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एजुकेशन सेक्टर का चमकता सितारा: SEIL ने 3 साल में पैसा किया लगभग 3 गुना, संस्थागत निवेश में बढ़ोत्तरी से उत्साह

नई दिल्ली। शांति एजुकेशनल इनिशिएटिव्स लिमिटेड यानी SEIL तेजी से बढ़ती शिक्षा प्रबंधन कंपनी के रूप में आज चर्चा में है। 2009 में चिरिपाल ग्रुप की ओर से स्थापित यह कंपनी प्ले स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन संस्थानों तक स्कूल मैनेजमेंट और लर्निंग सॉल्यूशंस प्रदान करती है। टेक्नोलॉजी आधारित इंग्लिश मीडियम करिकुलम, टीचर ट्रेनिंग और बेहतर लर्निंग आउटकम के जरिए SEIL देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस कर रही है। हाल ही में कंपनी ने Q3FY26 के तिमाही नतीजे जारी किए हैं। इस दौरान SEIL ने 5.83 करोड़ रुपये की नेट सेल्स दर्ज की, हालांकि 0.61 करोड़ रुपये का घाटा रहा। वहीं, 9 महीनों में कुल 32.41 करोड़ रुपये की बिक्री और 4.91 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया। पिछले वर्ष FY25 में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 220 प्रतिशत की उछाल के साथ 58.99 करोड़ रुपये की नेट सेल्स और मुनाफे में 93 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 7.06 करोड़ रुपये हासिल किए थे। भले ही तिमाही में घाटा दिखा हो, लेकिन विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा SEIL पर कायम है। दिसंबर 2025 में FII और DII ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। सितंबर 2025 में FII की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में बढ़कर 22.5 प्रतिशत हो गई। वहीं DII ने भी अपनी हिस्सेदारी को 0.2 प्रतिशत बढ़ाया। निवेशकों का यह भरोसा कंपनी की दीर्घकालीन संभावनाओं को दर्शाता है। SEIL का मार्केट कैप 2,842 करोड़ रुपये है और वर्तमान शेयर कीमत 172.70 रुपये है। हाल के प्रदर्शन को देखें तो पिछले एक हफ्ते में इसका शेयर 17 प्रतिशत उछला है और सालभर में 53 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। तीन साल में 185 प्रतिशत और पांच साल में यह कंपनी निवेशकों को 1187 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुकी है। इसने शिक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूती और निवेशकों का भरोसा साबित किया है। कंपनी की ताकत इसकी व्यापक शिक्षा सेवा और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान में निहित है। प्ले स्कूल से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट स्कूल तक स्कूल मैनेजमेंट सॉल्यूशंस देने वाली SEIL ने शिक्षा के हर स्तर पर गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दी है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर लर्निंग आउटपुट पर ध्यान देने से यह कंपनी न केवल छात्रों के लिए बल्कि निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनी हुई है। कुल मिलाकर, SEIL शिक्षा क्षेत्र का एक उभरता सितारा बन चुकी है। तिमाही में घाटा होने के बावजूद निवेशकों का भरोसा, लगातार बढ़ती एफआईआई और डीआईआई हिस्सेदारी और पिछले वर्षों में निवेशकों को दिए गए शानदार रिटर्न ने इसे सेक्टर में छुपे हुए मल्टीबैगर के रूप में साबित कर दिया है।

अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी

वाशिंगटन। गौतम अडानी समूह (Gautam Adani Group) की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) (Adani Enterprises Limited (AEL) ने मंगलवार को कहा कि एक अमेरिकी एजेंसी (American agency) ने प्रतिबंधित इकाइयों के साथ लेनदेन की गैर-आपराधिक जांच के तहत ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के कथित आयात को लेकर कंपनी से जानकारी मांगी है। क्या कहा अडानी एंटरप्राइजेज ने?अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को बताया कि उसे चार फरवरी को अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से सूचना का अनुरोध मिला है। यह अनुरोध जून, 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के संबंध में हुई स्वैच्छिक चर्चा के बाद आया है। उस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अडानी से जुड़ी कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए शिपिंग मार्गों का उपयोग करके भारत में ईरानी तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात किया था। अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा-कंपनी स्वेच्छा से विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के साथ सहयोग कर रही है और मांगी गई जानकारी देगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्राधिकरण से प्राप्त संचार में ‘किसी भी प्रकार के उल्लंघन या गैर-अनुपालन का कोई निष्कर्ष शामिल नहीं है। पिछले साल आई थी रिपोर्टपिछले साल जून में आई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी अभियोजक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अडानी समूह की कंपनियों ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से ईरानी एलपीजी का आयात किया था। अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि नीतिगत रूप से अडानी समूह अपने किसी भी बंदरगाह पर ईरान के किसी भी माल का प्रबंधन नहीं करता है। इसमें ईरान से आने वाली कोई भी खेप या ईरानी ध्वज के तहत चलने वाले जहाज शामिल हैं। समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी जहाज का प्रबंधन या सुविधा प्रदान नहीं करता है, जिनके मालिक ईरानी हों।

