शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का नाम थमाने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बहुलता और विदेशी उपभोक्ताओं की लगातार बिकवाली रही। सप्ताह के आखिरी प्रमुख दिन निफ्टी 50 2.09% बढ़त के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह में इसमें 0.52% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि पिछले एक महीने में शेयरधारकों को करीब 8.23% का नुकसान हुआ है, लेकिन जिन निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई है। गोदाम और बैंक में भी भारी दबाववहीं बीएसई सेंसेक्स में भी गिरावट साफ नजर आई और यह शुक्रवार को 1,690 अंक 2.25% 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में करीब 1.94% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक महीने में यह 8.29% तक टूट गई। नेटवर्क सेक्टर की बात करें तो निफ्टी बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा और शुक्रवार को 2.67% 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे सप्ताह में इसमें 2.16% की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तनाव और सरकारी कच्चे तेल का असरबाजार पर सबसे बड़ा असर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की पार्टनरशिप 98 से 115 डॉलर प्रति शेयर के बीच बनी हुई है, जिसने स्थिरता और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कच्चे कच्चे तेल का सीधा असर भारत जैसे मजबूत देश पर पड़ता है, जिससे आरएमबी भी दबाव में आ गई। सेक्टर में मिलाजुला रुख, मेटल और पीएसयू बैंक सबसे खराबसेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात तो मेट्रिक मेटल और पीएससीयू बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में छोटी-छोटी जगहें दिखाई दीं, जहां आईटी में 1.17% और फार्मास्युटिकल में 0.11% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी प्रेशर में रहे—निफ्टी मिडकैप100 में 1.38% और स्मॉलकैप100 में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। FII की बिकवाली, DII का सहाराबाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली रही। सप्ताह भर में करीब 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री बढ़ी, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 1.13 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा तक पहुंच गया। वहीं घरेलू उद्यमों (डीआईआई) ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। क्या? अहम किरदार पर टिकी नजरनिफ्टी 50 22,850-22,750 के अहम सपोर्ट जोन पर टिकने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं निफ्टी बैंक के लिए 52,000-51,800 का सपोर्ट जोन है, जबकि 53,000-53,600 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है। प्रकाशन- जारी रहने के संकेतविशेषज्ञ का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के कारखाने में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालाँकि घरेलू निवेश और बाज़ारों में सुधार से बाज़ार को आगे सहारा मिल सकता है।
नोएडा एयरपोर्ट बनेगा गेमचेंजर! बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार और रोजगार को रफ्तार

नई दिल्ली करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण अब देश को समर्पित हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करते हुए इसे भारत के विकास क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दूसरा प्रमुख सिविल हवाई अड्डा बन गया है, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में हवाई यात्रा का दबाव कम होगा और यात्रा पहले से अधिक सशक्त बनेगी। प्रोजेक्ट में क्रांतिकारी परिवर्तन, मल्टी-मॉडल हब के रूप में विकासनोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक मल्टी-मॉडल बिजनेस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, रेल और मेट्रो सुविधाओं का बेहतरीन संगम होगा। यह हवाई अड्डा न सिर्फ दिल्ली-मैदान, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लिए भी बड़ा पर्यटक केंद्र बनेगा। यहां के माध्यम से एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित रेल लिंक बेहद आसान होगा, जिससे यात्रियों के साथ-साथ सहयोगियों को भी लाभ मिलेगा। आधुनिक तकनीक से लैस ‘ऑल वेडर’ एयरपोर्टइस हवाई अड्डे को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से ‘ऑल वेडर ऑपरेशन’ की शुरुआत मिली है। इसका मतलब यह है कि यहां राक्षसी नेविगेशन सिस्टम, रनवे लाइटिंग और एयर रिमोट कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जिससे खराब मौसम या कम दृश्यता में भी उड़ान ऑपरेशन ऑपरेशन रूप से जारी रहता है। 3,900 मीटर वजनी रनवे बड़े वीडियो-बॉडी चित्रों को संलग्न करने में सक्षम है और दोनों सिरों पर आईएलएस सिस्टम स्थापित किया गया है, जो अधिक सुरक्षित और आसान सुविधा प्रदान करता है। क्षमता और बुनियादी ढांचे: भविष्य की इंजीनियरों के स्कूल की तैयारीपहले चरण में इस एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ रखी गई है, जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही यहां कार्गो हैंडलिंग की क्षमता भी काफी बड़ी है, जो हर साल 2.5 लाख टन से अधिक कार्गो हैंडलिंग कर सकती है। खास बात यह है कि यह देश का पहला एयरपोर्ट होगा, जहां इन-हाउस बात एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे एयरलाइंस की लागत और समय दोनों की बचत होगी। उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा सहारानोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास का नया इंजन साबित हो रहा है। इसके माध्यम से निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले ही एक्सप्रेसवे, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी कंपनियां प्रमुखता से काम कर रही हैं, और अब इस एयरपोर्ट के साथ देश में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट वाले राज्य शामिल हो गए हैं। निष्कर्ष: भारत के एविएशन सेक्टर की नई उड़ानअंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की शुरुआत न सिर्फ एनसीआर की ओर से मजबूत होगी, बल्कि यह भारत को वैश्विक एविएशन हब की दिशा में बनाना भी एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।
ईरान-US तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, ₹41 लाख करोड़ का मार्केट कैपिटल घटा, जाने क्या बोले एक्सपर्ट?

