मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अजिंक्य नाइक ने की मुलाकात, 1 लाख दर्शक क्षमता वाले स्टेडियम के निर्माण पर चर्चा

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में खेल अभिलेखागार को नई ऊंचाई तक की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में एक विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य के खेलों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा हुई। 1 लाख दर्शकों की क्षमता वाला मेगा स्टेडियम होगाप्रस्तावित स्टेडियम को 1,00,000 दर्शकों की क्षमता के साथ तैयार करने की योजना है, जिसमें इसमें दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम शामिल होंगे। यह प्रोजेक्ट सिर्फ मुंबई नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक शानदार स्पोर्ट्स पिक्चर के रूप में उभर सकता है। खेल इकोसिस्टम को जल्द ही बड़ा बढ़ावा मिलेगाअजिंक्य नाइक ने स्पोर्टिंग इकोसिस्टम के लिए यह पहला कदम ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह स्टेडियम के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय स्तर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक क्रिकेट के विकास को स्थापित करेगा। उनका कहना है, यह प्रोजेक्ट युवा प्रतिभाओं को निखारने, प्रशिक्षण सुविधाओं को बेहतर बनाने और महाराष्ट्र को वैश्विक क्रिकेट नतीजों में मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। खेल पर्यटन और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर नजरइस स्टेडियम के निर्माण से खेल पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बड़े अंतर्राष्ट्रीय खेलों और खेलों की टीमों से न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि मुंबई की वैश्विक खेल की पहचान भी और मजबूत होगी। सिडको के साथ तैयार हो रहा रोडमैप इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अजिंक्य नाइक ने विजय सिंघल (सीआईडीसीओ के प्रबंध निदेशक) के साथ विस्तृत चर्चा की। इसमें स्टेडियम के निर्माण, बुनियादी ढांचे और आर्किटेक्चर से जुड़े विभिन्न मानकों पर काम किया गया। 2025 में हुआ था बड़ा लॉन्चमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने 2025 में वानखेड़े स्टेडियम में एक कार्यक्रम के आयोजन के दौरान इस मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने एमसीए को स्टेडियम निर्माण के लिए उपलब्ध जमीन का वादा किया था। प्रेमी को नया अनुभवस्टेट-ऑफ-द-आर्ट सुविधाओं से लैस यह स्टेडियम के कमरों को आधुनिक और बेहतर अनुभव प्रदान करता है। इसमें सीटिंग, डिजिटल उपकरण, बेहतर सुविधाएँ और अंतर्राष्ट्रीय मानक की व्यवस्थाएँ शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट इतना खास क्यों है?यह प्रोजेक्ट केवल एक स्टेडियम नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया गया है, जो भविष्य के खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर पहुंचने का मौका देगा और भारत को क्रिकेट के क्षेत्र में और मजबूत बनाएगा।
सिंगरौली ने रचा इतिहास खनिज राजस्व में 4681 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली

सिंगरौली । मध्यप्रदेश का सिंगरौली जिला एक बार फिर अपनी पहचान को मजबूत करते हुए सुर्खियों में आ गया है इस बार वजह है खनिज राजस्व वसूली में बनाया गया ऐतिहासिक रिकॉर्ड वित्तीय वर्ष 2025 26 में जिले ने 4681.05 करोड़ रुपये की शानदार वसूली कर न केवल अपने तय लक्ष्य का 96.86 प्रतिशत हासिल किया बल्कि पूरे प्रदेश में पहला स्थान भी कायम रखा है सिंगरौली को देश के प्रमुख खनन क्षेत्रों में गिना जाता है यहां कोयला और अन्य खनिज संसाधनों की प्रचुरता है यही कारण है कि जिले की अर्थव्यवस्था में खनन का अहम योगदान रहता है इस बार प्रशासन ने योजनाबद्ध रणनीति और कड़ी निगरानी के साथ राजस्व वसूली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है केवल खनिज राजस्व ही नहीं बल्कि कर वसूली के क्षेत्र में भी जिले ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है प्रशासन ने निर्धारित लक्ष्य का 97.61 प्रतिशत हासिल करते हुए 946.80 करोड़ रुपये की वसूली की है यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि जिले में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था बेहद मजबूत हुई है इस उपलब्धि के पीछे प्रशासन की सख्ती और पारदर्शी कार्यप्रणाली को मुख्य कारण माना जा रहा है खासतौर पर अवैध खनन के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति ने बड़ा असर दिखाया है पूरे साल में 289 मामलों में कार्रवाई