बैतूल से उज्जैन: मौत का लंबा सफर
निखिल मूल रूप से बैतूल जिले के सारणी का रहने वाला था। वह घर का इकलौता बेटा था, जिसके पिता की मौत पहले ही एक हादसे में हो चुकी थी।
फरवरी से लापता: निखिल फरवरी में काम का बहाना बनाकर घर से निकला था। उसने परिवार के सभी सदस्यों को ब्लॉक कर दिया था ताकि कोई उसकी लोकेशन न जान सके।
350 KM की यात्रा: अपनी प्रेमिका से मिलने की जिद में वह स्कूटी चलाकर करीब 350 किलोमीटर दूर उज्जैन पहुँचा। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से दोनों के बीच बातचीत बंद थी, जिससे निखिल गहरे तनाव में था।
वारदात: पलक झपकते ही खत्म हो गई जिंदगी
शनिवार शाम जब निखिल अपनी प्रेमिका के रिश्तेदार के घर पहुँचा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि उसके पास हथियार है। घर के अंदर जाते ही उसने अचानक अपनी छाती पर बंदूक तानी और ट्रिगर दबा दिया। गोली चलने की गूँज सुनते ही इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुँची पुलिस को युवक का शव और उसके आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट मिले, जो उसने सुसाइड से ठीक पहले अपलोड किए थे।
तबाही के पीछे का सच: इकलौता बेटा और बेबस माँ
निखिल की मौत ने उसके परिवार को सड़क पर ला खड़ा किया है। घर की आर्थिक स्थिति पहले ही ठीक नहीं थी; दादी की पेंशन और परिजनों की मेहनत से घर चलता था। इकलौते बेटे की इस सनक भरी मौत ने उसकी माँ को पूरी तरह तोड़ दिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि युवक के पास अवैध हथियार कहाँ से आया और क्या उसे उकसाने में किसी और की भी भूमिका थी।
पुलिस की जांच और CCTV
नीलगंगा थाना पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे CCTV फुटेज कब्जे में लिए हैं, जिसमें निखिल की आखिरी गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। पुलिस उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही है ताकि इस आत्मघाती कदम के पीछे की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
यह घटना याद दिलाती है कि रिश्तों का टूटना दुखद हो सकता है, लेकिन अपनी जान लेना समाधान नहीं; निखिल ने 350 KM का सफर अपनी मोहब्बत पाने के लिए तय किया था, पर अंत में उसने अपने परिवार को कभी न खत्म होने वाला दर्द दे दिया।