CEO OF KOTAK MAHINDRA : कोटक महिंद्रा प्राइम में बड़ा बदलाव: सूरज राजप्पन बने नए CEO, शाहरुख टोडीवाला को हटाया

CEO OF KOTAK MAHINDRA : नई दिल्ली।वाहन फाइनेंस कंपनी कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड (केएमपीएल) ने सोमवार को अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सूरज राजप्पन को मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 1 जून 2026 से शुरू होगा और तीन साल के लिए होगा, हालांकि इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक है। शाहरुख टोडीवाला का संन्यास, तीन दशक का योगदान कंपनी ने यह भी बताया कि मौजूदा एमडी और सीईओ शाहरुख टोडीवाला 31 मई 2026 को रिटायर होंगे। शाहरुख टोडीवाला ने कोटक ग्रुप के साथ तीन दशक से अधिक समय तक काम किया और कंपनी को मजबूत और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया। सूरज राजप्पन का अनुभव और कंपनी में योगदान सूरज राजप्पन ने अपने करियर की शुरुआत ही केएमपीएल से की थी और उनके पास कंपनी में 24 साल का अनुभव है। केएमपीएल, कोटक महिंद्रा बैंक की एक सहायक कंपनी है। कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ अशोक वासवानी ने कहा,सूरज राजप्पन का अनुभव और कार्यकुशलता कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। सूरज राजप्पन ने भी कहा कि केएमपीएल आगे संतुलित विकास, नवाचार और बेहतर ग्राहक अनुभव पर ध्यान देगा। साथ ही कंपनी अपने ओईएम और डीलर पार्टनर्स के साथ रिश्तों को और मजबूत करेगी। केएमपीएल का तीन दशक का सफर केएमपीएल की स्थापना 1996 में कोटक महिंद्रा फाइनेंस और फोर्ड क्रेडिट इंटरनेशनल के बीच 60:40 के जॉइंट वेंचर के रूप में हुई थी। बाद में 2005 में कोटक महिंद्रा बैंक ने फोर्ड क्रेडिट की हिस्सेदारी खरीद ली और कंपनी को पूरी तरह अपनी सहायक कंपनी बना लिया। इसके बाद इसका नाम बदलकर कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड कर दिया गया। कंपनी ने पिछले तीन दशकों में भारत के ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर क्रेडिट मार्केट में खुद को मजबूत किया। साथ ही, जोखिम प्रबंधन, बेहतर गवर्नेंस और मजबूत सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया। स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान केएमपीएल ने 2025 में डीपीआईआईटी के साथ समझौता (एमओयू) भी किया था। इसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इस साझेदारी के तहत स्टार्टअप्स को बैंकिंग सेवाएं, लोन, फंडिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह कदम भारत में स्टार्टअप्स के विकास और वित्तीय सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। सूरज राजप्पन के सीईओ बनने से केएमपीएल की संतुलित विकास नीति, नवाचार और ग्राहक-केंद्रित रणनीति और मजबूत होगी। वहीं, शाहरुख टोडीवाला के योगदान ने कंपनी को तीन दशकों से स्थिर और विकसित संगठन बनाने में अहम भूमिका निभाई है। अब केएमपीएल की नजर ऑटो फाइनेंस और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खोलने पर होगी।
Indian stock market crash : मध्य पूर्व तनाव का असर: वित्त वर्ष के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,635 अंक लुढ़का

Indian stock market crash : नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 और निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,331.40 पर था। बाजार में चौतरफा गिरावट देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी पीएसयू बैंक (4.