आयकर स्लैब से कम है सालाना कमाई तो भी भरें ITR… इसके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली। एक अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष (New Financial Year) शुरू हो चुका है और टैक्सपेयर (Taxpayer.) आयकर रिटर्न (Income Tax Return.-ITR) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन, बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनकी सालाना इनकम कमाई टैक्स स्लैब (Annual Income Tax Slab.) से कम है या कटौती के बाद उनकी टैक्स की देनदारी शून्य हो जाती है। ऐसे में उन्हें लगता है कि उन्हें अब आईटीआर दाखिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसे मामलों में ‘शून्य आईटीआर’ दाखिल की जा सकती है, जिसके अपने कई फायदे हैं। सभी के लिए आईटीआर भरना जरूरीइनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक, उन सभी लोगों को आईटीआर जमा करना जरूरी है, जिनकी कुल इनकम मूल टैक्स छूट की सीमा से अधिक है। कई लोगों को गलतफहमी रहती है कि यदि उनकी सालाना आय ओल्ड टैक्स रिजीम में पांच लाख रुपये और नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये से कम है तो ITR भरना जरूरी नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस सीमा से कम आय होने पर टैक्स इसलिए नहीं देना पड़ता क्योंकि धारा 87ए के तहत ओल्ड टैक्स रिजीम में 12,500 रुपये और नए टैक्स रिजीम में 60 हजार रुपये तक की रिबेट मिलती है, लेकिन पुरानी व्यवस्था में छूट की वास्तविक सीमा अब सिर्फ 2.5 लाख रुपये है। वहीं, नई कर व्यवस्था में यह सीमा चार लाख रुपये है। अगर इससे एक रुपये भी अधिक आय है तो टैक्सपेयर के लिए आईटीआर दाखिल करना जरूरी है, भले ही उनका टैक्स शून्य हो। इसे जीरो आईटीआर भी कहते हैं। इन मामलों में जरूर भरें आईटीआर1. भारी-भरकम बिजली बिल का भुगताननियमों के अनुसार, अगर टैक्सपेयर ने एक वित्त वर्ष के दौरान कुल मिलाकर एक लाख रुपये या उससे अधिक का बिजली बिल चुकाया है, तो आपके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। भले ही उसकी कुल सालाना टैक्स स्लैब से कम हो। विभाग यह मानकर चलता है कि आपकी जीवनशैली और खर्च घोषित आय से मेल नहीं खा रहे हैं। 2. विदेश यात्रा पर बड़ा खर्चअगर टैक्सपेयर ने विदेश यात्रा पर दो लाख या उससे ज्यादा खर्च किए हैं, तो आईटीआर भरना होगा। इस मामले में नियम बहुत स्पष्ट हैं। इसके अनुसार, विदेश यात्रा पर दो लाख से अधिक का खर्च उच्च श्रेणी के लेनदेन में शामिल होता है। इसलिए इस खर्च के कारण विभाग को सूचित करना अनिवार्य हो जाता है। 3. बैंक खातों में बड़ी रकम जमा करनायदि व्यक्ति ने अपने बचत खाते में 50 लाख या उससे ज्यादा की नकद राशि जमा की है, तो आईटीआर भरना जरूरी है। ‘करेंट अकाउंट’ के मामले में यह सीमा एक करोड़ रुपये या इससे अधिक है। कई बार संपत्ति बेचने या निवेश की रकम प्राप्त होने पर इतनी बड़ी रकम खाते में प्राप्त होती है। बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को देता है। ऐसे में टैक्सपेयर के लिए भी रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाता है। 4. इसके लिए भी जरूरीअगर किसी व्यक्ति का टीडीएस या टीसीएस 25,000 रुपये या उससे अधिक कटा है (बुजुर्गों के लिए ₹50,000), तो रिफंड लेने या न लेने, दोनों ही स्थितियों में रिकॉर्ड के लिए आईटीआर दाखिल करना होता है। इसके अलावा अगर अगर कुल व्यावसायिक बिक्री 60 लाख रुपये से अधिक है या पेशेवर आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तब भी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। जीरो आईटीआर भरने के फायदे1. लोन लेना आसानहोम लोन या व्यक्तिगत कर्ज देने से पहले बैंक या वित्तीय संस्थान पिछलने तीन वर्षों का आयकर रिटर्न मांगते हैं। इससे कर्ज मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है। 2. विदेश जाने के लिए भी मददगारविदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन करते समय संबंधित देश के दूतावास वित्तीय स्थिति जांचने करते हैं। इसके लिए भी आईटीआर मांगते हैं। इससे वीजा मिलना आसान हो जाता है। 3. शेयर बाजार में निवेश पर बचा सकते हैं टैक्सशेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में अगर घाटा हुआ है, तो उस हानि को अगले कुछ सालों के लिए समायोजित (कैरी फॉरवर्ड) करने की सुविधा तभी मिलती है, जब आप समय पर आईटीआर दाखिल करते हैं। 