Chambalkichugli.com

बढ़ती तेल की कीमतों का इंडिगो के मुनाफे पर होगा असर, छोटी बुकिंग साइकिल से लागत पास करने में मिलेगी मदद : रिपोर्ट

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण बजट एयरलाइन इंडिगो के मुनाफे पर नजदीकी अवधि में दबाव देखने को मिल सकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। मूडीज रेटिंग्स ने रिपोर्ट में कहा कि छोटी अवधि में ऊंची तेल की कीमतों से मार्जिन पर दबाव देखने को मिलेगा। हालांकि, टिकट बुकिंग साइकिल 30-45 दिन की होने के चलते समय के साथ बढ़ी हुई लागत पास करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया कि इंडिगो ईंधन की कीमतों को हेज नहीं करती है, जिससे वह अचानक से ईंधन की कीमत में आई तेजी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है। हालिया तनाव 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद बढ़ा है, जिसने पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में हवाई यात्रा को बाधित कर दिया है, कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतों को बढ़ा दिया है, और हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण एयरलाइंस को लंबे मार्ग अपनाने के लिए मजबूर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर एयरलाइनों के मुनाफे पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, लेबर के बाद ईंधन एयरलाइंस का दूसरा सबसे बड़ा खर्च है। संघर्ष के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल हो गईं, जो 2025 के औसत से लगभग 45 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी गल्फ कोस्ट रीजन में जेट ईंधन की कीमतें बढ़कर 3.50 डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गईं, जो पिछले वर्ष के औसत स्तर से लगभग 65 प्रतिशत अधिक है। हालांकि एयरलाइन की पश्चिम एशियाई मार्गों पर उड़ानें हैं – जो इसके राजस्व का लगभग 18-20 प्रतिशत हिस्सा हैं – भारत के घरेलू बाजार में इसकी मजबूत स्थिति इसे कुछ हद तक राहत प्रदान करती है। रिपोर्ट के अनुसार, एयरलाइन की घरेलू विमानन बाजार में लगभग 64 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका लगभग तीन-चौथाई राजस्व घरेलू परिचालन से प्राप्त होता है। मूडीज ने बताया कि इंडिगो ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के बीच वैकल्पिक उड़ान मार्गों का उपयोग करके कुछ यूरोपीय मार्गों पर उड़ानें फिर से शुरू करने का प्रयास किया है, हालांकि अभी तक उसे सीमित सफलता ही मिली है। मध्यम अवधि में, यदि व्यवधान जारी रहते हैं तो एयरलाइन के पास घरेलू मार्गों पर विमानों को फिर से तैनात करने या दक्षिण पूर्व एशिया में परिचालन का विस्तार करने की लचीलता बनी हुई है। हालांकि, मूडीज ने चेतावनी दी है कि इंडिगो को ईंधन की बढ़ती लागत, मार्गों में बदलाव के कारण उड़ान की अवधि में वृद्धि और रुपए के कमजोर होने से उत्पन्न विदेशी मुद्रा अस्थिरता का सामना करना जारी रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, जेट ईंधन की कीमतों में प्रत्येक 1 डॉलर की वृद्धि से इसके मासिक ईंधन खर्च में लगभग 20-25 करोड़ रुपए की वृद्धि होती है।