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (3.49 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.37 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.84 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.80 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (2.72 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ( 2.58 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (2.50 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (2.39 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,447.80 अंक या 2.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 52,650 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 416.20 अंक या 2.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,203.80 पर था।सेंसेक्स पैक में 30 में केवल दो शेयर हरे निशान में बंद हुए। बजाज फाइनेंस, एसबीआई, इंडिगो, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में बंद हुए। PRIEST ARREST FOR RAPE : पूजा कराने घर आया पुजारी, शादी का झांसा देकर महिला से किया दुष्कर्म! शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप करीब 10 लाख करोड़ रुपए कम होकर 412 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि शुक्रवार को 422 लाख करोड़ रुपए था। बाजार में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में तनाव का बढ़ना है, जिसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोरी हुई है। एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 26 के आखिरी दिन बाजार की शुरुआत गैप डाउन के साथ हुई है और हालांकि, बाद में हल्की रिकवरी हुई, लेकिन ऊपरी स्तर से लगातार बिकवाली ने बाजार में गिरावट को बढ़ावा दिया। इससे दिन के अंत में निफ्टी 2.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 22,200 से लेकर 22,150 के आसपास है और अगर यहां से गिरावट बढ़ती है तो निफ्टी 22,000 और फिर 21,800 तक जा सकता है। हालांकि, 22,450-22,500 रुकावट का स्तर है।
अश्विनी वैष्णव का ऐलान: भारत में प्रोडक्ट डिज़ाइन न करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

नई दिल्ली केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अश्विनी वैष्णव ने साफ कर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी स्कॉबी (ईएमएस) के तहत सरकारी प्रोत्साहन केवल तभी आवश्यक है, जब वे भारत में निवेश पोर्टफोलियो से उत्पाद डिजाइन करेंगे। सरकार का फोकस: डिजाइन, गुणवत्ता और इंजीनियरिंगवैष्णव ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अब सरकारी सहायता और प्रोत्साहन इस बात पर निर्भर है कि देश में डिजाइन, गुणवत्ता और इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग को कितना विकसित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एंटरप्राइज़ सरकार की चार प्रमुख पार्टियों पर काम नहीं किया गया, तो अगली असेंबली असेंबली में उन्हें भी शामिल नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा,अगर एंटरप्राइज़ कंपनियों के कहे अनुसार कदम नहीं उठाया जाता है, तो हम आगे की मंजूरी और फंडिंग रोक सकते हैं।” असेंबली नहीं, संपूर्ण डिज़ाइन क्षमता आवश्यकमंत्री ने स्पष्ट किया कि कंपनी को केवल असेंबली या फैक्ट्री मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें कॉन्सेप्चुअल डिज़ाइन, इंजीनियरिंग डिज़ाइन और विनिर्माण डिज़ाइन तक अपनी क्षमता में सुधार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से स्वीकृत प्राप्त प्रोजेक्ट्स में भी अगर रिज़र्वेशन पूरी तरह से नहीं था, तो फंड जारी नहीं किया जाएगा।“जिन एप्लायंस को मंजूरी दे दी गई है, उन्हें भी हमने पैसा नहीं दिया अगर हमारी मांग पूरी नहीं हुई।” ईसीएमएस में निवेश और मंजूरी का अपडेटमंत्रालय ने ईसीएमएस के चौथे चरण में 29 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिसमें कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।ईसीएमएस के तहत कुल निवेश का लक्ष्य 59,350 करोड़ रुपये था, जबकि अब तक 61,671 करोड़ रुपये के प्रस्ताव रखे जा चुके हैं।