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से दुनियाभर के शेयर बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है। भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखी गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटल पिछले एक महीने में लगभग 9% या करीब ₹41 लाख करोड़ घट गया। 27 फरवरी 2026 को जहां मार्केट कैपिटल ₹463 लाख करोड़ था, वह 27 मार्च तक गिरकर ₹422 लाख करोड़ पर आ गया। हालांकि, इस गिरावट ने निवेशकों के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं। एक्सपर्ट्स का क्या कहना हैमार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि इस करेक्शन ने शेयरों के वैल्यूएशन को आकर्षक बनाया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि निफ्टी का वैल्यूएशन अब अपनी 10 साल की औसत 22.4 गुना से नीचे, लगभग 19 गुना कमाई पर ट्रेड कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि मौजूदा एनर्जी संकट भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स पर असर डालता है, तो वैल्यूएशन और भी गिर सकते हैं। फिलिप कैपिटल इसे तकनीकी अवसर मान रहा है। ब्रोकरेज के अनुसार, मौजूदा गिरावट अस्थायी है और मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य होने पर बाजार में सुधार संभव है। उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में कैपिटल गुड्स, डिफेंस, बैंकिंग और स्टेपल सेक्टर में हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि ऑटो, आईटी, ऑयल-गैस और फार्मा में कटौती की है। Stoxkart के डायरेक्टर और सीईओ प्रणय अग्रवाल का कहना है कि अच्छी क्वालिटी वाले घरेलू कारोबारों के लिए लंबी अवधि के बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं। हालांकि, ऊर्जा लागत बढ़ने, स्टैगफ्लेशन और मौजूदा तनाव के माहौल में निवेशकों को रक्षात्मक रणनीति अपनाकर पूंजी बचाने पर ध्यान देना चाहिए। विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावटदेश का विदेशी मुद्रा भंडार भी घट गया है। 20 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 11.413 अरब डॉलर कम होकर 698.346 अरब डॉलर रह गया। यह मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार में भारी गिरावट के कारण हुआ। इससे एक सप्ताह पहले भंडार 7.05 अरब डॉलर घटकर 709.76 अरब डॉलर रहा था। 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में भंडार 4.88 अरब डॉलर बढ़कर 728.49 अरब डॉलर पर पहुंचा था, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर था।
RBI का 3 सरकारी बैंकों पर बड़ा एक्शन… लगाया 2.17 करोड़ से अधिक का जुर्माना

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने अलग-अलग नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के कारण तीन सार्वजनिक बैंकों (Three Public Sector Banks) पर कुल दो करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक ने एक बयान में बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स पर भी तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडियाआरबीआई के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग की समुचित व्यवस्था न करने और परिसंपत्ति वर्गीकरण तंत्र में मानवीय हस्तक्षेप करने के लिए 95.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने पाया कि बैंक ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए ग्राहकों को अलग-अलग चैनलों पर 24 घंटे रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। बैंक ऑफ इंडियाइसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक पर प्राथमिक सेक्टर को लोन देने और जमा पर ब्याज संबंधी नियमों के उल्लंघन का आरोप है। बैंक ने प्राथमिक क्षेत्रों के 25 हजार रुपये तक के लोन देने पर भी सर्विस चार्ज, निरीक्षण शुल्क और प्रोसेसिंग चार्ज वसूले थे। इसके अलावा बैंक ने सावधि जमा खातों पर मैच्योरिटी की तारीख से पैसे ग्राहकों को देने की तारीख तक के लिए ब्याज भुगतान नहीं किया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडियासेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर केवाईसी और बुनियादी बचत बैंक जमा खाता संबंधी नियमों के उल्लंघन के कारण 63.60 लाख का जुर्माना लगा है। वह तय समय सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री में कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड अपडेट करने में विफल रहा था। इसके अलावा बैंक को कुछ ग्राहकों के एक से अधिक बुनियादी बचत बैंक जमा खाता खोलने का भी दोषी पाया गया। पाइन लैब्स पर भी एक्शनकेंद्रीय बैंक ने पाइन लैब्स को प्रीपेड भुगतान तंत्र संबंधी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया और उस पर तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने