अदाणी ग्रुप मामले के समाधान से भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को मिल सकती है नई रफ्तार, अमेरिकी बिजनेस लीडर का बड़ा बयान

नई दिल्ली । भारत के ऊर्जा क्षेत्र और विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि अदाणी ग्रुप से जुड़े एक मामले के समाधान के बाद भारत को न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में आगे बढ़ने में नई गति मिल सकती है। यह टिप्पणी एक प्रमुख अमेरिकी बिजनेस लीडर ने की है, जिन्होंने भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए केवल पारंपरिक या नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद आधार-लोड ऊर्जा प्रणाली की आवश्यकता है, जिसमें परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। उनके अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक राष्ट्र के लिए न्यूक्लियर एनर्जी एक अनिवार्य आधार है, जो 24 घंटे निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती है। बिजनेस लीडर ने यह भी कहा कि अदाणी ग्रुप जैसे बड़े भारतीय औद्योगिक समूहों की भूमिका ऊर्जा और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके अनुसार इस तरह के समूह बड़े स्तर पर परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की क्षमता रखते हैं, जो न्यूक्लियर एनर्जी जैसे जटिल क्षेत्र में भी सहायक साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संबंधित मामलों के समाधान से अब सहयोग और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं। उन्होंने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा में हुई प्रगति की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि केवल इन स्रोतों पर निर्भरता से बिजली ग्रिड में अस्थिरता की समस्या उत्पन्न हो सकती है। उनके अनुसार बैटरी स्टोरेज और अन्य तकनीकी सीमाओं के कारण सौर ऊर्जा पूरी तरह से निरंतर आपूर्ति देने में सक्षम नहीं है, जबकि परमाणु ऊर्जा इस कमी को पूरा कर सकती है। विशेषज्ञ ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के उपयोग पर भी जोर दिया और कहा कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में यदि इस तकनीक को स्थानीय स्तर पर लागू किया जाए तो ऊर्जा उत्पादन और वितरण प्रणाली अधिक कुशल हो सकती है। इससे बड़े ट्रांसमिशन नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी और लागत भी नियंत्रित रह सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कंपनी भारत में पहले से ही सहयोग की संभावनाओं पर काम कर रही है और भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है। उनके अनुसार यदि भारत विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए और अधिक खुला दृष्टिकोण अपनाता है तो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विकास संभव है। उन्होंने यह भी राय दी कि वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से तकनीकी नवाचार और सुरक्षा मानकों में सुधार हो सकता है। उनके अनुसार भारत इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है, बशर्ते नीति और निवेश वातावरण अधिक अनुकूल बनाया जाए।
वैश्विक मजबूती का असर: भारतीय शेयर बाजार की दमदार शुरुआत, सेंसेक्स 75,500 के पार, निफ्टी में भी तेज उछाल

नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को सकारात्मक रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में खुले। सेंसेक्स में तेजी के साथ उछाल देखा गया, जबकि निफ्टी ने भी मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। बाजार की यह चाल वैश्विक आर्थिक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी सकारात्मक स्थिति से प्रभावित मानी जा रही है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 75 हजार के ऊपर कारोबार करता नजर आया। निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत करते हुए 23 हजार के ऊपर अपना स्तर बनाए रखा। बाजार में खासतौर पर डिफेंस सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने पूरे बाजार के मूड को सकारात्मक बनाए रखा। इसके अलावा पीएसयू बैंक, रियल्टी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंजप्शन और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में भी तेजी का रुख देखा गया। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए, जिससे बाजार में व्यापक स्तर पर मजबूती का संकेत मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी हुई दिखाई दी। दोनों सेगमेंट में तेजी के साथ खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटे शेयरों में भी निवेशकों का भरोसा कायम है। इससे पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा और निवेश गतिविधियां बढ़ीं। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कई बड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी देखी गई। बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। वहीं कुछ आईटी और फार्मा शेयरों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक बाजार पर सीमित रहा। एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक स्तर पर निवेशकों का मूड सकारात्मक बना रहा। