चेहरा खिला-खिला दिखेगा, बस इन स्किन केयर टिप्स को अपनी रूटीन में शामिल करें

नई दिल्ली।अगर आप भी बेदाग और चमत्कार चेहरा पाने की सोच रही है तो अब यह बिल्कुल आसान हो गया है क्योंकि अब आप अपने चेहरे पर आसानी से गला घर पर ही पा सकती हैं। इसके लिए आपको ना ज्यादा खर्च करने की जरूरत है और ना ज्यादा टाइम पार्लर में बिताने की। तो चलिए आपको कुछ ऐसे ही ट्रिक के बारे में बताते हैं। हाइड्रेशन है सबसे महत्वपूर्णगर्मियों का महीना शुरू ही हो गया है ऐसे में अपने आप को हाइड्रेट रखने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए।त्वचा की सेहत के लिए हाइड्रेशन अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है। पानी की कमी से त्वचा सूखी और बेजान हो जाती है। संतुलित आहार से भी फायदाकई बार हमारी स्कीम बाहर के ज्यादा खान-पान के कारण भी काफी बिगड़ने लगती है जिसे हमें सुधारना चाहिए।त्वचा की देखभाल में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हरी सब्जियां, ताजे फल, नट्स और स्वस्थ वसा से भरपूर आहार त्वचा को अंदर से पोषण देता है। विटामिन सी और ई से भरपूर भोजन कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देता है। व्यायाम से बढ़ेगा रक्त संचारएक्टिव रहने से त्वचा की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। योग, दौड़ना, नृत्य या जिम में व्यायाम करने से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे त्वचा में चमक आती है। स्किन केयर रूटीन का पालन करेंसही स्किन केयर रूटीन का पालन करना आवश्यक है। दिन में दो बार चेहरे को साफ करने से गंदगी और अतिरिक्त तेल दूर होता है। कई बार लोग हाथ पैर धो लेते हैं लेकिन चेहरा साफ करने के लिए सही टाइम का इंतजार करते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही आपको तनाव से बचना चाहिए आप जितना तनाव में रहेंगे आपके चेहरे और स्क्रीन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
सीएम मोहन यादव करेंगे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, उज्जैन बनेगा ग्लोबल टाइम सेंटर

भोपाल । मध्यप्रदेश के उज्जैन में 3 अप्रैल से एक ऐतिहासिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का आयोजन होने जा रहा है, जहां विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला डिजिटल प्लेनेटेरियम परिसर में आयोजित होगा। इस अवसर पर उज्जैन में नव-निर्मित साइंस सेंटर का भी लोकार्पण किया जाएगा, जो आधुनिक वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बने इस साइंस सेंटर में साइंस गैलरी, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन हॉल और हेरिटेज आधारित प्रदर्शनी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन सहित देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और विचारक शामिल होंगे। उज्जैन, जिसे बाबा महाकाल और सम्राट विक्रमादित्य की नगरी के रूप में जाना जाता है, प्राचीन काल से खगोल विज्ञान और काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है। यही कारण है कि इस सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी के समन्वय पर विशेष चर्चा की जाएगी। तीन दिवसीय इस आयोजन में वैज्ञानिक, खगोलविद, शोधार्थी और नीति-निर्माता एक मंच पर आकर अंतरिक्ष विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स, कॉस्मोलॉजी और स्पेस इकोनॉमी जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। इसके साथ ही यूएवी तकनीक, सैटेलाइट निर्माण, रिमोट कंट्रोल सिस्टम और टेलीस्कोप से आकाशीय अध्ययन जैसी गतिविधियों पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा है। डोंगला, जहां से कर्क रेखा गुजरती है, प्राचीन काल से खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को फिर से वैश्विक टाइम स्केल सेंटर के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इस आयोजन में ISRO, CSIR, DRDO और नीति आयोग जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। इसके अलावा टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्ट-अप कॉन्फ्रेंस, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे। उज्जैन का यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई दिशा देगा, बल्कि युवाओं में नवाचार और तकनीकी कौशल को भी प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, यह आयोजन आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को भी नई गति देने में सहायक साबित होगा। इस प्रकार ‘महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
भारतीय रुपया रिकॉर्ड तेजी के साथ 93.10 डॉलर पर बंद, 13 साल का रुझान बदलता नजर

