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PACKAGED FOOD INIDA : रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी

  PACKAGED FOOD INIDA : नई दिल्ली। भारत का पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है। कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2030 तक करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में लगभग 100 अरब डॉलर के आसपास है। इस तेजी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ क्विक कॉमर्स का माना जा रहा है, जिसने फार्मासिस्ट की खरीदारी की आदत को पूरी तरह बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब क्विक कॉमर्स केवल ‘लास्ट मिनट’ बिजनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की खरीदारी का अहम हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक कॉमर्स बिजनेस का सकल व्यापार मूल्य (GMV) 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर के पार जा सकता है। इसका मुख्य कारण है तेजी से डिलीवरी, सुविधा और बार-बार खरीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति। आज के समय में 10-15 मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड फार्मासिस्ट को आकर्षित कर रहा है, जिससे ऑन-डिमांड खपत तेजी से बढ़ रही है। देश के 250 से ज़्यादा शहरों में 5 करोड़ से ज़्यादा मासिक कमाने वालों के साथ, इस दूध की पैकेज्ड फ़ूड मार्केट में भी 2030 तक 4 प्रतिशत से बढ़कर 15-20 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। बदले हुए लाइफस्टाइल और हेल्थ ट्रेंड्स से जहाँ मांग रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बदले हुए लाइफस्टाइल और कंज्यूमर रहने वालों ने इस बढ़ोतरी को और गति दी है। खासकर युवा वर्ग अब प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और मोटापे से जूझने वालों की ओर तेज़ी से झुक रहा है। पैकेज्ड फ़ूड में ‘क्लीन लेबल’ और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, छोटे परिवार, व्यस्त लाइफस्टाइल और समय की कमी के चलते रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट दूध भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मृगांक गुटगुटिया ने इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्विक कॉमर्स अब एक ‘संरचनात्मक शक्ति’ के रूप में उभर रहा है, जो न केवल डिस्ट्रीब्यूशन बल्कि प्रोडक्ट बढ़ाना, कैटेगरी स्ट्रेटेजी और निवेश को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनियां अब उपभोक्ता की तत्काल आमदनी और हेल्थ ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं। स्वास्थ्य पर केंद्रित पेय पदार्थों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। चीजों पर प्रोटीन आधारित ड्रिंक्स और पैकेटबंद नारियल पानी जैसे विकल्पों को उपभोक्ता पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, क्विक कॉमर्स और बदले हुए उपभोक्ता आदत का मेल भारत के पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट को नई मजबूती तक पहुंचाने के लिए तैयार है।

RBI ने दिया भरोसा, HDFC Bank की फाइनेंशियल हेल्थ मजबूत, ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शुमार HDFC Bank को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने स्पष्ट शब्दों में भरोसा जताया है कि बैंक पूरी तरह से मजबूत स्थिति में है। गुरुवार को जारी बयान में केंद्रीय बैंक ने कहा कि एचडीएफसी बैंक एक ‘घरेलू स्तर पर प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक’ (D-SIB) है, जिसका मतलब है कि यह देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद अहम है। ऐसे में इसकी स्थिरता पर लगातार नजर रखी जाती है। आरबीआई के मुताबिक, बैंक के पास पर्याप्त पूंजी, मजबूत बैलेंस शीट और भरपूर तरलता मौजूद है, जिससे किसी भी तरह की तात्कालिक वित्तीय चिंता की गुंजाइश नहीं बनती। यह बयान ऐसे समय आया है जब बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty ने ‘नैतिक मतभेद’ का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद बाजार में हलचल देखी गई और बैंक के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया कि उसने बैंक के हालिया घटनाक्रमों का संज्ञान लिया है और अपने नियमित मूल्यांकन में उसे बैंक के संचालन या प्रशासन में कोई गंभीर खामी नजर नहीं आई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह बैंक के बोर्ड और प्रबंधन के साथ आगे की रणनीति को लेकर लगातार संपर्क में है, जिससे पारदर्शिता और स्थिरता बनी रहे। अंतरिम चेयरमैन की नियुक्ति को मंजूरी, निवेशकों को दिया भरोसाइसी बीच आरबीआई ने बैंक के अनुरोध पर Keki Mistry को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम संक्रमण काल को सुचारू रूप से संभालने के लिए उठाया गया है। केकी मिस्त्री, जो बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत में एक अनुभवी नाम हैं, ने पद संभालने के बाद निवेशकों और विश्लेषकों को भरोसा दिलाया कि बैंक के अंदर कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह जिम्मेदारी उनके मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होती, तो वह इसे स्वीकार नहीं करते, खासकर 71 वर्ष की आयु में। कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान मिस्त्री ने यह भी संकेत दिया कि आरबीआई का तेजी से उनकी नियुक्ति को मंजूरी देना इस बात का प्रमाण है कि केंद्रीय बैंक बैंक के मौजूदा संचालन से संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि बैंक का प्रबंधन पूरी तरह पेशेवर है और सभी प्रक्रियाएं नियामकीय मानकों के अनुरूप चल रही हैं। बाजार में आई अस्थायी गिरावट को उन्होंने सामान्य प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर, आरबीआई और बैंक प्रबंधन दोनों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि एचडीएफसी बैंक की नींव मजबूत है और भविष्य को लेकर कोई बड़ा जोखिम फिलहाल नजर नहीं आता।