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिसने एशियाई और भारतीय बाजारों को अतिरिक्त समर्थन दिया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर में कमजोरी भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक कारक साबित हुए हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बाजार में खरीदारी को प्रोत्साहित किया। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है। लगातार निवेश के चलते बाजार में संतुलन बना हुआ है और तेजी का रुझान कायम है। कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वैश्विक संकेतों का सकारात्मक लाभ उठाते हुए दिन की शुरुआत मजबूती के साथ की है।
आज बाजार में क्या रहेगा रुख? मुनाफे के मौके की तलाश में निवेशक सतर्क

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने वाली है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आज मिश्रित रुख (Mixed Trend) देखने को मिल सकता है, जहां कुछ सेक्टरों में खरीदारी रहेगी तो कुछ में मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है। गिफ्ट निफ्टी के संकेतों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाजार की ओपनिंग फ्लैट से हल्की तेजी के साथ हो सकती है। हालांकि, निवेशक किसी भी बड़े दांव से पहले ग्लोबल मार्केट्स के ट्रेंड और डॉलर इंडेक्स की चाल पर नजर बनाए रखेंगे। निफ्टी-सेंसेक्स पर दबाव और सपोर्ट लेवलमार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी के लिए आज का प्रमुख सपोर्ट लेवल 22,200–22,100 के आसपास रह सकता है, जबकि ऊपर की ओर 22,450–22,600 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। सेंसेक्स में भी आज सीमित दायरे में कारोबार होने की संभावना है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कौन से सेक्टर रह सकते हैं फोकस में?आज के ट्रेडिंग सत्र में कुछ सेक्टर निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं-बैंकिंग सेक्टर: लोन ग्रोथ और Q4 नतीजों के बाद हलचल संभवआईटी सेक्टर: ग्लोबल टेक संकेतों से प्रभावितऑटो सेक्टर: डिमांड डेटा के चलते तेजी की उम्मीदफार्मा सेक्टर: सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदारी संभव ग्लोबल मार्केट और FII का असरअमेरिकी बाजारों में मिले-जुले संकेत और एशियाई बाजारों की सुस्ती का असर भारतीय बाजार पर दिख सकता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अगर FII लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार में मजबूती लौट सकती है, लेकिन बिकवाली बढ़ने पर दबाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी संकेतविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आज के बाजार में निवेशक सावधानी के साथ ट्रेडिंग करें। अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए स्टॉप लॉस का उपयोग जरूरी रहेगा। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह दिन अवसर और जोखिम दोनों लेकर आ सकता है। लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। 21 मई का शेयर बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों, डॉलर मूवमेंट और घरेलू निवेश भावना पर निर्भर रहेगा। बाजार में बड़ा ट्रेंड फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन सेक्टर आधारित तेजी निवेशकों को मौके दे सकती है।
सरकारी नौकरी का सुनहरा अवसर: बीईएल में प्रोजेक्ट इंजीनियर और एफओई पदों पर वैकेंसी

नई दिल्ली । सरकारी क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने विभिन्न परियोजना स्थलों के लिए प्रोजेक्ट इंजीनियर और फील्ड ऑपरेशन इंजीनियर सहित कुल 56 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के जरिए तकनीकी क्षेत्र से जुड़े योग्य उम्मीदवारों को देश की प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने का मौका मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित अंतिम तिथि तक आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार कुल रिक्त पदों में फील्ड ऑपरेशन इंजीनियर के 25 और प्रोजेक्ट इंजीनियर-I के 31 पद शामिल हैं। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थित विभिन्न परियोजना स्थलों पर की जाएगी। यह भर्ती अस्थायी आधार पर की जा रही है, लेकिन इसमें मिलने वाला अनुभव और तकनीकी एक्सपोजर उम्मीदवारों के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित इंजीनियरिंग शाखाओं में डिग्री होना अनिवार्य है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई तकनीकी विषयों के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ पदों के लिए एमसीए और उच्च तकनीकी योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र माने गए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में दो से पांच वर्षों तक का अनुभव होना भी जरूरी होगा। आयु सीमा की बात करें तो प्रोजेक्ट इंजीनियर पद के लिए अधिकतम आयु 32 