KYC-सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम… RBI कर रहा लोगों को जागरूक

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) मंगलवार को बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (Business Correspondents) और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। केवाईसी- सुरक्षित बैंकिंग (KYC- Secure Banking) की ओर पहला कदम विषय पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को जागरुक किया गया। लोगों को समझाया गया कि सुरक्षित बैंकिंग के लिए केवाईसी कितना जरूरी है। 13 फरवरी तक आयोजनआरबीआई द्वारा हर वर्ष जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस बार वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का आयोजन 13 फरवरी तक किया जा रहा है, जिसमें केवाईसी को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को केवाईसी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां दी जाएंगी। इसमें बताया जाएगा कि केवाईसी एक जरूरी नियम है, लेकिन इसे पूरा करना आसान है। इसके लिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, लोगों को सेंट्रल केवाईसी (सीकेवाईसी) की सुविधा के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, जिससे केवाईसी प्रक्रिया और आसान हो जाती है। बैंक खाते का गलत इस्तेमाल न करेंअभियान के दौरान लोगों को फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक से सावधान रहने के लिए भी जागरूक किया जाएगा, क्योंकि इन्हीं के चलते कई बार साइबर ठगी होती है और लोगों को आर्थिक नुकसान भी होता है। कई बार लालच में आकर लोग अपने बैंक खाते का गलत इस्तेमाल करने देते हैं, जिससे उन्हें गंभीर कानूनी और आर्थिक परेशानी हो सकती है। सप्ताह के दौरान आरबीआई, बैंकों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम और संपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इन गतिविधियों को पूरे साल जारी रखने की योजना है, जिससे कि लोगों पर इसका स्थायी असर पड़े। भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था की नींव है KYCआरबीआई की तरफ से कहा गया है कि केवाईसी केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था की नींव है। सभी संबंधित संस्थाओं से अपील की गई है कि वह इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। मंगलवार को कार्यशाला का उद्घाटन आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक रोहित पी दास, आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक चंदन कुमार ने किया। इस मौके पर नाबार्ड और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

UTS APP: रेल यात्री अलर्ट! 1 मार्च से जनरल टिकट वाला UTS ऐप होगा बंद, इस नए ऐप से करें बुकिंग

