लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के नए थल सेनाध्यक्ष, 30 जून को संभालेंगे भारतीय सेना की कमान

नई दिल्ली । भारतीय सेना के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थल सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, वह 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे और भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। इस नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है तथा संबंधित विभागों को इसकी सूचना भी भेज दी गई है। भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी और पेशेवर सैन्य शक्तियों में शामिल है। ऐसे में थल सेनाध्यक्ष का पद राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और रक्षा तैयारियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण, सीमाओं की सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है। रक्षा मंत्रालय के आदेश के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ जनरल के पद पर पदोन्नत होकर थल सेनाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वह सेना की परिचालन तैयारियों, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और सामरिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण कमानों और जिम्मेदार पदों पर कार्य किया है। सैन्य नेतृत्व, रणनीतिक योजना और परिचालन अनुभव के कारण उन्हें सेना के शीर्ष पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना के सामने तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के बढ़ते उपयोग और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। ऐसे में नए सेना प्रमुख का नेतृत्व इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में सेना ने कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई तकनीकों को अपनाने और युद्धक तैयारियों को बेहतर बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए। अब यह जिम्मेदारी नए नेतृत्व के हाथों में जाएगी, जो इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा। रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की संस्थागत परंपरा का हिस्सा है, जिससे संगठनात्मक निरंतरता और पेशेवर दक्षता बनी रहती है। नए सेना प्रमुख के नेतृत्व में सेना की दीर्घकालिक रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है। देश की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय सेना की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए यह नियुक्ति रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है। अब सभी की नजर 30 जून पर होगी, जब लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ औपचारिक रूप से देश के नए थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
दो साल से फरार ब्राउन शुगर तस्कर इंदौर में गिरफ्तार, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा

मध्य प्रदेश । इंदौर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने दो साल से फरार चल रहे एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो ब्राउन शुगर तस्करी के मामले में वांछित था। आरोपी लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था, लेकिन मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर उसे दबोच लिया गया। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 में भंडारी ब्रिज के पास एमआर-4 रोड पर कार्रवाई के दौरान शादाब खान नामक आरोपी को 105.16 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच के दौरान इमरान पिता शमशेर साकरिया निवासी Pratapgarh का नाम सह-आरोपी के रूप में सामने आया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह लगातार फरार चल रहा था। क्राइम ब्रांच को शुक्रवार को सूचना मिली कि फरार आरोपी इमरान साकरिया पटेल प्रतिमा चौराहे के आसपास मौजूद है और वहां से भागने की तैयारी कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल रणनीति बनाकर इलाके में घेराबंदी की। बताया गया कि आरोपी नीली जींस और नीली चौकड़ीदार शर्ट पहने हुए था, जिससे उसकी पहचान करने में पुलिस को आसानी हुई। जैसे ही पुलिस टीम ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, आरोपी मौके से भागने लगा। हालांकि क्राइम ब्रांच की टीम ने उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। मामले की जानकारी देते हुए Rajesh Kumar Tripathi ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस को उसकी तलाश थी। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने मामले से जुड़े तथ्यों को स्वीकार किया है। इसके बाद उसकी विधिवत गिरफ्तारी कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ पहले से एनडीपीएस एक्ट के तीन मामले दर्ज हैं, जबकि एक अन्य मामला मारपीट से संबंधित बताया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और कहीं वह मादक पदार्थों की तस्करी के अन्य मामलों में भी शामिल तो नहीं था। क्राइम ब्रांच का कहना है कि शहर में नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार और वांछित आरोपियों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि मादक पदार्थों की अवैध तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
MPL में आज ‘सुपर सैटरडे’, तीन बड़े मुकाबलों से तय होगी सेमीफाइनल की दिशा; मालवा, ग्वालियर और उज्जैन पर दबाव

