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मध्य पूर्व तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में हफ्तेभर में 6% गिरावट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई और बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा। सप्ताह के दौरान Nifty 50 में 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 2.06 प्रतिशत टूटकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं BSE Sensex 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 के स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक चिंताओं को बढ़ाती है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावटइस गिरावट का सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा। Nifty Auto Index में इस सप्ताह करीब 10 से 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। ऑटो इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके अलावा सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसानशुक्रवार को बाजार में आई तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई। अनुमान के मुताबिक सिर्फ एक कारोबारी सत्र में ही निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए। वहीं व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिली। Nifty Midcap 100 4.59 प्रतिशत गिर गया, जबकि Nifty Smallcap 100 में 3.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में बढ़ा डर और उतार-चढ़ावविश्लेषकों के अनुसार बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ रही है। इसका संकेत India VIX से भी मिलता है, जो 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है। यह आने वाले समय में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। इसके बाद 23,300 और 23,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। वहीं Bank Nifty के लिए 53,500 पहला सपोर्ट स्तर है और इसके नीचे 53,000 का स्तर अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर 54,000 और 54,300 के स्तर को प्रमुख रेजिस्टेंस बताया जा रहा है। कच्चे तेल और गैस की चिंता बढ़ीविशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, खासकर उन शहरों में जहां सीएनजी वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल होता है। रुपये पर भी बढ़ा दबाववैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा भी कमजोर हुई है। भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इस हफ्ते बाजार में आई करीब 6 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है, और फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर रहने वाली है।

भारत की पहली खनन कंपनी बनी एनएमडीसी, एक वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन आयरन ओर उत्पादन

नई दिल्ली। देश की प्रमुख खनन कंपनी NMDC लिमिटेड ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के समाप्त होने से पहले ही 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही NMDC एक ही वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन करने वाली भारत की पहली खनन कंपनी बन गई है। सरकारी बयान के अनुसार यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि भारत की लौह अयस्क आपूर्ति श्रृंखला में उसकी मजबूत और अहम भूमिका को भी साबित करती है। 1958 में हुई थी कंपनी की स्थापनाNMDC लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1958 में भारत के लौह अयस्क खनिजों के विकास के उद्देश्य से की गई थी। यह सरकारी कंपनी इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और इसे ‘नववर्ष CPSE’ का दर्जा प्राप्त है। शुरुआती दौर में कंपनी का उत्पादन सीमित था। उदाहरण के तौर पर 1978 में कंपनी ने लगभग 10 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन किया था। लेकिन समय के साथ कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार किया और अब यह आंकड़ा बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुंच गया है। पिछले दशक में तेज हुई उत्पादन वृद्धिपिछले कुछ दशकों में एनएमडीसी की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015 में कंपनी का उत्पादन करीब 30 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 50 मिलियन टन हो गया है। इसका मतलब है कि पिछले करीब एक दशक में उत्पादन में लगभग दो-तिहाई की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि वर्तमान उत्पादन क्षमता का लगभग एक-पांचवां हिस्सा पिछले चार दशकों में ही जोड़ा गया है। इसे कंपनी के इतिहास का सबसे तेज विस्तार माना जा रहा है। एनएमडीसी 2.0 के तहत मजबूत प्रदर्शनइस उपलब्धि पर कंपनी के डायरेक्टर और मैनेजमेंट डायरेक्टर अमिताव मुखर्जी ने इसे एनएमडीसी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “50 मिलियन टन उत्पादन तक पहुंचे एक बड़ी उपलब्धि है और यह एनएमडीसी 2.0 के तहत हमारे मजबूत प्रदर्शन को बरकरार है। जिस क्षमता को बनाने में पहले दशकों लगे, उसे हमने बेहतर क्रियान्वयन, जिम्मेदारी खनन और राष्ट्रीय स्तर के प्रति बढ़ने के जरिए कुछ ही वर्षों में तेजी कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी लौह ओर उत्पादक कंपनी होने के कारण एनएमडीसी पर बड़ी जिम्मेदारी भी है। छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में प्रमुख खदानेंएनएमडीसी की प्रमुख खदानें खनिज संपन्न राज्य छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित हैं। इन खदानों में अत्याधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खनन किया जाता है। कंपनी देश में लौह अयस्क की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाती है, जिससे इस्पात उद्योग को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध हो सके। भारत के इस्पात उत्पादन लक्ष्य में अहम भूमिकाभारत ने वर्ष 2030 तक अपनी इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में लौह अयस्क की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना देश की एक महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है। इस लक्ष्य को हासिल करने में NMDC Limited की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आगे भी उसका ध्यान संचालन संयंत्र, नई तकनीकों के इस्तेमाल और जिम्मेदारी खनन पर रहेगा ताकि विकास के अगले चरण को हासिल किया जा सके। NMDC की यह उपलब्धि भारतीय खनन उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का आंकड़ा पार कर कंपनी ने न सिर्फ नया रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि देश के इस्पात उद्योग और आर्थिक विकास को भी व्यापक प्रदान की है।

