Jio IPO अपडेट: निवेशकों की नजरें, जल्द आ सकता है ऑफिशियल अनाउंसमेंट

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर मेगा पब्लिक इश्यू की तैयारी तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Reliance Industries Limited की डिजिटल इकाई Jio Platforms Limited जल्द ही अपना बहुप्रतीक्षित IPO लॉन्च कर सकती है। जानकारी के अनुसार, कंपनी मई 2026 में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकती है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। IPO को लेकर क्यों बढ़ी हलचलकंपनी ने पिछले कुछ महीनों से इस मेगा इश्यू की तैयारी तेज कर दी है। शुरुआत में मार्च तक फाइलिंग का प्लान था, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार की अस्थिरता के कारण इसे टाल दिया गया। अब कंपनी अपने वित्तीय आंकड़ों और बाजार स्थितियों का आकलन करने के बाद आगे बढ़ने की रणनीति बना रही है। बड़ी टीम और ग्लोबल बैंकों की भागीदारीइस मेगा IPO को संभालने के लिए कंपनी ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। करीब 19 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंकों को सलाहकार के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:Goldman SachsMorgan StanleyBank of AmericaCitigroupHSBCKotak Mahindra CapitalJM Financial कितना बड़ा हो सकता है IPO?हालांकि कंपनी ने अभी तक IPO साइज को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू हो सकता है। अगर यह IPO लॉन्च होता है, तो यह निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर और भारतीय टेक-टेलीकॉम सेक्टर के लिए ऐतिहासिक कदम होगा। क्यों है यह IPO खास?भारत का सबसे बड़ा संभावित IPOलंबे समय बाद रिलायंस समूह का बड़ा पब्लिक इश्यूडिजिटल और टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत पकड़घरेलू और विदेशी निवेशकों की बड़ी दिलचस्पी जियो का संभावित IPO भारतीय शेयर बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन मई 2026 को लेकर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।
सेबी की बड़ी राहत: ज्यादा लीवरेज वाले InvITs के उधारी नियम आसान

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट्स) के लिए उधारी नियमों में महत्वपूर्ण राहत देने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब ऐसे इनविट्स भी अतिरिक्त कर्ज ले सकेंगे, जिनका लीवरेज उनकी कुल एसेट वैल्यू के 49 प्रतिशत से अधिक है। सेबी का यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वित्तीय लचीलापन बढ़ाने और परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। माना जा रहा है कि इससे सड़क, परिवहन और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी। पूंजीगत खर्च और क्षमता विस्तार के लिए मिलेगी मदसेबी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अतिरिक्त उधारी का उपयोग पूंजीगत खर्चों के लिए किया जा सकेगा। इन खर्चों में परिसंपत्तियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना, क्षमता विस्तार करना और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मजबूत करना शामिल है। नियामक ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बड़े रखरखाव कार्यों पर होने वाले खर्चों को भी इस राहत के दायरे में शामिल किया है। ऐसे रखरखाव कार्य, जो सामान्य मरम्मत से अलग और कंसेशन एग्रीमेंट के तहत जरूरी होते हैं, अब अतिरिक्त कर्ज के जरिए पूरे किए जा सकेंगे। सड़क परियोजनाओं को होगा सबसे ज्यादा फायदाविशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सड़क क्षेत्र से जुड़े इनविट्स को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं में समय-समय पर बड़े स्तर पर मरम्मत और रखरखाव की जरूरत होती है, जिसके लिए भारी फंडिंग की आवश्यकता पड़ती है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि बड़े रखरखाव खर्च में केवल वही कार्य शामिल होंगे, जो सामान्य संचालन और नियमित रखरखाव से अलग हों और अनुबंध के तहत अनिवार्य हों। रीफाइनेंसिंग को भी मिली मंजूरीसेबी ने इनविट्स, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) और होल्डिंग कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति भी दी है। हालांकि यह सुविधा केवल मूल कर्ज राशि तक सीमित रहेगी। नियामक ने साफ किया कि जमा ब्याज, जुर्माना, फीस या अन्य शुल्कों को रीफाइनेंसिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी केवल मूल कर्ज की राशि को ही नए कर्ज से बदला जा सकेगा। तुरंत लागू हुए नए नियमसेबी ने बताया कि यह संशोधित ढांचा 17 अप्रैल 2026 को इनविट नियमों में किए गए बदलावों के बाद लागू किया गया है और नए नियम तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई गति मिलेगी और इनविट्स को अपनी परिसंपत्तियों के विस्तार व रखरखाव में अधिक परिचालन स्वतंत्रता प्राप्त होगी।
सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल, एक हफ्ते में सोना ₹8 हजार से ज्यादा महंगा

नई दिल्ली। देश में सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों का ध्यान खींचा है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक हफ्ते में सोने की कीमत में 8 हजार रुपए से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई है। 24 कैरेट सोना 1.58 लाख रुपए के पारआईबीजेए के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,58,210 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है। पिछले सप्ताह इसी अवधि में इसकी कीमत 1,51,078 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। यानी सिर्फ एक हफ्ते में सोना 8,132 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया। इसी तरह 22 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,44,920 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया, जो पहले 1,38,387 रुपए था। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत भी 1,13,309 रुपए से बढ़कर 1,18,658 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई। चांदी ने भी दिखाई तेज चमकसोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी तेजी दर्ज की गई है। एक हफ्ते में चांदी 12,900 रुपए प्रति किलो महंगी होकर 2,68,500 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। पिछले सप्ताह इसकी कीमत 2,55,600 रुपए प्रति किलो थी। हाजिर बाजार में चांदी ने 14 मई को सुबह के सत्र में 2,87,350 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि सप्ताह का न्यूनतम भाव 11 मई को 2,55,300 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया। आयात शुल्क बढ़ने से बढ़े दामविशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी की बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाना है। सरकार ने सेस सहित आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर दिखाई दे रहा है। आईबीजेए दिन में दो बार सुबह और शाम सोने और चांदी के दाम जारी करता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों और आयात नीति के असर से आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
टाटा ट्रस्ट्स की बोर्ड बैठक पर रोक, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर का निर्देश

नई दिल्ली। टाटा समूह से जुड़े सर रतन टाटा ट्रस्ट के प्रशासनिक मामलों में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट की प्रस्तावित अहम बोर्ड बैठक को स्थगित करने का निर्देश जारी किया है। यह फैसला ट्रस्ट की बोर्ड संरचना को लेकर मिली कथित नियम उल्लंघन संबंधी शिकायतों के बाद लिया गया है। इस निर्देश के बाद टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि आदेश एकतरफा (एक्स-पार्टी) तरीके से दिया गया है और केवल सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लागू होता है। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश की समीक्षा की जा रही है और कानूनी पहलुओं को समझा जा रहा है। महत्वपूर्ण बैठक पर लगी रोकयह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही थी क्योंकि इसमें टाटा संस से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रस्तावित थी। इनमें कंपनी की संभावित लिस्टिंग, चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और अन्य नॉमिनी डायरेक्टर्स से जुड़े मुद्दे शामिल थे। बैठक पहले 8 मई को होनी थी, जिसे बाद में 16 मई तक स्थगित किया गया था, लेकिन अब इसे फिर से टाल दिया गया है। जांच के घेरे में ट्रस्ट की संरचनामहाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर अमोघ एस. कालोटी के अनुसार, सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बोर्ड की संरचना को लेकर प्राप्त शिकायतों की जांच जारी है। आदेश में कहा गया है कि जब तक इंस्पेक्टर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की बोर्ड बैठक आयोजित नहीं की जा सकती। वकील कात्यायनी अग्रवाल द्वारा दायर शिकायत में भी इस मामले को उठाया गया है। उन्होंने 18 अप्रैल को चैरिटी कमिश्नर से हस्तक्षेप की मांग की थी और जांच पूरी होने तक सभी आगामी बैठकों पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। ट्रस्टी संरचना पर उठे सवालजानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 में लागू संशोधित नियमों के तहत किसी भी ट्रस्ट में स्थायी या आजीवन ट्रस्टियों की संख्या कुल बोर्ड के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। शिकायत में कहा गया है कि वर्तमान में ट्रस्ट में छह ट्रस्टी हैं, जिनमें जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा जैसे आजीवन ट्रस्टी शामिल हैं, जिससे अनुपात नियमों के उल्लंघन का सवाल उठता है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो 180 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है। ऐसे में यह मामला कॉरपोरेट और कानूनी दोनों स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान पर IMF की सख्ती, बढ़ेगा राजस्व लक्ष्य