‘मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप’-Keki Mistry ने संभाली HDFC Bank की कमान, RBI की मंजूरी

नई दिल्ली।  देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank में अहम बदलाव देखने को मिला है। अनुभवी बैंकर केकी मिस्त्री को बैंक का अंतरिम अंतरिम डिपॉजिटरी नियुक्त किया गया है। Reserve Bank of India (RBI) ने उनकी नियुक्ति को 19 मार्च से तीन महीने की अवधि के लिए मंजूरी दे दी है। यह फैसला पूर्व डिपॉजिटरी अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद तेजी से लिया गया। ‘मूल्यों से समझौता नहीं’, मिस्त्री का स्पष्ट संदेशअपनी नियुक्ति के बाद केकी मिस्त्री ने कहा कि वे यह जिम्मेदारी केवल इसलिए स्वीकार करते हैं क्योंकि यह उनके व्यक्तिगत मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने साफ कहा कि यदि यह भूमिका उनके सिद्धांतों के खिलाफ होती, तो वह इसे कभी स्वीकार नहीं करते। 71 वर्षीय मिस्त्री का यह बयान बैंकिंग जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। तेजी से हुए फैसले, RBI का भरोसा निरंतरमिस्त्री ने बताया कि अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद घटना काफी तेजी से आगे बढ़ी। बोर्ड की तत्काल बैठक हुई और निदेशकों ने Reserve Bank of India से बैठक की। RBI द्वारा इतनी जल्दी मंज़ूरी मिलने की बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक को एचडीएफसी बैंक की फ़ाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्थिति पर पूरा भरोसा है। RBI ने भी साफ़ किया है कि बैंक के ऑपरेशन या गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है। बैंक की कैपिटल स्थिति मज़बूत है और मैनेजमेंट करने में सक्षम तरीकों से काम कर रहा है। बाज़ार में असर: नतीजों में गिरावटहालांकि इस वजह से बदलाव का असर शेयर बाज़ार पर देखने को मिला। HDFC Bank शेयर में गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखने जाने तक NSE पर शेयर करीब 3.77% घटकर 811.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि इंटर-डे में यह 8.40% से ज़्यादा गिरकर 770 रुपये तक पहुँच गया था। त्याग के पीछे ‘नैतिक मतभेद’अतनु चक्रवर्ती ने अपने त्याग में ‘व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मतभेदों’ को वजह बताया था। बैंक ने भी साफ़ किया कि उनके त्याग के पीछे कोई और वजह नहीं है। बोर्ड ने उनके योगदान की तारीफ़ करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। आगे की राह: स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौतीअब केकी मिस्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक की स्थिरता बनाए रखना और बैंकों का भरोसा कायम रखना होगा। तीन महीने के इस इंतज़ाम कार्यकाल में बैंक के गवर्नेंस और संचालन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

