बंगाल चुनाव: टीएमसी ने सभी सीटों पर उतारे उम्मीदवार, भवानीपुर से मैदान में सीएम ममता बनर्जी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां उनका भी मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा सीटों से टिकट दिया है। इसके साथ ही सुजापुर सीट से सबीना यास्मीन, जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन, सागरदिघी सीट से बायरन बिस्वास, दिनहाटा सीट से उदयन गुहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सिलीगुड़ी सीट से गौतम देव चुनाव मैदान में उतरे हैं। खगराम सीट से आशीष मारजीत चुनाव लड़ेंगे। करीमपुर सीट से सोहम चक्रवर्ती चुनाव लड़ेंगे। कंडी सीट से अपूर्व सरकार चुनाव लड़ेंगे। सिताई सीट से संगीता रॉय बसुनिया चुनाव लड़ेंगी। कृष्णानगर उत्तर सीट से अभिनव भट्टाचार्य चुनाव लड़ेंगे। नवद्वीप सीट से पुण्डरीकाक्ष साहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, हरिन्घाटा सीट से राजीव विश्वास चुनाव लड़ेंगे। स्वरूपनगर सीट से बीना मंडल चुनाव लड़ेंगी। राजगंज सीट से सपना बर्मन चुनाव लड़ेंगी। हबरा सीट से ज्योतिप्रिया मल्लिक चुनाव लड़ेंगे। कृष्णानगर नगर दक्षिण सीट से उज्जवल विश्वास चुनाव लड़ेंगे। राणाघाट दक्षिण सीट से सौगत कुमार बर्मन चुनाव लड़ेंगे। कल्याणी सीट से अतींद्रनाथ मंडल चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले, सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। वहीं, वाम दल ने भी अपनी लिस्ट जारी की थी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
ओडिशाः केंद्रपाड़ा के कुशुनुपुर को ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में चुना गया, वैज्ञानिक नवाचार से बदलेगी तस्वीर

नई दिल्ली। ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रपाड़ा जिले के राजनगर ब्लॉक में स्थित तटीय गांव कुशुनुपुर को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की राष्ट्रीय पहल के तहत ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में चुना गया है। इस घोषणा से गांववासियों में उत्साह का माहौल है, क्योंकि यह पूर्वी भारत का एकमात्र गांव है जिसे इस कार्यक्रम के तहत चुना गया है। इस पहल के तहत देशभर के छह गांवों को “आदर्श गांवों” के रूप में चुना गया है, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार, उन्नत कृषि, ग्रामीण सशक्तिकरण, बेहतर पोषण और प्रौद्योगिकी-आधारित नेतृत्व को बढ़ावा देना है। यह परियोजना “विकसित भारत 2047” के विजन के अनुरूप है। भारत में अभी तक गुजरात का भाड़ा, लेह-लद्दाख का चुमाथांग, असम का जोहरत, मध्य प्रदेश का जनकपुर, राजस्थान का सवाईपुरा और ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले का कुशुनुपुर चयनित हुआ है। भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त निकाय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) इस कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही है। “प्रयोगशाला से भूमि तक” दृष्टिकोण पर आधारित सीएसआईआर इन गांवों में आजीविका और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए वैज्ञानिक नवाचारों को लागू करेगी। देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में स्थित इन गांवों की पहचान 2025 में की गई थी और ये “जीवित प्रयोगशालाओं” के रूप में कार्य करेंगे, जहां वैज्ञानिक समाधानों का परीक्षण और कार्यान्वयन किया जाएगा। वैज्ञानिकों की एक टीम ने ग्रामीणों के साथ उनके जीवनशैली, चुनौतियों और स्थानीय संसाधनों को समझने के लिए पहले ही बातचीत शुरू कर दी है। एक स्थानीय स्वयंसेवी संगठन, नेचर्स क्लब, क्षेत्र अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों की सहायता कर रहा है। नेचर्स क्लब की सचिव मधुस्मिता पति ने कहा कि देशभर में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में विकसित वैज्ञानिक नवाचारों को कुशुनुपुर में लागू किया जाएगा। यदि सफल होते हैं, तो इन मॉडलों को अन्य क्षेत्रों में भी दोहराया जाएगा। तीन वर्षीय कार्यक्रम कई विकासात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिनमें चक्रवात और भूकंप प्रतिरोधी भवनों और आश्रयों का निर्माण, सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, उन्नत और टिकाऊ कृषि तकनीकें, बिजली रहित शीत भंडारण प्रणाली, कृषि अपशिष्ट से जैविक खाद उत्पादन, युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास, विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं और स्वास्थ्य सेवाओं में टेलीमेडिसिन सुविधाएं शामिल हैं। इस पहल से जिले में बेरोजगारी और मजदूरों के मौसमी पलायन जैसी समस्याओं का समाधान होने की भी उम्मीद है। 