वैष्णव ने कहा कि असली उत्पाद समान दिखते हैं, जब उत्पाद डिजाइन भारत में किया जाता है। मैन्युफैक्चरिंग करना जरूरी है, लेकिन अधिक कॉम्प्लेक्स और डिजाइन प्रक्रिया के कारण डिजाइन करना भी महत्वपूर्ण है। ग्लोबल क्वालिटी और मॉडल मैनपावर पर जोरमंत्री ने वैश्वीकरण मानक पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर की गुणवत्ता के लिए सिक्स सिग्मा जैसी सोया का पालन जरूरी है।उन्होंने कहा, ”इसके बिना उत्पाद पूरे नहीं माने जाएंगे।’ इसके अलावा, उन्होंने सरकार के फोकस को भी स्थापित, स्थिर और तटस्थ रखा। वैष्णव ने इंडस्ट्री से यह भी अपील की कि वे स्टोल्ड मैनपावर तैयार करने पर ध्यान दें। सरकार पूरे इकोसिस्टम को सहयोग प्रदान करती है, लेकिन सरकार खुद आगे डिजाइन और इंजीनियरिंग में कुशल प्रतिभा तैयार करना चाहती है।
रुपये में गिरावट जारी, डॉलर के मुकाबले ₹95 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ा दबाव

नई दिल्ली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। भारतीय रुपया ने शुरुआत तो मजबूती के साथ की, लेकिन दिन बढ़ने के साथ यह गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.22 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ समय के लिए 93.57 तक मजबूत भी हुआ, लेकिन यह बढ़त टिक नहीं सकी। कच्चे तेल और वैश्विक हालात का असररुपये पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव है। खासतौर पर ईरान-अमेरिका तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 94.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था। आम लोगों की जेब पर सीधा असररुपये की कमजोरी का असर सीधे आम आदमी पर पड़ेगा। जब रुपया गिरता है, तो आयात महंगा हो जाता है। भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, जिससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। रोजमर्रा के खर्च में भी बढ़ोतरीविदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स भी महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वालों को अब ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।
FASTag: 1 अप्रैल से महंगा होगा नेशनल हाईवे सफर, देशभर में टोल दरों में होगी बढ़ोतरी

नई दिल्ली। नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए 1 अप्रैल से यात्रा महंगी होने जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ टोल दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। देशभर के टोल प्लाजा पर औसतन 4 से 5 प्रतिशत तक टोल बढ़ाया गया है, जिससे नियमित यात्रा करने वाले लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। किन रूट्स पर पड़ेगा ज्यादा असर?उत्तर भारत में बढ़ेगा खर्चउत्तर प्रदेश में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-9 और लखनऊ-कानपुर रूट पर टोल लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे इन मार्गों पर रोजाना यात्रा करने वालों को ज्यादा भुगतान करना होगा। हरियाणा के दिल्ली-सोनीपत-पानीपत और अंबाला-चंडीगढ़ रूट पर भी टोल 5 से 15 रुपये तक बढ़ने की संभावना है, जिसका असर निजी और व्यावसायिक दोनों वाहनों पर पड़ेगा। राजस्थान के हाईवे भी होंगे महंगेराजस्थान में जयपुर-दिल्ली, जयपुर-अजमेर और जयपुर-किशनगढ़ रूट पर टोल दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। जयपुर-किशनगढ़ मार्ग पर कारों के लिए टोल 140 रुपये से बढ़कर 155 रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं, दिल्ली से मुंबई की लंबी यात्रा करने वालों को राजस्थान के रास्ते हर टोल पर 5 से 15 रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं। दक्षिण भारत में भी बढ़ेगा बोझदक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में 65 से ज्यादा टोल प्लाजा पर नई दरें लागू होंगी। चेन्नई बाईपास और चेन्नई-तिरुपति हाईवे पर सफर करने वालों का खर्च बढ़ेगा। इसके अलावा बेंगलुरु-मैसूर और बेंगलुरु एयरपोर्ट रोड पर भी टोल में 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है, जहां ट्रैफिक पहले से ही काफी ज्यादा रहता है।