  UTS APP: नई दिल्ली ।अगर आप रोजाना लोकल ट्रेन या अनरिजर्व्ड टिकट के लिए UTS on Mobile ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों को जानकारी दी है कि UTS on Mobile ऐप को 1 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद किया जा रहा है। यानी इस तारीख के बाद UTS ऐप से न तो टिकट कटेगा और न ही कोई दूसरी सुविधा मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते RailOne ऐप पर शिफ्ट हो जाएं, ताकि उनकी रोजमर्रा की यात्रा में कोई परेशानी न आए। RailOne एक नया ऐप है, जिसमें टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। आज के समय में लाखों यात्री रोज़ाना मोबाइल से टिकट बुक करते हैं। ऐसे में UTS ऐप का बंद होना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रेलवे का कहना है कि RailOne ऐप यात्रियों को पहले से ज्यादा आसान, तेज और भरोसेमंद अनुभव देगा। अगर आपने अब तक RailOne ऐप डाउनलोड नहीं किया है, तो आगे चलकर आपको टिकट लेने में दिक्कत हो सकती है। क्यों बंद हो रहा UTS on Mobile ऐप भारतीय रेलवे लगातार अपनी डिजिटल सेवाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। UTS on Mobile ऐप पिछले कई सालों से अनरिजर्व्ड टिकट के लिए इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन अब रेलवे ने फैसला लिया है कि अलग-अलग ऐप की जगह एक ही ऑल-इन-वन ऐप दिया जाए। RailOne ऐप क्या है और इसमें क्या मिलेगा RailOne ऐप भारतीय रेलवे की नई डिजिटल पहल है। इस ऐप के जरिए यात्री एक ही जगह पर कई काम कर सकते हैं। RailOne ऐप से आप अनरिजर्व्ड टिकट ले सकते हैं, रिजर्व्ड टिकट से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं, यात्रा प्लान कर सकते हैं, ट्रेन से जुड़ी जरूरी सेवाएं पा सकते हैं। यानी अब टिकट बुकिंग के लिए अलग-अलग ऐप रखने की जरूरत नहीं होगी। कब से बंद होगा UTS ऐप रेलवे द्वारा जारी सूचना के मुताबिक UTS on Mobile ऐप 1 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद ऐप काम नहीं करेगा। टिकट बुकिंग के लिए केवल RailOne ऐप का ही इस्तेमाल करना होगा। इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि आखिरी समय का इंतजार न करें। ऐसे डाउनलोड करें RailOne ऐप RailOne ऐप को डाउनलोड करना बेहद आसान है। Android यूजर्स Google Play Store से ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। iPhone यूजर्स Apple App Store से RailOne ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं। डाउनलोड के बाद अपने मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें और जरूरी जानकारी भरकर ऐप का इस्तेमाल शुरू करें।

BSE SHARE NEWS: BSE के Q3 नतीजों ने मचाया धमाल शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड..

  BSE SHARE NEWS: नई दिल्ली । बीएसई के शेयरों ने तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद बाजार में जबरदस्त हलचल मचा दी है। एक्सपायरी डेट सितंबर 2025 में बदले जाने के बावजूद वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही बीएसई के लिए बेहद मजबूत साबित हुई है। शानदार ट्रेडिंग आंकड़ों और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के चलते कई ब्रोकरेज हाउस ने अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए हैं। इसी का असर रहा कि आज शुरुआती कारोबार में बीएसई के शेयरों में छह फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई का शेयर 6.81 फीसदी की उछाल के साथ 3188.40 रुपये के रिकॉर्ड हाई स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन इसके बावजूद शेयर मजबूत स्थिति में बना हुआ है। फिलहाल बीएसई का शेयर 6.25 फीसदी की तेजी के साथ 3171.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एनालिस्ट्स की राय भी बीएसई के पक्ष में दिखाई दे रही है। इसे कवर करने वाले 16 एनालिस्ट्स में से 12 ने शेयर पर खरीद की सलाह दी है जबकि चार ने होल्ड रेटिंग दी है। खास बात यह है कि किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सिफारिश नहीं की है। यूबीएस जेफरीज और नुवामा जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्मों ने बीएसई के टारगेट प्राइस में इजाफा किया है। दिसंबर 2025 की तिमाही बीएसई के लिए काफी दमदार रही है। तिमाही आधार पर कंपनी का टर्नओवर 30 फीसदी बढ़ा है। औसत दैनिक नोशनल टर्नओवर 28 फीसदी की वृद्धि के साथ 210 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर 29.7 फीसदी बढ़कर 19459 करोड़ रुपये हो गया। एक्सचेंज के ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली आय के चलते रेवेन्यू परफॉर्मेंस बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही। बीएसई की ऑपरेटिंग इनकम तिमाही आधार पर 16 फीसदी बढ़कर 1244 करोड़ रुपये हो गई है जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 13 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 778 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन बढ़ने से मार्जिन पर थोड़ा दबाव जरूर देखने को मिला है। रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन तिमाही आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 187 करोड़ रुपये हो गया जिससे मार्जिन 64.7 फीसदी से घटकर 62.5 फीसदी पर आ गया। ब्रोकरेज सेंटिमेंट की बात करें तो यूबीएस ने बीएसई पर बाय रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3650 रुपये कर दिया है। यूबीएस का कहना है कि ज्यादा लागत के चलते कंपनी अपने प्रॉफिट टारगेट से थोड़ी चूकी जरूर है लेकिन शेयर प्राइस में मजबूती रेवेन्यू ग्रोथ और प्रीमियम एवरेज डेली टर्नओवर की मजबूती इसे सपोर्ट कर रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसटीटी रेट बढ़ने का ऑप्शन वॉल्यूम पर असर पहले की आशंका से कम हो सकता है। जेफरीज ने बीएसई को होल्ड रेटिंग दी है लेकिन टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3050 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि 610 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट उम्मीद से बेहतर रहा है। हालांकि नए प्रोडक्ट्स को लेकर अनिश्चितता FY2029 के बाद ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकती है। नुवामा ने बीएसई पर बाय रेटिंग देते हुए टारगेट प्राइस 3760 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक एक्सपायरी डेट बदलने के बावजूद बीएसई ने इंडेक्स ऑप्शंस में मजबूत मार्केट शेयर हासिल किया है जिससे रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में तेज उछाल देखने को मिला है। कुल मिलाकर मजबूत नतीजों और सकारात्मक ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के चलते बीएसई का शेयर आने वाले समय में निवेशकों के रडार पर बना रह सकता है।

PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन EPFO अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक नया मोबाइल एप लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे PF की निकासी अब और तेज, आसान और डिजिटल होगी। इस एप में सदस्य सीधे अपने बैंक खाते से लिंक होकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस UPI के माध्यम से पैसा निकाल सकेंगे। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म परीक्षण चरण में है और तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, एप का संभावित लॉन्च मार्च–अप्रैल 2026 में किया जा सकता है। यह नया एप मौजूदा UMANG प्लेटफॉर्म से अलग होगा और सीधे सदस्य के बैंक खाते से जुड़ा रहेगा। एप के जरिए उपयोगकर्ता अपने पात्र EPF बैलेंस की जानकारी देख पाएंगे और UPI पिन का इस्तेमाल करके राशि सीधे अपने आधार-सीडेड बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके साथ ही पासबुक बैलेंस की जांच और क्लेम स्टेटस देखने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। EPFO के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में लगभग 100 डमी खातों के माध्यम से परीक्षण चल रहा है। परीक्षण के दौरान लेनदेन की गति, सुरक्षा और डेटा समन्वय की जांच की जा रही है। प्रारंभिक चरण में PF का एक हिस्सा सुरक्षित रहेगा, जबकि शेष पात्र राशि UPI के जरिए निकाली जा सकेगी। यह पहल EPFO 3.0 डिजिटल अपग्रेड कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मकसद क्लेम प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के लिए सहज बनाना है। वर्तमान में सदस्य UAN पोर्टल या UMANG एप के माध्यम से क्लेम फाइल करते हैं, जिसमें सत्यापन और स्वीकृति में समय लगता है। महामारी के दौरान शुरू की गई ऑटो-सेटलमेंट प्रणाली ने प्रक्रिया को तेज किया था, लेकिन प्रत्यक्ष त्वरित निकासी की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि UPI इंटीग्रेशन से PF निकासी की प्रक्रिया बैंकिंग सेवाओं के समान सुविधा प्रदान करेगी। सदस्य अब बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास जैसे जरूरी खर्चों के लिए कम समय में धन प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और सेवा वितरण की दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। EPFO के पास लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं और हर वर्ष करोड़ों क्लेम सेटल किए जाते हैं। संगठन के मुताबिक, नई मोबाइल एप सुविधा से सेवा की गुणवत्ता और उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा। हालांकि, EPFO के पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है, इसलिए निकासी प्रक्रिया सीधे बैंक खातों के माध्यम से ही पूरी की जाएगी।इस एप के आने से EPFO सदस्यों के लिए PF निकासी का समय घटेगा, प्रक्रिया पारदर्शी होगी और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने में तेजी आएगी। आने वाले महीनों में यह एप PF के डिजिटल अनुभव को पूरी तरह बदलने की संभावना रखता है।

भारत का वैश्विक बढ़त का सफर 6.4% GDP वृद्धि के साथ जारी नीति और बैंकिंग स्थिरता दे रही सहारा