2011 की जनगणना के अनुसार, केंद्रपाड़ा जिले में 1,592 राजस्व ग्राम हैं। राजनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कुशुनुपुर गांव को इस परियोजना के लिए औपचारिक रूप से चुना गया है और स्मार्ट विलेज पहल की आधारशिला एक कार्यक्रम के दौरान रखी गई, जिसमें केंद्रपाड़ा कलेक्टर रघुराम आर. अय्यर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस गांव में 135 परिवार हैं, जिनकी आबादी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 738 हैं। गांववासियों ने आशा व्यक्त की कि यह परियोजना पेयजल की कमी, सिंचाई की कमी, सीमित कृषि उत्पादकता, युवाओं में बेरोजगारी और अपर्याप्त विद्यालय संरचना जैसी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करेगी। गांव निवासी प्रभात राउत ने कहा कि समुदाय मुफ्त लाभ नहीं चाहता, बल्कि रोजगार के अवसर और स्थानीय स्तर पर उत्पादित वस्तुओं के विपणन में सहायता चाहता है। सीएसआईआर की ओडिशा प्रयोगशाला, आईआईएमटी भुवनेश्वर के निदेशक रामानुज नारायण ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विज्ञान को सीधे ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि कुशुनुपुर गांव को इसकी क्षमता और अनूठी भौगोलिक परिस्थितियों, जैसे कि जंगलों, नदियों और समुद्र से निकटता के कारण चुना गया है। वैज्ञानिक पिछले दो महीनों से नियमित रूप से गांव का दौरा कर स्थानीय समस्याओं का अध्ययन कर रहे हैं और वैज्ञानिक समाधान तलाश रहे हैं। नारायण ने इस बात पर जोर दिया कि एक “स्मार्ट गांव” का अर्थ केवल डिजिटल प्रौद्योगिकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और महिलाओं में ज्ञान, कौशल और बेहतर शिक्षा का विकास करना भी है। बाल रक्षा भारत (सेव द चिल्ड्रन) के सीईओ शांतनु चक्रवर्ती ने कहा कि संगठन इस कार्यक्रम को लागू करने में सीएसआईआर और सीबीआरआई के साथ विशेष रूप से आपदा प्रबंधन, नवाचार और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में सहयोग करेगा। केंद्रपाड़ा के कलेक्टर रघुराम आर. अय्यर ने बताया कि सीएसआईआर के पास कृषि से लेकर आजीविका तक विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाली 16 विशेष प्रयोगशालाएं हैं। वैज्ञानिकों ने गांव का सर्वेक्षण कर लिया है और किसानों और निवासियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले सप्ताह से शुरू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से अपशिष्ट पुनर्चक्रण, प्लास्टिक मुक्त ग्राम अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। स्मार्ट विलेज परियोजना से कुशुनुपुर में जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है और यह देश के अन्य हिस्सों में ग्रामीण विकास के लिए एक आदर्श के रूप में कार्य करेगी।
नाबालिग क्रिकेट स्टार का एडल्ट फिल्म देखने का कबूलनामा उठा सुरक्षा और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल

नई दिल्ली:भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने खेल से ज्यादा एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित समारोह के दौरान उनकी एक मासूम सी स्वीकारोक्ति ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। महज 14 साल के इस खिलाड़ी ने मंच पर अपनी पसंदीदा फिल्म के रूप में हाल ही में रिलीज हुई एक ऐसी फिल्म का नाम ले लिया जिसे केवल वयस्कों के लिए प्रमाणित किया गया है। इसके बाद से सवालों की झड़ी लग गई है और बहस का केंद्र बन गया है कि आखिर एक नाबालिग तक ऐसी फिल्म की पहुंच कैसे हुई। यह मामला केवल एक बच्चे के बयान तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने सिनेमाघरों की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ए सर्टिफिकेट वाली फिल्मों के लिए स्पष्ट नियम है कि 18 वर्ष से कम आयु के दर्शकों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता चाहे वे अभिभावकों के साथ ही क्यों न हों। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या थिएटर स्तर पर पहचान की जांच में लापरवाही हुई या फिर किसी विशेष स्थिति में नियमों को नजरअंदाज किया गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस मुद्दे को लेकर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि यदि एक जाना पहचाना चेहरा होने के बावजूद उम्र की पुष्टि नहीं की गई तो आम दर्शकों के मामले में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि कम भीड़ या ढीली निगरानी का फायदा उठाकर किशोर आसानी से ऐसे कंटेंट तक पहुंच बना लेते हैं जो उनकी उम्र के हिसाब से उपयुक्त नहीं होता। वहीं दूसरी ओर यह बहस केवल सिनेमाघरों तक सीमित नहीं है। डिजिटल युग में ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरनेट के जरिए एडल्ट कंटेंट तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है। ऐसे में यह भी संभव है कि फिल्म घर पर देखी गई हो। यदि ऐसा है तो अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े होते हैं। बच्चों की मीडिया खपत पर निगरानी रखना आज के समय में बेहद जरूरी हो गया है क्योंकि गलत कंटेंट उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर असर डाल सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका सख्ती से पालन होना भी उतना ही जरूरी है। सिनेमाघरों को अपनी जांच प्रक्रिया मजबूत करनी होगी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी आयु सत्यापन के बेहतर उपाय अपनाने होंगे। साथ ही अभिभावकों को भी सतर्क रहना होगा ताकि बच्चे उम्र के अनुसार ही कंटेंट देखें। वैभव सूर्यवंशी का यह मामला भले ही अनजाने में हुआ एक बयान हो लेकिन इसने समाज के सामने एक बड़ी सच्चाई रख दी है। आज के दौर में बच्चों तक किसी भी तरह का कंटेंट पहुंचाना बेहद आसान हो गया है और यही सबसे बड़ी चुनौती है। यह घटना एक चेतावनी की तरह है कि मनोरंजन के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
पलामू में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, आयुष्मान भारत योजना से मुफ्त इलाज जारी

नई दिल्ली। झारखंड के पलामू में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सालाना 5 लाख रुपए तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इस योजना ने उनकी सबसे बड़ी चिंता, इलाज के खर्च को खत्म कर दिया है, जिससे कम समय में अच्छा इलाज मिल रहा है और पैसे की परेशानी भी खत्म हो रही है। मरीज के परिजन शकीर आलम ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी के बाद नवजात की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद संक्रमण की समस्या बताई और तुरंत इलाज शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर आयुष्मान योजना नहीं होती, तो इतना महंगा इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था। इस योजना के कारण उन्हें 70 से 80 प्रतिशत तक आर्थिक राहत मिली है और अभी तक उन्हें कोई खर्च नहीं उठाना पड़ा है। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ के व्यवहार की भी सराहना की और कहा कि गरीबों के लिए यह योजना बेहद उपयोगी है। इसी तरह एक अन्य लाभार्थी के परिजन धनंजय विश्वकर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उनके बेटे का इलाज भी इसी योजना के तहत चल रहा है। पहले इलाज के लिए पैसे की चिंता सबसे बड़ी समस्या होती थी, लेकिन अब सरकार की इस पहल से गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है। अस्पताल के कर्मचारी रवि कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने गरीब मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। पहले जहां इलाज के अभाव में कई लोग परेशान रहते थे, वहीं अब उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना वास्तव में समाज के कमजोर वर्ग के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। अस्पताल संचालक और प्राइवेट अस्पताल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके अस्पताल में वर्तमान में करीब 10 मरीज आयुष्मान योजना के तहत भर्ती हैं। योजना की प्रक्रिया काफी सरल है। मरीज के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड होना चाहिए। इसके बाद आयुष्मान पोर्टल पर नाम की पुष्टि होते ही मरीज को भर्ती कर लिया जाता है और इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत सामान्य सर्जरी, नवजात के लिए एनआईसीयू, बच्चों के लिए पीआईसीयू, इमरजेंसी सेवाएं और कई गंभीर बीमारियों का इलाज भी शामिल है। पहले जहां गरीबों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी, वहीं अब उन्हें निजी अस्पतालों में भी सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है।
