गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां

नई दिल्ली घर में नवजात शिशु का जन्म खुशियों की सौगात लेकर आता है, लेकिन इस खुशी के पीछे कई बार ऐसी बुद्धिमान छिपी होती हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। आमतौर पर ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ को सिर्फ मां से जुड़कर देखा जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद पिता भी मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना करते हैं। यह समस्या जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9 से 12 महीने के भीतर ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है, जब गर्भधारण का दबाव बढ़ जाता है। स्वीडन में किए गए इस बड़े अध्ययन में करीब 10 लाख पिताओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि शुरुआती महीनों में पिता लगातार सामान्य नजर आते हैं, क्योंकि उनका पूरा ध्यान मां और बच्चे की देखभाल पर होता है। वे अपनी थकान, मानसिक दबाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है। नींद की कमी, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलावों का दबाव धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यही कारण है कि बच्चे के जन्म के लगभग एक साल के भीतर डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ जाता है। शोध में यह भी सामने आया कि पुरुष अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर समझता। सामाजिक दबाव और ‘मजबूत बने रहने’ की सोच के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं। यही कारण है कि समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती। दिव्यांगों का मानना है कि यदि समय रहते इस स्थिति को समझा जाए और सही समर्थन दिया जाए, तो पिता भी इस दौर से आसानी से निकल सकते हैं। परिवार और समाज को चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में सहयोग करें। दिव्यांगों के अनुसार, पिता को अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना चाहिए, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर सहकर्मियों या प्रोफेशनल मदद लेने से बढ़ना नहीं चाहिए। साथ ही, पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करना और दिव्यांगों को साझा करना भी इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। यह अध्ययन इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि नवजात के जन्म के बाद मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के लिए भी उतनी ही जरूरी है।
जबलपुर में मामूली विवाद बना जानलेवा, शादी में घोड़ी हटाने को लेकर युवक की चाकू मारकर हत्या

जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक मामूली विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। शादी समारोह के दौरान हुई कहासुनी के बाद 33 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वारदात सोमवार देर रात की है, जहां पांच बदमाशों ने युवक को घेरकर उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। जानिए क्या है मामला जानकारी के मुताबिक, हनुमानताल निवासी मोनू उर्फ सादिल शादियों में दूल्हे के लिए घोड़ी उपलब्ध कराने का काम करता था। सोमवार रात वह घमापुर इलाके में एक शादी समारोह में घोड़ी लेकर पहुंचा था। इसी दौरान कुछ युवक बाइक से वहां से निकल रहे थे। भीड़ अधिक होने के कारण मोनू ने उन्हें घोड़ी से दूर रहने को कहा, ताकि कोई हादसा न हो। इसी बात को लेकर आरोपियों से उसका विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया, जिसके बाद आरोपी वहां से चले गए। बारात खत्म होने के बाद देर रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच मोनू घर लौटा। घोड़ी बांधकर जैसे ही वह घर के अंदर जाने लगा, तभी बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे और उस पर चाकू से हमला कर दिया। हमलावरों ने उसे घेरकर कई वार किए और खून से लथपथ हालत में सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। कुछ देर बाद राहगीरों ने घायल मोनू को देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। हनुमानताल और घमापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई। परिवार की जिम्मेदारी थी मृतक पर मृतक के भाई मोहम्मद साबिर के अनुसार, परिवार हमलावरों को नहीं जानता। विवाद की वजह सिर्फ इतनी थी कि मोनू ने घोड़ी से दूर रहने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि मोनू ही पूरे परिवार का सहारा था और शादी-विवाह में घोड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में जीशान नाम के युवक और उसके साथियों की संलिप्तता सामने आई है। हनुमानताल थाना पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नवजात के बाद पिता भी होते हैं डिप्रेशन का शिकार, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली नए बच्चे का जन्म आमतौर पर खुशी का मौका माना जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा के पीछे छिपी एक अहम सच्चाई उजागर की है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, पिता भी बच्चे के जन्म के बाद डिप्रेशन और मानसिक तनाव का सामना करते हैं, खासकर कुछ महीनों बाद। क्या कहती है स्टडी?स्वीडन में करीब 10 लाख पिताओं पर रिसर्च की गई बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9–12 महीने बाद जोखिम बढ़ता हैइस दौरान डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30% से ज्यादा बढ़ जाता है क्यों बढ़ता है पिता में डिप्रेशन?शोध के मुताबिक, शुरुआती समय में पिता अपनी भावनाओं को दबाकर परिवार की जिम्मेदारियों में लग जाते हैं। लेकिन समय के साथ: नींद की कमी बनी रहती है काम और परिवार का संतुलन मुश्किल हो जाता है आर्थिक दबाव बढ़ता है रिश्तों में बदलाव आता है इन सबका असर धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और डिप्रेशन या स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में सामने आता है। बड़ी समस्या: पुरुष मदद नहीं मांगते स्टडी में यह भी सामने आया कि: पिता अक्सर अपनी भावनाओं को छिपाते हैं सामाजिक दबाव के कारण खुलकर बात नहीं करते इसी वजह से समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती क्या करना चाहिए?पिता भी अपनी मानसिक स्थिति को सीरियस लेंपार्टनर और परिवार से खुलकर बात करेंजरूरत पड़े तो काउंसलिंग या प्रोफेशनल मदद लेंपरिवार को भी चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और सपोर्ट करें
अनूपपुर में अवैध कोयले पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3 टन कोयला जब्त, ड्राइवर गिरफ्तार

अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में भालूमाड़ा पुलिस ने अवैध कोयला तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार रात करीब तीन टन चोरी का कोयला जब्त किया। इस दौरान एक मालवाहक वाहन को भी पकड़ा गया और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से 49 हजार रुपए नकद भी बरामद किए हैं। नाकाबंदी कर पकड़ा गया अवैध कोयला थाना प्रभारी विपुल शुक्ला के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि एक मालवाहक वाहन में चोरी का कोयला ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ग्राम पयारी नंबर 02 में ठाकुर बाबा के पास नाकाबंदी की। जांच के दौरान पिकअप वाहन (क्रमांक CG 10 BK 0962) को रोका गया, जिसमें अवैध कोयला लोड पाया गया। ड्राइवर गिरफ्तार, नकदी भी बरामद जब्त किए गए कोयले का वजन लगभग तीन टन है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस ने वाहन के ड्राइवर संतोष कुमार चौधरी (42 वर्ष), निवासी मुंडा, थाना जैतहरी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से 49 हजार रुपए नकद भी बरामद हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि यह राशि पहले बेचे गए कोयले से संबंधित हो सकती है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज पुलिस ने जब्त वाहन को थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। उसे मंगलवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई गौरतलब है कि तीन दिन पहले 27 मार्च को भी भालूमाड़ा पुलिस ने एक ऑटो से करीब सात क्विंटल चोरी का कोयला जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह कोयला आसपास के गांवों से गुजरने वाली मालगाड़ियों से चोरी किया जाता है और बाद में ईंट भट्ठों या होटल संचालकों को बेच दिया जाता है।
महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा

नई दिल्ली महावीर जयंती के मौके पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर किसी भी तरह की ट्रेडिंग या सेटलमेंट नहीं हुआ। अब निवेशकों के लिए अगला ट्रेडिंग दिन 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) होगा, जब बाजार सामान्य रूप से खुलेगा। हालांकि इस दिन एक खास बात यह रहेगी कि सेटलमेंट हॉलिडे होगा यानी खरीद-बिक्री तो होगी, लेकिन पे-इन और पे-आउट उसी दिन नहीं होगा। कमोडिटी मार्केट का हालमल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX):सुबह का सेशन बंद, लेकिन शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग होगीनेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX):पूरे दिन बंद रहेगाइस हफ्ते कम रहेंगे ट्रेडिंग के दिन इस सप्ताह निवेशकों को कम मौके मिलेंगे:31 मार्च: महावीर जयंती (बंद)3 अप्रैल: गुड फ्राइडे (फिर से बंद)यानी पूरे हफ्ते में सिर्फ 3 दिन ही ट्रेडिंग होगी। निवेशकों के लिए जरूरी सलाहलगातार छुट्टियों के कारण बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बढ़ सकता है। ऐसे में: ट्रेडिंग प्लान पहले से बनाएंसेटलमेंट हॉलिडे को ध्यान में रखेंशॉर्ट-टर्म ट्रेड में सावधानी बरतें
दतिया में दिनदहाड़े भाजपा पार्षद की हत्या, मंदिर से लौटते समय बदमाशों ने मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस

दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया में मंगलवार सुबह एक भाजपा पार्षद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात उस समय हुई जब पार्षद मंदिर से लौट रहे थे। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटना सुबह करीब 8:30 बजे सेवढ़ा चुंगी चौराहे पर हुई। ऐसे हुआ हमला प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वार्ड नंबर 1 के पार्षद कल्लू कुशवाहा रोज की तरह चौराहे पर टहलने पहुंचे थे। उनके साथ दो अन्य लोग भी मौजूद थे। इसी दौरान तीन हमलावर वहां पहुंचे और उन पर फायरिंग कर दी। हमलावरों ने दो राउंड फायर किए। एक गोली कल्लू कुशवाहा के सिर में लगी, जबकि दूसरी पीठ में जा लगी। गोली लगते ही वे मौके पर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। कई आपराधिक मामले दर्ज थे दतिया एसडीओपी आकांक्षा जैन के मुताबिक, कल्लू कुशवाहा पर शराब तस्करी, हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित 15 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में मामला वर्चस्व की रंजिश से जुड़ा माना जा रहा है। पहले भी हत्या के मामले में मिली थी सजा कल्लू कुशवाहा 2022 में वार्ड नंबर 1 से भाजपा के टिकट पर पार्षद चुने गए थे। 18 फरवरी 2025 को दतिया कोर्ट ने पूर्व पार्षद बाल किशन कुशवाहा की हत्या के मामले में कल्लू सहित छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। वह करीब चार महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे। घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। नगर पालिका का बजट सम्मेलन स्थगित पार्षद की हत्या के बाद नगर पालिका का बजट सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। बैठक की शुरुआत में सभी पार्षदों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा। नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढेंगुला ने बताया कि बजट पहले ही प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) में पारित हो चुका है, इसलिए इसे स्वतः मंजूर माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के कारण शहर के विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
ई-ग्रामस्वराज से डिजिटल गांवों की ओर कदम, 3 लाख करोड़ से ज्यादा का भुगतान

