प्रकृति के करीब बिताएं वक्त, इन destinations पर मिलेंगे शांति और ताजगी!

नई दिल्ली। आज की तेज़ और तनावपूर्ण जिंदगी में हर कोई कुछ समय प्रकृति के करीब बिताना चाहता है। शहरों की भागदौड़, ट्रैफिक और प्रदूषण से दूर जाना हर किसी की ख्वाहिश होती है। ऐसे में ईको-फ्रेंडली ट्रैवल एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आता है। ये जगहें सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर नहीं होतीं, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना छुट्टियों का अनुभव भी देती हैं। भारत में कई ऐसे स्थान हैं जहां हरी-भरी वादियां, साफ हवा और शांत वातावरण का आनंद लिया जा सकता है। ये डेस्टिनेशन खासतौर पर उन लोगों के लिए परफेक्ट हैं, जो भीड़भाड़ से दूर, सस्टेनेबल और रिलैक्सिंग छुट्टियां बिताना चाहते हैं। कूर्ग: हरियाली और कॉफी बागानकर्नाटक का कूर्ग अपनी हरियाली, कॉफी बागानों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां के ईको-रिसॉर्ट्स और नेचर स्टे आपको प्रकृति के करीब रहने का अनोखा अनुभव देते हैं। पहाड़ों की ठंडी हवा, बहती नदियां और चाय-कॉफी बागान हर किसी के मन को सुकून देते हैं। कूर्ग उन लोगों के लिए आदर्श है जो रिलैक्सेशन और प्रकृति के साथ कनेक्ट होना चाहते हैं। स्पीति वैली: अनछुई खूबसूरतीहिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली शांति और अनछुई खूबसूरती का प्रतीक है। यह शीत रेगिस्तान घाटी एडवेंचर और सुकून दोनों की चाह रखने वालों के लिए आदर्श है। यहां कम प्रदूषण, साफ वातावरण और लोकल ईको-फ्रेंडली जीवनशैली यात्रा का अनुभव और भी खास बनाती है। मावलिननॉन्ग गांव: एशिया का सबसे स्वच्छ गांवमेघालय में स्थित मावलिननॉन्ग गांव 2003 में एशिया का सबसे स्वच्छ गांव घोषित हुआ। यह महिला प्रधान गांव प्लास्टिक-फ्री और सस्टेनेबल जीवनशैली के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां के लिविंग रूट ब्रिज और पर्यावरण जागरूकता इसे विशेष बनाते हैं। पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह जगह प्रकृति और लोकल संस्कृति के करीब होने का अनोखा अनुभव देती है। औरोविल: सस्टेनेबल शहरतमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में स्थित औरोविल मानव एकता और सस्टेनेबल जीवनशैली का प्रतीक है। यह शहर मेडिटेशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग और ग्रीन लिविंग के लिए जाना जाता है। चेन्नई से लगभग 150 किलोमीटर दूर यह जगह शांति और प्रकृति के साथ जुड़ाव का अनुभव देती है। कुमाऊं: पहाड़ों की सुकून भरी वादियांउत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र खूबसूरत पहाड़ों, जंगलों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन और पंतनगर एयरपोर्ट से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां के ईको-स्टे और होमस्टे आपको प्रकृति के करीब रहकर शांति और सुकून का अनुभव देते हैं। अगर आप शहर की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर शांति चाहते हैं, तो कूर्ग, स्पीति वैली, मावलिननॉन्ग, औरोविल और कुमाऊं जैसे ईको-फ्रेंडली स्थान आपके लिए परफेक्ट हैं। यहां आपको हरी-भरी वादियां, साफ हवा, सस्टेनेबल लाइफस्टाइल और लोकल संस्कृति का अनोखा अनुभव मिलेगा। ये जगहें छुट्टियों के दौरान प्रकृति से जुड़ाव और मानसिक सुकून देने के लिए सबसे बेहतरीन हैं।
बालों को नेचुरली काला करने के लिए आसान नुस्खे, एक बार जरूर ट्राई करें

