पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

नई दिल्ली। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों पर आने वाले समय में असर देखने को मिल सकता है। वजह है पाम ऑयल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में आई दिक्कतें, जो अब भारतीय बाजार तक पहुंच चुकी हैं। यह वही कच्चा माल है जिसका इस्तेमाल न सिर्फ खाने के तेल में बल्कि साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बिस्किट और कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई में बाधा, बायोडीजल की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसकी कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो बड़े पैमाने पर FMCG उत्पाद बनाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बच सकती हैं, लेकिन इसका असर प्रोडक्ट के साइज या पैकेजिंग पर दिख सकता है। यानी साबुन का साइज छोटा हो सकता है या शैंपू की मात्रा पहले से कम हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ेगा। HUL और गोदरेज जैसी बड़ी FMCG कंपनियों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इनका प्रोडक्शन काफी हद तक पाम ऑयल पर निर्भर करता है। कच्चे माल की बढ़ती लागत से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बन सकता है, जिससे उनकी मुनाफे की स्थिति प्रभावित हो सकती है। पाम ऑयल का इस्तेमाल सिर्फ खाने के तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक उपयोग के कई उत्पादों का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमतों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है। फिलहाल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रणनीति के तहत धीरे-धीरे बदलाव करने की योजना बना सकती हैं ताकि अचानक कीमत बढ़ाने से बचा जा सके। लेकिन अगर पाम ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर बाजार में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।
पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल

नई दिल्ली। देश में 7 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों IOC, BPCL और HPCL ने आज भी ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। एक्साइज ड्यूटी में पहले हुई कटौती का असर अब भी दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, पटना, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतें पिछले दिनों की तरह ही बनी हुई हैं। खास बात यह है कि कई बड़े शहरों में पेट्रोल अभी भी ₹100 के पार बना हुआ है, जबकि डीजल अधिकतर जगहों पर ₹100 से नीचे है। वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार से निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। स्पॉट गोल्ड करीब 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 4700 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं चांदी में भी तेज उछाल देखने को मिला है, जहां यह 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 77 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखी। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नरमी और संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। इसके साथ ही डॉलर के कमजोर होने से सोने की मांग बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आई है। जब डॉलर कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो जाता है और निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार में एक अलग प्रभाव डाला है। इससे महंगाई के दबाव में थोड़ी कमी आई है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने और चांदी की ओर बढ़ा है। फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी राजनीतिक या आर्थिक बदलाव का सीधा असर सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

नई दिल्ली। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूत रुख के साथ हुई और पूरे सत्र में सकारात्मक माहौल बना रहा। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों के बीच खरीदारी का रुझान बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई और बाजार ने मजबूती के साथ अपनी दिशा तय की। बाजार में सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर का देखने को मिला, जहां लगातार खरीदारी ने पूरे बाजार को सहारा दिया। बैंकिंग शेयरों में आई इस तेजी ने न केवल प्रमुख सूचकांकों को ऊपर उठाया, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत किया। वित्तीय सेक्टर की मजबूती के कारण बाजार में स्थिरता बनी रही और तेजी का रुझान दिनभर कायम रहा। इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। छोटे और मध्यम कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशक केवल बड़े स्टॉक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक बाजार में भी अवसर तलाश रहे हैं। ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर्स में भी सकारात्मक रुझान बना रहा, जिससे बाजार की गति और मजबूत हुई। हालांकि कुछ सेक्टर्स में हल्का दबाव भी देखने को मिला, जहां एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन इन कमजोरियों का असर पूरे बाजार पर ज्यादा नहीं पड़ा और कुल मिलाकर बाजार हरे निशान में ही बना रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का दबाव मजबूत बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में सकारात्मक माहौल रहा, जिसका लाभ भारतीय बाजार को मिला। अंतरराष्ट्रीय संकेतों में सुधार और कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के चलते निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना बढ़ी, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा, जिससे घरेलू निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ। निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिली, जबकि घरेलू निवेशकों ने बाजार में खरीदारी जारी रखी। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलन और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार में गिरावट नहीं आई और तेजी का रुख बना रहा। कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार इस समय सकारात्मक चरण में दिखाई दे रहा है, जहां वैश्विक संकेत, मजबूत सेक्टोरल प्रदर्शन और घरेलू निवेशकों की सक्रियता मिलकर बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल रुझान मजबूत और स्थिर बना हुआ है।
INDIAN ECONOMIC STABILITY: आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