एनएसई का IPO नजदीक: शेयरधारकों से 27 अप्रैल तक मांगी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। देश के प्रमुख वित्तीय निवेशकों ने एक नेशनल स्टॉक शेयर बाजार (साओजी) से अपने लंबे समय के एसोसिएट इनशियल ऑफरिंग (आईपीओ) की तैयारी तेज कर दी है। रिजेक्शन ने स्टाफ़ से संपर्क कर यह खोज की कोशिश की है कि वे सेल (ओ फ़ॉक्स) के लिए प्रस्तावित ऑफर में हिस्सा लेना चाहते हैं या नहीं। यह स्टेप एन डीएसी के आई सैनिकों की दिशा में एक अहम और प्रभावशाली प्रक्रिया मानी जा रही है। डिस्काउंट से छूट एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्टग़ौरतलब के अनुसार, एन कंपनी ने एक्स्प्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (ईओआई) में एक अन्जर्थी को संदेश भेजने की मांग की है। उन पैराग्राफ में बताया गया है कि जो अपने कुछ या सभी शेयर आई को सोखने की चाहत रखते हैं। ईओआई फॉर्म और संबंधित दस्तावेज भी दस्तावेजों के साथ साझा किए गए हैं, जिसमें ओ एफओ के माध्यम से भाग लेने के आवास और ढांचे को स्पष्ट किया गया है। विपक्ष को बताया गया है कि वे 27 अप्रैल, शाम 5 बजे तक अपनी प्रतिक्रिया जमा कर लें, जिसमें वे आई अध्ययन में भाग लेने की अपनी इच्छा व्यक्तित्व कर योग्यता। इसमें उल्लेख किया गया है, “एक शेयरधारक के रूप में आप अपने होल्डिंग के कुछ या सभी निजी शेयर आई संदेश को बिक्री के लिए पेश कर सकते हैं, जो ओ फ़ेस नोटिस में शेयरधारकों के स्वामित्व में दिए जाएंगे।” बड़ी संख्या में मर्चेंट बैंकर्स की दुकानेंएनएससी ने इस ग्रुप आई को 20 मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने के लिए नियुक्त किया है। यह किसी भी भारतीय सार्वजनिक इश्यू में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस सूची में कोटक महिंद्रा कैपिटल, एलसीडी कैपिटल मार्केट्स, जापान मॉर्गन, और सिटीग्रुप जैसे बड़े निवेश बैंक शामिल हैं। इसके अलावा, एक्सचेंज ने आठ लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। इसमें घरेलू फर्म सिरिल अमरचंद मंगलदास, ट्राइलीगल और अमेरिका की लैथम एंड वॉटकिंस शामिल हैं। अन्य मध्यस्थों में आई.एस.आई. सेवा फर्म, एफ़जी इंटिमेटी और कंसल्टेंसी फर्म रेडसीर भी शामिल हैं।इससे पहले 2025 में एसोसिएटेड प्रूडेंसियल एएमसी के आई डिपो में 18 बुक रनर शामिल थे, जो उस समय भारत का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। सेबी से मंजूरी और बिक्री की नई दिशाजनवरी 2026 में सेबी (भारतीय सिक्योरिटीज और इलेक्ट्रॉनिक्स बोर्ड) में एनएससी को अपनी लैपटॉप आई के लिए मंजूरी मिल गई है। उस समय एन सोसाइटी के चेयरपर्सन श्रीनिवास इंजेती ने कहा था कि यह एक बड़े मील का पत्थर है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी हितधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन का नया अध्याय शुरू होगा। इस प्रक्रिया के तहत एनएसआई एसआई सिपहसालार से पहले विक्रेता डीलरों की पहचान की जा रही है, जिससे दीक्षा के समय प्रक्रिया को धीरे-धीरे और अंतिम चरण में रखा जा सके। एनएससी का आईपीओ भारतीय वित्तीय बाजार में नई दिशा और उद्यम के लिए अवसर लेकर आएं। 27 अप्रैल तक उपदेश की प्रतिक्रिया के बाद ही ओ फ़ेस के तहत उनकी भागीदारी तय होगी। विशेषज्ञ के अनुसार, यह कदम न केवल मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।
IPL 2026: गुजरात के लिए खतरा, पंजाब किंग्स के ये 5 खिलाड़ी करेंगे मैच पर दबदबा