अमेरिका में भारतीय मूल के नेता को सम्मान, सीनेट में सुनील पुरी को याद किया गया

नई दिल्ली अमेरिका की सीनेट में भारतीय मूल के अमेरिकी उद्योगपति और राष्ट्रपति सुनील पुरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान अमेरिकी सीनेटर डिक डर्बिन ने उनके जीवन और समाज के लिए दिए गए योगदान को याद किया। सीनेटर डर्बिन ने बताया कि किस तरह भारत से बहुत कम पैसे लेकर अमेरिका आए एक युवा ने मेहनत और लगन के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि रॉकफोर्ड, इलिनोइस के विकास में भी अहम भूमिका निभाई। मुंबई से अमेरिका तक का प्रेरणादायक सफरडर्बिन ने अपनी किताब में कहा कि सुनील पुरी अमेरिका में मुंबई से बेहतर शिक्षा का सपना देखते थे। वह रॉकफोर्ड यूनिवर्सिटी (पूर्व में रॉकफोर्ड कॉलेज) की पढ़ाई करने आये थे। कॉलेज के दिनों में आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें कई छोटी-मोटी सब्जियां उगानी पड़ती हैं। सीनेटर डर्बिन ने बताया कि कड़ी मेहनत और लगन के साथ उन्होंने हर तरह का काम किया, जिसमें अस्पताल में बेडपैन साफ ​​करना और भर्ती जैसे कठिन काम भी शामिल थे। इसी संघर्ष के दम पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ने का रास्ता निकाला। रियल एस्टेट में बनी बड़ी पहचानएक रियल एस्टेट कंपनी की स्थापना के बाद सुनील पुरी ने ‘फर्स्ट रॉकफोर्ड ग्रुप’ का नाम रखा, जिसके बाद उन्हें ‘फर्स्ट मिडवेस्ट ग्रुप’ का नाम दिया गया। इस कंपनी ने रॉकफोर्ड सिटी में कई पुनर्विकास कंपनियों को आगे बढ़ाया। डर्बिन ने बताया कि कंपनी ने कई वीरान और उपेक्षित इमारतों को फिर से विकसित कर उन्हें उपयोगी स्थानों पर रेस्तरां, कार्यालय और गोदामों में बदल दिया। उनके अनुसार इन कोलिक ने शहर में नई ऊर्जा भर दी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए। समाजसेवा में भी दिया बड़ा योगदानव्यवसाय के साथ-साथ सुनील पुरी समाजसेवा के कार्य में भी सक्रिय रहे। डर्बिन ने बताया कि अपने माता-पिता से मिली सीख से प्रेरणा लेकर वह हमेशा समाज को कुछ वापस करने की बात करते थे। उन्होंने कई कोचिंग संस्थानों के लिए लाखों डॉलर का दान और अपना समय भी समर्पित किया। उनके योगदान में कई महत्वपूर्ण स्मारक हो सकते हैं, जिनमें ‘कीलिंग-पुरी पीस प्लाजा’, दक्षिण-पूर्व रॉकफोर्ड की वाईएमसीए शाखा और ‘साल्वेशन आर्मी पुरी फैमिली डिजास्टर सर्विसेज सेंटर’ शामिल हैं। भारत-अफ्रीका को मजबूत बनाने में भूमिकासीनेटर डर्बिन ने यह भी निर्देश दिया कि सुनील पुरी भारत और अमेरिका के सशक्तिकरण को हमेशा के लिए मजबूत करने के लिए सक्रिय रहें। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया। इसी मित्र में उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के साथ भारत की यात्रा भी की थी। सुनील पुरी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समाजसेवा का उदाहरण है। एक साधारण प्रवासी से लेकर सफल उद्योगपति और पदवी तक की यात्रा पर निकले उनके कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अमेरिकी सीनेट द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अमेरिका और भारत दोनों के समाज में गहरी छाप छोड़ी है।