4. बिना आईटीआर टीडीएस रिफंड नहीं मिलेगाकई बार बैंक टैक्स दायरे में नहीं आने के बावजूद फिक्स डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं। इसका रिफंड बिना आईटीआर दाखिल किए नहीं मिलेगा। विभाग के पास हर वित्तीय गतिविधि की जानकारीमौजूदा समय में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा एनालिटिक्स का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (टीआईए,) जैसे टूल्स के जरिए विभाग के पास आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के निवेश, डिविडेंड और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल मौजूद रहती है। ऐसी में अगर आप अपनी कमाई का ब्यौरा नहीं देते हैं, तो डाटा में विसंगति होने पर विभाग की ओर से नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है। ITR Slab (नई व्यवस्था)₹0 से ₹4 लाख: शून्य₹4 लाख से ₹8 लाख: 5%₹8 लाख से ₹12 लाख: 10%₹12 लाख से ₹16 लाख: 15%₹16 लाख से ₹20 लाख: 20%₹20 लाख से ₹24 लाख: 25%₹24 लाख से अधिक: 30% पुरानी टैक्स व्यवस्था के स्लैब₹0 से ₹2.5 लाख : शून्य₹2.5 लाख से ₹5 लाख: 5%₹5 लाख से ₹10 लाख : 20%₹10 लाख से अधिक: 30%
रिपोर्ट में खुलासा: बैंकिंग सेक्टर की सेहत बेहतर, बढ़ती मांग दे रही मजबूती

नई दिल्ली। भारत का बैंकिंग सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में बना हुआ है। FICCI और Indian Banks’ Association (आईबीए) के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक, एसेट क्वालिटी में सुधार, मजबूत कैपिटल बेस और रिटेल व एसएमई सेक्टर में बढ़ती क्रेडिट मांग बैंकिंग सेक्टर को मजबूती दे रही है। क्रेडिट मांग और बैलेंस शीट से मिला सपोर्टरिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की बैलेंस शीट पहले से ज्यादा मजबूत हुई है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर गतिविधियों के चलते लोन की मांग बनी हुई है। खासकर नॉन-फूड क्रेडिट में लगातार वृद्धि की उम्मीद जताई गई है, जो सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। मौद्रिक नीति में स्थिरता की उम्मीदसर्वे में शामिल विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव नहीं होगा। मौजूदा नीति ढांचा विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि, सहकारी बैंकों के कुछ प्रतिभागियों ने 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना जताई है। पीएसबी ज्यादा आशावादी, निजी बैंक सतर्करिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी हैं। बेहतर एसेट क्वालिटी और मजबूत पूंजी स्थिति के चलते वे कॉरपोरेट लोन में बढ़ती मांग देख रहे हैं।वहीं निजी बैंक क्रेडिट ग्रोथ को लेकर संतुलित और चयनात्मक रुख अपना रहे हैं, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट और संस्थागत निवेश पर फोकस रखते हुए मध्यम स्तर का आशावाद दिखा रहे हैं। रिटेल और एसएमई सेक्टर बने ग्रोथ इंजनसेवा और रिटेल सेक्टर से लोन की मांग बैंकिंग ग्रोथ का प्रमुख आधार बनी हुई है। रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने से क्रेडिट डिमांड को बल मिल रहा है।साथ ही, एमएसएमई सेक्टर में भी लोन की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है, जो छोटे व्यवसायों में बढ़ती गतिविधियों और नीतिगत समर्थन का संकेत है। क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान 11–13%सर्वे में करीब 46% प्रतिभागियों का मानना है कि नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11% से 13% के बीच रह सकती है। रिटेल लोन भी मजबूत बना रहेगा, जो बैंकिंग सेक्टर के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा। साइबर सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौतीरिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बैंकों के सामने साइबर सुरक्षा जोखिम सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे के साथ इस जोखिम को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई गई है। कुल मिलाकर, मजबूत एसेट क्वालिटी, बढ़ती क्रेडिट मांग और स्थिर आर्थिक माहौल के चलते भारत का बैंकिंग सेक्टर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है, हालांकि साइबर सुरक्षा जैसे जोखिमों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