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्ती एक बार फिर बढ़ गई है। आईएमएफ ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पाकिस्तान के पेट्रोलियम लेवी टारगेट को बढ़ाकर लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये तय कर दिया है, जो मौजूदा लक्ष्य से करीब 25,900 करोड़ रुपये अधिक है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में पहले से जारी महंगाई संकट के और गहराने की आशंका जताई जा रही है। आईएमएफ की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार को अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अब अतिरिक्त 86 हजार करोड़ रुपये के बराबर संसाधन जुटाने होंगे। इसके लिए केंद्र और प्रांतीय सरकारों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई है। केंद्र सरकार को नए टैक्स उपायों और प्रवर्तन सुधारों के जरिए लगभग आधा लक्ष्य हासिल करना होगा, जबकि प्रांतीय सरकारें सेवाओं पर सेल्स टैक्स और कृषि आयकर के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की कोशिश करेंगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान का कुल बजट आकार 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। वहीं, देश का रक्षा बजट भी बढ़कर लगभग 2.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। आईएमएफ ने पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के लिए भी लक्ष्य और कड़े कर दिए हैं। अब उसे 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाना होगा। लगातार दो वर्षों से लक्ष्य पूरा न कर पाने के कारण इस बार निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब केवल इंडिकेटिव टारगेट नहीं बल्कि क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया लागू किया गया है। इसका मतलब यह है कि लक्ष्य पूरा न होने पर पाकिस्तान को आईएमएफ बोर्ड से विशेष छूट लेनी होगी, जिससे उसकी वित्तीय स्वतंत्रता और सीमित हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमएफ की ये सख्त शर्तें पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा सकती हैं। पहले से ही महंगाई, कर्ज और कमजोर राजस्व व्यवस्था से जूझ रहे देश पर यह फैसला आम जनता के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है।
पेट्रोल महंगा, डीजल-एटीएफ सस्ता? टैक्स स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े टैक्स ढांचे में अहम बदलाव करते हुए पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर राहत दी गई है। सरकार के इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल दोनों पर लागू सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन से घरेलू ईंधन की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह बदलाव केवल निर्यात से जुड़े ढांचे पर लागू होगा। नए आदेश को शनिवार से प्रभावी कर दिया गया है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार पेट्रोल निर्यात पर शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर लगातार बदलावों के बाद अब दरों में कटौती की गई है। डीजल पर पहले 21.5 रुपये प्रति लीटर, फिर 55.5 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि और बाद में 23 रुपये प्रति लीटर तक कमी की गई थी, जिसे अब घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी कई बार संशोधन किया गया। पहले यह शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपये और फिर 33 रुपये किया गया था। अब इसे घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, विंडफॉल टैक्स ढांचे के तहत यह बदलाव वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत का यह टैक्स संशोधन नीति संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को इस सप्ताह गहरे दबाव में डाल दिया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर रही, जिसका असर सीधे तौर पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। दोनों सूचकांक सप्ताह के अंत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। एनएसई निफ्टी-50 इस सप्ताह 2.2 प्रतिशत यानी 532 अंक टूटकर 23,643.5 के स्तर पर आ गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत यानी 2,000 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 75,238 पर बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट केवल बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार भी इसकी चपेट में आ गया। मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर और अधिक दबाव बना। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बीएसई रियल्टी इंडेक्स में लगभग 8 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई, जबकि आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत टूट गया। ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल, बैंकिंग और पीएसयू सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कुछ रक्षात्मक सेक्टर जैसे मेटल और हेल्थकेयर ने थोड़ी मजबूती दिखाई और मामूली बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक रहा, जिसमें 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जो महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों से विदेशी निवेश को बाहर खींचा है, जिससे एफआईआई की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बीच घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार के लिए एक सहारा बनी रही। एसआईपी के जरिए लगातार आने वाले निवेश ने बाजार को कुछ हद तक स्थिर बनाए रखने में मदद की। अप्रैल में एसआईपी निवेश 31,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने विदेशी बिकवाली के असर को आंशिक रूप से संतुलित किया। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, तेल कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है, और आने वाले समय में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल के रुझानों पर टिकी रहेगी।
पोस्ट ऑफिस RD स्कीम: छोटे निवेश से बड़ा फंड बनाने का आसान तरीका

नई दिल्ली । आज के समय में जहां शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में उतार-चढ़ाव का डर बना रहता है, वहीं पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम निवेशकों को सुरक्षित और स्थिर रिटर्न का भरोसा देती है। यह स्कीम खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जाती है जो हर महीने छोटी-छोटी बचत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं। इस योजना में मौजूदा समय में करीब 6.7% सालाना ब्याज दर मिल रही है और निवेश अवधि 5 साल (60 महीने) होती है। ₹5,000 महीने निवेश करने पर कितना रिटर्न?अगर कोई निवेशक हर महीने ₹5,000 जमा करता है, तो:कुल निवेश: ₹3,00,000 (5 साल में)अनुमानित ब्याज: ₹56,830मैच्योरिटी राशि: लगभग ₹3,56,830यानी निवेशक को बिना किसी जोखिम के तय रिटर्न प्राप्त होता है। कैसे काम करती है यह स्कीम?पोस्ट ऑफिस RD में निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि जमा करता है। यह राशि 5 साल तक लगातार जमा होती रहती है और उस पर कंपाउंडिंग के आधार पर ब्याज मिलता है। मैच्योरिटी पर पूरी राशि एक साथ वापस मिल जाती है। कौन कर सकता है निवेश?कोई भी भारतीय नागरिक10 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नाबालिग भी खाता खोल सकते हैंजॉइंट अकाउंट की सुविधा (3 लोगों तक) उपलब्ध क्यों है यह स्कीम खास?सरकार द्वारा गारंटीड सुरक्षाबाजार के उतार-चढ़ाव से कोई असर नहींछोटे निवेश से बड़ा फंड बनाने का मौकामिडिल क्लास और सैलरीड लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प पोस्ट ऑफिस RD स्कीम उन निवेशकों के लिए मजबूत विकल्प है जो जोखिम से बचते हुए नियमित बचत करना चाहते हैं। ₹100 से शुरू होकर यह योजना धीरे-धीरे एक सुरक्षित भविष्य फंड तैयार करने में मदद करती है।
CIBIL Score खराब हो गया? क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए जरूरी गाइड

नई दिल्ली । क्रेडिट कार्ड की गलत आदतों से CIBIL स्कोर गिर सकता है, लेकिन सही वित्तीय अनुशासन अपनाकर इसे सिर्फ 3 महीनों में सुधारा जा सकता है। CIBIL स्कोर किसी भी व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाता है। क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल इस स्कोर को तेजी से नीचे ला सकता है। मुख्य कारण:समय पर क्रेडिट कार्ड बिल न भरनाकार्ड लिमिट का 30% से ज्यादा इस्तेमाल करनासिर्फ मिनिमम ड्यू पेमेंट करनाबार-बार लोन या कार्ड के लिए आवेदन करनापुराने लोन/EMI में डिफॉल्ट करना CIBIL स्कोर सुधारने के 5 आसान तरीके- पूरा बिल समय पर चुकाएंहर महीने क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया समय पर चुकाना सबसे जरूरी है। सिर्फ मिनिमम ड्यू भरने से स्कोर सुधरता नहीं, बल्कि ब्याज बढ़ता है और स्कोर गिरता है। क्रेडिट लिमिट का कम उपयोग करें कोशिश करें कि कार्ड लिमिट का केवल 30% तक ही खर्च करें।