BSE Sensex और Nifty 50 सपाट, सीमित दायरे में कारोबार कर रहा बाजार

नई दिल्ली। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआत से ही हल्की उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दिन चढ़ने के साथ बाजार सीमित दायरे में सिमट गया। दोपहर 12:30 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 24 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 75,478 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 13 अंक कमजोर होकर 23,394 के स्तर पर था। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,324.73 का निचला स्तर और 76,014 का ऊपरी स्तर जारी किया, वहीं निफ्टी 23,346 से 23,577 के बीच घूम रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी लिमिटेड दायराबाजार की यह सुस्ती केवल लार्जकैप तक लिमिटेड नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी लिमिटेड हलचल देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 92 अंक की हल्की बढ़त के साथ 54,707 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 29 अंक 15,840 पर कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि बाजार के सभी निवेश में निवेशक बचे सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और किसी बड़े ट्रेंड का इंतजार कर रहे हैं। फेड की बैठक बना सबसे बड़ा फैक्टर बाजार के सीमित दायरे में रहने की सबसे बड़ी वजह फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक है, जो मंगलवार से शुरू या बुधवार को खत्म होगी। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर जाने वाले फैसले पर वैश्विक बाजारों की नजर टिकी हुई है। मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से और वैश्विक महंगाई की खतरों के बीच फेड का रुख बेहद अहम हो गया है। निवेशक इस फैसले से पहले बड़े निवेश से बच रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता की स्थिति बनी हुई है। कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी चिंतापश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी से देखी गई है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यदि महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है। यही कारण है कि निवेशक सतर्क हैं और बाजार में बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। एक्सपायरी और FII बिकवाली का दबावमंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर डेरिवेटिव्स बेंचों की एक्सपायरी भी है, जिसके चलते ट्रेडर्स अपनी व्यवस्था में बदलाव करते हैं। इससे बाजार में मुनाफा कम या एक दायरे में कारोबार होता है। दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाए हुए है। सोमवार को बाजार में तेजी के बावजूद एफआईआई ने 9,365.52 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। आगे की दिशा क्या होगी?एफआईआई के अनुसार, जब तक फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजे सामने नहीं आते, तब तक बाजार इसी तरह सीमित दायरे में बना रह सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी बाजार की दिशा निर्भर करेगी। कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार इस समय इंतजार और जोखिम के दौर से गुजर रहा है। BSE Sensex और Nifty 50 में बड़ी चाल तभी देखने को मिलेगी, जब वैश्विक संकेत स्पष्ट होंगे। अगर जींस के लिए धैर्य और सतर्क रणनीति ही सबसे बेहतर विकल्प मानी जा रही है।

कमर्शियल रियल एस्टेट में तेजी, 2026 में ग्रेड A ऑफिस की डिमांड मजबूत रहने के संकेत

नई दिल्ली। भारत का ऑफिस साइन रियल एस्टेट सेक्टर 2026 में मजबूती के साथ बना हुआ है। कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल ग्रेड ए ऑफिस स्पेस की मांग 70-75 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकती है, जबकि ओल्ड 60-65 मिलियन स्क्वायर फीट रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में मांग अधिक और बिक्री कम है, जिससे आने वाले समय में किराये की खेती और खाली कार्यालय स्थान घटने की संभावना है। जीसीसी ने बदली तस्वीरें, बनीं विकास के इंजनरिपोर्ट में सबसे बड़ा फोकस ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पर है, जो अब सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं बल्कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और रिसर्च के बड़े हब बन गए हैं 2026 में जीसीसी करीब 30-35 मिलियन स्क्वायर फीट लीजिंग करेगा, जो कुल मांग का 40-50% हिस्सा होगा। आईटी, बीएफएसआई, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे भारत ग्लोबल एसोसिएशन के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बन रहा है। बैंगलोर टॉप पर, सिकंदर-प्रेमी की तेज़ आख़रीरिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु 2026 में भी ऑफिस मार्केट का किंग बना रहेगा और कुल लीज व स्ट्राइक में करीब एक-तिहाई योगदान देगा। वहीं हैदराबाद और दिल्ली एनसीआर में भी 10 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग और अंकित प्रविष्टि हो सकती है। यह ट्रेंड दुकानदार है कि भारत के बड़े शहर तेजी से काउंटी हब में बदल रहे हैं। फ़्लेक्स स्पेस और REITs से सांख्यिकीविद् 2026 में फ्लेक्स (को-वर्किंग) स्पेस का योगदान भी तेजी से बढ़ा। अनुमान है कि यह 15-18 मिलियन वर्ग फुट का होगा, जो कुल भागीदारी का 20-25% होगा। साथ ही रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) आम निवेशकों की भागीदारी के माध्यम से रियल एस्टेट सेक्टर का लोकतंत्रीकरण करेगा। 2030 तक नया रिकॉर्ड, 1 रॉक स्क्वायर पार फीट रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत का ग्रेड ए ऑफिस स्टॉक 1 बेबी स्क्वायर फीट के आंकड़े पार कर जाएगा। निक्की मेहरोत्रा ​​के अनुसार, जीसीसी विस्तार, पिछलग्गू और फ्लेक्स स्पेस की क्रीआम मांग को लगातार मजबूती मिलेगी। वहीं विमल नादर का मानना ​​है कि जो डिजिटल आर्किटेक्चर और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देगा, वह भविष्य में सबसे ज्यादा सफल होगा। आगे की दिशाकुल मिलाकर 2026 भारत के ऑफिस मार्केट के लिए टर्निंग वेन्ट साबित हो सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और जीसीसी के विस्तार से यह क्षेत्र जल्द ही 100 मिलियन वर्ग फीट वार्षिक मांग के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। यह साफ संकेत है कि भारत ग्लोबल एसोसिएशन के लिए सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं, बल्कि इनोवेशन और बिजनेस का ग्लोबल हब बन रहा है।