पावर सेक्टर में बड़ी उपलब्धि, भारत की क्षमता 520 GW पार; बिजली संकट हुआ कम

नई दिल्ली। भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता को जनवरी 2026 तक 520.51 गीगावाट तक पहुंचा दिया है। यह न सिर्फ देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूत करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां वित्त वर्ष 2014 में बिजली की कमी 4.2 प्रतिशत थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर महज 0.03 प्रतिशत रह गई है-जो ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार का संकेत है। रिकॉर्ड बढ़ोतरी: एक साल में 52 गीगावाट से ज्यादा की छलांगवित्त वर्ष 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान देश की ऊर्जा क्षमता में 52.53 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जो अब तक किसी एक वर्ष में सबसे ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल बढ़ोतरी में 39.65 गीगावाट हिस्सा रिन्यूएबल सेक्टर से आया, जिसमें सोलर ऊर्जा ने 34.95 गीगावाट और पवन ऊर्जा ने 4.61 गीगावाट का योगदान दिया। इससे पहले 2024-25 में 34.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई थी, यानी इस साल की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही। यह साफ दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल मंच पर भारत: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026ऊर्जा क्षेत्र में इन उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए Bharat Electricity Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली के Yashobhoomi Convention Centre में 19 से 22 मार्च के बीच किया जा रहा है। यह सम्मेलन पावर और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है। सिर्फ उत्पादन नहीं, ट्रांसमिशन नेटवर्क भी हुआ मजबूतसरकार ने केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। नए सबस्टेशन, अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर और हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए गए हैं, जिससे बिजली को उत्पादन केंद्र से उपभोक्ताओं तक तेजी और दक्षता से पहुंचाया जा सके। भारत का नेशनल पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर (CKM) से ज्यादा का हो चुका है, जबकि ट्रांसफॉरमेशन क्षमता 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) तक पहुंच गई है। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ी है और अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का बेहतर एकीकरण संभव हुआ है। भविष्य के लिए मजबूत नींवऊर्जा क्षेत्र में यह प्रगति सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर की गई है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, उद्योगों के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते चलन को देखते हुए यह क्षमता देश को लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी।

टेक्नोलॉजी की मार! HSBC में हजारों कर्मचारियों पर संकट, AI से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। दुनिया के बड़े बैंकों में शामिल HSBC अब अपने काम को तेज, सटीक और कम खर्चीला बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (उपयोग) का सहारा लेने जा रहा है। इसी रणनीति के तहत बैंक आने वाले सालों में कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कटौती पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से करीब 20,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो बैंक के कुल वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। हालांकि, अगर इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और चर्चा शुरुआती स्तर पर है। कौन सी नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं?जनक के अनुसार, दिशानिर्देशों का सबसे ज्यादा असर उन पदों पर पड़ेगा जो सीधे ग्राहकों से जुड़े नहीं हैं। यानी मिडिल और बैक-ऑफिस से जुड़े कार्य जैसे डेटा प्रोसेसिंग, रिपोर्टिंग और ऑपरेशनल सपोर्ट अब धीरे-धीरे मशीनों और ऑटोमेशन से बदले जा सकते हैं। बैंक यह भी विचार कर रहा है कि जिन पदों पर कर्मचारी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं, क्या उन्हें दोबारा भरा जाए या नहीं। CEO की रणनीति: कम लागत, ज़्यादा दक्षताजॉर्जेस एल्हेडरी के नेतृत्व में बैंक ने 2024 से ही बड़े लक्ष्यों की शुरुआत कर दी है। इसमें पहले ही हज़ारों कर्मचारियों की तैनाती, कुछ बिज़नेस यूनिट्स का विलय या बंद करना और लागत कम करने के उपाय शामिल हैं। 2025 के अंत तक बैंक में करीब 2.10 लाख कर्मचारी थे, लेकिन अब टेक्नोलॉजी के सहारे इस संख्या को कम करने की रणनीति बनाई जा रही है। ग्लोबल ट्रेंड: सिर्फ़ HSBC ही नहीं, पूरी इंडस्ट्री प्रभावितयह बदलाव सिर्फ़ एक बैंक तक सीमित नहीं है। पूरी ग्लोबल बैंकिंग इंडस्ट्री में आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन तेज़ी से जगह बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 3 से 5 सालों में वैश्विक के बैंक मिलकर करीब 2 लाख नौकरियां खत्म कर सकते हैं। तकनीकी क्षमताओं का बढ़ना है कि कुल वर्कफोर्स में औसत 3 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इस कड़ी में बड़ी टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म भी लागत नियंत्रण और आधुनिकीकरण इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर उन्नयन की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों में 20 प्रतिशत तक कटौती कर सकती है। कर्मचारियों के लिए चेतावनी या अवसर?दिशानिर्देशों के इस बढ़ते प्रभाव को केवल खतरे के रूप में नहीं देखा जा सकता। दिशानिर्देशों का असर है कि जहां कुछ पारंपरिक नौकरियां खत्म होंगी, वहीं नई तकनीकी और दिशानिर्देशों आधारित भूमिकाएं भी तेजी से पैदा होंगी। ऐसे में कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी स्किल्स को बढ़ाएं और क्रमिक टेक्नोलॉजी के साथ खुद को ढालें।

ग्लोबल तनाव का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स लुढ़का और निवेशकों को बड़ा झटका

