शेयर बाजार में मची हड़कंप: सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, जानिए गिरावट के बड़े कारण

नई दिल्ली सप्ताह के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 1200 अंक टूटकर 72,326 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 350 अंक के करीब 22,453 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट का असर सिर्फ बड़े स्टॉक तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। कुछ ही घंटों में 6 लाख करोड़ का नुकसानइस भारी गिरावट के साथ उद्यम की संपत्ति में बड़ी गिरावट आई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण कुछ ही घंटों में 422 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 416 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी उद्यम को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिससे बाजार में अशांति का माहौल बन गया। अमेरिका-ईरान तनाव बना सबसे बड़ा कारणइस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के समुद्र तटों पर भारी तनाव है। यह भू-राजनीतिक संकट अब कई ऐतिहासिक से जारी है और इसके समाप्त होने को लेकर अस्तित्व में है। इस तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में भी दबाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की उथल-पुथलदूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की जिले में तेजी। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति शेयर के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे बड़े प्रतिष्ठित देश की चिंता बढ़ गई है। महंगे तेल देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव है और इससे बाजार की धारणा खराब होती है। हल्दी उद्योग से व्यापारी डरेबाजार में डर और असमानता का मॉडल इंडिया VIX लगाया जा सकता है, जो 5 फीसदी से ज्यादा उछाल 28 के पार पहुंच गया। आम तौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने का मतलब यह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है और निवेशक आकर्षित हो गए हैं। विदेशी व्यापारियों की लगातार बिक्रीविदेशी व्यापारियों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च में बड़ी पूंजी बाजार में धूम मचा दी, जिससे बाजार में अस्थिरता कम हो गई और दबाव बढ़ गया। एफ एंड ओ एक्सपायरी से बढ़िया हलचलइसके अलावा फ्यूचर्स और ऑप्शंस क्लैन्सल की एक्सपायरी भी बाजार में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी। एक्सपायरी के समय व्यापारी अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट करते हैं, जिससे बाजार में तेज गति से देखने को मिलता है।
पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर तय होगी सोना-चांदी की चाल

नई दिल्ली। अगले सप्ताह सोना और चांदी में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजरें पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेंगी, जो कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते जेरोम पॉवेल के संबोधन और अन्य फेड अधिकारियों के बयानों पर ध्यान रहेगा, क्योंकि इससे ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के संकेत मिलेंगे, जो सोना-चांदी की मांग को प्रभावित कर सकते हैं। विश्लेषकों ने बताया कि सोने में हालिया गिरावट का कारण गोल्ड ईटीएफ निवेशकों की बिकवाली, कमजोर भौतिक मांग, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 2% गिरकर 4,492.5 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 69.79 डॉलर प्रति औंस पर हल्की बढ़त के साथ बंद रही। अमेरिकी बाजार में कमजोरी के बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी, जिससे चांदी को सहारा मिला। घरेलू बाजार में पिछले सप्ताह सोना मामूली गिरावट के साथ लगभग 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 1,182 रुपये की बढ़त के साथ 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। रुपये की कमजोरी ने कीमती धातुओं की कीमतों को कुछ सपोर्ट दिया। रुपया पिछले हफ्ते 1% से ज्यादा गिरकर करीब 94.80 प्रति डॉलर पर आ गया। अगले सप्ताह निवेशकों की नजरेंजेएम फाइनेंशियल के प्रणव मेर ने कहा कि अगले सप्ताह बाजार में ध्यान पश्चिम एशिया की घटनाओं पर रहेगा। तनाव बढ़ने या घटने का कोई भी संकेत कीमतों को ऊपर या नीचे ले जा सकता है। इसके अलावा, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण आंकड़े, यूरोज़ोन के महंगाई आंकड़े और अमेरिकी खपत व रोजगार के डेटा पर भी नजर रहेगी। घरेलू बाजार में सुस्ती रहने की संभावना है, क्योंकि 31 मार्च और 3 अप्रैल को महावीर जयंती और गुड फ्राइडे के कारण बाजार बंद रहेंगे।
Bank Holidays Alert: अप्रैल में कई दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें कब-कब रहेंगी छुट्टियां

नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में बैंक से जुड़े काम करने वालों के लिए जरूरी खबर है। इस महीने कई ऐसे दिन हैं जब देशभर में अलग-अलग कारणों से बैंक बंद रहेंगे। अगर आप बैंक से जुड़े जरूरी काम करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इन छुट्टियों की लिस्ट जान लेना बेहद जरूरी है। इतने दिन बैंकों में बंद रहेगा कामकाजअप्रैल महीने की शुरुआत ही बैंकिंग छुट्टी से होती है। 1 अप्रैल को कई राज्यों में बैंकों का सालाना क्लोजिंग डे होता है, जिसके चलते बैंक बंद रहते हैं। इसके अलावा 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के अवसर पर देश के कई हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। महीने में नियमित छुट्टियों की बात करें तो 11 अप्रैल को दूसरा शनिवार और 25 अप्रैल को चौथा शनिवार पड़ रहा है, जिस दिन पूरे देश में बैंक बंद रहते हैं। इसके अलावा सभी रविवार को भी बैंकिंग सेवाएं बंद रहती हैं। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती और कई राज्यों में बैसाखी जैसे त्योहारों के कारण बैंक बंद रह सकते हैं। यह छुट्टी कई राज्यों में लागू होती है, इसलिए अपने राज्य की छुट्टी जरूर चेक कर लें। इसके अलावा कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण अलग-अलग तारीखों पर बैंक बंद रह सकते हैं। यानी यह जरूरी नहीं है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी हों। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर साल राज्यवार बैंक छुट्टियों की सूची जारी करता है। हालांकि, बैंक बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहती हैं, जिससे आप अपने जरूरी काम आसानी से निपटा सकते हैं। कुल मिलाकर, अप्रैल 2026 में कई छुट्टियां होने वाली हैं, ऐसे में बैंक जाने से पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक करें ताकि आपको किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? ऑटो सेल्स, GST और कच्चा तेल तय करेंगे दिशा

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ कई ऐसे बड़े फैक्टर सामने आएंगे, जो बाजार की दिशा तय करेंगे। कंपनियों की नजर दूसरी कंपनियों पर ऑटो सेल्स डेटा, GST कलेक्शन, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव पर टिकी रहेगी। 1 अप्रैल के आंकड़े दिखाएंगे अर्थव्यवस्था की सेहत1 अप्रैल को ऑटो कंपनियां अपनी बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी, वहीं सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन डेटा पेश करेगी। ये आंकड़े देश में मांग (डिमांड) की स्थिति का साफ संकेत देंगे। अगर आंकड़े मजबूत रहे, तो बाजार में पॉजिटिव माहौल बन सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना बना चिंता का कारणवैश्विक स्तर पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व तनाव से बढ़ते अनिश्चिततायूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष का असर भी बाजार पर साफ दिख रहा है। इस जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। FII का रुख बना रहेगा निवेशकविदेशी निवेशक (FII) पिछले कई हफ्तों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर FII खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में तेजी से देखने को मिल सकती है। पिछले हफ्ते बाजार में रही गिरावट23 से 27 मार्च के बीच बाजार में कमजोरी देखी गई: निफ्टी 50 करीब 1.28% गिरकर 22,819 पर बंद हुआBSE सेंसेक्स 1.27% गिरकर 73,583 पर पहुंच गया मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रहा। किन सेक्टर्स पर रहा दबाव, कौन चमका?पिछले हफ़्ते: डिफेंस, PSU बैंक, रियल्टी और मेटल सेक्टर में बड़ी गिरावटIT, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में तेज़ी से गिरावट इससे साफ़ है कि इन्वेस्टर डिफेंसिव सेक्टर की ओर झुक रहे हैं। इन्वेस्टर के लिए क्या है स्ट्रैटेजी?आने वाला हफ़्ता डेटा और ग्लोबल लेवल पर आधारित रहेगा। ऐसे में: जल्दबाजी में निवेश से बचेंबड़े इवेंट्स पर नज़र रखेंसेक्टर-बेस्ड स्ट्रैटेजी अपनाएं
1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड निययों में होगा बदलाव, हाई ट्रांजैक्शन पर रहेगी नजर, जानें 5 बड़े बदलाव