ITR समेत ये जरूरी काम 31 मार्च से पहले निपटा लें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली। 31 मार्च तक कई वित्तीय काम निपटाने जरूरी हैं। इस डेड लाइन (Dead line) को चूकने पर बड़े आर्थिक झटके का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा पीपीएफ, निवेश के प्रूफ जमा कराने, संशोधित इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल (Income Tax Return Filing) करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य निपटाना भी जरूरी है। 1. टैक्स की बचत के लिए निवेश करने का मौकावर्तमान में दो प्रकार की टैक्स रिजीम (Tax Regime) काम कर रही हैं-पुरानी और नई इनकम टैक्स व्यवस्था। अगर टैक्सपेयर या संयुक्त हिन्दु परिवार यानी एचयूएफ पुरानी इनकम टैक्स व्यवस्था चुनता है तो वह इनकम टैक्स अधिनियम के तहत अलग-अलग धाराओं जैसे 80सी, 80डी, 80टीटीबी, 80ई, 80जी आदि के अंतर्गत विभिन्न कटौतियों का फायदा लेकर अपनी टैक्स देनदारी घटा सकता है। पुरानी इनकम टैक्स व्यवस्था चुनने वालों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 31 मार्च से पहले कर से जुड़ी बचत और निवेश का काम पूरा करना जरूरी है। 2. पीपीएफ, सुकन्या खाते में न्यूनतम राशि निवेशपीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना खाते को सक्रिय रखने के लिए वित्त वर्ष में निश्चित न्यूनतम राशि जमा करना अनिवार्य है। पीपीएफ के लिए न्यूनतम राशि 500 रुपये और सुकन्या समृद्धि खाते के लिए 250 रुपये है। 12 महीने में एक बार यह राशि जमा करना जरूरी होता है। 3. दफ्तर में निवेश के साक्ष्य जमा करनाजिन कर्मचारियों ने अपने दफ्तर में वित्त वर्ष की शुरुआत में कर बचाने वाले निवेश की जानकारी दी थी, उन्हें नियत तारीख से पहले नियोक्ता को उससे जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य जमा करने होंगे। इससे चूकने पर नियोक्ता वेतन से ज्यादा टीडीएस कटौती कर सकता है। 4. होम लोन का ब्याज प्रमाणपत्र हासिल करनाजिन लोगों ने होम लोन लिया है, उन्हें अपने बैंक से स्टेटमेंट या ब्याज का प्रमाणपत्र डाउनलोड कर लेना चाहिए। इनकम टैक्स कानून के तहत, करदाता होम लोन के ब्याज पर दो लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। मूल राशि के पुनर्भुगतान पर 1.5 लाख रुपये तक की कटौती धारा 80सी के तहत उपलब्ध है। 5. कर निर्धारण वर्ष 2021–22 की संशोधित रिटर्नकर निर्धारण वर्ष 2021–22 (वित्त वर्ष 2020-21) के लिए संशोधित रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2026 है। पहले दाखिल किए गए रिटर्न में कोई गलती है या अन्य जानकारी देना भूल गए हैं, तो संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं, जहां करदाता ने मूल या विलंबित रिटर्न में आय से जुड़ी कुछ जानकारी सही तरीके से नहीं दी थी तो संशोधित आईटीआर भर सकते हैं। 6. विदेशी आय का विवरणपिछले वित्त वर्ष 2024–25 के लिए कर योग्य विदेशी आय का विवरण, उस पर काटे गए या भुगतान किए गए टैक्स के साथ की जानकारी 31 मार्च तक देना जरूरी है। यदि रिटर्न धारा 139(1) या धारा 139(4) के तहत दाखिल किया गया है, तो विदेशी कर का दावा करने के लिए यह जरूरी है। 7. फॉर्म 12बी जमा करनाअगर आप वेतनभोगी हैं और आपने मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपनो नौकरी बदली है तो आपको अपनी पुरानी कंपनी से आय के विवरण फॉर्म 12बी में मौजूदा नियोक्ता के पास जमा करने होंगे। ऐसा इसलिए ताकि मौजूदा नियोक्ता की ओर से स्रोत पर कर कटौती की सही गणना की जा सके।