बताया कि तीन सार्वजनिक बैंकों और पाइन लैब्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लिखित जवाब और मौखिक सुनवाई में दिये गये जवाब असंतोषजनक पाए जाने के बाद जुर्माने की कार्रवाई की गई है। एचएसबीसी पर भी लगा था जुर्मानाहाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन (एचएसबीसी) पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बैंक पर निष्क्रिय खातों और बिना दावे वाली जमा राशि से जुड़े कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है। बैंक की निगरानी संबंधी जांच उसके 31 मार्च, 2025 तक के वित्तीय हालात के आधार पर की गई थी। जांच में आरबीआई के निर्देशों के पालन में कमी मिलने के आधार पर बैंक को नोटिस जारी किया गया। आरबीआई ने कहा कि नोटिस पर बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियां और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद यह पाया गया कि बैंक पर लगे आरोप सही हैं। इसी कारण उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया।
31 मार्च तक निपटा लें ये जरूरी काम….. इस दिन खत्म हो जा रही है डेडलाइन

नई दिल्ली। एक अप्रैल (April 1st) से नए फाइनेंशियल ईयर (New Financial Year) की शुरुआत होने वाली है। इससे पहले, 31 मार्च को खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर में कुछ जरूरी काम निपटा लेने होंगे। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई ऐसी डेडलाइन (Deadline) हैं जो 31 मार्च को पूरी हो रही हैं। इनमें इनकम टैक्स (Income Tax) और इन्वेस्टमेंट (Investment) से जुड़ी डेडलाइन (Deadline) भी शामिल हैं। वेतन आयोग को सुझाव देने की डेडलाइन8वें वेतन आयोग ने वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित सुधारों के लिए सुझाव और राय आमंत्रित किए हैं, जिसके लिए अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई है। यह डेडलाइन केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न हितधारकों के लिए है। बता दें कि वेतन आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए MyGov पोर्टल पर 18 सवालों का एक विस्तृत प्रश्नावली जारी किया है। इस प्रश्नावली के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों, न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट कर्मचारियों, नियामक संस्थाओं के सदस्यों, कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों से राय मांगी गई है। ITR-U की डेडलाइन31 मार्च तक अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) फाइल करने की डेडलाइन है। जिन लोगों ने अपनी कोई इनकम रिपोर्ट नहीं की है या इनकम का गलत हिसाब लगाया है, जिससे उनकी इनकम टैक्स देनदारी कम हो गई है, उनके पास अब इस गलती को सुधारने का मौका है। ऐसे लोग ITR-U फाइल करके ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखें कि ITR-U फाइल करने के लिए आपको पेनल्टी और ब्याज के तौर पर अतिरिक्त इनकम टैक्स देना होगा और ITR-U के जरिए टैक्स रिफंड का कोई दावा नहीं किया जा सकता। पहले ITR-U का इस्तेमाल पिछले दो सालों की गलतियों को सुधारने के लिए किया जा सकता था लेकिन बजट 2025 में, इस समयसीमा को बढ़ाकर पिछले चार सालों तक कर दिया गया है। अगर आप रिटर्न सही समय पर भरने या सही डेटा देने से चूक गए हैं तो समझदारी इसी में है कि आप अभी अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करें और ITR-U फाइल कर दें। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप अभी ITR-U फाइल नहीं करते हैं और बाद में इनकम टैक्स विभाग आपको पकड़ लेता है, तो आप पर अभी ITR-U फाइल करने के लिए लगने वाली पेनल्टी से कहीं ज्यादा बड़ी पेनल्टी लगाई जा सकती है। धारा 80C के तहत टैक्स बचाने का आखिरी मौकापुराने टैक्स सिस्टम को मानने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 31 मार्च निवेश करने का आखिरी मौका है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे विकल्पों में योगदान 31 मार्च से पहले पूरा कर लेना चाहिए। इन निवेशों में देरी करने का मतलब हो सकता है कि आप मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए कीमती टैक्स छूट से चूक जाएं। – नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले यह आवेदन कर लेना चाहिए। इससे अप्रैल 2026 से ही डिडक्टर सही दर पर TDS काट सकेंगे। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है लेकिन प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी है।– वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) का TDS रिटर्न जमा करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है। PAN कार्ड नियमों की समय सीमा31 मार्च के बाद आप सिर्फ आधार का इस्तेमाल करके PAN के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। इसलिए अगर आप कम से कम डॉक्यूमेंट्स और बिना किसी परेशानी के PAN कार्ड के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो आपको यह 31 मार्च को या उससे पहले करना होगा। उसके बाद, पैन एप्लीकेशन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, वोटर ID, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी। जरूरत पड़ने पर एफिडेविट और दूसरे सरकारी डॉक्यूमेंट्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। नियोक्ताओं को निवेश के प्रमाण जमा करनाआपको 31 मार्च 2026 की समय सीमा तक अपने नियोक्ता को अपने निवेश के प्रमाण जमा करने होंगे। इनमें मकान किराया भत्ता (HRA) के दावों के लिए किराए की रसीदें, जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान की रसीदें, ELSS निवेश विवरण, PPF पासबुक या जमा की रसीदें शामिल हैं।
Ola-Hero को टक्कर देने आ रहे VinFast के नए ई-स्कूटर, लॉन्च की तैयारी पूरी

नई दिल्ली। वियतनाम की ऑटो कंपनी VinFast अब भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने पुष्टि की है कि वह अपने तीन इलेक्ट्रिक स्कूटर Evo, Feliz और Viper को भारत में लॉन्च करेगी। ऑटोकार की रिपोर्ट के अनुसार, इन स्कूटर्स को भारतीय सड़कों और उपयोग के हिसाब से तैयार किया जाएगा, ताकि लोकल कंडीशंस में बेहतर परफॉर्मेंस मिल सके।भारत में ऐसे होगी एंट्री शुरुआती चरण में ये स्कूटर CKD यूनिट्स के रूप में भारत लाए जाएंगे और तमिलनाडु स्थित प्लांट में असेंबल किए जाएंगे। कंपनी ने राज्य सरकार के साथ MoU साइन किया है, जिसके तहत थूथुकुडी के SIPCOT इंडस्ट्रियल पार्क में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन पर अपनी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। भारतीय बाजार में इनका सीधा मुकाबला TVS iQube, Bajaj Chetak, Ola S1, Ather Rizta और Hero Vida जैसे इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से होगा। VinFast स्कूटर्स के फीचर्स Viper इस नई लाइनअप का सबसे प्रीमियम मॉडल होगा, जिसमें एडवांस डिजाइन और नई टेक्नोलॉजी दी जाएगी। इसमें LED प्रोजेक्टर हेडलैंप, स्मार्ट-की सिस्टम, व्हीकल ट्रैकिंग, रिमोट सर्च और एंटी-थेफ्ट फीचर्स मिलेंगे। इसमें 3,000W BLDC इन-हब मोटर दी गई है, जो इसे 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड तक पहुंचने में सक्षम बनाती है। Feliz भी लगभग इसी परफॉर्मेंस के साथ आएगा, जबकि Evo में 2,450W इन-हब मोटर दी जाएगी। ये दोनों मॉडल भी 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड हासिल कर सकते हैं। वहीं, Evo Lite वर्जन की स्पीड 50 किमी/घंटा से कम रखी गई है, जिससे इसे बिना ड्राइविंग लाइसेंस के चलाया जा सकता है। बैटरी और रेंज इन सभी स्कूटर्स में बैटरी स्वैप टेक्नोलॉजी दी जाएगी। सीट के नीचे दो बैटरी स्लॉट होंगे, जिनमें 1.5 kWh की LFP बैटरियां लगेंगी। दोनों बैटरियों के फुल चार्ज होने पर Evo करीब 165 किमी तक चल सकता है, जबकि Viper और Feliz लगभग 156 किमी की रेंज देने में सक्षम होंगे। खबरों के मुताबिक, कंपनी ने Evo सीरीज के लिए एडवांस बुकिंग भी शुरू कर दी है, जिससे शुरुआती ग्राहकों को खास लाभ मिलने की संभावना है।
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1700 अंक लुढ़का, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। दो दिनों की तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी सेगमेंट में भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1690 अंक यानी 2.25% गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 486 अंक या 2.09% टूटकर 22,819 पर आ गया। वहीं, निफ्टी बैंक 1433 अंक गिरकर 52,274 पर क्लोज हुआ। इस गिरावट की बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर 10 दिनों तक हमला न करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाने की घोषणा की है, फिर भी बाजार में नकारात्मक असर बना हुआ है।टॉप शेयरों में बड़ी गिरावट बीएसई के टॉप 30 शेयरों में एयरटेल, टीसीएस और पावरग्रिड को छोड़कर बाकी 27 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव रिलायंस इंडस्ट्रीज पर रहा, जिसके शेयर 4.60% गिरकर 1347 रुपये पर आ गए। इसके अलावा इंडिगो, बजाज फाइनेंस और एसबीआई में करीब 4% की गिरावट देखने को मिली, जबकि अन्य कई शेयर 2% से अधिक टूटे। निवेशकों को भारी नुकसान बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 431 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 422 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह निवेशकों को करीब 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। गिरावट के प्रमुख कारण मुनाफावसूली का दबाव: पिछले दो सत्रों में करीब 3.5% की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट रही। स्मॉल और मिडकैप शेयरों में करीब 1.7% की गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ के शेयर 1-3% तक गिरे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया। जियो-पॉलिटिकल तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है। ट्रंप के बयान के बावजूद बाजार इस अनिश्चितता को नकारात्मक रूप में ले रहा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा। कच्चे तेल की कीमतें: शुक्रवार को कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ गया। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: भारतीय रुपया 94 प्रति डॉलर के पार चला गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंता ने आयात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है।VIX में उछाल: बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया VIX करीब 9% बढ़कर 28 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में और गिरावट की आशंका को दर्शाता है।
भारत में अदाणी पोर्ट्स का नया कदम: पोर्ट ऑफ रिफ्यूज शुरू, समुद्री सुरक्षा मजबूत

नई दिल्ली। भारत ने अब तक लंबे समय से महसूस की जा रही समुद्री आपातकालीन क्षमता की कमी को दूर करते हुए पहला पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (POR) शुरू कर दिया है। इस पहल से संकट में फंसे जहाजों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और जीवन, माल और तटीय पर्यावरण की सुरक्षा मजबूत होगी। यह कदम अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) द्वारा उठाया गया है और इसे एसएमआईटी साल्वेज, रॉयल बोस्कालिस वेस्टमिंस्टर एनवी और समुद्री आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र (MERC) के सहयोग से संचालित किया जाएगा। पोर्ट ऑफ रिफ्यूज का महत्वअंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, पोर्ट ऑफ रिफ्यूज वह स्थान होता है जहां जहाज संकट की स्थिति में स्थिर होकर जीवन बचाने, माल की सुरक्षा करने और पर्यावरणीय नुकसान कम करने के लिए आश्रय ले सकते हैं। विश्व की प्रमुख समुद्री अर्थव्यवस्थाओं में यह सुविधा आम है, लेकिन भारत ने अब तक औपचारिक रूप से ऐसा कोई ढांचा स्थापित नहीं किया था। भारत की तटरेखा और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर असरAPSEZ भारत की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती एकीकृत परिवहन कंपनी है, जो देश के बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत संभालती है। CEO अश्वनी गुप्ता ने कहा, “समर्पित POR स्थापित करके हम भारत की समुद्री तैयारियों को अपग्रेड कर रहे हैं और विश्व स्तरीय तटीय सुरक्षा के लिए नया मानदंड स्थापित कर रहे हैं। यह कदम जीवन और समुद्री अर्थव्यवस्था की सुरक्षा में महत्वपूर्ण है।” दो प्रमुख बंदरगाह होंगे POR के रूप मेंAPSEZ ने दो स्थलों को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज के रूप में नामित किया है: दिघी बंदरगाह (पश्चिमी तट): अरब सागर और फारस की खाड़ी की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात को सुविधा देगा।गोपालपुर बंदरगाह (पूर्वी तट): बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्गों पर जहाजों को सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इन पोर्ट्स में विशेष उपकरण और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया टीमें होंगी जो बचाव, जहाज मलबा हटाने, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन समन्वय जैसी सेवाएं प्रदान करेंगी। विशेषज्ञों की टिप्पणियांशिपिंग के डायरेक्टर जनरल श्याम जगन्नाथन ने कहा, “मानकीकृत POR फ्रेमवर्क से समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान अधिक समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई संभव होगी। इससे जीवन, माल और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”एसएमआईटी साल्वेज के MD रिचर्ड जानसेन ने कहा, “किसी दुर्घटनाग्रस्त जहाज को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज प्रदान करना बचाव अभियान में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के प्रमुख शिपिंग मार्गों पर तेज़, सुरक्षित और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” वैश्विक मानक और सुरक्षायह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलनों के अनुरूप है और सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शिपिंग कॉरिडोर में भारत की भूमिका को मजबूत करती है। इससे भारत समुद्री सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पर्यावरणीय प्रबंधन के वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम बढ़ा रहा है।
पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: पेट्रोल 10 रुपये सस्ता, डीजल पर जीरो एक्साइज ड्यूटी, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फ्यूल संकट के बीच आम जनता को राहत दी है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये कर दी गई है, जबकि डीजल पर पूरी तरह जीरो कर दिया गया है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग 10 रुपये प्रति लीटर तक कम हो गई हैं। आज के डीजल-पेट्रोल के रेटदिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 / लीटर, डीजल ₹87.67 / लीटरनोएडा: पेट्रोल ₹94.85 / लीटर, डीजल ₹87.98 / लीटरमुंबई: पेट्रोल ₹103.54 / लीटर, डीजल ₹90.03 / लीटर राज्यों का वैट अलग से लागू होगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के बाद पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। शहरवार सबसे सस्ता फ्यूलपोर्ट ब्लेयर: ₹82.46 / लीटरईटानगर: ₹90.87 / लीटरसिलवासा: ₹92.37 / लीटर सबसे सस्ता डीजलपोर्ट ब्लेयर: ₹78.05 / लीटरइटानगर: ₹80.38 / लीटरजम्मू: ₹81.32 / लीटरवैश्विक तेल संकट और कीमतें ब्रेंट क्रूड आज $107.10 और WTI क्रूड $93.73 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं। ईरान-इजरायल-अमेरिका के तनाव के बीच भी भारत सरकार ने घरेलू कीमतों में राहत दी है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट27 मार्च 2026 को भारत में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बुलियन बाजार की कमजोरी, मजबूत अमेरिकी डॉलर और उच्च ट्रेजरी यील्ड के कारण सोना और चांदी सस्ते हुए हैं। सोने की कीमतें (10 ग्राम के लिए)शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेटदिल्ली ₹1,44,690 ₹1,32,640 ₹10,855मुंबई ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840चेन्नई ₹1,45,630 ₹1,33,490 ₹11,134बैंगलोर ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840कोलकाता ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840हैदराबाद ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840 पंपों पर भीड़ और मांग में इजाफाऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने बताया कि पिछले दो दिनों में फ्यूल की मांग 15% बढ़ी है। कुछ जगहों पर बिक्री औसत से 50% तक अधिक रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के बाद लोग पंपों पर भीड़ जुटा रहे हैं।
पेट्रोल और डीजल पर नियंत्रण: एक्साइज कटौती से युद्ध के समय उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी के फैसले को आम जनता ने सराहते हुए कहा कि इससे युद्ध के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी।राजकोट के अवि मकवाना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी कम करना एक अच्छा फैसला है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी और यह छोटे व्यापारियों के भी बड़ी राहत है, क्योंकि ईंधन की कीमत में बदलाव का सीधा असर व्यापार पर पड़ता है। वहीं, केयूर अनोरकट ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के युद्ध के कारण पूरी दुनिया में पेट्रोल,डीजल और गैस की भारी कम हो गई है। हाल ही में पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल के दाम में भारी वृद्धि देखी गई है। वहीं, मोदी सरकार ने महंगाई को काबू में रखने के लिए पेट्रोल और डीजल में 10-10 रुपए एक्साइज ड्यूटी को कम किया है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी। संगरूर में पंजाब पेट्रोलियम एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विनोद बंसल ने आईएएनएस से कहा कि सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को 10-10 रुपए घटाया गया है। इससे आम जनता के लिए कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह तेल कंपनियों के लिए बड़ी राहत है और इससे नुकसान में कुछ हद तक कमी करने में मदद मिलेगी और युद्ध के कारण जो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़नी थी, उसे टाला जा सकेगा। उन्होंने आगे बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। ऊपर से लगातार आपूर्ति जारी है। सुखदीप सिंह ने कहा कि सरकार का एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला एक अच्छा फैसला है और इससे आम जनता को किसी न किसी रूप में इसका लाभ होगा। इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी से उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है। इससे उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी। इससे पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो कि पहले 13 रुपए प्रति लीटर थी। डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम होकर शून्य हो गई है, जो कि पहले 10 रुपए प्रति लीटर थी। वित्त मंत्री ने पोस्ट में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत में उतार-चढ़ाव से बचाया जाए।