MP LPG crises: रायसेन में चक्काजाम, भोपाल में डॉक्टरों को भूखे पेट ड्यूटी का खतरा

MP LPG crises: भोपाल। मध्य प्रदेश में एलपीजी संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट पिछले पांच दिनों से कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई न मिलने से जूझ रहे हैं। कई होटलों में केवल 24 घंटे का स्टॉक बचा है, जिससे खान-पान व्यवस्था ठप होने के कगार पर है। लोग वैकल्पिक तौर पर इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन घरेलू रसोई और हॉस्पिटल किचन की समस्याएं और भयावह हो गई हैं। सबसे ज्यादा उग्र स्थिति रायसेन में देखने को मिली। सागर रोड स्थित गैस एजेंसी पर सुबह 5 बजे से कतार में खड़े सैकड़ों लोगों का धैर्य जवाब दे गया। सुबह 10 बजे तक एजेंसी नहीं खुली तो लोगों ने खाली सिलेंडर सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। एक महिला ने कहा, “मैं सुबह 7 बजे ही घर का सारा काम छोड़ एजेंसी पहुंच गई थी। घर में न चाय बनी, न बच्चों के लिए खाना। खाली सिलेंडर लेकर दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।” रायसेन में चक्काजाम की सूचना पर एसडीएम और तहसीलदार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और उपभोक्ताओं को समझाइश देकर शांत किया। प्रदर्शन के कारण सागर रोड पर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं और आवागमन बाधित रहा। एजेंसी संचालक का कहना है कि भोपाल से आ रहा सिलेंडर ट्रक रास्ते में पंक्चर हो गया था, इसलिए डिलीवरी में देरी हुई। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि ट्रक पहुंचते ही वितरण शुरू कर दिया जाएगा। राजधानी भोपाल में भी हालात गंभीर हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एलपीजी संकट के कारण हॉस्टल मेस, जेडीए कैंटीन और मरीजों के सेंट्रलाइज्ड किचन की प्रोडक्शन क्षमता 50% तक घट गई है। मेस संचालकों को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, बुकिंग पर 25 दिन की वेटिंग दी जा रही है। वैकल्पिक उपाय के तौर पर डीजल भट्ठियों का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन उन पर चाय और रोटी बनाना संभव नहीं। संकट बढ़ता रहा तो रेजिडेंट डॉक्टरों को खाली पेट ड्यूटी करनी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। एलपीजी संकट ने राज्य में खाद्य सुरक्षा, रेस्टॉरेंट व्यवसाय और हॉस्पिटल संचालन को सीधे प्रभावित कर दिया है।

LPG किल्लत की आशंका के बीच IRCTC अलर्ट: ट्रेनों में इंडक्शन व रेडी-टू-ईट फूड की तैयारी, WCR में 25 क्लस्टर किचन से जारी सप्लाई