करते हुए 2.20 करोड़ रुपये की वसूली की गई है इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है बल्कि सरकारी राजस्व में भी वृद्धि हुई है जिला प्रशासन का कहना है कि यह सफलता किसी एक विभाग की नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है खनिज विभाग अधिकारियों और मैदानी अमले की लगातार निगरानी और समन्वय के कारण यह संभव हो सका है साथ ही तकनीक के उपयोग और पारदर्शी व्यवस्था ने भी इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है सिंगरौली का यह प्रदर्शन पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन गया है यह दिखाता है कि यदि सही रणनीति और कड़ाई से नियमों का पालन किया जाए तो राजस्व वसूली में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है आने वाले समय में भी प्रशासन इस गति को बनाए रखने और नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में काम करता रहेगा इस उपलब्धि ने न केवल जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है बल्कि प्रदेश स्तर पर उसकी पहचान को भी और सशक्त किया है सिंगरौली का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है जहां खनन और राजस्व प्रबंधन को लेकर सुधार की आवश्यकता है
एक गलती और जिंदगी दांव पर ओवरटेक के चक्कर में खौफनाक सड़क हादसा

खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन शहर से एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है जिसने एक बार फिर सड़क पर लापरवाही के खतरनाक अंजाम को उजागर कर दिया है आनंद नगर इलाके में सुबह के समय एक ऐसा हादसा हुआ जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं जानकारी के मुताबिक सींट्रिंग का काम करने वाला युवक सद्दाम अहमद अपनी बाइक से लोहे का सरिया लेकर जा रहा था सुबह का वक्त था और सड़क पर सामान्य ट्रैफिक चल रहा था इसी दौरान उसने एक स्कूल बस को ओवरटेक करने की कोशिश की लेकिन यह कोशिश उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गई जैसे ही उसने बस को पार करने की कोशिश की बाइक पर रखा सरिया बस से टकरा गया और जोरदार झटके के साथ सीधे उसके गले में जा धंसा हादसा इतना खतरनाक था कि लोहे का सरिया युवक के गले में करीब चार इंच तक अंदर घुस गया और मौके पर ही खून बहने लगा यह दृश्य इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए लेकिन इसी बीच इंसानियत की एक मिसाल भी देखने को मिली एक ऑटो चालक ने बिना समय गंवाए घायल युवक को अपनी गाड़ी में बैठाया और तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया लेकिन युवक की हालत को गंभीर देखते हुए उसे तुरंत Indore रेफर कर दिया गया जहां उसका इलाज जारी है बताया जा रहा है कि फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है बताया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े एक चालक ने घायल को तुरंत शिफ्ट करने में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और वीडियो बनने के डर से ही कार्रवाई की इस तरह का व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है क्योंकि आपात स्थिति में हर पल कीमती होता है और ऐसी लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही किस तरह जानलेवा बन सकती है खासकर ओवरटेक करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है अक्सर लोग जल्दबाजी या जोखिम लेकर आगे निकलने की कोशिश करते हैं लेकिन एक छोटी सी चूक जिंदगी और मौत के बीच की दूरी को खत्म कर सकती है सड़क सुरक्षा के नियम सिर्फ औपचारिकता नहीं हैं बल्कि हमारी जिंदगी की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं ऐसे में हर वाहन चालक की जिम्मेदारी है कि वह नियमों का पालन करे और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखे यह हादसा एक चेतावनी है कि कुछ सेकंड की जल्दबाजी पूरे जीवन पर भारी पड़ सकती है
वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना कोई नई बात नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी होती रही है। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। फॉर्म-6 को लेकर TMC ने जताई थी आपत्ति तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा—पहली बार नहीं सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने कहा कि किसी भी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकता है। चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है। अदालत ने प्रक्रिया समझने की दी नसीहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो तय तिथि तक अपडेट होती है। अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।