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि फील्ड ऑपरेशन इंजीनियर पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष रखी गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आयु की गणना निर्धारित तिथि के आधार पर की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। सबसे पहले आवेदन पत्रों की जांच कर योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिसके बाद आगे की चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम चयन मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। सैलरी की बात करें तो चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन के साथ अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी। फील्ड ऑपरेशन इंजीनियर पद पर चयनित अभ्यर्थियों को शुरुआती वेतन लगभग 60 हजार रुपये प्रतिमाह तक मिल सकता है, जबकि प्रोजेक्ट इंजीनियर पद के लिए शुरुआती सैलरी करीब 40 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित की गई है। इसके अलावा अन्य भत्ते और सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। आवेदन शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा करना होगा। अलग-अलग पदों के अनुसार शुल्क तय किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को शुल्क में छूट प्रदान की गई है। तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर मानी जा रही है।
AI क्रांति से भारत में नौकरी बाजार में बड़ा बदलाव, कंपनियों को चाहिए अब विशेषज्ञ और फ्लेक्सिबल वर्कफोर्स

नई दिल्ली । भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का प्रभाव अब केवल तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के रोजगार बाजार और ऑफिस संस्कृति को भी तेजी से बदल रहा है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि भारत AI आधारित नौकरियों और तकनीकी प्रतिभा के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 की तुलना में AI से जुड़ी जॉब पोस्टिंग लगभग छह गुना तक बढ़ चुकी हैं, जो देश में तकनीकी बदलाव की नई तस्वीर पेश करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मशीन लर्निंग, जेनरेटिव AI और एमएल ऑप्स जैसे क्षेत्रों में कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी ने रोजगार बाजार में बड़ा बदलाव पैदा किया है। अब कंपनियां पारंपरिक कर्मचारियों के बजाय ऐसे पेशेवरों की तलाश कर रही हैं जो तेजी से बदलती तकनीक के साथ काम कर सकें और नई चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें। यही वजह है कि AI स्किल्स रखने वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत धीरे-धीरे वैश्विक AI टैलेंट और AI कार्यान्वयन केंद्र के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर में AI में निवेश तेजी से बढ़ रहा है और इसका सीधा लाभ भारतीय तकनीकी क्षेत्र को मिल रहा है। कंपनियां अब भारत को केवल आउटसोर्सिंग हब के रूप में नहीं बल्कि इनोवेशन और एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के केंद्र के रूप में देखने लगी हैं। AI के विस्तार का असर केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ऑफिस स्पेस और कार्यस्थल की संरचना में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत के नॉलेज-इकोनॉमी ऑफिस स्पेस में करोड़ों वर्ग फुट की अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि AI आधारित टीमें अधिक सहयोगात्मक और विशेषज्ञता आधारित होती हैं, जिन्हें आधुनिक और लचीले कार्यस्थलों की आवश्यकता होती है। कंपनियां अब ‘कोर प्लस फ्लेक्स’ मॉडल को तेजी से अपना रही हैं। इस मॉडल में स्थायी ऑफिस के साथ-साथ फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस का उपयोग किया जाता है ताकि कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं और अधिक लचीलापन मिल सके। यही कारण है कि फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर में भी तेज विस्तार देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में कंपनियां अगले कुछ वर्षों में अपने कार्यस्थलों को अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि AI आधारित भर्ती आने वाले समय में फ्लेक्स सीट लीजिंग की मांग को काफी बढ़ा सकती है। इससे रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत ने पहले भी तकनीकी बदलावों को रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों में बदलने की क्षमता दिखाई है। अब AI के दौर में भी देश उसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। तेजी से बढ़ती AI नौकरियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में भारत वैश्विक तकनीकी अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत भूमिका निभा सकता है।
सरकारी कंपनी में करियर बनाने का सुनहरा समय: बामर लॉरी दे रही है 62 युवाओं को नौकरी का मौका

