कोर्ट पर प्रतिद्वंद्विता, कोर्ट के बाहर दोस्ती
पीवी सिंधु ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, “कुछ प्रतिद्वंद्वी हमेशा के लिए आपकी यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं। कैरोलिना उनमें से एक थीं। हमने पहली बार 15-16 साल की उम्र में मालदीव में एक-दूसरे के खिलाफ खेला, और उसके बाद कई मुकाबले खेले।”
पीवी सिंधु ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, “कुछ प्रतिद्वंद्वी हमेशा के लिए आपकी यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं। कैरोलिना उनमें से एक थीं। हमने पहली बार 15-16 साल की उम्र में मालदीव में एक-दूसरे के खिलाफ खेला, और उसके बाद कई मुकाबले खेले।”
सिंधु ने मारिन की खेल भावना और कौशल की सराहना करते हुए लिखा, “तुम कोर्ट पर एक बड़ा सिरदर्द भी थीं। लगातार चिल्लाना, जोरदार तेवर, छोटी-छोटी चालें—ये सब किसी को भी परेशान कर सकती थीं। लेकिन तुम्हारा कौशल, गति और लड़ने की भावना बेजोड़ थी।”
यादें और सम्मान
सिंधु ने 2023 डेनमार्क ओपन के सेमीफाइनल के दौरान हुई ज़ुबानी बहस का भी जिक्र किया, जिसके चलते दोनों को पीला कार्ड मिला था। सिंधु ने लिखा, “उस दिन मैं गुस्से में थी, लेकिन कुछ महीनों बाद हम मैड्रिड में कॉफी पीते हुए हंस रहे थे। उस पल हमारे बीच सिर्फ सम्मान था। कैरोलिना का यही रूप मुझे हमेशा याद रहेगा।”
दोस्ती और पीढ़ी का समर्थन
पीवी सिंधु ने इस पोस्ट में बताया कि उनकी पीढ़ी के खिलाड़ियों के बीच बनी दोस्ती और महिला एकल मुकाबलों की खास जगह ने उनके खेल को और भी खास बना दिया। उन्होंने कहा, “हमारी लड़कियों की ग्रुप ने महिला एकल को मुकाबले के लिए एक बहुत ही खास जगह बना दिया। मैं इस दोस्ती के लिए हमेशा शुक्रगुजार रहूंगी।”
संन्यास पर भावुक संदेश
सिंधु ने मारिन के संन्यास पर लिखा, “हर मुकाबले, हर सीख और हमारी दोस्ती के लिए धन्यवाद। कैरोलिना, मैं तुम्हारे रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए ढेर सारी खुशियों की शुभकामनाएं देती हूं। बैडमिंटन तुम्हें बहुत याद करेगा, और मैं भी।”
कैरोलिना मारिन की उपलब्धियां
स्पेन की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी कैरोलिना मारिन रियो ओलंपिक 2016 की स्वर्ण पदक विजेता और तीन बार की विश्व चैंपियन रही हैं। उन्होंने कई यूरोपियन चैम्पियनशिप भी जीती हैं। मारिन ने रियो ओलंपिक के फाइनल में पीवी सिंधु को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इस बार चोटों की वजह से पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास लेने का निर्णय लिया।
सार: पीवी सिंधु ने कैरोलिना मारिन को भावुक संदेश भेजते हुए उनके संन्यास पर सम्मान और दोस्ती जताई। कोर्ट पर भले ही दोनों प्रतिद्वंद्वी थीं, लेकिन मैदान के बाहर उनके बीच दोस्ती, सम्मान और साझा यादें हमेशा बनी रहेंगी। मारिन की उपलब्धियां और उनका खेल भारतीय और वैश्विक बैडमिंटन के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।