होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- अब टोल वसूलने का अधिकार हमारा, ईरान पर जीत का किया दावा

नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल की आवाजाही को लेकर जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका की जीत का दावा करते हुए कहा कि अब टोल वसूलने का अधिकार भी उनके पास है। उन्होंने वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जब अमेरिका विजेता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार भी उनके पास है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से कई संदेश मिले हैं, जिनसे पता चला कि वहां की जनता अपनी सरकार के खिलाफ और अधिक हमलों की मांग कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि इन हमलों का आम ईरानी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने दावा किया कि ईरानी लोग अपनी आजादी पाने के लिए तकलीफ उठाने को तैयार हैं। ट्रंप की चेतावनीउन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना का बचाव करते हुए कहा कि हर फैसला सोच-समझकर लिया गया है। ट्रंप ने साफ किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के कोई पुल या पावर प्लांट सुरक्षित नहीं रहेंगे और देश पूरी तरह तबाह हो जाएगा। उन्होंने अपने सख्त समय-सीमा की बात भी दोहराई, जिसमें कहा कि मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 1 बजे) तक कोई रियायत नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने रखी शर्त ट्रंप ने शर्त रखी कि वे केवल ऐसे समझौते को मंजूर करेंगे जिसमें तेल की बिना रोक-टोक आवाजाही सुनिश्चित हो। होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद पर उन्होंने नया बयान देते हुए कहा कि ईरान जहाजों से टोल नहीं वसूल सकता। ट्रंप ने स्पष्ट किया, “जीत हमारी है, वे सैन्य रूप से हार चुके हैं।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ने इस संघर्ष को जीत लिया है और अब शर्तें उनके अनुसार तय होंगी। पूर्व ईरानी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया पूर्व ईरानी विदेश मंत्री ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप को मूर्ख राष्ट्रपति बताया और चेताया कि अरब देशों के शासकों को अमेरिकी हस्तक्षेप से बचाव करना चाहिए, ताकि पूरे क्षेत्र को अंधेरे में डूबने से रोका जा सके। गौरतलब है कि होर्मुज का मार्ग दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात-निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, और इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट की संभावना बढ़ा दी है।
कालाष्टमी 2026: क्यों Kaal Bhairav ने Brahma का सिर काटा? कैसे बने ‘काशी के कोतवाल’

नई दिल्ली। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव को समर्पित होती है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना से कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं, शत्रुओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, कार्यों में सफलता मिलती है और भय दूर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटा था। चलिए जानते हैं इस घटना के पीछे की कथा। ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवादकथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि सृष्टि में सर्वोच्च कौन है। ब्रह्मा जी का दावा था कि वे सृजनकर्ता हैं, इसलिए सर्वोपरि हैं, जबकि विष्णु जी का मानना था कि पालनकर्ता होने के नाते उनका स्थान सर्वोच्च है। ज्योतिर्लिंग की खोज में निकले ब्रह्मा और विष्णुमहादेव ने इस विवाद का समाधान करने के लिए स्वयं को अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया। इसका न कोई आरंभ था और न कोई अंत। दोनों देवताओं को शर्त दी गई कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का सिरा पहले खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। विष्णु जी वराह रूप धारण कर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले। ब्रह्मा का अहंकार और काल भैरव का प्राकट्यलंबी खोज के बाद भी विष्णु जी को सिर नहीं मिला और उन्होंने हार मान ली। लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा मिल गया। इसके साथ ही उनके पांचवें मुख से महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द निकले। इससे महादेव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए। काल भैरव ने अपने नाखून से पल भर में ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया। काशी में मोक्ष और ‘कोतवाल’ का सम्मानचूंकि काल भैरव ने सृष्टि के रचयिता का मस्तक काटा था, इसलिए उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटकते रहे। अंततः जब वे काशी पहुंचे, तो सिर अपने आप हाथ से गिर गया। तभी से काल भैरव को ‘काशी के कोतवाल’ के रूप में सम्मान मिला। कालाष्टमी कब हैहिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अप्रैल 2026 को है। दृक पंचांग के मुताबिक वैशाख कृष्ण अष्टमी की शुरुआत 9 अप्रैल को रात 9:19 बजे होगी और समाप्ति 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगी। (Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों पर आधारित है।)
अक्षय कुमार की 'भूत बंगला' का ट्रेलर देख फैंस निराश, पुराने डायलॉग्स और VFX को लेकर हुई आलोचना

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की अपकमिंग हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर 6 अप्रैल को रिलीज़ हो गया। फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता थी, लेकिन ट्रेलर देखने के बाद कुछ फैंस निराश नजर आए। फैंस का रिएक्शन: पुराने डायलॉग्स और कॉमेडीट्रेलर में जहां कई लोग अक्षय के कमेडी अंदाज का आनंद ले रहे थे, वहीं कुछ ने पुराने जोक्स और डायलॉग्स के दोहराव की आलोचना की। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि ट्रेलर भूल भुलैया जैसी फिल्मों का रीमिक्स लगता है और मेकर्स को कुछ नया और ओरिजिनल बनाने की जरूरत है। एक यूजर ने लिखा, “कुछ तो ओरिजिनल बनाओ, वही भूल भुलैया वाले डायलॉग्स – ‘बहन डर गई बहन डर गई’, ‘हम कोई मंदिर का घंटा हैं’।“ दूसरे ने ट्रेलर पर टिप्पणी की, “क्या यह फिल्म है या मीम टेम्पलेट?” VFX पर भी मिली शिकायतट्रेलर के VFX को लेकर भी दर्शकों ने नाराजगी जताई। एक यूजर ने लिखा, “VFX में सुधार की जरूरत है। कॉमेडी ठीक थी, लेकिन विजुअल इफेक्ट्स निराशाजनक हैं।” एक अन्य ने कहा, “फिल्म का ट्रेलर निराशाजनक लगा… खराब VFX, बेदम जोक्स और दोहराए गए डायलॉग्स।” ट्रेलर की कहानीट्रेलर में दिखाया गया है कि अक्षय एक ऐसे बंगले के वारिस बनते हैं, जिसके पीछे ‘पिशाच वन’ नामक जंगल है। यहां कई खतरनाक भूत रहते हैं। परेश रावल अक्षय को बंगले में खतरों के बारे में चेतावनी देते हैं, लेकिन अक्षय शादी के लिए बंगले में जाने का फैसला कर लेते हैं। ट्रेलर के अंत में अक्षय अनजाने में बुरी शक्ति ‘वधुसुर’ को उसकी नींद से जगा देते हैं।रिलीज डेट और पेड प्रीव्यूपहले 10 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली ‘भूत बंगला’ अब 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। पेड प्रीव्यू 16 अप्रैल को रात 9 बजे से शुरू होंगे। मेकर्स ने रिलीज़ को पोस्टपोन करने का कारण ‘धुरंधर 2’ की रिलीज़ को बताया है।
MP में फिर बदलेगा मौसम, तीन दिन आंधी-बारिश की चेतावनी, आज 34 जिलों में अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम में बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश में आंधी-बारिश का नया सिस्टम सक्रिय हो गया है, जिसके चलते अगले तीन दिनों तक खासतौर पर उत्तर और पूर्वी हिस्सों में मौसम बदला हुआ रहेगा। मौसम विभाग, भोपाल ने 9 अप्रैल तक तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को भोपाल और ग्वालियर सहित कुल 34 जिलों में चेतावनी दी गई है। इन जिलों में ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार 8 और 9 अप्रैल को भी ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में इस सिस्टम का असर बना रहेगा। प्रदेश में तेज हवाएं भी चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 30 से 40 किमी प्रतिघंटा रहने का अनुमान है। आमतौर पर दोपहर के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं, 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है। इससे पहले 4 से 6 अप्रैल के बीच प्रदेश में मौसम की तेज गतिविधियां देखी गई थीं। 