विशेषज्ञों के अनुसार कमर दर्द का एक बड़ा कारण रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क में आने वाली समस्या हो सकती है। यह डिस्क कुशन की तरह काम करती है और जब यह उभर जाती है या खराब हो जाती है तो रीढ़ पर दबाव बढ़ता है जिससे तेज और लगातार दर्द होने लगता है। इसे नजरअंदाज करना आगे चलकर और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
इसके अलावा रीढ़ की हड्डी में छोटे फ्रैक्चर भी कमर दर्द का कारण बन सकते हैं। इन फ्रैक्चर को कंप्रेशन फ्रैक्चर कहा जाता है जो हड्डियों को कमजोर और अस्थिर बना देते हैं। यह समस्या अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों में देखने को मिलती है जहां हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि सामान्य गतिविधियों जैसे खांसने या झुकने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है।
एक और गंभीर कारण है स्पाइनल स्टेनोसिस। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी के अंदर की जगह संकरी हो जाती है जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। इसके चलते मरीज को जलन वाला दर्द पैरों में कमजोरी ऐंठन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को मूत्र संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा अन्य कारणों में नसों का दबना चोट पुरानी सूजन या गलत जीवनशैली भी शामिल हो सकती है। लगातार एक ही जगह बैठना भारी वजन उठाना या गलत तरीके से झुकना भी कमर दर्द को बढ़ा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सही जांच कराई जाए और समस्या की जड़ को समझा जाए।
डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार अगर कमर दर्द कुछ दिनों से ज्यादा बना रहे या इसके साथ सुन्नपन कमजोरी या तेज जलन महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर इलाज और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।
कमर दर्द को हल्के में लेना कई बार बड़ी समस्या का कारण बन सकता है इसलिए जरूरी है कि इसे नजरअंदाज न करें और समय रहते इसका सही समाधान करें।