मैसेजिंग ऐप्स यूजर्स को बड़ी राहत…. SIM Binding नियम लागू होने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ी

नई दिल्ली। डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार लगातार नए नियम लागू कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal के लिए SIM Binding नियम बनाया है। पहले सरकार का इस नियम को 1 मार्च से लागू करने का प्लान था लेकिन दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़ी राहत दी है। सरकार ने SIM Binding नियम को लागू करने की आखिरी तारीख को अब साल के अंत तक 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। दरअसल, इन प्लेटफॉर्म्स ने सरकार को बताया कि इस नियम को लागू करने में उन्हें कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उन्होंने ज्यादा समय मांगा था। इस पर सरकार ने उनकी बात मानते हुए डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। मनीकंट्रोल के सूत्रों के मुताबिक, DoT ने 30 मार्च से कंपनियों को अलग-अलग इस फैसले की जानकारी देना शुरू कर दिया था। सिर्फ मैसेजिंग ऐप्स ही नहीं, बल्कि मोबाइल बनाने वाली कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम देने वाली कंपनियां जैसे Google और Apple ने भी इस नियम को लागू करने के लिए ज्यादा समय मांगा था। खासतौर पर Apple ने कहा कि उसके iOS सिस्टम में कुछ तकनीकी सीमाएं हैं, जिनकी वजह से इस नियम को तुरंत लागू करना मुश्किल है। हालांकि, कंपनी इस पर काम कर रही है और समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। इस नियम के तहत अब इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वे तभी काम करें जब यूजर का रजिस्टर्ड SIM उसी फोन में मौजूद हो। यानी अगर SIM निकाल दिया गया या बदल दिया गया, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। ऐसे काम करता है यह नियमSIM Binding नियम को इस तरह तैयार किया गया है कि मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal यूजर के मोबाइल में मौजूद SIM कार्ड से जुड़े रहें। आसानी से समझें तो अगर आपने जिस नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में होना चाहिए। अगर SIM हटा दिया गया, बदल दिया गया या बंद हो गया, तो ऐप का एक्सेस सीमित हो सकता है या अकाउंट काम करना बंद कर सकता है। इस नियम का मकसद यह कन्फर्म करना है कि हर अकाउंट किसी असली और एक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ा रहे, जिससे फर्जी अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड को रोका जा सके। जरूरी है यह नियमदरअसल, इस नियम की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि हाल के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी WhatsApp अकाउंट और साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोग बिना एक्टिव SIM के भी मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे उनकी पहचान ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में SIM Binding नियम से हर अकाउंट को एक असली मोबाइल नंबर से जोड़ना आसान होगा, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी और गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।
दुनिया का आखिरी तेल रूट बंद होने वाला है? हूतियों की चाल से बढ़ी ग्लोबल टेंशन

वाशिंगटन। हूती यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास के पहाड़ी इलाकों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह स्ट्रेट 32 किलोमीटर चौड़ा है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां से एशिया और यूरोप के बीच वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत गुजरता है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध के महज एक महीने के बाद ही यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैलता जा रहा है और अब एक नया खतरनाक रूप ले चुका है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर तीसरी बार मिसाइल हमला किया है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान और लेबनान के हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर कतर एनर्जी के एक तेल टैंकर पर हमला बोल दिया। इस कार्रवाई के जरिए हूती समूह ने साफ संदेश दिया है कि यह युद्ध अब सीमित नहीं रहने वाला है, और आने वाले समय में इसका असर व्यापक होने वाला है। बता दें कि हूती को औपचारिक रूप से अंसार अल्लाह (ईश्वर के समर्थक) कहा जाता है, शिया इस्लाम की जैदी शाखा से जुड़े हैं। अरब स्प्रिंग के बाद से उन्होंने यमन की राजधानी सना और लाल सागर के अधिकांश तटीय इलाकों पर नियंत्रण बनाए रखा है। वे पहले भी दो बड़े अमेरिकी बमबारी अभियानों से बच निकले थे। पहला 2024 में बाइडेन प्रशासन के दौरान और दूसरा मार्च से मई 2025 के बीच डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में। ट्रंप ने अंत में उनके साथ समझौता किया था और अपनी खास स्पष्ट भाषा में कहा था कि आप कह सकते हैं कि उनमें बहुत साहस है। युद्धकला में निपुण माने जाते हैं हूती कहा जाता है कि ये लड़ाके युद्धकला में निपुण माने जाते हैं। उनके पास ड्रोन, जहाज-रोधी मिसाइलें हैं और उन्होंने पहले भी वैश्विक जहाजरानी को बाधित करने का रिकॉर्ड बनाया है। 