नई दिल्ली। आज के समय में बालों की मजबूती बनाए रखना उन्हें समय-समय पर कलर करना बहुत जरूरी हो जाता है लोग पार्लर में जाकर काफी ज्यादा पैसे खर्च करते हैं इसके साथ ही मार्केट में मिलने वाले भी पेस्ट बालों में लगाते हैं ताकि बाल काला बना रहे। इन सब के बीच आपको काफी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है तो चलिए कुछ ऐसे नुस्खे बताते हैं जिन्हें अपना कर आप घर पर ही बालों को कला और चमकीला बना सकते हैं। आंवले का तेलआंवला विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना है, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और सफेद होने की प्रक्रिया को धीमा करता है। घर पर आंवले का तेल बनाने के लिए सूखे आंवले के टुकड़े और नारियल तेल एक लोहे की कड़ाही में डालकर तब तक गर्म करें जब तक मिश्रण गहरा काला न हो जाए। हल्का ठंडा होने पर इसे बालों की जड़ों में लगाएं। करी पत्ता और नारियल तेलकरी पत्ता केवल पेट की समस्याओं के लिए नहीं, बल्कि बालों के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद विटामिन बी कॉम्प्लेक्स हेयर फॉलिकल्स को मजबूत बनाता है। नारियल तेल में करी पत्ता डालकर हल्का गर्म करें और फिर इसे छानकर बालों में लगाएं। इससे बाल जल्दी सफेद नहीं होंगे और सप्ताह में दो बार लगाने से काले और घने बाल पाने में मदद मिल सकती है। सरसों का तेल और मेथीसरसों के तेल में मेथी दाने मिलाकर लगाने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बालों का प्राकृतिक रंग काला रहता है। इसे नियमित रूप से लगाने से बाल घने, मजबूत और लंबे बनते हैं। साथ ही, डैंड्रफ की समस्या में भी राहत मिलती है। इन तेलों को लगातार प्रयोग में लाने से बालों की सफेदी कम होती है, घनत्व बढ़ता है और लंबे समय तक प्राकृतिक रंग बनाए रखा जा सकता है। अब केमिकल या मेहंदी का सहारा लेने की जरूरत नहीं, और आपका पैसा भी काफी बचेगा आपको पार्लर भी जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बार-बार।
पिंपल्स और मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए गर्मियों में अपनाएं ये आसान नुस्खे!

नई दिल्ली। गर्मियों में पसीना और चेहरे का ऑयल बढ़ जाता है, जिससे मुहांसे या एक्ने की समस्या आम हो जाती है। तेज धूप, लू, धूल और गंदगी भी स्किन के लिए चुनौती बनते हैं। अगर आप बार-बार पिंपल्स से परेशान हैं, तो सबसे पहले कारण समझना जरूरी है। ज्यादातर गर्मियों में मुहांसे बढ़ने का कारण अत्यधिक पसीना, ऑयल प्रोडक्शन और स्किन पर जमा गंदगी होती है। दिन में दो बार चेहरे की सफाईमुहांसे कंट्रोल करने के लिए दिन में दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा धोएं। इससे चेहरे से अतिरिक्त तेल, धूल और बैक्टीरिया हटते हैं और स्किन साफ रहती है। ध्यान रखें कि अत्यधिक हार्श साबुन या फेस वॉश से त्वचा को नुकसान न पहुंचे। ऑयल-फ्री मॉइश्चराइज़र और सनस्क्रीनगर्मियों में चेहरे पर ऑयल-फ्री मॉइश्चराइज़र लगाएं। साथ ही दिन में सनस्क्रीन जरूर इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से सुरक्षित रहे। सही मॉइश्चराइज़र स्किन को हाइड्रेट रखता है और पिंपल्स को रोकने में मदद करता है। बर्फ और आइस फेशियलपिंपल्स से होने वाली सूजन और रेडनेस कम करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल करें। चेहरे पर सीधे बर्फ न लगाएं; किसी कपड़े में लपेटकर हल्के हाथों से 2-4 मिनट तक रगड़ें। हफ्ते में 2-3 बार आइस फेशियल करने से त्वचा को ठंडक मिलती है और पिंपल्स धीरे-धीरे कम होते हैं। नीम और एलोवेरा के फायदेरात को सोने से पहले चेहरे पर नीम का रस या एलोवेरा जेल लगाएं। ये स्किन को टाइट और हेल्दी रखता है। इसके अलावा गुलाब जल चेहरे को हाइड्रेट और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। हाथों और चेहरे की सफाईमुहांसे बढ़ने का एक बड़ा कारण है बार-बार चेहरा छूना। हाथ और चेहरा दोनों साफ रखें। गंदे हाथों से चेहरे को छूने पर बैक्टीरिया फैल सकते हैं और पिंपल्स बढ़ सकते हैं। हेल्दी डाइट और पर्याप्त पानीस्वस्थ त्वचा के लिए हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी लें। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और रक्त साफ करता है, जिससे स्किन पर इसका सकारात्मक असर दिखता है। नींद और रूटीननींद की कमी से भी स्किन प्रॉब्लम बढ़ती है। गर्मियों में पर्याप्त नींद लेना जरूरी है ताकि त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहे। केमिकल प्रोडक्ट्स और साफ-सफाईपिंपल्स आने पर उन्हें दबाना या स्किन पर केमिकल प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल करना टालें। गंदे तौलिए और तकिये का इस्तेमाल बंद करें, ताकि बैक्टीरिया और धूल से त्वचा सुरक्षित रहे। गर्मियों में पिंपल्स बढ़ने का मुख्य कारण ऑयल, पसीना और धूल है। दिन में दो बार चेहरा धोएं, ऑयल-फ्री मॉइश्चराइज़र और सनस्क्रीन लगाएं, आइस फेशियल और नीम-एलोवेरा का इस्तेमाल करें। हाथ और चेहरा साफ रखें, हेल्दी डाइट अपनाएं और पर्याप्त नींद लें। इससे मुहांसे कम होंगे और त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग रहेगी।
Indian automobile industry : ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!

Indian automobile industry : नई दिल्ली। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसएवीडब्ल्यूआईपीएल) ने मंगलवार को पुणे स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में अपडेटेड फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू करने की घोषणा की। कंपनी का कहना है कि यह कदम उनकी ‘मेक इन इंडिया, फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड’ रणनीति को मजबूती प्रदान करेगा और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करेगा। नया डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स एसएवीडब्ल्यूआईपीएल के अनुसार, अपडेटेड टाइगुन में नया डिजाइन और बेहतर प्रीमियम फीचर्स शामिल हैं। इसे भारतीय ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है, जबकि यूरोपीय ड्राइविंग डायनामिक्स, आराम और सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे भारतीय ग्राहक उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ आरामदायक अनुभव का लाभ उठा सकेंगे। उत्पादन शुरू होने पर कंपनी की प्रतिक्रिया कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ पीयूष अरोरा ने कहा, “नई फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू होना भारत में हमारे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है। हमारी भारत स्थित इकाइयां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वाहनों का उच्च स्तरीय स्थानीयकरण करने के लिए तैयार हैं। यह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों की जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा करने में मदद करेगा। एसयूवी पोर्टफोलियो में मजबूती ब्रांड निदेशक नितिन कोहली ने कहा कि टाइगुन लॉन्च के बाद से ही कंपनी की एसयूवी रणनीति का केंद्र रही है और इसने कंपनी के पोर्टफोलियो को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाकन प्लांट में उत्पादन भारतीय ग्राहकों के प्रति कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बाजार में टाइगुन का प्रदर्शन 2021 में लॉन्च हुई टाइगुन ने प्रदर्शन, आराम और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। कंपनी के अनुसार, अब तक 1.43 लाख से अधिक यूनिट्स का उत्पादन हो चुका है, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत का निर्यात वैश्विक बाजारों में किया गया है। पुणे प्लांट और कंपनी की स्थिति पुणे स्थित यह कंपनी ऑडी, पोर्श, लैम्बोर्गिनी और बेंटले सहित फॉक्सवैगन समूह के छह ब्रांडों का भारत में संचालन करती है। कंपनी ने 25 वर्ष पूर्व भारत में परिचालन शुरू किया था और वर्तमान में चाकन और छत्रपति संभाजीनगर में दो विनिर्माण संयंत्र संचालित करती है, जिनकी संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.15 लाख यूनिट्स है। कर्मचारियों और ग्राहक सेवा नेटवर्क वर्तमान में कंपनी के लगभग 700 ग्राहक संपर्क केंद्र हैं और लगभग 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फॉक्सवैगन ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्राहक सेवा और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती प्रदान की है।
fishery statistics India : भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन!