4 अप्रैल को 14 जिलों में ओलावृष्टि हुई थी, जबकि 39 जिलों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। इसके बाद रविवार और सोमवार को भी कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कुछ इलाकों में आंधी की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक जा सकती है, जबकि बाकी जगहों पर यह 30 से 40 किमी प्रतिघंटा रहेगी। आमतौर पर अप्रैल और मई को प्रदेश में भीषण गर्मी के महीने माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मार्च के दूसरे पखवाड़े में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, लेकिन महीने के आखिरी दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी मौसम का यही मिला-जुला असर जारी रहने की संभावना है।
जसप्रीत बुमराह का मास्टरी मंत्र! MI के बॉलिंग कोच ने दुनिया भर के गेंदबाजों के लिए साझा किया बड़ा सबक

नई दिल्ली। मुंबई इंडियंस (MI) के बॉलिंग कोच पारस म्हाम्ब्रे ने भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया कि बुमराह के वर्क एथिक्स और खेल के प्रति उनकी निष्ठा दुनियाभर के गेंदबाजों के लिए सीखने योग्य हैं। म्हाम्ब्रे के अनुसार, बुमराह ने हाल के वर्षों में ना केवल गेंदबाजी में बल्कि एक इंसान के तौर पर भी जबरदस्त ग्रोथ की है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले बुमराह आईपीएल 2026 के शुरुआती दो मैचों में विकेट नहीं ले पाए हैं, लेकिन उनकी मेहनत और रणनीति की तारीफ हर जगह हो रही है। टीनएजर से ग्लोबल आइकन तक का सफरपारस म्हाम्ब्रे ने RR vs MI के 13वें लीग मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बुमराह का सफर प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा, “बुमराह ने एक टीनएजर से ग्लोबल आइकन बनने का सफर तय किया है। जिस तरह से वह नेट्स में काम करते हैं, हर उस चीज़ पर टिक मार्क करते हैं, जिस पर उन्होंने अभ्यास किया है और गेम के दौरान इस्तेमाल करेंगे। पिछले कुछ सालों में वह इंडियन टीम के साथ शानदार बॉलर बन गए हैं और एक इंसान के तौर पर और भी बेहतर हुए हैं।” म्हाम्ब्रे ने जोर देकर कहा कि बुमराह का वर्क एथिक्स हर खिलाड़ी को सीखना चाहिए। यह उनकी लगातार प्रैक्टिस, रणनीतिक तैयारी और मानसिक मजबूती का नतीजा है। बुमराह का हर कदम टीम के लिए और युवा गेंदबाजों के लिए उदाहरण पेश करता है। मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी पर नजरआईपीएल 2026 के पहले दो मैचों में MI की गेंदबाजी मिश्रित रही। एक मैच में टीम ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरे मैच में गेंदबाज साझेदारी नहीं तोड़ पाए। इस पर पारस म्हाम्ब्रे ने कहा, “एक बॉलिंग ग्रुप के तौर पर, हम हमेशा इस पर चर्चा करते हैं कि विकेट कैसे लें, अपने प्लान को पूरा कैसे करें, विरोधी टीम पर दबाव कैसे बनाए रखें और अपनी ताकत व कमजोरियों का सही इस्तेमाल कैसे करें।” उन्होंने बताया कि पिच की परिस्थितियों का भी प्रदर्शन पर असर पड़ता है। “दोनों सरफेस अलग-अलग रहे हैं। मुंबई में लाल मिट्टी की पिच पर घास होने की वजह से आपको बाउंस मिलता है और शॉट आसानी से खेले जा सकते हैं। वहीं, दिल्ली की काली मिट्टी की पिच पर बाउंस कम मिलता है और बल्लेबाजों को अलग तरीके से खेलना पड़ता है।” पिच की रणनीति और गेंदबाजों की तैयारीम्हाम्ब्रे ने पिच और स्थिति के अनुसार गेंदबाजों को तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “लाल मिट्टी की पिच पर स्क्वायर कट और पुल शॉट अच्छे से खेले जा सकते हैं। ऐसे में हमारी रणनीति अलग होती है। वहीं, काली मिट्टी की पिच पर खिलाड़ियों को गति और लाइन पर ध्यान देना पड़ता है। यह सब गेंदबाजों की तैयारी और योजना पर निर्भर करता है।” इसका मतलब यह है कि मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी टीम सिर्फ प्रतिभा पर नहीं, बल्कि योजना और मानसिक तैयारी पर भी आधारित है। बुमराह इस रणनीति के केंद्र में हैं और उनकी मेहनत टीम की सफलता के लिए अहम है। पारस म्हाम्ब्रे ने बुमराह की मेहनत, अनुशासन और लगातार सुधार की तारीफ करते हुए कहा कि वह न केवल एक शानदार बॉलर हैं बल्कि एक प्रेरणादायक इंसान भी हैं। मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी की मजबूती इसी तरह की रणनीति, पिच के अनुसार तैयारी और टीमवर्क पर निर्भर है। बुमराह जैसे खिलाड़ी MI की सफलता की कुंजी बने हुए हैं।