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई देने लगा है। लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे भारतीयों को तगड़ा झटका लगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने घरेलू बाजार की धार कमजोर कर दी। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत नीतियों में कोई बदलाव न करने से भी भारतीयों की धारणा प्रभावित हुई। सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, भारतीयों के डूबे लाखों करोड़कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 3.26 प्रतिशत यानी 2,496.89 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,207.24 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया। दिन के दौरान बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 73,950 के निचले स्तर तक फिसल गया। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर इक्विटी की कैपिटल पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहा। 438 लाख करोड़ से गिरकर लगभग 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट इक्विटी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई। हर सेक्टर लाल निशान में, ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावितगुरुवार का कारोबार लगभग सभी सेक्टर के लिए नुकसानदायक रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा 4.25% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, आईटी और मेटल सेक्टर में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहा। निफ्टी 50 के लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सिर्फ ONGC ने 1.55% की बढ़त के साथ बाजार में बढ़त दिखाई, जिसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा। क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? समझिए कारणबाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक अनिश्चितता कच्चे तेल की हालत में तेज उछाल फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती की धमकी विदेशी इंजीनियरों की बिकवाली विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आगे क्या? इंजीनियरों के लिए संकेतविशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में सावधानी गन्ने की जरूरत है। लंबी अवधि के इंजीनियरों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की हालत और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा

यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस, Ashwini Vaishnaw ने बताया QR कोड से रोकी जाएंगी अनधिकृत सेवाएं

नई दिल्ली।  ट्रेन यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित निर्देशिका सुविधा देने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि अनधिकृत वेंडिंग सेवाओं पर रोक लगाने के लिए अब QR कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू की जा रही है। इससे यात्रियों तक केवल सत्यापित (वेरिफाइड) विक्रेताओं की सेवाएं ही पहुंच पाएंगी। QR कोड ID से होगी विक्रेताओं की पहचानरेलवे ने ट्रेनों में काम करने वाले हर अधिकृत विक्रेता, सहायक और कर्मचारियों के लिए QR कोड वाले ID कार्ड अनिवार्य कर दिए हैं। इससे यात्रियों और अधिकारियों को तुरंत यह पता चल जाएगा कि कौन विक्रेता अधिकृत है और कौन नहीं। यह कदम सामानों पर फर्जी विक्रेताओं की समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है। डिजिटल ट्रैकिंग से सुधरेगी खाने की क्वालिटीअब रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले फूड पैकेट्स को भी डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाना कहां तैयार हुआ, कैसे पहुंचाया और उसकी क्वालिटी कैसी है। इससे विक्रेताओं और यात्रियों को सुरक्षित भोजन मिलेगा। बेस किचन में आधुनिक सुविधाएं और निगरानीखाने की क्वालिटी सुधारने के लिए रेलवे ने कई अहम कदम उठाए हैं आधुनिक बेस किचन की स्थापना CCTV कैमरों के ज़रिए निगरानी ब्रांडेड और पिज्जा कच्चे माल का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की सेवाएं इन उपायों से खाना बनाने की पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखी जा रही है। FSSAI सर्टिफिकेशन और सख्त जांचरेलवे ने सभी कैटरिंग यूनिट्स के लिए Food Safety and Standards Authority of India का प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही नियमित रूप से फूड सैंपल की जांच की जाती है, ताकि क्वालिटी और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। थर्ड-पार्टी ऑडिट और सर्वे से निगरानीपेंट्री कार और बेस किचन की सफाई और क्वालिटी जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा यात्रियों से फायदा लेने के लिए ग्राहक संतुष्टि सर्वे भी किए जा रहे हैं, जिससे सेवाओं में लगातार सुधार किया जा सके। कर्मचारियों को मिल रहा ट्रेनिंगबेहतर ग्राहक सेवा सुनिश्चित करने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन द्वारा निर्देशिका कर्मचारियों को नियमित ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे उनके कौशल में सुधार हो रहा है और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल रहा है। यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?इन सभी पैदल चलने वालों के बाद ट्रेन में मिलने वाला खाना अब ज्यादा सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद होगा। साथ ही फर्जी वेंडर्स की समस्या भी काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