भारत-दक्षिण कोरिया रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, राष्ट्रपति पहुंचे दिल्ली

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung रविवार को भारत के लिए रवाना हो गए हैं। यह दौरा भारत और वियतनाम दो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। राष्ट्रपति ली आज नई दिल्ली पहुंचेंगे। सोमवार को Narendra Modi के साथ शिखर वार्ताराष्ट्रपति ली सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह हाल के वर्षों में तीसरी आमने-सामने की बैठक होगी, जो पहले G7 Summit और G20 Summit के दौरान हुई बातचीत के बाद हो रही है। ऊर्जा सप्लाई और सप्लाई चेन पर रहेगा खास ध्यानइस बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आई अनिश्चितता प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देश ऊर्जा सप्लाई चेन को स्थिर करने और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही शिपबिल्डिंग, मैरीटाइम इंडस्ट्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिफेंस सेक्टर में साझेदारी बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा। भारत में कोरियाई कंपनियों को मिलेगा बढ़ावाराष्ट्रपति ली भारत में कोरियाई कंपनियों के ऑपरेशन को मजबूत करने और नए निवेश के अवसर तलाशने के लिए एक बिजनेस फोरम में भी शामिल हो सकते हैं। भारत को दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोडक्शन हब और बड़ा उपभोक्ता बाजार माना जाता है। वियतनाम दौरे पर भी जाएंगे राष्ट्रपति लीभारत दौरे के बाद Lee Jae-myung मंगलवार को Hanoi (वियतनाम) के लिए रवाना होंगे। वहां वह To Lam और प्रधानमंत्री Le Minh Hung सहित अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान ऊर्जा सप्लाई चेन और जरूरी खनिजों पर सहयोग एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयामयह दौरा दक्षिण कोरिया की कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने और तेजी से बढ़ती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंधों को गहरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह शिखर वार्ता न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की दिशा, जानें किन फैक्टर्स पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। खासकर US–Iran peace talks पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी। दोनों देशों के बीच जारी दो हफ्तों का युद्धविराम खत्म होने जा रहा है, ऐसे में किसी भी तरह का घटनाक्रम ग्लोबल मार्केट और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव से बढ़ेगी चिंताStrait of Hormuz के बार-बार बंद होने की खबरों से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और बाजार की चाल दोनों प्रभावित हो सकती हैं। तिमाही नतीजों से बनेगा सेंटीमेंटअगले हफ्ते कई बड़ी कंपनियां अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिनमें Infosys, HCLTech, Nestlé India, SBI Life Insurance और Adani Green Energy शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार की दिशा तय होने में मदद मिलेगी। घरेलू आर्थिक आंकड़े भी रहेंगे अहमभारतीय बाजार के लिए घरेलू डेटा भी काफी महत्वपूर्ण रहेगा। 20 अप्रैल: इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट22 अप्रैल: Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति के मिनट्स23 अप्रैल: पीएमआई (PMI) डेटा ये आंकड़े आर्थिक गतिविधियों की गति और भविष्य की दिशा का संकेत देंगे। बीते हफ्ते बाजार में रही तेजी पिछला सप्ताह शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। BSE Sensex 943.29 अंक (1.22%) बढ़कर 78,493.54 पर बंद हुआNifty 50 302.95 अंक (1.26%) चढ़कर 24,353.55 पर बंद हुआ वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। सेक्टर परफॉर्मेंस: डिफेंस और एनर्जी सबसे आगे बीते हफ्ते सेक्टोरल इंडेक्स में शानदार बढ़त देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस टॉप गेनर रहाइसके बाद एनर्जी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसई सेक्टर में तेजी दर्ज की गई यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी का माहौल बना हुआ है। अगले हफ्ते बाजार की दिशा ग्लोबल घटनाओं, खासकर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों और तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। साथ ही घरेलू आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेंगे।