क्रिकेट अपडेट: CSK को IPL 2026 में किस खिलाड़ी से है सबसे ज्यादा खतरा, जानें इरफान पठान की राय

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की शुरुआत निराशाजनक रही है। पहले तीन मैचों में टीम लगातार हार का सामना कर रही है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है तेज़ स्पिनर नूर अहमद की फॉर्म में गिरावट। भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलासा किया कि CSK के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या यही है। पठान ने बताया कि नूर अहमद ने इस सीजन में अब तक 10 ओवर गेंदबाजी की है, जिसमें उन्होंने 100 से अधिक रन लुटाए हैं और एक भी विकेट नहीं लिया। विशेष रूप से आरसीबी के खिलाफ मैच में नूर ने 49 रन दिए, जिसमें रजत पाटीदार और टिम डेविड ने उन्हें जमकर निशाना बनाया। पठान के अनुसार, अगर नूर अपने रन-अप का एंगल सुधार लें और गेंद का हाथ सही करें तो उनका प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। नूर अहमद के प्रदर्शन में गिरावट CSK की गेंदबाजी इकाई को सीधे प्रभावित कर रही है और यही कारण है कि टीम लगातार शुरुआती मैचों में हार रही है। हेनरी की भी निराशाजनक गेंदबाजीनूर अहमद के अलावा, पठान ने मैट हेनरी की गेंदबाजी पर भी असंतोष जताया। हेनरी ने अनुभवी होने के बावजूद पहले मैचों में प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं किया। आरसीबी के खिलाफ उन्होंने 3 ओवर में 36 रन दिए और कोई विकेट नहीं लिया। पठान का कहना है कि हेनरी ने इस लीग में अपेक्षित प्रभाव नहीं डाला, जबकि अनुभवी बॉलर को अपनी रणनीति के अनुसार विकेट लेने चाहिए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभवी बॉलर कभी भी हाफ वॉली नहीं फेंकते और टीम के लिए योजना के अनुसार गेंदबाजी करनी चाहिए थी। टिम डेविड को रोकने में गेंदबाज फेल इरफान पठान ने CSK की रणनीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टीम के गेंदबाजों ने टिम डेविड को रोकने के लिए सही योजना नहीं बनाई। पठान ने बताया कि डेविड अक्सर लेग स्टंप के बाहर खड़े होते हैं और अगर गेंदबाज सिर्फ ऑफ स्टंप पर गेंदबाजी करते हैं तो उन्हें रन बनाने की पूरी सुविधा मिल जाती है। CSK को शुरुआती ओवरों में उन्हें ब्लॉक करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पठान के अनुसार, मिडिल स्टंप और लेग स्टंप पर गेंदबाजी करने से ही टिम डेविड को नियंत्रण में रखा जा सकता था। CSK की गेंदबाजी में सुधार की आवश्यकतानूर अहमद और हेनरी के प्रदर्शन में कमी CSK की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। पठान ने सुझाव दिया कि नूर को रन-अप और गेंद का एंगल सुधारना होगा और हेनरी को भी अपनी रणनीति के अनुसार मैच में प्रभाव डालना होगा। इसके साथ ही, टीम को बल्लेबाजों की ताकत को ध्यान में रखते हुए योजना बनानी होगी ताकि कोई खिलाड़ी स्वतंत्र रूप से रन नहीं बना सके। पठान की राय में, अगर गेंदबाजी में यह सुधार नहीं हुआ तो CSK का आईपीएल 2026 में सफर चुनौतीपूर्ण रहेगा। नूर अहमद की फॉर्म पर टीम की पूरी गेंदबाजी निर्भर है और यह देखना रोचक होगा कि टीम मैनेजमेंट इस संकट का समाधान कैसे करता है। :आईपीएल 2026 में CSK के लिए सबसे बड़ी समस्या है नूर अहमद की खराब गेंदबाजी। साथ ही, मैट हेनरी का निराशाजनक प्रदर्शन और टिम डेविड को रोकने में रणनीतिक गलती टीम को नुकसान पहुंचा रही है। यदि नूर और हेनरी अपनी रणनीति सुधारते हैं और CSK गेंदबाजी में संतुलन लाती है, तो ही टीम की जीत की संभावना बढ़ सकती है।
टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