नई दिल्ली।भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगले वित्त वर्ष 2026-27 की तस्वीर मूडीज की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने अनुमान जताया है कि भारत का GDP 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है और यह वृद्धि दर G20 देशों में सबसे अधिक रहने की संभावना है रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत नीति आधारित प्रोत्साहन और बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता भारत की आर्थिक वृद्धि को सहारा देंगी मूडीज का यह अनुमान सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के आकलनों से थोड़ा कम है आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 से 7.4 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान रखा गया था वहीं RBI ने हाल ही में अपनी नीतिगत समीक्षा में करीब सात प्रतिशत वृद्धि की संभावना व्यक्त की थी इसके बावजूद वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत और अग्रणी मानी जा रही है रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कर ढांचे में किए गए हालिया बदलाव और उपभोक्ताओं की आय में संभावित वृद्धि से बाजार में मांग बढ़ेगी GST नियमों में संशोधन और आयकर में राहत से लोगों की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है इससे घरेलू खपत को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियां गतिशील बनी रहेंगी बैंकिंग क्षेत्र के बारे में मूडीज ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में बैंकों की ऋण वृद्धि दर 11 से 13 प्रतिशत के बीच रहेगी साथ ही गैर निष्पादित परिसंपत्तियों का स्तर 2 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में नियंत्रित रह सकता है हालांकि छोटे उद्योग और MSME क्षेत्र पर कुछ दबाव की संभावना जताई गई है लेकिन बैंकों की पूंजी क्षमता इस जोखिम को संभालने में सक्षम मानी गई है जिससे वित्तीय प्रणाली स्थिर बनी रहेगी रिपोर्ट में भारत अमेरिका व्यापार समझौते को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है फरवरी 2026 में हुए इस समझौते से निर्यात क्षेत्र में नई गति आने की संभावना है इससे छोटे उद्यमों को राहत मिलेगी और निवेश वातावरण बेहतर बनेगा जिससे आर्थिक वृद्धि में स्थिरता आएगी मूडीज ने यह भी संकेत दिया है कि अगर महंगाई नियंत्रित बनी रहती है तो RBI भविष्य में भी ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है वर्ष 2025 में केंद्रीय बैंक द्वारा की गई दर कटौती से वित्तीय परिस्थितियां पहले ही सहायक बनी हुई हैं कम ब्याज दरें निवेश और उपभोग दोनों को बढ़ावा दे सकती हैं जिससे आर्थिक वृद्धि की गति और मजबूत होगी कुल मिलाकर मूडीज की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है घरेलू खपत स्थिर बैंकिंग प्रणाली और नीतिगत प्रोत्साहन अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दिशा में सहारा बनेंगे भारत G20 में सबसे तेज़ विकास दर वाला देश बनकर उभर सकता है जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा और अर्थव्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ेगी

एआई कंपनी का बड़ा आईपीओ फ्रैक्टल एनालिटिक्स रिटेल और एनआईआई निवेशकों के लिए समीक्षा