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गुरुवार को 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली और इसके चलते अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 93.10 के स्तर पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपए में तेजी की वजह आरबीआई द्वारा भारतीय मुद्रा में सट्टेबाजी को कम करने के लिए कदम उठाना है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए में तेज गिरावट को रोकने के लिए घरेलू और विदेशी मार्केट्स में नियमों को सख्त किया है। एक विश्लेषक ने कहा,“अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के बाद रिस्क सेंटीमेंट में सुधार के कारण रुपए में तेजी आई। उनके भाषण ने तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत का संकेत दिया गया, जिससे बाजार में तेजी आई। हालांकि, अनिश्चितता का स्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जिससे मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।” तीन दिन की छुट्टी के बाद कारोबार फिर से शुरू होने पर रुपया दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत तक बढ़कर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपए की सबसे मजबूत वृद्धि है। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में बैंकों को निवासी और अनिवासी दोनों ग्राहकों को रुपए के नॉन-डिलीवरी वाले फॉरवर्ड जारी करने से रोक दिया है, और कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को पुनः बुक करने से भी प्रतिबंधित कर दिया है। इससे पहले उठाए गए कदमों में बैंकों की रुपए में नेट ओपन पॉजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित करना और संबंधित पक्षों के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर रोक लगाना शामिल था। इन कदमों का उद्देश्य मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को कम करना और रुपए को स्थिर करना है। विश्लेषकों ने कहा कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, जो 700 अरब डॉलर से अधिक है, अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है और केंद्रीय बैंक को जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की गुंजाइश देता है। वैश्विक बाजार के कमजोर संकेतों के बावजूद रुपए में उछाल आया। आज एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी जैसे प्रमुख सूचकांक 3 प्रतिशत तक गिर गए। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया, जिससे वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड वायदा 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई वायदा 4.5 प्रतिशत बढ़कर 104.64 डॉलर हो गया। महावीर जयंती और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत की छुट्टियों के कारण इस सप्ताह की शुरुआत में मुद्रा बाजार बंद रहे थे और यह गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को भी बंद रहेंगे।
Liquor Price Hike: शराब प्रेमियों को झटका, इस राज्य में अंग्रेजी शराब महंगी हुई 100 रुपये तक

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में शराब के शौकीनों के लिए नया वित्तीय साल महंगा साबित हुआ है। राज्य सरकार ने 2026-27 की नई आबकारी नीति लागू करते हुए अंग्रेजी शराब (IMFL) की कीमतों (Liquior Price Hike) में बढ़ोतरी कर दी है। 1 अप्रैल से लागू नई दरों के बाद कई ब्रांड्स की कीमतों में 10 से 100 रुपये तक का इजाफा हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। अप्रैल में कब कब शराब की दुकाने बंद रहेंगी, ये रही ड्राई डे की लिस्ट100 रुपये तक महंगी हुई अंग्रेजी शराब (Liquior Price Hike)नई रेट लिस्ट के अनुसार, अंग्रेजी शराब की कीमतों में अधिकतम 100 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि कुछ ब्रांड्स में मामूली 10-30 रुपये की ही बढ़ोतरी हुई है, लेकिन प्रीमियम ब्रांड्स पर ज्यादा असर देखने को मिला है। सरकार का कहना है कि हर साल आबकारी नीति के तहत कीमतों में संशोधन किया जाता है। इस बार भी वही प्रक्रिया अपनाई गई है। बढ़ती लागत और राजस्व को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नई कीमतें लागू होने के बाद अब ग्राहकों को शराब खरीदने के लिए पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। नई आबकारी नीति और नीलामी सिस्टम का असरसरकार ने इस साल भी शराब की दुकानों की नीलामी ऑनलाइन ई-ऑक्शन के जरिए की है। इस बार बेस प्राइस में करीब 10% की बढ़ोतरी की गई, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ा है। इसके अलावा राज्य में अब Maximum Retail Price (MRP) सिस्टम लागू है, जिससे शराब की बिक्री तय कीमत पर ही होगी। पहले Minimum Selling Price (MSP) मॉडल लागू किया गया था, लेकिन अब पारदर्शिता बढ़ाने के लिए फिर से MRP व्यवस्था लागू कर दी गई है। दुकानों पर रेट लिस्ट दिखाना अनिवार्यनई नीति के तहत सभी शराब दुकानों को हर ब्रांड की कीमतों की सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इसके साथ ही संबंधित एक्साइज अधिकारी का संपर्क नंबर भी देना अनिवार्य किया गया है। अगर कोई दुकानदार तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलता है, तो ग्राहक सीधे शिकायत कर सकते हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने और बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन आम लोगों के लिए यह जेब पर अतिरिक्त बोझ जरूर साबित होगा।
मध्य प्रदेश के धार भोजशाला विवाद पर 6 अप्रैल से रोजाना होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

