Bhind News: भिंड जिले की लहार विधानसभा के आलमपुर में बुधवार शाम प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश पर 28 साल पुराने अतिक्रमण को हटा दिया। नगर परिषद कार्यालय के सामने स्थित सरकारी भूमि (सर्वे क्रमांक 759/1) पर 1997 में तेजबहादुर चौहान ने कब्जा कर 15 दुकानों का निर्माण किया था।
1997 से जारी था अवैध कब्जा
तेजबहादुर चौहान ने सरकारी जमीन पर 1997 में बिना अनुमति 15 दुकानों का निर्माण कराया था। तब से यह जमीन कब्जे में थी और स्थानीय प्रशासन इसे मुक्त नहीं करा पा रहा था।
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2003 में शुरू हुई कानूनी लड़ाई
2003 में दयाराम कौरव ने इस कब्जे के खिलाफ याचिका दायर की। 2005 में आलमपुर उपतहसील ने धारा 248 के तहत अतिक्रमण की पुष्टि की और कार्यवाही के आदेश दिए। इसके बाद 2006 में तत्कालीन विधायक लालसिंह आर्य ने यह मामला विधानसभा में उठाया।
स्टे ऑर्डर से रुकी कार्रवाई
अतिक्रमणकर्ता तेजबहादुर चौहान ने इस पर हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया, जिससे मामला वर्षों तक लटका रहा। बाद में दयाराम कौरव की पुनर्विचार याचिका पर हाईकोर्ट ने लहार एसडीएम को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
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2012 के बाद बेटे ने लड़ी लड़ाई
2012 में दयाराम कौरव के निधन के बाद उनके पुत्र उमाशंकर कौरव ने इस मामले को आगे बढ़ाया। लगभग 28 साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार प्रशासन ने जमीन को कब्जामुक्त कराया।
भारी पुलिस बल के साथ चली कार्रवाई
बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान लहार तहसीलदार दीपक शुक्ला, नगर परिषद सीएमओ अतुल रावत, आलमपुर थाना प्रभारी रवि उपाध्याय, दबोह टीआई राजेश शर्मा और शैलेन्द्र सिंह के साथ भारी पुलिस बल मौजूद रहा। प्रशासन ने 15 दुकानों को बुलडोजर से ध्वस्त कर भूमि को मुक्त कराया।
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