fishery statistics India : नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मछली उत्पादन 197.75 लाख टन तक पहुंच गया, जो 2013-14 के 95.79 लाख टन की तुलना में 106 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% योगदान कर रहा है। मत्स्य पालन क्षेत्र ने न केवल उत्पादन में उछाल दिखाया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, आय सृजन और खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय बजट में अब तक का सबसे बड़ा आवंटन केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 2,761.80 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक बजट है। इसमें से 2,500 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत आवंटित किए गए हैं। इस योजना के माध्यम से तालाब, जलाशय पिंजरे, मछली परिवहन इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी ढांचा सुविधाओं का विकास हो रहा है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है। रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा, 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा कवरेज और लगभग 7.44 लाख मछुआरा परिवारों को आजीविका सहायता प्रदान की गई है। क्षेत्र में इस वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई की भूमिका सरकार ने बताया कि नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई ने उत्पादन, मूल्य शृंखला और बुनियादी ढांचे में नई गति दी है। इसके तहत हजारों तालाबों और जलाशयों में पिंजरे लगाए गए हैं, 27,189 मछली परिवहन इकाइयों का निर्माण हुआ है और 12,081 आरएएस इकाइयां एवं 4,205 बायो-फ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इन तकनीकी बदलावों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों को आधुनिक तरीकों से लाभान्वित किया है। निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने से समुद्री खाद्य निर्यात में भी तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। फ्रोजन झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद बने हुए हैं, जिनके बड़े बाजार अमेरिका और चीन हैं। सरकार ने बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के माध्यम से निर्यात नेटवर्क को भी मजबूत किया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आई है। भविष्य की राह मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में उत्पादन, रोजगार और निर्यात में और वृद्धि हो। पीएमएमएसवाई और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से भारत विश्व स्तर पर मत्स्य पालन में अग्रणी देश बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुंचकर 106% बढ़ गया। पीएमएमएसवाई और नीली क्रांति ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार में नई गति दी है। मत्स्य पालन क्षेत्र अब ग्रामीण आय, रोजगार और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार ने बजट 2026-27 में 2,761.80 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिससे आधुनिक तकनीक, आरएएस और बायो-फ्लॉक इकाइयों के माध्यम से उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।
Betul boring mafia : कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप

Betul boring mafia : बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में किसानों की परेशानियां एक बार फिर सामने आई हैं जहां आमला ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में बोरिंग मशीन संचालकों पर शोषण के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। रबी फसल और गन्ने की कटाई के बाद सिंचाई की जरूरत बढ़ने के साथ ही बोर खनन की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है और इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ बाहरी एजेंटों द्वारा कथित रूप से मनमानी वसूली की जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि हर साल फरवरी से अप्रैल के बीच बोरिंग का काम तेजी से बढ़ता है और इस दौरान मशीन संचालकों की मांग अधिक हो जाती है। इसी दबाव का फायदा उठाते हुए बाहर से आए कुछ लोग अनियमित तरीके से काम कर रहे हैं और किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। आरोप है कि शुरुआत में कम रेट बताकर किसानों को काम के लिए तैयार किया जाता है लेकिन जैसे ही काम शुरू होता है बीच में ही कीमतें बढ़ा दी जाती हैं। ऐसे में