नई दिल्ली।एआई सेक्टर का नया बड़ा आईपीओ फ्रैक्टल एनालिटिक्स अब खुल चुका है और निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। फ्रैक्टल एनालिटिक्स का आईपीओ सोमवार 9 फरवरी 2026 को खुला और ये बुधवार 11 फरवरी तक जारी रहेगा। यह कंपनी भारत की बड़ी एआई और डेटा एनालिटिक्स फर्म है जो कंपनियों को डेटा से स्मार्ट और बेहतर फैसले लेने में मदद करती है। पहले दिन आईपीओ को कुल 9 फीसदी सब्सक्रिप्शन मिला जिसमें रिटेल निवेशकों ने 35 फीसदी हिस्सा भरा जबकि एनआईआई कैटेगरी में केवल 7 फीसदी हुआ और क्यूआईबी ने अभी तक कोई बोली नहीं लगाई थी। दूसरे दिन की शुरुआत में सब्सक्रिप्शन थोड़ा बढ़कर 11 फीसदी तक पहुंचा लेकिन कुल मिलाकर रिस्पॉन्स कमजोर ही रहा और बाजार में ज्यादा उत्साह नहीं दिखा। आईपीओ का प्राइस बैंड 857 से 900 रुपये प्रति शेयर है और लॉट साइज 16 शेयर का है जिसका मतलब है कि ऊपरी प्राइस पर कम से कम 14400 रुपये निवेश करने होंगे। कंपनी कुल 2833.90 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है जिसमें फ्रेश इश्यू से 1023.50 करोड़ और ऑफर फॉर सेल से 1810.40 करोड़ रुपये शामिल हैं। शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर 16 फरवरी को लिस्ट होंगे और अलॉटमेंट की घोषणा 12 फरवरी को होने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट प्रीमियम की बात करें तो आज जीएमपी केवल 8 रुपये है जिसका मतलब है कि ऊपरी प्राइस 900 रुपये पर शेयर लगभग 908 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे हैं जो सिर्फ 0.89 फीसदी प्रीमियम दर्शाता है। पहले दिन से ही जीएमपी कमजोर है और लिस्टिंग पर ज्यादा गेन दिखने की संभावना कम है। फ्रैक्टल एनालिटिक्स भारत की लीडिंग प्योर-प्ले एंटरप्राइज डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी है जो बड़ी कंपनियों को डेटा से स्मार्ट फैसले लेने में मदद करती है। कंपनी के पास मजबूत टेक्निकल स्किल्स और डोमेन एक्सपर्टीज हैं। फाइनेंशियल आंकड़े देखें तो FY23 से FY25 तक रेवेन्यू में 18 फीसदी का CAGR रहा। FY23 में कंपनी को 116 करोड़ का नुकसान हुआ था लेकिन FY24 में 73 करोड़ प्रॉफिट और FY25 में 350 करोड़ प्रॉफिट दर्ज किया गया जिसमें मार्जिन 12.7 फीसदी रहा। 6MFY26 में 200 करोड़ प्रॉफिट और 12.8 फीसदी मार्जिन देखा गया। ऑपरेटिंग कैश फ्लो में सुधार हो रहा है और प्रॉफिटेबिलिटी बेहतर हो रही है। ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार बीपी इक्विटीज ने आईपीओ को सब्सक्राइब रेटिंग दी है। ऊपरी प्राइस 900 रुपये पर FY26 एनुअलाइज्ड अर्निंग्स पर P/E 110 गुना है लेकिन एआई मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और कंपनी की पोजिशनिंग मजबूत है इसलिए मीडियम से लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है। जीईपीएल कैपिटल ने FY25 अर्निंग्स पर P/E 79 गुना बताया और कंपनी को भारत की लीडिंग प्योर-प्ले एआई फर्म मानते हुए सब्सक्राइब करने की सलाह दी है क्योंकि क्लाइंट बेस मजबूत है फाइनेंशियल परफॉर्मेंस सुधर रही है और टेक्निकल कैपेबिलिटीज भी मजबूती से मौजूद हैं। कुल मिलाकर फ्रैक्टल एनालिटिक्स का आईपीओ एआई सेक्टर में लॉन्ग टर्म निवेश का अवसर प्रस्तुत करता है लेकिन पहले दिन कमजोर सब्सक्रिप्शन और म्यूटेड जीएमपी से शॉर्ट टर्म गेन कम नजर आता है। यदि आप लॉन्ग टर्म में एआई कंपनी में निवेश करने का सोच रहे हैं तो इस आईपीओ को सब्सक्राइब किया जा सकता है लेकिन पूरी रिसर्च के बाद ही निर्णय लें और अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल साइट या अपने ब्रोकर से संपर्क करें।

शेयर बाजार गिरा लेकिन निवेशकों का भरोसा बना, जनवरी में खुले 36.2 लाख नए डीमैट खाते