कॉनकोर में मैनेजर बनने का सुनहरा मौका, 10 पदों पर भर्ती, 16 अप्रैल आखिरी तारीख

नई दिल्ली। देश की अग्रणी लॉजिस्टिक्स और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कंपनी Container Corporation of India Limited (कॉनकोर) में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। कंपनी ने मैनेजर कैडर के कुल 10 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत मैनेजर (E3), डिप्टी मैनेजर (E2) और असिस्टेंट मैनेजर (E1) जैसे अहम पद शामिल हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑफलाइन मोड के जरिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 16 मार्च से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 16 अप्रैल तय की गई है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। योग्यता और आयु सीमा क्या हैकॉनकोर द्वारा जारी इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा, पद के अनुसार अन्य पात्रता शर्तें भी लागू होंगी, जिन्हें उम्मीदवारों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। आयु सीमा की बात करें तो अधिकतम आयु 56 वर्ष निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों की उम्र की गणना आवेदन की अंतिम तिथि यानी 16 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी। अनुभवी उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती खास मौका साबित हो सकती है। चयन प्रक्रिया और सैलरी पैकेजइस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों के आधार पर किया जाएगा। सबसे पहले उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग होगी, जिसके बाद इंटरव्यू, पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (PPT), पिछले तीन वर्षों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) और दस्तावेज़ सत्यापन किया जाएगा। इन सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक सैलरी दी जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को हर महीने 50,000 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये तक वेतन मिल सकता है, जो सरकारी क्षेत्र में एक बेहतरीन पैकेज माना जाता है। आवेदन प्रक्रिया: ऐसे करें अप्लाई इस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑफलाइन मोड में करना होगा। उम्मीदवार सबसे पहले कॉनकोर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और भर्ती से संबंधित नोटिफिकेशन डाउनलोड करें। इसके बाद उसमें दिए गए आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट निकालें। फॉर्म में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सही-सही भरें और आवश्यक दस्तावेज़ों की कॉपी संलग्न करें। इसके बाद आवेदन फॉर्म को एक लिफाफे में डालकर निर्धारित पते पर भेजना होगा। आवेदन भेजने का पता है-सीनियर जनरल मैनेजर (एचआर), कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, एनएसआईसी एमडीबीपी बिल्डिंग, तीसरी मंजिल, ओखला औद्योगिक एस्टेट, नई दिल्ली-110076। क्यों खास है यह मौकासरकारी क्षेत्र में उच्च पदों पर काम करने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर है। खासतौर पर वे उम्मीदवार जिनके पास अनुभव और संबंधित योग्यता है, वे इस मौके का पूरा लाभ उठा सकते हैं। अच्छी सैलरी, प्रतिष्ठित पद और करियर ग्रोथ के लिहाज से यह नौकरी बेहद आकर्षक मानी जा रही है। ऐसे में इच्छुक उम्मीदवार बिना देरी किए आवेदन कर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें।
बिजनेस को बढ़ावा देने में कारगर पीएम मुद्रा योजना, निर्मला सीतारमण ने गिनाईं खूबियां