भोपाल । मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद मामले की उच्च न्यायालय में 6 अप्रैल से रोजाना सुनवाई होगी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच आगामी सोमवार को दोपहर 2.30 बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनवाई करेगी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, उसके बाद आपत्ति जताने वाले पक्ष को दलील रखने का मौका मिलेगा। इस दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी मौजूद रहे, जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। गौरतलब है कि बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि इस विवाद का अंतिम निर्णय अब उच्च न्यायालय ही करेगी। उच्च न्यायालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर अंतिम सुनवाई करेगी। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध कराई जा चुकी है और कई पक्षों ने इस पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। बता दें कि उच्च न्यायालय में पहले ही एएसआई सर्वे रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के प्रमाण मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं जिन पर विभिन्न प्रकार की नक्काशी है। इसके अलावा 32 शिलालेख पाए गए हैं। इनमें राजा भोज के समय के शिलालेख और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के पहले दो अंकों का उल्लेख है। कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी में मालवा में मुसलमानों के आगमन और मुस्लिम शासन की स्थापना का जिक्र भी है। 1389 ईस्वी में दिलावर खान (मूल नाम हुसैन) को दिल्ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने धार में स्वतंत्रता की घोषणा कर 1401 ईस्वी में शाही उपाधि धारण की। इन ऐतिहासिक और कानूनी तथ्यों को लेकर उच्च न्यायालय में अब विस्तृत बहस की संभावना है। मुस्लिम पक्ष एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियां रखेगा और सभी याचिकाओं पर एक साथ दलीलें सुनी जाएंगी।
आईपीएल में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले, लेकिन ट्रॉफी से हमेशा दूर रहे ये खिलाड़ी

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने लाखों फैंस के बीच शानदार प्रदर्शन के बावजूद कभी खिताबी मुकाबला जीतने का सुख नहीं देखा। आइए जानते हैं ऐसे दिग्गज खिलाड़ियों के नाम। 1. एबी डिविलियर्सदक्षिण अफ्रीका के महान बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने आईपीएल में 184 मैच खेले, लेकिन कभी फाइनल जीतने वाली टीम का हिस्सा नहीं बन सके। उन्होंने दिल्ली और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेला। 2. संजू सैमसनसंजू सैमसन ने आईपीएल में 178 मैच खेलते हुए भी खिताबी मुकाबला नहीं जीता। वह 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से खेल रहे हैं, लेकिन फाइनल जीत का अनुभव अभी तक नहीं मिला। 3. युजवेंद्र चहलभारत के युजवेंद्र चहल 175 मुकाबलों में फाइनल जीतने में सफल नहीं रहे। आईपीएल 2025 में पंजाब किंग्स के साथ फाइनल तक पहुंचे, लेकिन खिताब जीत नहीं सके। 4. अमित मिश्रातीन हैट्रिक लेने वाले इकलौते गेंदबाज अमित मिश्रा ने 162 मैच खेलते हुए आज तक आईपीएल खिताबी टीम में जगह नहीं बनाई। उन्होंने कई बड़ी टीमों की तरफ से खेला। 5. अक्षर पटेलअक्षर पटेल ने 163 मैच खेलते हुए भी फाइनल जीतने वाली टीम का हिस्सा नहीं बने। आईपीएल 2025 में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी करते हुए भी खिताबी जीत हाथ नहीं लगी। 6. केएल राहुलटीम इंडिया के बल्लेबाज केएल राहुल ने 146 मैच खेले, लेकिन आईपीएल में एक बार भी चैंपियन टीम का हिस्सा नहीं बने। 7. क्रिस गेलकैरेबियाई दिग्गज क्रिस गेल ने 142 मैच खेलते हुए भी खिताबी टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। 8. ग्लेन मैक्सवेलऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ग्लेन मैक्सवेल 141 मैच खेल चुके हैं, लेकिन फाइनल जीतने वाली टीम में शामिल नहीं हुए। 9. संदीप शर्माअपनी लहराती गेंदों के लिए प्रसिद्ध संदीप शर्मा 138 मैच खेलकर भी आईपीएल खिताब जीतने में सफल नहीं हुए। उन्होंने कुल 146 विकेट लिए। 10. ऋषभ पंतभारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने 126 मैच खेलते हुए भी आईपीएल फाइनल नहीं जीता। वह आईपीएल 2025 में लखनऊ सुपर जायंट्स द्वारा 27 करोड़ रुपये में खरीदे गए थे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल, रीवा में मेगा जल योजना से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर

भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी दिशा में रीवा संभाग में एक महत्वाकांक्षी जल प्रदाय योजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत लगभग 2319.43 करोड़ रुपये की लागत से रीवा समूह जल प्रदाय परियोजना विकसित की जा रही है। इस परियोजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश जल निगम की परियोजना इकाई द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अब एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। परियोजना के अंतर्गत जल शोधन संयंत्र तक रॉ वाटर सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया है, जिससे अब अगले चरणों में तेजी आने की संभावना है। यह किसी भी जल योजना के लिए एक अहम पड़ाव माना जाता है, क्योंकि इसके बाद पानी के शोधन और वितरण का कार्य तेज गति से किया जा सकता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके के मार्गदर्शन में इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के तहत रीवा जिले के 677 गांवों और मऊगंज जिले के 936 गांवों को जोड़ा जा रहा है। इस प्रकार कुल 1613 गांवों को इस परियोजना से लाभ मिलेगा। योजना के पूर्ण होने पर लगभग 1.29 लाख ग्रामीण परिवारों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही जल संकट की समस्या का समाधान संभव होगा, जहां लोग अब तक स्वच्छ पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस परियोजना में केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक जल शोधन संयंत्रों और मजबूत वितरण नेटवर्क के माध्यम से घर-घर तक नल के जरिए पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी जल योजनाएं ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। स्वच्छ पेयजल मिलने से न केवल लोगों की दैनिक जीवनशैली सुधरती है, बल्कि जल जनित बीमारियों में भी कमी आती है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर ग्रामीण घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचे और लोगों को पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना न पड़े। रीवा संभाग की यह योजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में विकास और स्वास्थ्य के नए मानक स्थापित कर सकती है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल जल संकट से राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन स्तर में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। यह योजना प्रदेश में जल प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं के विकास का एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आ रही है।
5 दिग्गज क्रिकेटर्स जिन्होंने कभी आईपीएल में नहीं खेला, लेकिन बने हैं यादगार

नई दिल्ली। आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) में खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है। लीग में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की किस्मत रातों-रात चमकती है, लेकिन कुछ ऐसे दिग्गज खिलाड़ी भी रहे, जिन्हें कभी आईपीएल खेलने का मौका नहीं मिला। 1. जेम्स एंडरसनइंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन का नाम उन खिलाड़ियों में शामिल है जिन्हें आईपीएल का अवसर नहीं मिला। 42 साल की उम्र में उन्होंने ऑक्शन में हिस्सा लिया, लेकिन किसी टीम ने उन्हें खरीदा नहीं। एंडरसन टेस्ट क्रिकेट में 700 से ज्यादा विकेट लेने वाले एकमात्र तेज गेंदबाज हैं। 2. स्टुअर्ट ब्रॉडइंग्लिश तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को भी आईपीएल खेलने का मौका नहीं मिला। 2011 में पंजाब किंग्स ने उन्हें खरीदा था, लेकिन चोट के कारण ब्रॉड टूर्नामेंट से बाहर हो गए। इसके बाद उन्होंने आईपीएल से दूरी बना ली और टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता दी। 3. एलिस्टर कुकइंग्लैंड के टेस्ट दिग्गज बल्लेबाज एलिस्टर कुक को टी20 का फॉर्मेट पसंद नहीं आया। कुक इंग्लैंड की ओर से टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं और उन्होंने अपने करियर में 12,472 रन बनाए। आईपीएल में खेलने का अवसर उन्हें कभी नहीं मिला। 4. मुशफिकुर रहीमबांग्लादेश के विकेटकीपर-बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम ने कई बार आईपीएल ऑक्शन में भाग लिया, लेकिन किसी भी टीम ने उन्हें नहीं खरीदा। रहीम टी20 और वनडे में बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं, फिर भी आईपीएल में उनका नाम शामिल नहीं हुआ। 5. रीजा हेंड्रिक्ससाउथ अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज रीजा हेंड्रिक्स कई अन्य टी20 लीग में खेल चुके हैं, लेकिन आईपीएल में किसी भी टीम का भरोसा नहीं जीत सके।
अजय कुमार शर्मा: जम्मू-कश्मीर को रणजी चैंपियन बनाने वाले कोच, 36 की उम्र में लगा बैन

