पहली हृदयविदारक घटना सागर के बंडा रोड पर घटित हुई। यहाँ एक तेज रफ्तार डंपर ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बाइक पर सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो डंपर की गति इतनी अधिक थी कि बाइक सवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, ये तीनों मृतक बंडा क्षेत्र के ही निवासी थे, जो किसी काम से बाहर निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर वापसी का रास्ता मौत की गली से होकर गुजरेगा।
अभी बंडा रोड की घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि देर रात सागर शहर के खेल परिसर के पास एक और वीभत्स हादसा हो गया। यहाँ से गुजर रहे एक अनियंत्रित ट्राले क्रमांक RJ 06 GD 2973 ने बाइक सवार दो युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक ट्राले के पहियों के नीचे आ गए। टक्कर के बाद का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि सड़क पर मांस के टुकड़े बिखरे पड़े थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने इकट्ठा किया। मृतकों की पहचान गोपालगंज निवासी के रूप में हुई है।
हादसे की खबर मिलते ही गोपालगंज और कोतवाली पुलिस सहित सीएसपी ललित कश्यप दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाइक सवार अपनी सही दिशा में जा रहे थे, लेकिन पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें बेरहमी से कुचल दिया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है।
हैरानी की बात यह है कि सागर के मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों का बेखौफ दौड़ना अब एक आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीली कोठी से डिग्री कॉलेज चौराहे के बीच का मार्ग ‘डेथ जोन’ बनता जा रहा है। यहाँ आए दिन सड़क हादसे होते हैं, कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले इन भारी वाहनों पर न तो गति सीमा का नियंत्रण है और न ही इनके प्रवेश के समय का कोई सख्ती से पालन हो रहा है।
इन पांच मौतों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो सागर की सड़कें इसी तरह मासूमों के खून से लाल होती रहेंगी। फिलहाल, पुलिस ने मामलों को जांच में लिया है, लेकिन सवाल वही बरकरार है इन मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है? वह डंपर चालक जो अपनी रफ्तार के नशे में था या वह तंत्र जिसने इन भारी वाहनों को शहर की छाती पर तांडव करने की खुली छूट दे रखी है?