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) देश के छोटे उद्यमियों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है, जिससे लाखों लोग अपने बिजनेस आइडिया को आसानी से शुरू कर पा रहे हैं। राज्यसभा में योजना के प्रभाव से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि पीएम मुद्रा योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं – शिशु (50,000 रुपए तक), किशोर (50,001 से 5 लाख रुपए तक) और तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपए तक)। ये तीनों कैटेगरी अलग-अलग स्तर के कारोबार के लिए हैं, जिससे छोटे और माइक्रो बिजनेस को बढ़ावा मिलता है। 31 मार्च 2025 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शिशु कैटेगरी में 12.4 प्रतिशत, किशोर में 9.4 प्रतिशत और तरुण में 7.92 प्रतिशत लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में दर्ज हैं। बैंकों द्वारा इन लोन की वसूली के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि योजना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके। वित्त मंत्री ने तरुण प्लस कैटेगरी को लेकर भी बात की, जिसमें 20 लाख रुपए तक का बिना गारंटी लोन दिया जाता है। यह योजना खास तौर पर उन उद्यमियों के लिए है जिन्होंने पहले लिए गए तरुण लोन को समय पर चुका दिया है और अब अपने कारोबार को और बढ़ाना चाहते हैं। यह नई कैटेगरी केंद्रीय बजट 2024-25 के बाद शुरू की गई थी और अक्टूबर 2024 से लागू हुई है। इस पर उन्होंने कहा कि यह योजना अभी नई है, इसलिए इसके सही असर को देखने के लिए थोड़ा समय देना जरूरी है। 2015 में शुरू हुई पीएम मुद्रा योजना के तहत अब तक 52 करोड़ से ज्यादा लोन दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 32 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त लोन भी स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा महिला उद्यमियों को मिला है, क्योंकि कुल लोन में से करीब 68 प्रतिशत लोन महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है। सरकार छोटे कारोबारियों को आसानी से लोन उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि आत्मनिर्भर भारत और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सके। वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब वित्तीय क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर का कुल एनपीए मार्च 2025 तक करीब 3.6 प्रतिशत रहा, जो मुद्रा योजना के आंकड़ों से कम है।
भारत ने अमेरिका समेत कई देशों से बढ़ाया LPG आयात, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को कहा गया कि भारत ने अमेरिका सहित कई देशों से एलपीजी को आयात करना शुरू कर दिया है। साथ ही बताया कि देश में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर से गैस खत्म होने की रिपोर्ट नहीं मिली है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की विपणन एवं तेल रिफाइनरी संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि अधिकांश एलपीजी खाड़ी देशों से आ रही है। शर्मा ने कहा, “हमारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से एलपीजी लेना शुरू कर दिया है। सरकार एलपीजी के स्रोतों में विविधता लाने के लिए भी हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “विविधीकरण बढ़ने के कारण आज हमें अधिक कच्चा तेल मिल रहा है। राज्यों द्वारा वितरण कार्य फिर से शुरू करने के साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल हो गई है। घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग भी शुरू कर दिया गया है। शर्मा ने बताया कि घबराहट के कारण बढ़ी मांग में कमी आ रही है और बुकिंग में गिरावट देखी जा रही है। 13 मार्च को 89 लाख बुकिंग दर्ज की गई थीं, जो आज घटकर 70 लाख रह गई हैं। उन्होंने कहा कि एलपीजी रिफिल वितरण दर संघर्ष से पहले जैसी ही है और उन्होंने उपभोक्ताओं से जमाखोरी और कालाबाजारी से खरीददारी से बचने का आग्रह किया।मंत्रालय के अनुसार, ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है। शर्मा ने कहा, “किसी भी एलपीजी वितरक के पास ईंधन की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर बढ़ते रुझान से बुकिंग में सुधार हुआ है। इस बीच, भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ मंगलवार को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा, जो इस सप्ताह पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला दूसरा एलपीजी वाहक बन गया। इससे एक दिन पहले ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बेहद जोखिम भरे मार्ग से गुजरने के बाद भारत को महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति पहुंचा रहे थे। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान- अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री यातायात बाधित है।
