प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया गया जिसमें अब तक 2046 स्थानों पर छापेमारी और निरीक्षण किया गया। इन कार्रवाइयों के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर अवैध रूप से संग्रहित पाए गए जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में एलपीजी और पेट्रोल डीजल का कुल स्टॉक पर्याप्त है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
हालांकि दूसरी ओर जमीनी स्थिति कुछ जिलों में अलग नजर आ रही है। पेट्रोल और डीजल की सामान्य दैनिक बिक्री जहां लगभग 18548 लाख लीटर रहती है वहीं हाल के दिनों में कई जिलों में इसकी मांग 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गई है। इस अचानक बढ़ी मांग के चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें देखी गईं और कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी बन गई। सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए वितरण केंद्रों पर अतिरिक्त समय तक काम किया जा रहा है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके।
इसी बीच पेट्रोल पंप संचालकों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने अब तक दी जाने वाली क्रेडिट सुविधा को बंद कर दिया है जिसके तहत पंप संचालकों को भुगतान के लिए एक सप्ताह का समय मिलता था। इस व्यवस्था के खत्म होने से कई पेट्रोल पंपों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है और कुछ पंपों पर ईंधन की उपलब्धता संकट के स्तर तक पहुंच गई है।
पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि तेल कंपनियां न तो उधारी की सुविधा दे रही हैं और न ही पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं जिससे पंप संचालकों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल करीब 4500 पेट्रोल पंप संचालित हैं जिनमें से लगभग 260 केवल भोपाल में हैं। ऐसे में यदि सप्लाई और भुगतान की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर एक तरफ प्रशासन जमाखोरी पर सख्ती दिखा रहा है तो दूसरी ओर बढ़ती मांग और बदली हुई सप्लाई व्यवस्था ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस संकट का समाधान कैसे निकालती हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।