Indian Oil ने लॉन्च किया इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम…. गैस-बिजली के बगैर बनेगा खाना

नई दिल्ली। बढ़ती एलपीजी कीमतें (Rising LPG prices) और कई जगहों पर सप्लाई की दिक्कतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हर महीने महंगा होता सिलेंडर (Cylinder Expensive) अब घर के बजट पर भारी पड़ रहा है। ऐसे समय में लोग ऐसे ऑप्शन तलाश रहे हैं जो सस्ते हों, भरोसेमंद हों और लंबे समय तक राहत दे सकें। Indian Oil ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो LPG संकट के बीच बड़ा समाधान बनकर सामने आया है। कंपनी ने ‘Surya Nutan’ नाम का इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम (Solar Cooking System ) लॉन्च किया है, जिस पर बिना LPG, PNG गैस और यहां तक कि बिना बिजली के भी खाना बनाया जा सकता है। यह सिस्टम सूरज की रोशनी से चलता है। खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद यह लंबे समय तक आपका खर्च कम कर सकता है। अगर आप इस कुकिंग सिस्टम को बुकिंग कराना चाहते हैं तो यहां हम आपको इसे बुक करने का प्रोसेस कीमत आगे बता रहे हैं। ‘Surya Nutan’ सोलर कुकिंग सिस्टम क्या है?‘Surya Nutan’ एक इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम है जिसे घर के अंदर इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आपको चूल्हा बाहर धूप में रखने की जरूरत नहीं होती। यह सिस्टम पूरी तरह से किचन से जुड़ा रहता है और सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करके खाना बनाता है। इसे Indian Oil Corporation के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर ने तैयार किया है, जिससे साफ है कि यह एक मेड-इन-इंडिया टेक्नोलॉजी है। ऐसे काम करता है यह सोलर चूल्हाइस सिस्टम में घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जो सूरज की रोशनी को एनर्जी में बदलते हैं। यह एनर्जी एक केबल के जरिए सीधे किचन में लगे कुकटॉप तक पहुंचती है। खास बात यह है कि इसमें “हाइब्रिड सिस्टम” दिया गया है, यानी यह सोलर के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दूसरी एनर्जी से भी चल सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर धूप नहीं है या बारिश हो रही है, तब भी आप बिना परेशानी खाना बना सकते हैं। Surya Nutan की कीमतइस सोलर कुकिंग सिस्टम को तीन अलग-अलग मॉडल्स में पेश किया है, ताकि लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से चुन सकें। इसकी शुरुआती कीमत करीब 12,000 रुपये रखी गई है, जबकि इसका टॉप या प्रीमियम मॉडल लगभग 23,000 रुपये तक जाता है। खास बात यह है कि प्रीमियम वेरिएंट इतना पावरफुल है कि यह एक आम 4 लोगों के परिवार के पूरे दिन का खाना आराम से बना सकता है। ऐसे करें सोलर चूल्हे के लिए अप्लाईअगर आप इस सोलर कुकिंग सिस्टम को खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसकी प्री-बुकिंग ऑनलाइन की जा रही है। इसके लिए आपको Indian Oil Corporation की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, ईमेल और परिवार में कितने लोग हैं जैसी जरूरी जानकारी भरनी होगी। इसके अलावा, आपको अपनी जरूरत के हिसाब से सिंगल या डबल बर्नर का ऑप्शन भी चुनना होगा। सारी डिटेल भरने के बाद फॉर्म सबमिट करना होता है, जिसके जरिए आपकी प्री-बुकिंग दर्ज हो जाती है। हर मौसम में करेगा कामलोगों को अक्सर लगता है कि सोलर कुकिंग सिर्फ धूप में ही काम करती है, लेकिन ‘Surya Nutan’ के साथ ऐसा नहीं है। यह सिस्टम ऐसी टेक्नोलॉजी के साथ आता है जो कम धूप या बारिश के समय भी काम कर सकता है। यानी आपको मौसम की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) का त्योहार कल यानी 19 अप्रैल को है। 10 साल पहले यानी 2016 में अक्षय तृतीया के समय पर 10 ग्राम गोल्ड की कीमत (Gold Price) 30,100 रुपये थी। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार कल यानी शुक्रवार को 24 कैरेट गोल्ड का रेट 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। यानी अगर किसी निवेशक ने 2026 में अक्षय तृतीया के समय पर 10,000 रुपये का निवेश किया होगा उसका इनवेस्टमेंट बढ़कर 45000 रुपये हो गया होगा। निवेशकों का तगड़ा फायदा हुआ है। बता दें, 10 साल में सोने का रेट 400 प्रतिशत बढ़ा है। चांदी के रेट में पिछले 10 साल में तेज इजाफा (Silver price histroy)2016 में अक्षय तृतीया के त्योहार के समय पर 1 किलोग्राम चांदी का रेट 41200 रुपये था। जोकि शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 247930 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यानी 10 साल में चांदी की कीमतों में 2,06,730 रुपये बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले एक साल में 50% बढ़ा सोने का रेट (Gold price surged 50 percent in one year)2025 में अक्षय तृतीया के समय पर गोल्ड का रेट 95500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। जोकि अब 151000 रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। यानी बीते साल अक्षय तृतीया की तुलना में इस बार सोने का रेट 50% से अधिक बढ़ चुका है। आज क्या है 24 से 14 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Price Today)इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट गोल्ड का रेट शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 23 कैरेट गोल्ड का रेट 150752 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 138644 रुपये, 18 कैरेट गोल्ड का रेट 113519 रुपये और 14 कैरेट गोल्ड का रेट 88544 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है। इससे पहले 16 अप्रैल को गोल्ड का रेट 153305 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी महज दो दिन में गोल्ड की कीमतों में करीब 2000 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, अप्रैल के महीने में गोल्ड का रेट लगभग स्थिर ही बना हुआ है। रिकॉर्ड हाई से क्यों गिरा गोल्ड का रेट? (Why Gold get cheaper)इसी साल एक समय पर गोल्ड का रेट 175000 रुपये को पार कर गया था। लेकिन वहां से गोल्ड की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है। वहीं, निवेशकों की तरफ से मुनाफावसूली भी जमकर देखने को मिली है।
एचडीएफसी बैंक का चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन मुनाफे में 9 प्रतिशत की बढ़त से निवेशकों में बढ़ा भरोसा और डिविडेंड की घोषणा से शेयरधारकों में उत्साह

नई दिल्ली :देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2025 26 की चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बाजार में सकारात्मक संकेत दिए हैं। बैंक ने इस अवधि में शुद्ध मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है जिससे इसकी वित्तीय मजबूती और संचालन क्षमता एक बार फिर सामने आई है। लगातार बदलते आर्थिक माहौल के बीच बैंक का यह प्रदर्शन निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत माना जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार बैंक का शुद्ध मुनाफा लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 19221 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर परिणाम है। इस वृद्धि के साथ बैंक ने अपने निवेशकों के लिए डिविडेंड की घोषणा भी की है जिससे शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना को और मजबूत करता है। राजस्व के स्तर पर भी बैंक ने स्थिर वृद्धि दर्ज की है। कुल शुद्ध आय में बढ़ोतरी देखने को मिली है जबकि शुद्ध ब्याज आय में भी सुधार हुआ है। यह दर्शाता है कि बैंक की ऋण वितरण क्षमता और ब्याज से होने वाली कमाई दोनों ही मजबूत स्थिति में बनी हुई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन बैंक की स्थिर रणनीति और मजबूत ग्राहक आधार का परिणाम है। इस तिमाही में बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है। गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में कमी दर्ज की गई है जिससे यह संकेत मिलता है कि बैंक का ऋण पोर्टफोलियो पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्थिर हो गया है। यह स्थिति बैंक की जोखिम प्रबंधन प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देती है। बैंक की पूंजी स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। पूंजी पर्याप्तता अनुपात नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है जिससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक के पास वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। यह स्थिति बैंक को भविष्य में विस्तार और