नई दिल्ली। टाटा संस (Tata Sons) के नए कारोबारों (New Businesses) में बढ़ते घाटे (Growing losses) ने ग्रुप के अंदर चिंता बढ़ा दी है। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इन बजनेसों का कुल घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान ₹5,700 करोड़ से बहुत ज्यादा है। यह बढ़ता नुकसान अब समूह की रणनीति और निवेश फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है। 9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पारएक खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था। इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है। नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबावनोएल टाटा (Noel Tata) ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी। टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंताटाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं। एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझघाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है। अन्य बिजनेस भी दबाव मेंटाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा। क्या है आगे की चुनौती?टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।
भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट

नई दिल्ली। भारत (India) का कपड़ा और अपैरल बाजार (Textile and Apparel Market) तेजी से विस्तार कर रहा है और इसकी झलक हाल ही में जारी रिपोर्ट में साफ दिखाई देती है। वस्त्र मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश का टेक्सटाइल मार्केट (Textile market) 2024 में बढ़कर 14.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2010 में सिर्फ 4.89 लाख करोड़ रुपये था, यानी पिछले करीब 14 साल में इस सेक्टर ने शानदार ग्रोथ दिखाई है और यह हर साल औसतन 8.3% की दर से बढ़ा है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग में लगातार इजाफा है। जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है और लाइफस्टाइल बदल रहा है, वैसे-वैसे कपड़ों पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, आज के समय में सिंथेटिक और मिक्स फाइबर वाले कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इनका कुल बाजार में हिस्सा 52.2% तक पहुंच गया है, जबकि कॉटन यानी सूती कपड़ों की हिस्सेदारी 41.2% है। वहीं, सिल्क और ऊन जैसे रेगुलर फाइबर की हिस्सेदारी काफी कम है। खास बात यह है कि सिंथेटिक और मिक्स फाइबर का बाजार 2010 के 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को दर्शाता है। लोग अब ऐसे कपड़े पसंद कर रहे हैं, जो सस्ते, टिकाऊ और मेंटेन करने में आसान हों। इस ग्रोथ में घरेलू उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों द्वारा कपड़ों पर खर्च 2010 के 4.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी कुल बाजार का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत से ही आ रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति खर्च भी तेजी से बढ़ा है। 2010 में जहां एक व्यक्ति औसतन 2,119 रुपये कपड़ों पर खर्च करता था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,066 रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि लोग अब फैशन और ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। एक और दिलचस्प बात यह है कि कपड़ा बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खरीद में महिलाओं का योगदान 55.5% है, जबकि मेल की हिस्सेदारी 44.5% है, यानी इस सेक्टर की ग्रोथ में महिला उपभोक्ता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। भारत का टेक्सटाइल सेक्टर न सिर्फ तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि इसमें बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता इस ग्रोथ को आगे भी गति दे सकती है। आने वाले समय में यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत इंजन साबित हो सकता है।
CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Former Chief Minister Ajit Jogi) के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा (Life Sentence) सुनाई है। हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को अमित जोगी को इस मामले में दोषी करार दिया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अमित जोगी को सजा सुनाया जाना 23 सालों से चल रही कानूनी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है। सजा के साथ जुर्माना भी लगायाचीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। बेंच ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। निचली