किसान मजबूरी में बढ़ी हुई रकम देने को विवश हो जाते हैं क्योंकि काम अधूरा छोड़ना उनके लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि कोई बढ़ी हुई कीमत देने से मना करता है तो मशीन संचालक काम बीच में ही रोक देते हैं। इतना ही नहीं कुछ मामलों में किसानों को धमकाने और जान से मारने तक की धमकी देने की बातें भी सामने आई हैं जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं। आमला और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं बढ़ने से किसानों की चिंता और गहरा गई है। पहले से ही लागत और मौसम की मार झेल रहे किसान अब इस तरह की अवैध वसूली से और अधिक दबाव में आ गए हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और बोरिंग मशीन संचालकों के लिए स्पष्ट दरें तय करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक लग सके। साथ ही ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है जो किसानों का शोषण कर रहे हैं। यह मामला न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और किसानों को इस संकट से कितनी राहत मिल पाती है।
flight cancellations : केंद्र ने बताया, सुरक्षा कारणों से West Asia जाने वाली फ्लाइट्स पर लगाया ब्रेक!

flight cancellations : नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया के लिए भारतीय उड़ानों में भारी रद्दीकरण हुआ है। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि युद्ध से पहले भारतीय एयरलाइंस प्रतिदिन 300-350 उड़ानें संचालित करती थीं, जो अब घटकर सिर्फ 80-90 रह गई हैं। fishery statistics India : भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन! अधिकारियों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी के हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया। इसके बावजूद, भारतीय एयरलाइंस लगातार काम कर रही हैं और कार्गो सेवा भी जारी है। डीजीसीए ने पायलटों के लिए छूट दी मध्य पूर्व के एयरस्पेस बंद होने के कारण लंबी दूरी की उड़ानों में पायलटों को ड्यूटी टाइम लिमिट का पालन करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने अस्थायी रूप से पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी समय (FDTL) बढ़ाने की अनुमति दी। Scindia viral video : ग्वालियर की एलिवेटेड रोड पर ‘दौड़ते’ दिखे सिंधिया, निरीक्षण बना चर्चा का विषय नए नियमों के अनुसार, पायलटों को 48 घंटे का लगातार आराम मिलना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था। यह छूट लंबी उड़ानों में थकान कम करने और उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दी गई है।
Middle East Crisis Impact : मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!

Middle East Crisis Impact : नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की बैटरी निर्माता कंपनी LG एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड ने मंगलवार को बताया कि जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में उसे 207.8 बिलियन वॉन (लगभग 138.2 मिलियन डॉलर) का ऑपरेटिंग घाटा हुआ। यह घाटा पिछले साल की इसी तिमाही में हुए 374.7 बिलियन वॉन के मुनाफे के विपरीत है। Betul boring mafia : कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप कंपनी की बिक्री 2.5 प्रतिशत गिरकर 6.55 ट्रिलियन वॉन रह गई। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका-ईरान युद्ध और मध्य पूर्व संकट के कारण बढ़ी उत्पादन लागत इस घाटे का प्रमुख कारण रही। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) बैटरी उत्पादन में शुरुआती निवेश का असर भी पड़ा। कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट के तहत उसे 189.8 बिलियन वॉन का टैक्स क्रेडिट मिला है। यदि यह क्रेडिट न होता, तो वास्तविक ऑपरेटिंग घाटा 397.5 बिलियन वॉन तक पहुँच जाता। Scindia viral video : ग्वालियर की एलिवेटेड रोड पर ‘दौड़ते’ दिखे सिंधिया, निरीक्षण बना चर्चा का विषय एलजी ग्रुप के चेयरमैन कू क्वांग-मो ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री में बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित LG एनर्जी सॉल्यूशन वर्टेक का दौरा भी किया, क्योंकि कंपनी उत्तरी अमेरिका के ESS मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।
DGCA new guidlines : अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!