निवेश के अवसरों के लिए सक्षम बनाती है। जमा राशि और बचत खातों में भी वृद्धि दर्ज की गई है जिससे बैंक की फंडिंग क्षमता मजबूत हुई है। ग्राहक आधार में लगातार बढ़ोतरी और शाखा नेटवर्क के विस्तार ने बैंक की पहुंच को और व्यापक बनाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बैंक अपनी सेवाओं को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल हो रहा है। शेयर बाजार में भी इस परिणाम का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है जहां बैंक के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों का भरोसा मजबूत वित्तीय परिणामों और डिविडेंड की घोषणा के बाद और बढ़ा है। कुल मिलाकर यह तिमाही परिणाम बैंक की स्थिर वृद्धि मजबूत वित्तीय स्थिति और भविष्य की सकारात्मक संभावनाओं को दर्शाते हैं।
सोना और पेट्रोल डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी बाजार में हलचल के बीच उपभोक्ताओं पर दिख रहा सीधा असर

नई दिल्ली: देशभर में आज सोने और पेट्रोल डीजल की कीमतों में हल्का उतार चढ़ाव देखने को मिला है जिससे बाजार में एक बार फिर सक्रियता बढ़ गई है। कीमती धातु और ईंधन दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनकी कीमतों पर वैश्विक आर्थिक स्थिति, मांग और आपूर्ति तथा मुद्रा विनिमय दरों का सीधा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण हर दिन इनके भाव में हल्का बदलाव देखने को मिलता रहता है जिसका असर आम लोगों की दैनिक जीवन लागत पर साफ दिखाई देता है। सोने के बाजार में आज विभिन्न श्रेणियों के अनुसार कीमतों में स्थिरता के साथ हल्की हलचल दर्ज की गई है। चौबीस कैरेट सोना प्रति दस ग्राम लगभग एक लाख इक्यावन हजार रुपये से ऊपर के स्तर पर बना हुआ है जबकि तेईस कैरेट सोना भी इसी के आसपास दर्ज किया गया है। बाईस कैरेट सोना एक लाख अड़तीस हजार रुपये के करीब और अठारह कैरेट सोना एक लाख तेरह हजार रुपये के आसपास बना हुआ है। चौदह कैरेट सोने की कीमत भी अपेक्षाकृत कम स्तर पर स्थिर बनी हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि सोने के दामों में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट नहीं बल्कि सीमित दायरे में उतार चढ़ाव जारी है। देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव में हल्का अंतर देखने को मिला है। राजधानी क्षेत्र में चौबीस कैरेट सोना सबसे ऊंचे स्तर के करीब दर्ज किया गया है। मुंबई और कोलकाता में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में सोने के दाम अपेक्षाकृत अधिक रहे हैं। वहीं उत्तर भारत के लखनऊ नोएडा और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में भी कीमतें लगभग समान रुझान के साथ बनी हुई हैं। यह अंतर स्थानीय कर और बाजार मांग के कारण देखने को मिलता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी आज विभिन्न शहरों में मामूली बदलाव दर्ज किया गया है। राजधानी में पेट्रोल की कीमत लगभग चौानवे रुपये के आसपास और डीजल लगभग सत्तासी रुपये के करीब बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल एक सौ चार रुपये से ऊपर और डीजल बानवे रुपये के आसपास दर्ज किया गया है। कोलकाता और चेन्नई में भी ईंधन के दाम इसी तरह के स्तर पर बने हुए हैं। लखनऊ में पेट्रोल की कीमत लगभग चौरानवे रुपये के करीब और डीजल अठासी रुपये के आसपास देखा गया है। पटना और हैदराबाद जैसे शहरों में ईंधन के दाम अपेक्षाकृत अधिक स्तर पर बने हुए हैं। ईंधन की कीमतों में बदलाव का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और कर संरचना को माना जाता है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव होता है तो उसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित करता है जिससे अलग अलग समय पर दामों में हल्का बदलाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और ईंधन दोनों की कीमतें आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर रहेंगी। सोना जहां सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है वहीं पेट्रोल डीजल की कीमतें सीधे आम उपभोक्ता के दैनिक खर्च को प्रभावित करती हैं। वर्तमान स्थिति में दोनों ही बाजारों में बड़े बदलाव की बजाय सीमित दायरे में उतार चढ़ाव का रुझान बना हुआ है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक स्तर पर 700 अरब डॉलर के पार पहुंचा..