ईरान युद्ध के चलते भारतीय एयरलाइंस आर्थिक संकट में… हवाई यात्रियों पर बढ़ा बोझ

airlines नई दिल्ली। घरेलू विमान उद्योग (Domestic Aircraft Industry) पहले से ही भारत-पाक संघर्ष, एयर इंडिया विमान दुर्घटना और इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के संकट से जूझ रहा था। अब पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध भारतीय एयरलाइंस (Indian Airlines) को बड़े घाटे की ओर ले जा रहा है। भारतीय एयरलाइंस का भविष्य खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भर है, क्योंकि भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात का 51% हिस्सा सिर्फ खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई) से आता है। हवाई यात्रियों की जेब पर असरतनाव और संघर्ष का असर हवाई यात्रियों की जेब पर दिखने लगा है। इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर ने पहले 199 से 2,300 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र पहले से ही बंद है। ऐसे में पश्चिम एशिया के वैकल्पिक रास्तों में बाधा आने से यात्रा का समय और ईंधन की लागत दोनों बढ़ गए हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह ने बताया कि पश्चिम एशिया के लिए होने वाला परिचालन भारतीय विमानन उद्योग के कुल राजस्व का 15-20 फीसदी हिस्सा है। आंकड़ों से पता चलता है कि मुख्य भारतीय एयरलाइंस को वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,600 करोड़ का नुकसान हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्थिति और भी खराब थी, जब एयरलाइंस को मुख्य रूप से एटीएफ की ऊंची कीमतों और रुपये के अवमूल्यन के कारण लगभग 20 हजार करोड़ का भारी नुकसान हुआ था। वर्ष 2025 में भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात का विवरण (प्रतिशत में)खाड़ी देश – 51 फीसदी, अन्य 48 प्रतिशत– तीन देश – 1 फीसदी- इसमें अजरबैजान, जॉर्डन और तुर्किये शामिल)(स्रोत: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) टॉप-7 अंतरराष्ट्रीय रूट में पांच संघर्षरतगत 14-28 मार्च के दौरान 3,288 अंतराष्ट्रीय विमानों के शेड्यूल विश्लेषण से पता चलता है कि इंडियन एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय बिजनेस पर बहुत ज्यादा दबाव है। शीर्ष सात इंटरनेशनल रूट में से पांच दुबई, अबू धाबी और शारजाह, दोहा और जेद्दा संघर्षग्रस्त हैं। इन्हीं रूट पर इंडियन एयरलाइंस की 1,303 फ्लाइट्स या कुल इंटरनेशनल फ्लाइट्स का 40 फीसदी हिस्सा ऑपरेट होता है। एयरलाइन-वार एनालिसिस से पता चलता है कि एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट की लगभग 90 फीसदी फ्लाइट्स पश्चिम एशिया से आने-जाने के लिए शेड्यूल थीं, जबकि एयर इंडिया और इंडिगो के लिए यह हिस्सा 22-51 फीसदी था। अंतरराष्ट्रीय रूट से आने-जाने वाली शेड्यूल फ्लाइट्स की संख्या (14-28 मार्च के बीच)रूट संख्यादुबई (यूएई) 498अबुधाबी (यूएई) 256सिंगापुर 193बैंकॉक(थाइलैंड) 190शारजहां (यूएई) 188दोहा (कतर) 187जेद्दा (सऊदी अरब) 174काठमांडू (नेपाल) 141लंदन (ब्रिटेन) 111कोलंबो (श्रीलंका) 90(स्रोत – डीजीसीए) मुख्य भारतीय एयरलाइंस का नुकसान बढ़ रहापिछले साल 11 दिसंबर को संसद में शीर्ष पांच सरकारी और निजी एयरलाइंस के बारे में साझा डेटा से पता चलता है कि मुख्य भारतीय एयरलाइंस (एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर, इंडिगो और स्पाइसजेट) को वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,600 करोड़ का नुकसान हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्थिति और भी खराब थी, जब एयरलाइंस को मुख्य रूप से एटीएफ की ऊंची कीमतों और रुपये के अवमूल्यन के कारण लगभग 20 हजार करोड़ का भारी नुकसान हुआ था। मौजूदा समय में भारतीय एयरलाइंस ज्यादातर घाटे में हैं और लगातार आने वाले संकट उन्हें और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