नई दिल्ली । अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो आने वाली 1 अप्रैल 2026 की तारीख आपके लिए अहम हो सकती है। इस दिन से क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत प्रस्तावित हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर निगरानी और सख्त हो जाएगी। खासतौर पर पैन कार्ड लिंकिंग और हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर नजर बढ़ेगी। हालांकि आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के खर्च पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ज्यादा खर्च करने वाले या विदेश यात्रा करने वालों के लिए ये बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर कड़ी निगरानी1 अप्रैल 2026 से सबसे बड़ा बदलाव ज्यादा खर्च करने वाले यूजर्स के लिए होगा। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी वित्त वर्ष में आपके क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये या उससे अधिक का भुगतान होता है, तो बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दे सकता है। इसके अलावा, एक तय सीमा से अधिक विदेशी खर्चों पर भी नजर रखी जाएगी। यदि आपका खर्च आपकी घोषित आय से ज्यादा पाया जाता है, तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस मिल सकता है। PAN कार्ड लिंकिंग होगी जरूरीअगले महीने से क्रेडिट कार्ड के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 के बाद बिना पैन नंबर के नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं होगा। साथ ही मौजूदा कार्डधारकों को भी अपना कार्ड पैन से लिंक कराना होगा। इससे क्रेडिट कार्ड आपकी टैक्स पहचान का अहम हिस्सा बन जाएगा। कंपनी के कार्ड के इस्तेमाल पर टैक्सयदि आपको आपकी कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड मिला है, तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण है। नए नियमों के तहत कंपनी के कार्ड से किए गए व्यक्तिगत खर्च को टैक्स योग्य लाभ माना जा सकता है। यानी यदि आप निजी खर्च, यात्रा या मनोरंजन के लिए इस कार्ड का उपयोग करते हैं, तो वह राशि आपकी आय में जोड़ी जा सकती है और उस पर टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में खर्च से जुड़े बिल या प्रमाण रखना जरूरी होगा। क्रेडिट कार्ड से टैक्स पेमेंट का विकल्पनए नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड से इनकम टैक्स भुगतान करने का विकल्प भी मिल सकता है। यानी अब आप नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के अलावा क्रेडिट कार्ड से भी टैक्स जमा कर सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए मददगार हो सकती है, जिनके पास भुगतान के समय पर्याप्त नकदी नहीं होती। हालांकि, इस पर बैंक प्रोसेसिंग फीस ले सकता है और समय पर भुगतान न करने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट बनेगा एड्रेस प्रूफएक और अहम बदलाव के तहत क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को पते के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यदि स्टेटमेंट हाल का है और उसमें सही पता दर्ज है, तो इसे वैध दस्तावेज माना जाएगा। इससे पैन कार्ड बनवाने या उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। साथ ही, क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय पैन कार्ड देना भी अनिवार्य होगा।
वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..

नई दिल्ली: Piyush Goyal ने कैमरून के Yaounde में आयोजित विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) के दूसरे दिन भारत का नेतृत्व करते हुए सर्वसम्मति आधारित फैसलों पर जोर दिया उन्होंने कहा कि किसी भी देश पर ऐसे नियम नहीं थोपे जाने चाहिए जिनसे वह सहमत न हो गोयल ने मौजूदा गतिरोध को खत्म करने और सदस्य देशों के बीच भरोसा दोबारा बनाने की जरूरत बताई उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ में चर्चाएं पूरी तरह पारदर्शी, समावेशी और सदस्य देशों के नेतृत्व में होनी चाहिए और अगर संस्थागत ढांचे में बिखराव हुआ तो वैश्विक व्यापार प्रणाली कमजोर हो जाएगी भारत ने समान अवसर (level playing field) बनाए रखने की बात की और कहा कि उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को दूर करना जरूरी है साथ ही खाद्य सुरक्षा, पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH), स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (SSM) और कपास जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की कमजोर स्थिति पर भारत ने चिंता जताई और कहा कि सही तरीके से फैसले नहीं होंगे तो नियम लागू नहीं हो पाएंगे और इसका सबसे अधिक असर छोटे देशों पर पड़ेगा इसके अलावा पारदर्शिता के नाम पर व्यापारिक जवाबी कार्रवाई या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के प्रयासों पर सावधानी बरतने को कहा गया बैठक में Rajesh Aggarwal ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और स्पष्ट लक्ष्य तय करने की आवश्यकता पर बल दिया पीयूष गोयल ने इस दौरान अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात भी की जिसमें व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई यह डब्ल्यूटीओ सम्मेलन 26 मार्च से शुरू होकर 29 मार्च तक चलेगा और इसमें वैश्विक व्यापार की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी
DEFENCE MINISTORY : रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: अदाणी डिफेंस ने सेना को सौंपी पहली प्रहार मशीन गन

DEFENCE MINISTORY : नई दिल्ली। शनिवार को अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सशस्त्र बलों को 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सौंप दी। इस मौके पर कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल में एक बड़ा मील का पत्थर बताया। 7.62 मिमी कैलिबर की आधुनिक मशीन गन यह 7.62 मिमी कैलिबर वाली ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन ग्वालियर के बाहरी इलाके में स्थित कंपनी के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में तैयार की गई है। सीईओ राजवंशी ने कहा कि कंपनी को सात साल में कुल 41,000 एलएमजी देने का लक्ष्य मिला है, लेकिन टीम की मेहनत और क्षमता के दम पर यह लक्ष्य तीन साल से भी कम समय में पूरा किया जा सकता है। पहली खेप और उत्पादन क्षमता पहली 2,000 एलएमजी की डिलीवरी के बाद अदाणी डिफेंस ने हर महीने 1,000 मशीन गन बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। यह अब तक का एक रिकॉर्ड है और इसे कंपनी की तकनीकी दक्षता और उत्पादन क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है। LPG CRISES GUJRAT : पेट्रोल गैस और खाद की सप्लाई पर गुजरात सरकार सख्त सीएम भूपेंद्र पटेल ने की समीक्षा.. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की यात्रा सीईओ ने बताया कि यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति और शुरुआती दौर में तकनीकी सहयोग से संभव हो पाई। उन्होंने कहा कि साल 2020 में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के साथ यह यात्रा शुरू हुई और पिछले छह वर्षों में अदाणी डिफेंस एक छोटे कंपोनेंट निर्माता से पूरी तरह हथियार बनाने वाली ओईएम कंपनी बन गई है। रक्षा मंत्रालय की मौजूदगी कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ए अनबरसु भी मौजूद रहे। उन्होंने सेना के लिए भेजी जा रही पहली खेप वाले ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अनबरसु ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब रक्षा सौदों को तेजी से उत्पादन और डिलीवरी में बदलने की क्षमता रखता है, जो देश की रक्षा ताकत को और मजबूत करेगा। सीईओ का संदेश आशीष राजवंशी ने यह भी बताया कि कंपनी ने टेक्नोलॉजी पार्टनर्स की मदद से शुरुआत की थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया में कंपनी स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बन चुकी है। उनका कहना है कि यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों के लिए आधुनिक हथियारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ देश में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बूस्ट, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करेगा विकास को प्रेरित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है। नई नोएडा के अनुसार, एयरपोर्ट की शुरुआत से डेवलपर्स का भरोसा बढ़ेगा और नए आवासीय प्रोजेक्ट्स की संख्या में तेजी से आएगी। रियल एस्टेट पर असर:ग्रेटर नोएडा ने 2025 में ग्रेटर नोएडा के कुल रेजिडेंशियल लॉन्च का 28% हिस्सा हासिल किया, जो 2021 में 19% था। नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग 2021 में 4,415 यूनिट से बढ़कर 2025 में 14,000 यूनिट हो गई। हाउसिंग सेल्स में ग्रेटर नोएडा का योगदान 2025 में 12,903 यूनिट रहा, जो 2021 के 10,685 यूनिट से बढ़ा। नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव विजय के अनुसार, यह एयरपोर्ट ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा।विभागीय शिशिर बैजल के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट खेड़ा के एविएशन और शहरी विकास को नया रूप देगा और क्षेत्र में संतुलित शहरी विस्तार को बढ़ावा देगा। निरंतरता और विकास:सड़क, मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) जैसी मल्टीमॉडल निरंतरता एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।आवेदकों के अनुसार, नए एयरपोर्ट जैसे जेवर भी यात्रियों को आकर्षित करेंगे और एरोट्रोपोलिस आधारित विकास को गति देंगे। जेवर एयरपोर्ट न केवल हवाई यातायात को संतुलित करेगा, बल्कि ग्रेटर नोएडा और खेड़ा में हाउसिंग डिमांड, प्रॉपर्टी प्लेसमेंट और रियल एस्टेट निवेश को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र खेड़ा का प्रमुख सेकेंडरी एयरपोर्ट हब बन सकता है।