नई दिल्ली:देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ताजा आंकड़ों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को सामने रखा है। हालिया अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह अब 700 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार चढ़ाव और अनिश्चितताओं का माहौल बना हुआ है। इस बढ़ोतरी ने देश की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक मजबूती को और अधिक स्पष्ट रूप से सामने रखा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 3.82 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद कुल भंडार 700 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। इससे पहले भी भंडार में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे थे लेकिन अब इसमें स्थिरता के साथ सकारात्मक वृद्धि का रुझान सामने आया है। यह स्थिति देश की आर्थिक नीतियों और बाहरी वित्तीय परिस्थितियों के बीच बेहतर संतुलन को दर्शाती है। इस वृद्धि में विदेशी मुद्रा संपत्तियों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। ये संपत्तियां कुल भंडार का प्रमुख हिस्सा होती हैं और इनमें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के उतार चढ़ाव का सीधा प्रभाव पड़ता है। यूरो पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं में बदलाव के बावजूद इन संपत्तियों में मजबूती देखने को मिली है जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है और इसमें वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही सोने के भंडार में भी वृद्धि दर्ज की गई है जिसने कुल विदेशी मुद्रा भंडार को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है। सोना एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में माना जाता है और इसके मूल्य में बदलाव का प्रभाव सीधे देश के कुल भंडार पर पड़ता है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिति में सुधार ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक भरोसे का प्रमुख संकेतक होता है। यह न केवल देश को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाने में मदद करता है बल्कि मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने की क्षमता भी प्रदान करता है। मजबूत भंडार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बढ़ाता है जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना भी बढ़ जाती है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब कई अर्थव्यवस्थाएं दबाव और अस्थिरता का सामना कर रही हैं तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। यह संकेत देता है कि देश की वित्तीय प्रणाली स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रही है और आर्थिक प्रबंधन अपेक्षाकृत संतुलित तरीके से कार्य कर रहा है। बढ़ता हुआ भंडार भविष्य में किसी भी बाहरी आर्थिक दबाव से निपटने की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है और देश की आर्थिक स्थिति को वैश्विक स्तर पर अधिक सुदृढ़ पहचान प्रदान करता है।
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 2 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी को दी मंजूरी..

नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देते हुए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है। लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय आर्थिक राहत लेकर आया है और उनकी मासिक आय में सीधा असर डालेगा। सरकारी निर्णय के अनुसार यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को इस तारीख से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिलेगा और इसके साथ ही उन्हें पिछले महीनों का एरियर भी दिया जाएगा। जनवरी, फरवरी और मार्च के बकाया भुगतान का लाभ सीधे उनके वेतन के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे एकमुश्त अतिरिक्त राशि उनके खाते में पहुंचेगी। महंगाई भत्ता सरकारी वेतन संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसे बढ़ती कीमतों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए समय समय पर संशोधित किया जाता है। इसका निर्धारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर किया जाता है, जो बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है। इसी आधार पर सरकार समय समय पर इसमें संशोधन करती है ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति प्रभावित न हो। इस बार डीए बढ़ोतरी को लेकर कर्मचारियों को सामान्य से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। आमतौर पर यह संशोधन समय पर कर दिया जाता है, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी देखने को मिली। इसके बावजूद अब मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच संतोष और राहत का माहौल है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की ओर से इस बार 3 से 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन सरकार ने 2 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है। इसके बावजूद डीए का 60 प्रतिशत स्तर पार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वेतन संरचना में एक बड़ा संकेत देता है और भविष्य में सैलरी स्ट्रक्चर पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। इस बढ़ोतरी का सीधा असर कर्मचारियों और पेंशनर्स की मासिक आय पर पड़ेगा। एरियर मिलने से उन्हें एक साथ अतिरिक्त राशि प्राप्त होगी, जिससे घरेलू बजट को मजबूती मिलेगी। महंगाई के मौजूदा दौर में यह निर्णय उनके खर्चों को संतुलित करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बढ़ोतरी से बाजार में खपत बढ़ सकती है, क्योंकि लोगों के पास खर्च करने योग्य आय में इजाफा होता है। इसका अप्रत्यक्ष असर अर्थव्यवस्था की गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।