मध्य प्रदेश । इंदौर में जारी मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (MPL) अब अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। लीग मुकाबलों के अंतिम दौर में हर मैच का महत्व बढ़ गया है और शनिवार को आयोजित ‘सुपर सैटरडे’ को पूरे टूर्नामेंट का सबसे अहम दिन माना जा रहा है। दिनभर खेले जाने वाले तीन मुकाबलों के नतीजे से सेमीफाइनल की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी और कई टीमों की किस्मत तय होगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इंदौर के डेली कॉलेज ग्राउंड और Holkar Stadium पर टिकी हुई हैं, जहां दिनभर रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं। अंक तालिका में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी होने के कारण हर टीम के लिए यह मुकाबले ‘करो या मरो’ जैसे बन गए हैं। दिन का पहला मुकाबला डेली कॉलेज ग्राउंड पर मालवा स्टैलियंस और Jabalpur Royal Lions के बीच खेला गया। जबलपुर की टीम अपने प्रमुख बल्लेबाज रितिक ताडा की शानदार फॉर्म के भरोसे मैदान में उतरी, जबकि मालवा स्टैलियंस के लिए यह मुकाबला टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदें जिंदा रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। टीम प्रबंधन और समर्थकों की नजरें इस मैच पर विशेष रूप से बनी रहीं क्योंकि हार की स्थिति में मालवा के लिए आगे की राह कठिन हो सकती है। दूसरा मुकाबला भी डेली कॉलेज ग्राउंड पर खेला जा रहा है, जहां Bundelkhand Bulls और Gwalior Cheetahs आमने-सामने हैं। ग्वालियर टीम की कमान भारतीय क्रिकेटर Rajat Patidar के हाथों में है। पिछली हार के बाद टीम पर दबाव है और वह जीत के साथ जोरदार वापसी करना चाहेगी। दूसरी ओर बुंदेलखंड बुल्स अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरी है। इस मुकाबले का परिणाम भी सेमीफाइनल की दौड़ को प्रभावित कर सकता है। दिन का सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल मुकाबला दोपहर बाद होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां Ujjain Falcons का सामना Rewa Jaguars से होगा। उज्जैन फाल्कन्स की टीम इस समय अच्छे लय में दिखाई दे रही है। टीम के बल्लेबाज माधव तिवारी और सोहम पटवर्धन लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं रीवा जगुआर्स अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। टूर्नामेंट अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां एक जीत या हार पूरी अंक तालिका का समीकरण बदल सकती है। कई टीमों के अंक बेहद करीब हैं, इसलिए नेट रन रेट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में कप्तानों और टीम प्रबंधन के सामने सिर्फ जीत ही नहीं बल्कि बड़े अंतर से जीत हासिल करने की चुनौती भी होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि शनिवार के मुकाबलों के बाद सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। यही वजह है कि खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशंसकों की उत्सुकता भी चरम पर है। इंदौर में खेला जा रहा यह ‘सुपर सैटरडे’ MPL के इतिहास के सबसे रोमांचक दिनों में से एक साबित हो सकता है।
जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन में AN-32 क्रैश से मचा हड़कंप, लैंडिंग के बाद लगी भीषण आग, हादसे की जांच शुरू

नई दिल्ली । असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना के AN-32 परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने सैन्य और सुरक्षा तंत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शनिवार को हुई इस घटना में विमान लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना के तुरंत बाद विमान में आग लग गई, जिससे एयरबेस परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही वायुसेना की आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, AN-32 विमान नियमित परिचालन उड़ान पर था और जोरहाट एयरफील्ड पर उतरने की प्रक्रिया में था। इसी दौरान विमान निर्धारित रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर सका और एयरबेस के भीतर स्थित घास एवं उबड़-खाबड़ क्षेत्र में जा पहुंचा। टकराव के बाद विमान को गंभीर क्षति पहुंची और उसमें आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद तेज विस्फोट जैसी आवाज भी सुनाई दी। हादसे की तस्वीरों और शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि विमान दो हिस्सों में टूट गया। हालांकि दुर्घटना के कारणों को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वायुसेना ने कहा है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम दुर्घटना के कारणों का विस्तृत आकलन करेगी। जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पूर्वोत्तर भारत में भारतीय वायुसेना की रणनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह एयरबेस सीमावर्ती क्षेत्रों तक सैन्य रसद पहुंचाने, अभियान संचालन और आपातकालीन सहायता मिशनों में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे पर हुए विमान हादसे को गंभीरता से लिया जा रहा है। AN-32 भारतीय वायुसेना के प्रमुख परिवहन विमानों में शामिल है। सोवियत मूल के इस दो इंजन वाले टर्बोप्रॉप विमान का उपयोग सैनिकों, सैन्य उपकरणों और आवश्यक सामग्री के परिवहन के लिए व्यापक स्तर पर किया जाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन की क्षमता के कारण यह विमान लंबे समय से वायुसेना के बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। हादसे के बाद एयरबेस पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। बचाव दलों ने आग पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ विमान के मलबे की जांच भी शुरू कर दी है। फिलहाल किसी के हताहत