नई दिल्ली। जनवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया। एनएसडीएल और सीडीएसएल के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में कुल 36.2 लाख नए डीमैट खाते खोले गए। यह पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा आंकड़ा है और सितंबर 2024 के बाद का सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह लगातार दूसरा महीना है जब नए डीमैट खातों की संख्या 30 लाख से अधिक रही, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बाजार में उनकी दिलचस्पी को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान प्रमुख शेयर सूचकांक कमजोर रहे। सेंसेक्स में लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई जबकि निफ्टी करीब 3.1 प्रतिशत नीचे आया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते 2025 की शुरुआत बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रही। हालांकि इस अस्थिरता ने खुदरा निवेशकों को रोक नहीं पाया। विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार की हालिया गिरावट ने कई कंपनियों के शेयरों को सस्ते स्तर पर ला दिया। लंबे समय तक निवेश करने वाले निवेशक इसे अवसर मानते हैं। इस गिरावट का फायदा उठाकर कई खुदरा निवेशकों ने जनवरी में सस्ते शेयरों में निवेश किया। WealthMills Securities के इक्विटी स्ट्रैटेजी निदेशक क्रांति बाथिनी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और आसान खाता खोलने की प्रक्रिया ने नए निवेशकों को बाजार से जोड़ने में मदद की है। यदि पिछले महीनों के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है। सितंबर 2024 में नए डीमैट खाते 4.55 मिलियन थे, इसके बाद अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच यह क्रमशः 3.45 मिलियन, 3.15 मिलियन और 3.26 मिलियन पर आया। जनवरी 2025 में गिरावट तेज हुई और नए खाते घटकर 2.83 मिलियन हुए। फरवरी और मार्च में क्रमशः 2.26 मिलियन और 1.84 मिलियन नए खाते खुले। यह संकेत देता है कि उस समय निवेशकों का भरोसा कमजोर था। हालांकि अप्रैल 2025 से धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला। अप्रैल में 2.22 मिलियन, मई में 2.17 मिलियन, जून में 2.53 मिलियन और जुलाई में 2.98 मिलियन नए खाते खुले। अगस्त और सितंबर में यह आंकड़ा थोड़ा नरम रहा। अक्टूबर से दिसंबर तक फिर तेजी देखने को मिली और जनवरी 2026 में यह उछाल 3.62 मिलियन तक पहुंच गया। इस उछाल ने साबित कर दिया कि भारतीय खुदरा निवेशक अब पहले से ज्यादा जागरूक और साहसी हो चुके हैं। वे बाजार में गिरावट को डर के बजाय अवसर मान रहे हैं। डिजिटलाइजेशन, आसान खाता खोलने की प्रक्रिया और ऑनलाइन निवेश के विकल्प ने निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है। बाजार की अस्थिरता के बावजूद निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है, और यह संकेत देता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि के निवेशक लगातार बढ़ रहे हैं।

Income Tax व्यवस्था में होने जा रहा सबसे बड़ा बदलाव… एक अप्रैल से लागू होंगे नए नियम