अदालत ने जोगी को कर दिया था बरीहाईकोर्ट का आज का फैसला 31 मई 2007 को रायपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह पलटता है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ना न्यायसंगत नहीं : हाईकोर्टहाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया। SC के आदेश पर दोबारा खुला था मामलागौरतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से वकील बीपी शर्मा ने गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह हत्याकांड उस समय की राज्य सरकार के संरक्षण में रचा गया षड्यंत्र था। दलील दी गई कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते महत्वपूर्ण सबूतों को मिटा दिया गया। ऐसे मामलों में केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को समझना आवश्यक है। क्या था मामलाउल्लेखनीय है कि 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपियों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुरुआती दौर में अमित जोगी को राहत मिली, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था। विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे जग्गीकारोबारी और राजनेता रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होकर जब शुक्ल ने राकांपा का रुख किया, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़े और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। इन लोगों को ठहराया था दोषीजग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।
भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे

इंदौर। धार (Dhar) स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala Complex) परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष (Hindu side) के वकील विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) ने इसे 10वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए दावा किया कि 1935 के बाद यहां अवैध गतिविधियां शुरू हुईं। उन्होंने एएसआई सर्वे और स्तंभों की मूर्तिकला को साक्ष्य के रूप में पेश किया। अदालत ने कहा है कि वह मामले की नियमित सुनवाई करेगी। सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। हिंदू पक्ष ने 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बतायाहिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपना पक्ष रखते हुए भोजशाला को 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर बताया। इसके पक्ष में उनकी ओर से कई तर्क पेश किए गए। विष्णु शंकर जैन ने 1935 में लगाए गए एक अहम बोर्ड का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय परिसर के ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था। 1935 के बाद से हुई विवादित गतिविधियों की शुरुआतविष्णु शंकर जैन ने दावा किया कि सन 1935 के बाद से इस परिसर पर अवैध कब्जों और विवादित गतिविधियों की शुरुआत हुई। इन विवादित गतिविधियों ने विवाद को जन्म दिया। समूचा विवाद 1935 के बाद के बाद का है। विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की सर्वे रिपोर्टों को भी अदालत के सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने स्तंभों पर उकेरी गई मूर्तिकला और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए। अदालत की दो-टूक, सभी पक्षों को देंगे पूरा मौकाहाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। अत: इसमें सभी पक्षों को सुना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होगा और हर पक्ष को अपनी दलीलें रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। मामले में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। 1935 से पहले भी होती थी पूजामहाराजा भोज सेवा संस्थान की ओर से हाईकोर्ट वकील श्रीष दुबे ने बताया कि सोमवार से इंदौर बेंच में फाइनल सुनवाई की शुरुआत हुई है। विष्णु शंकर जैन की ओर से दोपहर ढाई बजे से साढ़े जार बजे तक बहस चली है। यह बहस कल फिर ढाई बजे से शुरू होगी। विष्णु शंकर जैन की बहस अभी बाकी है यह कल भी चलेगी। विष्णु शंकर जैन की ओर से पिटिशन के पक्ष में दलीलें रखी गईं। हिंदू पक्ष की ओर से बताया गया है कि यहां 1935 से पहले भी पूजा होती थी।