West Bengal Election 2026: क्या चौथी बार सत्ता में लौटेंगी ममता बनर्जी या BJP बदलेगी 15 साल का खेल?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल तेज हो गया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं और इस बार उनकी नजर लगातार चौथी जीत पर है। अगर वह इस चुनाव में जीत हासिल करती हैं, तो वह राज्य की पहली ऐसी नेता बन जाएंगी जो लगातार चार बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाएंगी। 15 साल की सत्ता और नया चुनावी इम्तिहानममता बनर्जी ने साल 2011 में 34 साल पुराने वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता संभाली थी। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जीत दर्ज की। अब 2026 का चुनाव उनके लिए एक बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है, क्योंकि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद जनता के बीच असंतोष भी एक बड़ा फैक्टर बन सकता है। चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार मतदान दो चरणों में होगा: 23 अप्रैल 29 अप्रैल जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पिछली बार की तुलना में इस बार कम चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं। लगातार 15 साल से सत्ता में रहने के कारण एंटी-इनकम्बेंसी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। लोगों के बीच कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वोटर लिस्ट विवादइस चुनाव में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब 63 लाख वोटरों के नाम हटाए गए लाखों नाम अभी भी जांच में यह मुद्दा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। बीते कुछ सालों में TMC सरकार पर कई घोटालों के आरोप लगे हैं, जैसे शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन (PDS) घोटाला, तस्करी से जुड़े मामले इन मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। राज्य में वक्फ कानून और अन्य मुद्दों को लेकर भी विवाद बढ़ा है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक माहौल प्रभावित हुआ है। BJP की बढ़ती चुनौतीइस बार BJP ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में हैृ। 2021 के मुकाबले पार्टी इस बार ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। चुनाव से पहले ममता सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाई बेरोजगार युवाओं के लिए आर्थिक मदद सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) पुजारियों और मुअज्जिनों के मानदेय में बढ़ोतरी इन योजनाओं के जरिए ममता बनर्जी अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही हैं। क्या फिर बनेगी सरकार?राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी अब भी राज्य की सबसे मजबूत नेता हैं, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कठिन है। शहरी इलाकों में नाराजगी और भ्रष्टाचार के आरोप चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। बंगाल चुनाव 2026 सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक भविष्य की बड़ी परीक्षा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह चौथी बार जीतकर इतिहास रचती हैं या इस बार बंगाल की सत्ता में बदलाव आता है।
एनपीसीआई ने श्रीलंका में यूपीआई की स्वीकार्यता का विस्तार किया, अर्थव्यवस्था के साथ पर्यटकों को होगा फायदा

नई दिल्ली। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट लिमिटेड (एनआईपीएल) ने मंगलवार को कहा कि वह श्रीलंका में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की स्वीकार्यता में विस्तार कर रहा है। एनपीसीआई ने आगे कहा कि इससे भारतीय यात्रियों के लिए श्रीलंका में भुगतान का अनुभव अच्छा होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भारत में 700 मिलियन से अधिक क्यूआर टचपॉइंट्स के साथ, प्लेटफॉर्म की इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर वैश्विक प्रणालियों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाती है, जिसमें श्रीलंका का लंकापे-संचालित लंकाक्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। पर्यटन क्षेत्र के लिए भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा स्रोत बाजार बना हुआ है। 