नई दिल्ली। एक अप्रैल से आयकर व्यवस्था (Income Tax Regime) में सबसे अहम बदलाव होने जा रहा है। इनकम टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया (Income Tax Return Process) को सरल बनाने के लिए फॉर्म-16 को भी पहले की तुलना में आधे पेजों को किया जा रहा है। इस बदलाव के तहत आयकर के नियम 511 से घटकर 333 रह जाएंगे। जबकि कर फॉर्म की संख्या 399 से घटकर 190 हो जाएगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की तरफ कहा गया है कि आयकर नियम-2026 और फॉर्मों को मार्च के पहले सप्ताह तक अधिसूचित कर दिया जाएगा, लेकिन उससे पहले आम लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं। एक अप्रैल से लागू होंगे: नए नियमआयकर अधिनियम 2025 के अनुसार बनाए गए हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे। नई व्यवस्था के तहत आईटीआर फॉर्म पहले से भरा होगा। बस फॉर्म भरते वक्त करदाता को देखना होगा कि कहीं कोई संशोधन तो नहीं करना है। अगर करदाता को लगता है कि फॉर्म में दी जा रही जानकारी अधूरी है या फिर कोई बदलाव की जरूरत है तो उसमें संशोधन करके ऑनलाइन सब्मिट कर सकेगा। सूत्रों के अनुसार, नए ढांचे में नौकरी से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ से जुड़े बदलाव पुराने और नए यानी दोनों कर व्यवस्थाओं में लागू होंगे। इससे सभी तरह के करदाताओं को राहत मिलेगी। ड्राफ्ट नियम और फॉर्म 15 दिनों तक (22 फरवरी) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान आम लोग और विशेषज्ञ अपनी राय और सुझाव दे सकते हैं। प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश : विभाग का कहना है कि इससे नियम बनाने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नए नियमों की भाषा को आसान बनाया गया है। समझ बढ़ाने के लिए कई जगह फॉर्मूले और टेबल जोड़े गए हैं और पुराने नियमों में मौजूद बेवजह की दोहराव वाली बातों को हटाया गया है। कर फॉर्म को भी सरल बनाया गया है, जिससे करदाताओं पर बोझ कम हो। सभी फॉर्म में एक जैसी जानकारी को मानक बनाया गया है, जिससे बार-बार जानकारी भरने की जरूरत न पड़े। नए स्मार्ट फॉर्म में ऑटोमैटिक मिलान और भरी हुई जानकारी की सुविधा होगी। करदाता संख्या बढ़ाना उद्देश्य : सीबीडीटी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नए कानून और नियमों का मुख्य उद्देश्य कर भरने वाले लोगों की बढ़ाना और कर भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। फिलहाल देश में करीब 9 करोड़ लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, जबकि करीब 12 करोड़ लोग अलग-अलग तरीकों से कर देते हैं। इससे पता चलता है कि कई लोग अभी भी नियमित रूप से रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं। इसलिए हमारा लक्ष्य यह है कि धीरे-धीरे ज्यादा लोगों को रिटर्न फाइलिंग से जोड़ा जाए। नए व्यवस्था में फॉर्म को इसी लिए आसान बनाया गया है। शून्य टीडीएस और सैलरी वाला टीडीएस फार्म अलग : टीडीएस से जुड़े कई फॉर्म्स की नंबरिंग भी बदली गई है। अब कम या शून्य टीडीएस के लिए आवेदन फॉर्म 128 में किया जाएगा, जबकि सैलरी से जुड़ा टीडीएस सर्टिफिकेट अब फॉर्म 130 कहलाएगा। इसके साथ ही, टीडीएस रिटर्न के पुराने फॉर्म 24क्यू, 26क्यू और 27क्यू को भी नया नंबर दिया गया है। सालाना कर विवरण यानी 26एएस का नाम अब फार्म 168 : सालाना टैक्स स्टेटमेंट, जिसे आमतौर पर फॉर्म 26एएस कहा जाता है, अब फॉर्म 168 के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह, वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने वाला फॉर्म 61ए अब फॉर्म 165 हो जाएगा। इसके साथ ही विदेश भेजे जाने वाले पैसों से जुड़े फॉर्म्स में भी बदलाव किया गया है। ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म को जोड़ा गयाकई ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म्स को एक साथ जोड़ा गया है या उनका नंबर बदल दिया गया है। अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, जो पहले 3सीए, 3सीबी और 3सीडी फॉर्म में भरी जाती थी, वह अब एक ही फॉर्म 26 में दी जाएगी। ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट अब फॉर्म 3सीईबी की जगह फॉर्म 48 में दी जाएगी। वहीं, मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) से जुड़ा सर्टिफिकेट अब फॉर्म 29बी की जगह फॉर्म 66 में जमा किया जाएगा। टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के लिए फॉर्म 10एफए की जगह फॉर्म 42 का इस्तेमाल करना होगा। ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारीइस ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक इस्तेमाल हो रहे पुराने फॉर्म नंबर कई दशकों में बदलते-बदलते काफी जटिल हो गए थे। नई नंबरिंग से टैक्स फाइल करते समय होने वाली उलझन कम होगी। नई व्यवस्था से टैक्स से जुड़ी जानकारी को डिजिटल सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। इससे रीयल-टाइम डेटा मिलान और जांच में मदद मिलेगी। हालांकि, इसके कारण नियोक्ताओं, टैक्स सलाहकारों, रजिस्ट्रार और कंपनियों को अपने सिस्टम में जल्दी बदलाव करना होगा। एचआरए की श्रेणी-1 में बेंगलुरु समेत तीन और शहरमसौदा नियम में आवास किराया भत्ते का दावा करने के मकसद से बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को शामिल करने के लिए श्रेणी-1 महानगरों की सूची का विस्तार किया गया है। इस सूची में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई शामिल हैं। मसौदे में क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए कर विभाग के साथ जानकारी साझा करना अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है। इसमें केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के स्वीकृत तरीके के तौर पर भी शामिल किया गया है। मसौदा नियमों में क्रिप्टो-संपत्ति सेवा प्रदाताओं के लिए विस्तृत रिपोर्टिंग और जांच-पड़ताल की जिम्मेदारियों का भी प्रस्ताव है।