नई दिल्ली। जीवन में हमेशा वैसा नहीं होता है जैसा हम चाहते हैं। कभी इच्छा और जरूरत से ज्यादा मिल जाता है, तो कभी प्रतिभा और क्षमता से कम मौके मिलते हैं, और कभी-कभी कहानी ऐसे समाप्त होती है जिसका अंदाजा भी नहीं रहता। अजय कुमार शर्मा की कहानी ऐसी ही है। अजय कुमार शर्मा का जन्म 3 अप्रैल, 1964 को दिल्ली में हुआ था। बचपन से उन्हें क्रिकेट खेलने का शौक था। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों क्षेत्र में प्रतिभावान थे, इसलिए जूनियर स्तर से मौके मिलते चले गए। दाएं हाथ से मध्यक्रम की बल्लेबाजी और बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी करने वाले अजय को 1984-85 सत्र में दिल्ली के लिए डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने गेंद और बल्ले से प्रभावित किया, लेकिन भारतीय टीम में मौके के लिए उन्हें 4 साल का इंतजार करना पड़ा। अजय शर्मा ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए जनवरी 1988 में टेस्ट और वनडे में डेब्यू किया था। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच नवंबर 1993 में खेला था। इस दौरान उन्होंने 1 टेस्ट और 31 वनडे खेले। टेस्ट की 2 पारियों में उन्होंने 53 रन बनाए। वहीं 27 वनडे पारियों में 3 अर्धशतक की मदद से 424 रन बनाने के साथ ही 15 विकेट लिए। वनडे में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने की वजह से उन्हें ड्रॉप कर दिया गया। 1993 में टीम से ड्रॉप होने के बाद फिर उन्हें कभी राष्ट्रीय टीम में वापस आने का मौका नहीं मिला। अजय शर्मा का घरेलू करियर लंबा रहा है। दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले शर्मा ने 129 प्रथम श्रेणी मैचों की 166 पारियों में 38 शतक और 36 अर्धशतक की मदद से 10,120 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 259 रन था। इसके अलावा 87 विकेट भी उनके नाम रहे। 113 लिस्ट ए मैचों की 97 पारियों में 2 शतक और 20 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 2,814 रन बनाए। सर्वाधिक स्कोर नाबाद 135 रहा। लिस्ट ए में उनके 108 विकेट भी दर्ज हैं। 1999-2000 में वे रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। उनका 31वां शतक भी एक रिकॉर्ड था। 1996-97 में वे रणजी ट्रॉफी के एक सीजन में 1000 रन बनाने वाले सिर्फ तीसरे बल्लेबाज बने थे। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे शर्मा 2000 में फिक्सर्स के साथ संपर्क रखने के दोषी पाए गए और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। इस प्रतिबंध के साथ ही 36 साल की उम्र में उनका करियर समाप्त हो गया। 2014 में बीसीसीआई ने अजय शर्मा पर लगे फिक्सिंग के आरोप हटा दिए। इसके बाद शर्मा कोचिंग के क्षेत्र आए। अजय शर्मा ने कोचिंग के क्षेत्र में बड़ा कीर्तिमान हासिल किया है। अपनी कोचिंग में उन्होंने पहली बार जम्मू-कश्मीर को रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनाया है। शर्मा की कहानी हमें सिखाती है कि जीवन की दिशा कभी-भी और कहीं से भी बदली जा सकती है। इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य और मेहनत निरंतर कठिन परिश्रम जरुरी है।
लिएंडर पेस ने भारत में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत से की मुलाकात, फिलिप ग्रीन ने साझा की तस्वीर

नई दिल्ली।दिग्गज भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भारत में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत फिलिप ग्रीन से मुलाकात की। ग्रीन ने पेस के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की और ऑस्ट्रेलिया में बिताए गए समय को याद किया। ग्रीन ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, “टेनिस के दिग्गज लिएंडर पेस के साथ ऑस्ट्रेलिया में बिताए सालों और अब हम इसे कहां ले जाते हैं, इस पर बहुत अच्छी बातचीत हुई। वह भारत-ऑस्ट्रेलिया खेलों के मिश्रण को लेकर बहुत महत्वाकांक्षी हैं।” पेस मुलाकात के लिए ऑस्ट्रेलिया उच्चायोग पहुंचे थे। लिएंडर पेस की उपलब्धियांपेस भारत के सफलतम और लोकप्रिय टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं। वह भारत के एकमात्र टेनिस खिलाड़ी हैं जिनके नाम टेनिस ओलंपिक पदक है। उन्होंने 1996 अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता। मिक्स डबल्स में पेस के प्रमुख जीतें:ऑस्ट्रेलियन ओपन: 2003, 2010, 2015फ्रेंच ओपन: 2016विंबलडन: 1999, 2003, 2010, 2015यूएस ओपन: 2008, 2015 डबल्स में पेस की प्रमुख जीतें:ऑस्ट्रेलियन ओपन: 2012फ्रेंच ओपन: 1999, 2001, 2009यूएस ओपन: 2006, 2009, 2013 राजनीति में सक्रियतापेस राजनीति में भी सक्रिय हैं। पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। पेस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य हैं, और उन्होंने 31 मार्च 2026 को भाजपा की सदस्यता ली थी। सदस्य बनने के बाद पेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इससे पहले पेस पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य थे।