Crude Oil के दाम आसमान पर, लागत बढ़ने से तेल कंपनियों का मुनाफा घटा… बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत!

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) आसमान छू रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में जंग शुरू होने के बाद से भारतीय रिफाइनरियों (Indian Refineries) के लिए कच्चे तेल की लागत में 93% का भारी उछाल आया है। शुक्रवार को यह कीमत 136.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जिससे इंडियन ऑयल, एचपीसीएल, बीपीसीएल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी घरेलू तेल कंपनियों के मुनाफे में भारी गिरावट आई है। लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अभी नहीं बढ़ रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, मुंबई में भी यही स्थिति। ये कीमतें आगे भी कुछ समय के लिए बनी रह सकती हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असरअमेरिका सहित कई देशों ने कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप खुदरा कीमतें बढ़ा दी हैं। अमेरिका में पेट्रोल 3.7 डॉलर प्रति गैलन है। वहीं भारत में तेल कंपनियों ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। पिछले कुछ महीनों में मुनाफा कमाने के बाद, अब इन कंपनियों को अपने मार्जिन में नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्य चुनाव बने वजह?सरकार की ओर से 31 मार्च तक कीमतों या करों में कोई बदलाव किए जाने की संभावना नहीं है, ताकि बजट लक्ष्यों के अनुरूप राजकोषीय संतुलन बनाए रखा जा सके। इसके अलावा, चार राज्यों और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के मद्देनजर, 29 अप्रैल को अंतिम चरण के मतदान तक भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के आसार कम ही हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 40% से अधिक और रूसी यूराल क्रूड में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है। 26 फरवरी को भारतीय बास्केट की कीमत 70.9 डॉलर प्रति बैरल थी। 12 मार्च को यह बढ़कर 127.2 डॉलर हो गई और शुक्रवार को 7.3% उछलकर 136.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। संकट का मुख्य कारण: होर्मुज जलडमरूमध्यभारत पिछले कई महीनों से रियायती दर पर रूसी तेल खरीदकर एक लाभदायक स्थिति में था, लेकिन अब उसकी कीमतें भी बढ़ गई हैं। इस वैश्विक कमी का सबसे बड़ा कारण ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है। भारत के लिए इसका असर और भी गंभीर है, क्योंकि देश की कुल प्रसंस्कृत ऊर्जा का 60% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से आता है। 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने के फैसले के बाद कीमतों में थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन जब तक जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती, कीमतें अस्थिर रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावआर्थिक विशेषज्ञों ने इस संकट के कारण भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, यदि कच्चा तेल एक साल तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा। इससे व्यापार संतुलन को लगभग 80 अरब डॉलर (जीडीपी का 2.1%) का भारी नुकसान हो सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान से भारत के वृहद-आर्थिक परिदृश्य पर असर पड़ेगा। कच्चे तेल की औसत कीमत में मात्र 10 डॉलर की वृद्धि से देश का चालू खाता घाटा 30-40 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने बताया कि इसका असर वैश्विक विकास पर पड़ेगा। उन्होंने रविवार को ‘X’ पर लिखा कि अगर 2026 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो वैश्विक विकास दर 0.3-0.4 प्रतिशत अंक गिर सकती है और मुख्य मुद्रास्फीति 60 बेसिस पॉइंट बढ़ सकती है।