नई दिल्ली । भारत सरकार के प्रतिष्ठित उपक्रम बामर लॉरी एंड कंपनी लिमिटेड ने युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत किया है। कंपनी ने अलग-अलग विभागों में एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के कुल 62 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के जरिए इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुके योग्य उम्मीदवारों को सरकारी क्षेत्र में शानदार करियर बनाने का मौका मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 9 जून तक अपना ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। युवाओं के बीच इस भर्ती को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि इसमें अच्छी सैलरी के साथ भविष्य में बेहतर करियर ग्रोथ की भी संभावना है। इस भर्ती में ग्रेजुएट इंजीनियरिंग और एमबीए से जुड़े विभिन्न पद शामिल किए गए हैं। इंजीनियरिंग कैटेगरी में मैकेनिकल, केमिकल, फूड टेक्नोलॉजी, आईटी और लेदर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के लिए पद निर्धारित किए गए हैं। वहीं एमबीए और समकक्ष योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए सेल्स एंड मार्केटिंग, ऑपरेशंस, आईटी मैनेजमेंट, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, एचआर, लॉजिस्टिक्स और आईटी फाइनेंस जैसे विभागों में अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इससे साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में नियमित और पूर्णकालिक बीई, बीटेक, एमबीए, पीजी डिप्लोमा या पीजी डिग्री न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ होना अनिवार्य है। कंपनी ने आयु सीमा भी तय की है, जिसके अनुसार इंजीनियरिंग श्रेणी के उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 25 वर्ष और एमबीए श्रेणी के लिए 27 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट भी प्रदान की जाएगी। ऐसे में योग्य युवा समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाया गया है। उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन, समूह चर्चा, समूह कार्य, व्यक्तिगत साक्षात्कार और मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। अंतिम चयन मेरिट सूची के आधार पर होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को चुनना है ताकि कंपनी को बेहतर मानव संसाधन मिल सके। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान भी दिया जाएगा। शुरुआती सैलरी 40 हजार रुपए प्रतिमाह से शुरू होकर 1 लाख 40 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। यही कारण है कि यह भर्ती युवाओं के लिए बेहद खास मानी जा रही है। सरकारी क्षेत्र में स्थायी और सुरक्षित नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह अवसर काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क जमा करना होगा, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है। उम्मीदवारों को आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही प्रारूप में अपलोड करने होंगे ताकि आवेदन निरस्त न हो। देशभर के हजारों युवा इस भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे और अब उनके पास सरकारी क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने का बेहतरीन मौका है। योग्य उम्मीदवारों को सलाह दी जा रही है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि किसी तकनीकी परेशानी से बचा जा सके।
नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए राहत, सेंट्रल बैंक एजीएम भर्ती में आवेदन का मिला एक और मौका

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में उच्च पद पर नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सेंट्रल बैंक में असिस्टेंट जनरल मैनेजर यानी एजीएम के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। पहले जहां आवेदन प्रक्रिया 17 मई को समाप्त होने वाली थी, वहीं अब इच्छुक अभ्यर्थी 25 मई तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस फैसले से उन उम्मीदवारों को बड़ा फायदा मिलेगा जो किसी कारणवश तय समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे। बैंक की ओर से यह भर्ती विशेषज्ञ श्रेणी के अंतर्गत की जा रही है, जिसमें जोखिम प्रबंधन, वित्त एवं लेखा, डिजिटल जोखिम और क्रेडिट जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 15 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें जोखिम प्रबंधन, अनुपालन, परिसंपत्ति देयता प्रबंधन, डिजिटल रिस्क एंड एनालिटिक्स, वित्त एवं लेखा तथा क्रेडिट ऑफिसर जैसे अहम पद शामिल किए गए हैं। बैंकिंग क्षेत्र में अनुभव रखने वाले और वित्तीय प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती बेहद खास मानी जा रही है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से जारी है और उम्मीदवारों को निर्धारित तिथि से पहले अपना फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो अलग-अलग पदों के लिए अलग पात्रताएं तय की गई हैं। जोखिम प्रबंधन और अनुपालन से जुड़े पदों के लिए उम्मीदवारों के पास सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, डेटा साइंस, वित्त या बैंकिंग प्रबंधन में डिग्री अथवा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा होना आवश्यक है। वहीं डिजिटल जोखिम और विश्लेषण पद के लिए गणित, सांख्यिकी, आईटी या कंप्यूटर साइंस से संबंधित डिग्री मांगी गई है। वित्त एवं लेखा विभाग के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी से जुड़े योग्य उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा क्रेडिट ऑफिसर पद के लिए बैंकिंग, वित्त, क्रेडिट मैनेजमेंट या चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट जैसी योग्यताओं को अनिवार्य रखा गया है। भर्ती प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं बल्कि संबंधित क्षेत्र का अनुभव भी अहम भूमिका निभाएगा। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 33 वर्ष और अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट भी प्रदान की जाएगी। चयन प्रक्रिया ऑनलाइन परीक्षा, इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के जरिए पूरी की जाएगी। माना जा रहा है कि परीक्षा और इंटरव्यू जून महीने में आयोजित किए जा सकते हैं। वेतनमान की बात करें तो चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक सैलरी दी जाएगी। असिस्टेंट जनरल मैनेजर पद पर नियुक्त अभ्यर्थियों को प्रतिमाह लगभग 1.20 लाख रुपए से लेकर 1.35 लाख रुपए तक वेतन मिलेगा। इसके साथ अन्य भत्तों और सुविधाओं का लाभ भी दिया जाएगा, जिससे यह भर्ती बैंकिंग क्षेत्र की सबसे आकर्षक नौकरियों में शामिल हो गई है। आवेदन शुल्क सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 850 रुपए निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन और महिला उम्मीदवारों को रियायती शुल्क के रूप में 175 रुपए का भुगतान करना होगा। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज सही प्रारूप और निर्धारित आकार में अपलोड करने होंगे। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भविष्य की जरूरत के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रखना भी जरूरी माना गया है।
EV सेगमेंट में नई एंट्री: सिंगल चार्ज में 440KM चलने वाली Skoda SUV

नई दिल्ली । ऑटोमोबाइल की दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच Skoda ने अपनी नई इलेक्ट्रिक SUV Epiq EV को पेश कर दिया है। यह कंपनी की अब तक की सबसे किफायती और कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV मानी जा रही है, जिसे खास तौर पर शहरी उपयोग और लंबी दूरी दोनों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। Skoda का दावा है कि नई Epiq EV सिंगल चार्ज में करीब 440 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है, जिससे यह अपने सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बन सकती है। इसके साथ ही इसका छोटा बैटरी वेरिएंट लगभग 310 किलोमीटर की रेंज भी प्रदान करता है। डिजाइन की बात करें तो Skoda ने इसे अपनी नई “Modern Solid” डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया है। SUV का लुक काफी फ्यूचरिस्टिक और प्रीमियम है। फ्रंट में ब्लैक फिनिश ग्रिल, स्लिम LED DRLs और L-शेप हेडलाइट्स दी गई हैं, जो इसे एक मॉडर्न अपील देती हैं। वहीं साइड प्रोफाइल में कूपे-स्टाइल रूफलाइन, ब्लैक क्लैडिंग और एयरोडायनामिक अलॉय व्हील्स इसे और स्पोर्टी बनाते हैं। पीछे की तरफ T-शेप LED टेललाइट्स और रूफ स्पॉइलर इसका डिजाइन पूरा करते हैं। आकार की बात करें तो Skoda Epiq EV लगभग 4.17 मीटर लंबी है, जिससे यह कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में आती है और शहरों में ड्राइविंग व पार्किंग के लिए आसान साबित हो सकती है। इसके बावजूद कंपनी ने इसमें पर्याप्त केबिन स्पेस दिया है। इसमें लगभग 475 लीटर का बूट स्पेस और 25 लीटर का फ्रंक (फ्रंट ट्रंक) भी मिलता है। इंटीरियर को भी पूरी तरह हाईटेक और प्रीमियम बनाया गया है। इसमें 13-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो Android आधारित सॉफ्टवेयर पर काम करता है। इसके साथ डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और एम्बिएंट लाइटिंग जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। फीचर्स की बात करें तो इसमें वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto, पैनोरमिक सनरूफ, ड्यूल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस चार्जिंग, 10-स्पीकर Canton ऑडियो सिस्टम और 360-डिग्री कैमरा जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसमें ADAS (Advanced Driver Assistance System) और 7 एयरबैग जैसी आधुनिक सेफ्टी टेक्नोलॉजी शामिल है। Skoda Epiq EV को Volkswagen Group के नए MEB+ प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है, जो इसे और अधिक एफिशिएंट और मॉडर्न बनाता है। कंपनी का फोकस इसे एक ग्लोबल मास-मार्केट EV के रूप में स्थापित करने पर है। हालांकि कंपनी ने अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट और कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि यह जल्द ही यूरोपीय बाजारों में लॉन्च की जाएगी और बाद में अन्य देशों में भी पेश की जा सकती है।