रुपये के मूल्य और बाजार नियंत्रण के लिए RBI ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये में गिरावट को लेकर निवेश और सट्टेबाजी (स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग) पर शेयरों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी उद्यमों के रूप में काम करने वाले बैंकों को दिन के अंत तक रुपये में अपने ओपन इन्वेस्टमेंट के लिए 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने का ऑर्डर दिया गया है। मुख्य कारण और समय:अमेरिकी-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण व्यापार घाटा बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।शुक्रवार को पहली बार 94 प्रति डॉलर से नीचे और करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब तक अमेरिकी-ईरान संघर्ष के बाद कुल गिरावट 4% से अधिक हो गई है।ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति शेयर से ऊपर बनी है, जो कि अक्टूबर में रेटिंग 70 डॉलर से काफी ज्यादा है। इससे भारत का अहित बिल और बैचलर पर दबाव बढ़ गया। आरबीआई की कार्रवाई और निर्देश:सभी सरकारी बैंक इस दैनिक सीमा को 10 अप्रैल तक लागू करेंगे।बाजार की स्थिति के अनुसार आवश्यकतानुसार यह सीमा कीटनाशक भी हो सकती है।विशेषज्ञ का कहना है कि रुपये में गिरावट जारी रहने का मानक और सख्त कदम उठाया जा सकता है।रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) का उपयोग किया है, जिससे उसकी हस्तक्षेप क्षमता कुछ सीमित हो गई है। भविष्यवाणी और बाजार का प्रभाव:एमके ग्लोबल ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये में आने वाले समय में सुराजाकर करीब 91 प्रति डॉलर तक जा सकते हैं।10 साल के सरकारी बॉन्ड की उपज सीमा 6.83% से लेकर 6.65% तक हो सकती है।वैश्विक तेल की फार्मास्युटिकल स्थिरांक, तो चालू खाता घाटा (सीएडी) में वृद्धि हो सकती है और इसका असर आर्थिक विकास और अनुपात पर पड़ सकता है। आरबीआई का यह कदम बाजार में सट्टेबाजी और रुपये के परमिट पर नियंत्रण के लिए है। नए नियम के लागू होने के बाद रुपये में स्थिरता आने और विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम कम होने की उम्मीद है।
WTO मंच पर भारत की आवाज: पीयूष गोयल ने consensus-based फैसलों की वकालत की

नई दिल्ली कैमरून के युंडे में विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मिनिस्ट्री मीटिंग (MC14) आयोजित की गई, जिसमें भारत ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर अहम रुख पेश किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्यों से सर्वसम्मति (आम सहमति) के आधार पर निर्णय लेने की अपील की और कहा कि यही डब्ल्यूटीओ की मूल स्थापना है। ‘इको बताए गए नियम नहीं, जरूरी जरूरी’दूसरे दिन की बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि किसी भी देश को ऐसे नियमों का पालन नहीं करना चाहिए, उन्होंने इस बात पर सहमति जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्वसम्मति-आधारित निर्णय प्रक्रिया ही छात्रों और वैश्विक व्यापार प्रणाली को सुनिश्चित कर सकती है। भरोसा बहाल पर दिया जोरभारत ने स्थिर गतिरोध को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों के बीच विश्वास बहाली की आवश्यकता बताई। सरकार का मानना है कि जब तक देश के बीच मजबूत मजबूत नहीं होगा, तब तक प्रभावी निर्णय लेना कठिन रहेगा। बाकी बाधाओं की गहराई से समीक्षा करने की भी मांग की गई। भारत का रुखभारत ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने वाली सभी चर्चाएं शामिल, समावेशी और सदस्य देश के नेतृत्व में होनी चाहिए। भारत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि फ़्लोरिडा स्ट्रक्चर फ़्लोरिडा या ब्रेकडाउन बढ़ा हुआ है, तो वैश्विक व्यापार प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित होगी। पुरानी संस्थागत व्यवस्था की मांगभारत ने उरुग्वे दौर से आए तूफान को दूर करने की भी जरूरत बताई। साथ ही, खाद्य सुरक्षासार्वजनिक स्टॉक होल्डिंग (पीएसएच)स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (एसएसएम)सिक्के से जुड़ा मुद्दा जैसे लंबे समय से ऑटोमोबाइल विषयों को प्राथमिकता देने की बात कही। विवाद तंत्र शास्त्र पर चिंताभारत ने विश्व व्यापार संगठन के विवाद में चमत्कारिक तंत्र की ख़राब स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। सरकार का कहना है कि यदि यह तंत्र प्रभावी नहीं रहेगा, तो सबसे पुराने दोस्त दोस्त बने रहेंगे और इससे छोटे और ग्रामीण इलाकों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। सामूहिक बैठकों में मजबूत आधार पर चर्चासम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, जॉर्जिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के सम्मेलनों से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। समयबद्धन सुधारों की आवश्यकतासचिव राजेश अग्रवाल ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया। भारत की पहली मंजिल पर अलॉटमेंट और ऑटोमोबाइल व्यापार की दिशाभारत का यह रूखा वैश्विक व्यापार में संतुलन, प्लॉट और सामाग्री सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।