2023 के अंत से 2025 की शुरुआत तक हूतियों ने गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में लाल सागर में 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले किए थे। वे ईरान के ‘प्रतिरोध अक्ष’ (Axis of Resistance) का हिस्सा हैं। एक ऐसा नेटवर्क जिसमें तेहरान हथियार, धन और समन्वय उपलब्ध कराता है। जब ईरान युद्ध में कूदता है, तो यह पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। पिछले शनिवार को ठीक कुछ ऐसा ही हुआ। हूतियों ने अपने मिसाइल हमले को ईरान और हिज्बुल्लाह के साथ संयुक्त सैन्य अभियान बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान, ईरान, इराक, वेस्ट बैंक और गाजा पर हमले जारी रहे तो और भी ज्यादा हिंसा होगी। बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रखते हैं मजबूत पकड़ भौगोलिक रूप से हूती यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास के पहाड़ी इलाकों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह जलडमरूमध्य 26 से 32 किलोमीटर चौड़ा है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां से एशिया और यूरोप के बीच तेल, गैस, खाद्य पदार्थ, मशीनरी और कंटेनर माल समेत वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत गुजरता है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की स्थिति में सऊदी अरब ने पहले ही अपने कच्चे तेल को भूमिगत पाइपलाइनों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाना शुरू कर दिया था। मार्च में बाब अल-मंडेब रूट पर यातायात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई थी। अब हूती इस रास्ते को भी खतरे में डाल रहे हैं। रायस्टैड एनर्जी के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही 50 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका ब्रेंट क्रूड, अगर बाब अल-मंडेब बंद हुआ तो 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकता है। वहीं एक हूती उपमंत्री ने सीएनएन से कहा कि जलडमरूमध्य को बंद करना ‘एक व्यवहार्य विकल्प’ है। एक ईरानी अधिकारी ने भी अल जजीरा को यही संकेत दिया। पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी ने कहा कि हूतियों को सिर्फ कुछ जहाजों पर गोली चलानी होगी और लाल सागर का पूरा वाणिज्यिक यातायात ठप हो जाएगा। 60 फीसदी तेल मिडिल ईस्ट से आता है अगर ऐसा होता है तो एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला क्षेत्र है, क्योंकि यहां अपना 60 प्रतिशत तेल मध्य पूर्व से आता है। फिलीपींस ने पहले ही ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। दक्षिण कोरिया ने नागरिकों से पानी का कम इस्तेमाल करने की अपील की है। भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर संघीय उत्पाद शुल्क में भारी कटौती कर दी है। इसके बावजूद आर्थिक संकट तेजी से फैल रहा है। इस बीच अमेरिका ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर जमीनी हमले की योजना बना रहा है। अब तक उसने 850 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें दाग दी हैं, सऊदी अरब में अपना एक महत्वपूर्ण रडार विमान खो चुका है और उसके सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है। उसके कई सहयोगी देश खुले तौर पर इस युद्ध से दूरी बना रहे हैं। फ्रांस ने इसे अवैध करार देते हुए निंदा की है। ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन देने से इनकार कर दिया। स्पेन ने अमेरिकी हमलों के लिए अपने बंदरगाह और सैन्य अड्डे बंद कर दिए हैं। जर्मनी ने कहा कि इस बारे में उससे कभी परामर्श नहीं किया गया। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बढ़ते जा रहा है। शायद यही कारण है कि ट्रंप जल्द से जल्द से इस जंग को खत्म करना चाहते हैं। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि हम बहुत जल्द निकल जाएंगे… दो हफ्तों में, शायद तीन हफ्तों में।”जब उनसे पूछा गया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त करने के लिए क्या कोई कूटनीतिक समझौता जरूरी है, तो उन्होंने साफ कहा कि नहीं, ईरान को मेरे साथ कोई समझौता करने की जरूरत नहीं है।
भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर

नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में होने जा रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक कूटनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। खास बात यह है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक ही मंच पर बैठेंगे। यह बैठक 14 और 15 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता भारत करेगा। भारत ने इस बैठक के लिए रूस, ईरान, यूएई, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेजा है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर साबित हो सकती है, जहां टकराव की स्थिति में रहे देश भी एक साथ चर्चा करेंगे। ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। 2024 में इसका विस्तार कर मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें जुड़ गया। ब्रिक्स देशों की कुल आबादी करीब 3.9 अरब बताई जाती है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है। रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूसी मीडिया को बताया कि सर्गेई लावरोव बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आएंगे। इससे बैठक का महत्व और बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने भारत से अपील की है कि अध्यक्ष के तौर पर वह एक औपचारिक बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों की निंदा करे। हालांकि, समूह के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं और भारत के अमेरिका व इजरायल के साथ करीबी संबंधों को देखते हुए साझा रुख तैयार करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच एकमत होना आसान नहीं है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कुछ सदस्य सीधे इस संघर्ष से जुड़े हैं, जिसके कारण साझा बयान तैयार करना कठिन हो गया है। भारत फिलहाल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच संतुलन बनाते हुए किसी साझा रुख पर सहमति बनाई जाए।
IPL 2026 ऑरेंज कैप: पहली बार किसने मारी बाजी? ईशान किशन 1 रन से चूके

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का आश्चर्यजनक अंदाज में भुगतान किया जा चुका है और सभी 10 टीमों ने अपने-अपने पहले टेलीकॉम गेम के लिए आवेदन किया है। शुरुआती मैच में ही एडवेंचर एक्सट्रीम पर देखने को मिला, जहां मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स ने जीत के साथ शुरुआत की। वहीं चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, सनराइजर्स हैदराबाद, लखनऊ सुपर जाइंट्स और गुजरात टाइटंस को हार का सामना करना पड़ा। रिकेल्टन का जलवा, पहली ही पारी में कब्ज़ासीज़न के पहले ही मैच के बाद ऑरेंज कैप की रेस शुरू हो गई है और इसमें कैप रेयान रिकेलटन के सिर की साजी है। मुंबई इंडियंस के इस दिग्गज बल्लेबाज ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ शानदार 81 रनों की पारी खेली। रिकल्टन की इस रंगीन पारी में 4 शियाल्स और 8 सिलेशंस शामिल हैं। उनकी इस पारी की बदोलत मुंबई ने 6 विकेट से आसान जीत दर्ज की। खास बात यह है कि 13 साल बाद मुंबई इंडियंस ने अपने आईपीएल सीजन का पहला मुकाबला जीता। ऑरेंज कैप से 1 रन से चूके इशान किशनसनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान ईशान किशन इस रेस में बेहद करीबी ग्यान चूक गए। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 38 गेंदों में 80 बल्लेबाजों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 8 बल्लेबाज और 5 गेंदें शामिल थीं। अपने शानदार अभिनय के दम पर, हैदराबाद ने 201 रन का बड़ा स्कोर बनाया, लेकिन टीम को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा और किशन ऑरेंज कैप से 1 रन पीछे रह गए। टॉप-5 में भारतीय खिलाड़ियों का पोर्टफोलियो ऑरेंज कैप की टॉप-5 सूची में थ्री इंडियन आइलैंड ने जगह बनाई है। ईशान किशन के अलावा रोहित शर्मा और समीर रिजवी भी शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। दिल्ली कैपिटल्स के लिए मुकाबले में उतरे समीर रिज़वी ने लखनऊ सुपर जाइंट्स के खिलाफ 70 बल्लेबाजों की दमदार पारी खेली और टीम को जीत में अहम भूमिका निभाई। वहीं रोहित शर्मा ने अपनी क्लास में 78 रन बनाए। कोहली टॉप-5 से बाहरविराट कोहली ने पहले मैच में 69 रन बनाए थे, लेकिन इसके बावजूद वह टॉप-5 में जगह नहीं बना पाए। शुरुआती मुकाबलों के बाद ही बैलेंस के बीच सीक्वल मुकाबला देखने को मिल रही है। आईपीएल 2026 ऑरेंज कैप: टॉप-5 बल्लेबाजरयान रिकेलटन- 81 रनईशान किशन- 80 रनरोहित शर्मा- 78 रनकूपर कोनोली- 72 रनसमीर रिज़वी- 70 रनइस बार की रेस क्यों खास है? सीज़न की शुरुआत में ही ग्लोबल ने आक्रामक अंदाज दिखाया है, जिससे साफ है कि इस बार ऑरेंज कैप की रेस बेहद रोमांचक वाली है। हर मैच के साथ यह सूची बदली जा सकती है और नए खिलाड़ी भी इसमें अपनी जगह बना सकते हैं।
