दभरा गीत Tadap Tadap Ke आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है। अब फिल्म के संगीतकार Ismail Darbar ने इस गाने से जुड़ा एक भावुक किस्सा साझा किया है। एक हालिया इंटरव्यू में इस्माइल दरबार ने बताया कि यह गाना सिर्फ दर्शकों को ही नहीं, बल्कि फिल्म के मुख्य अभिनेता Salman Khan को भी गहराई से प्रभावित करता था। उनके अनुसार, जब भी सलमान यह गाना सुनते थे तो भावुक हो जाते थे और कई बार उनकी आंखों से आंसू निकल आते थे। इस्माइल दरबार ने बताया कि एक दिन फिल्म के निर्देशक Sanjay Leela Bhansali के साथ गाने की रिकॉर्डिंग और सुनवाई का दौर चल रहा था। उसी दौरान माहौल अचानक गंभीर हो गया। जब उन्होंने कारण पूछा तो सलमान ने कहा कि यह गाना उन्हें बेहद दर्द देता है और जब भी वह इसे सुनते हैं तो भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। संगीतकार के मुताबिक सलमान ने उनसे अनुरोध भी किया था कि इस गाने को उनके सामने बार-बार न बजाया जाए, क्योंकि इसके बोल और संगीत उनके दिल को गहराई से छू जाते हैं। इस्माइल दरबार ने कहा कि उन्होंने सलमान को उस समय बेहद बेचैन और भावुक अवस्था में देखा था। उनके अनुसार, अभिनेता को कई बार रोते और दर्द में चिल्लाते हुए भी देखा गया। फिल्म से जुड़ी यादों को साझा करते हुए इस्माइल दरबार ने यह भी कहा कि उस दौर में पूरी टीम के बीच पारिवारिक माहौल था। यही वजह थी कि फिल्म में दिखी भावनाएं पर्दे पर भी वास्तविक महसूस हुईं। इससे पहले निर्देशक Sanjay Leela Bhansali भी फिल्म के सेट के माहौल को याद कर चुके हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि फिल्म के दौरान कलाकारों और तकनीकी टीम के बीच सिर्फ पेशेवर रिश्ता नहीं था, बल्कि सभी एक परिवार की तरह जुड़े हुए थे। सेट पर प्यार, सम्मान और अपनापन साफ दिखाई देता था। गौरतलब है कि फिल्म में Aishwarya Rai Bachchan और सलमान खान की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। फिल्म की रिलीज के बाद दोनों के रिश्तों को लेकर भी काफी चर्चाएं हुईं। हालांकि बाद के वर्षों में दोनों ने कभी साथ काम नहीं किया। वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान हाल ही में Sikandar में नजर आए थे। वहीं आने वाले समय में वह नई फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करते दिखाई देंगे। दूसरी ओर, ‘तड़प-तड़प’ जैसे गीत आज भी यह साबित करते हैं कि अच्छा संगीत समय की सीमाओं से परे जाकर लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहता है।