INDIAN ECONOMIC STABILITY: नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक नया वैश्विक आकलन सामने आया है, जिसमें देश को उभरते बाजारों में सबसे मजबूत स्थिति में रखा गया है। यह आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद अपनी स्थिरता और विकास क्षमता को बनाए रखा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे तीन प्रमुख आधार हैं। इनमें विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर और संतुलित आर्थिक नीतियां तथा मजबूत घरेलू पूंजी बाजार शामिल हैं। ये तीनों तत्व मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार कई चुनौतियों से गुजरती रही है। महामारी का प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी और बैंकिंग क्षेत्र में आए संकट जैसी परिस्थितियों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इन कठिन हालातों के बीच भारत ने अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया है। इस मूल्यांकन में यह भी सामने आया है कि भारत ने फंडिंग लागत में अचानक वृद्धि या अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुंच में किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं किया, जो कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई। देश की मौद्रिक नीति को भी स्पष्ट और स्थिर बताया गया है, जिससे महंगाई की उम्मीदें नियंत्रित रहती हैं और निवेशकों का भरोसा बना रहता है। साथ ही जरूरत के अनुसार मुद्रा विनिमय दर में लचीलापन बनाए रखना भी भारत की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है। Gold Price Surge: वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी.. आकलन में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहेगा। इसका कारण यह है कि देश के पास पहले से मौजूद आर्थिक सुरक्षा ढांचा किसी भी बाहरी झटके को संभालने में सक्षम है। भारत की तुलना कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से की गई, जहां यह पाया गया कि विभिन्न देशों ने महामारी के बाद आर्थिक दबावों को अलग-अलग स्तर पर झेला है, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाई है।
Gold Price Surge: वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

Gold Price Surge: नई दिल्ली। वैश्विक वित्तीय बाजार में बुधवार को एक अहम बदलाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। शुरुआती कारोबार से ही दोनों धातुएं मजबूत रुख के साथ आगे बढ़ती नजर आईं और दिन चढ़ने के साथ इनमें लगातार तेजी बनी रही। बाजार में सोने की कीमतों ने मजबूत शुरुआत की और कुछ ही समय में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने अपने पिछले स्तर को पार करते हुए नया उच्च स्तर भी छुआ। कीमतों में यह बढ़त निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और वैश्विक संकेतों में बदलाव का परिणाम मानी जा रही है। इसी तरह चांदी के बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया। चांदी ने भी शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई और कुछ ही समय में इसमें तेज उछाल दर्ज हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने अपने पिछले रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर मजबूत स्थिति बनाई, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है। ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोना और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा लाभ कीमती धातुओं को मिल रहा है। इस पूरी स्थिति के पीछे मुख्य कारण डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने पर आमतौर पर कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि निवेशक डॉलर से हटकर उन संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं, जो आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित मानी जाती हैं। घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ तौर पर देखा गया है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मजबूती की ओर ही बना रहा। MP Weather Alert: डबल सिस्टम का असर, 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कहीं तूफान तो कहीं झुलसाती गर्मी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर इंडेक्स पर दबाव बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी में मजबूती का माहौल बना रह सकता है। हालांकि बाजार की प्रकृति को देखते हुए इसमें अचानक बदलाव की संभावना भी बनी रहती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल बाजार का रुख यह संकेत दे रहा है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, और सोना-चांदी में तेजी या मंदी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।
GOLD SILVER PRICE TODAY: सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?