होने या घायल होने को लेकर स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वायुसेना ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध होते ही साझा की जाएंगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विमान दुर्घटनाओं की जांच में तकनीकी खामियों, मौसम की स्थिति, पायलट इनपुट तथा लैंडिंग प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं का गहन परीक्षण किया जाता है। इसी क्रम में इस मामले में भी विस्तृत जांच की संभावना है। दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर वायुसेना और रक्षा अधिकारियों की नजर बनी हुई है। राहत एवं सुरक्षा संबंधी सभी उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि जांच एजेंसियां हादसे की वजहों का पता लगाने में जुटी हैं। इस घटना ने एक बार फिर सैन्य विमानन सुरक्षा और परिचालन मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
छह दिन की विदेश यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी, G7 बैठक से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छह दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए, जिसके तहत वह फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ कई देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर बातचीत करेंगे। यह अवसर भारत को वैश्विक आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों पर अपनी भूमिका और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह फ्रांस दौरा विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी सातवीं फ्रांस यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का विशेष स्थान है और दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगा। फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता इस वर्ष फरवरी में हुई चर्चाओं के बाद विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, उभरती तकनीकों और वैश्विक चुनौतियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है। इस मुलाकात को भारत-फ्रांस संबंधों के अगले चरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। यह पहल भारत और फ्रांस के बीच नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, निवेशक, नवप्रवर्तक और वेंचर कैपिटल प्रतिनिधि एक मंच पर आएंगे। माना जा रहा है कि इससे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और अवसर प्राप्त होंगे। नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों का विशेष फोकस रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी 17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। यह सातवां अवसर होगा जब वह इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच का हिस्सा बनेंगे। इसके साथ ही वह लगातार सात बार जी-7 बैठक में शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई प्रमुख विश्व नेताओं से मुलाकात हो सकती है। इनमें अमेरिका सहित अन्य प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल हो सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव स्लोवाकिया होगा। वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह संपूर्ण यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रिय उपस्थिति को और मजबूत करेगी।
इंदौर में मल्टी के नीचे हार्डवेयर दुकान में भीषण आग, समय रहते खाली कराए गए फ्लैट; बड़ा हादसा टला

मध्य प्रदेश । इंदौर के वीर सावरकर नगर क्षेत्र में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब माया भवन मल्टी के भूतल पर स्थित एक हार्डवेयर दुकान में अचानक आग लग गई। आग लगते ही दुकान से धुएं का घना गुबार उठने लगा और देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। घटना के समय मल्टी में रहने वाले परिवारों में दहशत फैल गई और लोग तुरंत अपने फ्लैट छोड़कर नीचे सड़क पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। स्थानीय निवासी बाल्टियों और प्लास्टिक के केनों में पानी भरकर आग पर डालने लगे। हालांकि दुकान में मौजूद ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती रही और लोगों के प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हुए। मल्टी में रहने वाले निवासी सुभाष चौधरी ने बताया कि आग लगने के कुछ ही मिनटों में धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया था। स्थिति को देखते हुए सभी परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग में मौजूद सभी फ्लैटों के लोग समय रहते बाहर निकल आए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद Prashant Badwe भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तत्काल पानी का टैंकर बुलवाने की व्यवस्था की और यह सुनिश्चित किया कि बिल्डिंग में कोई व्यक्ति अंदर फंसा न हो। इसी दौरान इंदौर फायर ब्रिगेड की दो दमकल गाड़ियां भी घटनास्थल पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने का अभियान शुरू किया। फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग पर नियंत्रण पाने के लिए करीब 20 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल करना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो यह ऊपरी मंजिलों तक फैल सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग शुभम इंटरप्राइजेज नामक हार्डवेयर दुकान में लगी थी, जो जी प्लस थ्री भवन के भूतल पर किराए से संचालित की जा रही थी। फायर ब्रिगेड अधिकारियों के मुताबिक दुकान में बड़ी मात्रा में पीवीसी फिटिंग सामग्री, पेंट, थिनर, हार्डवेयर का सामान और लकड़ी का फर्नीचर रखा हुआ था। इन ज्वलनशील वस्तुओं के कारण आग तेजी से फैल गई और दुकान के भीतर रखा काफी सामान जलकर नष्ट हो गया। आग की तीव्रता का असर ऊपरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट तक भी पहुंचा। आग और गर्मी के कारण फ्लैट में लगे पर्दे, पलंग और एलईडी टीवी को नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है। फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट या ज्वलनशील सामग्री में किसी तकनीकी कारण से आग लगने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रेम विवाह के बाद बढ़े पारिवारिक विवाद का खूनी अंजाम, यूट्यूबर शेख महबूब की चाकुओं से गोदकर हत्या