कॉरपोरेट हलचल: स्टारबक्स ने कई पदों पर की बड़े स्तर पर नौकरी में कटौती

नई दिल्ली । दुनिया की सबसे बड़ी कॉफी चेन कंपनियों में शामिल Starbucks ने अमेरिका में एक बड़ा कदम उठाते हुए व्यापक स्तर पर छंटनी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद कंपनी में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर सीधा असर पड़ा है। छंटनी की इस प्रक्रिया में केवल सामान्य कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वाइस प्रेसिडेंट, मैनेजर और प्रशासनिक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कंपनी ने इस कदम को अपनी नई रणनीति “Back to Starbucks” नीति का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य संगठन को अधिक चुस्त, प्रभावी और लाभदायक बनाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के सीईओ ब्रायन निकोल (Brian Niccol) के नेतृत्व में यह बड़ा निर्णय लिया गया है, जिसमें लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है। स्टारबक्स अब अपने संचालन मॉडल को पुनर्गठित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत क्षेत्रीय सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। कंपनी की योजना के अनुसार, कर्मचारियों को शिकागो, डलास, अटलांटा, बरबैंक और कैलिफोर्निया जैसे विभिन्न शहरों में ट्रांसफर भी किया जाएगा, ताकि कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित किया जा सके। जानकारी के अनुसार, यह छंटनी केवल एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से जारी व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है। फरवरी 2025 से अब तक कंपनी 2,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है, जिसमें स्टोर स्टाफ, रिटेल और रोस्टरी से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि यह फैसला लंबे समय की ग्रोथ स्ट्रैटजी और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। स्टारबक्स के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि कंपनी अपने ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही रियल एस्टेट और नई योजनाओं पर लगभग 400 मिलियन डॉलर खर्च करने की भी योजना है। हालिया वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, स्टारबक्स की सालाना बिक्री करीब 9.5 बिलियन डॉलर रही है, जबकि कुल मुनाफा लगभग 511 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया है। हालांकि, बढ़ती परिचालन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव के चलते कंपनी अब खर्चों में कटौती पर विशेष ध्यान दे रही है। इस बड़े फैसले के बाद कॉर्पोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है, और माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी इसी तरह की लागत-कटौती रणनीतियों को अपना सकती हैं।
ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही इन दोनों धातुओं पर दबाव बढ़ गया और दाम एक प्रतिशत से अधिक फिसल गए। निवेशकों की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर टिकी हुई हैं, जो फिलहाल मजबूत स्थिति में बना हुआ है। घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई, लेकिन कुछ ही समय में गिरावट और गहरी हो गई। कारोबार के दौरान सोने के दाम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह दिन के निचले स्तर की ओर खिसकता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर में मजबूती के कारण निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं, जिससे इसकी मांग पर दबाव बढ़ा है। इसी तरह चांदी के दामों में भी कमजोर रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही चांदी में गिरावट दर्ज की गई और इसका असर पूरे सत्र में दिखाई दिया। चांदी भी एक प्रतिशत से अधिक कमजोर होकर कारोबार करती रही, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का माहौल बन गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। डॉलर इंडेक्स में तेजी के चलते अन्य मुद्राओं में सोने की कीमतें महंगी हो गईं, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ा। डॉलर इंडेक्स प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को दर्शाता है और जब यह मजबूत होता है तो सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर दबाव बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक संकेत और अमेरिकी मुद्रा की स्थिति ही कीमती धातुओं की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार में बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। इसी कारण सोना और चांदी में कमजोरी का रुझान बना हुआ है। भारतीय शेयर बाजार में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला और शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में दबाव के कारण प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी आई, जिससे समग्र बाजार धारणा प्रभावित हुई। फिलहाल बाजार की नजर डॉलर की आगे की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।