GOLD SILVER PRICE TODAY: नई दिल्ली। 6 मई को सर्राफा बाजार में फिर तेज उछाल देखने को मिला और सोना-चांदी के दाम नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹3000 की जोरदार बढ़त के साथ ₹1.51 लाख तक पहुंच गया। इससे पहले यह ₹1.48 लाख पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी ने भी बड़ी छलांग लगाते हुए ₹6000 की तेजी के साथ ₹2.46 लाख प्रति किलो का स्तर छू लिया, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। अगर पूरे साल के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2026 में सोना अब तक ₹18 हजार महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को जहां सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹1.51 लाख तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹16 हजार की बढ़त दर्ज की है। साल की शुरुआत में ₹2.30 लाख प्रति किलो रही चांदी अब ₹2.46 लाख के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, इससे पहले जनवरी में सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छू चुकी है, जो बाजार की जबरदस्त अस्थिरता को दर्शाता है। वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी.. विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-चांदी में यह तेजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी जितनी तेज होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है। अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम है। सबसे पहले, हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता की गारंटी मिलती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत को अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से कीमतें अलग होती हैं। MP Weather Alert: डबल सिस्टम का असर, 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कहीं तूफान तो कहीं झुलसाती गर्मी वहीं चांदी खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह तेजी जहां निवेशकों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदारों के लिए चिंता भी बढ़ा रही है। ऐसे में बाजार की चाल समझकर ही निवेश या खरीदारी करना समझदारी होगी।
L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से चर्चा में रही इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) ने अपने तिमाही और सालाना नतीजों से निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने न सिर्फ मुनाफे में जबरदस्त बढ़त दर्ज की, बल्कि हर शेयर पर ₹38 के भारी-भरकम डिविडेंड का ऐलान भी किया है। कंपनी की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, L&T का ग्रुप ऑर्डर इनफ्लो 22% की बढ़त के साथ ₹4.35 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का साफ संकेत देता है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित राजस्व ₹82,762 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11% ज्यादा है। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से ₹43,747 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल राजस्व का 53% हिस्सा है। पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो कंपनी का Recurring PAT ₹17,238 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 18% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं, Consolidated PAT ₹16,084 करोड़ रहा। इसमें ₹1,155 करोड़ का एक बार का प्रावधान (Exceptional Item) शामिल है, जो नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया गया है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी डिविडेंड को लेकर आई है। L&T ने ₹2 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹38 का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के ₹34 प्रति शेयर से ज्यादा है। कंपनी ने इसके लिए 22 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में L&T के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद डिविडेंड का भुगतान 10 जून 2026 तक किया जा सकता है। कुल मिलाकर, मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ता मुनाफा और आकर्षक डिविडेंड—तीनों फैक्टर L&T को निवेशकों के लिए एक बार फिर चर्चा में ले आए हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में कंपनी की पकड़ आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।
LPG Supply Update: ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची, देशभर में गैस सप्लाई पूरी तरह सामान्य

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और खासकर पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश के किसी भी हिस्से में गैस की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। रविवार को घरेलू गैस की ऑनलाइन बुकिंग 99 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो डिजिटल सिस्टम की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। खास बात यह है कि किसी भी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर गैस खत्म होने यानी ‘ड्राई-आउट’ की स्थिति सामने नहीं आई। डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता, कालाबाजारी पर लगामसरकार के अनुसार, अब एलपीजी डिलीवरी में ऑथेंटिकेशन कोड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। करीब 94 प्रतिशत डिलीवरी उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए कोड के जरिए हो रही है। इससे गैस की कालाबाजारी और गलत वितरण (डायवर्जन) पर काफी हद तक रोक लगी है। छोटे सिलेंडर की बढ़ी मांग, लाखों में बिक्री1 अप्रैल से अब तक 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडरों की 23.58 लाख से ज्यादा बिक्री हो चुकी है। ये सिलेंडर खासकर प्रवासी मजदूरों और अस्थायी उपयोग के लिए काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। PNG कनेक्शन और नए उपभोक्ताओं में तेजीसरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देते हुए अब तक करीब 6.12 लाख कनेक्शनों में सप्लाई शुरू कर दी है, जबकि 2.67 लाख नए कनेक्शनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। मार्च से अब तक 6.79 लाख नए उपभोक्ताओं ने गैस कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, स्टॉक भरपूरअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कालाबाजारी पर सख्ती: छापेमारी और कार्रवाई जारीएलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए देशभर में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। रविवार को 1,570 से अधिक छापेमारी की गई, जिसमें 349 डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर जुर्माना लगाया गया और 74 को निलंबित कर दिया गया। सरकार की अपील: अफवाहों से बचें, घबराकर खरीदारी न करेंसरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी न करें। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे गैस बुकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।
भारत के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त तेजी, 2026 की पहली तिमाही में निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंचा

नई दिल्ली। भारत का रियल एस्टेट बाजार 2026 की शुरुआत में मजबूत प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ता नजर आया है। पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इस सेक्टर में निवेश गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जनवरी से मार्च के बीच कुल रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन वैल्यू 1.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार में स्थिरता और दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। इस दौरान एक अहम बदलाव बड़े आकार की संपत्तियों के अधिग्रहण में देखने को मिला। निवेशकों ने छोटे सौदों की बजाय बड़े और आय-सृजन करने वाले प्रोजेक्ट्स में ज्यादा रुचि दिखाई। इसी का परिणाम रहा कि बड़े सौदों का कुल मूल्य बढ़कर 1.03 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले समय की तुलना में काफी ज्यादा है। यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक अब सुरक्षित और नियमित रिटर्न देने वाली संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे जोखिम कम हो और लाभ स्थिर बना रहे। पहली तिमाही के बाद भी यह गति धीमी नहीं पड़ी, बल्कि आगे के महीनों में और तेज होती दिखाई दी। बड़े सौदों का कुल मूल्य बढ़कर 1.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि निवेशक दीर्घकालिक रणनीति के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं, जो भविष्य में स्थिर आय प्रदान कर सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल अल्पकालिक वृद्धि नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट बाजार में एक गहरे बदलाव का संकेत है। निवेश का झुकाव अब उन संपत्तियों की ओर बढ़ रहा है, जिनमें नियमित आय की संभावना हो और जो आर्थिक उतार-चढ़ाव के दौरान भी स्थिर प्रदर्शन कर सकें। खासतौर पर ऑफिस स्पेस जैसे क्षेत्रों में निवेश की निरंतरता इस बात को मजबूत करती है कि इस सेगमेंट में अभी भी मजबूत आधार मौजूद है। पिछले दो वर्षों में भी रियल एस्टेट सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया था। 2024 और 2025 के दौरान इस क्षेत्र में संस्थागत निवेश का स्तर काफी ऊंचा रहा और कुल मिलाकर 19.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। यह उपलब्धि इस सेक्टर के लिए एक नई दिशा तय करने वाली साबित हुई, जिससे बाजार में दीर्घकालिक विश्वास और मजबूत हुआ। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि घरेलू निवेशकों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। 2025 में पहली बार लंबे समय बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में प्रमुख हिस्सेदारी हासिल की। पहले जहां विदेशी निवेशकों का दबदबा था, वहीं अब घरेलू पूंजी इस क्षेत्र को गति दे रही है। 2026 की पहली तिमाही में कुल निवेश का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निवेशकों के पास रहा, जो इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बावजूद भारत का रियल एस्टेट बाजार लचीलापन दिखा रहा है। विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को संतुलित बनाए रखा है। यह संतुलन आने वाले समय में इस सेक्टर को और अधिक स्थिर और आकर्षक बना सकता है। कुल मिलाकर, 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत का रियल एस्टेट बाजार एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। लगातार बढ़ता निवेश, बड़े सौदों की ओर झुकाव और घरेलू भागीदारी इस क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करते हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के हवाई यातायात में अप्रैल में बड़ी गिरावट, यात्रियों की संख्या घटी

नई दिल्ली।अप्रैल के महीने में भारत के हवाई यातायात में आई गिरावट ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वैश्विक परिस्थितियों का असर देश के परिवहन क्षेत्र पर कितना गहरा पड़ सकता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के मुकाबले अप्रैल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणियों में यात्रियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट सामान्य परिस्थितियों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और अस्थिर हालात को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सीधे प्रभावित किया है। घरेलू उड़ानों में यात्रियों की संख्या अप्रैल में लगभग 140.8 लाख रही, जो महीने-दर-महीने और साल-दर-साल आधार पर करीब 4 प्रतिशत कम है। आमतौर पर इस समय यात्रा की मांग स्थिर या बढ़ती हुई देखी जाती है, लेकिन इस बार वैश्विक परिस्थितियों ने घरेलू बाजार को भी प्रभावित किया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में गिरावट और अधिक गंभीर रही, जहां यात्रियों की संख्या घटकर लगभग 28.3 लाख रह गई। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है, जो बताता है कि विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों पर इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा। मध्य पूर्व क्षेत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण एयर ट्रांजिट मार्ग है, जहां से बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित होती हैं। इस क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों और एयरस्पेस के अस्थायी बंद होने से कई उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित करना पड़ा। इससे यात्रियों की आवाजाही में बाधा आई और एयरलाइंस के संचालन पर भी असर पड़ा। कई यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ीं, जबकि कुछ को लंबे रूट्स के जरिए सफर करना पड़ा। हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती नजर आ रही है। कई देशों ने अपने एयरस्पेस को फिर से खोलना शुरू कर दिया है और उड़ानों का संचालन बहाल किया जा रहा है। इसके साथ ही भारत और अन्य देशों की एयरलाइंस ने उड़ानों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों की संख्या में सुधार की उम्मीद की जा रही है। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में पूरी तरह स्थिरता नहीं आती, तब तक एयर ट्रैफिक में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यह स्थिति एयरलाइन कंपनियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि उन्हें लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी सेवाओं में बदलाव करना पड़ रहा है। पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज के दौर में हवाई यात्रा केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि वैश्विक हालात से जुड़ा एक संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। यात्रियों के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी यात्रा योजनाओं में लचीलापन रखें और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। आने वाले महीनों में हवाई यातायात की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता कितनी जल्दी लौटती है।