नई दिल्ली।आईपीएल 2026 में मंगलवार को पंजाब किंग्स और गुजरात टाइटंस का चौथा मुकाबला खेला जाएगा। पिछले सीजन फाइनल तक का सफर तय करने वाली पंजाब टीम इस सीजन भी जोरदार प्रदर्शन करना चाहती है। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में पंजाब का यह मैच चुनौतीपूर्ण होने वाला है। गुजरात के लिए मैच में जीत पाना आसान नहीं होगा, क्योंकि पंजाब के कुछ खिलाड़ी मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं। आइए जानते हैं उन पांच खिलाड़ियों के बारे में, जो गुजरात टाइटंस के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं। 1. प्रियांश आर्या: पावरप्ले के धुआंधार बल्लेबाजप्रियांश आर्या ने आईपीएल 2025 में अपने धमाकेदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। पावरप्ले में उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी टीम को मजबूत शुरुआत दिला सकती है। प्रियांश ने पिछले सीजन 17 मुकाबलों में 179 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 475 रन बनाए थे। उन्होंने टूर्नामेंट में एक शतक और दो अर्धशतक जड़े थे। अगर प्रियांश आर्या फॉर्म में नजर आएं, तो गुजरात के गेंदबाजी खेमे को खासा हिलाकर रख सकते हैं। 2. श्रेयस अय्यर: कप्तान और स्ट्राइक मशीनश्रेयस अय्यर, पंजाब किंग्स के कप्तान, पिछले सीजन बल्लेबाजी में भी शानदार रहे। उन्होंने 17 मुकाबलों में 175 के स्ट्राइक रेट से 604 रन बनाए थे। नंबर तीन की पोजीशन पर अय्यर टीम की पारी को मजबूती देते हुए तेज रन भी जुटा सकते हैं। उनकी कप्तानी में रणनीति के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रदर्शन भी गुजरात के लिए चिंता का विषय साबित हो सकता है। 3. मार्को जानसेन: ऑलराउंडर का खौफसाउथ अफ्रीका के स्टार ऑलराउंडर मार्को जानसेन गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान देने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में खत्म हुए टी20 विश्व कप 2026 में जानसेन ने 6 मुकाबलों में 11 विकेट लिए थे। इसके अलावा, उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी अंत के ओवरों में मैच का रुख पलट सकती है। जानसेन की फॉर्म गुजरात के लिए खतरे की घंटी है। 4. युजवेंद्र चहल: स्पिन का जादूआईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिन गेंदबाज युजवेंद्र चहल अपनी घूमती गेंदों से गुजरात के बल्लेबाजों को पस्त कर सकते हैं। पिछले सीजन उन्होंने 14 मुकाबलों में 16 विकेट लिए थे। खास बात यह है कि चहल अहम समय पर विकेट निकालने का हुनर रखते हैं। वे आखिरी ओवरों में भी गुजरात के बल्लेबाजों के लिए चुनौती बने रहेंगे। 5. अर्शदीप सिंह: तेज गेंदबाजी का आतंकअर्शदीप सिंह पंजाब के तेज गेंदबाज हैं, जो गुजरात के टॉप ऑर्डर को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी हवा में लहराती गेंदें और बेहतरीन यॉर्कर बल्लेबाजों को परेशान कर सकती हैं। आईपीएल 2025 में अर्शदीप ने 17 मुकाबलों में 21 विकेट हासिल किए थे। उनकी ताबड़तोड़ गेंदबाजी गुजरात के बल्लेबाजों के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है। पंजाब किंग्स के ये पांच खिलाड़ी – प्रियांश आर्या, श्रेयस अय्यर, मार्को जानसेन, युजवेंद्र चहल और अर्शदीप सिंह इस मुकाबले में गुजरात के लिए सबसे बड़े खतरे की तरह हैं। यदि ये खिलाड़ी अपनी फॉर्म में नजर आएं, तो गुजरात को जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। आईपीएल 2026 का यह मुकाबला रोमांचक होने की पूरी संभावना रखता है।
पेट्रोल पंपों से मिलेगा केरोसिन, सरकार ने बनाया 2 महीने का बैकअप प्लान