आपूर्ति संकट की आशंका से कच्चे तेल में उछाल, Brent Crude करीब 3% चढ़ा

नई दिल्ली।  वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड करीब 2.81% की तेजी के साथ 103.03 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 2.80% बढ़कर 95.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। यह तेजी से ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजार पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और निवेशक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। होर्मुज जलदमरूमध्य बना संकट की जड़ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह फारस की खाड़ी में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के कुल कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा चढ़ता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी तरह की मौजूदगी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। मौजूदा हालात में ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई बाधित हुई है। एक महीने में 50% से ज्यादा बढ़ने का दाविशेषज्ञों के अनुसार, बीते एक महीने में कच्चे तेल की सप्लाई में 50% से ज्यादा की तेजी से दर्ज की जा चुकी है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और सप्लाई बढ़ने पर खतरा है। इस तेजी का सीधा असर वैश्विक महंगाई और ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ सकता है, जिससे कई देशों की इकोनॉमी प्रभावित होने की आशंका है। भारत ने तेज की कूटनीतिक कोशिशेंभारत ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है ताकि होर्मुज मार्ग से भारतीय जहाजों की आवाजाही बहाल हो सके। इसी कोशिश के तहत ईरान ने दो भारतीय एलपीजी जहाजों—शिवालिक और नंदा देवी-को लौटने की अनुमति दे दी है। शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर डॉक कर चुका है नंदा देवी कांडला पोर्ट पर पहुंचने वाला है इससे देश में एलपीजी सप्लाई को राहत मिलने की उम्मीद है। से भी आ रहा बड़ा बहाव इसके अलावा यूनाइटेड अरब अमीरात से भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ 80,000 टन से ज़्यादा कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है। यह खेप इस हफ़्ते भारत पहुंचने की उम्मीद है, जिससे घरेलू सप्लाई में और बढ़ोतरी होगी। एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़विश्लेषकों का दबाव है कि खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर ज़्यादा निर्भरता के कारण भारत समेत एशियाई देश इस संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऊर्जा दरों में तेज़ी से महंगाई, ट्रांसपोर्टेशन लागत और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर दबाव बढ़ सकता है। आगे क्याअगर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो कच्चे तेल की दरों में और उछाल देखने को मिल सकता है। अगर बाज़ार की नज़र पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक सप्लाई पर बनी हुई है। इस बीच, सरकारें और कंपनियां वैकल्पिक सेवाओं चेन और रणनीतियों पर काम कर रही हैं ताकि ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।

मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, मेटल और डिफेंस शेयरों में खरीदारी

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच सोना और चांदी एक बार फिर चमकने लगे हैं। फेडरल रिजर्व की अहम बैठक से पहले निवेशक सुरक्षित निवेश योग्य की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिख रहा है। मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर सोने और चांदी दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोने में सीमित दायरे में तेजी सेMCX पर 2 अप्रैल 2026 के बैठकों में सोना 1,061 रुपये (0.68%) की बढ़त के साथ करीब 1,56,797 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। व्यापार के दौरान सोने ने 1,56,649 रुपये का निचला स्तर और 1,56,996 रुपये का सर्वोच्च स्तर जारी किया। इससे साफ है कि बाजार में तेजी से तो है, लेकिन यह अभी सीमित दायरे में बनी हुई है। विश्लेषक के अनुसार, निवेशक बचे हुए बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और फेड के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। चांदी में ज्यादा तेज उछालसोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा तेजी से देखने को मिली। 5 मई 2026 के बैठकों में चांदी 3,353 रुपये (1.31%) बढ़कर 2,59,885 रुपये पर पहुंच गई। चांदी ने कारोबार के दौरान 2,58,338 रुपये का निचला स्तर और 2,61,457 रुपये का उच्चतम स्तर जारी किया। यह खुलता है कि औद्योगिक मांग और निवेश दोनों के कारण चांदी में बढ़ोतरी बनी हुई है। कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?सोने और चांदी में यह तेजी से मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक (17-18 मार्च) से पहले देखने को मिल रही है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। आम तौर पर जब ब्याज अनुमानित कम होती हैं, तो सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश योग्य की मांग बढ़ जाती है। इसी उम्मीद में निवेशक पहले से ही इन कीमतों में पोजीशन ले रहे हैं। युद्ध और कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंतावैश्विक तनाव, खासकर ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते टकराव ने भी बाजार में स्थिरता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज़्यादा की तेज़ी से दर्ज की गई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। यही वजह है कि फेड की यह बैठक भारतीयों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। आगे क्या रहेगा असर?अगर फेड ब्याज दरों को स्थिर रखता है या महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव आ सकता है। वहीं, अगर दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, तो उनकी कीमतों में और तेज़ी से देखने को मिल सकती है। अगर निवेशक सतर्क हैं और बाजार की नजर पूरी तरह फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी हुई है।