बस यात्रा में ‘यमराज’ से मिले राहुल गांधी, मजेदार बातचीत का VIDEO वायरल; अनोखा प्रचार

नई दिल्ली। राहुल गांधी का चुनाव प्रचार के दौरान एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। केरल में बस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात ‘यमराज’ के वेश में एक व्यक्ति से हुई, जिसने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया। इस दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि बेहतर इलाज मिलने से ‘यमराज’ अब बेरोजगार हो सकते हैं। उनका यह मजाकिया अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बताया जा रहा है कि यह घटना बालुस्सेरी में बस यात्रा के दौरान हुई। वीडियो में राहुल गांधी आम यात्रियों के बीच बैठे नजर आते हैं। तभी ‘यमराज’ की वेशभूषा में एक व्यक्ति गदा लेकर उनके पास पहुंचता है। दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातचीत होती है, जिसने प्रचार अभियान को दिलचस्प बना दिया। राहुल गांधी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात बस में ‘यमराज’ से हुई, जो कुछ खास खुश नहीं दिखे। उन्होंने मजाक में कहा कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की ‘ओमान चांडी स्वास्थ्य बीमा योजना’ लागू होने पर लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और वे ज्यादा समय तक जीवित रहेंगे, जिससे ‘यमराज’ की नौकरी पर खतरा आ सकता है। दरअसल, यह पूरा दृश्य यूडीएफ की प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रचार से जुड़ा था। इस योजना के तहत हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर देने का वादा किया गया है। इस अनोखे अंदाज में प्रचार ने लोगों का ध्यान खींचा और संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का काम किया। यूडीएफ ने चुनावी अभियान के तहत ‘पांच इंदिरा गारंटी’ का भी ऐलान किया है। इसमें स्वास्थ्य बीमा के अलावा महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं को मासिक आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये करने और छोटे व्यापारियों को 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण देने जैसे वादे शामिल हैं। चुनावी माहौल के बीच राहुल गांधी का यह हल्का-फुल्का अंदाज चर्चा का विषय बन गया है और इसे प्रचार की रचनात्मक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
बेटे को बचाने के अंधविश्वास में मां ने ली बेटी की जान, तांत्रिक के कहने पर दी बलि; तीन गिरफ्तार

हजारीबाग। झारखंड के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुंभा गांव में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि एक मां ने बेटे की बीमारी ठीक कराने के लिए अंधविश्वास के चलते अपनी नाबालिग बेटी की बलि दे दी। एसआईटी जांच में खुलासा हुआ कि तांत्रिक के कहने पर 12–13 वर्षीय बच्ची की हत्या की गई। पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। तीन आरोपी गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने अपनी बेटी को तांत्रिक क्रिया के बहाने ले जाकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में मां समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में एक तांत्रिक महिला की भूमिका भी सामने आई है, जिसने अंधविश्वास फैलाकर वारदात को अंजाम देने के लिए उकसाया। अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे फैली अफवाहों पर विराम लग गया है। पुलिस ने साफ किया कि यह पूरा मामला अंधविश्वास से जुड़ा है और उसी के चलते बच्ची की हत्या की गई। जांच में नया एंगल पुलिस जांच में अवैध संबंध का एंगल भी सामने आया है, जिससे परिवार की संलिप्तता की बात कही जा रही है। इसी वजह से पीड़ित परिवार को मिलने वाले मुआवजे पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। यह घटना अंधविश्वास की भयावह तस्वीर पेश करती है। जागरूकता की कमी और अंधविश्वास आज भी समाज को ऐसे अमानवीय कृत्यों की ओर धकेल रहे हैं। मामले ने पूरे झारखंड में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ा दी है।