नई दिल्ली! जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है, केंद्र सरकार ने देश में खाना पकाने के फ्यूल की उपलब्धता पर दबाव कम करने के लिए एक अस्थायी तरीका निकाल लिया है. सोमवार को घोषित 60-दिन की आपातकालीन योजना के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को घर के जरूरी कामों, जैसे खाना पकाने और रोशनी के लिए, अतिरिक्त केरोसिन दिया जाएगा. इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि 21 ऐसे क्षेत्रों में केरोसिन को थोड़े समय के लिए फिर से शुरू किया जा रहा है, जहां इसे पहले ही चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिया गया था या PDS SKO-फ्री घोषित कर दिया गया था. इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिन घरों में LPG की कमी हो रही है, उन्हें ऊर्जा का एक बुनियादी स्रोत मिलता रहे. इसे आसान बनाने के लिए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने केरोसिन-फ्री इलाकों में चुने हुए फ्यूल स्टेशनों को घरेलू इस्तेमाल के लिए ‘सुपीरियर केरोसिन ऑयल’ (SKO) रखने और बेचने की मंजूरी दी है. नोटिफिकेशन के मुताबिक, हर जिले में ज्यादा से ज़्यादा दो फ्यूल स्टेशनों को-बेहतर होगा कि वे पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियों के अपने आउटलेट हों—पांच हजार लीटर तक केरोसिन रखने की इजाजत होगी. इस प्रोसेस को तेज करने के लिए, डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स के लिए लाइसेंस से जुड़ी कुछ शर्तों में ढील दी गई है, हालांकि सुरक्षा और निगरानी के नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे. मंत्रालय ने साफ किया है कि यह नियम सिर्फ उस केरोसिन के लिए है जिसका इस्तेमाल घरों में खाना पकाने और रोशनी के लिए किया जाता है. यह फैसला तब लिया गया जब सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए तय कोटे के अलावा 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन मंजूर किया. स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे जिला-स्तर पर केरोसिन बांटने के लिए जगहें तय करें. इससे पहले, 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को SKO बांटने के आदेश मिले थे, जबकि हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने कहा था कि उन्हें ऐसे किसी कोटे की जरूरत नहीं है. इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे इलाके शामिल हैं. इसके साथ ही, एनर्जी सप्लाई चेन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए निगरानी और सख्त कर दी गई है. अधिकारियों ने हाल के दिनों में लगभग 2,900 जगहों पर छापे मारे हैं और जमाखोरी व कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लगभग 1,000 सिलेंडर जब्त किए हैं. राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे निगरानी बढ़ाएं, रोजाना मीटिंग करें, गलत जानकारियों का खंडन करें और गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मंजूरी देने का काम तेज करें. बयान में कहा गया है कि सरकार जनता से एक बार फिर अपील करती है कि वे अफ़वाहों पर ध्यान न दें. इन सब बातों के बीच, कुछ कंज्यूमर्स ने LPG का इस्तेमाल छोड़कर दूसरे विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है. शनिवार तक, 6,000 ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ (PNG) इस्तेमाल करने वालों ने अपने LPG कनेक्शन वापस कर दिए थे. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने ‘X’ पर लिखा कि कल तक 6,000 PNG इस्तेमाल करने वालों ने अपने LPG कनेक्शन वापस कर दिए! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!! सप्लाई मैनेजमेंट के मामले में, सरकार ने घरेलू और ट्रांसपोर्ट की ज़रूरतों को सबसे ज़्यादा अहमियत दी है, और PNG व CNG सेक्टर के लिए पूरा कोटा सुनिश्चित किया है. फिलहाल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों को उनकी औसत खपत का लगभग 80 फीसदी हिस्सा मिल रहा है, जबकि खाद बनाने वाले कारखाने 7075 फीसदी क्षमता पर काम कर रहे हैं. एक सरकारी बयान के अनुसार, ईंधन और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत अतिरिक्त LNG कार्गो की भी व्यवस्था की जा रही है.