DGCA new guidlines : नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के कई देशों का एयरस्पेस बंद होने के चलते लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस स्थिति में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों के ड्यूटी समय (FDTL) नियमों में अस्थायी राहत देने का फैसला किया है। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि लंबी उड़ानों के कारण एयरलाइंस को नियमों का पालन करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए दो पायलट वाली लंबी उड़ानों के लिए फ्लाइट टाइम (FT) को 1 घंटे 30 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट और फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) को 1 घंटे 45 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 45 मिनट कर दिया गया है। Betul boring mafia : कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप DGCA ने कहा कि इससे पायलटों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आराम का ध्यान रखा जाएगा और नियमों का उल्लंघन नहीं होगा। पिछले साल लागू किए गए नियमों के तहत पायलटों को 48 घंटे लगातार आराम देना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था। साथ ही, रेगुलेटर ने एयरलाइंस पर निगरानी बढ़ा दी है। इसमें पायलट रोस्टर, क्रू की उपलब्धता, बैकअप व्यवस्था और सिस्टम की मजबूती पर खास ध्यान दिया जाएगा। DGCA अधिकारी हर दो महीने में एयरलाइंस का निरीक्षण करेंगे और साप्ताहिक तथा पखवाड़े के आधार पर निगरानी जारी रहेगी। सेलिब्रिटी वॉर्नर पर कानून की नजर, शराब-वाहन विवाद बना चर्चा का केंद्र! DGCA का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और केवल मिडिल ईस्ट के संघर्ष वाले एयरस्पेस को बायपास करने वाली लंबी उड़ानों पर लागू होगी।
सेलिब्रिटी वॉर्नर पर कानून की नजर, शराब-वाहन विवाद बना चर्चा का केंद्र!

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर और विस्फोटक बल्लेबाज डेविड वॉर्नर मुश्किल में फंस गए हैं। रविवार को मारूब्रा के एक नियमित ब्रेथ-टेस्टिंग अभियान के दौरान पुलिस ने उन्हें शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, वॉर्नर ने टेस्टिंग चेकप्वाइंट के ठीक पहले अपनी कार पार्क की। अधिकारियों ने वाहन के पास जाकर ब्रैथ एनालिसिस किया, जिससे पता चला कि उनके खून में शराब की मात्रा 0.104 थी, जो कानूनी सीमा से अधिक है। इसके बाद उन्हें मारूब्रा पुलिस स्टेशन ले जाया गया और आरोप तय कर अगले महीने अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया। पुलिस ने बयान में कहा, “5 अप्रैल 2026 को शाम 5:30 बजे पुलिस ने मालाबार रोड पर रैंडम ब्रेथ टेस्टिंग की। वाहन को टेस्टिंग साइट से पहले रुकते और पार्क होते देखा गया। जांच में चालक का खून में शराब की मात्रा कानूनी सीमा से अधिक पाई गई। वॉर्नर को 7 मई 2026 को डाउनिंग सेंटर लोकल कोर्ट में पेश होना है। साल 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले वॉर्नर फिलहाल फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सक्रिय हैं। वे इस समय पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 में कराची किंग्स की कप्तानी कर रहे हैं। लीग के बीच ऑस्ट्रेलिया लौटने पर यह घटना हुई। वॉर्नर ने हाल ही में बिग बैश लीग (BBL) में सिडनी थंडर के लिए शानदार प्रदर्शन किया था, जिसमें सिर्फ आठ मैचों में उन्होंने 433 रन बनाए और टूर्नामेंट के सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। PSL 2026 में उन्होंने तीन मुकाबलों में 31 की औसत से 93 रन बनाकर अपनी टीम को लगातार तीन जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। कराची किंग्स अब गुरुवार को नेशनल स्टेडियम में पेशावर जाल्मी के खिलाफ मुकाबले में उतरेंगे।