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कोयला उत्पादन में बड़ी शुरुआत, महाजेनको ने शुरू किया पहला डिस्पैच!


नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में Maharashtra State Power Generation Company Limited (महाजेनको) की गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल खदान से कोयले का पहला डिस्पैच औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस कोयले का उपयोग महाराष्ट्र में बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई मिल सकेगी।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम कदम

यह परियोजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल ब्लॉक का विकास महाजेनको द्वारा किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र की प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनी है। इस खदान से मिलने वाली कोयले की आपूर्ति से राज्य की ताप विद्युत परियोजनाओं को नियमित ईंधन मिलेगा, जिससे बिजली उत्पादन में निरंतरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

विशाल कोयला भंडार और उत्पादन क्षमता

गारे पेलमा सेक्टर-2 खदान में लगभग 655.15 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है। इसकी अधिकतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन निर्धारित की गई है। परियोजना के पूर्ण संचालन से छत्तीसगढ़ सरकार को रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (DMF), जीएसटी और अन्य मदों के जरिए करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व मिलने का अनुमान है।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

खनन गतिविधियों से क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। इस परियोजना के तहत 3,400 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा परिवहन, निर्माण, खानपान और अन्य सेवाओं के जरिए हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे।

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

CSR और पुनर्वास योजनाओं पर फोकस

महाजेनको ने परियोजना के तहत सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को प्राथमिकता दी है। शुरुआती चरण में करीब 35 करोड़ रुपये की CSR योजना लागू की गई है, जिसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।

इसके साथ ही परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना भी लागू की जा रही है, जिससे प्रभावित लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष उपाय

परियोजना में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसमें हरित पट्टी का विकास, बड़े स्तर पर वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और खनन के बाद भूमि सुधार जैसे उपाय शामिल हैं।

गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैच न सिर्फ महाराष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय संतुलन को भी नई दिशा देगा।

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