उदाहरण: अगर लिमिट ₹50,000 है, तो खर्च ₹15,000 के भीतर रखें। पुराने कार्ड बंद न करेंपुराने क्रेडिट कार्ड आपके क्रेडिट इतिहास को मजबूत बनाते हैं। इन्हें बंद करने से स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बार-बार लोन के लिए अप्लाई न करेंकम समय में कई जगह लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से आपका स्कोर गिर सकता है। जरूरत हो तभी अप्लाई करें। CIBIL रिपोर्ट चेक करेकई बार रिपोर्ट में तकनीकी गलती भी स्कोर खराब कर देती है। ऐसी गलतियों को तुरंत ठीक करवाना जरूरी है। कितने समय में सुधार दिखता है?अगर आप लगातार 2–3 महीने तक:समय पर भुगतान करते हैंलिमिट में खर्च रखते हैंतो CIBIL स्कोर में सुधार दिखने लगता है। हालांकि बड़ा सुधार आने में 6 महीने या उससे ज्यादा समय भी लग सकता है। क्यों जरूरी है अच्छा CIBIL स्कोर?अच्छा CIBIL स्कोर होने से:आसानी से लोन मिलता हैकम ब्याज दर पर होम/कार लोन मिलता हैक्रेडिट कार्ड पर ज्यादा लिमिट मिलती हैबैंक का भरोसा बढ़ता है क्रेडिट कार्ड सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह फायदेमंद है, लेकिन लापरवाही से CIBIL स्कोर बिगड़ सकता है। थोड़ी सी अनुशासन वाली आदतें अपनाकर आप इसे कुछ ही महीनों में सुधार सकते हैं।
Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव (US-Iran Tensions), होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद और इससे क्रूड की कीमतों (Crude Prices) में लगी आग के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है. दुनिया के तमाम देशों में इससे उपजे तेल-गैस संकट (Oil and Gas Crisis) से हाहाकार मचा है और महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ रही है. भारत भी इससे अछूता नहीं है, शुक्रवार को ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई. हालांकि, ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है और करीब चार साल बाद इसमें इजाफा हुआ है। लेकिन बड़े ग्लोबल संकटों के बावजूद भारत सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहा है. इसका एक ताजा उदाहरण देश के निर्यात के आंकड़े हैं. तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय सामानों का एक्सपोर्ट अप्रैल महीने में बढ़कर 43.56 अरब डॉलर रहा है, जबकि आयात में भी तेज उछाल देखने को मिला है. कुल निर्यात की बात करें, तो ये 80.80 अरब डॉलर रहा है। इन चीजों का खूब हुआ निर्यातकॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार ये आंकड़े जारी करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात बढ़ रहा है. अप्रैल में ये 13.78 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 43.56 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा अप्रैल में भारतीय आयात भी सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 71.94 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान कई क्षेत्रों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. अनाजों के निर्यात में सबसे अधिक 210.19% का उछाल आया, इसके बाद मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 48.03% और इलेक्ट्रॉनिक सामानों में 40.31% की तेजी आई. पेट्रोलियम प्रोडक्ट, हस्तशिल्प, मरीन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं और कॉफी में भी ग्रोथ देखने को मिली है. होर्मुज संकट का यहां पड़ा असर अप्रैल महीने में भारत का व्यापार घाटा 28.38 अरब डॉलर रहा. होर्मुज संकट के असर की बात करें, तो राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 28% घटकर 4.16 अरब डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 5.78 अरब डॉलर था. इस क्षेत्र से आयात अप्रैल में 31.64% घटा और 10.47 अरब डॉलर रह गया। दुनिया में हाय-तौबा, भारत ने ऐसा संभालाआयात-निर्यात के इन ताजा आंकड़ों को देखकर साफ हो जाता है कि ट्रंप का टैरिफ अटैक हो या फिर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से पैदा हुआ तेल-गैस संकट. मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) काम कर रहा है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान से लेकर साउथ कोरिया तक में हायतौबा मची नजर आई. लेकिन देश के आयात-निर्यात को सुचारू रखने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठाए, इनमें आयात डेस्टिनेशंस की संख्या बढ़ाने के साथ ही ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय निर्यात के लिए नए बाजारों तक पहुंच शामिल है. बीते कुछ समय में भारत ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों से बड़े FTA साइन किए हैं।