किसानों के खाते में बड़ी राहत, PM-Kisan Yojana की कुल राशि 4.27 लाख करोड़ के पार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi ने किसानों को आर्थिक मजबूती देने में नया मुकाम हासिल कर लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत अब तक 4.27 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। हाल ही में Narendra Modi द्वारा जारी 22वीं किस्त ने इस आंकड़े को और आगे बढ़ा दिया है। 22वीं किस्त से 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को राहतइस महीने जारी की गई 22वीं किस्त के तहत 18,640 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई, जिससे 9.32 करोड़ से ज्यादा किसानों को सीधा लाभ मिला। इनमें करीब 2.15 करोड़ महिला किसान भी शामिल हैं, जो इस योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजनाओं में शामि पीएम-किसान आज दुनिया की सबसे बड़ी Direct Benefit Transfer आधारित योजनाओं में गिनी जाती है। आधार-आधारित सत्यापन और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि सहायता सीधे सही लाभार्थी तक पहुंचे। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो गई है। किसानों की आय बढ़ाने में मददगारNITI Aayog और International Food Policy Research Institute के आकलन के अनुसार, इस योजना ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी कर्ज पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाई है। समय पर मिलने वाली सहायता से किसान बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों में निवेश कर पा रहे हैं। जमीनी स्तर पर दिख रहा असरदेश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। केरल की किसान भामिनी के मुताबिक, समय पर मिलने वाली राशि से वह अपनी खेती को बेहतर बना पा रही हैं। अंडमान-निकोबार के किसान अनिल हलदार ने इस मदद से तरबूज की खेती शुरू कर फसल विविधता बढ़ाई। वहीं जम्मू-कश्मीर के किसान दीपक सिंह नेगी इस राशि से खेती के जरूरी इनपुट खरीदकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों सुधार रहे हैं। बजट में भी मिला बड़ा समर्थनसरकार ने किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे साफ है कि सरकार इस योजना को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। क्या है पीएम-किसान योजना? 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो 2,000 रुपए की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

MSME सेक्टर को बड़ा बूस्ट: FTA से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारतीय उद्योगों की पकड़

नई दिल्ली। भारत के लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के लिए हाल के मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी बड़े अवसर से कम नहीं हैं। खगेन मुर्मू ने गुरुवार को कहा कि सरकार की एफटीए नीति और डिजिटलीकरण पर बढ़ता फोकस छोटे उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बना रहा है। एसोचैम द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल एसएमई कॉन्क्लेव’ में उन्होंने इसे एमएसएमई सेक्टर के लिए “गेमचेंजर” बताया। एमएसएमई-ऑस्ट्रेलिया जैसे व्यवसायों से खुला निर्यात का रास्ता मुर्मू ने विदेशों पर संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए एफटीए और यूरोपीय संघ के साथ खोए व्यवसायों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन व्यवसायों के जरिए भारतीय उत्पादों को शून्य या बहुत कम टैरिफ पर विदेशी बाजारों तक पहुंच मिल रही है। इसका सीधा फायदा वस्त्र, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर को मिल रहा है, जहां भारतीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा बन रहे हैं। निर्यात में एमएसएमई की बड़ी गतिविधियांभारत के कुल निर्यात में एमएसएमई सेक्टर का योगदान लगभग 45-48 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बताता है कि छोटे उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मुर्मु ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि ये उद्यम केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनें। डिजिटलीकरण बना विकास का नया इंजनविशेषज्ञों के अनुसार, MSME सेक्टर के अगले विकास चरण में डिजिटलीकरण एक्टिव भूमिका निभाएगा। पद्मा जायसवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाएं भारतीय MSME के ​​लिए 500 अरब डॉलर तक के नए बाजार अवसर खोल सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के निर्यात और GDP में डिजिटल सेवाओं का योगदान करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। GeM और डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधा बाजार कनेक्शनसरकार के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस और उद्यम पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म छोटे उद्योगों को सीधे मनरेगा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और छोटे उद्योगों को बेहतर कीमत और बाजार मिल रहा है। हालांकि, विश्लेषकों ने यह भी माना कि इन प्लेटफॉर्म के बारे में जागरूकता और कौशल विकास बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा छोटे उद्योग इसका लाभ उठा सकें। वैश्विक सप्लायर बनने की दिशा में भारतसम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि भारत का लक्ष्य अब केवल उत्पादन करना नहीं, बल्कि वैश्विक उपलब्धता चेन में मजबूत स्थान बनाना है। एफटीए और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना

नई दिल्ली। हाईवे (Highway) पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार (Government) ने FASTag Rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम (New Strict Rule) लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा। 72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्जनए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी। क्यों लाए गए ये नए नियम?सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है। टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तयसिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है। क्या है ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’?संशोधित नियमों में ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी। ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस ‘वाहन’ से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके। FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाहFASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।