नई दिल्ली । तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में सोशल मीडिया से पहचान बनाने वाले 30 वर्षीय यूट्यूबर और इलेक्ट्रीशियन शेख महबूब की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। चांदी मसूद नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय महबूब की दिनदहाड़े धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे पारिवारिक विवाद और रिश्तों में लंबे समय से चल रहे तनाव को अहम कारण माना जा रहा है। घटना गोलकोंडा थाना क्षेत्र के कुमारवाड़ी इलाके की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार शेख महबूब शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा करने के बाद अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तेजी से अपने घर में प्रवेश किया, लेकिन हमलावर भी उनके पीछे-पीछे घर के अंदर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जांच के आधार पर सामने आया है कि घर के भीतर पहुंचते ही आरोपियों ने महबूब पर हमला बोल दिया। हमले में चाकुओं सहित अन्य धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि मारपीट के दौरान लोहे की रॉड और व्यायाम उपकरणों का भी उपयोग किया गया। लगातार किए गए हमलों के कारण महबूब गंभीर रूप से घायल हो गए और घटनास्थल पर ही उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास एकत्र हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस की शुरुआती जांच में मृतक की पत्नी के भाई शेख सोहेल का नाम प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आया है। इसके अलावा दो अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की भी आशंका व्यक्त की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि घटना पूर्व नियोजित हो सकती है, इसलिए हत्या के पीछे की परिस्थितियों और संभावित साजिश की भी गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार शेख महबूब ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। बताया जा रहा है कि विवाह को लेकर दोनों परिवारों के कुछ सदस्यों के बीच मतभेद थे। विवाह के बाद दंपति को एक संतान भी हुई, लेकिन पारिवारिक रिश्तों में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। पुलिस इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि हमलावरों की गतिविधियों और घटना के क्रम को स्पष्ट रूप से समझा जा सके। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार हत्या के पीछे की वास्तविक वजह, आरोपियों की भूमिका और घटना की पूरी साजिश का खुलासा जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश और साक्ष्य संग्रहण की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
इंदौर में मानसून का इंतजार बढ़ा, गर्मी और उमस से बेहाल शहर; प्री-मानसून गतिविधियां भी कमजोर

मध्य प्रदेश । मालवा की आर्थिक राजधानी इंदौर में जून का दूसरा सप्ताह समाप्ति की ओर है, लेकिन शहरवासियों को अब तक मानसून पूर्व राहत नहीं मिल सकी है। गर्मी और उमस का दोहरा असर लोगों को परेशान कर रहा है। पिछले कई दिनों से मौसम लगभग एक जैसा बना हुआ है। दिन का तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। सुबह से तेज धूप और हवा में नमी के कारण लोगों को लगातार उमस का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम साफ रहने की संभावना है। हालांकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं, लेकिन इंदौर क्षेत्र पर उनका अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि जून के दूसरे सप्ताह तक शहर में केवल लगभग एक इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य स्थिति की तुलना में काफी कम मानी जा रही है। आमतौर पर जून माह में इंदौर के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलती है। पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2020 से 2025 के बीच जून महीने में अधिकतम तापमान 39.6 से 41.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। पिछले वर्ष अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, लेकिन साथ ही अच्छी बारिश ने मौसम को राहतभरा बनाए रखा था। सामान्य तौर पर जून महीने में इंदौर अपने वार्षिक वर्षा कोटे का लगभग 20 प्रतिशत प्राप्त कर लेता है। वर्ष 2025 में जून के दौरान करीब साढ़े पांच इंच बारिश दर्ज की गई थी। इंदौर के मौसम इतिहास पर नजर डालें तो जून महीने में कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। वर्ष 1980 में शहर में जून के दौरान 17 इंच से अधिक बारिश हुई थी, जो अब भी एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में लगभग पांच इंच बारिश दर्ज की गई थी। तापमान के लिहाज से 3 जून 1991 को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में दोबारा गति पकड़ ली है। इसके चलते मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वर्तमान अनुमान के अनुसार 15 से 18 जून के बीच मानसून प्रदेश में दस्तक दे सकता है। हालांकि तब तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी। प्रदेश के कई जिलों में हाल के दिनों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। लेकिन इंदौर और उसके आसपास के इलाकों में इन गतिविधियों का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। मौसम विभाग का मानना है कि मानसून के सक्रिय होते ही इंदौर में बारिश की स्थिति बेहतर होगी और लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। फिलहाल शहरवासी आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं और मानसून की पहली जोरदार बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जो न केवल तापमान में गिरावट लाएगी बल्कि लंबे समय से बनी उमस से भी राहत दिलाएगी।