2024 में 4.16 लाख से अधिक भारतीय पर्यटकों श्रीलंका गए थे, यह आंकड़ा 2025 में बढ़कर 5.31 लाख हो गया। इस स्थिर वृद्धि ने घूमने, खरीदारी, शादियों और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए द्वीप पर आने वाले भारतीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और विश्वसनीय भुगतान समाधानों की मांग को बढ़ा दिया है। एनपीसीआई ने कहा, “एनआईपीएल और लंकापे के बीच सहयोग के माध्यम से, भारतीय पर्यटक अब यूपीआई-सक्षम ऐप का उपयोग करके लंकाक्यूआर कोड को स्कैन करके पूरे श्रीलंका में डिजिटल भुगतान कर सकते हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो जाएगी।” यह सेवा प्रमुख प्रतिष्ठानों, जिनमें होटल चेन, खुदरा दुकानें और सुपरमार्केट शामिल हैं, में उपलब्ध है। इस सेवा की व्यापक स्वीकृति के लिए, एनआईपीएल श्रीलंका के घरेलू भुगतान ढांचे के अनुरूप, श्रीलंका के केंद्रीय बैंक, अधिग्रहण करने वाले बैंकों और व्यापारियों जैसे प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। एनपीसीआई के अनुसार, इस पहल से यात्रियों और व्यापारियों दोनों को लाभ होने की उम्मीद है। पर्यटकों को वास्तविक समय में भुगतान, पारदर्शी विनिमय दरें और एक परिचित भुगतान इंटरफेस की सुविधा मिलेगी, वहीं श्रीलंकाई व्यवसाय एक बड़े डिजिटल ग्राहक आधार का लाभ उठा सकेंगे, नकदी प्रबंधन में सुधार कर सकेंगे और भौतिक मुद्रा पर निर्भरता कम कर सकेंगे। एनपीसीआई इंटरनेशनल के एमडी और सीईओ रितेश शुक्ला ने कहा कि कंपनी सीमा पार लेनदेन को सरल बनाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अंतर-संचालनीय भुगतान गलियारों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा, “यूपीआई के बढ़ते उपयोग के साथ, हमारा लक्ष्य आतिथ्य, खुदरा और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भुगतान स्वीकृति को बढ़ाना है, जिससे व्यवसायों के लिए मूल्य सृजित हो और समग्र यात्रा अनुभव बेहतर हो।
ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने टाली चीन यात्रा, बोले युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा

वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच अपनी चीन यात्रा फिलहाल टाल दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उनका व्हाइट हाउस में रहना जरूरी है और यही कारण है कि उन्होंने बीजिंग दौरे को करीब एक महीने के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया है। ट्रंप की यह यात्रा 28 मार्च से 1 अप्रैल के बीच प्रस्तावित थी लेकिन अब नई तारीखों की घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वे चीन जाने के इच्छुक हैं और दोनों देशों के रिश्ते अच्छे हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका में रहना प्राथमिकता है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है और यह ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं कि युद्ध इसी सप्ताह समाप्त हो जाए। ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा के हित में उठाया गया है। उनके अनुसार यदि यह कार्रवाई नहीं की जाती तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है जिसमें उसकी नौसेना वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से युद्ध से बचना चाहते थे लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम केवल अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। शेयर बाजार पर संभावित असर को लेकर ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि बाजार में ज्यादा गिरावट देखने को मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके मुताबिक अगर थोड़े समय के लिए असर पड़ता भी है तो यह बहुत छोटी कीमत है। जब उनसे भविष्य की सैन्य रणनीति या जमीनी सेना भेजने की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कुल मिलाकर ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप का यह फैसला वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकता है जबकि दुनिया की नजर अब इस संघर्ष के संभावित अंत पर टिकी हुई है।