लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन में बनी ‘बूंग’ मणिपुर के सामाजिक और राजनीतिक तनाव के बीच अपने परिवार को फिर से जोड़ने की कहानी है। फिल्म का नाम मणिपुरी में “छोटा लड़का” के अर्थ में है। मुख्य किरदार बूंग (गुगुन किपगेन) अपने खोए पिता को घर लाकर अपनी मां मंदाकिनी (बाला हिजाम) को खुश करना चाहता है। अपने सबसे अच्छे दोस्त राजू (अंगोम सनामातुम) की मदद से वह बॉर्डर शहर मोरेह जाता है और पिता की तलाश में म्यांमार भी जाता है। फिल्म में परिवार, दोस्ती और सामाजिक संघर्ष की भावनाओं को बेहद संवेदनशील और रीयलिस्टिक अंदाज में दिखाया गया है।
यह जीत सिर्फ फिल्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे नॉर्थईस्ट सिनेमा और भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भारत के छोटे इलाकों की सीधी-सादी, सच्ची कहानियां भी दुनिया भर के दर्शकों से जुड़ सकती हैं। फरहान अख्तर के प्रोडक्शन सपोर्ट और लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता दिलाई।
बॉक्स ऑफिस और अवॉर्ड हाइलाइट्स:
फिल्म: बूंग
निर्देशक: लक्ष्मीप्रिया देवी
प्रोड्यूसर: फरहान अख्तर
अवॉर्ड: BAFTA 2026 – Best Children & Family Film
मुख्य कलाकार: गुगुन किपगेन, बाला हिजाम, अंगोम सनामातुम
खासियत: भारत के लिए इस साल का पहला BAFTA, नॉर्थईस्ट फिल्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान
इस जीत से यह साबित होता है कि छोटे बजट और क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भी वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल कर सकती हैं, बशर्ते कहानी दमदार और प्रस्तुति सशक्त हो। ‘बूंग’ ने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी और नॉर्थईस्ट के सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
फरहान अख्तर और लक्ष्मीप्रिया देवी की मेहनत, गुगुन किपगेन, बाला हिजाम और अंगोम सनामातुम की शानदार परफॉर्मेंस ने इस फिल्म को दर्शकों और जजेस दोनों के लिए यादगार बना दिया। इस जीत से साफ है कि भारत के छोटे क्षेत्रों की कहानियां भी विश्व स्तर पर सराहना और सम्मान पा सकती हैं।
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