नई दिल्ली। शहर में एलपीजी की संभावित किल्लत की खबरों के बीच ट्रेनों में भोजन व्यवस्था को लेकर यात्रियों के बीच चिंता बढ़ने लगी थी। इस बीच IRCTC ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल ट्रेनों में कैटरिंग व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और यात्रियों को भोजन की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी है। IRCTC के प्रवक्ता एके सिंह के मुताबिक पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) क्षेत्र में करीब 25 क्लस्टर किचन संचालित किए जा रहे हैं। इन किचनों से क्षेत्र की प्रमुख ट्रेनों में नियमित रूप से भोजन लोड किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भी ट्रेन में भोजन सप्लाई बाधित होने की स्थिति सामने नहीं आई है और किचनों में एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। प्रवक्ता ने बताया कि यात्रियों को सामान्य रूप से गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि हाल के दिनों में कुछ यात्रियों ने भोजन ठंडा मिलने की शिकायत की थी, लेकिन ट्रेनों में माइक्रोवेव ओवन की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर भोजन को दोबारा गर्म कर यात्रियों को परोसा जाता है। IRCTC की टीम लगातार कैटरिंग व्यवस्था पर नजर रख रही है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। संभावित गैस संकट को देखते हुए IRCTC ने एहतियात के तौर पर वैकल्पिक योजना भी तैयार कर ली है। मुंबई स्थित जोनल कार्यालय की ओर से क्लस्टर किचनों और ट्रेनों में इंडक्शन कुकर, माइक्रोवेव ओवन और रेडी-टू-ईट फूड की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद यह है कि अगर भविष्य में गैस सप्लाई प्रभावित होती है तो यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने में कोई परेशानी न आए। हालांकि IRCTC ने साफ किया है कि फिलहाल इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ी है। गैस सप्लाई सिस्टम सामान्य रूप से चल रहा है और ट्रेनों में भोजन की आपूर्ति नियमित तरीके से की जा रही है। प्रवक्ता के अनुसार यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और कैटरिंग व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि भविष्य में किसी तरह की समस्या सामने आती है तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी जाएगी, ताकि यात्रियों को भोजन से जुड़ी किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल पश्चिम मध्य रेलवे क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ट्रेनों में भोजन की सप्लाई सुचारू रूप से जारी है।

जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड ने एंकर निवेशकों से जुटाए 120 करोड़ रुपये

नई दिल्ली/मुंबई। जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड ने अपने शुरुआती आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले एंकर निवेशकों से 120 करोड़ रुपये जुटाए हैं। अहमदाबाद की कृषि रसायन कंपनी का यह इश्यू सोमवार, 16 मार्च, 2026 को निवेशकों के निवेश करने के लिए खुलेगा। कंपनी ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि उसने एंकर निवेशकों को 320 रुपये प्रति शेयर की दर से 37,50,000 इक्विटी शेयर आवंटित किए गए हैं। एंकर निवेशकों के तौर पर भाग लेने वाली कुछ प्रमुख संस्थाओं में शाइन स्टार बिल्ड कैप प्राइवेट लिमिटेड, क्राफ़्ट इमर्जिंग मार्केट फंड पीसीसी, सिटाडेल कैपिटल फंड और क्राफ़्ट इमर्जिंग मार्केट फंड पीसीसी और एलीट कैपिटल फंड शामिल हैं। जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड का आईपीओ निवेश के लिए 16 मार्च को खुलेगा। इसमें निवेश के लिए निवेशक 18 मार्च तक बोली लगा सकते हैं। कंपनी ने इसके लिए मूल्य का दायरा (प्राइस बैंड) 304–320 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी के शेयर 24 मार्च को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे। निवेशक कम से कम 46 इक्विटी शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, और उसके बाद 46 इक्विटी शेयरों के गुणकों में बोली लगा सकते हैं। कंपनी की योजना इस आईपीओ से 400 करोड़ रुपये जुटाने की है। जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड नए निर्गम से प्राप्त 170 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल ऋण भुगतान के लिए करेगी, जबकि इसका शेष एक हिस्सा सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड एक रिसर्च, आधारित एग्रोकेमिकल कंपनी है। यह भारत में कीटनाशकों, खरपतवारनाशकों, फफूंदीनाशकों और पौधों के विकास को नियंत्रित करने वाले पदार्थों के विकास और निर्माण में विशेषज्ञता रखती है।

सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा

नई दिल्ली। आजकल शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसमें सदस्यों के लिए लाइफ इंश्योरेंस ना किया जाता हो। बिताते समय के साथ यह संख्या और भी तेजी से बढ़ती जा रही है। लोग अपनी गाड़ियों के साथ-साथ खुद का भी लाइफ इंश्योरेंस करा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर भी कुछ भ्रांतियां फैली हुई हैं जिसे आज हम आपके सामने रखेंगे और इससे जुड़ी तमाम जानकारियां बताएंगे। जानिए किन-किन कारण से क्लेम नहीं किया जा सकता। हत्या की वजह से हुई मौतअगर पॉलिसी धारक की मौत हो गई है और उसे घटना में नॉमिनी की संलिप्त पाई जाती है तो ऐसी स्थिति में नॉमिनी को क्लेम नहीं दिया जाएगा। केवल एक ही स्थिति में नॉमिनी को क्लेम मिल सकता है या तो वह कानूनन अपराध मुक्त हो जाए या कोर्ट द्वारा बरी हो जाए। हत्या के कारण हुई मौत के बाद पॉलिसी प्रोवाइडर कंपनी के द्वारा यह जांच की जाती है कि पॉलिसी धारा किसी आपराधिक गतिविधि में तो सन लिप्त नहीं था। अगर किसी अपराध में संलिप्त पाई जाती है तो भी क्लेम को मंजूरी नहीं दी जाएगी। धूम्रपान और नशे के कारण मृत्युअगर पॉलिसी धारक किसी भी प्रकार का नशा करता है और उसके प्रभाव के कारण उसकी जान चली जाती है तो ऐसी स्थिति में भी पॉलिसी धारक को इंश्योरेंस का लाभ नहीं मिल सकेगा। जबकि प्राकृतिक कर्म से अगर मौत होती है तो पॉलिसी धारक को डेथ क्लेम के रूप में राशि का भुगतान किया जाता है। साहसिक गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण हुई मौतइंश्योरेंस प्रोवाइडर कंपनी पॉलिसी धारक से उसकी शारीरिक बीमारियों एवं कार्यशाली के बारे में जानकारी लेती है जिसके आधार पर वह पॉलिसी धारक का प्रीमियम तय करती है। अगर कोई पॉलिसी धारक पर्वतारोहण करता है या स्काई डाइविंग जैसे साहसिक गतिविधियों में लगा हुआ होता है तो उनके साथ दुर्घटना घटने के सबसे अधिक चांस होते हैं। ऐसी स्थिति में उन पॉलिसी धारकों को क्लेम रीइंबर्समेंट से बाहर रखा जाता है।

FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल

  FD Scheme: नई दिल्ली। जैसे जैसे निवेश के नए नए तरीके सामने आ रहे हैं वैसे वैसे लोग उन्हें अपनाते जा रहे है। हालांकि एक वर्ग ऐसा भी है जो आज भी एफड़ी और आरडी जैसे पारंपरिक निवेशों में यकीन रखता है। आमतौर पर देखा जाता है कि नौकरीपेशा लोग अपने नाम से एफडी कराते हैं। लेकिन अगर आप अपने बजाय अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराएं तो आप न सिर्फ मोटा रिटर्न कमा सकते हैं बल्कि काफी पैसे भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे? FD से मिले ब्याज पर 10% कटौती अगर कोई व्यक्ति एक लेखा वर्ष में एफडी पर 50 हजार रुपये से ज्यादा का ब्याज प्राप्त करता है तो उसे उस राशि पर 10 प्रतिशत TDS देय होता है। जबकि किसी व्यक्ति के पास पैन नंबर नहीं है तो इस राशि का प्रतिशत दोगुना हो जाता है यानी 20 प्रतिशत। ऐसी स्थिति में अगर आपकी पत्नी टैक्स ब्रैकेट से बाहर हैं या हाउसवाइफ हैं तो आपकी यह राशि एकमुश्त बच सकती है। पत्नी के नाम पर FD कराने से होगी बंपर बचत नए टैक्स सिस्टम में जिन लोगो की कुल टैक्सेबल इनकम 4 लाख रुपये से कम है और पुराने टैक्स सिस्टम में जिन लोगों की इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है उन्हें एफड़ी पर TDS देय नहीं होता है। उन्हें TDS से छूट दी जाती है। लिहाजा अगर आपकी पत्नी हाउस वाइफ हैं तो स्वभाविक है कि वह टैक्स के दायरे से बाहर होंगी इसलिए उनके नाम से एफडी करवाने से आप TDS की पूरी पूरी बचत कर सकते हैं। Related News ❮❯ Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल निशान पर Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल… 13 Mar 2026 Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक फिसला Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक… 12 Mar 2026 Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी परेशानी Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को… 11 Mar 2026 Share Market: शेयर बाजार के लड़खड़ाए कदम, 435 अंक गिरा Sensex; Nifty भी 110 अंक नीचे Share Market: शेयर बाजार के लड़खड़ाए कदम, 435 अंक गिरा Sensex; Nifty भी 110 अंक नीचे 11 Mar 2026 Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल निशान पर Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल… 13 Mar 2026 Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक फिसला Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक… 12 Mar 2026 Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी परेशानी Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को… 11 Mar 2026 Share Market: शेयर बाजार के लड़खड़ाए कदम, 435 अंक गिरा Sensex; Nifty भी 110 अंक नीचे Share Market: शेयर बाजार के लड़खड़ाए कदम, 435 अंक गिरा Sensex; Nifty भी 110 अंक नीचे 11 Mar 2026 इसके अलावा, अगर आप जॉइंट एफडी कराते हैं और अपनी पत्नी को फर्स्ट होल्डर बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में भी आप काफी बचत कर सकते हैं। बताते चलें कि ये फायदा सिर्फ उन लोगों को मिल सकता है, जिनकी पत्नी जॉब नहीं करती हैं।

Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल निशान पर

  Stock Market Today:  नई दिल्ली। शुक्रवार, 13 मार्च को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स BSE Sensex और NSE Nifty 50 दोनों ही लाल निशान पर खुले। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 590 अंक या 0.78 प्रतिशत गिरकर 75,444.22 के स्तर पर खुला। वहीं निफ्टी 50 भी 176 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,462.50 के स्तर पर ओपन हुआ। शुरुआती कारोबार में जारी रही गिरावट सुबह करीब 9:20 बजे तक सेंसेक्स 566 अंक गिरकर 75,467 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 185 अंक टूटकर 23,453 के आसपास ट्रेड करता दिखा। इस दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और ज्यादातर सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में रही तेजी और गिरावट खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स की कंपनियों में कुछ शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। टॉप गेनर Power Grid Corporation of India, NTPC, ITC Limited, Reliance Industries टॉप लूजर Larsen & Toubro, Tata Steel, InterGlobe Aviation (IndiGo), HDFC Bank, Mahindra & Mahindra एशियाई शेयर बाजारों में भी शुक्रवार को कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका ने बाजार पर दबाव बनाया। जापान का Nikkei 225 करीब 2 प्रतिशत गिर गया, जबकि TOPIX Index में करीब 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 3 प्रतिशत नीचे रहा और Hang Seng Index के भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिले। गुरुवार को भी बाजार में आई थी बड़ी गिरावट इससे पहले गुरुवार, 12 मार्च को भी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 829 अंक गिरकर 76,034.42 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 227 अंक टूटकर 23,639.15 के स्तर पर बंद हुआ था। उस दिन भी बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स के 30 शेयरों में से सिर्फ 6 शेयर ही हरे निशान में बंद हुए थे, जबकि 24 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी।