भारतीय शेयर बाजार मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला, मेटल और डिफेंस में खरीदारी

नई दिल्ली। मजबूत ग्लोबल संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 323.83 अंक या 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,826.68 और निफ्टी 84.40 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,493.20 पर था। शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी का नेतृत्व मेटल और डिफेंस शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी डिफेंस टॉप गेनर्स थे। कमोडिटीज, एनर्जी,फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और इन्फ्रा भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। दूसरी तरफ आईटी, पीएसयू बैंक, ऑयलएंडगैस, ऑटो, एफएमसीजी, सर्विसेज और रियल्टी लाल निशान में थे। सेंसेक्स पैक में इटरनल, बीईएल, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, इंडिगो, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, टाटा स्टील, एमएंडएम, पवार ग्रिड और एक्सिस बैंक गेनर्स थे। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, टीसीएस, एचयूएल, एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, एसबीआई और बजाज फिनसर्व लूजर्स थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 48 अंक या 0.08 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 54,663 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 12 अंक या 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15,822 पर था। व्यापक बाजार में भी मजबूती बनी हुई है। खबर लिखे जाने तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 51.48 प्रतिशत शेयर हरे निशान में, 43.78 लाल निशान में और 4.74 प्रतिशत बिना की बदलाव के कारोबार कर रहे थे। एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता हरे निशान में थे। केवल शंघाई का बाजार लाल निशान में था। अमेरिकी बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ था, जिसमें डाओ में 0.83 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में 1.22 प्रतिशत की तेजी थी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर जारी है। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने सोमवार तो 9,365.52 करोड़ रुपए की बिकवाली की और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 12,593.36 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।

LPG किल्लत के बाद अब दूध सप्लाई पर गहराया संकट, डेयरी सेक्टर के पास सिर्फ 10 दिन का पैकिंग स्टॉक

नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाए जाने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। मिडिल ईस्ट, जो दुनिया में तेल और गैस का बड़ा उत्पादक और सप्लायर है, इस समय युद्ध की चपेट में है। तेल और गैस रिफाइनरियों पर हमलों के कारण आयात-निर्यात का संतुलन बिगड़ गया है, जिसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। हालात को देखते हुए सरकार को सिलेंडर से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव करना पड़ा है। इसी बीच गैस की कमी का असर अब डेयरी सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। गैस संकट से दूध सप्लाई पर खतराऊर्जा संकट के चलते डेयरी उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। डेयरी संचालकों का कहना है कि एलपीजी की कमी से दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई भी बाधित हो सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो करीब 10 दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। डेयरी सेक्टर में बढ़ी चिंतादूध को सुरक्षित रखने के लिए पाश्चुरीकरण प्रक्रिया जरूरी होती है, जिसमें बड़ी मात्रा में एलपीजी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा दूध की प्लास्टिक पैकेजिंग और कार्टन तैयार करने में भी गैस का उपयोग होता है। गैस की कमी के कारण कई कंपनियां पैकेजिंग सामग्री तैयार नहीं कर पा रही हैं। महाराष्ट्र का डेयरी सेक्टर इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह के मुताबिक, उनके पास पैकेजिंग मटेरियल का स्टॉक केवल 10 दिन का बचा है। यदि जल्द ही गैस संकट खत्म नहीं हुआ तो दूध की पैकेजिंग और सप्लाई दोनों प्रभावित हो सकती हैं। क्यों पैदा हुआ संकटभारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीदता है और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात से ही पूरा करता है। 28 फरवरी को इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत और भारत के तेल-गैस आयात का लगभग 50 से 55 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इस मार्ग के बंद होने से भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और देश को अपने रिजर्व स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ रहा है। फिलहाल भारत सरकार गैस से लदे जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराने के लिए ईरान से बातचीत कर रही है। एलपीजी से लदे दो जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भारत पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य जहाजों को भी इस मार्ग से निकालने की कोशिशें जारी हैं।