डेडलाइन से पहले सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, 5 लाख का इनामी नक्सली मुठभेड़ में ढेर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को मार गिराया है। यह कार्रवाई देश से नक्सलवाद खत्म करने की तय समयसीमा 31 मार्च से दो दिन पहले हुई, जिसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार रविवार को सुकमा के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र की एक पहाड़ी पर यह मुठभेड़ हुई। यहां जिला पुलिस की विशेष इकाई डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। इसी दौरान माओवादियों से आमना-सामना हुआ और दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। मुठभेड़ थमने के बाद घटनास्थल से एक नक्सली का शव और हथियार बरामद किया गया। अधिकारियों ने बताया कि मारा गया नक्सली मुचाकी कैलाश था, जो माओवादियों की प्लाटून नंबर 31 में सेक्शन कमांडर के पद पर सक्रिय था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक कैलाश कई गंभीर घटनाओं में शामिल रहा था, जिनमें हत्या, आईईडी लगाने और सुरक्षाबलों पर हमले शामिल हैं। बस्तर रेंज के आईजी ने कहा कि माओवादी कैडरों के लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर अब अंतिम चरण में है। उन्होंने अपील की कि नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और शांतिपूर्ण जीवन अपनाएं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 27 माओवादी मारे जा चुके हैं। वहीं पिछले वर्ष राज्य में कुल 285 माओवादी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए थे।
देर रात खाना: सबसे बड़ी गलती? आयुर्वेद के अनुसार सही समय पर खाना क्यों जरूरी

नई दिल्ली। आज की आधुनिक जीवनशैली में सही समय पर भोजन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम का दबाव, सोशल एक्टिविटी और व्यस्त दिनचर्या के कारण कई लोग रात के समय भोजन करने पर मजबूर हो जाते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार देर रात खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। आयुर्वेद में बताया गया है कि भोजन का समय सूर्य की स्थिति के अनुसार होना चाहिए। दिन में सूर्य की रोशनी के समय हमारी पाचन अग्नि सबसे सक्रिय होती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है और शरीर को पोषण मिलता है। वहीं रात में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है और देर रात खाना पचने के बजाय शरीर में कई समस्याएं पैदा करता है। पाचन और नींद पर असररात के समय खाना खाने से पेट में भारीपन, सुस्ती, आलस, गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं। शरीर अपने रिपेयर और रिस्टोर मोड में होता है, लेकिन भोजन खाने के बाद ऊर्जा का बड़ा हिस्सा खाने को पचाने में लग जाता है। इसका असर नींद की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। देर रात भोजन करने वालों को अक्सर नींद ठीक से नहीं आती और सुबह शरीर सुस्त महसूस करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में टॉक्सिन बनने का मुख्य कारण बनता है, जिससे पूरे दिन एनर्जी की कमी और कमजोरी महसूस होती है। शरीर में टॉक्सिन और स्वास्थ्य पर प्रभावरात में भोजन पचाने के बजाय शरीर में जमकर टॉक्सिन (अम) बनने लगते हैं। ये टॉक्सिन आंतों में जमा होकर पेट की सफाई और सामान्य पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक देर रात खाना खाने से पाचन तंत्र कमजोर, कब्ज और गैस की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा का चक्र भी बिगड़ता है, जिससे दिनभर सुस्ती और थकान बनी रहती है। सही समय और भोजन का तरीकाअगर आप अपने शरीर और पाचन को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त के बाद रात का भोजन 7–8 बजे तक कर लेना चाहिए। भोजन हल्का और कम चिपचिपा होना चाहिए ताकि पेट पर दबाव न पड़े। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें, सुबह सैर करें या वज्रासन जैसी मुद्रा में कुछ देर बैठें। इससे भोजन सही तरीके से पचेगा और शरीर को आराम भी मिलेगा। आयुर्वेद की सलाह: संतुलित और प्राकृतिकआयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि दिन का भोजन सूर्य की रोशनी में करना सबसे उचित है। इससे शरीर की पाचन अग्नि सक्रिय रहती है और पोषण सही तरीके से होता है। देर रात भोजन करने से ना सिर्फ पाचन प्रभावित होता है, बल्कि ऊर्जा, मानसिक स्थिति और नींद भी बिगड़ती है। सही समय पर हल्का और संतुलित भोजन ही स्वस्थ जीवन का आधार है। देर रात खाना न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि शरीर में टॉक्सिन बनता है, नींद बिगड़ती है और सुबह की ऊर्जा कम महसूस होती है। आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त से पहले हल्का भोजन, खाने के बाद टहलना या वज्रासन करना और तैलीय भोजन से परहेज करना स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की कुंजी है।