शेयर बाजार में भारी नुकसान के बाद परिवार खत्म करने का आरोप, शिक्षक दंपति और दो मासूम बच्चों की मौत से दहला महाराष्ट्र

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत का मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। प्रारंभिक जांच में आर्थिक दबाव और निवेश में हुए कथित नुकसान को घटना से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा। घटना बार्शी तहसील के एक गांव की बताई जा रही है, जहां एक स्कूल प्रधानाध्यापक, उनकी पत्नी और दो बच्चों के शव उनके घर से बरामद किए गए। मृतकों में दंपति के साथ उनके दोनों नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर सामने आते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग सक्रिय हो गया। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह जब नियमित रूप से दूध पहुंचाने वाला व्यक्ति घर पहुंचा तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। स्थिति असामान्य लगने पर उसने आसपास के लोगों को सूचना दी। पड़ोसियों ने भी कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से घर का दरवाजा खोला गया, जहां परिवार के चारों सदस्य मृत अवस्था में पाए गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पूरे घर का निरीक्षण किया और घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। जांच के दौरान पुलिस को एक विस्तृत हस्तलिखित नोट भी मिला है, जिसकी सामग्री का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह दस्तावेज मामले की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार का मुखिया शेयर बाजार में निवेश से जुड़ा हुआ था और हाल के समय में उसे भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव का घटना से कोई संबंध था। हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा। पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक विश्लेषण के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही परिवार के परिचितों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। इस घटना ने एक बार फिर आर्थिक दबाव, निवेश संबंधी जोखिमों और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय चुनौतियों के दौरान समय पर परामर्श, पारिवारिक सहयोग और पेशेवर सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट का समाधान संवाद और उचित सलाह के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की हर संभावित दिशा में जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बरामद दस्तावेजों के अध्ययन के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कृषि कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। 9 से 13 जून तक आयोजित BRICS कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा। सम्मेलन के समापन दिवस से पहले शहर के मेघदूत उपवन में विकसित विशेष “ब्रिक्स वाटिका” में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री Tulsi Silawat, इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav तथा विधायक Ramesh Mendola सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। ब्रिक्स वाटिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। यहां कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका आने वाले वर्षों में BRICS देशों की साझेदारी और हरित विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगी। इससे पहले इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के दौरान यूरेशिया गार्डन भी विकसित किए गए थे। मेघदूत उपवन को BRICS सम्मेलन के अनुरूप विशेष रूप से सजाया गया है। परिसर में “BRICS INDIA” थीम आधारित आकर्षक आइलैंड, गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट और आधुनिक लैंडस्केपिंग तैयार की गई है। साथ ही BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी लगाए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। सम्मेलन के अंतिम दिन होने वाली कृषि मंत्रियों की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर भी चर्चा होगी। बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कृषि क्षेत्र को नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों की आवश्यकता है। इसी दिशा में BRICS देश साझा अनुसंधान, तकनीकी साझेदारी और नवाचार आधारित कृषि मॉडल पर विचार करेंगे। शनिवार को सुबह 10 बजे से कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू होगी। इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों का दौर चलेगा। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति से एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच इंदौर में आयोजित यह BRICS सम्मेलन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।