नई दिल्ली ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति अब तेजी से जमीन पर उतरती दिख रही है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि ईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के जरिए देश की ग्राम पंचायतों ने अब तक 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया है। यह पहल न केवल ग्रामीण प्रशासन को डिजिटल बना रही है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत कर रही है। डिजिटल भुगतान से पारदर्शी बनी व्यवस्थाईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के जरिए भुगतान सीधे वेंडर्स और सेवा प्रदाताओं के खातों में रियल-टाइम में किया जाता है। यह सिस्टम पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जुड़ा हुआ है, जिससे पंचायत स्तर पर योजना बनाना, खर्च करना और उसका लेखा-जोखा रखना बेहद आसान हो गया है। इस डिजिटल प्रक्रिया ने नकद और कागजी लेन-देन की पुरानी व्यवस्था को काफी हद तक खत्म कर दिया है। ग्राम पंचायतों में बढ़ी डिजिटल भागीदारीसरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में पंचायत राज संस्थाओं ने इस प्लेटफॉर्म के जरिए 53,342 करोड़ रुपए का ट्रांसफर किया। साथ ही 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं ऑनलाइन अपलोड कीं। देश की कुल 2.59 लाख पंचायत राज संस्थाएं इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं, जिनमें से 2.50 लाख से ज्यादा संस्थाओं ने डिजिटल भुगतान का उपयोग किया। 1.6 करोड़ से ज्यादा वेंडर्स जुड़ेपंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.6 करोड़ से ज्यादा वेंडर्स रजिस्टर हो चुके हैं। इससे यह साफ है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल नेटवर्क तेजी से मजबूत हो रहा है और भुगतान प्रक्रिया अधिक संगठित बन रही है। ‘सभासार’ टूल से मीटिंग्स हुईं स्मार्टडिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करने के लिए एआई आधारित सभासार टूल भी अहम भूमिका निभा रहा है। यह वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक पर आधारित है, जो ग्राम सभाओं की कार्यवाही, उपस्थिति और फैसलों को अपने आप रिकॉर्ड कर लेता है। अगस्त 2025 में लॉन्च हुआ यह टूल अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो चुका है। स्थानीय भाषाओं में बढ़ी भागीदारी‘सभासार’ में अब असमिया, बोडो, डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, नेपाली, संथाली और सिंधी जैसी भाषाएं भी जोड़ी गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी बढ़ी है और ग्राम सभा की कार्यवाही को स्थानीय भाषा में रिकॉर्ड करना आसान हो गया है। डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ी उपलब्धिजनवरी 2026 तक 1.11 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतें ‘सभासार’ टूल का उपयोग कर चुकी हैं। यह ग्रामीण डिजिटल गवर्नेंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो पारदर्शिता और सुशासन को नई दिशा दे रही है। सरकार का लक्ष्य: डिजिटल और समावेशी गांवसरकार का मानना है कि ईग्रामस्वराज और ‘सभासार’ जैसे प्लेटफॉर्म ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है और लोगों की भागीदारी बढ़ी है।
1 अप्रैल से गूंजेगा स्कूल चलें हम अभियान CM मोहन यादव की मौजूदगी में बच्चों के भविष्य का महाअभियान शुरू

भोपाल । मध्यप्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत एक बड़े जनजागरूकता अभियान के साथ होने जा रही है। मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल चलें हम अभियान की शुरुआत की जाएगी जो 4 अप्रैल तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना नामांकन बढ़ाना और स्कूलों को एक उत्सव के रूप में सक्रिय करना है। राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल में आयोजित होगा जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव की विशेष उपस्थिति रहेगी। यह अभियान प्रदेश की लगभग 92 हजार सरकारी स्कूलों में एक साथ चलाया जाएगा जहां प्रतिदिन अलग अलग गतिविधियां आयोजित होंगी। इन गतिविधियों में प्रवेशोत्सव नामांकन अभियान खेलकूद सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल सभाएं प्रमुख रूप से शामिल रहेंगी। सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल बच्चों में स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ेगा बल्कि अभिभावकों की भागीदारी भी मजबूत होगी। अभियान के पहले दिन यानी 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बच्चों का स्वागत किया जाएगा और कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए बाल सभा आयोजित होगी। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। कई स्थानों पर साइकिल और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की जाएगी जिससे छात्रों को स्कूल आने में सुविधा मिल सके। दूसरे दिन भविष्य से भेंट कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के सफल और प्रेरणादायी व्यक्तियों को स्कूलों में आमंत्रित किया जाएगा। ये अतिथि बच्चों के साथ संवाद करेंगे और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाएंगे। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करना और उन्हें अपने भविष्य के प्रति जागरूक बनाना है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर बच्चों से सीधे संवाद करें। तीसरे दिन सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों के माध्यम से स्कूलों में उत्सव जैसा माहौल बनाया जाएगा। इस दिन अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे स्कूल की गतिविधियों में भाग ले सकें। साथ ही शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उन्हें दी जाएगी। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से अधिक रही है उनके अभिभावकों का सम्मान किया जाएगा जिससे अन्य परिवार भी प्रेरित हो सकें। अभियान के अंतिम दिन हार के आगे जीत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें उन विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो किसी कारणवश अपनी कक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं। उनके अभिभावकों को समझाइश दी जाएगी कि बच्चों को निराश न होने दें और उन्हें आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें। इसी दिन स्कूल प्रबंधन समितियों की बैठक भी होगी जिसमें शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सरकार का मानना है कि स्कूल चलें हम अभियान शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करेगा और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मददगार साबित होगा। यह पहल न केवल नामांकन बढ़ाने का प्रयास है बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।
गर्मी में ठंडक का रामबाण: बेल का शर्बत और इसका आसान तरीका