India REIT market: कोविड के बाद आरईआईटी मार्केट में भारत का जबरदस्त उछाल, 1.72 लाख करोड़ रुपए

   India REIT market: नई दिल्ली।  कोविड-19 महामारी के बाद भारत का सूचीबद्ध रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) बाजार तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2020 में इसका आकार 27,100 करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह जानकारी सीबीआरई इंडिया रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। आरईआईटी की तेजी का कारण रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वृद्धि की शुरुआत उस समय हुई जब वित्त वर्ष 2020 में देश का पहला आरईआईटी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ। इसके बाद नए आरईआईटी की लिस्टिंग और पहले से मौजूद आरईआईटी के यूनिट प्राइस में लगातार बढ़ोतरी ने बाजार की रफ्तार को और तेज किया। रिपोर्ट के अनुसार, सूचीबद्ध आरईआईटी में से चार आरईआईटी ने वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही से लेकर वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के बीच 20 प्रतिशत से अधिक सालाना बढ़ोतरी दर्ज की। नियामकीय बदलाव से बाजार को मिलेगी मजबूती सीबीआरई इंडिया के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अस्थिर आर्थिक माहौल के बावजूद भारत का आरईआईटी बाजार निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न देता रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 और उसके बाद आरईआईटी के उपयोग को बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव किए जा रहे हैं: सेबी की नई वर्गीकरण नीति: जनवरी 2026 से आरईआईटी को हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट की जगह इक्विटी से जुड़े निवेश साधन के रूप में वर्गीकृत किया गया। इससे म्यूचुअल फंड और विशेष निवेश फंड की भागीदारी बढ़ेगी और बाजार में तरलता बेहतर होगी। आरबीआई का प्रस्ताव: भारतीय रिजर्व बैंक ने कमर्शियल बैंकों को सीधे आरईआईटी को कर्ज देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इससे आरईआईटी का ढांचा इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनवीआईटी) के अनुरूप हो जाएगा। सरकारी संपत्तियों का मॉनेटाइजेशन: केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने सीपीएसई की व्यावसायिक रियल एस्टेट संपत्तियों को आरईआईटी के जरिए मॉनेटाइज करने की योजना बनाई है। इससे निवेशकों को सरकारी समर्थन वाले एसेट में निवेश का अवसर मिलेगा और सरकारी संपत्तियों का वास्तविक मूल्य सामने आएगा। भारत का एसएम आरईआईटी बाजार सीबीआरई इंडिया रिसर्च के अनुसार, भारत का एसएम आरईआईटी बाजार 75 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है। इस वृद्धि में 500 मिलियन वर्ग फुट से ज्यादा ऑफिस, लॉजिस्टिक्स और रिटेल संपत्तियों का योगदान होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑफिस सेक्टर आरईआईटी निवेश के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला सेगमेंट है, जिसमें लगभग 42 प्रतिशत निवेशक निवेश करने की इच्छा जता चुके हैं। लिस्टेड आरईआईटी: निवेशकों के लिए नया विकल्प फिलहाल भारत के शेयर बाजार बीएसई और एनएसई पर पांच आरईआईटी लिस्टेड हैं। ये निवेशकों को रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करने का नया और सुरक्षित विकल्प प्रदान कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आरईआईटी में लंबी अवधि का निवेश करने से स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है और यह निवेशकों के पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करता है। कोविड के बाद भारत का लिस्टेड आरईआईटी मार्केट न केवल तेजी से बढ़ा है, बल्कि नियामकीय बदलाव और सरकारी समर्थन के कारण यह भविष्य में और विस्तार की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों के लिए यह बाजार स्थिर रिटर्न और लंबी अवधि के अवसर दोनों प्रदान करता है।