नई दिल्ली गर्मियों का मौसम आते ही शरीर में थकान, डिहाइड्रेशन और पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक और पारंपरिक पेय बेल का शर्बत न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार के केमिकल युक्त ड्रिंक्स की जगह बेल का शर्बत एक सस्ता, पौष्टिक और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है। क्यों खास है बेल का शर्बत?आयुर्वेद में बेल को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसमें फाइबर, आयरन, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। तेज गर्मी में बार-बार पसीना आने से शरीर कमजोर पड़ जाता है, लेकिन बेल का शर्बत ऊर्जा बनाए रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। पाचन के लिए रामबाण उपायबेल का शर्बत पेट के लिए बेहद फायदेमंद है। यह कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। खास बात यह है कि यह दस्त और डायरिया जैसी समस्याओं में भी काफी असरदार माना जाता है। पेट की सूजन कम करने और आंतों को स्वस्थ रखने में भी यह मददगार है। दिल और खून के लिए भी लाभकारीइस शर्बत का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक होता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। साथ ही, यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालकर खून को साफ करने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। महिलाओं के लिए खास फायदेप्रसव के बाद महिलाओं के लिए भी बेल का शर्बत बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ दूध बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। घर पर ऐसे बनाएं बेल का शर्बतबेल का शर्बत बनाना बेहद आसान है। इसके लिए पके हुए बेल का गूदा निकालकर अच्छी तरह मसल लें। इसमें ठंडा पानी मिलाएं और स्वाद के अनुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और शहद या गुड़ डालें। इसे छानकर ठंडा-ठंडा परोसें। रोजाना एक गिलास सेवन करने से शरीर दिनभर तरोताजा रहता है। क्यों बेहतर है यह देसी पेय?जहां एक ओर बाजार के ठंडे पेय शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, वहीं बेल का शर्बत प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडा रखने, पाचन सुधारने और ऊर्जा देने का काम करता है। यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं।
पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी

नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संस्था के अनुसार, इस संकट का सीधा असर महंगाई में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट के रूप में देखने को मिलेगा। ऊर्जा संकट से बढ़ेगा दबाव, आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असरआईएमएफ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। गरीब और विकासशील देशों पर दोहरी माररिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई में कमी के कारण उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इन देशों को महंगे दाम पर भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। खाद्य और उर्वरक संकट गहराने का खतराआईएमएफ ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से भी वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा। खासकर गरीब देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है और उन्हें बाहरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है। लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगा संकट का दायरासंस्था का मानना है कि अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहा, तो तेल-गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि यह लंबे समय तक चला, तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी। उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों प्रभावितएशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। साथ ही कई देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने से उनकी मुद्रा भी कमजोर हो रही है। यूरोप में दोहराया जा सकता है गैस संकट जैसा हालआईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यूरोप में 2021-22 जैसा गैस संकट फिर से पैदा हो सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं। सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी असरइस संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ गई है, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले हीलियम और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरताइस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिख रहा है। शेयर बाजारों में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, यह गिरावट अभी पिछले बड़े संकटों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं। आईएमएफ की सलाह: सतर्क रहें और सही नीतियां अपनाएंआईएमएफ ने देशों को सलाह दी है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित और प्रभावी नीतियां अपनाएं। खासतौर पर कम संसाधनों वाले देशों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि “अनिश्चितता भरे इस दौर में अधिक देशों को समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ खड़े हैं।”